देश-विदेश
साइक्लोन दाना से ओडिशा में 1.75 लाख एकड़ में फसल बर्बाद : बिहार-झारखंड में बारिश
नई दिल्ली | मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से उठा साइक्लोन दाना शनिवार रात तक पूरी तरह बेअसर हो जाएगा। तूफान के चलते पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान, दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा में 4 लोगों की मौत हो गई है।
ओडिशा में किसी की जान नहीं गई, लेकिन बारिश और तूफान से 1.75 लाख हेक्टेयर इलाके में फसल बर्बाद हो गई है। मोहन चरण मांझी ने बताया कि तुफान से पहले 8 लाख लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया था।

दाना का असर आंध्र प्रदेश, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में भी पड़ा। बिहार और झारखंड में बारिश जारी है। झारखंड में तापमान 6 डिग्री गिर गया है। अगले 24 घंटे तक बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ में बारिश का अनुमान है। पेड़-बिजली के खंभे उखड़े, बिहार-झारखंड में भी बारिश ओडिशा में सबसे ज्यादा नुकसान केंद्रपाड़ा, भद्रक और बालासोर जिलों में हुआ है। तेज हवा से कई पेड़ उखड़ गए। बिजली के खंभे टूट गए हैं। इससे कई इलाकों में बिजली गुल हो गई। तूफान के चलते नजदीकी राज्यों झारखंड, बिहार में भी बारिश हो रही है। दक्षिण बंगाल के 8 जिलों में भारी बारिश होती रही। कोलकाता में 24 घंटे में 4 इंच पानी बरसा। हालांकि, दोनों राज्यों में शुक्रवार सुबह 8 से 9 बजे के बीच हवाई और 10 बजे रेल ट्रैफिक बहाल कर दिया गया था। तूफान के बीच जन्मे 2,211 बच्चे, इनमें 18 जुड़वां तूफान के दौरान ओडिशा में 4,859 गर्भवतियों को प्रसव केंद्र भेजा गया था। इनमें से 2,211 ने 23 और 24 अक्टूबर को बच्चों को जन्म दिया। 1,858 बच्चे सामान्य डिलीवरी से हुए। नवजातों में 18 ट्विन्स हैं।
बिहार में इसका असर दिवाली यानी 31 अक्टूबर तक दिखेगा। 28 अक्टूबर तक राज्य के 19 जिलों में बादल छाए रहेंगे, हल्की बूंदा बांदी होगी। यहां 10 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा भी चलेगी। तूफान के कारण चल रही तेज हवा के कारण जिन पौधों में दाने आ चुके हैं, वह गिर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के जिलों में तूफान दाना का असर (शनिवार को) आज देखने को मिलेगा। ओडिशा से लगते प्रदेश के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 12 जिलों के लिए यली अलर्ट जारी किया है।
इंडिया एआई और मेटा ने आईआईटी जोधपुर में सृजनात्मक एआई : सृजन केंद्र की स्थापना की घोषणा की
भारत में ओपन सोर्स एआई इनोवेशन, अनुसंधान एवं विकास और कौशल विकास को आगे बढ़ाने के लिए एमईआईटीवाई और मेटा ने सहयोग किया |
मेटा आईआईटी जोधपुर में जनरेटिव एआई, सृजन, (सृजन) (“जेनएआई सीओई”) केंद्र की स्थापना का समर्थन करेगा |
“युवएआई इनिशिएटिव फॉर स्किलिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग” वास्तविक दुनिया के समाधानों के लिए ओपन-सोर्स एलएलएम का लाभ उठाते हुए एआई कौशल के साथ एक लाख छात्रों और युवा डेवलपर्स को सशक्त बनाएगी |

स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, स्मार्ट शहरों, मोबिलिटी और वित्तीय समावेशन के प्रमुख क्षेत्रों को संबोधित करने के लिए सीओई और कौशल पहल
ये पहल अनुसंधान, कौशल विकास और एआई उन्नति में मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, साथ ही जिम्मेदार और नैतिकता को सुनिश्चित करते हैं: एस कृष्ण
नई दिल्ली | साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के सहयोग से भारत में ओपन सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को आगे बढ़ाने के लिए "युवएआई इनिशिएटिव फॉर स्किलिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग" की शुरुआत की है। यह साझेदारी स्वदेशी एआई अनुप्रयोगों के विकास, एआई में कौशल विकास को आगे बढ़ाने, तकनीकी श्रेष्ठता सुनिश्चित करने के भारत के एआई मिशन में योगदान देने के उद्देश्य से अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ावा देने और भारत के लिए विशेष रूप से बनाए गए एआई समाधान बनाने की दृष्टि को सक्षम करेगी।
इस सहयोग के हिस्से के रूप में, मेटा आईआईटी जोधपुर में जनरेटिव एआई, सृजन (सृजन) ("जेनएआई सीओई") के लिए केंद्र की स्थापना का समर्थन करेगा। इस जेनएआई सीओई का उद्देश्य भारत में जिम्मेदार और नैतिक एआई प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देते हुए एआई में अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाना है। यह एआई प्रौद्योगिकी परिदृश्य में खुले विज्ञान नवाचार का समर्थन और संवर्धन करेगा।
शिक्षा, क्षमता निर्माण और नीति परामर्श के माध्यम से, केंद्र अगली पीढ़ी के शोधकर्ताओं, छात्रों और चिकित्सकों को जेनएआई प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार विकास और प्रसार के लिए आवश्यक ज्ञान और उपकरणों से सशक्त बनाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव श्री एस. कृष्णन ने सहयोगात्मक नवाचार की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए इंडियाएआई, आईआईटी जोधपुर, एआईसीटीई और मेटा के बीच साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "ये पहल अभूतपूर्व अनुसंधान, कौशल विकास और ओपन-सोर्स नवाचार के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने, एआई तकनीक को आगे बढ़ाने और साथ ही इसकी जिम्मेदार और नैतिक प्रसार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हैं।" यह पहल देश के युवाओं को वैश्विक एआई क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार करके भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का समर्थन करेगी, जिससे तकनीकी उन्नति और आर्थिक विकास में भारत की अग्रणी स्थिति सुनिश्चित होगी।
साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए, एमईआईटीवाई के अपर सचिव, अभिषेक सिंह ने कहा, "भारत सरकार इंडिया एआई पहल के अंतर्गत समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए एआई नवाचार, कौशल और तकनीकी उन्नति के दृष्टिकोण का समर्थन कर रही है। मेटा जैसे उद्योग के नेताओं के साथ हमारा सहयोग इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण है। एआई में ओपन सोर्स नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देकर, उभरती प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और कौशल विकास को आगे बढ़ाकर, हम प्रतिभा की कमी को समाप्त रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे युवा एआई क्रांति का नेतृत्व करने के लिए सुसज्जित हों, अंततः दायित्वपूर्ण विकास में एक वैश्विक नेतृत्व के रूप में भारत की स्थिति को सुरक्षित करें और एक मजबूत एआई इकोसिस्टम में योगदान दें।"
