देश-विदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धेय भंडारी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, श्रद्धेय सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं को मां भारती के लिए समर्पण के संस्कार प्रदान करने, जनसेवा और संगठन की सुदृढ़ता के लिए भंडारी ने जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
विदिशा जिले के पठारी क्षेत्र में मूर्ति कला से मिल रहा है रोजगार
विदिशा जिले की तहसील पठारी क्षेत्र में अद्भुत पत्थर से बेशकीमती मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। श्रद्धा, आस्था और भक्ति की केंद्र बन रही मूर्तियां भक्तों और कला प्रेमियों की पहली पसंद बन गई है। यहां की मूर्तियां देशभर में वास्तु और मूर्ति कला संरक्षण और उत्थान का काम कर रही हैं। जिले की तहसील पठारी के ग्राम सैदपुर में पत्थर मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। यह मूर्तियां ग्राम सैदपुर के लाल, पीले और भूरे रंग के अद्भुत पत्थर से बनाई जा रही हैं।
पत्थर खदान मालिक डिंपल सिंघई ने बताया कि पठारी क्षेत्र से पूरे देश में जैन मंदिरों के फाउंडेशन बनाने वाले पत्थर ब्लॉक भेजे जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय लेबोरेटरी में सैदपुर खदान का पत्थर का गुणवत्ता के कारण चयन किया गया। आर्किटेक्चर प्रियंक जैन, मुख्य कलाकार रंजीत बेहरा और उत्तम मलिक ने बताया कि मूर्ति निर्माण के लिए विशेष मुहूर्त में पत्थर को वैदिक विधि से आमंत्रित किया जाता है। पत्थर को मूर्ति का रूप देने के लिए ड्राइंग करके तराशा जाता है। इसके बाद फिर ड्राइंग करके नक्काशी की जाती है। मूर्ति पर डिजाइन बनाकर सफाई, घिंसाई और पॉलिश कर चिन्ह अंकित कर अंतिम रूप दिया जाता है।
मुख्य रूप से नागर शैली स्थापत्य कला के लिए बनाई जा रही मूर्तियों में मथुरा शैली और गंधार शैली का अनूठा संगम नजर आता है। एक फुट से लेकर 13 फुट तक की भीमकाय मूर्तियों का निर्माण उड़ीसा, कोलकाता, चेन्नई, राजस्थान और मध्यप्रदेश के कुशल कलाकारों के द्वारा किया जा रहा है। जिसमें जैन मूर्तियों में ध्यान मग्न अवस्था, विशाल बंद नेत्र, घुंघराले केश, सुडोल कंधे, गोद में दोनों हाथ रखे हुए तीर्थंकरों के हृदय पर श्री वत्स चिन्ह प्रतिमाओं की शोभा बढ़ाते है। किसी-किसी प्रतिमा में हाथ की उंगलियां मुड़ी हुई नजर आती हैं। वहीं पैर के अंगूठे भी मुड़े हुए नजर आते हैं। जो अद्भुत कला को प्रदर्शित करते हैं।
डिंपल सिंघई और मुख्य कलाकार रंजीत बेहरा, उत्तम मलिक ने बताया कि हिंदू धर्म के वैष्णव, शैव, शाक्त और स्मार्त संप्रदाय की मूर्तियां बनाई जाती है। वही भगवान बुद्ध की मूर्तियां भी बनाई जाती हैं। जिसमें अद्भुत नक्काशी और कला का प्रदर्शन किया जा रहा है।
सुकृति कला केंद्र सैदपुर के द्वारा बनाई जा रही मूर्तियों से क्षेत्र में नए रोजगार की आशा नजर आ रही है। अद्भुत मूर्तियों के निर्माण से पूरे देश में पठारी क्षेत्र को नई पहचान मिली है। मूर्ति कला के बढ़ते काम से नए-नए हस्तशिल्प कलाकारों को खुला मंच मिलेगा। पठारी क्षेत्र देश की प्रसिद्ध पत्थर मंडी है। जिसका पत्थर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है। वर्तमान में स्टोन आर्ट का अच्छा क्रेज चल रहा है।
प्राचीन काल में पठारी, बड़ोह, उदयपुर, ऐरन क्षेत्र स्थापत्य, वास्तु और मूर्ति कला का मुख्य केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में अनेक स्थापत्य और मूर्ति कला के अद्भुत पुरा स्मारक मौजूद है। प्राचीन काल से ही पठारी क्षेत्र का पत्थर मूर्ति निर्माण के लिए प्रयुक्त माना जाता रहा है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने पिछले दिनों पठारी क्षेत्र में भ्रमण के दौरान उन्होंने सुकृति कला केंद्र सैदपुर पहुंच कर अद्भुत मूर्तियों की सराहना की थी। कलेक्टर श्री गुप्ता ने पठारी के भ्रमण दौरान इन मूर्तियों को बनाने वाले कलाकारों के हुनर को देखा और उनसे बातचीत की थी।
प्रधानमंत्री ने योग आंदोलन को सुदृढ़ करने में आंध्र प्रदेश की योगंधरा पहल की सराहना की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज आंध्र प्रदेश के लोगों की दैनिक जीवन में योग को शामिल करने के लिए उनकी प्रेरक प्रतिबद्धता की सराहना की, जिससे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन को और बढ़ावा मिलेगा।
मोदी ने कल विशाखापत्तनम में 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के दौरान राज्य के जमीनी स्तर पर उत्साह और योगंधरा पहल के तहत दिखाए गए सक्रिय समर्थन की प्रशंसा की।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा एक्स पर पोस्ट किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा:
“योग एक बार फिर लोगों को एक साथ लाता है!
