देश-विदेश
भारत एक आर्थिक महाशक्ति और विश्व के भविष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है : स्कॉट फॉल्कनर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुनिया के शीर्ष नेताओं में से एक और दूसरों के लिए प्रेरणा : पूर्व अमेरिकी हाउस चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर स्कॉट फॉल्कनर
नई दिल्ली | पूर्व अमेरिकी हाउस चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर स्कॉट फॉल्कनर ने गुरुवार को कहा कि भारत एक आर्थिक महाशक्ति बन रहा है और दुनिया के भविष्य को आकार देने में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि देश 21वीं सदी के विकास में सबसे आगे है, जो अपने लोगों की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और शासन को सहजता से एकीकृत कर रहा है। फॉल्कनर एक मीडिया कॉन्क्लेव में भाग लेने के लिए एक सप्ताह के भारत दौरे पर हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते हुए फॉल्कनर ने उन्हें दुनिया के शीर्ष नेताओं में से एक और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। प्रधानमंत्री संग्रहालय का दौरा करने के बाद उन्होंने दुनिया भर में ऐसे और संग्रहालयों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह संग्रहालय एक प्रेरणास्रोत है और इसे व्यापक रूप से साझा किया जाना चाहिए।
फॉल्कनर ने प्रधानमंत्री संग्रहालय और नवनिर्मित संसद का दौरा किया। अपने दौरे के बाद, उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की प्रगति और नेतृत्व की सराहना की। पहले उन्होंने रीगन अभियान के लिए डायरेक्टर ऑफ पर्सनल के रूप में कार्य किया और प्रेसिडेंसियल ट्रांजिशन एवं व्हाइट हाउस स्टाफ का हिस्सा रहे थे। उन्होंने फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन, जनरल सर्विसेस एडमिनिस्ट्रेशन और पीस कॉर्प्स में कार्यकारी पदों पर कार्य किया है।
फॉल्कनर ने अमेरिकन यूनिवर्सिटी से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री और लॉरेंस यूनिवर्सिटी से गवर्नमेंट में बैचलर डिग्री हासिल की है। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से भी पढ़ाई की है और वर्तमान में शेफर्ड यूनिवर्सिटी के जॉर्ज वाशिंगटन इंस्टीट्यूट ऑफ लिविंग एथिक्स के वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत हैं।
फॉल्कनर नए संसद भवन के दौरे के बाद बताया कि वे इस भवन की अत्याधुनिक वास्तुकला और तकनीकी नवाचारों से बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से कई भाषाओं के कुशल प्रबंधन, एक साथ अनुवाद की सुविधाओं और पूरी तरह से स्वचालित दस्तावेज प्रणाली के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया इनसे सीख सकती है।
पीएम जनमन योजना से बदल रहा जनजातीय समुदाय का जीवन : राज्यपाल पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों को प्राथमिकता के साथ लाभान्वित कर रही हैं। पीएम जन-मन योजना के द्वारा बैगा, सहरिया एवं भारिया विशेष पिछड़ी जनजातीय बसाहटों में पक्का आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का विशेष प्रयास किया जा रहा है। राज्यपाल ने यह बात कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील के पीएम जनमन ग्राम कोठी में बैगा जनजाति के लोगों से संवाद के दौरान कही।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के रूप में जनमन ग्रामों के समग्र विकास के लिए दूरदर्शी और संवदेनशील नेतृत्व मिलना हम सब के लिए सौभाग्य की बात है। प्रधानमंत्री जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशील हैं। समाज के पिछड़े वर्ग और व्यक्तियों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी सतत् काम कर रहे हैं। राज्यपाल पटेल जनमन ग्राम कोठी में बैगा हितग्राहियों के साथ संवाद कार्यक्रम के पहले, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के हितग्राहियों के घर भी पहुचें। उन्होंने योजना से लाभ मिलने के बाद हितग्राही के जीवन में आए बदलाव को जाना।
राज्यपाल पटेल ने सर्वप्रथम पीएम जनमन आवास हितग्राही चंदाबाई बैगा, भल्लू बैगा और सोनी बैगा को प्रधानमंत्री आवास योजना से बने पक्के आवास में विधि-विधान और पूजा-अनुष्ठान के साथ गृह प्रवेश कराया। राज्यपाल श्री पटेल का बैगा समुदाय के लोगों ने तिलक लगाकर और शाल पहनाकर स्वागत किया। बैगा परिवारों ने उपहार स्वरूप उन्हें लोक कला पर आधारित पेन्टिंग भेंट की गई।
राज्यपाल ने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक विकास हुआ है। महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। महिलाएं अब स्वयं का रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही है। परिवार में भी महिलाओं का मान सम्मान बढ़ा है। राज्यपाल श्री पटेल ने संवाद कार्यक्रम में लाभान्वित हितग्राहियों से चर्चा भी की। इस दौरान आजीविका मिशन के मुर्गी पालन समूह की दीदी राजकुमारी ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद करीब 8 हजार रूपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। पति खेती-किसानी का काम करते हैं, जिससे उनका अच्छे से जीविकोपार्जन हो रहा है।
