देश-विदेश
विकसित भारत की दिशा में जनजातियों को सशक्त बनाना
केंद्रीय बजट 2025: जनजातीय विकास के लिए विजन को मिशन में बदलना
जनजातीय कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता: बजट आबंटन 2014-15 में 4,497.96 करोड़ रुपये से 231.83 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 14,925.81 करोड़ रुपये हो गया |
नई दिल्ली | भारत में 10.45 करोड़ से ज़्यादा अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोग रहते हैं, जो कुल आबादी का 8.6 प्रतिशत है। यह एक समृद्ध और विविधतापूर्ण आदिवासी विरासत का दावा करता है। दूरदराज और अक्सर दुर्गम क्षेत्रों में फैले ये समुदाय लंबे समय से सरकार के विकास एजेंडे का केंद्र बिंदु रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, केंद्रीय बजट 2025-26 जनजातीय मामलों के मंत्रालय के लिए बजटीय आबंटन में पर्याप्त वृद्धि के साथ इस प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जिससे देश भर में आदिवासी समुदायों का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित होता है।

अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए समग्र बजट आबंटन 2024-25 में 10,237.33 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 14,925.81 करोड़ रुपये हो गया है, जो 45.79 प्रतिशत वृद्धि प्रभावशाली है ।
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना (पीएमएएजीवाई) का विस्तार किया गया है और इसे पांच वर्षों में 80,000 करोड़ रुपये की लागत के साथ धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के अन्तर्गत शामिल किया गया है ।
जनजातीय कार्य मंत्रालय के लिए बजट लागत में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जो 2023-24 में 7,511.64 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 10,237.33 करोड़ रुपये हो गया है और अब 2025-26 में 14,925.81 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है ।
दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिलती है: 2014-15 में 4,497.96 करोड़ रुपये से बढ़कर 2021-22 में 7,411 करोड़ रुपये हो गई है , और अब 2014-15 से 231.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है , जो जनजातीय कल्याण पर सरकार के लगातार फोकस को दर्शाता है।
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) : दूरदराज के क्षेत्रों में आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए 7,088.60 करोड़ रुपये, जो विगत वर्ष के 4,748 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है ।
प्रधानमंत्री जन जातीय विकास मिशन : 152.32 करोड़ रुपये से बढ़कर 380.40 करोड़ रुपये, जिससे जनजातीय समुदायों के लिए वर्ष भर आय सृजन के अवसर सृजित करने के प्रयासों को बल मिलेगा।
प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना (पीएमएएजीवाई) : आबंटन 163 प्रतिशत बढ़कर 335.97 करोड़ रुपये हुआ, जिसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार में बुनियादी ढांचे की कमी को पूरा करना है।
प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के अंतर्गत बहुउद्देश्यीय केंद्र (एमपीसी) : वित्त पोषण को 150 करोड़ रुपये से दोगुना कर 300 करोड़ रुपये किया गया, जिससे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) बहुल बस्तियों में सामाजिक-आर्थिक सहायता में वृद्धि हुई।
पीएम-जनमन की सफलता के आधार पर, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का लक्ष्य पांच वर्षों में 79,156 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ 63,843 गांवों में बुनियादी ढांचे की कमी को पूरा करना है (केंद्रीय हिस्सा: 56,333 करोड़ रुपये, राज्य हिस्सा: 22,823 करोड़ रुपये)। यह पहल 25 लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से 17 मंत्रालयों को एक साथ लाती है, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में एकीकृत आदिवासी विकास सुनिश्चित होता है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत डीएजेजीयूए के लिए आबंटन 2025-26 में 500 करोड़ रुपये से चार गुना बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो जमीनी स्तर पर जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री, जुएल ओराम: "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, केंद्रीय बजट 2025-26 एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए समर्पित है। यह परिवर्तनकारी बजट गांवों, गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के समग्र विकास को प्राथमिकता देता है। इस ऐतिहासिक बजट को प्रस्तुत करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी का हार्दिक आभार।"
जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री, दुर्गा दास उइके: "यह बजट जनजातीय कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें शिक्षा, आजीविका और बुनियादी ढांचे में केंद्रित निवेश के साथ उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया गया है। हमारी सरकार जनजातीय सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।"
जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव, विभु नायर: "बढ़ा हुआ बजट हमें पीएम-जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, ईएमआरएस और अन्य कार्यक्रमों जैसे परिवर्तनकारी कार्यक्रमों को लागू करने में सक्षम करेगा, जो पूरे भारत में जनजातीय समुदायों के लिए दीर्घकालिक, टिकाऊ प्रभाव पैदा करेंगे।"
केंद्रीय बजट 2025 आदिवासी विकास में एक बड़ा बदलाव है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास और आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर दिया गया है। विभिन्न मंत्रालयों में लक्षित हस्तक्षेपों को एकीकृत करके, सरकार समावेशी विकास को बढ़ावा दे रही है और एक ऐसे विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त कर रही है, जहां आदिवासी समुदाय न केवल लाभार्थी हैं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदानकर्ता भी हैं ।
रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय ने भविष्य के लिए तैयार सैन्य नेतृत्व पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन किया
नई दिल्ली | कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (सीडीएम), सिकंदराबाद ने 30-31 जनवरी, 2025 को 'सैन्य रणनीतिक प्रामाणिक नेताओं का विकास (एमआईएसएएल): अवधारणाओं और रणनीतियों की पुनःकल्पना' विषय पर अपना वार्षिक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया, जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, रणनीतिक विशेषज्ञों और अग्रणी शिक्षाविदों को आधुनिक युद्ध में नेतृत्व के उभरते ढांचे का पता लगाने के लिए एक साथ लाया गया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने भाषण दिया, जिसमें विघटनकारी प्रौद्योगिकियों और जटिल भू-राजनीतिक बदलावों के युग में अनुकूली नेतृत्व की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर दिया गया।

सेमिनार का मुख्य आकर्षण 'सैन्य रणनीतिक और प्रामाणिक नेताओं के विकास के लिए रणनीति' पर सत्र था, जहां वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (सेवानिवृत्त) और लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया ने विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के प्रभाव, भू-राजनीतिक गतिशीलता में बदलाव और रणनीतिक सैन्य नेतृत्व की उभरती भूमिका पर चर्चा की। सेमिनार में नेतृत्व विकास, प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली से सबक और एकीकृत, क्रॉस-सर्विस नेतृत्व के लिए आवश्यक योग्यताओं सहित विषयों पर विभिन्न शिक्षाविदों द्वारा चर्चा की गई। वरिष्ठ दिग्गजों ने आधुनिक सैन्य चुनौतियों और भविष्य के लिए तैयार सशस्त्र बलों को आकार देने के लिए आवश्यक नेतृत्व मॉडल पर महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान की। कमांडेंट सीडीएम मेजर जनरल हर्ष छिब्बर ने बढ़ते वैश्विक संघर्षों, घटते नियंत्रण तंत्र और सशस्त्र बलों की सामाजिक-आर्थिक विविधता के मद्देनजर सैन्य नेतृत्व रणनीतियों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता को रेखांकित किया।