आंध्र प्रदेश के लोगों को बधाई, जिस तरह से उन्होंने योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए आंदोलन को मजबूत किया है। # Yogandhra पहल और विशाखापत्तनम में कार्यक्रम, जिसमें मैंने भी भाग लिया, हमेशा कई लोगों को अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए प्रेरित करेगा।”
प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति से उनके क्षेत्र की मौजूदा स्थिति के बारे में चर्चा की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन के साथ क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुई तनातनी पर गहरी चिंता व्यक्त की। बातचीत और कूटनीति के महत्व पर जोर देते हुए मोदी ने दोहराया कि दीर्घकालिक क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए तनाव कम करना जरूरी है।
एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा:
‘‘ईरान के राष्ट्रपति @drpezeshkian से बात की। हमने मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तार से चर्चा की। हाल ही में बढ़ती हुई तनातनी पर गहरी चिंता व्यक्त की। आगे बढ़ने के लिए तत्काल तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति के लिए अपना आह्वान दोहराया और क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता की शीघ्र बहाली की मांग की।’’
भारतीय नौसेना रूस में नवीनतम बहुउद्देशीय विध्वंसक स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत तमाल को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए तैयार
नईदिल्ली। भारतीय नौसेना 1 जुलाई, 2025 को रूस के कैलिनिनग्राद में अपने नवीनतम, विध्वंसक और रडार से बच निकलने में सक्षम बहुउद्देशीय स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत का जलावतरण करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वीएडीएम संजय जे सिंह मुख्य अतिथि के रूप में इस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। जलावतरण के महत्वपूर्ण अवसर पर भारत और रूस के कई उच्चस्तरीय सरकारी और रक्षा अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। "तमाल" नाम से जाना जाने वाला यह युद्धपोत पिछले दो दशकों में रूस से प्राप्त किये किए गए क्रिवाक श्रेणी के फ्रिगेट की श्रृंखला में आठवां घातक जंगी जलयान है।
तमाल जहाज तुशील श्रेणी का ऐसा दूसरा युद्धपोत है, जो अपने पूर्ववर्ती जहाजों तलवार और तेग श्रेणी का उन्नत संस्करण व गोपनीयता से कार्य करने वाला जलपोत है। इन दोनों ही श्रेणियों में से प्रत्येक में तीन-तीन जंगी जहाज हैं। तुशील श्रेणी के लिए व्यापक अनुबंध के हिस्से के रूप में भारत अपने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में स्वयं भी रूसी पक्ष से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और डिजाइन सहायता के साथ त्रिपुट श्रेणी नाम के दो महत्वपूर्ण युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है। भारतीय नौसेना जहाजों की इस श्रृंखला के निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद चार विभिन्न श्रेणियों में समान क्षमताओं व उपकरणों, और हथियार तथा सेंसर में समानता वाले दस युद्धपोतों का संचालन करेगी।
मास्को स्थित भारतीय दूतावास के मार्गदर्शन में कैलिनिनग्राद में तैनात युद्धपोत पर्यवेक्षण दल के विशेषज्ञों के एक भारतीय दल द्वारा तमाल के निर्माण की पूर्ण रूप से से निगरानी की गई थी। नौसेना मुख्यालय में, इस परियोजना का संचालन युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक के अधीन पोत निर्माण निदेशालय द्वारा किया गया।
तमाल युद्धपोत का निर्माण रूस के कैलिनिनग्राद स्थित यांतर शिपयार्ड में किया गया है और यह भारतीय नौसेना में विदेशी स्रोत से शामिल होने वाला अंतिम युद्धपोत है, जो भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया कार्यक्रमों के अनुरूप है। इस जहाज में 26% उपकरण स्वदेशी हैं, जिनमें समुद्र और जमीन दोनों पर निशाना साधने के लिए लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस भी शामिल है। इस जहाज के शस्त्रागार में अपने पूर्ववर्ती युद्धपोतों की तुलना में महत्वपूर्ण बदलाव किये गए हैं, जिनमें लंबवत प्रक्षेपित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, उन्नत 100 मिलीमीटर तोप, मानक 30 मिलीमीटर गन क्लोज-इन हथियार प्रणाली के आलावा आधुनिक समय की ईओ/आईआर प्रणाली, अत्यधिक भार वाले टारपीडो, तत्काल हमला करने वाले पनडुब्बी रोधी रॉकेट और अनेक निगरानी एवं अग्नि नियंत्रण रडार तथा अन्य प्रणालियां शामिल हैं।
मारक प्रणालियों में बढ़ोतरी हेतु हवाई पूर्व चेतावनी और बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर भी तैनात हैं, जो तमाल के डेक से संचालित हो सकते हैं। युद्धपोत के लड़ाकू सामर्थ्य को नेटवर्क केंद्रित युद्धक क्षमताओं और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली द्वारा बढ़ाया गया है। तमाल अपने भार से कहीं अधिक शक्तिशाली है, इसका टनभार-से-अग्नि अनुपात भी बहुत ज्यादा है। इसकी सहनशक्ति काफी बढ़ी हुई है और इसकी अधिकतम गति 30 नॉट से ज्यादा है।