इस अवसर पर मेटा इंडिया के उपाध्यक्ष और सार्वजनिक नीति प्रमुख शिवनाथ ठुकराल ने कहा, "ओपन-सोर्स एआई के महत्व पर जोर देकर, मेटा एक ऐसे इकोसिस्टम को पोषित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां स्वदेशी समाधान पनप सकें। आज की साझेदारी भारत में उभरती प्रौद्योगिकियों की उन्नति को आगे बढ़ाने के लिए हमारी गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जबकि इंडिया एआई मिशन के साथ सहजता से संरेखित है। ये पहल अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स को सशक्त बनाएगी और उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए उपकरणों से लैस करेगी, जिससे अंततः भारत वैश्विक एआई उन्नति में सबसे आगे रहेगा।"
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत मुद्रा ऋण अब 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख हो गया
रायपुर | केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषणा के अनुरूप प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत मुद्रा ऋण की मौजूदा सीमा को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है | यह वृद्धि मुद्रा योजना के समग्र उद्देश्य को प्रोत्साहन देने की एक और सकारात्मक पहल है | यह वृद्धि विशेष रूप से उभरते उद्यमियों के लिए लाभकारी है, जिससे उन्हें विकास और विस्तार में सहायता मिलेगी | यह पहल एक मजबूत उद्यमी इको-सिस्टम को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

इस संबंध में जारी अधिसूचना के अनुसार तरुण प्लस की नई श्रेणी 10 लाख रुपए से अधिक और 20 लाख रुपए तक के ऋणों के लिए है | यह उन उद्यमियों को उपलब्ध होगी, जिन्होंने तरुण श्रेणी के अंतर्गत पिछले ऋणों का लाभ उठाते हुए उनका सफलतापूर्वक भुगतान भी किया है | 20 लाख रुपए तक के पीएमएमवाई ऋणों की गारंटी कवरेज माइक्रो यूनिट्स के लिए क्रेडिट गारंटी फंड (सीजीएफएमयू) के तहत प्रदान की जाएगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "पिछले 10 वर्षों में भारत-जर्मनी सहयोग में कई गुना वृद्धि हुई है"
भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग ने साझेदारी के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया: डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रमुख उपलब्धि और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला
भारत, जर्मनी के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के एक नए युग के लिए तैयार: डॉ. जितेंद्र सिंह
जर्मनी ने भारत के चंद्र मिशन की प्रशंसा की और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग में "मूनशॉट महत्वाकांक्षा" का आह्वान किया
भारत और जर्मनी ने नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान साझेदारी को प्रोत्साहन देने के लिए तीन ऐतिहासिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए
भारत के अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी विकास को भारत-जर्मनी साझेदारी में प्रमुख उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया

नई दिल्ली | पिछले 10 वर्षों में भारत-जर्मनी सहयोग में कई गुना वृद्धि हुई है"। यह बात केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उस समय कही, जब जर्मनी की संघीय शिक्षा और अनुसंधान मंत्री बेट्टीना स्टार्क-वाटजिंगर ने उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत-जर्मनी सहयोग के स्वर्ण जयंती समारोह पर बधाई दी।
सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंची जर्मनी की मंत्री का पहला कार्यक्रम भारत के विज्ञान मंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बैठक थी।
भारत और जर्मनी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सफल सहयोग के 50 वर्ष पूरे होने पर एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जर्मनी की संघीय शिक्षा और अनुसंधान मंत्री सुश्री बेट्टीना स्टार्क-वाटजिंगर भी शामिल हुईं। नई दिल्ली में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में इस दीर्घकालिक साझेदारी के माध्यम से प्राप्त उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाया गया और आने वाले दशकों में और अधिक गहन सहयोग के लिए मंच तैयार किया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए इस बात पर बल दिया कि पिछले एक दशक में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत-जर्मनी साझेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसने विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में दोनों देशों की प्रगति में योगदान दिया है। केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा, "यह स्वर्णिम सहयोग की स्वर्ण जयंती है।" "50 वर्ष पहले जो सहयोग शुरू हुआ था, वह एक मजबूत, बहुआयामी संबंध में बदल गया है जिसने अंतरिक्ष अनुसंधान से लेकर जैव प्रौद्योगिकी और जलवायु कार्रवाई से लेकर आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लगभग हर पहलू को शामिल किया है।"
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व के रूप में भारत के उदय की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "भारत की अंतरिक्ष यात्रा ने एक बड़ी छलांग लगाई है, जिसका समापन हमारे चंद्रयान-3 मिशन के माध्यम से हुआ, जिसने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना दिया।" "यह प्रमुख उपलब्धि निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र के खुलने के साथ, अंतरिक्ष अनुसंधान के भविष्य को अपनाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान प्रशिक्षण समूह की सफल स्थापना भी की गई, जो भारत और जर्मनी के बीच एक संयुक्त पहल है। यह पहल सुपर-मॉलिक्यूलर मैट्रिक्स में फोटोल्यूमिनेसेंस पर केंद्रित है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सहयोग को दोनों देशों की वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण बताया और द्विपक्षीय अनुसंधान और विकास के भविष्य के बारे में आशा व्यक्त की।
इस कार्यक्रम में भारत और जर्मनी दोनों देशों की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, जिससे द्विपक्षीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी के महत्व पर और अधिक ध्यान दिया गया। प्रमुख उपस्थित लोगों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, प्री-कॉम्पिटिटिव रिसर्च के निदेशक और अनुभाग प्रमुख डॉ. जोहान फेकल और जर्मन रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रो. करिन जैकब्स शामिल थे। जर्मन अकादमिक एक्सचेंज सर्विस (डीएएडी) के अध्यक्ष प्रो. जॉयब्रत मुखर्जी, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा और डीएसटी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रमुख डॉ. प्रवीणकुमार सोमसुंदरम भी इस अवसर पर मौजूद थे।