सेमिनार में सैन्य नेतृत्व को राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के साथ जोड़ने, सशस्त्र बलों के भीतर तकनीकी प्रगति और संरचनात्मक सुधारों का लाभ उठाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया गया। सेमिनार ने सैन्य नेतृत्व को आकार देने वाली संरचनाओं, अवधारणाओं और रणनीतियों पर गहराई से विचार करने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया और सैद्धांतिक रूपरेखाओं का पता लगाया और साथ ही सैन्य संदर्भ में वास्तविक दुनिया के अनुभवों की जांच की।
दिसंबर 1970 में स्थापित कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (सीडीएम) एक प्रमुख त्रि-सेवा संस्थान है जो वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को समकालीन प्रबंधन विचार, अवधारणाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं से लैस करने के लिए समर्पित है। पिछले कुछ वर्षों में, इसके राष्ट्रीय सेमिनारों ने रणनीतिक चुनौतियों और आत्मनिर्भरता से लेकर भू-राजनीतिक सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व परिवर्तन तक के महत्वपूर्ण विषयों को संबोधित किया है, जिससे भारत के सैन्य भविष्य को आकार देने में सीडीएम की भूमिका मजबूत हुई है।
इंडोनेशिया के जकार्ता में श्री सनातन धर्म आलयम के महा कुंभ-अभिशेखम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
भारत और इंडोनेशिया के बीच रिश्ते सिर्फ जियोपॉलिटिकल नहीं हैं, बल्कि हजारों वर्षों की साझा संस्कृति और इतिहास में निहित हैं : प्रधानमंत्री
सांस्कृतिक मूल्य, विरासत और परम्परा भारत व इंडोनेशिया के लोगों के बीच संबंधों को बढ़ा रहे हैं: प्रधानमंत्री
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडोनेशिया के जकार्ता में श्री सनातन धर्म आलयम के महा कुंभ-अभिशेखम के दौरान वीडियो संदेश के माध्यम से अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मुरुगन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पा हाशिम, मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. कोबालन, तमिलनाडु और इंडोनेशिया के गणमान्य व्यक्तियों, पुजारियों और आचार्यों, प्रवासी भारतीयों, इंडोनेशिया और अन्य देशों के सभी नागरिकों, जो इस शुभ अवसर का हिस्सा थे, और इस दिव्य-भव्य मंदिर के निर्माण को मूर्त रूप देने वाले सभी प्रतिभाशाली कलाकारों को हार्दिक बधाई दी।

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। साथ ही महामहिम राष्ट्रपति प्रबोवो की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी खास बना दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जकार्ता से व्यक्तिगत रूप से दूर होने के बावजूद, वे इस कार्यक्रम से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं, जो भारत-इंडोनेशिया के मजबूत संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रपति प्रबोवो हाल ही में 140 करोड़ भारतीयों का प्यार लेकर इंडोनेशिया आए हैं, और उनका मानना है कि उनके माध्यम से इंडोनेशिया में आप सब हर भारतीय की शुभकामनाओं को महसूस कर सकेंगे। उन्होंने जकार्ता मंदिर के महा कुंभ-अभिशेखम के अवसर पर इंडोनेशिया और दुनिया भर में भगवान मुरुगन के सभी भक्तों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने तिरुप्पुगाज़ के भजनों के माध्यम से भगवान मुरुगन की निरंतर स्तुति और स्कंद षष्ठी कवचम् के मंत्रों के माध्यम से सभी लोगों की सुरक्षा की कामना की। उन्होंने डॉ. कोबालन और उनकी टीम को मंदिर निर्माण के सपने को साकार करने में उनकी कड़ी मेहनत के लिए बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत और इंडोनेशिया के बीच रिश्ते सिर्फ जियोपॉलिटिकल नहीं हैं, बल्कि हजारों वर्षों की साझा संस्कृति और इतिहास में निहित हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध विरासत, विज्ञान, विश्वास, साझी आस्था और आध्यात्मिकता पर आधारित हैं। हमारा संबंध भगवान मुरुगन, भगवान राम और भगवान बुद्ध का भी है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जब भारत से कोई व्यक्ति इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर में जाता है, तो उसे काशी और केदारनाथ जैसी ही आध्यात्मिक अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि काकाविन और सेरात रामायण की कहानियां भारत में वाल्मीकि रामायण, कम्ब रामायण और रामचरितमानस जैसी ही भावनाएं पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के आयोध्या में भी इंडोनेशियाई रामलीला का मंचन किया जाता है। नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बाली में "ओम स्वस्ति-अस्तु" सुनने से भारतीयों को भारत में वैदिक विद्वानों के आशीर्वाद की याद आती है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बोरोबुदुर स्तूप भगवान बुद्ध की उन्हीं शिक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है जिनका अनुभव भारत में सारनाथ और बोधगया में किया जाता हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि ओडिशा में बाली यात्रा उत्सव प्राचीन समुद्री यात्राओं का उत्सव मनाता है जो कभी भारत और इंडोनेशिया को सांस्कृतिक व व्यावसायिक रूप से जोड़ती थी। उन्होंने कहा कि आज भी, जब भारतीय गरुड़ इंडोनेशिया एयरलाइंस से यात्रा करते हैं, तो उन्हें साझा सांस्कृतिक विरासत देखने को मिलती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध कई मजबूत धागों से बुने हुए हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि राष्ट्रपति प्रबोवो की हाल की भारत यात्रा के दौरान, उन्होंने इस साझी विरासत के कई पहलुओं पर बात की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जकार्ता में नया भव्य मुरुगन मंदिर सदियों पुरानी विरासत में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मंदिर आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों दोनों का नया केंद्र बनेगा।
जकार्ता के मुरुगन मंदिर में न केवल भगवान मुरुगन बल्कि कई अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा की जाती है, इस बात पर ध्यान दिलाते हुए नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा कि यह विविधता और बहुलता हमारी संस्कृति की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में विविधता की इस परंपरा को "भिन्निका तुंगगल इका" कहा जाता है, जबकि भारत में इसे "विविधता में एकता" के रूप में जाना जाता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि विविधता की यह स्वीकार्यता ही वह कारण है जिससे इंडोनेशिया और भारत दोनों में विभिन्न धर्मों के लोग इतने सद्भाव के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह शुभ दिन हमें विविधता में एकता को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
नरेंद्र मोदी ने कहा, "सांस्कृतिक मूल्य, विरासत और परम्परा भारत व इंडोनेशिया के लोगों के बीच संबंधों को बढ़ा रहे हैं।" उन्होंने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण के संयुक्त निर्णय और बोरोबुदुर बौद्ध मंदिर के लिए साझी प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अयोध्या में इंडोनेशियाई रामलीला का उल्लेख किया तथा ऐसे और अधिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मिलकर वे इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि अतीत एक स्वर्णिम भविष्य का आधार बनेगा। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो के प्रति आभार व्यक्त करते हुए और मंदिर के महा कुंभ-अभिशेखम पर सभी को बधाई देते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।
जापान के सहयोग से मध्यप्रदेश को बनाएंगे आइडियल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सफल जापान यात्रा से मध्यप्रदेश में वृहद स्तर पर निवेश की बढ़ीं प्रबल संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता कर चार दिवसीय जापान यात्रा की दी जानकारी
भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चार दिवसीय जापान यात्रा (28-31 जनवरी) पूरी कर शनिवार (1 फरवरी) की शाम स्वदेश लौट आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि यात्रा में उन्होंने जापानी निवेशकों और उद्योगपतियों को भोपाल में 24-25 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शामिल होने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जापानी कंपनियों ने मध्यप्रदेश में निवेश करने की गहरी रुचि दिखाई है और कई प्रमुख कंपनियां आगामी समिट में हिस्सा लेंगी। उन्होंने जापान के विभिन्न उद्योगपतियों, निवेशकों के साथ बिजनेस टू बिजनेस (बी-टू-बी) और जापान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट (जी-टू-जी) मुलाकात की और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से बात की।

जापान-मध्यप्रदेश औद्योगिक सहयोग फोरम की स्थापना के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली, जिससे प्रदेश में जल्द ही जापानी इंडस्ट्रियल पार्क, कौशल विकास केंद्र और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए जापान प्लस सेल की भी स्थापना की जाएगी, जो जापानी निवेशकों के साथ निरंतर संपर्क और फॉलोअप करेगी। मुख्यमंत्री ने जापान के उद्योगपतियों और निवेशकों को फरवरी में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2025) में आमंत्रित किया, जिससे निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार जापान, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में कंट्री पार्टनर के रूप में शामिल होगा। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. यादव ने बताया कि जापानी कंपनियों ने मध्यप्रदेश में मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल्स, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल (रेडिमेड गारमेन्ट्स) सेक्टर में निवेश करने की इच्छा जताई है। जापानी कंपनियों का निवेश मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक होगा। जापानी कंपनियों के सहयोग से हम प्रदेश को इन्वेस्टमेंट के लिए एक 'आइडियल डेस्टिनेशन' और 'इंडस्ट्री फ्रेंडली स्टेट' बनाने की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार उद्योगों के विकास के लिए बेहतर अधोसंरचनाएं, सरल निवेश नीतियां और निवेशकों को एक बेहद अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा रही है। उन्होंने जापानी निवेशकों को विश्वास दिलाया कि वे बेहिचक यहां निवेश करें, राज्य सरकार उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। इस सफल यात्रा से जापानी कंपनियों द्वारा मध्यप्रदेश में किया जाने वाला निवेश यहां रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और औद्योगिक विकास को गति भी देगा। जापान यात्रा मध्यप्रदेश को "निवेश का हब" बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 का आयोजन भोपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में होगा, जहां विभिन्न देशों के निवेशक और उद्योगपति भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में जापान, भारत का पांचवां सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने पिछले दो दशकों में भारत में 38 बिलियन डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 बिलियन डॉलर का है, जो निरंतर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में पहले से ही कई प्रमुख जापानी कंपनियां सफलतापूर्वक कार्यरत हैं। ब्रिजस्टोन ने पीथमपुर में अपना विश्वस्तरीय टायर उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है, जो रोजगार सृजन और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। पैनासोनिक जैसी दिग्गज कंपनी ने मध्यप्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। एनएसके, सानोह और कामात्सु जैसी जापानी कंपनियां भी प्रदेश में कार्यरत हैं, जो ऑटोमोटिव और मशीनरी क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। व्यापार के क्षेत्र में मध्य प्रदेश से जापान को होने वाला निर्यात निरंतर बढ़ रहा है। यह दोनों क्षेत्रों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टोक्यो विश्व की सबसे विकसित महानगरीय अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसका सकल घरेलू उत्पाद लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर है। युरिको कोइके के साथ हुई बैठक में शहरी विकास के नए आयामों पर चर्चा हुई। टोक्यो मेट्रोपॉलिटन गवर्नमेंट की विशेषज्ञता का लाभ मध्यप्रदेश के शहरों को मिलेगा। भोपाल और इंदौर के लिए मेट्रो रेल प्रौद्योगिकी, स्मार्ट सिटी समाधान, जल प्रबंधन और कचरा प्रबंधन में विशेष सहयोग प्राप्त होगा। टोक्यो के विकास मॉडल को मध्यप्रदेश में अपनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जापान के विदेश मंत्रालय में संसदीय उप-मंत्री हिसाशी मात्सुमोतो के साथ बैठक महत्वपूर्ण रही। विदेश मंत्रालय जापान की विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख स्तंभ है। बैठक में मध्यप्रदेश में जापानी निवेश को सुगम बनाने के लिए एक विशेष प्रयास करने पर सहमति बनी। व्यापार मिशन का आदान-प्रदान, कौशल विकास में जापानी विशेषज्ञों की भागीदारी, और एक जापान-मध्य प्रदेश औद्योगिक सहयोग फोरम की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।
उन्होंने बताया कि भूमि एवं बुनियादी ढाँचा मंत्रालय (एमएलआईटी) जापान में बुनियादी ढांचा विकास का सर्वोच्च निकाय है। इसके मंत्री यासुशी फुरुकावा के साथ बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मध्यप्रदेश में हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के विकास और लॉजिस्टिक्स में जापानी मॉडल को अपनाने पर सहमति बनी है। ग्रीन इन्फ्रॉस्ट्रक्चर में विशेष सहयोग से प्रदेश में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जापान एक्सटर्नल ट्रेड आर्गनाइजेशन (जेट्रो) के अध्यक्ष श्री सुसुमु काताओका के साथ बैठक में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष फ्रेमवर्क पर सहमति बनी। जेट्रो से अनुरोध किया गया कि मध्यप्रदेश में अपना कार्यालय स्थापित करे। जिससे जापानी कंपनियों को प्रदेश में निवेश के लिए मार्गदर्शन मिलेगा।
भारत वस्त्र और परिधानों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है : आर्थिक सर्वेक्षण
भारत ने 2023 में 34 अरब डॉलर मूल्य के वस्त्र उत्पादों का निर्यात किया: आर्थिक सर्वेक्षण
45 मिलियन से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला, वस्त्र क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों में से एक है: आर्थिक सर्वेक्षण
नई दिल्ली | वस्त्र क्षेत्र के अपने आकलन में आर्थिक समीक्षा में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि भारत विश्व स्तर पर वस्त्र और परिधान का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद, औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह क्षेत्र सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाले क्षेत्रों में से एक है, जिसमें 45 मिलियन से ज़्यादा लोग सीधे तौर पर रोज़गार पाते हैं, जिनमें कई महिलाएँ और ग्रामीण आबादी शामिल है। इस क्षेत्र की समावेशी प्रकृति के एक और सबूत के तौर पर, इसकी लगभग 80% क्षमता देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) समूहों में फैली हुई है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत 2023 में 34 बिलियन अमरीकी डॉलर मूल्य की वस्त्र उत्पादों का निर्यात किया, जिसमें परिधान उत्पादों की हिस्सेदारी 42% थी, इसके बाद कच्चे माल/अर्ध-तैयार सामग्री की हिस्सेदारी 34% और तैयार गैर-परिधान वस्तुओं की हिस्सेदारी 30% थी। यूरोप और अमेरिका ने भारत के परिधान निर्यात का लगभग 66%, तैयार गैर-परिधान वस्तुओं का 58% और कच्चे माल/अर्ध-तैयार सामग्रियों का 12% उपभोग किया। अन्य प्रमुख गंतव्यों में यूके (8%) और यूएई (7%) शामिल हैं। सर्वेक्षण बताता है कि कोविड-19 अवधि (2020 से 2022) के दौरान कपड़ा निर्यात लचीला बना रहा।