देश के दिल मध्यप्रदेश में पर्यटन के स्वर्ण युग का हुआ आरंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हिंदुस्तान के दिल मध्यप्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विविधता के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहाँ के घने जंगल, दुर्लभ वन्य जीव, ऐतिहासिक किले, प्राचीन मंदिर और जीवंत संस्कृति हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और योजनाओं के कारण न केवल पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ा है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश भारत के शीर्ष पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी स्वयं बता चुके हैं कि मध्यप्रदेश को एक विदेशी मैग्जीन ने दुनिया की श्रेष्ठ टूरिज्म डेस्टिनेशन में से एक माना है। राज्य सरकार की योजनाओं से राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षण मिल रहा है। साथ ही इससे प्रदेश वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर सशक्त पहचान स्थापित कर रहा है।
राज्य में 24 वन्यजीव अभयारण्य, 12 राष्ट्रीय उद्यान, 9 टाइगर रिज़र्व और 14 विश्व धरोहर स्थल स्थित हैं, जो इसे भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले राज्यों में शामिल करते हैं। इसके अलावा, 12 ज्योतिर्लिंगो में एक मात्र उज्जैन का दक्षिणमुखी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग श्रद्धालुओं के लिए अगाध आस्था के केंद्र हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया है कि राज्य सरकार पर्यटन को नए आयाम देने के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है। पर्यटन परियोजनाओं के लिए 758 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिसमें से 358 हेक्टेयर भूमि 39 निवेशकों को आवंटित की जा चुकी है। इससे राज्य में कई नए होटल, रिसॉर्ट, गोल्फ कोर्स और आधुनिक सुविधाएं विकसित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा लागू की गई पर्यटन नीति-2025 और फिल्म पर्यटन नीति 2025 निवेशकों और उद्यमियों के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत कर रही हैं। इन नीतियों के कारण पर्यटन क्षेत्र में 3 हजार 372 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आये हैं। इससे 50 हजार 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
मध्यप्रदेश अपनी प्राकृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण फिल्म निर्माताओं की फेवरेट शूटिंग डेस्टिनेशन बन चुका है। राज्य में 185 से अधिक फिल्मों और 40 अन्य प्रोजेक्ट्स की शूटिंग की जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उम्मीद जताई है कि सरकार द्वारा दी जा रही विशेष सुविधाओं और अनुदानों के कारण आने वाले वर्षों में फिल्म पर्यटन और अधिक बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में चंदेरी, ग्वालियर और भोपाल में हुई शूटिंग्स की वजह से इन क्षेत्रों के लिये पर्यटकों में आकर्षण बढ़ा है। साथ ही फिल्म निर्माताओं की नजरों में भी प्रदेश की साफ-सुथरी लोकेशन्स आई हैं।
आंध्रप्रदेश के लाल मिर्च उत्पादक किसानों के हित में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की बैठक
प्रवास से दिल्ली लौटते ही शिवराज सिंह ने लाल मिर्च उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए की बैठक
बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के कार्यान्वयन के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर हुई चर्चा
आईसीएआर द्वारा आंध्रप्रदेश में लाल मिर्च उत्पादन लागत की समीक्षा की जाएं- शिवराज सिंह
एमआईएस के तहत लाल मिर्च की कवरेज सीमा को उत्पादन के 25% से बढ़ाने के बारे में प्रस्ताव होगा
एमआईडीएच के क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित होंगे
आंध्रप्रदेश से लाल मिर्च के निर्यात के अवसरों का पता लगाने के लिए निर्यातकों की बैठक शीघ्र होगी
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने आईसीएआर को खेतों का दौरा करने के लिए विशेषज्ञ दल भेजने को कहा
बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू, केंद्रीय कृषि सचिव सहित केंद्र-राज्य के अधिकारी हुए शामिल
नई दिल्ली | आंध्रप्रदेश के लाल मिर्च उत्पादक किसानों के हित में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई चर्चा के बाद आज त्वरित कदम उठाते हुए कृषि भवन, नई दिल्ली में एक समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण की बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के कार्यान्वयन के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा हुई और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद किसानों को राहत देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। बैठक में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू तथा केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी सहित केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हुए।

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू गुरूवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में आए थे, जिनसे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात हुई थी। गुरूवार को शिवराज सिंह मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले में दूरस्थ स्थान पर पूर्व निर्धारित कायर्क्रम के लिए प्रवास पर थे। शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री नायडू से कहा था कि वे शुक्रवार सुबह दिल्ली आते ही सबसे पहले लाल मिर्च उत्पादक किसानों की समस्या हल करने के लिए बैठक करेंगे। इसी के तहत कृषि मंत्रालय के साथ ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, एपीडा, स्पाइस बोर्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) आदि संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शिवराज सिंह ने विषय के बारे में समीक्षा की।