चक्रवात 'दाना' का कहर जारी : तेज बारिश के साथ तूफानी हवाएं
नई दिल्ली | ओडिशा के तट पर गंभीर चक्रवाती तूफान ‘दाना’ के पहुंचने की प्रक्रिया (लैंडफॉल) शुक्रवार सुबह पूरी हो गई | 'दाना' को यहां पहुंचने में कम से कम साढ़े 8 घंटे का समय लगा | आईएमडी के अनुसार, चक्रवाती तूफान ‘दाना’ के प्रभाव से हवाओं की गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी और बाद में यह कमजोर हो कर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया | अब इसके उत्तरी ओडिशा से होते हुए उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले छह घंटों के दौरान धीरे-धीरे कमजोर होकर गहरे अवदाब में तब्दील होने की संभावना है |

IMD ने कहा कि 25 अक्टूबर को ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है | ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है | स्कूलों को बंद कर दिया गया है | 400 से अधिक रेलगाड़ियों को रद्द और उड़ानों को निलंबित कर दिया गया | हालांकि, कोलकाता और भुवनेश्वर एयरपोर्ट से अब उड़ानों का संचालन शुरू हो गया है |
ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने कहा, 'चक्रवाती तूफान दाना ने 24 और 25 अक्टूबर की रात को भीतरकनिका और धामरा तटों के बीच दस्तक दी | सतर्क प्रशासन और तैयारियों के कारण कोई हताहत नहीं हुआ | सरकार का 'शून्य हताहत' का लक्ष्य हासिल हो गया है | लगभग 6 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है | 6,000 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया है |'
चक्रवाती तूफान के कारण भद्रक के धामरा के तटीय गांवों में सड़कें बंद हो गई हैं | स्थानीय लोगों को सड़कों पर गिरे पेड़ों को साफ करते देखा जा सकता है | सड़कें बंद हैं और कुछ घरों को भी नुकसान पहुंचा है |
भद्रक के धामरा में तेज़ हवाओं और बारिश के कारण पेड़ उखड़ गए हैं, इसलिए अग्निशमन सेवा दल द्वारा सड़कें साफ की जा रही हैं | ओडिशा अग्निशमन सेवा के दीपक कुमार ने ANI से कहा, 'यहां कई पेड़ उखड़ गए हैं, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं | सबसे पहले, हम एनएच और अन्य सड़कों को साफ़ करेंगे और फिर हम आवासीय क्षेत्रों की ओर बढ़ेंगे | हमारी दो टीमें धामरा में काम कर रही हैं | अभी तक हमारे पास किसी भी गंभीर नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं है |'
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भुवनेश्वर में राजीव भवन में चक्रवात 'दाना' की लैंडफॉल के बाद की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं | माझी के अनुसार, अब तक लगभग 5.84 लाख लोगों को आश्रय स्थलों तक पहुंचाया गया है |
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, चक्रवात ‘दाना’ के मद्देनजर कोलकाता हवाई अड्डे पर गुरुवार शाम से 15 घंटे के लिए उड़ानों को स्थगित कर दिया गया | उड़ानों को शुक्रवार सुबह नौ बजे बहाल किया जाना है | इस बीच, हवाई अड्डा निदेशक ने बताया कि कोलकाता हवाई अड्डे से अंतिम उड़ान के रवाना होने के बाद टर्मिनल भवन के सभी प्रवेश और निकास द्वारों को सील कर दिया गया है |
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में हवाई अड्डे के अधिकारियों ने चक्रवात ‘दाना’ के मद्देनजर 25 अक्टूबर को सुबह 8 बजे तक उड़ान संचालन को निलंबित करने का फैसला किया है | अधिकारी ने कहा कि उड़ान 15 घंटे तक निलंबित रहने के दौरान, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की लगभग 40 उड़ानें प्रभावित होंगी | राज्य सरकार ने 23 से 25 अक्टूबर तक भुवनेश्वर में सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए हैं |
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भारत को ‘सशक्त, सुरक्षित और विकसित’ बनाने के लिए : संयोजन-तालमेल अपनाने का आह्वान किया
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भारत को ‘सशक्त, सुरक्षित और विकसित’ बनाने के लिए रक्षा उद्योग, अनुसंधान एवं विकास संगठनों और सेना से संलयन और संयोजन-तालमेल अपनाने का आह्वान किया
नई दिल्ली | प्रमुख सेना अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने 24 अक्टूबर, 2024 को प्रौद्योगिकी प्रबंधन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (टेकमा 2024) का आभासी माध्यम से उद्घाटन किया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मसूरी स्थित प्रौद्योगिकी प्रबंधन संस्थान में ‘विजन इंडिया @2047 के लिए रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी प्रबंधन’ विषय पर इस सम्मेलन का आयोजन किया है। इसका उद्देश्य देश की रक्षा प्रौद्योगिकियों को वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने के राष्ट्रीय उद्देश्य में शामिल करना है।

प्रमुख सेनाध्यक्ष ने रक्षा उद्योग, अनुसंधान एवं विकास संगठनों और सेना से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने और भारत को सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत बनाने के लिए संलयन और तालमेल अपनाने का आह्वान किया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने समय के साथ उन्नत बनने की आवश्यकता पर जोर देते हुए नवीन और अप्रतिम विचारों को सामने लाने का आह्वान किया जो सशस्त्र बलों और देश को रणनीतिक बढ़त दिलाए।
सम्मेलन की शुरूआत विजन इंडिया @ 2047 के लिए भविष्य की प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल और स्वदेशी क्षमताओं को मज़बूत करने पर एक गोलमेज चर्चा के साथ हुई। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। टेकमा-2024 के विषय हैं भविष्य की रक्षा तकनीकें, 2047 की रणनीतिक दृष्टि को सामने रखते हुए प्रौद्योगिकी प्रबंधन, रक्षा परियोजना प्रबंधन उत्कृष्टता और इंजीनियरिंग और रक्षा व्यावसायीकरण की दृष्टि से समुन्नतिकरण
टेकमा-2024 से प्राप्त ज्ञान और अनुभवों से भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए भारत के स्वदेशी अनुसंधान और विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, बहु-विषयी अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान करने, परियोजना प्रबंधन प्रक्रियाओं में सुधार और तकनीकी, प्रचालन और कार्यान्वयन चुनौतियां दूर करने के समाधान विकसित होने की संभावना है। इससे भारत के 2047 तक वैश्विक नेता बनना सुनिश्चित होगा।
सिंगापुर भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (सिम्बेक्स) 2024 : 23 से 29 अक्टूबर 2024 तक