समीक्षा में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि विश्व स्तरीय प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना के साथ टेक्सटाइल पार्कों के निर्माण के माध्यम से पीएम मित्र जैसे सरकारी कार्यक्रम एकीकृत आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन प्रदान करेंगे तथा टेक्सटाइल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को भी आकर्षित करेंगे। इसमें कहा गया है कि चूंकि एमएमएफ उत्पादों को विभिन्न उपयोग मामलों के अनुकूल गहन अनुसंधान और विकास की आवश्यकता होती है, इसलिए अनुसंधान को एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल करते हुए 1,480 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) को मंजूरी दी गई है। 2024 के दौरान, एनटीटीएम मिशन के तहत 168 शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसमें कहा गया है कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्रीय करों और शुल्कों में छूट की योजना को भी 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण ने निष्कर्ष निकाला है कि भारत के वस्त्र क्षेत्र के पक्ष में कई अनुकूल परिस्थितियां काम कर रही हैं जो इस क्षेत्र के लिए शुभ संकेत हैं।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बजट 2025 को परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों को शामिल करने के लिए क्रांतिकारी और दूरगामी घोषणा वाला भविष्य का बजट बताया
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का कहा कि केंद्रीय बजट 2025-26 सरकार की संवेदनशीलता, प्रधानमंत्री की भविष्यवादी दृष्टि को दर्शाता है और विकसित भारत @2047 को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है |
माननीय प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित परमाणु ऊर्जा मिशन न केवल भारत की जीवंत अर्थव्यवस्था में मूल्य जोड़ रहा है बल्कि हमें इस क्षेत्र में कई अन्य देशों से आगे भी ले जा रहा है: डॉ. सिंह
यह देश के लिए वैश्विक परिप्रेक्ष्य में आदर्श बदलाव है क्योंकि हमने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा है जो दुनिया भर में बड़ा संदेश भेजता है: डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली | केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बजट 2025 को परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों को शामिल करने के लिए क्रांतिकारी और दूरगामी घोषणा वाला भविष्य का बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह घोषणा दुनिया को चौंका देने वाली है और यह दृढ़ विश्वास के उसी साहस को दर्शाता है, जिसे पीएम मोदी ने तब प्रदर्शित किया था जब उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था और कुछ वर्षों के भीतर चमत्कारिक परिणाम सामने आए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां कई मीडिया चैनलों से बात करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट 2025-25 केंद्र सरकार की संवेदनशीलता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भविष्यवादी दृष्टि को भी दर्शाता है। जबकि इसकी संवेदनशीलता मध्यम वर्ग के करदाताओं को राहत और कुछ जीवन रक्षक दवाओं पर शुल्क छूट जैसे अन्य उपायों में परिलक्षित होती है, इसकी दीर्घकालिक भविष्यवादी दृष्टि परमाणु मिशन, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, ग्रीन टेक मिशन, एआई के लिए उत्कृष्टता केंद्र जैसे प्रावधानों में परिलक्षित होती है।
मंत्री ने कहा कि यह विकसित भारत @2047 को साकार करने की दिशा में निश्चित कदम होगा और वैश्विक क्षेत्र में भारत का सम्मान भी बढ़ाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जीवनयापन में आसानी के प्रति संवेदनशीलता के लिए बजट की सराहना की, क्योंकि यह मध्यम वर्ग पर केंद्रित है, साथ ही इसमें कर-मुक्ति के साथ-साथ व्यापार करना आसान बनाना भी शामिल है। केंद्रीय मंत्री ने बजट को नागरिक केंद्रित बताते हुए कहा कि यह प्रौद्योगिकी और परंपरा के तालमेल को व्यापक रूप से समाहित करता है।
मंत्री ने निजी क्षेत्र की कंपनियों को शामिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन लाने वाले केंद्रीय बजट को बहुत क्रांतिकारी बताया, जो माननीय प्रधानमंत्री ने कुछ साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र में किया था। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित और वित्त मंत्री द्वारा घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन न केवल भारत की जीवंत अर्थव्यवस्था में मूल्य जोड़ने वाला है, न केवल हरित ऊर्जा के भंडार को आगे बढ़ाने वाला है बल्कि हमें इस क्षेत्र में कई अन्य देशों से आगे निकलने का अवसर भी देगा। हालाँकि, उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ पहलू तत्काल लाभ नहीं देंगे, लेकिन धीरे-धीरे हमारे दिमाग में उतरेंगे और वास्तव में पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे, जिसकी भारत से कभी उम्मीद नहीं की जाती है।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में आदर्श बदलाव को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय बजट की सराहना करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि हमने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा पैदा करने का लक्ष्य भी रखा है। यह दुनिया भर में बड़ा संदेश भेजता है कि भारत अब अनुयायी नहीं है और हम नेतृत्व कर रहे हैं और दूसरों के लिए अनुसरण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यहां तक कि कृषि क्षेत्र भी प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दे रहा है। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के लिए 20,000 करोड़ रुपए का आवंटन और 2033 तक न्यूनतम पांच (5) एसएमआर का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। यह पहल किसानों को वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता के साथ भविष्य का क्षेत्र है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि पीएम रिसर्च फेलोशिप योजना अगले पांच वर्षों में आईआईटी और आईआईएससी जैसे शीर्ष संस्थानों में 10,000 फेलोशिप का पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन की स्थापना से मूलभूत भू-स्थानिक बुनियादी ढांचे और डेटा का विकास होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण, शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के डिजाइन की सुविधा के लिए पीएम गति शक्ति का उपयोग करेगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में आनुवंशिक संसाधनों से भविष्य की खाद्य और पोषण सुरक्षा और संरक्षण सहायता के लिए 10 लाख रोगाणु प्लाज्मा लाइनों वाला दूसरा जीन बैंक स्थापित किया जाएगा।
सरकारी स्कूलों में अगले पांच वर्षों में 50 हजार अटल टंकरिंग प्रयोगशालाएं
भारतीय भाषा पुस्तक योजना भारतीय भाषाओं में डिजिटल पुस्तकें उपलब्ध कराएगा
निजी क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और नवोन्मेष के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का आवंटन
रिसर्च फेलोशिप स्कीम के अंतर्गत आईआईटी और आईआईएससी में प्रौद्योगिकीय अनुसंधान के लिए 10,000 फेलोशिप का प्रावधान
मेक फॉर इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड विनिर्माण के लिए युवाओं के लिए वैश्विक विशेषज्ञता और भागीदारी के साथ पांच राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केन्द्र
कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के उत्कृष्टता केंद्र के लिए कुल 500 करोड़ रुपए का परिव्वय
नई दिल्ली | केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी, 2025 को संसद में केन्द्रीय बजट 2025-26 पेश करते हुए कहा कि बच्चों में जिज्ञासा और नवाचार की भावना उत्पन्न करने तथा वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए अगले 5 वर्षों में सरकारी स्कूलों में पचास हजार अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। केन्द्रीय बजट में भारतनेट परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सभी सरकारी माध्यमिक स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है। उच्चतर शिक्षा के लिए केन्द्रीय बजट 2025-26 में कहा गया है कि 23 आईआईटी संस्थानों में विद्यार्थियों की कुल संख्या में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो विगत 10 वर्षों में 65,000 से बढ़कर 1.35 लाख हो गई है। आईआईटी, पटना में छात्रावास और अन्य अवसंरचना संबंधी क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा।