पहली बारिश में ही खुल गई भ्रष्ट निर्माण की पोल, ‘फीता कटने’ से पहले ही ढह गया 6 करोड़ का पुल
झारखंड में एकबार फिर भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। यहां धनबाद में मानसून की पहली बारिश में ही छह करोड़ रुपये की लागत से बना पुल ढह गया। यह पुल जमुनिया नदी पर बनाया गया था जोकि उद्घाटन से पहले ही टूट गया। यह पुल धनबाद और बोकारो जिलों को जोड़ने के उद्देश्य से बाघमारा के माटीगढ़ डेम कॉलोनी के पास बनाया गया था, लेकिन हालिया बारिश के बाद इसका एक हिस्सा और एप्रोच रोड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
नीय लोगों ने पुल निर्माण में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पुल का एक हिस्सा टूट गया। इसके साथ ही अप्रोच सड़क में बड़ी-बड़ी दरारें भी आ गई हैं। यह परियोजना मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल धनबाद द्वारा संचालित की जा रही थी। 10 अगस्त 2022 को तत्कालीन विधायक और वर्तमान सांसद ढुलू महतो ने इस पुल का शिलान्यास किया था।
स्थानीय निवासी विजय चौहान ने कहा कि पुल की हालत यह दर्शाती है कि निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि जब उद्घाटन से पहले ही पुल टूट जाए तो यह प्रशासन और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है। इस घटना के सामने आते ही मामले पर लीपापोती शुरू हो गई है, वही आम जनता में रोष व्याप्त है और लोग ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पुल निर्माण का कार्य प्रीति इंटरप्राइजेज नामक कंपनी को सौंपा गया था। ग्रामीण विकास प्रमंडल धनबाद के एग्जक्यूटिव इंजीनियर नरेंद्र कुमार ने मौके का मुआयना किया और बताया कि कुल छह करोड़ की इस परियोजना में अभी डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कार्य शेष थे और संवेदक को निर्देश दिया गया है कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत तुरंत की जाए।
केन्या और मेडागास्कर का दौरा करेंगे रक्षा राज्य मंत्री सेठ और भारतीय प्रतिनिधिमंडल
नईदिल्ली। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल 23 से 26 जून, 2025 तक केन्या और मेडागास्कर की यात्रा पर रहेगा। रक्षा राज्य मंत्री इस दौरे के पहले चरण में 23 जून को ताइता-तवेटा काउंटी में स्मारक स्तंभ (भारत और केन्या के शहीद सैनिकों के सम्मान में समर स्मारक) के संयुक्त अनावरण के लिए केन्या की यात्रा करेंगे। संजय सेठ दूसरे चरण में 26 जून को एंटानानारिवो में मेडागास्कर की स्वतंत्रता की 65वीं वर्षगांठ और मालागासी सशस्त्र बलों के गठन के समारोह में भाग लेने के लिए मेडागास्कर का दौरा करेंगे।
भारत और केन्या समुद्री पड़ोसी राष्ट्र हैं। दोनों देशों के बीच समकालीन संबंधों की विशेषता उच्च स्तरीय आदान-प्रदान, मजबूत व्यापार एवं निवेश, केन्या से चिकित्सा मूल्य यात्रा और व्यापक जन-जन संपर्क हैं। दोनों देशों के बीच उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष की एक साझा विरासत रही है। कई भारतीयों ने केन्या के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और उसका सहयोग किया।
भारत और मेडागास्कर के बीच भी बहुआयामी संबंध हैं, जो ऐतिहासिक संबंधों, साझा मूल्यों व क्षेत्रीय स्थिरता तथा विकास के प्रति वचनबद्धता पर आधारित हैं। यह साझेदारी राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में फैली हुई है, जो पारस्परिक विकास एवं सहयोग के लिए साझा दृष्टिकोण को उजागर करती है। दोनों अफ्रीकी देशों की यह यात्रा केन्या के रक्षा मंत्रालय के कैबिनेट सचिव (रक्षा मंत्री, केन्या) और मेडागास्कर के मिनिस्टर ऑफ आर्म्ड फोर्सेस के निमंत्रण पर हो रही है।
इरेडा ने सुंदर नर्सरी में 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया
नईदिल्ली। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसई भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (आईआरईडीए) ने सुंदर नर्सरी, नई दिल्ली में 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्सव में सक्रिय रूप से भाग लिया। एमएनआरई, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा अन्य सीपीएसई और विभागों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम को इस वर्ष की वैश्विक विषय वस्तु “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” के साथ मनाया गया, जिसमें व्यक्तिगत कल्याण और पृथ्वी पर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
इस कार्यक्रम में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी, उपभोक्ता कार्य विभाग की सचिव निधि खरे, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। भाग लेने वाले मंत्रालयों और सीपीएसई के बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने योग सत्र में भाग लिया, जिससे स्वास्थ्य, जागरूकता और प्रकृति के साथ सामंजस्य की सामूहिक भावना को बढ़ावा मिला।
