देश-विदेश
ऊर्जा आज आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए आधार स्तम्भ बन गई है : पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी
पुरी ने कहा कि सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी बढ़ाने के लिए व्यापक सुधार लागू किए
सरकार ने वर्जित क्षेत्रों (नो-गो) को लगभग 99% तक कम कर दिया है, जिससे अन्वेषण के लिए नए व्यापक क्षेत्र खुल गए हैं: पुरी
पुरी ने कहा कि भारत 2025 तक तलछटी बेसिन अन्वेषण को 16 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए तैयार है, 2030 तक 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर का लक्ष्य
नई दिल्ली | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ग्रेटर नोएडा में भारत के प्रमुख ‘दक्षिण एशियाई भूविज्ञान सम्मेलन एवं प्रदर्शनी जियो इंडिया 2024’ के उद्घाटन समारोह के दौरान कहा, "ऊर्जा आज आर्थिक वृद्धि एवं विकास का आधार स्तम्भ बन गई है।" पुरी ने आर्थिक प्रगति को गति देने में ऊर्जा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जैसे विशाल देश में, बढ़ती अर्थव्यवस्था के अनुरूप ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है।
केन्द्रीय मंत्री ने इस आयोजन का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की, जिसमें भारत और विदेश से अन्वेषण और उत्पादन (ईएंडपी) क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञ एक साथ आ रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ पेट्रोलियम जियोलॉजिस्ट्स, इंडिया द्वारा आयोजित जीईओ इंडिया 2024, सम्मेलन और प्रदर्शनी का छठा आयोजन है और इसका विषय “ऊर्जा गतिशीलता के नए आयामों की खोज” है।
भारत में ईंधन की मांग वैश्विक औसत से तीन गुना बढ़ोतरी के मद्देनजर, श्री पुरी ने कहा कि भारत में प्रतिदिन 67 मिलियन लोग पेट्रोल पंपों पर जाते हैं। इस बढ़ती मांग से अगले दो दशकों में ऊर्जा की खपत में वैश्विक स्तर पर 25 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है। उन्होंने कहा, "उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता के संतुलन को बनाए रखना न केवल प्राथमिकता है, बल्कि एक प्रतिबद्धता भी है जिसे हम अन्वेषण, उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर पूरा कर रहे हैं।"
भारत का ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है, देश के तलछटी बेसिनों में 651.8 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल के भंडार और 1,138.6 बिलियन क्यूबिक प्राकृतिक गैस के भंडार हैं, जिनका अभी तक अन्वेषण नहीं किया गया है। इन प्रचुर संसाधनों के बावजूद, भारत अपनी अन्वेषण क्षमता का पूर्ण रुप से दोहन नहीं कर पाया है। पुरी ने बताया कि जब 2014 में वर्तमान सरकार सत्ता में आई, तब भारत के केवल 6 प्रतिशत तलछटी बेसिनों का ही अन्वेषण किया गया था। आज, यह आँकड़ा बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया है, और खुला रकबा लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) दौर के तहत आगे की अन्वेषण गतिविधि के साथ, यह 2025 तक बढ़कर 16 प्रतिशत हो जाएगा। वर्ष 2030 तक, सरकार का लक्ष्य देश के अन्वेषण क्षेत्र को 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित करना है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
केन्द्रीय मंत्री ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान सरकार के कई महत्वपूर्ण सुधारों का भी जिक्र किया। इन प्रमुख सुधारों में अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाना, 37 अनुमोदन प्रक्रियाओं को घटाकर केवल 18 करना शामिल है, जिनमें से नौ अब स्व-प्रमाणन के लिए उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, 2024 में तेल क्षेत्र (विनियमन और विकास) संशोधन विधेयक की शुरूआत तेल और गैस उत्पादकों के लिए नीति स्थिरता सुनिश्चित करती है, अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता की अनुमति देती है, और पट्टे की अवधि बढ़ाती है। इसके अलावा, सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में वर्जित क्षेत्रो (नो-गो) को लगभग 99 प्रतिशत तक कम कर दिया है, जिससे अन्वेषण के लिए विशाल नए क्षेत्र खुल गए हैं।
ओएएलपी की हाल ही में नौवें दौर की बोली प्रक्रिया ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिसमें 8 तलछटी घाटियों में 28 ब्लॉकों में 136,596 वर्ग किलोमीटर अन्वेषण क्षेत्र की पेशकश की गई। उल्लेखनीय रूप से, इस दौर में पेश किए गए 38 प्रतिशत क्षेत्र को पहले वर्जित क्षेत्रों (नो-गो) के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इस दौर में 28 ब्लॉकों के लिए कुल 60 बोलियाँ प्राप्त हुईं, जो भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियों की बढ़ी हुई रुचि को दर्शाता है। पिछले दौर में प्रति ब्लॉक बोलियों की औसत संख्या केवल 1.3 प्रति ब्लॉक की तुलना में अब बढ़कर 2.4 हो गई है।
जीईओ इंडिया 2024 में लगभग 2,000 प्रतिभागियों के भाग लेने की उम्मीद है और इसमें 20 से अधिक सम्मेलन सत्र, 4 पूर्ण चर्चाएँ, 200 से अधिक तकनीकी शोधपत्र और 50 से अधिक प्रदर्शनी सत्र होंगे। पुरी ने कहा, "मुझे भू-वैज्ञानिकों के नवोन्मेषी विचारों पर पूरा भरोसा है कि वे भारत में ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व करेंगे, हर नागरिक के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और भविष्य की चुनौतियों का सामना करेंगे।"
पुरी ने जीईओ इंडिया 2024 के प्रतिभागियों को नवाचार को बढ़ावा देने, स्थिरता को अपनाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
अंतरिक्ष में फंसी है सुनीता विलियम्स : अगले साल फरवरी में वापस आने की उम्मीद
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 50 से ज्यादा लीकेज।
नई दिल्ली | भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स पर अब एक नई मुसीबत आ पड़ी है। दरअसल, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में कई सालों से हल्की लीकेज हो रही थी, जो अब बढ़ गई है। पता चला है कि ये दरारें 50 से ज्यादा हो गई है, जिससे सुनीता पर खतरा मंडराने लगा है। इसको लेकर अब नासा भी चिंता में है।