नई दिल्ली | सिंगापुर भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (सिम्बेक्स) का 31वां संस्करण 23 से 29 अक्टूबर 2024 तक, पूर्वी नौसेना कमान, विशाखापत्तनम में आयोजित हो रहा है। सिंगापुर गणराज्य के नौसेना जहाज आरएसएस टेनाशियस, जिसमें हेलीकॉप्टर शामिल हैं, सिम्बेक्स 2024 में भाग लेने 23 अक्टूबर 24 को विशाखापत्तनम पहुँचा है।

सिम्बेक्स, जो 1994 में 'एक्सरसाइज लायन किंग' के रूप में शुरू हुआ था, तब से भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना (आरएसएन) के बीच सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समुद्री सहयोगों में से एक बन गया है।
अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जाएगा - 23 से 25 अक्टूबर तक विशाखापत्तनम में बंदरगाह चरण और 28 से 29 अक्टूबर तक बंगाल की खाड़ी में समुद्री चरण। इस वर्ष के संस्करण का उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है, ताकि अंतःक्रियाशीलता बढ़ाई जा सके, समुद्री डोमेन को लेकर में सुधार हो सके और सामान्य समुद्री चुनौतियों का समाधान करने के लिए सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
बंदरगाह चरण में विषय वस्तु विशेषज्ञ आदान-प्रदान (एसएमईई), क्रॉस-डेक विजिट्स, खेल कार्यक्रम और दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच पूर्व-नौकायन ब्रीफिंग शामिल होंगे। समुद्री चरण में उन्नत नौसेना अभ्यास देखने को मिलेंगे, जिसमें लाइव हथियार फायरिंग, पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) प्रशिक्षण, सतह-रोधी और हवा-रोधी संचालन, समुद्री कौशल विकास और सामरिक युद्धाभ्यास शामिल हैं।
सिम्बेक्स 24 की शुरुआत के लिए उद्घाटन समारोह 24 अक्टूबर 24 को आईएनएस शिवालिक पर आयोजित किया जाएगा और इसमें पूर्वी बेड़े और सिंगापुर नौसेना की भाग लेने वाली इकाइयाँ शामिल होंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से की रीवा आरआईसी में वन-टू-वन चर्चा
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) में उद्योग जगत के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आरआईसी से रीवा प्रदेश का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र बनकर उभरेगा, जहाँ राज्य सरकार उद्योगपतियों को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। सरकार ने निवेश के लिए उद्योग-अनुकूल नीतियों को मजबूत किया है, जिससे प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को तेज़ी से बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप, मुख्य सचिव अनुराग जैन एवं प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन राघवेन्द्र कुमार सिंह उपस्थित रहे।

डालमिया सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ पुनीत डालमिया ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश में सीमेंट प्लांट एवं नवीन माइनिंग परियोजना स्थापित करने की जानकारी दी। उन्होंने ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने एवं अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में अपनी कार्य योजना बताई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एस. गोयनका ग्रुप के एमडी आनंद गोयनका ने खनन क्षेत्र अन्तर्गत क्लिंकर प्लांट लगाए जाने की योजना बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें आश्वस्त किया कि इस परियोजना के लिए सरकार द्वारा अतिरिक्त भूमि आवंटन, एकल खिड़की अनुमतियाँ एवं पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी। पेट्रो-केमिकल उद्योग के विकास के अवसरों पर चर्चा करते हुए बीपीसीएल सीजीएम कपिल राजोरिया ने सिंगरौली जिले में पेट्रोलियम स्टोरेज एवं डिस्ट्रीब्यूशन डिपो स्थापित किए जाने की योजना बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें आश्वस्त किया कि डिस्ट्रीब्यूशन डिपो तक पहुंच मार्ग के लिए भूमि और कनेक्टिविटी संबंधी मुद्दों को हल किया जाएगा।
रामा ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर नरेश गोयल ने मेन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में अपनी परियोजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से लगभग 2000 से अधिक व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्टार ग्रुप के चेयरमैन रमेश सिंह ने पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के संबंध में जानकारी दी। इसी क्रम में रिलायंस बॉयो एनर्जी बिजनेस हेड हरींद्र के. त्रिपाठी, सोलर एएमसी के सीईओ दिगेंद्र राठौड़ एवं महान एनर्जी लिमिटेड अडानी समूह के क्लस्टर प्रमुख बच्चा प्रसाद ने भी नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाओं पर विचार साझा किए।
मेहरोत्रा बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अतुल मेहरोत्रा ने प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति की सराहना करते हुए खाद्य प्र-संस्करण उद्योग के विकास की दिशा में अपनी योजनाएं साझा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाद्य प्र-संस्करण उद्योग अंतर्गत अन्न के उत्पाद भी तैयार करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया। केजेएस सीमेंट के डायरेक्टर के.एस. सिंघवी ने मैहर में सीमेंट उद्योग के विस्तारीकरण पर अपनी योजना बताई और इसके लिए वित्तीय सहायता एवं भूमि आवंटन की चर्चा की। आदित्य बिरला अल्ट्राटेक के चीफ ऑपरेशन ऑफिसर मैन्युफैक्चरिंग - सेन्ट्रल क्ल्स्टर राजेन्द्र काबरा ने निवेश के संबंध में चर्चा की।
वास्टेक इंक के निदेशक सिद्धार्थ शुक्ला ने आईटी एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी योजनाओं को प्रस्तुत किया और भोपाल में फरवरी 2025 में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अमेरिका में संचालित किए जा रहे डाटा सेंटर एवं ग्लोबल केपेबिलिटी सेंटर के प्रतिनिधियों को लेकर आने की इच्छा जाहिर की।बालाजी वेफर्स के एमपी हेड समीर पातर ने आरआईसी की प्रसंशा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह कॉन्क्लेव विन्ध्य क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। पातर ने प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाओं से उन्हें अवगत कराया।
सुदर्शन टेक्नो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ प्रतीक गोला ने रक्षा मेन्यूफैक्चरिंग तथा विजक्राफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के एमडी संतोष कांबले ने मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में अपनी कंपनी की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
अगरतला बांस और बेंत शिल्प के सतत विकास और संवर्धन पर केंद्रित एक अग्रणी पहल
रोजगार श्रृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है अगरतला का बांस और बेंत विकास संस्थान