वर्ष 2024-25 के सीजन के दौरान लाल मिर्च के उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय की बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के कार्यान्वयन के संबंध में आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर बैठक में चर्चा की गई। केंद्रीय कृषि सचिव श्री चतुर्वेदी ने विषय के बारे में विस्तार से बताया, जिस पर बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने मंत्रालयों/विभागों/संगठनों की ओर से विचार व्यक्त किए तथा सुझाव देते हुए उपाय बताएं। बैठक में मौजूद आंध्र प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान ने बताया कि लाल मिर्च की फसल में फूल आने के समय कीट का प्रकोप होने की संभावना रहती है। किसानों को अपनी फसल को कीट से बचाने के लिए किए जाने वाले नियंत्रण के उपायों पर काफी खर्च करना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप आंध्रप्रदेश में लाल मिर्च उत्पादन की लागत बढ़ जाती है, जिसके लिए उन्होंने ऐसे कीटों से किसानों को बचाने के लिए उपचारात्मक सुझाव दिया।
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि आईसीएआर द्वारा आंध्रप्रदेश में लाल मिर्च के उत्पादन लागत की समीक्षा की जाएं, तत्संबंधी रिपोर्ट केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को उपलब्ध कराई जाएं, ताकि 2024-25 सीजन के दौरान एमआईएस के तहत लाल मिर्च के मूल्य कमी भुगतान के कार्यान्वयन के लिए आंध्रप्रदेश सरकार को राज्य उत्पादन का 25% अग्रिम मंजूरी जारी की जा सके। शिवराज सिंह ने एमआईएस के तहत लाल मिर्च की कवरेज सीमा को उत्पादन के 25% से बढ़ाने के संबंध में भी प्रस्ताव तैयार करने को कहा। इसके साथ ही, एमआईडीएच के क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिए। वहीं, आंध्रप्रदेश से लाल मिर्च के निर्यात के अवसरों का पता लगाने के लिए वाणिज्य मंत्रालय, एपीडा व अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में निर्यातकों की बैठक शीघ्र ही आयोजित की जाएगी। यह भी तय हुआ कि आईसीएआर, आंध्रप्रदेश में मिर्च के खेतों का दौरा करने के लिए एक विशेषज्ञ दल भेजेगा, जो कीट संक्रमण के कारण फसल को हुए नुकसान का अध्ययन करेगा तथा प्रभावी आईपीएम उपाय सुझाएगा।
भारतीय सेना की ओर से रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और आण्विक हमलों से सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों की खरीद
नई दिल्ली | भारतीय सेना ने भारतीय खरीद (स्वदेश में ही डिजाइन, विकसित और निर्मित- आईडीडीएम) श्रेणी के अंतर्गत 80.43 करोड़ रुपये की लागत से 223 स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली के क्रय के लिए 25 फरवरी 2025 को मेसर्स एलएंडटी लिमिटेड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भारत सरकार के आत्मनिर्भरता अभियान को काफी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि उपकरणों के 80% से अधिक घटकों और उप-प्रणालियों की खरीद स्थानीय स्तर पर ही की जाएगी।

स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, ग्वालियर ने डिजाइन और विकसित किया है। यह रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी विकिरण वाले पदार्थों और आण्विक हमलों से सुरक्षा के लिए स्वदेशी उपकरणों के उपयोग के लिए राष्ट्र की पहल की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली का उपयोग पर्यावरण से वायु का नमूना लेकर रासायनिक युद्ध के लिए उपयोग में लाए जाने वाले एजेंटों (सीडब्ल्यूए) और उसके लिए तैयार किए गए विषैले औद्योगिक रसायनों (टीआईसी) का पता लगाने में किया जाता है। यह आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (आईएमएस) के सिद्धांत पर काम करता है और इसमें हानिकारक एवं विषैले पदार्थों का निरंतर पता लगाने तथा साथ ही साथ निगरानी के लिए दो अत्यधिक संवेदनशील आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (आईएमएस) सेल होते हैं। फील्ड यूनिटों में स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली को शामिल करने से इस क्षेत्र में भारतीय सेना की रक्षात्मक क्षमता में काफी वृद्धि होगी। साथ ही, शांति काल में, विशेष रूप से औद्योगिक दुर्घटनाओं से संबंधित आपदा राहत से जुड़ी परिस्थितियों में प्रतिक्रिया के लिए भी इनका उपयोग किया जा सकेगा।
दुनिया के सबसे बड़े आयोजन का आखिरी दिन बना विश्व रिकार्ड : 64 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान
महाकुम्भ में बने महारिकार्ड, अमेरिका की आबादी से दोगुने 64 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान बना विश्व रिकार्ड
दुनिया के सबसे बड़े आयोजन का आखिरी दिन एयरफोर्स के विमानों ने एयर शो निकाला
डेस्क | आज महाकुंभ का आखिरी दिन है। 13 जनवरी से शुरू हुए इस महाकुंभ में अब तक 64 करोड़ लोग संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यानी अमेरिका की आबादी से लगभग दोगुने लोग। ये एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है। केवल यही एक रिकॉर्ड नहीं है। इस महाकुंभ में और भी महारिकॉर्ड बने हैं। महाकुंभ श्रद्धालुओं की संख्या के लिहाज से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। कुंभ ही नहीं, दुनिया के किसी भी आयोजन में आज तक एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोग नहीं जुटे हैं, जितने 45 दिनों के अंदर प्रयागराज में बनाए गए एक अस्थायी शहर में जुट गए।