इरेडा के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार दास तथा इरेडा के निदेशक (वित्त) डॉ. बिजय कुमार मोहंती ने इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस अवसर पर दास ने शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अक्षय ऊर्जा और सार्वजनिक सेवा के गतिशील और प्रभावशाली क्षेत्रों में लगे पेशेवरों से विशेष रूप से, योग को दैनिक अभ्यास के रूप में अपनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने देश के लिए स्वच्छ और हरित ऊर्जा समाधानों को आगे बढ़ाने के अपने मिशन के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए इरेडा की प्रतिबद्धता को दोहराया।
रिचालन तैनाती के तहत आईएनएस तेग पहुंचा मॉरीशस के पोर्ट लुईस
नईदिल्ली। दक्षिण पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत आईएनएस तेग 19 से 22 जून 2025 तक पोर्ट लुइस, मॉरीशस का दौरा कर रहा है। यह जहाज मॉरीशस नेशनल कोस्ट गार्ड (एनसीजी) के जहाजों और विमानों के साथ मिलकर मॉरीशस के ईईजेड की संयुक्त निगरानी करेगा और वैश्विक साझा संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अवैध, अप्रतिबंधित और अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने की समस्या से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा। यह क्षेत्र में सहकारी समुद्री सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। यह जहाज 21 जून 2025 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 के उपलक्ष्य में एक संयुक्त योग सत्र का आयोजन भी करेगा , जिसमें भारतीय नौसेना, एनसीजी के कर्मचारी और भारतीय प्रवासी सदस्य शामिल होंगे।
भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े के एक स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तेग को 27 अप्रैल 2012 को कमीशन किया गया था। पोर्ट लुइस में अपने बंदरगाह कॉल के दौरान, जहाज की गतिविधियों में पेशेवर और सामाजिक बातचीत, एनसीजी कर्मियों का बंदरगाह प्रशिक्षण, सामुदायिक सेवा और खेल गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। 19 जून को पोर्ट लुइस पहुंचने पर, कमांडिंग ऑफिसर ने सीओएमसीजी, पुलिस आयुक्त और कैबिनेट सचिव से मुलाकात की और भारत-मॉरीशस समुद्री सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
मॉरीशस एनसीजी कर्मियों को आईएनएस तेग पर अग्निशमन, क्षति नियंत्रण और बुनियादी नाविक कौशल जैसे विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है। यहां आईएनएस तेग के चालक दल को एनसीजी की सुविधाओं से परिचित कराया जाएगा। एनसीजी के कर्मियों के लिए मैत्रीपूर्ण खेल कार्यक्रम और जहाज के चालक दल के लिए मनोरंजक गतिविधियों की भी योजना बनाई गई है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करना है।
जवानों और किसानों के सम्मान के लिए काम कर रही है प्रदेश सरकार : डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार देश की सीमा पर जान की बाजी लगाने वाले और सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों तथा खेतों में कड़ी मेहनत कर अन्न पैदा करने वाले किसानों के सम्मान के लिए काम कर रही है। हमारी सरकार कमजोर और गरीब वर्ग की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खरगोन जिले के बेड़िया में विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत अम्बा-रोडिया माइक्रो उदवहन सिंचाई योजना का लोकार्पण सहित 266 करोड़ रुपए की लागत के 24 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने सिकलसेल के मरीजों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वीकृति के प्रमाण-पत्र तथा हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर तरक्की कर रहा है और विश्व में देश का नाम हो रहा है। हमारी सरकार किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं की जिंदगी बदलने और उन्हें खुशहाल बनाने का काम कर रही है। निमाड़ क्षेत्र में मां नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है और इससे खेतों में फसले लहलहा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को सम्मान निधि देने की योजना बनाई है और किसानों को इसका लाभ भी मिल रहा है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां गेहूं पर किसानों को प्रति क्विंटल 2600 रुपए दिए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार कृषि को प्रोत्साहन दे रही है और किसानों को उद्यमी बनने के लिए काम कर रही है। प्रदेश सरकार कपास से धागा बनाने, उससे कपड़ा बनाने और रेडीमेड गारमेंट की फैक्ट्री लगाने का अभियान चला रही है।