रायपुर | त्रिपुरा का बांस और बेंत विकास संस्थान (बीसीडीआई), अगरतला बांस और बेंत शिल्प के सतत विकास और संवर्धन पर केंद्रित एक अग्रणी पहल है । संस्थान का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और समुदायों को सशक्त बनाते हुए क्षेत्र के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करना है । यह प्रशिक्षण कार्यशालाओं, प्रदर्शनी क्षेत्रों और संसाधन केंद्रों सहित संरचित सुविधाएं प्रदान करता है । डिजाइनिंग पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक कार्यक्षमता के एकीकरण को दर्शाता है, जो इसे सीखने और रचनात्मकता के लिए एक आकर्षक स्थान बनाता है। यह संस्थान न केवल त्रिपुरा राज्य में बल्कि सम्पूर्ण उत्तर पूर्वी राज्यों में रोजगार श्रृजन में महत्वपूर्ण निभा रहा है ।

संस्थान के प्रभारी अभिनव कांत ने बताया कि हस्तशिल्प कारीगरों को कौशल प्रदान करने के लिए 1974 में अगरतला में बांस और बेंत विकास संस्थान (बीसीडीआई) की स्थापना की गई थी । विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्थान नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन एंड रीच (एनईसीटीएआर) को कौशल, डिजाइन, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में बहु-विषयक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने बताया कि बांस त्रिपुरा के प्रमुख और महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है। राज्य में सदाबहार प्रजातियों के जंगलों के पैच के साथ उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन हैं और बांस के बागानों के तहत एक बड़ा क्षेत्र राज्य में बांस की कम से कम 18 प्रजातियाँ आम तौर पर पाई जाती हैं। राज्य के जंगलों में बांस वाले क्षेत्र का विस्तार 3,246 वर्ग किमी है।
अभिनव कांत ने बोराक, मूली बांस, थाईलैण्ड बांस, कनक, कोरा, कैचरेज, बारी, ओरनामेंटल, डोलुबांस प्रतातियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी । इसके अलावा उन्होंने संथान में किए जा रहे अनुसंधान और किए जा रहे नवाचार के संबंध में भी बताया । उन्होंने बताया कि चीन की आपत्तियों के बावजूद बीसीडीआई को वाटर बाटल निर्माण पेंटेंट प्राप्त हुआ है ।
उन्होंने बांस से विभिन्न प्रकार के वस्तुओं के निर्माण में होने वाली प्रक्रियाओं जैसे बांस क्रॉस कट, स्प्लिटिंग, नॉट रिमूविंग, अगरबत्ती स्टिक मेकिंग, फोरसाइड प्लेनिंग, केमिकल ट्रिटमेंट, लेथ मशीन, लेज़र मशीन के माध्यम से बांस लकड़ी पर कारीगरी और खेल सामग्री निमार्ण संबंधी जानकारी छत्तीसगढ़ मीडिया टीम से साझा की।
चक्रवात दाना के मद्देनजर आपातकालीन ऑपरेशन के लिए भारतीय नौसेना की तैयारी
नई दिल्ली | ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तट पर चक्रवात दाना के गंभीर प्रभाव की आशंका को देखते हुए , भारतीय नौसेना मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।
पूर्वी नौसेना कमान ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में नौसेना अधिकारियों के प्रभारी (एनओआईसी) के साथ समन्वय में एक व्यापक आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय किया है। कमान बेस विक्टुअलिंग यार्ड (बीवीवाई), मैटेरियल ऑर्गनाइजेशन और नौसेना अस्पताल आईएनएचएस कल्याणी के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि राज्य प्रशासन द्वारा आवश्यक आपूर्ति और चिकित्सा सहायता मांगे जाने पर दिया जा सके ।

इस तैयारी के तहत आवश्यक कपड़े, पीने का पानी, भोजन, दवाइयाँ और आपातकालीन राहत सामग्री सहित एचएडीआर पैलेट को प्रभावित होने की आशंका वाले क्षेत्रों में सड़क मार्ग पर रखा गया है। इसके अलावा, बाढ़ राहत और गोताखोरों की टीमों को ज़रूरत पड़ने पर समन्वित बचाव और राहत कार्यों में सहायता के लिए जुटाया जा रहा है।
समुद्र से राहत प्रयासों में सहायता के लिए पूर्वी बेड़े के दो जहाज आपूर्ति तथा बचाव एवं गोताखोर टीमों के साथ खड़े हैं ।
भारतीय नौसेना स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है तथा चक्रवात दाना से प्रभावित नागरिक प्राधिकारियों और लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह से तैयार है ।
29 अक्टूबर को 150 देश ‘आयुर्वेद दिवस 2024’ मनाएंगे
“वैश्विक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद नवाचार” मानवता के प्रति आयुर्वेद के योगदान को नए आयाम देता है : प्रतापराव जाधव, आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
आयुष डिजिटल पहल से उद्योग में बदलाव आ रहा है: सचिव, आयुष मंत्रालय
नई दिल्ली | आयुष मंत्रालय ने 29 अक्टूबर, 2024 को 9वां आयुर्वेद दिवस मनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। इस वर्ष दुनिया भर के 150 से अधिक देश आयुर्वेद दिवस के लिए तैयार हैं, जिसे “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद नवाचार” आधारित थीम पर मनाया जा रहा है। इस अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने आयुर्वेद दिवस के महत्व के बारे में कहा, “आयुर्वेद दिवस अब एक वैश्विक पहल बन गया है। हमें यह जानकर गर्व है कि आयुर्वेद दिवस समारोह 2024 में 150 से अधिक देशों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने आयुर्वेद दिवस 2024 की थीम को रेखांकित करते हुए मंत्रालय की प्राथमिकता के बारे में कहा, “इस वर्ष के आयुर्वेद दिवस समारोह का विषय वैश्विक स्वास्थ्य में आयुर्वेद के योगदान को नए आयाम देता है। हमारा उद्देश्य जनता के कल्याण के लिए आयुर्वेद को एक मजबूत चिकित्सा प्रणाली के रूप में वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। इसके तहत अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने पूरे देश में एक महीने का कार्यक्रम शुरू किया है।”
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने मंत्रालय के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा, “आयुर्वेद दिवस समारोहों के माध्यम से गैर-संचारी रोगों, मानसिक स्वास्थ्य, रोगाणुरोधी प्रतिरोध और वृद्धावस्था देखभाल सहित महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दों पर विचार करने के लिए आयुर्वेद को समकालीन विज्ञान के साथ एकीकृत करने पर आयुष मंत्रालय ध्यान केंद्रित करता है।”
उन्होंने मंत्रालय की नवीनतम पहलों के बारे में कहा, "आयुष ग्रिड के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आयुर्वेद संबंधी ज्ञान को जनता के लिए आसानी से सुलभ बनाया गया है, जिसमें आयुर्वेद योजना, आयुष अनुसंधान पोर्टल और नमस्ते पोर्टल जैसी प्रमुख पहल शामिल हैं।" इस समय आयुर्वेद को दुनिया भर के 24 देशों में मान्यता प्राप्त है, जबकि आयुर्वेद उत्पादों को 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है।