65 करोड़ श्रद्धालुओं के किसी एक स्थान पर जुटने का इतिहास में और कोई उदाहरण नहीं दिखता। सनातन के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था, दृढ़ निश्चय और विश्वास का ही यह फल है कि संगम तट पर इतना विशाल जनसमूह 45 दिनों में जमा हो गया। यदि इस संख्या की दुनिया भर के देशों की आबादी से तुलना की जाए, तो कई देशों की आबादी इसमें समा जाएगी।
अमेरिका की दोगुनी से ज्यादा, पाकिस्तान की ढाई गुना से अधिक और रूस की चार गुनी से ज्यादा आबादी के बराबर श्रद्धालु यहां अब तक आ चुके हैं। यही नहीं, जापान की पांच गुनी आबादी, यूके को 10 गुनी से ज्यादा आबादी और फ्रांस की 15 गुनी से ज्यादा आबादी ने यहां आकर त्रिवेणी संगम में पावन डुबकी लगाई है।
तीर्थराज प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में संख्या के लिहाज से भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। यदि देश की कुल जनसंख्या से स्नानार्थियों की तुलना की जाए तो इसके अनुसार भी लगभग 50 प्रतिशत भारत ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा ली है।
वहीं, अगर सनातन धर्मावलंबियों की बात करें तो देश के 60 प्रतिशत से ज्यादा और दुनिया के करीब 55 प्रतिशत सनातनी श्रद्धालुओं ने पावन स्नान कर लिया है। 45 दिन तक चले इस आयोजन में श्रद्धा की डुबकी लगाने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु जुटे हैं।
73 देशों के राजनयिकों के साथ भूटान नरेश नामग्याल वांगचुक समेत तमाम अन्य देशों के अतिथि यहां अमृत स्नान करने पहुंचे। यही नहीं, मां जानकी के मायके नेपाल के 50 लाख से अधिक लोग अब तक त्रिवेणी के पवित्र जल में स्नान कर महाकुंभ के साक्षी बन चुके हैं। इसके अलावा इटली, फ्रांस, यूके, पुर्तगाल, अमेरिका, इजराइल, ईरान, मॉरीसस समेत दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत साधु-संतों, श्रद्धालुओं, स्नानार्थियों और गृहस्थों का स्रान अब उस शिखर के भी पार पहुंच गया है, सीएम योगी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार जो भव्य और दिव्य महाकुंभ का आयोजन हो रहा है वह स्नानार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा।
हमारी निवेश नीतियों को सबने सराहा, निवेशकों का बढ़ा है मध्यप्रदेश पर विश्वासः शाह
भोपाल। केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भोपाल में सम्पन्न दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सिफ मध्यप्रदेश की नहीं, यह देश की उपलब्धि है। उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहन देने के लिये उठाये गये कदम भारत के विकास को भी गति देने का कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश निश्चित ही प्रमुख उद्योग राज्य बनेगा। मध्यप्रदेश में निवेशकों में निवेश करने के प्रति विश्वास बढ़ा है। स्थायी और सशक्त सरकार, पारदर्शी प्रशासन, उपयोगी नीतियां, सहयोगी सामाजिक वातावरण, आर्थिक प्रगति के लिये ऐसे आधार हैं, जो मध्यप्रदेश में मौजूद हैं। मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है जिसने जनविश्वास अधिनियम, ईज ऑफ डूइंग के माध्यम से पहल की है। निश्चित ही मध्यप्रदेश टॉप एचीवर बनेगा।
केन्द्रीय मंत्री शाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सूत्र वाक्य 'विरासत भी और विकास भी' को मध्यप्रदेश चरितार्थ कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष@2047 तक पूर्ण विकसित भारत का संकल्प किया है। भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। इसमें मध्यप्रदेश अपना योगदान देते हुए महत्वपूर्ण सहयोगी राज्य सिद्ध होगा। मध्यप्रदेश ने लोकल और ग्लोबल दोनों स्तर पर प्रगति के प्रयासों में सहभागी बनने का सराहनीय कार्य किया है। यह ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट बहुत सफल रही है। इसकी सफलता के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी टीम बधाई और अभिनंदन की पात्र हैं। मध्यप्रदेश में इस समिट में हुए एमओयू जल्द ही मूर्त रूप लेकर प्रदेश के विकास को गति प्रदान करेंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. द्वारा किया गया रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का प्रयोग सफल रहा। सम विकास के लिये ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। अन्य राज्य भी यह प्रयोग कर सकते हैं। प्रत्येक क्षेत्र में अलग तरह का निवेश संभव होता है। मध्यप्रदेश में फिजीकल पोटेंशियल, सेक्टोरल और ग्लोबल पोटेंशियल के मार्ग प्रशस्त हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की भावना के अनुरूप मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है।
कोलकाता में सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके... 5.1 तीव्रता का था भूकंप
डेस्क। भूकंप के झटके से एक बार धरती कांपी है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सोमवार सुबह लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार,आज सुबह रिक्टर पैमाने पर 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र बंगाल की खाड़ी में था।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। एनसीएस ने बताया कि भूकंप आज सुबह 6:10 बजे 91 किलोमीटर की गहराई पर आया। अभी तक किसी तरह के जान और माल के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आईटीसी के चेयरमैन श्री पुरी एवं सीआईआई और एक्सिस बैंक के प्रतिनिधियों ने की सौजन्य भेंट