प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी काम कर रही है और किसानों को अनुदान पर सोलर पैनल कनेक्शन दिया जाएगा इससे किसानों की आय बढ़ेगी और वह अपने संयंत्र में पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली प्रदेश सरकार को बेच भी सकेंगे। प्रदेश सरकार ने मूंग और उड़द के समर्थन मूल्य पर खरीदी के इंतजाम किए हैं। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। देश में दूध उत्पादन में मध्य प्रदेश की भागीदारी अभी 09 प्रतिशत है इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। किसानों को गाय भैंस पालन के लिए 25 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। राज्य सरकार के समग्र प्रयासों से अब प्रति व्यक्ति आय 11 हजार रूपये से बढ़कर एक लाख 52 हजार रूपये हो गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शासकीय सेवकों के 9 सालों से रुके प्रमोशन के मामले को हल कर दिया है और अब अनुसूचित जाति, जनजाति और सामान्य वर्ग के शासकीय सेवकों के प्रमोशन का रास्ता साफ कर दिया है। प्रमोशन होने से 2 लाख पद रिक्त होंगे और इससे नए लोगों की भर्ती का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार शासकीय सेवाओं में भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देगी। आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।
आत्मनिर्भरता और आत्म गौरव का प्रभावी माध्यम ग्रामीण पर्यटन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Bhopal News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्रामीण पर्यटन आत्मनिर्भरता और आत्म गौरव का प्रभावी माध्यम है। ग्राम स्तर पर पर्यटन गतिविधियों से जहां युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक उन्नति के अवसर उपलब्ध होते हैं, वहीं पर्यटन गतिविधियां, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, तीज-त्योहार-पर्व और खानपान को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी सहायक होती हैं। प्रदेश में विकसित हो रहे होम-स्टे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के "अतिथि देवो भव:" के भाव को चरितार्थ करने का माध्यम बन रहे हैं। होम-स्टे संचालनकर्ता और राज्य सरकार का यह प्रयास है कि प्रदेश में आने वाले सभी अतिथि प्रदेश के बारे में सकारात्मक छवि और अच्छी स्मृतियां साथ लेकर जाएं।
पर्यटन के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य विभाग आदि समन्वित रूप से इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। भारतीय संस्कृति में तीर्थाटन की परंपरा सदियों से रही है। दुनिया के लोग शौक और आनंद के लिए घर से निकलते हैं, वहां भारत के लोग चारधाम की मोक्ष यात्रा पर निकलते हैं, जहां वे सनातन सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए अन्य प्रदेशों की विविध जीवनशैली और परंपराओं से परिचित होते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भारतीय मूल्यों के अनुरूप परस्पर विश्वास की भावना को बढ़ा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल के बावजूद भी देश प्रगति पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण रंग पर्यटन संग राज्य स्तरीय उत्सव को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण पर्यटन पर केंद्रित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ग्रामीण रंग पर्यटन संग उत्सव के अंतर्गत विभिन्न जिलों के प्रतिभागियों और संस्थाओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही चाक पर मिट्टी की कलाकृतियां भी बनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म मिशन के लिए डेडिकेटेड माइक्रो वेबसाइट लॉन्च की और प्रदेश के विभिन्न गांवों में निर्मित 241 होम-स्टे का वर्चुअल लोकार्पण किया।
कार्यक्रम में ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए सिग्निफाइंग और टूरिज्म बोर्ड के बीच 61 गांवों में एलईडी एवं सोलर लाइट्स लगाने के लिए एमओयू का आदान प्रदान किया गया। साथ ही स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी और टूरिज्म बोर्ड के बीच फिल्म निर्माण एवं डिजिटल प्रमोशन के लिए एमओयू और एमपी टूरिज्म बोर्ड एवं एमपीएसईडीसी के बीच एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।
FASTag Annual Pass : 3,000 रुपये में 200 टोल क्रॉसिंग, 7,000 रुपये तक की बचत
नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को सस्ता और सुगम बनाने के लिए FASTag आधारित वार्षिक पास की घोषणा की है। यह पास 15 अगस्त 2025 से लागू होगा और इसकी कीमत मात्र 3,000 रुपये होगी। यह पास निजी गैर-वाणिज्यिक वाहनों जैसे कार, जीप, और वैन के लिए उपलब्ध होगा, जो एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग (जो भी पहले हो) तक वैध रहेगा। इस नई योजना से यात्रियों को 7,000 रुपये तक की बचत होने की संभावना है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि यह पास खरीदना अनिवार्य नहीं है और मौजूदा FASTag के साथ ही इसे सक्रिय किया जा सकता है। यह पहल टोल भुगतान को सरल बनाएगी और टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ को कम करेगी।
FASTag वार्षिक पास क्या है?