इस वर्ष के समारोह में स्टार्टअप और उद्योग की महत्वपूर्ण भागीदारी होगी, जो आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार के केंद्र में स्थापित करेगा। प्रमुख आयुर्वेद विशेषज्ञों ने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए अपने विचार और आकाक्षाएं व्यक्त की हैं। आयुर्वेद में नवाचार थीम पर इस वर्ष के समारोह को लेकर आयुष पेशेवर विशेष रूप से उत्साहित हैं।
आयुष मंत्रालय के सलाहकार और शिलांग स्थित उत्तर-पूर्वी आयुर्वेद और होम्योपैथी संस्थान (एनईआईएएच) के निदेशक डॉ. मनोज नेसारी ने कहा, “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद नवाचार’ थीम को विशेष रूप से आयुर्वेद में किए गए व्यापक शोध कार्यों को उजागर करने के लिए चुना गया है, ताकि स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और विभिन्न रोग स्थितियों के उपचार में आयुर्वेद की वैज्ञानिक प्रासंगिकता स्थापित की जा सके। यह दुनिया भर के लोगों की स्वास्थ्य सेवा के लिए आयुर्वेद की प्रासंगिकता को भी उजागर करता है, चाहे उनका धर्म, जातीयता, सामाजिक स्थिति और भौगोलिक सीमाएं कुछ भी हों। नवाचार पर विशेष ध्यान हमारे युवाओं को आयुर्वेद में शामिल होने और स्टार्टअप स्थापित करने के लिए आकर्षित और प्रेरित करेगा। मैं उत्तर पूर्वी राज्यों के लोगों और सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों में आयुर्वेद को लेकर बढ़ रहे विश्वास को भी देखता हूं।”
जम्मू-कश्मीर के आयुष निदेशक डॉ. मोहन सिंह ने कहा, "इस वर्ष के समारोह की थीम को देखते हुए, हम सभी आयुर्वेद दिवस 2024 की गतिविधियों का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित हैं। हम स्वास्थ्य पेशेवरों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के एक असाधारण संगम की आशा करते हैं, जो आयुर्वेद की शक्ति के माध्यम से एक स्वस्थ, अधिक टिकाऊ दुनिया बनाने के लिए समर्पित हैं।"
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति डॉ. संजीव शर्मा ने कहा, "आयुर्वेद दिवस 2024 के समारोह की तैयारी कर रहे हमारे छात्रों और विद्वानों की प्रतिबद्धता और जुनून प्रेरणादायक है। यह समग्र स्वास्थ्य के नए आयामों को तलाशने का एक अवसर होगा, जहाँ प्राचीन ज्ञान वैश्विक स्वास्थ्य के लिए आधुनिक नवाचार के साथ जुड़ता है।"
आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान (आईटीआरए) के निदेशक डॉ. बी.जे. पटागिरी ने कहा, "इस वर्ष के समारोह में छात्रों, विद्वानों और नवप्रवर्तकों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि कैसे परंपरा और नवाचार मिलकर किस प्रकार वैश्विक स्वास्थ्य में क्रांति ला सकते हैं।"
आयुष मंत्रालय, आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य की मुख्यधारा में एकीकृत करने की दिशा में कार्यरत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक पारंपरिक औषधि केंद्र, डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (जीटीएमसी), आयुष्मान भारत योजना और आयुर्वेद जीवविज्ञान में नवाचार के लिए अनुसंधान केंद्र जैसी पहल वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में आयुर्वेद की भूमिका को आगे बढ़ा रही हैं। इसके अतिरिक्त, पुनः सक्रिय "आई सपोर्ट आयुर्वेद" अभियान का लक्ष्य आयुर्वेद के प्रति 250 मिलियन से अधिक लोगों का समर्थन प्राप्त करना है। पिछले साल का अभियान 160 मिलियन वोटों के साथ काफी सफल रहा था।
29 अक्टूबर 2024 के कार्यक्रम को देखते हुए आयुष मंत्रालय, इसके सहयोगी संस्थान, आयुर्वेद पेशेवर और दुनिया भर के आयुर्वेद से जुड़े लोग इस अनूठे उत्सव के लिए उत्साहित हैं। नवाचार और सहयोग के माध्यम से, आयुर्वेद वैश्विक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए स्थायी समाधान प्रदान करने के लिए तैयार है।
स्मरणीय है कि आयुर्वेद दिवस हर साल धन्वंतरि जयंती (धनतेरस) के पवित्र अवसर पर मनाया जाता है। वर्ष 2016 में स्थापना के बाद से, आयुर्वेद दिवस ने वैश्विक महत्व प्राप्त कर लिया है। इस वर्ष का उत्सव ऊर्जा और उत्साह से भरा हुआ है, जिसका समापन 29 अक्टूबर 2024 को होगा। इस दौरान पूरे माह स्वास्थ्य संवर्धन और रोग निवारण में आयुर्वेद के महत्व को दर्शाते हुए देश भर में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज तीन दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे
नई दिल्ली | जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज आज तीन दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं | वे आज रात नई दिल्ली पहुंचेंगे. शुक्रवार को वे यहां प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे | उसके बाद वो 7वें अंतर सरकारी परामर्श (IGC) में हिस्सा लेंगे | सरकारी कार्यक्रम के बाद स्कोल्ज गोवा जाएंगे और वहां से वापस जर्मनी के लिए उड़ान भरेंगे | जर्मनी उम्मीद कर रहा है कि भारत के बड़े बाजार में पकड़ बनाई जाए और चीन पर निर्भरता को कम किया जा सके।

दरअसल, जर्मनी उम्मीद कर रहा है कि भारत में मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाया जाए, जिससे चीन पर निर्भरता कम हो सके | यही वजह है कि बड़ी संख्या में जर्मन कंपनियां भारत की तरफ रुख कर रही हैं और उम्मीद भरी निगाहों से देख रही हैं | आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ सकती है | जर्मन कंपनियों से अगले 6 साल में 4.5 लाख करोड़ निवेश भारत की संभावना जताई जा रही है | यह आंकड़ा अभी से दोगुना है, जानकारों का कहना है कि अगर जर्मनी से बड़ी डील होती है तो मतलब साफ है कि अमेरिका-ब्रिटेन से भी ज्यादा ये देश भारत के काम आ सकता है।
चांसलर ओलाफ स्कोल्ज का ये दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब जर्मनी की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था लगातार दूसरे साल मंदी के दौर से गुजर रही है | इसके साथ ही यूरोपीय संघ और चीन के बीच व्यापार विवाद को लेकर चिंताएं हैं, जो जर्मन कंपनियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं | इससे पहले 2022 में यूक्रेन युद्ध की वजह से जर्मनी को बड़ा झटका लगा था, चूंकि रूस की सस्ती गैस पर जर्मनी की अत्यधिक निर्भरता बढ़ गई थी | उसके बाद जर्मनी ने डि-रिस्किंग की पॉलिसी अपनाई | अब जर्मनी, चीन पर भी अपनी निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा है, हालांकि, चीन अब भी जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज भारत दौरे पर पहुंच रहे हैं | वे यहां 7वें अंतर सरकारी परामर्श (IGC) के लिए 24-26 अक्टूबर तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे | 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर स्कोल्ज 7वें अंतर सरकारी परामर्श में हिस्सा लेंगे | IGC में चांसलर स्कोल्ज के साथ उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री भी शामिल होंगे | IGC एक ऐसा सरकारी ढांचा है, जिसके तहत दोनों देशों के मंत्री अपने-अपने विभाग के कामकाज पर चर्चा करते हैं और अपने विचार-विमर्श के नतीजों पर प्रधानमंत्री और चांसलर को रिपोर्ट करते हैं।