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से रविवार को आईटीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं भारतीय उद्योग परिसंघ (कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज - सीआईआई) के प्रेसिडेंट संजीव पुरी, सीआईआई के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बैनर्जी, रीजनल डायरेक्टर राजेश कपूर एवं अनिरुद्ध चौहान ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में सौजन्य भेंट की। इस दौरान औद्योगिक विकास और परस्पर व्यापारिक सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एक्सिस बैंक, मुंबई के वाइस प्रेसिडेंट संदीप ओतुरकर व अन्य अधिकारियों ने भी समत्व भवन में ही मुलाकात की। बैठक में वित्तीय क्षेत्र में सहयोग और प्रदेश में बैंकिंग सुविधाओं के आवश्यकतानुसार विस्तार पर विचार-विमर्श किया गया।
गैस, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज की 84 दवाइयां टेस्टिंग में फेल, सरकार ने जारी किया अलर्ट
डेस्क। देश भर में औषधि नियंत्रण अधिकारियों द्वारा दवाओं की टेस्टिंग की गई, जिसके रिपोर्ट चौंकाने वाले सामने आए हैं। सामान्य रूप से निर्धारित स्टेरॉयड और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं सहित करीब 84 दवाओं की गुणवत्ता मानक स्तर की भी नहीं थी। नई दवाओं और दवाओं की टेस्टिंग करने वाली एजेंसी सीडीएससीओ ने इस बारे में अलर्ट जारी किया है।
बता दें कि सीडीएससीओ हर महीने बाजार में बेची जा रही गैर-मानक गुणवत्ता वाली दवाओं के बारे में अलर्ट जारी करता है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने विभिन्न फर्मों द्वारा निर्मित दवाओं के 84 बैचों को गैर-मानक गुणवत्ता का पाया। इसमें एसिडिटी, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और जीवाणु संक्रमण जैसी सामान्य स्थितियों के लिए निर्धारित कुछ दवाएं शामिल हैं।
हाल ही में सीडीएससीओ ने टेस्टिंग के लिए नए दिशा-निर्देश पेश किए। इसमें कहा गया है कि सभी ड्रग इंस्पेक्टर को एक महीने में कम से कम 10 नमूने एकत्र करने चाहिए। साथ ही, नए दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि नमूने लेने की योजना इस तरह से बनानी चाहिए कि नमूने उसी दिन प्रयोगशाला को भेजे जाएं।
चीनी- रूसी विदेश मंत्रियों से मिले जी 20 में : विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर
नई दिल्ली | विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका में चल रहे जी 20 सत्र में अपने संबोधन में वैश्विक शांति, सहयोग और कूटनीति पर जोर दिया। उन्होंने रूस, चीन और अन्य साझेदार देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के समाधान के लिए बहुपक्षीय सहयोग, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित इस जी20 सत्र में डॉ. जयशंकर ने विश्व नेताओं से आग्रह किया कि केवल संकट प्रबंधन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रमुख आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों का समाधान करने के लिए निर्णायक कदम उठाएं।

उनके संबोधन में कोविड-19 महामारी के बाद के संघर्ष, आर्थिक तनाव, खाद्य सुरक्षा संबंधी समस्याओं और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का जिक्र किया गया। साथ ही उन्होंने नई चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला, जैसे कि केंद्रित आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ती चिंताएं, व्यापार और वित्त का हथियारीकरण और डेटा प्रवाह में पारदर्शिता की कमी। डॉ. जयशंकर ने उल्लेख किया कि उभरती प्रौद्योगिकियां जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रिक वाहन, अंतरिक्ष अन्वेषण, ड्रोन और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में विकास के साथ-साथ इनके भू-राजनीतिक निहितार्थों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों पर भी उनके विचार स्पष्ट रहे। उन्होंने गाजा में युद्ध विराम और बंधकों की रिहाई का स्वागत किया और आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए दो-राज्य समाधान सहित एक समावेशी समाधान अपनाया जाना चाहिए, जिससे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने लेबनान और सीरिया जैसी समस्याओं पर भी अपने विचार रखे और कहा कि इन क्षेत्रों में शांति और स्थिरता वैश्विक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर डॉ. जयशंकर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने अरब सागर और अदन की खाड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सामान्य समुद्री वाणिज्य को बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन अनिवार्य है। विशेष रूप से 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) का सम्मान करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जबरदस्ती या आक्रामक कार्रवाइयों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
यूक्रेन संघर्ष पर भी उन्होंने भारत के लगातार रुख की पुष्टि की और बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से संकट के समाधान करने की अपील की। उन्होंने विश्व समुदाय से उम्मीद जताई कि संबंधित पक्ष युद्ध को समाप्त करने के लिए सीधी बातचीत में शामिल होंगे। साथ ही, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी), सूडान और साहेल क्षेत्र जैसे अन्य संघर्षों पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक समस्याओं का समाधान एक समान तत्परता से किया जा सके।
डॉ. जयशंकर ने वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और इसकी सुरक्षा परिषद अक्सर गतिरोध के कारण संकटों का प्रभावी समाधान नहीं कर पाती। उन्होंने सुरक्षा परिषद की संरचना और कार्य पद्धति में बदलाव की अपील की, ताकि वैश्विक एजेंडा में सभी देशों के हितों को उचित स्थान मिले और निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी तथा पारदर्शी हो। उनका कहना था कि केवल कुछ शक्तिशाली देशों द्वारा लिए जाने वाले विशेष निर्णय नहीं, बल्कि सभी देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक शासन का स्वरूप बदलना आवश्यक है।