नासा की एक जांच रिपोर्ट लीक हो गई है, जिससे पता चला की आईएसएस पर खतरा है और सभी अतंरिक्ष यात्री भी सेफ नहीं है।
रूस ने भी चेताया है कि पृथ्वी की कक्षा में लैब में माइक्रो वाइब्रेशन हो रहा है। वहीं, नासा ने कहा कि स्पेस स्टेशन से बड़ी मात्रा में हवा निकल रही है, जो खतरे की घंटी है। हालांकि, नासा यात्रियों को बचाने की कोशिश में जुटी है।
रूसी स्पेस एजेंसी रोस्कोमोस और नासा में इस बात पर सहमति नहीं बनी है कि समस्या की असल वजह क्या है। सीएनएन के अनुसार, नासा के अंतरिक्ष यात्री बॉब कैबाना ने कहा है कि दोनों ने इस पर चिंता जाहिर की है।
सुनीता विलियम्स अपने साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ जून से ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर हैं। पिछले 150 दिनों से अधिक समय से दोनों अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसे हुए हैं। दोनों अंतरिक्ष यात्री ने पांच जून को बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान से उड़ान भरी थी और छह जून को आईएसएस पहुंचे थे। अगले साल फरवरी में इनके वापस आने की उम्मीद है।
हालांकि, इतने समय से अंतरिक्ष स्टेशन में रहने वाली सुनीता विलियम्स के स्वास्थ्य को लेकर कई बार चिंता जाहिर की जा चुकी है। हालांकि, नासा ने एक बार फिर उनके स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए राहत भरी खबर सुनाई। नासा ने बताया कि अंतरिक्ष में मौजूद सभी यात्री काफी सुरक्षित हैं।
डाक विभाग ने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर विशेष डाक टिकट जारी किया
नई दिल्ली | जनजातीय गौरव दिवस पर भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देते हुए, डाक विभाग ने महान आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी को सम्मानित करने के लिए उनकी 150वीं जयंती के अवसर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस डाक टिकट को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के जमुई में आयोजित एक भव्य समारोह में बिहार के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति में जारी किया।
15 नवंबर 1875 को बिहार (वर्तमान झारखंड) के उलिहातु में जन्मे बिरसा मुंडा ने 1899 से 1900 तक ऐतिहासिक उलगुलान (महान विद्रोह) का नेतृत्व किया, जिसमें आदिवासी भूमि को पुनः प्राप्त करने और औपनिवेशिक उत्पीड़न का विरोध करने के लिए उन्होंने हजारों लोगों को एकजुट किया। "मुंडा राज" के लिए उनका समर्थन शोषण से मुक्त एक न्यायपूर्ण और स्व-शासित समाज के उनके सपने का प्रतीक थी। 25 वर्ष की आयु में ही वे इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे, लेकिन उनका साहस और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति का उनका संदेश पूरे देश में समुदायों को आज भी प्रेरित करता है।
शंख सामंत द्वारा डिजाइन किए गए इस डाक टिकट में भगवान बिरसा मुंडा का एक शक्तिशाली चित्रण है, जिसकी पृष्ठभूमि में उन्हें अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए दिखाया गया है। उनकी दृढ़ अभिव्यक्ति आदिवासी एकता, सशक्तिकरण और स्वशासन के लिए उनके अटूट विजन का प्रतीक है। यह स्मारक डाक टिकट भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके महान योगदान और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए एक कालातीत श्रद्धांजलि है।
स्मारक डाक टिकट, फर्स्ट डे कवर (एफडीसी) और ब्रोशर के साथ, संग्रहणीय वस्तु के रूप में उपलब्ध है, जो भारत की स्वतंत्रता में भगवान बिरसा मुंडा के अमूल्य योगदान और आदिवासी समुदायों पर उनके स्थायी प्रभाव का जश्न मनाता है। अपना संग्रह अभी प्राप्त करने के लिए https://www.epostoffice.gov.in/ पर जाएँ।
भारत के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और लोक सभा अध्यक्ष ने संसद भवन परिसर में भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की
भगवान बिरसा मुंडा का जीवन और आदर्श हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे : लोक सभा अध्यक्ष
भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती वर्ष का शुभारंभ आज से
नई दिल्ली | भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद भवन परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर उनकी 150वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर भारत के उप राष्ट्रपति एवं राज्य सभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा अन्य गण्यमान्य व्यक्तियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती वर्ष का शुभारंभ हो रहा है।
ओम बिरला ने X पर संदेश लिखा, “आदिवासी अस्मिता और संस्कृति के गौरव, उलगुलान के प्रणेता, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर सविनय नमन। भगवान बिरसा मुंडा का 150वां जन्मजयंती वर्ष आज से शुरू हो रहा है। जनजातीय गौरव दिवस के इस उपलक्ष्य पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं। भगवान बिरसा देश, समाज और संस्कृति के लिए अपना सर्वस्व समर्पण कर देने वाले महानायक थे। उनके जीवन आदर्श हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे। #BirsaMunda150 #JanjatiyaGauravDiwas।”
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सम्मानित करने के लिए 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। जनजातीय समुदायों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई क्रांतिकारी आंदोलनों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह दिवस जनजातीय समुदायों के इतिहास, संस्कृति और धरोहर को सम्मानित करता है, एवं देशभर में एकता, गर्व और जनजातियों का देश की स्वतंत्रता और प्रगति में योगदान के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