अपने विषयों को बेहतर समझने में सहायता करने के उद्देश्य से निर्मला सीतारमण ने भारतीय भाषा पुस्तक स्कीम को लागू करने का प्रस्ताव दिया जो उच्च शिक्षा और स्कूलों के लिए भारतीय भाषाओं में डिजिटल रूप में पुस्तकें उपलब्ध कराएगा।
केन्द्रीय वित्त मंत्री ने वैश्विक विशेषज्ञता और भागीदारी के साथ पांच राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केंद्रों को स्थापित करने की भी घोषणा की ताकि “मेक फॉर इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” विनिर्माण के लिए आवश्यक कौशल के साथ हमारे युवाओं को तैयार किया जा सके। इस भागीदारी में पाठ्यक्रम डिजाइन, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण, कौशल प्रमाणन फ्रेमवर्क और आवधिक समीक्षा को शामिल किया जाएगा।
केन्द्रीय बजट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए कुल 500 करोड़ रुपए के खर्च की घोषणा की गई।
सीतारमण ने बजट प्रस्तुत करते हुए निजी क्षेत्र में अनुसंधान विकास और नवोन्मेष लागू करने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए के आवंटन की घोषणा की। प्रधानमंत्री रिसर्च फेलाशिप स्कीम के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में आईआईटी और आईआईएससी में प्रौद्योगिकीय अनुसंधान के लिए 10,000 फेलोशिप के साथ बजट में वित्तीय सहायता बढाने का भी प्रस्ताव किया गया।
1.57 लाख स्टार्टअप और 17.28 लाख नौकरियां, एक दशक की प्रगति का प्रतीक
नई दिल्ली | भारत ने 31 दिसंबर 2024 तक स्टार्ट अप की मान्यता के लिए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा जारी किए गए 1.57 लाख प्रमाणपत्रों के साथ दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप ईकोसिस्टम के रूप में खुद को मजबूती से स्थापित किया है। 100 से अधिक यूनिकॉर्न द्वारा संचालित देश का उद्यमशीलता परिदृश्य, नवाचार को फिर से परिभाषित कर रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रहा है। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्र इस परिवर्तन में सबसे आगे रहे हैं, जबकि छोटे शहर भी गति में तेजी से योगदान दे रहे हैं, जिसमें स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से, 51% से अधिक स्टार्टअप टियर II/ III शहरों से उभर रहे हैं।

भारत सरकार द्वारा 16 जनवरी 2016 को शुरू किया गया स्टार्टअप इंडिया नवाचार को बढ़ावा देने और एक संपन्न स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए एक प्रमुख पहल है। इसका लक्ष्य आर्थिक विकास को गति देना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। स्टार्टअप को उनकी विकास यात्रा में समर्थन देकर, यह पहल नवाचार और डिजाइन को प्रोत्साहित करती है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से, इसका उद्देश्य स्टार्टअप को आगे बढ़ने और सफल होने के लिए सशक्त बनाना है।
स्टार्टअप विकास: 31 दिसंबर, 2024 तक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2016 में लगभग 502 से बढ़कर 1,57,706 हो गई है।
रोजगार सृजन: 31 दिसंबर, 2024 तक स्टार्टअप ने 17.28 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित की हैं, जिसमें आईटी सेवा क्षेत्र 2.10 लाख नौकरियों के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद हेल्थकेयर और लाइफसाइंसेज (1.51 लाख) और व्यावसायिक और वाणिज्यिक सेवाएं (96,474) हैं।
महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप: 31 दिसंबर, 2024 तक, कुल 75,935 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक शामिल हैं (मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के स्व-रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार), जो भारत में महिला उद्यमियों के उदय को दर्शाती हैं।
व्यवसाय करने में सुगमता और कर लाभ: सरलीकृत अनुपालन, स्व-प्रमाणन और तीन वर्षों के लिए कर छूट ने स्टार्टअप के लिए संचालन को सुव्यवस्थित किया है।
₹945 करोड़ के कोष के साथ 2021 में शुरू की गई, एसआईएसएफएस विभिन्न चरणों में स्टार्टअप का समर्थन करती है, जिसमें अवधारणा का प्रमाण, प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षण, बाजार में प्रवेश और व्यावसायीकरण शामिल हैं। यह योजना 1 अप्रैल 2021 से चालू है, और इसकी देखरेख विशेषज्ञ सलाहकार समिति (EAC) द्वारा की जाती है, जो फंड आवंटन के लिए इनक्यूबेटरों का मूल्यांकन और चयन करती है।
भारतीय तटरक्षक बल ने अपना 49वां स्थापना दिवस मनाया
नई दिल्ली | भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने 1 फरवरी, 2025 को अपना 49वां स्थापना दिवस मनाया, जो राष्ट्र के प्रति समर्पित सेवा के लगभग पांच दशकों का प्रतीक है। इस अवसर पर, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने आईसीजी को अपनी तरफ से शुभकामनाएं दीं तथा भारत के समुद्री हितों की रक्षा में इसकी उल्लेखनीय उपलब्धियों और महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता दी है। इस दिवस को मनाने के लिए, आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी।

1977 में सिर्फ सात सतही प्लेटफार्मों के साथ अपनी सामान्य शुरुआत से, आईसीजी एक दुर्जेय बल के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें अब 151 जहाज और 76 विमान शामिल हैं। 2030 तक, आईसीजी 200 सतही प्लेटफार्मों और 100 विमानों के अपने लक्ष्य बल स्तरों को प्राप्त करने के लिए तैयार है, जो दुनिया की प्रमुख तटरक्षक सेवाओं में से एक के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करता है।
अपने आदर्श वाक्य 'वयं रक्षामः' (हम रक्षा करते हैं) के साथ, आईसीजी ने लगातार भारत के समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। अपनी स्थापना के बाद से, सेवा ने 11,730 से अधिक लोगों की जान बचाई है, जिसमें पिछले वर्ष ही 169 लोगों की जान की रक्षा की। यह अटूट प्रतिबद्धता 4.6 मिलियन वर्ग किलोमीटर के विशाल भारतीय खोज और बचाव क्षेत्र में नाविकों, मछुआरों और जहाजों की सुरक्षा में आईसीजी की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है।
आईसीजी चौबीसों घंटे निगरानी रखता है, भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा के लिए प्रतिदिन 55-60 सतही प्लेटफॉर्म और 10-12 विमान तैनात करता है। खोज और बचाव कार्यों के अलावा, आईसीजी ने समुद्र में अवैध गतिविधियों को रोकने और उनका मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने अंडमान सागर में एक ही बार में रिकॉर्ड 6,016 किलोग्राम मादक पदार्थों की जब्ती सहित 52,560.96 करोड़ रुपये मूल्य का प्रतिबंधित सामान जब्त किया है। आईसीजी की आपदा प्रतिक्रिया क्षमताएं भी इसकी ताकत और संकल्प का प्रमाण हैं, जिसमें गुजरात में चक्रवात एएसएनए के दौरान बचाव, गुजरात और वायनाड में बाढ़ बचाव और राहत, जटिल रात्रिकालीन चिकित्सा निकासी अभियानों का समन्वय जैसे उल्लेखनीय अभियान शामिल हैं।
भारतीय जलक्षेत्र में तेल रिसाव की स्थिति में प्रतिक्रिया के लिए नामित प्राधिकरण के रूप में आईसीजी का सक्रिय दृष्टिकोण समुद्री पर्यावरण संरक्षण तक फैला हुआ है। आईसीजी ने राष्ट्रीय प्रदूषण प्रतिक्रिया अभ्यास, क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय अभ्यासों की एक श्रृंखला सहित प्रमुख राष्ट्रीय अभ्यासों का भी नेतृत्व किया है, जिससे इसकी तैयारियों को मजबूती मिली है।
आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण के प्रति आईसीजी की प्रतिबद्धता स्वदेशी क्षमताओं को निरंतर अपनाने से स्पष्ट है। मेक-इन-इंडिया पहल के तहत अत्याधुनिक एयर कुशन वाहनों, उन्नत संचार प्रणालियों, नई पीढ़ी के गश्ती जहाजों और हेलीकॉप्टरों के लिए अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मल्टी-मिशन मैरीटाइम एयरक्राफ्ट, डोर्नियर्स और अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए मंजूरी दी गई है, जिससे उभरते समुद्री खतरों का जवाब देने की आईसीजी की क्षमता में वृद्धि होगी।