IGC के तहत दोनों देशों की सरकारें उच्च-स्तरीय बैठकों के जरिए द्विपक्षीय मुद्दों पर नियमित रूप से विचार-विमर्श और सहयोग करती हैं | यह संवाद प्रक्रिया विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए होती है | इसमें शामिल मुख्य पहलुओं में राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना शामिल होता है।
चांसलर स्कोल्ज 24 अक्टूबर को रात 10.55 बजे नई दिल्ली पहुंचेंगे | 25 अक्टूबर की सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात करेंगे | सुबह 11 बजे वे ताज होटल में 18वें एशिया-प्रशांत जर्मन बिजनेस सम्मेलन (APK 2024) का उद्घाटन करेंगे | सुबह 11.50 बजे से हैदराबाद हाउस में फोटो सेशन होगा | उसके बाद दोपहर 12 बजे अंतर सरकारी परामर्श (IGC) में हिस्सा लेंगे | दोपहर 1.15 बजे वे हैदराबाद हाउस में भारत-जर्मनी के बीच समझौतों का आदान-प्रदान करेंगे | जर्मन चांसलर 26 अक्टूबर की सुबह प्लेन से गोवा के लिए रवाना होंगे | शाम 5.30 बजे वे जर्मनी के लिए वापसी करेंगे।
दोनों नेता बढ़ी हुई सुरक्षा और रक्षा सहयोग, प्रतिभा की गतिशीलता के ज्यादा अवसर, गहन आर्थिक सहयोग, हरित और सतत विकास साझेदारी और उभरती और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग के लिए द्विपक्षीय वार्ता करेंगे | चर्चाएं महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी केंद्रित होंगी।
APK, जर्मनी और इंडो-पैसिफिक देशों के व्यापारिक नेताओं, अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के लिए एक द्विवार्षिक कार्यक्रम है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है | इस कार्यक्रम में जर्मनी, भारत और अन्य देशों के करीब 650 शीर्ष व्यापारिक नेताओं और CEO के हिस्सा लेने की उम्मीद है। चांसलर स्कोल्ज गोवा दौरे पर वहां जर्मन नौसैनिक युद्धपोत बाडेन-वुर्टेमबर्ग और लड़ाकू सहायता जहाज ‘फ्रैंकफर्ट एम मेन’ जर्मनी के इंडो-पैसिफिक तैनाती के हिस्से के रूप में बंदरगाह पर पहुंचेंगे | बताते चलें कि भारत और जर्मनी के बीच साल 2000 से रणनीतिक साझेदारी है, पिछले कुछ वर्षों में यह साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में गहरी और विविध हुई है | दोनों देश इस वर्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं | रणनीतिक साझेदारी के 25वें वर्ष में चांसलर स्कोल्ज की यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तौर पर देखी जा रही है।
चांसलर स्कोल्ज ने पिछले साल दो बार भारत का दौरा किया | फरवरी 2023 में उन्होंने द्विपक्षीय वार्ता में हिस्सा लिया था, उसके बाद सितंबर 2023 में वे जी20 समिट में शामिल होने के लिए भारत आए थे।
चक्रवाती तूफान दाना के 25 अक्टूबर को ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों से टकराने की आशंका
डेस्क | गंभीर चक्रवाती तूफान के 25 अक्टूबर को ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों से टकराने की आशंका के मद्देनजर दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) क्षेत्र से गुजरने वाली 150 से अधिक एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन को रद्द कर दिया गया है।

साइक्लोन दाना की एंट्री भले ही अभी भारत में नहीं हुई हो, लेकिन उसका असर अब दिखने लगा है। इस चक्रवात के कारण भारतीय रेलवे ने 150 से ज्यादा ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है। चक्रवात दाना का असर सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल और ओडिशा में देखने को मिलेगा। दोनों ही राज्यों में निचले इलाके से लोगों को निकाले का काम शुरू कर दिया गया है। गंभीर चक्रवाती तूफान के 25 अक्टूबर को ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों से टकराने की आशंका के मद्देनजर दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) क्षेत्र से गुजरने वाली 150 से अधिक एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन को रद्द कर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा सरकार ने 14 जिलों के 3,000 गांवों से 10 लाख से अधिक लोगों को राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है, क्योंकि राज्य की आधी आबादी के चक्रवात दाना से प्रभावित होने की संभावना है। रेलवे ने 200 से ज्यादा ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है।
उच्च शिक्षा में उपयोगी नवाचार जारी रहें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। गुणवत्ता बनाए रखते हुए इसे और भी श्रेष्ठ बनाने के प्रयास किए जाएं। वर्ष 2021-22 में प्रदेश का सकल पंजीयन अनुपात 28.9 है जो राष्ट्रीय स्तर के सकल पंजीयन अनुपात 28.4 से अधिक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में बहु विषयक दृष्टिकोण (मल्टी डिसप्लीनरी एप्रोच) के अंतर्गत एक लाख 25 हजार से अधिक विद्यार्थी अपने मूल विषयों के अलावा अन्य विषयों के अध्ययन का भी लाभ ले चुके हैं। निश्चित ही यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उच्च शिक्षा में उपयोगी नवाचार जारी रखकर शिक्षा स्तर को ज्यादा बेहतर बनाने के प्रयास हों।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में भारतीय ज्ञान परम्परा शीर्ष समिति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति : 2020 टॉस्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, टास्क फोर्स सदस्य अतुल कोठारी और म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष अशोक कड़ेल, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, आयुक्त एवं सचिव उच्च शिक्षा निशांत वरवड़े और समिति के सदस्यगण उपस्थित थे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : 2020 के प्रमुख बिंदु बहुविषयक दृष्टिकोण में जहां कला संकाय के 18 हजार विद्यार्थियों ने वाणिज्य और विज्ञान की शिक्षा प्राप्त की, वहीं वाणिज्य संकाय के एक लाख से अधिक विद्यार्थियों ने कला और विज्ञान की शिक्षा प्राप्त की। मध्यप्रदेश में विज्ञान संकाय के ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 11 हजार है, जिन्होंने कला और वाणिज्य विषय का चयन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनेक बिन्दुओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। उच्च शिक्षा व्यवस्था में स्नातक स्तर पर कृषि जैसे विषय के अध्ययन के प्रावधान के भी अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। सात विश्वविद्यालयों और 18 शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों में बी.एससी कृषि पाठ्यक्रम का संचालन और एविएशन के सर्टिफिकेट कोर्स संचालक का 5 विश्वविद्यालयों में क्रियान्वयन हुआ है।