अपने संबोधन का समापन करते हुए डॉ. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि भू-राजनीतिक वास्तविकताएं और राष्ट्रीय हित हमेशा मौजूद रहेंगे, लेकिन कूटनीति का मुख्य उद्देश्य साझा आधार बनाना और सहयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के महत्व को रेखांकित किया, यह कहते हुए कि मतभेदों को विवाद में और विवादों को संघर्ष में परिवर्तित नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हाल की वैश्विक चुनौतियों से प्राप्त अनुभव भविष्य में सहयोग के लिए सीख का काम करेंगे।
भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन वियतनाम के कैम रान्ह खाड़ी में पहुंचा
नई दिल्ली | भारत और वियतनाम के युवाओं को प्रशिक्षित करने के साथ-साथ दोनों देशों की मित्रता को मजबूत करते हुए, प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के जहाज- आईएनएस तीर और आईसीजीएस वीरा 20 फरवरी, 25 को वियतनाम की कैम रान्ह खाड़ी पहुंचे। वियतनाम पीपुल्स नेवी के साथ वियतनाम में भारतीय मिशन के सदस्यों ने इन जहाजों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा दोनों समुद्री देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता और बढ़ती साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है।

दरगाह यात्रा के दौरान, विभिन्न क्रॉस ट्रेनिंग दौरे, पेशेवर और सामुदायिक बातचीत की योजना है और इसमें वियतनाम नौसेना अकादमी का दौरा भी शामिल है। यात्रा का समापन वियतनाम पीपुल्स नेवी और तटरक्षक बल के साथ द्विपक्षीय अभ्यास के साथ होगा । इस अभ्यास से अंतर-संचालन और सर्वोत्तम तौर-तरीकों के आदान-प्रदान को और बढ़ावा मिलेगा।
भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जिसे 24 अगस्त को वियतनाम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान और मजबूती मिली। सम्बंधों को आगे बढ़ाते हुए, भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की वियतनाम यात्रा ने दोनों नौसेनाओं के बीच घनिष्ठ समुद्री सहयोग और प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत किया है। क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (एसएजीएआर ) के दृष्टिकोण के अनुरूप क्षमता निर्माण को बढ़ाने और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मौजूदा तैनाती भारत सरकार की व्यापक पहल के अनुरूप है।
भारतीय रेल महाकुंभ मेले के अंतिम सप्ताह में यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए तैयार
नई दिल्ली | नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पिछले शनिवार को हुई दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ की घटना के बाद, भारतीय रेलवे ने कई सख्त कदम उठाए हैं। अयोध्या, वाराणसी, गाजियाबाद, नई दिल्ली और आनंद विहार सहित प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए विशेष होल्डिंग एरिया और अतिरिक्त आरपीएफ की तैनाती की गई है। गाजियाबाद स्टेशन पर एक होल्डिंग एरिया बनाया गया है। प्लेटफॉर्म पर रेलगाड़ी आने के दौरान किसी को भी रस्सियों (सुरक्षा क्षेत्र) को पार करने से रोकने के लिए भी अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसके लिए प्लेटफॉर्म पर रस्सियों के साथ आरपीएफ कर्मियों की तैनाती की गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि यात्री रेलगाड़ी के पूरी तरह से रुकने से पहले उसके पास न जाएं।

भारतीय रेल महाकुंभ मेले के अंतिम सप्ताह के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए उत्तरी रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, पूर्वोत्तर रेलवे और पूर्व मध्य रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया बना रहा है। ये होल्डिंग एरिया प्लेटफॉर्म के बाहर स्थित हैं, ताकि यात्रियों आवाजाही को नियंत्रित करने और भीड़भाड़ को रोकने में मदद मिल सके। यात्रियों को उनकी रेलगाड़ी के निर्धारित प्रस्थान समय के आधार पर प्लेटफॉर्म में प्रवेश करने की अनुमति दी जाती है। इस पहल का उद्देश्य भीड़ प्रबंधन में सुधार करना और यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाना है खासकर व्यस्त समय और त्योहारी मौसम के दौरान।
उत्तर रेलवे ने गाजियाबाद में 4200 वर्ग फुट, आनंद विहार में 3800 वर्ग फुट, नई दिल्ली में 12710 वर्ग फुट, अयोध्या धाम में 3024 वर्ग मीटर तथा बनारस में 1280 वर्ग मीटर और 875 वर्ग मीटर के विशाल होल्डिंग क्षेत्र बनाए हैं ।
पूर्वोत्तर रेलवे ने बनारस में 2200 वर्ग फुट, सिवान में 5250 वर्ग फुट, बलिया में 8000 वर्ग फुट, देवरिया में 3600 वर्ग फुट, छपरा में 10000 वर्ग फुट, गोरखपुर में 2500 वर्ग फुट के होल्डिंग एरिया भी बनाए हैं।
पूर्व मध्य रेलवे ने राजेंद्र नगर टर्मिनल पर दो होल्डिंग एरिया बनाए हैं: 2700 वर्ग फीट और 800 वर्ग फीट, पटना जंक्शन 2700 वर्ग फीट और 2700 वर्ग फीट, दानापुर 2700 वर्ग फीट और 2400 वर्ग फीट। इसके अलावा, आरा 3375 वर्ग फीट, बक्सर: 900 वर्ग फीट, मुजफ्फरपुर: 2400 वर्ग फीट, हाजीपुर: 2400 वर्ग फीट, बरौनी: 2400 वर्ग फीट, समस्तीपुर 2400 वर्ग फीट, जयनगर: 2000 वर्ग फीट, मधुबनी: 2000 वर्ग फीट, रक्सौल: 2000 वर्ग फीट, सकरी: 2000 वर्ग फीट, दरभंगा: 2400 वर्ग फीट, सहरसा: 2400 वर्ग फीट, प. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन: 2400 वर्ग फुट, सासाराम: 2000 वर्ग फुट, गया: 2000 वर्ग फुट |