आईसीजी ने स्वदेशी जहाज निर्माण के लिए अग्रणी भारतीय विनिर्माताओं के साथ भागीदारी की है, जिससे समुद्री सुरक्षा और संरक्षा के लिए उच्चतम गुणवत्ता वाली सामग्रियों का उपयोग सुनिश्चित होता है। इसके अतिरिक्त, इसके बुनियादी ढांचे के विकास के हिस्से के रूप में 1,000 मीटर से अधिक जेटी (घाट) का निर्माण किया जा रहा है।
तकनीकी प्रगति को अपनाते हुए, आईसीजी ने कर्मचारियों के लिए चिकित्सा परीक्षाओं और ई-स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से ऑटोमेशन ऑफ सर्विस हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन (एएसएचए) ऐप लॉन्च किया है। डिजिटल तटरक्षक बल पहल के हिस्से के रूप में टियर-III डेटा सेंटर की नींव भी रखी गई है, जो इसके तकनीकी बुनियादी ढांचे को बढ़ाता है। चेन्नई में मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर और पुडुचेरी में कोस्ट गार्ड एयर एन्क्लेव जैसी नई सुविधाओं की स्थापना से हिंद महासागर क्षेत्र में आईसीजी की प्रतिक्रिया क्षमताओं को और मजबूती मिलती है।
सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के अनुरूप, आईसीजी ने 21 सितंबर, 2024 को अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस का आयोजन किया, जिसमें स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रयासों को एकजुट किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में विश्व पुस्तक प्रदर्शनी 2025 का उद्घाटन किया
नई दिल्ली | भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 1 फरवरी, 2025 नई दिल्ली में नई दिल्ली विश्व पुस्तक प्रदर्शनी 2025 का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि किताबें पढ़ना सिर्फ़ शौक नहीं है यह एक परिवर्तनकारी अनुभव है। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों की किताबें पढ़ने से क्षेत्रों और समुदायों के बीच संबंध बेहतर बनते हैं। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में भारत की विभिन्न भाषाओं और अन्य देशों की भाषाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई स्टॉल हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक मेला पुस्तक प्रेमियों को एक ही स्थान पर दुनिया भर के साहित्य तक पहुँच प्रदान करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि पाठ्यक्रम की निर्धारित पुस्तकों को पढ़ने के अलावा स्कूली बच्चों को विभिन्न विषयों पर विभिन्न प्रकार की पुस्तकें पढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें अपनी क्षमता और योग्यताओं को पहचानने में मदद मिलेगी और वे अच्छे इंसान बनेंगे।
राष्ट्रपति ने सभी से बच्चों के लिए पुस्तकों के निर्माण और प्रचार को विशेष महत्व देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चों में जो सबसे अच्छी आदत विकसित कर सकते हैं, वह है किताबें पढ़ने का शौक। राष्ट्रपति ने कहा कि हर बड़े को इसे एक महत्वपूर्ण कर्तव्य के रूप में लेना चाहिए।
भारत की विकास यात्रा के लिए कृषि प्रथम इंजन है : बजट 2025-26
बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना की जाएगी
उच्च पैदावार वाले बीजों पर राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया जाएगा
दूसरे 10 लाख जर्मप्लाज्म लाइनों के साथ दूसरे जीन बैंक की स्थापना की जाएगी
कपास उत्पादकता के लिए पांच वर्षीय अभियान की घोषणा की गई
किसान क्रेडिट कार्ड ऋण सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया गया
असम के नामरूप में 12.7 लाख मीट्रिक टन उर्वरक संयंत्र की स्थापना की जाएगी
अंडमान तथा निकोबार और लक्षद्वीप द्वीपों पर दीर्घकालिक मत्स्य संवर्धन के लिए नए अनुकूल फ्रैमवर्क पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
नई दिल्ली | केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 01 फरवरी, 2025 को संसद में केन्द्रीय बजट 2025-26 पेश करते हुए, भारत की विकास यात्रा के लिए ‘कृषि को प्रथम इंजन’ की संज्ञा देते हुए अन्नदाताओं के लाभ के लिए कृषि क्षेत्र के विकास और उत्पादकता में वृद्धि के लिए कई उपायों की घोषणा की।

बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना के सरकार के निर्णय की घोषणा करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि मखानों का उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में सुधार लाने के लिए बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन कार्यकलापों में लगे लोगों को एफपीओ में संगठित किया जाएगा। यह बोर्ड मखाना किसानों को पथ-प्रदर्शन और प्रशिक्षण सहायता उपलब्ध कराएगा और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कार्य करेगा कि उन्हें सभी संगत सरकारी योजनाओं के लाभ मिले।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय उच्च पैदावार बीज मिशन का कार्यान्वयन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अनुसंधान परिवेश को बढ़ावा देना, उच्च पैदावार, कीट प्रतिरोधी और जलवायु अनुकूलन के गुणों से संपन्न बीजों का लक्षित विकास और प्रचार करना तथा जुलाई 2024 से जारी किए गए बीजों की 100 से अधिक किस्मों को वाणिज्यिक स्तर पर उपलब्ध कराना होगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य में खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए 10 लाख जर्मप्लाज्म लाइनों के साथ दूसरे जीन बैंक की स्थापना की जाएगी। यह सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को अनुवांशिक अनुसंधान के लिए संरक्षण सहायता प्रदान करेगी।
कपास उत्पादकता के लिए अभियान की घोषणा करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस पंच-वर्षीय मिशन से कपास कृषि की उत्पादकता और वहनीयता में पर्याप्त सुधार लाने में मदद मिलेगी और कपास की अधिक लंबे रेशे वाली किस्मों को बढ़ावा मिलेगा। किसानों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सर्वोत्तम सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वस्त्र क्षेत्र के लिए हमारे 5एफ के समेकित विज़न के अनुरूप, इससे किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी और भारत के परंपरागत वस्त्र क्षेत्र में नई जान फूंकने के लिए गुणवत्तापूर्ण कपास की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
करीब 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों के लिए लघु अवधि ऋणों की सुविधा उपलब्ध कराने में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की महत्ता का उल्लेख करते हुए मंत्री महोदया ने संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लिए जाने वाले ऋणों के लिए ऋण सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की।
निर्मला सीतारमण ने असम के नामरूप में 12.7 लाख मीट्रिक टन की वार्षिक क्षमता के साथ एक उर्वरक संयंत्र की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र के साथ-साथ पूर्वी क्षेत्र में निष्क्रिय पड़े तीन यूरिया संयंत्रों में उत्पादन को पुनः प्रारंभ करने से यूरिया की आपूर्ति को और अधिक बढ़ाने के साथ-साथ उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाने में सहायता मिलेगी।
समुद्री खाद्य निर्यात के मामले में 60 हजार करोड़ रुपये मूल्य के मत्स्य उत्पादन और जलीय कृषि के क्षेत्र में विश्व में भारत के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि समुद्री क्षेत्र की अप्रयुक्त संभावनाओं के द्वार खोलने के लिए, हमारी सरकार अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप जैसे द्वीपों पर विशेष ध्यान देने के साथ भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्रों से सतत मछली पकड़ने को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल फ्रेमवर्क लाएगी।
बजट 2025 : 36 लाइफ सेविंग ड्रग्स पर मिलेगी छूट : 200 कैंसर डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे
नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बहुप्रतीक्षित केंद्रीय बजट 2025 पेश किया | इस दौरान वित्त मंत्री ने हेल्थ सेक्टर में महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणा की, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2025 पेश करते हुए कहा कि मे 36 लाइफ सेविंग ड्रग्स को बेसिक कस्टम ड्यूटी से पूरी तरह छूट दी गई है।