बैठक में प्राप्त सुझावों के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह महत्वपूर्ण सुझाव है कि समस्त विश्वविद्यालय एक छत्र के नीचे आएं। यह व्यवहारिक दृष्टि से आवश्यक है। विभिन्न विश्वविद्यालयों में पदों की पूर्ति और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अंतत: उच्च शिक्षा विभाग का सहयोग ही अपेक्षित होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस संबंध में परीक्षण और विचारोपरांत आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के कजान शहर पहुंचे
डेस्क | रशियन लड़कियों का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में रशियन लड़कियां प्रधानमंत्री मोदी को पसंद करने की बात कह रहे हैं। मोदी के स्वागत में पहुंचीं रूसी महिला कलाकारों ने कहा कि हम लोग प्रधानमंत्री मोदी हमें बहुत अच्छे लगते हैं। हम लोग सच में उन्हें बहुत पसंद करते हैं।
बता दें कि ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के कजान शहर पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी का हवाईअड्डे पर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। रूसी युवतियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंगलवार को कजान की यात्रा के दौरान कृष्ण भजन गाकर स्वागत किया। वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए कजान के एक होटल पहुंचे, जहां रूसी नागरिकों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक भावपूर्ण प्रदर्शन के साथ उनका स्वागत किया।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 4 महीनों में दूसरी बार रूस दौरे पर हैं। मोदी इससे पहले जुलाई में भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री आज शाम को BRICS लीडर्स के साथ डिनर में भी शामिल होंगे। रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलेंगे। उनकी कई लीडर्स के साथ अनौपचारिक बातचीत भी हो सकती है। BRICS की मीटिंग में हिस्सा लेंगे। यह दो सेशन में होगी। सबसे पहले सुबह क्लोज प्लेनरी यानी बंद कमरे में बातचीत होगी। इसके बाद शाम को ओपन प्लेनरी होगी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई नेताओं से द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।
रूस (मेजबान), ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, अल्जीरिया, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, बोलीविया, कांगो, क्यूबा, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, लाओस, मलेशिया, मॉरिटानिया, मेक्सिको, मंगोलिया, मोरक्को, निकारागुआ, श्रीलंका, ताजिकिस्तान, थाईलैंड, टर्की, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, वेनेजुएला, वियतनाम, सर्बिया, फिलिस्तीन।
ब्रिक्स की स्थापना सितंबर 2006 में हुई थी और इसमें मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत और चीन (ब्रिक) शामिल थे। सितंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को पूर्ण सदस्य के रूप में स्वीकार किए जाने के बाद, इसका नाम बदलकर ‘ब्रिक्स’ कर दिया गया.ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ ब्रिक्स वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है और यह वर्षों से वैश्विक आर्थिक विकास का एक प्रमुख प्रेरक रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागालैंड में 29 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की
नई दिल्ली | केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 21 अक्टूबर, 2024 को नागालैंड के राष्ट्रीय राजमार्गों की समीक्षा की। इस अवसर पर नागालैंड के उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा भी मौजूद थे। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से जानकारी देते हुए लिखा

"दिल्ली में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा जी, एचडी मल्होत्रा जी, नागालैंड के उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग जी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नागालैंड में 545 किलोमीटर की 29 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान, हमने स्थिरता और लागत-दक्षता को प्राथमिकता देते हुए नागालैंड में गतिशीलता और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। ये पहल कनेक्टिविटी और स्थानीय आर्थिक विकास को गति देने और भारत के समग्र विकास के क्षेत्र के गहन एकीकरण में योगदान देंगी।"
"प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर नागालैंड के राजमार्ग विकास की जीवनरेखा में बदल रहे हैं। हर नई सड़क कनेक्टिविटी, समृद्धि और प्रगति का भविष्य दर्शाती है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 21 अक्टूबर, 2024 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय राजमार्गों की समीक्षा के पहले दिन चार पूर्वोत्तर राज्यों के राष्ट्रीय राजमार्गों की समीक्षा की।
हाई कोर्ट का अनोखा फैसला... 21 बार तिरंगे को सलामी और भारत माता की जय के नारे
डेस्क। मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने मंगलवार को एक अनोखा फैसाला सुनाया। देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मध्य प्रदेश के युवक फैजल को कोर्ट ने तिरंगे को 21 बार सलामी और भारत माता की जय के नारे लगाने की सजा सुनाई। हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए फैजल ने भोपाल के थाने में 21 बार ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। उसने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद और भारत मुर्दाबाद’ का नारा लगाने पर पश्चाताप भी जाहिर किया। उसने कहा कि रील बनाते हुए उसने गलती से वह नारा लगा दिया था।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने फैजल को जमानत देते हुए शर्त लगाई थी कि उसे महीने में दो बार भोपाल के मिसरोद थाने में तिरंगे को सलामी देनी होगी। मामले का निपटारा होने तक उसे महीने के हर पहले और चौथे मंगलवार को तिरंगे को सलामी देने के साथ ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाना है। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए फैजल ने इसकी शुरुआत कर दी है।
जस्टिस डीके पालीवाल ने 15 अक्टूबर को आदेश में कहा कि आरोपी को कुछ शर्तें लगाकर जमानत पर रिहा किया जा सकता है, जिससे उसके अंदर उस देश के प्रति जिम्मेदारी और गर्व की भावना पैदा हो, जहां वह पैदा हुआ और रह रहा है। अदालत ने कहा, ‘वह खुलेआम उस देश के खिलाफ नारे लगा रहा है, जिसमें वह पैदा हुआ और पला-बढ़ा है।’