भगवान बिरसा मुंडा, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ उलगुलान (क्रांति) का नेतृत्व किया, प्रतिरोध का प्रतीक बन गए। भगवान मुंडा का नेतृत्व राष्ट्रीय जागरण का कारण बना, और उनका योगदान जनजातीय समुदायों द्वारा गहरे सम्मान के साथ याद किया जाता है।
इस अवसर पर, विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय लोक कलाकारों ने संसद भवन परिसर के प्रेरणा स्थल पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।
मेडिकल कॉलेज के शिशु वार्ड में आग, जिंदा जल गए 10 नवजात, मौत से जूझ रहे 16 बच्चे
डेस्क। झांसी मेडिकल कॉलेज के शिशु वार्ड में आग लगने से 10 बच्चों की मौत हो गई है जबकि 16 अन्य घायल हो गए और जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हादसा यूपी के झांसी जिले में स्थित महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज की है। यहां के एनआईसीयू में शुक्रवार रात करीब 10.45 बजे आग लग गई। हादसे में घायल 16 बच्चों का इलाज किया जा रहा है और उनकी जान बचाने के प्रयास जारी हैं।
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज में स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) में शुक्रवार रात भीषण आग लग गई। हादसे में 10 बच्चों की मौत हो गई। वार्ड की खिड़की तोड़कर 39 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया। वार्ड ब्वॉय ने आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र चलाया। मगर वह एक्सपायर हो चुका था, इसलिए काम ही नहीं किया। सूचना पर फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां पहुंचीं। खिड़की तोड़कर पानी की बौझारें मारीं। भीषण आग को देखते हुए सेना को बुलाया गया। करीब 2 घंटे में आग पर काबू पाया गया।
डीएम ने बताया कि जो बच्चे एनआईसीयू के बाहरी हिस्से में थे, उन्हें बचा लिया गया। प्रथम दृष्टया 10 बच्चों की मौत की सूचना है। कम गंभीर मरीजों को एनआईसीयू के बाहरी हिस्से में भर्ती किया जाता है जबकि अधिक गंभीर मरीजों को आंतरिक हिस्से में रखा जाता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) झांसी सुधा सिंह ने कहा कि इस घटना में घायल हुए अन्य 16 बच्चों का इलाज चल रहा है। घटना के वक्त एनआईसीयू में 50 से ज्यादा बच्चे भर्ती थे। झांसी पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त बयान में कहा कि एक फायर ब्रिगेड को घटनास्थल पर भेजा गया जबकि जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया और जिला प्रशासन के अधिकारियों को घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सीएम योगी ने संभागीय आयुक्त बिमल कुमार दुबे और उप महानिरीक्षक (झांसी पुलिस रेंज) कलानिधि नैथानी को 12 घंटे के भीतर मामले पर एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। झांसी से लोकसभा सांसद अनुराग शर्मा ने कहा कि ‘मैं इस घटना से बेहद दुखी हूं। उन्होंने कहा कि वह इस समय स्टेशन से बाहर हैं। घटना के कुछ देर बाद सदर विधायक रवि शर्मा भी अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
‘जल, जंगल, जमीन के साथ ही संस्कृति की रक्षा में भी बिरसा मुण्डा का अहम योगदान’
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व और कृतित्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिये किये जा रहे प्रयासों के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से प्रारंभ हुए जनजातीय गौरव दिवस के माध्यम से हमारी आजादी में जनजातीय नायक-नायिकाओं के योगदान से देश-दुनिया को परिचित कराने में मदद मिली है। अंग्रेजों से वीरता पूर्वक युद्ध करने वाले, जन-समुदाय द्वारा भगवान के रूप में पूजे जाने वाले, मुण्डा क्रांति के जनक बिरसा मुण्डा थे। उन्होंने सशस्त्र छापामार संघर्ष में बलिदानी रायन्ना, संथाल विद्रोह या हूल आंदोलन में तीर-कमान के साथ शामिल होने वाले शहीद सिद्धो संथाल, कान्हू संथाल, उनके छोटे भाई चाँद और भैरव के योगदान का भी उल्लेख किया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री की संवेदनाएं जनजाति वर्ग के प्रति विशेष रूप से है। जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिये उन्होंने बजट में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि की है। पीएम जन मन योजना के माध्यम से जनजातीय वर्ग के कल्याण को नई दिशा दी जा रही है। बेगा, सहरिया सहित अन्य पिछड़े जनजातीय वर्ग के जीवन में सुधार के लिये भी विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। राज्यपाल पटेल शुक्रवार को धार में भगवान बिरसा मुण्डा जयंती के अवसर पर राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस के विशाल समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समारोह की अध्यक्षता की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का दिन किसी त्यौहार से कम नहीं है। आज के दिन हमारे समाज के गौरव भगवान बिरसा मुण्डा ने जन्म लिया था। यह दिन हमारे लिये गौरव के साथ गर्व का दिन भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की है। बिरसा मुण्डा ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये संघर्ष किया। उन्होंने भारत माँ की रक्षा के लिये भी अपनी जीवटता और वीरता से अनेक उल्लेखनीय कार्य किये और समाज को नई दिशा दी। धर्मांतरण के विरोध में आवाज उठाते हुए वे आगे आये। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृति बचेगी तो हम बचेंगे। संस्कृति की रक्षा के लिये बिरसा मुण्डा का भारत के इतिहास में एक बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि टंट्या मामा के नाम से विश्वविद्यालय बनाया गया है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 200 गीगावाट अक्षय ऊर्जा की उपलब्धि के सम्मान में सुदर्शन पटनायक की रेत कला को साझा किया
नई दिल्ली | केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर सुप्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक की कलाकृति साझा की।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा "नवीकरणीय ऊर्जा में 200 गीगावाट क्षमता को पार करने की भारत की उल्लेखनीय उपलब्धि का सम्मान!
भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'पंचामृत' लक्ष्य के अनुरूप अक्टूबर में अक्षय ऊर्जा में 200 गीगावाट की उपलब्धि हासिल कर ली है। यह उल्लेखनीय वृद्धि 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 500 गीगावाट हासिल करने के देश के महत्वाकांक्षी अक्षय ऊर्जा लक्ष्य के अनुरूप है।
वार्षिक नौसेना उड़ान सुरक्षा बैठक और उड़ान सुरक्षा संगोष्ठी : 2024 का आयोजन किया गया
नई दिल्ली | पूर्वी नौसेना कमान मुख्यालय के तत्वावधान में वार्षिक नौसेना की उड़ान सुरक्षा बैठक (एनएफएसएम) और उड़ान सुरक्षा संगोष्ठी (एफएसएस) - वर्ष 2024 का आयोजन 12 से 13 नवंबर को आईएनएस डेगा, विशाखापत्तनम में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। संगोष्ठी की शुरुआत 12 नवंबर को हुई, जिसमें मुख्य अतिथि वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ पूर्वी नौसेना कमान ने मुख्य भाषण दिया।
संगोष्ठी "उभरते खतरे और चुनौतियां-नौसेना वायु संचालन और उड़ान सुरक्षा के साथ अनुपालन" विषय पर केंद्रित रही। इस संगोष्ठी में समकालीन विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें काउंटर-यूएवी/यूएएस प्रौद्योगिकी और रणनीति में प्रगति, विमानन संचालन में साइबर सुरक्षा जोखिम और विमान प्रणालियों के लिए जवाबी उपाय शामिल हैं। इसमें हवाई संचालन के दौरान मानसिक लचीलेपन के लिए 'माइंडफुलनेस ट्रेनिंग' के महत्व पर भी विचार-विमर्श किया गया।
चर्चा में उभरते परिचालन जोखिमों के प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया गया। हवाई संपत्तियों की सुरक्षा के लिए सेवाओं में साझा सतर्कता की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। विचारों के आदान-प्रदान ने आधुनिक नौसेना विमानन की चुनौतियों के लिए विशेष रूप से अनुकूल और सक्रिय सुरक्षा रणनीतियों की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया। संगोष्ठी में भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जैसे प्रमुख रक्षा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
13 नवंबर को, एनएफएसएम ने भारतीय नौसेना के प्रमुख उड़ान सुरक्षा हितधारकों को एक साथ लाया, जिसमें रियर एडमिरल जनक बेविल, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) ने बैठक की अध्यक्षता की। सभी परिचालन मिशनों को पूरा करते हुए सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करने के लिए परिचालन जोखिम प्रबंधन के उद्देश्य से नौसेना में सुरक्षा सहमति पर विस्तार से चर्चा की गई। चर्चा में पक्षियों और जानवरों के खतरे को कम करने के नवीनतम रुझानों को शामिल किया गया।
कार्यक्रम के दोनों दिन पैनल चर्चाएं और विशेषज्ञों के नेतृत्व में प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें उड़ान सुरक्षा प्रोटोकॉल को बढ़ाने और नौसेना विमानन में तत्परता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।
बच्चों को ऊर्जा बचत की सीख और संस्कार बचपन से ही दें : मंगुभाई पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को ऊर्जा बचत की सीख और संस्कार बचपन से ही दिया जाए। उन्हें ऊर्जा की भावी ज़रूरतों और महत्व के प्रति जागरूक बनाएं। राज्यपाल श्री पटेल ऊर्जा संरक्षण पर आधारित, राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह, भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के तत्वाधान में भोपाल के सुभाष भवन में आयोजित किया गया था।
राज्यपाल ने दो श्रेणियों में आयोजित, राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता में चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। पटेल ने इस अवसर पर प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्यों का भी सम्मान किया। उन्होंने NHDC को विगत 19 वर्षों से उर्जा संरक्षण की जागरूकता के लिए प्रतियोगिता के सतत् आयोजन की बधाई दी।
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों की कल्पनाशीलता और सृजनशीलता प्रकृति का अनुपम उपहार है। ऊर्जा बचत और संरक्षण पर बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र, उनके अंतर्मन की अभिव्यक्ति है। राज्यपाल श्री पटेल ने उपस्थित जनों से अपील की कि वे चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन ज़रूर करें और बाल कलाकारों के भावों की अभिव्यक्ति को सराहें। उन्होंने बच्चों से कहा कि ऊर्जा संरक्षण के लिए चित्रों का सृजन करते हुए, ऊर्जा बचत के जो सच्चे भाव आपके अंतर्मन में आए थे, उन भावों को हमेशा जीवंत रखें और उनका आजीवन अनुसरण करने का प्रयास करें।
राज्यपाल ने कहा कि ऊर्जा के संसाधन, प्रकृति द्वारा मानव को दिए गए अमूल्य उपहार हैं। इनका ज़रूरत और विवेक अनुसार उपयोग करना चाहिए। हम सभी को ऊर्जा के साधनों के साथ पानी की बचत और महत्व को भी समझना होगा। राज्यपाल ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है, वहां की जनता की समस्याओं का विचार करें, और सहानुभूति का भाव रखते हुए ऊर्जा, पानी और अन्य प्राकृतिक साधनों का विवेक से उपयोग करें। उन्होंने बच्चों को समझाइश दी कि बचत की अच्छी आदतों को विकसित करें।
भारतीय नौसेना के पहले बेड़ा समर्थित जहाज का हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड : विशाखापत्तनम में शिलान्यास
नई दिल्ली | पांच फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस) में से पहले का ‘कील लेइंग’ समारोह 14 नवंबर 24 को हिंदुस्तान शिपयार्ड, लिमिटेड, विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया। एचएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा भारतीय नौसेना एवं एचएसएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समारोह की अध्यक्षता युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण के नियंत्रक वाइस एडमिरल बी शिव कुमार ने की। भारतीय नौसेना ने अगस्त 2023 में पांच फ्लीट सपोर्ट शिप के अधिग्रहण के लिए एचएसएल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। जहाजों को 2027 के मध्य से भारतीय नौसेना को वितरित किया जाना अनुसूचित है।
शामिल होने पर, फ्लीट सपोर्ट शिप समुद्र में बेड़े के जहाजों के वापस शामिल होने के साथ भारतीय नौसेना की 'ब्लू वाटर' क्षमता को बढ़ाएंगे। 40,000 टन से अधिक की क्षमता वाले जहाज ईंधन, पानी, गोला-बारूद और भंडार ले जाने और वितरण का काम करेंगे, जिससे बंदरगाह पर वापस आए बिना लंबे समय तक संचालन संभव हो सकेगा, जिससे बेड़े की रणनीतिक पहुंच और विचलन में बढ़ोतरी होगी। द्वितीयक तौर पर, ये जहाज आपातकालीन परिस्थिति में कर्मियों को निकालने और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान साइट पर राहत सामग्री की त्वरित वितरण के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों से सुसज्जित होंगे।