नितिन गडकरी ने बताया कि FASTag वार्षिक पास की कीमत 3,000 रुपये होगी, जो राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) के टोल प्लाजा पर मान्य होगा। यह पास एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहेगा। एक टोल क्रॉसिंग की औसत लागत 15 रुपये होगी, यानी 200 क्रॉसिंग के लिए कुल खर्च 3,000 रुपये। गडकरी के अनुसार, वर्तमान में एक टोल क्रॉसिंग की औसत लागत 50 रुपये है, जिसके हिसाब से 200 क्रॉसिंग का खर्च 10,000 रुपये हो सकता है। इस तरह, यह पास 7,000 रुपये तक की बचत कराएगा। यह पास विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जो नियमित रूप से राजमार्गों पर यात्रा करते हैं।
किसके लिए है यह पास?
यह पास केवल निजी गैर-वाणिज्यिक वाहनों जैसे कार, जीप, और वैन के लिए है। व्यावसायिक वाहनों (ट्रक, बस आदि) के लिए यह लागू नहीं होगा। यदि इस पास का उपयोग व्यावसायिक वाहनों के लिए किया गया, तो इसे तत्काल निष्क्रिय कर दिया जाएगा। पास केवल राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर मान्य होगा। राज्य राजमार्गों (SH) या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित टोल प्लाजा पर यह सामान्य FASTag की तरह काम करेगा, जहां सामान्य टोल शुल्क लागू होगा।
क्या इसे खरीदना जरूरी है?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिनके पास पहले से FASTag है, उन्हें नया FASTag खरीदने की जरूरत नहीं है। वार्षिक पास को मौजूदा FASTag पर सक्रिय किया जा सकता है, बशर्ते वह पात्रता मानदंडों को पूरा करता हो। इसके लिए FASTag का वाहन के विंडशील्ड पर ठीक से चिपका होना, वैध वाहन पंजीकरण संख्या से जुड़ा होना, और ब्लैकलिस्टेड न होना जरूरी है। यह पास वैकल्पिक है और इसे खरीदना अनिवार्य नहीं है।
आवेदन कैसे करें?
वार्षिक पास को सक्रिय करने के लिए एक समर्पित लिंक जल्द ही राजमार्ग यात्रा ऐप (Rajmarg Yatra App) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें वाहन का पंजीकरण नंबर और FASTag विवरण दर्ज करना होगा। 3,000 रुपये का भुगतान UPI, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, या नेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है। पास भुगतान के 24 घंटे बाद सक्रिय हो जाएगा।
वर्तमान व्यवस्था और बचत का गणित-
वर्तमान में, एक टोल प्लाजा के लिए मासिक पास 340 रुपये में उपलब्ध है, जिसका सालाना खर्च 4,080 रुपये (12 x 340) होता है। यह पास केवल एक टोल प्लाजा के 20 किमी के दायरे में मान्य होता है। अगर यात्री कई टोल प्लाजा से गुजरता है, तो उसे अलग-अलग पास खरीदने पड़ते हैं, जिससे खर्च बढ़ जाता है। इसके विपरीत, 3,000 रुपये का वार्षिक पास पूरे देश के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर 200 टोल क्रॉसिंग के लिए मान्य होगा, जिससे प्रति क्रॉसिंग लागत 15 रुपये होगी। यह न केवल 7,000 रुपये तक की बचत कराएगा, बल्कि कई टोल प्लाजा पर बार-बार भुगतान की परेशानी को भी खत्म करेगा।
वीरांगना के सम्मान के लिये प्रदेश सरकार तत्पर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Bhopal News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीरांगना लक्ष्मीबाई की शौर्यगाथा जन-जन तक पहुँचना चाहिए। ग्वालियर में पिछले 26 वर्षों से महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित होने वाला बलिदान मेला एक सार्थक प्रयास है। बलिदान मेले के आयोजन के लिये सरकार पूरा सहयोग करेगी। इसके साथ ही वीरांगनाओं के जीवन पर आधारित नाट्य मंचनों के लिये पाँच लाख रूपए की धनराशि देने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल जी के जन्म शताब्दी वर्ष पर उनके सम्मान में ग्वालियर में मंत्री परिषद की बैठक होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 167वी वर्षगांठ के अवसर पर महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान मेले में शहीद मंगल पाण्डेय के साथी दुर्गा सिंह के वंशज, शौर्य चक्र प्राप्त शहीद विवेक सिंह तोमर की धर्मपत्नी एवं नेशनल क्रिकेटर कु. वैष्णव शर्मा को भी सम्मानित किया। बलिदान मेले के अवसर पर पूज्य महंत रामदास जी महाराज दंदरौआ सरकार, प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र लोधी, बलिदान मेला के संस्थापक अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, क्षेत्रीय सांसद भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री संगठन हितानंद शर्मा, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य आरएसएस यशवंत इंन्द्रापुरकर, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, सभापति नगर निगम मनोज तोमर, पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, भाजपा जिला अध्यक्ष शहर जयप्रकाश राजौरिया, ग्रामीण अध्यक्ष प्रेम सिंह राजपूत सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार हमेशा वीरांगनाओं के सम्मान के लिए समर्पित रही है, वीरांगना के रूप में साक्षात् देवी दुर्गा ने धरती पर जन्म लेकर हमारे मध्य प्रदेश के ग्वालियर की भूमि पर अपना बलिदान दिया, यह भूमि हमारे लिए तीर्थ के समान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर की धरती पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान विभूतियों ने देश के विकास में अतुलनीय कार्य किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में नई शिक्षा नीति लागू कर युवाओं को देश की शौर्य गाथाओं, संस्कृति, संगीत एवं अन्य विधाओं से अवगत कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। प्रदेश सरकार अटल बिहारी वाजपेयी की नदी जोड़ों योजना पर तेजी से कार्य कर रही है। इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ ग्वालियर-चंबल संभाग को मिलेगा। साथ ही ग्वालियर में शीघ्र ही टेक्नोलॉजी हब भी स्थापित होगा, जिससे अनेकों अनेक युवाओं को रोजगार मिल सकेगा।