उत्तर मध्य रेलवे ने प्रयागराज जंक्शन पर 10,737 वर्ग मीटर, नैनी पर 10,637 वर्ग मीटर, प्रयागराज छिवकी पर 7500 वर्ग मीटर होल्डिंग एरिया भी बनाया है।
कुंभ क्षेत्र के एक भाग के रूप में, उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे ने प्रयाग जंक्शन: 10,000 वर्ग मीटर, फाफामऊ जंक्शन: 8775 वर्ग मीटर, झूसी: 18,000 वर्ग मीटर और प्रयागराज रामबाग: 4000 वर्ग मीटर में स्थायी/अस्थायी होल्डिंग क्षेत्र भी बनाए हैं।
प्रयागराज क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों पर ऐसे होल्डिंग एरिया और भीड़ प्रबंधन उपाय पहले से ही लागू हैं। ये उपाय यात्रियों को अपनी रेलगाड़ी में चढ़ने के दौरान अधिक सुविधा प्रदान करने के लिए हैं जो छठ और दिवाली जैसे सबसे ज्यादा यात्रा करने के दिनों दौरान प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के समान हैं। भारतीय रेलव यात्रियों से सहयोग करने और सुचारू और सुरक्षित यात्रा संचालन सुनिश्चित करने के लिए आधिकारिक दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह करता है। आगे की अपडेट के लिए, यात्रियों को आधिकारिक चैनल के माध्यम से सूचित रहने की सलाह दी जाती है।
रक्षा निखिल खडसे ने 26वीं महाराष्ट्र राज्य अंतर-विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता का उद्घाटन किया
महाराष्ट्र की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मीट चंद्रपुर में भव्यता के साथ आरंभ |
नई दिल्ली | केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे और महाराष्ट्र के विधायक और राज्य सरकार के पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने चंद्रपुर में 26वीं महाराष्ट्र राज्य अंतर-विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता का उद्घाटन किया।
राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के तत्वावधान में गोंडवाना विश्वविद्यालय, गढ़चिरौली द्वारा आयोजित प्रतियोगिता को विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार राज्य स्तरीय खेल महोत्सव के रूप में आयोजित करने का सम्मान प्राप्त हुआ है।

उद्घाटन समारोह में रक्षा खडसे ने कहा कि खेल उभरता हुआ उद्योग है और यह युवाओं के लिए करियर में अपार अवसर प्रदान कर सकता है। उन्होंने इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए गोंडवाना विश्वविद्यालय को बधाई दी और युवा मस्तिष्क को आकार देने और अनुशासन, टीम वर्क और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में खेल के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देश भर में खेलों को बढ़ावा देने और उभरती प्रतिभाओं को पोषित करने के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता पर बल दिया। राज्य मंत्री ने पूरे महाराष्ट्र से हजारों युवा एथलीटों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आयोजन की सावधानीपूर्वक योजना बनाने और कार्यान्वयन के लिए सराहना व्यक्त की।
स्पोर्ट्स मीट में लड़कों और लड़कियों के लिए 8 खेल विधाएं - कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, एथलेटिक्स और शतरंज शामिल हैं, जिनमें 3500 से अधिक एथलीटों की भागीदारी की संभावना है। चंद्रपुर और बल्लारपुर वन क्षेत्र में कई स्थानों पर मैच आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें सुबह और शाम के सत्र में प्रतियोगिताएं होंगी।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि यह प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिता जमीनी स्तर पर खेलों को प्रोत्साहित करने और युवा प्रतिभाओं को पोषित करने के सरकार के दृष्टिकोण का प्रमाण है। रक्षा खडसे ने ऐसी पहलों का समर्थन करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो भविष्य के चैंपियनों की पहचान करने और उन्हें विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खडसे ने कहा कि चंद्रपुर महाराष्ट्र में खेल उत्कृष्टता अभियान का नेतृत्व करेगा। उन्होंने चंद्रपुर में बुनियादी ढांचे के उन्नयन के समर्थन के लिए संकल्प व्यक्त किया।
माननीय विधायक (महाराष्ट्र) सुधीर मुनगंटीवार, जिला कलेक्टर चंद्रपुर विनय गौड़ा जी.सी., जिला खेल अधिकारी चंद्रपुर अविनाश पुंड और पूर्व उपमहापौर चंद्रपुर राहुल पावड़े सहित एथलीटों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने पायलटों के लिए डिजिटल लाइसेंस की शुरुआत की
नागर विमानन में इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस (ईपीएल) शुरू करने वाला दूसरा देश बना भारत
नई दिल्ली | केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने पायलटों के लिए इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस (ईपीएल) का शुभारंभ किया, जो भारत के नागर विमानन क्षेत्र की सलामती, सुरक्षा, और दक्षता को आधुनिक बनाने और बेहतर बनाने के लिए एक अभूतपूर्व पहल है। इस प्रगति के साथ भारत अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन से अनुमोदन के बाद इस उन्नत प्रणाली को लागू करने वाला विश्व का दूसरा देश बन गया है।

ईपीएल एक कार्मिक लाइसेंस का डिजिटल संस्करण है, जो पायलटों के लिए पारंपरिक भौतिक लाइसेंस की जगह लेगा। यह ईजीसीए मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सुरक्षित रूप से सुलभ होगा, जो केंद्र सरकार की "व्यापार करने में सुगमता" और "डिजिटल इंडिया" पहलों के साथ संरेखण में एक सहज और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।