स्वदेशी डिजाइन और स्वदेशी निर्माताओं से अधिकांश उपकरणों की सोर्सिंग के साथ, यह जहाज निर्माण परियोजना भारतीय जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देगी और यह भारत सरकार की #AatmanirbharBharat, #Makeinindia और #MakefortheWorld की पहल के अनुरूप है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 14-27 नवंबर तक चलने वाले : 43वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का उद्घाटन भारत मंडपम में किया
एमआईसीई सुविधाओं का विस्तार भारत के और अधिक शहरों में किया जाएगा : पीयूष गोयल
गोयल ने कहा कि भारत व्यापार संवर्धन संगठन का विस्तार विश्व स्तरीय सुविधा के रूप में किया जाएगा
भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का टिकट 55 दिल्ली मेट्रो स्टेशन, डीएमआरसी मोबाइल ऐप, भारत व्यापार संवर्धन संगठन की वेबसाइट पर उपलब्ध है
बिहार और उत्तर प्रदेश व्यापार मेले 2024 में भागीदार और झारखंड मेले का फोकस राज्य है
नई दिल्ली | केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में 43वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ) का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन भाषण के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार भारत व्यापार संवर्धन संगठन को एक विश्व स्तरीय एजेंसी के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। यह एक ही स्थान पर पूरे उद्योग और मूल्य श्रृंखला को प्रतिबिंबित करेगी ताकि विश्व, भारत को सर्वश्रेष्ठ एमआईसीई गंतव्य के रूप में देख सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन सुविधाओं का विस्तार करने के लिए बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, लखनऊ, वाराणसी और नोएडा जैसी जगहों पर काम कर रही है। सरकार के विकसित भारत के लक्ष्य को समर्पित करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को दोहराते हुए, श्री गोयल ने भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के थीम विकसित भारत 2047 पर प्रसन्नता व्यक्त की।
व्यापार मेलों में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग पर जोर देते हुए गोयल ने कहा कि केंद्र तेजी से लेनदेन को सक्षम बनाने के लिए मेलों के आसपास कियोस्क लगाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले और इस तरह के आयोजनों में बाजार की तलाश करने वाले उद्योगों के साथ राजस्व साझा करने के मॉडल पर भी विचार कर रहा है। उन्होंने लोकल टू ग्लोबल की ओर जाने और उपभोक्ताओं की पसंद के लिए भारत में अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों को लाने वाले खरीदारों और विक्रेताओं के समरूपता की सुविधा प्रदान करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में प्रदर्शनी दुनिया के लिए वन-स्टॉप शॉप होनी चाहिए। गोयल ने भारत व्यापार संवर्धन संगठन से वर्चुअल मेलों पर विचार करने का भी आग्रह किया।
पीयूष गोयल ने आशा व्यक्त की कि भारत विदेशी खरीदारों को आमंत्रित करने के लिए विश्व भर में मेले आयोजित करेगा। उन्होंने भविष्य के मेलों, स्टार्टअप, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित प्रौद्योगिकियों और साइबर प्रौद्योगिकी में प्रगति को प्रदर्शित करने वाले समर्पित मंडपों में एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में नवीनता की भी उम्मीद जताई।
भारत व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) द्वारा आयोजित, 14 से 27 नवंबर, 2024 तक निर्धारित यह प्रमुख मेला, भारत की जीवंत संस्कृति, व्यापार और नवाचार का उत्सव मनाता है। यह व्यवसायों और व्यक्तियों को अवसरों का पता लगाने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
इस वर्ष की थीम, "विकसित भारत @2047," 2047 तक एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और सतत राष्ट्र बनने के भारत के दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है। मेला आर्थिक विकास और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक आधार के रूप में नवाचार, स्थिरता, समावेशिता और सुशासन पर जोर देता है। भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2024 भारत की निर्यात क्षमता को प्रदर्शित करता है। यह इस महत्वाकांक्षी दृष्टि के लिए प्रतिबद्ध हितधारकों के बीच उपयुक्त संवाद सम्प्रेषण के लिए एक अद्वितीय मंच प्रदान करता है।
मेले का आयोजन लगभग 1,07,000 वर्ग मीटर के सकल क्षेत्र में फैला है। इस मेले में भारत और विदेशों के 3,500 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक समेकित बिंदु के रूप में कार्य करता है। यह व्यापार-से-व्यवसाय (बी2बी) और व्यवसाय-से-उपभोक्ता (बी2सी) जुड़ाव को बढ़ावा देता है। इस आयोजन से प्रतिदिन लगभग एक लाख दर्शकों के आने की उम्मीद है, जो दक्षिण एशिया के सबसे बड़े व्यापार मेलों में से एक के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाता है।
दर्शक 14 से 18 नवंबर, 2024 तक व्यावसायिक दिनों और 19 से 27 नवंबर, 2024 तक सामान्य दर्शक दिनों के दौरान मेले में शामिल हो सकते हैं। इस मेले का टिकट 55 डीएमआरसी मेट्रो स्टेशनों (सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन को छोड़कर), भारत मंडपम मोबाइल ऐप, डीएमआरसी ऐप मोमेंटम 2.0, दिल्ली सारथी, आईटीपीओ की आधिकारिक वेबसाइट (www.indiatradefair.com), और डीएमआरसी वेबसाइट (www.itpo.autope.in) के माध्यम से उपलब्ध है। टिकट की कीमतें पिछले साल की तरह ही है, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को अपनी पहचान प्रस्तुत करने पर निशुल्क प्रवेश मिलेगा।
भारत मंडपम मोबाइल ऐप दर्शकों को एक विस्तृत मार्ग मानचित्र, स्टाल का स्थान और नेविगेशन सुविधाएं प्रदान करता है। दर्शकों के लिए प्रवेश द्वार भैरो रोड पर गेट नम्बर 3 और 5 तथा मथुरा रोड पर गेट नम्बर 6 और 10 पर स्थित है। यह मेला प्रतिदिन 10:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक खुला रहेगा।
बिहार और उत्तर प्रदेश इस मेले में भागीदार राज्यों के रूप में भाग ले रहे हैं, जबकि झारखंड मेले के इस संस्करण के लिए फोकस राज्य है। कुल 33 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश, 49 केंद्रीय मंत्रालय, कमोडिटी बोर्ड, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी), और टाइटन, जिंदल स्टील एंड पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, रिलैक्सो, हॉकिन्स और वुडलैंड जैसी प्रसिद्ध निजी कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन कर रही हैं। चीन, मिस्र, ईरान, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, थाईलैंड, तुर्की, ट्यूनीशिया, लेबनान, किर्गिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात सहित देशों के अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शक मेले का मुख्य आकर्षण हैं।