वीरांगना मेला के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि 166 साल पहले ग्वालियर की इसी धरा पर वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भारत माता के चरणों में अपनी आहुति दी थी। बलिदान मेला देश भक्ति जगाने का अनुष्ठान एवं महायज्ञ है। वर्ष 2000 से यह आयोजन निरंतर किया जा रहा है। पवैया ने कहा कि बलिदान मेला जिस स्थान पर आयोजित किया जाता है इस धरा पर महारानी लक्ष्मीबाई का रक्त शामिल है। यह धरती जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि चंदन है। उन्होंने बलिदान मेले के आयोजन के संबंध में जानकारी भी दी।
विकसित कृषि संकल्प अभियान की सफलता को आगे बढ़ाएंगे, ये अभियान थमेगा नहीं- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देशभर में विकसित कृषि संकल्प अभियान बहुत सफल हुआ है लेकिन ये अभियान थमेगा नहीं, हम लगातार किसानों के बीच खेतों में जाकर खेती को उन्नत और किसानों को समृद्ध बनाने का प्रयत्न करते रहेंगे। अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिकों, अधिकारियों व कृषि विशेषज्ञों की 2170 टीमों ने देशभर में 1.42 लाख से अधिक गांवों में पहुंचकर 1.34 करोड़ से ज्यादा किसानों से सीधा संवाद किया है। अभियान में मुख्यमंत्रीगण, केंद्रीय मंत्रीगण, राज्यों के मंत्री, सांसद, विधायक सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। चौहान ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी देते हुए अभियान के आधार पर तत्काल कुछ निर्णयों का ऐलान भी किया है।
प्रधानमंत्री ने जी7 आउटरीच सत्र को संबोधित किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कनानास्किस में जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भाग लिया। उन्होंने 'ऊर्जा सुरक्षा: बदलती दुनिया में पहुंच और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिए विविधीकरण, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचा' विषय पर एक सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री महामहिम मार्क कार्नी को उनके निमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया और जी7 को अपनी यात्रा के 50 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा भविष्य की पीढ़ियों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों में से एक है। समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उपलब्धता, पहुंच, सामर्थ्य और स्वीकार्यता ऐसे सिद्धांत हैं जो ऊर्जा सुरक्षा के प्रति भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भले ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, लेकिन इसने समय से पहले अपनी पेरिस प्रतिबद्धताओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है। एक टिकाऊ और हरित भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, मिशन लाइफ और वन सन-वन वर्ल्ड-वन ग्रिड जैसी कई वैश्विक पहल की हैं और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से उन्हें और मजबूत करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अनिश्चितता और संघर्षों ने ग्लोबल साउथ के देशों पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है और भारत ग्लोबल साउथ की आवाज को विश्व मंच पर सुनाने को अपनी जिम्मेदारी समझता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एक स्थायी भविष्य के बारे में गंभीर है तो दुनिया के लिए ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और चिंताओं को समझना जरूरी है। सुरक्षा चुनौतियों पर जोर देते हुए उन्होंने देशों से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान किया। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को मजबूत समर्थन देने के लिए वैश्विक समुदाय का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरी मानवता पर हमला था। उन्होंने आतंकवाद का समर्थन और उसे बढ़ावा देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया।
उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद से निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए और आतंकवाद का समर्थन करने वालों को कभी भी पुरस्कृत नहीं किया जाना चाहिए। आतंकवाद को मानवता के लिए एक गंभीर खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने विचार करने के लिए कुछ अहम सवाल रखे:
-क्या देश आतंकवाद से उत्पन्न गंभीर खतरे को तभी समझेंगे जब वे इसका निशाना बनेंगे?