ईपीएल की शुरूआत आईसीएओ के अनुलग्नक 1 - कार्मिक लाइसेंसिंग में संशोधन 178 के बाद हुई है, जो सदस्य देशों को बेहतर सुरक्षा और दक्षता के लिए इलेक्ट्रॉनिक लाइसेंस अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। जबकि प्रमुख वैश्विक विमानन नेतृत्वकर्ता अभी भी इसी तरह की प्रणालियों को लागू करने की प्रक्रिया में हैं, भारत सफलतापूर्वक डिजिटल विमानन समाधानों में सबसे आगे निकल गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "भारत के विमानन क्षेत्र की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ हमें निकट भविष्य में लगभग 20,000 पायलटों की आवश्यकता होगी। पायलट नागर विमानन का आधार हैं और ईजीसीए और ईपीएल के साथ हम वैश्विक स्तर पर उनके आराम और रोजगार क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिनव, प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों का लाभ उठा रहे हैं, साथ ही सुरक्षा संचालन का समर्थन करने के लिए उनके क्रेडेंशियल्स तक वास्तविक समय में पहुँच प्रदान कर रहे हैं।"
इसके लागू करने से पहले, डीजीसीए पायलटों को स्मार्ट कार्ड प्रारूप में लाइसेंस जारी कर रहा था और अब तक 62000 कार्ड लाइसेंस जारी कर चुका है। वर्ष 2024 में जारी किए जाने वाले कुल लाइसेंसों में मुद्रित कार्ड की आवश्यकता लगभग 20,000 थी, जो प्रति माह औसतन 1,667 कार्ड है। ईपीएल के शुभारंभ के साथ, मुद्रित कार्डों की जरूरत चरणबद्ध तरीके से कम हो जाएगी, जिससे लाइसेंसिंग प्रक्रिया काफी हद तक सुव्यवस्थित हो जाएगी। इसके अलावा, इस बदलाव का कागज और प्लास्टिक के उपयोग को कम करके पर्यावरणीय स्थिरता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मंत्री महोदय ने डिजिटल नवाचार के जरिये भारतीय विमानन को नया आकार देने और परिचालन को अधिक कुशल बनाने के लिए अन्य परिवर्तनकारी पहलों पर भी रोशनी डाली। प्रमुख प्रगति में सुव्यवस्थित लाइसेंसिंग के लिए ईजीसीए प्लेटफॉर्म, ड्रोन के लिए डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म और एयरलाइन परिचालन के लिए इलेक्ट्रॉनिक फ्लाइट फोल्डर (ईएफएफ) शामिल हैं।
पायलटों के लिए इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक लाइसेंस (ईपीएल) की शुरुआत वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त विनियामक ढांचे की स्थापना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह विमानन नवाचार में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है और एक अधिक मजबूत और छेड़छाड़-रहित लाइसेंसिंग प्रणाली सुनिश्चित करता है।
आज शुक्रवार से महाकुंभ में भीड़ बढ़ेगी : क्योंकि यह आखिरी वीकेंड
महाकुंभ में आखिरी वीकेंड पर आज से फिर भीड़, VIP घाट फुल
डेस्क | सीएम योगी ने गुरुवार को महाकुंभ से जुड़े अफसरों के साथ मीटिंग की। कहा- बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम आ रहे हैं। व्यवस्था में चूक की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। ऐसी व्यवस्था बनाएं कि श्रद्धालुओं को कम से कम पैदल चलना पड़े।

महाकुंभ का आज 40वां दिन है। 35 से ज्यादा VIP संगम स्नान करेंगे। मेला खत्म होने के 5 दिन और बचे हैं। सुबह 8 बजे तक 31 लाख श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया। अब तक करीब 58.34 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। आज शुक्रवार से महाकुंभ में भीड़ बढ़ेगी, क्योंकि यह आखिरी वीकेंड है।
सेक्टर-19 में गुरु गोरखनाथ अखाड़े के सामने बने श्रद्धालुओं के शिविर में गुरुवार रात करीब 11 बजे आग लग गई। एक महिला झुलस गई। बताया जा रहा है कि उस वक्त पंडाल में करीब 10 लोग रुके थे। आग में पंडाल, गद्दे, समान, मोबाइल और कुछ पैसे जल गए हैं।
संगम आने वाले सभी रास्तों पर 8 से 10 किमी तक श्रद्धालुओं की भीड़ है। शहर के बाहर की पार्किंग में ही वाहनों को रोका जा रहा है। वहां से शटल बसों की सुविधा है। हालांकि, बस न मिले तो संगम पहुंचने के लिए करीब 10 किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
भीड़ के चलते प्रयागराज में स्कूलों में 8वीं तक की कक्षाएं ऑनलाइन लगेंगी। प्रयागराज आने-जाने वाली 8 ट्रेनें 28 फरवरी तक रद्द कर दी गई हैं। 4 ट्रेनों के रूट बदले गए हैं। दूसरी ओर, VIP की गाड़ियां अरैल घाट तक जा रही हैं। प्रयागराज की रजिस्टर्ड (UP- 70) गाड़ियों को ही शहर में एंट्री दी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी व विष्णुदेव साय के मध्य : मंच पर दिखी खास आत्मीयता
नई दिल्ली | दिल्ली में गुरुवार को नए मुख्यमंत्री के रूप में रेखा गुप्ता ने शपथ ली, लेकिन इस समारोह में एक ऐसा दृश्य भी देखने को मिला जिसने सबका ध्यान खींच लिया। मंच पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए, तो उन्होंने एनडीए के तमाम नेताओं से मुलाकात की, लेकिन जब बारी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की आई, तो माहौल अलग ही नजर आया।

प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े ही आत्मीय अंदाज में विष्णुदेव साय का हाथ थाम लिया—और बस फिर क्या था! कुछ क्षणों के लिए मंच पर यह दृश्य खास बन गया। पीएम मोदी ने न सिर्फ हाथ मिलाया, बल्कि लंबे समय तक विष्णुदेव साय का हाथ थामे रहे, उनके हालचाल पूछते रहे और छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर चर्चा की।
इस दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी वहां मौजूद थे। पीएम मोदी ने उनसे भी बातचीत की, लेकिन खास बात यह रही कि उनके शब्दों के साथ-साथ विष्णुदेव साय का हाथ भी मजबूती से थामे रहे। दोनों नेताओं के बीच यह आत्मीय संवाद काफ़ी देर तक चला ।