किसी भी पद पर रहे, मित्रता भाव हमेशा बनाए रखना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विद्यार्थियों को अपना जुनून हमेशा कायम रखना चाहिए। इच्छाशक्ति जितनी दृढ़ होगी, लक्ष्य उतना ही आसान होगा। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी पद पर पहुंचे, मित्रता का प्रेमभाव हमेशा बनाए रखना। इसका सबसे अच्छा उदाहरण श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती का है। उनकी दोस्ती 11 वर्ष की उम्र में हुई थी और जब वे द्वारका के राजा बने तब भी उनकी दोस्ती ने दुनिया के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्थान के कोटा जिले में एलन शिक्षण संस्थान के समउन्नत भवन में विद्यार्थियों से चर्चा कर रहे थे। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विद्यार्थियों ने गजहार पहनाकर स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति का इससे अच्छा उदाहरण दूसरा नहीं हो सकता कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात में पहली बार विधायक बनने के साथ ही मुख्यमंत्री बने और लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री के बाद वे पहली बार सांसद बनें और पहली बार में ही देश के प्रधानमंत्री बनें। इसके बाद लगातार सांसद बने और प्रधानमंत्री भी। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में हैट्रिक भी बनाई। आर्थिक दृष्टि से गुजरात देश के अन्य राज्यों की तुलना में अग्रणी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैंने अपने शैक्षणिक काल से ही अपना लक्ष्य समाज सेवा के रूप में निर्धारित किया था। वर्ष 1982 में मेरा चयन मेडिकल कॉलेज के लिए हो गया था, परंतु समाज सेवा के अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मैंने मेडिकल में प्रवेश न लेते हुए, बीएससी की उपाधि प्राप्त की। मैं यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट रहते हुए राजनीति में सक्रिय रह सका। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के तीन मूल मंत्र हैं, जिन्हें विद्यार्थियों को आत्मसात करना चाहिए। पर्याप्त नींद लें, नियमित रूप से व्यायाम करें और प्राणायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने बतायाकि अपने लक्ष्य पर शुरू से ही ध्यान केन्द्रित रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण 11 वर्ष की आयु में मथुरा से राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश के उज्जैन पधारे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी यात्रा के दौरान प्रदेश में जहां-जहां विश्राम किया या ठहरे उन स्थानों को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक महत्व के तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शिक्षा काल में जिन ग्रंथों का अध्ययन किया, उन ग्रंथों का सार गीता में समाया है।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा : सरकार ने CISF की पहली महिला बटालियन के गठन को मंजूरी दी
नई दिल्ली | राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सपने को साकार करने की दिशा में मजबूत कदम के रूप में मोदी सरकार ने CISF की पहली महिला बटालियन की स्थापना को मंजूरी दी |
विशिष्ट सैन्य टुकड़ी के रूप में गठित की जाने वाली महिला बटालियन देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे हवाई अड्डों और मेट्रो रेल की सुरक्षा और कमांडो के रूप में VIP सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी |
यह निर्णय निश्चित रूप से राष्ट्र की रक्षा के महत्वपूर्ण कार्य में भाग लेने की और अधिक महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करेगा |
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की पहली महिला बटालियन के गठन को मंजूरी दी है।
X प्लेटफ़ॉर्म पर एक पोस्ट में गृह मंत्री ने कहा, राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सपने को साकार करने की दिशा में मजबूत कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने CISF की पहली महिला बटालियन की स्थापना को मंजूरी दे दी है। एक विशिष्ट सैन्य टुकड़ी के रूप में गठित की जाने वाली महिला बटालियन देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे हवाई अड्डों और मेट्रो रेल की सुरक्षा और कमांडो के रूप में VIP सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी संभालेगी। यह निर्णय निश्चित रूप से राष्ट्र की रक्षा के महत्वपूर्ण कार्य में भाग लेने की और अधिक महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।
केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल उन महिलाओं के लिए पसंदीदा विकल्प रहा है जो केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल में देश की सेवा करना चाहती हैं। वर्तमान में बल में महिलाओं की संख्या 7% से अधिक है। महिला बटालियन के जुड़ने से देश की अधिक महत्वाकांक्षी युवा महिलाओं को CISF में शामिल होने और देश की सेवा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे CISF में महिलाओं को एक नई पहचान मिलेगी।
CISF मुख्यालय ने नई बटालियन के मुख्यालय के लिए शीघ्र भर्ती, प्रशिक्षण और स्थान के चयन की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशिक्षण विशेष रूप से एक विशिष्ट बटालियन तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, ताकि महिला बटालियन के कर्मियों को VIP सुरक्षा के साथ हवाई अड्डों, दिल्ली मेट्रो रेल ड्यूटी की सुरक्षा में कमांडो के रूप में बहुविध भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाया जा सके।
53वें CISF दिवस समारोह के अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के आलोक में बल में महिला बटालियन बनाने के प्रस्ताव पर कार्य शुरू किया गया था।
भारतीय नौसेना तटीय रक्षा अभ्यास 'सी विजिल-24' का चौथा संस्करण आयोजित करेगी
नई दिल्ली | भारतीय नौसेना 'पैन-इंडिया' तटीय रक्षा अभ्यास 'सी विजिल-24' के चौथे संस्करण का संचालन 20 और 21 नवंबर 24 को करने के लिए तैयार है। एक्स सी विजिल का चौथा संस्करण भौगोलिक पहुंच और भागीदारी के परिमाण दोनों के संदर्भ में अभूतपूर्व पैमाने पर होगा, जिसमें 06 मंत्रालय और 21 संगठन/एजेंसियां शामिल होंगी। अभ्यास का तटीय रक्षा और सुरक्षा तत्परता मूल्यांकन (सीडीएसआरई) चरण अक्टूबर 2024 के अंत से सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सहित) के नौसेना अधिकारियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसमें संपूर्ण तटीय रक्षा और सुरक्षा बुनियादी ढांचे का गहन ऑडिट किया जाता है। इस वर्ष, पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अधिकारी भी भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाली सीडीएसआरई टीमों का हिस्सा होंगे , साथ में राज्य समुद्री पुलिस, तटरक्षक, सीमा शुल्क, मत्स्य पालन आदि के कर्मचारी भी होंगे।