इसके अलावा 37 अन्य दवाओं और 13 नए रोगी सहायता कार्यक्रमों को मूल सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट दी जाएगी | वित्त मंत्री ने शनिवार को 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए भारत के सभी जिलों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की घोषणा भी की।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य देश भर में कैंसर के रोगियों के लिए कैंसर के इलाज और सहायता तक पहुंच को बढ़ाना है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर किया जा सके।

निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के दौरान सीतारमण ने घोषणा की कि सरकार हील इन इंडिया पहल के तहत मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देगी और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाएगी | उन्होंने यह भी घोषणा की कि मेडिकल ऐजुकेशन का विस्तार करने के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगे।
वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि सभी जिलों में 3 साल के भीतर सरकारी अस्पतालों में 200 कैंसर डे केयर सेंटर स्थापित किए जाएंगे | उन्होंने यह भी कहा की कि गिग वर्कर्स कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले को पीएम जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाएगी।
अपने भाषण में सीतारमण ने स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया, खासकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में | उन्होंने कहा कि इन केंद्रों की स्थापना एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कैंसर रोगियों को शहरी केंद्रों तक लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता के बिना समय पर उपचार और देखभाल मिले।
लोकसभा सोमवार तक के लिए स्थगित : बजट भाषण के साथ ही
नई दिल्ली | केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को आम बजट 2025 पेश करते समय कई प्रमुख ऐलान किए हैं, जिसमें इनकम टैक्स को लेकर की गई घोषणा की चर्चा शुरू हो गई है।
बजट पेश करने के बाद लोकसभा ने सर्वसम्मति से इस पर अपनी मुहर लगा दी है। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी है। शनिवार को बजट भाषण सुबह 11 बजे शुरू हुआ था।

आमतौर पर शनिवार और रविवार को सदन की कार्यवाही नहीं होती, लेकिन 1 फरवरी को बजट के कारण सदन बुलाया गया था। बजट हर साल 1 फरवरी को सुबह 11 बजे पेश किया जाता है।
बता दें, शनिवार को बजट भाषण शुरू होने से पहले अखिलेश यादव समेत कुछ अन्य विपक्षी सांसदों ने सदन का बहिष्कार कर दिया।
उनकी मांग थी कि बजट से पहले प्रयागराज के महाकुंभ में हुई भगदड़ पर चर्चा की जाए।
वित्त मंत्री सीतारमण ने इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की घोषणा की है। अब 12 लाख रुपये वार्षिक कमाई करने वालों को इनकम टैक्स नहीं देना होगा।
कैंसर, असाधारण और गंभीर बीमारियों के मरीजों को राहत देते हुए 36 जीवन रक्षक दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह खत्म करने और 6 दवाइयों को विशेष राहत वाली सूची में शामिल करने की घोषणा हुई है।
इनकम टैक्स पर नया विधेयक लाया जाएगा और सरकारी स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा होगी।
मेडिकल कॉलेज में बढ़ेंगी 75,000 सीटें : आईआईटी का भी होगा विस्तार
नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में अगले 5 साल में 75,000 सीटें जोड़ी जाएंगी। इनमें से 10,000 सीटें अगले एक साल में बढ़ाई जाएंगी।
उन्होंने कहा, पिछले दशक में 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में छात्र क्षमता दोगुनी हो गई है और अब इनमें 1.35 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
वित्त मंत्री ने कहा 5 आईआईटी को अपने बुनियादी ढांचे को उन्नत करने और अतिरिक्त 6,500 छात्रों को आवास प्रदान करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।

इन 5 आईआईटी में भिलाई, धारवाड़, गोवा, जम्मू और तिरुपति आईआईटी शामिल हैं।
इसके अलावा सरकार ने आईआईटी पटना के विस्तार के लिए विशेष रूप से धन आवंटित किया है।
500 करोड़ की राशि से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के लिए एक संस्थान की स्थापना की जाएगी।
वित्त मंत्री ने शिक्षा में एआई के लिए 5 राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है, जिन्हें वैश्विक भागीदारी के माध्यम से विकसित किया जाएगा।
सीतारमण ने कहा कि अगले 5 सालों में छात्रों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्कूलों में 50,000 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित किए जाएंगे।
यह कदम सरकार के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसके तहत एआई को अकादमिक और शोध संस्थानों खासतौर पर आईआईटी में एकीकृत किया जाएगा।
युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य भविष्य की अर्थव्यवस्था चलाएगा
लाइफस्टाइल, कार्यस्थल संस्कृति और पारिवारिक परिस्थितियां उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण
कभी-कभी व्यायाम करना, सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताना या अपने परिवारों के साथ घनिष्ठ न होना मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में अपनी जड़ो में वापस लौटना हमें आगे बढ़ाएगा
नई दिल्ली | केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2024-25 पेश करते हुए कहा कि स्वस्थ मानसिक स्वास्थ्य जीवन की चुनौतियों और कार्यकलापों को आगे बढ़ाने मुख्य कारक है। स्वस्थ मानसिक स्वास्थ्य हमारी सभी भावनाओं, सामाजिक और भौतिक क्षमताओं को बढ़ाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि लाइफस्टाइल को चुनना कार्य स्थल संस्कृति और पारिवारिक परिस्थितियां उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण है और अगर भारत के आर्थिक लक्ष्य को पूरा करना है तो बचपन/युवावस्था के दौरान लाइफस्टाइल को चुनने में तुरंत ध्यान देना होगा।

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि बच्चों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित किस्से बढ़ रहें हैं जो इंटरनेट और विशेषकर सोशल मीडिया के ज्यादा उपयोग से जुड़े हुए है। जोनाथन हैडिटस की किताब ‘द एनक्शियस जेनेरेशन: हाओ द ग्रेट रीराईटिंग ऑफ चिल्ड्रन इज़ कॉजिंग एन एपीडेमिक ऑफ मैंटल इलनेस’ का संदर्भ देते हुए सर्वेक्षण में जोर दिया गया कि ‘फोन-आधारित बचपन’ से उम्र बढ़ने के साथ-साथ का अनुभव उलझ रहा है।
आर्थिक सर्वेक्षण में जोर दिया गया कि बेहतर कार्यस्थल संस्कृति बेहतर मानसिक स्वास्थ की ओर ले जाएगी। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि लाइफस्टाइल को चुनना और पारिवारिक परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि जो व्यक्ति अल्ट्राप्रोसेस या डिब्बा बंद जंक फूड का उपयोग करते है उनका मानसिक स्वास्थ्य उनसे बेहतर होता है जो इनका लगातार उपयोग करते है। यह भी कहा गया है कि जो कभी-कभी व्यायाम करते हैं, अपना खाली समय सोशल मीडिया पर बिताते है या अपनी परिवारों के लोगों से ज्यादा नहीं मिलते हैं उनका मानसिक स्वास्थ्य सही नही रहता है और एक ही जगह पर ज्यादा वक्त बिताने से भी मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
सर्वेक्षण में उल्लेखित किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य के स्तर का कम होना चिंता का विषय है और इन रुझानों के बढ़ने से अर्थव्यवस्था भी गड़बड़ा जाती है। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि कार्य संस्कृति अनुकूल न होने और डेस्क पर अपने कार्य में ज्यादा वक्त बिताना मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और अर्थव्यवस्था की वृद्धि में रुकावट डाल सकता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में जोर दिया गया कि पर दोस्तों के साथ समय बिताने, बाहर जाकर खेलने, घनिष्ठ पारिवारिक संबंध बनाने पर स्कूल और पारिवारिक स्तर पर हस्तक्षेप करने की विशेष आवश्यकता है जो बच्चों और युवाओं को इंटरनेट से दूर रखेंगी और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करेंगी