-आतंकवाद के अपराधियों और इसके पीड़ितों की बराबरी कैसे की जा सकती है?
-क्या वैश्विक संस्थाएं आतंकवाद के प्रति मूकदर्शक बनी रहेंगी?
प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी, एआई और ऊर्जा के बीच संबंधों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एआई एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है, लेकिन प्रौद्योगिकी में स्वयं ऊर्जा का व्यापक उपयोग होता है, और स्वच्छ एवं हरित पहलों के माध्यम से इसे कैसे टिकाऊ बनाया जाए, इसकी रणनीति बनाना महत्वपूर्ण है। प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए भारत के मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभावी होने के लिए किसी भी प्रौद्योगिकी को आम लोगों के जीवन में मूल्य जोड़ना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एआई से संबंधित वैश्विक शासन के मुद्दों का समाधान निकालना एआई की चिंताओं से निपटने और क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एआई के युग में महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और लचीली आपूर्ति श्रृंखला होना महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत में प्रचुर मात्रा में मौजूद गुणवत्तापूर्ण और विविध डेटा जिम्मेदार एआई के लिए महत्वपूर्ण है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर बड़ा हादसा, लैंडस्लाइड की चपेट में आए कई लोग, दो की गई जान, तीन लोग घायल
उत्तराखंड: केदारनाथ पैदल मार्ग पर बड़ा हादसा हो गया. इस हादसे में दो लोगों के मौत की खबर है, जबकि तीन लोग घायल बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू टीम ने घायलों का रेस्क्यू किया और उन्हें हॉस्पिटल भिजवाया. वहीं एक व्यक्ति लापता है, जिसकी तलाश की जा रही है. दो दिन पहले भी भारी बारिश के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग पर एक व्यक्ति की मौत हुई थी।
जानकारी के मुताबिक केदारनाथ धाम पैदल मार्ग पर आज बुधवार 18 जून सुबह करीब 11.20 जंगलचट्टी गधेरे के पास ऊपर पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरे. पांच लोग इस मलबे की चपेट में आ गए. मामले की सूचना मिलते ही चौकी जंगलचट्टी पर नियुक्त पुलिस बल और डीडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
बताया जा रहा है कि मलबे की चपेट में आने से कुछ लोग खाई में भी गिर गए थे, जिन्हें रेस्क्यू कर ऊपर लाया गया. अब तक मिली जानकारी के अनुसार 3 व्यक्तियों को चोटें आयी हैं, जिनमें से एक महिला को हल्की चोटें और दो पुरुषों को गंभीर चोटें आयी हैं. सभी घायलों को गौरीकुण्ड के लिए रेफर किया गया है. इसके अलावा दो लोगों की मौत हुई है. इसके अलावा एक व्यक्ति लापता भी है. सभी के नाम पते की जानकारी ज्ञात की जा रही है. इस स्थल पर पुलिस सुरक्षा के बीच यात्रियों का आवागमन कराया जा रहा है।
नर्मदा नदी का अचानक बढ़ा जलस्तर, बीच धारा में फंसे तीन लोग….
ओंकारेश्वर। तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दो युवक और एक बालक नर्मदा स्नान के नगरघाट पर पहुंचे। तब घाट पर पानी कम था। तीनों नर्मदा नदी के बीच चट्टानों पर पहुंच गए। कुछ ही देर बाद ओंकारेश्वर बांध से बिजली बनाने के लिए टरबाइन चलाकर पानी छोड़ा गया, जब तक कुछ समझ पाते तीनों तेज बहाव में फंस गए। गनीमत रही कि वहां मौजूद नाविक संघ होमगार्ड, एसडीआरएफ के जवानों की तत्परता से तीनों को सुरक्षित बचा लिया गया।
जानकारी के मुताबिक, विदिशा निवासी बंटी पिता दोजराम (29), सुनील पिता किशनलाल और अंश (4), नगरघाट स्थित पत्थरों पर नहा रहे थे। इसी दौरान डैम से पानी छोड़े जाने के कारण नदी का बहाव अचानक तेज हो गया। कई बार चेतावनी देने के बावजूद तीनों लोग बाहर नहीं निकले और बहाव में फंस गए।
तीनों की जान खतरे में देख फंसे हुए तीर्थ यात्रियों को बचाने के ओंकारेश्वर नाविक संघ के सेलू पिता मंगू सबसे पहले बिना इंजन वाली नाव लेकर पहुंचे। लेकिन इंजन नहीं होने के कारण उनका प्रयास सफल नहीं हो सका। इसके बाद नाविक संघ पिंटू उर्फ पंकज केवट पिता मंगू अपनी डीजल इंजन वाली नाव लेकर पहुंचे और तीनों को सुरक्षित नगरघाट पर वापस लाया