इस अभ्यास में तटीय संपत्तियों जैसे बंदरगाहों, तेल रिगों, सिंगल पॉइंट मूरिंग्स, केबल लैंडिंग पॉइंट्स और तटीय आबादी सहित महत्वपूर्ण तटीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस वर्ष अन्य सेवाओं ( भारतीय सेना और वायु सेना ) की भागीदारी और बड़ी संख्या में जहाजों और विमानों की नियोजित तैनाती ने अभ्यास की गति को बढ़ा दिया है।
मूल रूप से 2018 में संकल्पित सी विजिल को 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपनाए गए उपायों को मान्य करने और बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। 11,098 किलोमीटर के समुद्र तट और 2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर के आर्थिक क्षेत्र को शामिल करते हुए , यह व्यापक अभ्यास पूरे तटीय सुरक्षा बुनियादी ढांचे और मछली पकड़ने वाले समुदाय और तटीय आबादी सहित सभी समुद्री हितधारकों को एक साथ शामिल करेगा। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तटीय समुदायों के बीच समुद्री सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस प्रकार, मछली पकड़ने वाले समुदायों, तटीय आबादी और एनसीसी और भारत स्काउट्स और गाइड्स के छात्रों की भागीदारी इस प्रयास के उत्साह को बढ़ाएगी।
तटीय सुरक्षा अभ्यास नियमित रूप से अलग-अलग तटीय राज्यों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों द्वारा आयोजित किए जाते हैं। भारतीय नौसेना द्वारा समन्वित अभ्यास सी विजिल एक राष्ट्रीय स्तर की पहल के रूप में है जो भारत की समुद्री रक्षा और सुरक्षा क्षमताओं का समग्र मूल्यांकन प्रदान करता है। यह अभ्यास सभी समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की वर्तमान तैयारियों का आकलन करने, उनकी ताकत और कमजोरियों की पहचान करने और देश के समग्र समुद्री रक्षा ढांचे को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। भारतीय नौसेना द्वारा द्विवार्षिक रूप से आयोजित थिएटर लेवल रेडीनेस ऑपरेशनल एक्सरसाइज ( ट्रोपेक्स ) के अग्रदूत के रूप में कार्य करता है। यह सी विजिल-24 समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करने और तटीय रक्षा में सभी हितधारकों के बीच समन्वित प्रयास सुनिश्चित करने में एक आवश्यक उपाय के रूप में काम करेगा।
दरभंगा में एम्स का सपना साकार : पीएम मोदी ने 12 हजार करोड़ के योजनाओं की सौगात दी
नई दिल्ली | पीएम मोदी ने कहा कि दरभंगा में एम्स का सपना साकार होने की तरफ एक बड़ा कदम उठाया है। दरभंगा एम्स से बिहार, बंगाल और नेपाल के लोगों को फायदा मिलेगा। एम्स से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बनेंगे। मैं दरभंगा और पूरे मिथिला को इन विकास कार्यों के लिए बधाई देता हूं।
हमारे देश में सबसे बड़ी आबादी गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए है। बीमारी भी सबसे अधिक इन्हीं लोगों को प्रभावित करती है। हम सब इसी पृष्ठभूमि से आते हैं। घर में कोई बीमार पड़ता है तो कैसे पूरा परिवार संकट में आ जाता है? हम इसे समझते हैं। पहले के दौर में अस्पताल भी कम थे। डॉक्टर कम थे। दवाइयां कम थी। सरकारें सिर्फ वादों और दावों में उलझी रहती थी। यहां बिहार में जब तक नीतीश कुमार सरकार में नहीं आए थे तब तक गरीबों की चिंता को लेकर कोई गंभीरता नहीं थी। गरीबों के पास बीमारी को सहने के अलावा कोई चारा नहीं था। हमारा देश कैसे आगे बढ़े? इसके लिए हमारी सरकार ने सोच और एप्रोच बदला। हमारा पहला फोकस बीमारी से बचाव पर है। दूसरा फोकस बीमारी के इलाज पर है। तीसरा फोकस सस्ता इलाज और दवाई। चौथा फोकस छोटे शहरों में इलाज की सुविधा देना और पांचवां फोकस टेक्नोलॉजी के जरिए इलाज की व्यवस्था करना है।
पीएम मोदी ने कहा कि यह एनडीए सरकार ही है, जिसने मैथिली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किया था। झारखंड में मैथिली भाषा को दूसरे राजभाषा का दर्जा दिया। दरभंगा, सीतामढ़ी और अयोध्या रूट पर अमृत भारत टेन से काफी मदद मिली है। आज मैं दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को भी योगदान रहा है। आजादी से पहले देश के विकास में काफी योगदान रहा है। मेरे संसदीय क्षेत्री काशी के विकास में भी उनका काफी योगदान रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं एक बार फिर दरभंगा एम्स और अन्य विकास योजनाओं के लिए आप सभी को बधाई देता हूं। यह कहते हुए पीएम ने अपना संबोधन खत्म किया।
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के 60 सालों तक देश में एक ही एम्स था। देशवासियों को दूर दराज से दिल्ली आना पड़ता था। काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। हमारी सरकार ने नए नए एम्स बनाए। आज देश में दो दर्जन एम्स हैं। मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों की संख्या में बढोतरी हुई है। पहले डॉक्टर बनना हो तो अंग्रेजी माध्यम जरूरी था। अब डॉक्टर पढ़ना है या इंजीनियरिंग पढ़ना है तो वह अपनी मातृभाषा में पढ़कर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। यह भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को सच्ची श्रद्धांजलि हैं। हमारी सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया, इससे युवाओं को काफी फायदा होगा। देश में हिन्दी या अन्य भाषाओं में भी मेडिकल की पढ़ाई होगी। यानी अब दलित, गरीब और आदिवासी भी आसानी से डॉक्टर बन पाएंगे। पीएम मोदी ने कहा कि मुजफ्फरपुर में कैंसर का बड़ा अस्पताल बन रहा है। इससे एक ही छत के नीचे सभी तरह के कैंसर का इलाज होगा। जल्दी ही आंखों का अस्पताल भी बिहार में बन रहा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से लाखों गरीबों का इलाज हो रहा है। अगर यह नहीं होता तो गरीब अस्पताल ही नहीं जाते हैं। अब सरकारी के साथ प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज हो रहा है। सवा लाख करोड़ रुपये गरीबों के बचे हैं। एक योजना से देश के गरीबों के सवा लाख करोड़ रुपये बचे हैं। अब तो 70 साल के ऊपर के बुजुर्गों को भी आयुष्मान योजना के दायरे में लाया जा रहा है। बिहार में भी 70 साल के ऊपर के बुजुर्गों के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा शुरू हो गई है। बहुत जल्द सभी बुजुर्गों के पास आयुष्मान वय वंदन योजना का कार्ड होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैथिली भाषा में मिथिलांचल वासियों को नमन किया। उनका अभिनंदन किया। कहा कि आज झारखंड में मतदान हो रहा है। झारखंड के लोगों से अपील करुंगा कि आज ज्यादा से ज्यादा संख्या में वोट करें। मैं मिथिला की बेटी स्वर कोकिला स्व. शारदा सिन्हा को नमन करता हूं। मैथिली और भोजपुरी संगीत में उनका योगदान अतुलनीय है। छठ महापर्व पर उनके गीत देश दुनिया में बजते हैं। हम विकसित भारत की तरफ तेजी से कदम बढ़ा हैं। हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि हम इसके साक्षी बन रहे हैं और देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने 12 हजार करोड़ के योजनाओं की सौगात बिहारवासियों को दी है। उन्होंने दरभंगा एम्स के निर्माण की आधारशिला रखी। इसमें एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल और एक आयुष ब्लॉक, एक मेडिकल कॉलेज, एक नर्सिंग कॉलेज, एक रैन बसेरा और आवासीय सुविधाएं होंगी। इसके अलावा बिहार में करीब 5,070 करोड़ रुपये की लागत वाली कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इतना ही नहीं दो रेलवे ओवर ब्रिज का भी उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने बंधुगंज में एक प्रमुख पुल का भी उद्घाटन किया। यह जहानाबाद को बिहार शरीफ से जोड़ेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने आठ राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। 