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि अपने जड़ों में वापिस लौटना हमें मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में नई ऊचांईयों पर ले जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में कहा गया है कि मानसिक स्वास्थ्य को आर्थिक ऐजेंडे के केंद्र में रखना राष्ट्र के भावनाओं और मानवीय कल्याण सीधे तौर पर जरूरी है और इस समस्या का स्तर बहुत बड़ा है।
सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अब समय आ गया कि इसके लिए व्यावहारिक, प्रभावी रणनीति तैयार करनी चाहिए और हस्तक्षेप करना चाहिए क्योंकि भारत का जनांकीय लाभ कौशल, शिक्षा, शारीरिक स्वास्थ्य और उनसे भी ऊपर युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य है।
मिडिल क्लास को बड़ा तोहफा : जानिए बजट की खास बातें
नई दिल्ली | बजट में मिडिल क्लास को बड़ी सौगात मिली है | अब 1 लाख हर महीने कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना होगा | खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में ऐलान किया | निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि इनकम टैक्स पर अलग से एक बिल आएगा | अगले सप्ताह नया इनकम टैक्स बिल पेश होगा. इनकम टैक्स के नियमों बड़ा बदलाव होगा | निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश कर रही हैं |
आम बजट 2025 से देश को बड़ी सौगातें मिली हैं | महिला, किसान से लेकर टैक्सपेयर्स को मोदी सरकार ने बड़ी राहत दी है | सरकार ने इनकम टैक्स को लेकर बजट में बड़ा ऐलान किया है | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, अब 12 लाख तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा | इसका मतलब है कि 1 लाख कमाने वाला आदमी कोई टैक्स नहीं देगा | वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि इनकम टैक्स पर नया कानून बनेगा | इसके लिए अगले सप्ताह संसद में एक अलग से इनकम टैक्स बिल आएगा | इस बजट में किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड लोन पर बड़ा ऐलान हुआ | साथ ही बिहार को भी कई सौगातें मिलीं |

दरअसल, निर्मला सीतारमण ने आज अपना आठवां बजट पेश किया | मोदी सरकार 3.0 का यह पहला था | बजट भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण ने किसान क्रेडिट कार्ड में लोन की सीमा बढ़ा दी | अब 5 लाख तक का लोन मिल सकता है | साथ ही बिहार मखाना बोर्ड का ऐलान किया | अगले साल 10 हजार मेडिकल सीटें जुड़ेंगी | निर्मला सीतारमण क्रीम रंग की साड़ी पहनी नजर आईं | यह मोदी सरकार 3.0 का पहला पहला पूर्ण बजट है | एनडीए सरकार के कार्यकाल में निर्मला सीतारमण अब तक पांच पूर्ण और दो अंतरिम बजट पेश कर चुकी हैं | इस तरह सैलरीड क्लास से लेकर गरीब-किसान तक को सरकार ने बड़ी राहत दी है |
इस बार के बजट में किसानों से लेकर महिलाओं और टैक्स पेयर्स का पूरा खयाल रखा गाय है. इनकम टैक्स को लेकर सरकार ने बड़ी राहत दी है. तो चलिए जानते हैं बजट में अब तक के सबसे बड़े ऐलान :-
12 लाख तक की कमाई पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा |
वित्त मंत्री ने कहा- कि न्यू इनकम टैक्स बिल अगले हफ्ते लाया जाएगा | इन डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म को बाद में बताएंगे |
कैंसर की दवाएं सस्ती होंगी, पिछले 4 साल का IT रिटर्न एकसाथ फाइल कर सकेंगे |
वरिष्ठ नागरिकों के लिए TDS की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख कर दी गई है |
इनकम टैक्स फाइलिंग की सीमा को 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दिया है |
अगले 6 साल मसूर, तुअर जैसी दालों की पैदावार बढ़ाने के लिए फोकस रहेगा |
किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज की लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख होगी |
बिहार में मखाना बोर्ड बनेगा, इससे छोटे किसानों और व्यापारियों को फायदा |
छोटे उद्योगों को विशेष क्रेडिट कार्ड, पहले साल 10 लाख कार्ड जारी होंगे |
MSME के लिए लोन गारंटी कवर 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़, 1.5 लाख करोड़ तक का कर्ज मिलेगा |
स्टार्टअप के लिए लोन 10 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए किया जाएगा। गारंटी फीस में भी कमी होगी |
वित्त मंत्री ने इस बजट में सबसे बड़ा ऐलान कर दिया है | अब 12 लाख तक की सालाना कमाई करने वालों को कोई टैक्स नहीं देना होगा |
12 लाख की कमाई पर- कोई टैक्स नहीं
12 से 16 लाख की कमाई पर- 15 फीसदी इनकम टैक्स
16 से 20 लाख की कमाई पर- 20 फीसदी टैक्स
20 से 24 लाख तक की कमाई पर- 25 फीसदी इनकम टैक्स
24 से ज्यादा की कमाई पर – 30 फीसदी टैक्स
भारत मार्च 2025 में ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह की बैठक की मेज़बानी करेगा
बैठक का विषय है ‘सतत विकास के लिए युवा उद्यमिता’
ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह की बैठक के लिए युवाओं को तैयार करने के लिए भारत भर में 8 रन-अप कार्यक्रम
नई दिल्ली | युवा कार्यक्रम विभाग, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार 3 से 7 मार्च 2025 तक ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह की बैठक आयोजित करेगा। बैठक का विषय "सतत विकास के लिए युवा उद्यमिता" है। बैठक में ब्रिक्स देशों के लगभग 45 युवा प्रतिनिधि शामिल होंगे।
भारत ब्रिक्स युवा परिषद के प्रतिनिधियों को कार्य समूह की बैठक में उद्यमिता के क्षेत्र में नीतियों, कार्यक्रमों और सहयोग की संभावनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। प्रतिनिधियों को युवाओं से संबंधित कार्यों में अपने अनुभव साझा करने और ब्रिक्स देशों के बीच उद्यमिता के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा करने के लिए एक मंच मिलेगा।

ब्रिक्स युवा परिषद की स्थापना: उद्यमिता कार्य समूह।
उद्यमिता के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों की कार्य योजनाओं पर चर्चा।
उद्यमिता के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के युवा सहयोग में ठोस कार्रवाई की खोज।
ब्रिक्स और कार्य समूह बैठकों के रूपरेखा में प्राथमिकता वाले निर्देशों के अनुसार नए युवा प्रारूपों के निर्माण पर चर्चा।
प्रतिभागियों को ब्रिक्स देशों के भीतर मौजूद अंतर्राष्ट्रीय उद्यमिता अवसरों से जोड़ना।
ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह बैठक के प्रासंगिक क्षेत्रों पर युवाओं की समझ बढ़ाने के लिए, युवा कार्यक्रम विभाग देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 8 रन-अप कार्यक्रम आयोजित करेगा।
ये रन-अप कार्यक्रम जमीनी स्तर पर व्यापक लोगो तक उद्यमिता पर भारत के एजेंडे के स्वस्थ विचार-विमर्श और प्रसार के लिए एक मंच प्रदान करेंगे। ये रन-अप कार्यक्रम पहले से पहचाने गए प्रासंगिक क्षेत्रों पर प्रतिभाशाली युवा वक्ताओं के बीच पैनल चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करेंगे।
पहला रन-अप इवेंट 15 जनवरी 2025 को दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में होगा। दूसरा रन-अप इवेंट 17 जनवरी 2025 को दिल्ली के माता सुंदरी कॉलेज फॉर विमेन में होगा। तीसरा इवेंट 24 जनवरी 2025 को आईआईएम जम्मू, जम्मू और कश्मीर में होगा, इसके बाद चौथा रन-अप इवेंट 28 जनवरी 2025 को एनएफएसयू, गांधीनगर, गुजरात में होगा।
शेष रन-अप कार्यक्रमों का संभावित कार्यक्रम इस प्रकार है:
5वां रन-अप कार्यक्रम 4 फरवरी 2025 को केआईआईटी, ओडिशा में आयोजित किया जाना संभावित है।
6वां रन-अप कार्यक्रम 7 फरवरी 2025 को आईआईटी गुवाहाटी, असम में आयोजित किया जाना संभावित है।
7वां रन-अप कार्यक्रम 11 फरवरी 2025 को आईआईएससी, बैंगलोर, कर्नाटक में आयोजित किया जाना संभावित है।
इन आयोजनों से न केवल देश के युवाओं को समकालीन वैश्विक मुद्दों की समझ मिलेगी, बल्कि उनमें अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य का विकास होगा तथा विभिन्न बहुपक्षीय मंचों का महत्व भी पता चलेगा।