1,740 करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। साथ ही औरंगाबाद जिले के चिरालापोथु से बाघा बिशुनपुर तक 220 करोड़ रुपये से अधिक की सोनेनगर बाइपास रेलवे लाइन की आधारशिला रखी।
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि एम्स बनने के बाद दरभंगा शहर का और विस्तार होगा। हमलोगों को बहुत खुशी मिली है कि दरभंगा एम्स का निर्माण हो रहा है। आप सभी लोगों से अपील है कि आपलोग हाथों को उठाकर पीएम मोदी को नमन करें। वह और भी अच्छा काम करेंगे बिहार के लिए। राज्य सरकार की ओर से जो भी मदद की आवश्यकता होगी वह मैं करुंगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सभी लोगों का अभिनंदन किया। कहा कि हमलोग पीएम मोदी का स्वागत करते हैं। आज महत्वपूर्ण दिन है। दरभंगा एम्स के निर्माण कार्य का शिलान्यास हो रहा है। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई ने कार्यकाल में पटना एम्स के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। जब पीएम मोदी का कार्यकाल शुरू हुआ तो 2015 में ही दरभंगा एम्स के निर्माण की बात हुई। हमने तत्कालीन वित्त मंत्री स्व. अरूण जेटली जी से कहा था। इसके बाद सरकार ने निर्णय लिया कि पटना के बाद दरभंगा में एम्स बनेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी मिथिलांचल वासियों को सौगात देने दरभंगा पहुंच चुके हैं। सीएम नीतीश कुमार और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के साथ उन्होंने दरभंगा एम्स के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी, बिहार सरकार के मंत्री और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी मौजूद रहे।
हम विकास और विरासत को साथ-साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इगास पर्व के अवसर पर नागरिकों को बधाई दी
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इगास पर्व के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारत विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी ने विशेष रूप से उत्तराखंड के नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि देवभूमि के इगास पर्व की विरासत और भी समृद्ध होगी।
“उत्तराखंड के मेरे परिवारजनों सहित सभी देशवासियों को इगास पर्व की बहुत-बहुत बधाई! दिल्ली में मुझे भी उत्तराखंड से लोकसभा सांसद अनिल बलूनी जी के यहां इस त्योहार में शामिल होने का सौभाग्य मिला। मेरी कामना है कि यह पर्व हर किसी के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाए |
“हम विकास और विरासत को एक साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुझे इस बात का संतोष है कि लगभग लुप्तप्राय हो चुका लोक संस्कृति से जुड़ा इगास पर्व, एक बार फिर से उत्तराखंड के मेरे परिवारजनों की आस्था का केंद्र बन रहा है।”
“उत्तराखंड के मेरे भाई-बहनों ने इगास की परंपरा को जिस प्रकार जीवंत किया है, वो बहुत उत्साहित करने वाला है। देशभर में इस पावन पर्व को जिस बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है, वो इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। मुझे विश्वास है कि देवभूमि की यह विरासत और फलेगी-फूलेगी।”
पहला आकाशीय अभ्यास ‘अंतरिक्ष अभ्यास–2024’ रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा नई दिल्ली में आयोजित किया गया
भारत अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान
नई दिल्ली | अंतरिक्ष आधारित परिसंपत्तियों एवं सेवाओं पर बढ़ते खतरों से निपटने के लिए एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय की रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा 11 से 13 नवंबर, 2024 तक पहला तीन दिवसीय आकाशीय अभ्यास ‘अंतरिक्ष अभ्यास-2024’ आयोजित किया जा रहा है। अंतरिक्ष अभ्यास अपनी तरह का पहला विशेष कार्यक्रम है और इससे अंतरिक्ष क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने और सैन्य अभियानों में भारत की अंतरिक्ष क्षमता को एकीकृत करने में सहायता मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि अंतरिक्ष को कभी अंतिम सीमा माना जाता था और अब यह भारत की रक्षा एवं सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत, अंतरिक्ष अन्वेषण की अपनी समृद्ध विरासत और बढ़ती सैन्य क्षमताओं के साथ, अब अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने इस बात का मुख्य रूप से उल्लेख किया कि अंतरिक्ष तेजी से भीड़भाड़ वाला, प्रतिस्पर्धात्मक, वाणिज्यिक और प्रतिस्पर्धी होड़ वाला होता जा रहा है। उन्होंने सैन्य नेतृत्व पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और शैक्षणिक समुदाय के सहयोग से नवाचार को बढ़ावा देने तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों एवं आधुनिक प्रणालियों को विकसित करके अंतरिक्ष में हमारे राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिए जोर दिया।
इस अंतरिक्ष अभ्यास का उद्देश्य अंतरिक्ष आधारित परिसंपत्तियों एवं सेवाओं की बेहतर समझ प्रदान करना और हितधारकों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रक्रिया से संबंधित निर्भरता की समझ हासिल करना है। इन सबके अलावा, इसका लक्ष्य अंतरिक्ष आधारित सेवाओं में रुकावट या व्यवधान की स्थिति में संचालन हेतु प्रक्रियागत समस्याओं की पहचान करना भी है। इसमें सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मियों के साथ-साथ रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी तथा इसकी संबद्ध इकाइयों के प्रतिभागी शामिल होंगे। एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय अर्थात रक्षा साइबर एजेंसी, रक्षा खुफिया एजेंसी और सामरिक बल कमान के तहत विशेषज्ञ शाखाएं भी अभ्यास के संचालन में सक्रिय भागीदार होंगी। इसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।