छत्तीसगढ़

जेल से फरार हत्या के बंदी ने किया आत्मसमर्पण, जेल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

रायपुर। बिलासपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। अंबिकापुर जेल से फरार हत्या के आजीवन कारावासी बंदी मुकेश कांत ने मंगलवार को बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया। बंदी ने कलेक्टर के समक्ष पेश होकर न केवल खुद को पुलिस के हवाले किया बल्कि जेल प्रबंधन पर भ्रष्टाचार और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप भी लगाए।

जानकारी के अनुसार, मुकेश कांत वर्ष 2013 से अंबिकापुर सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। फरवरी 2025 में इलाज के दौरान अस्पताल ले जाने पर वह पुलिस की निगरानी से फरार हो गया था। उस समय से उसकी तलाश में पुलिस और जेल प्रशासन जुटा हुआ था, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। करीब आठ महीने तक फरार रहने के बाद अब उसने स्वयं बिलासपुर पहुंचकर सरेंडर किया है।

कलेक्टर के सामने आत्मसमर्पण करते हुए मुकेश कांत ने एक लिखित शिकायत पत्र भी सौंपा, जिसमें उसने अंबिकापुर जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में उसने कहा कि जेल के अंदर बंदियों से पैसे वसूले जाते हैं और जो पैसे नहीं देते, उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। मुकेश ने आरोप लगाया कि उसने अपने परिवार से बार-बार पैसा मंगवाकर जेल अधिकारियों को देने का दबाव झेला।

उसने अपने आरोपों के समर्थन में ट्रांजेक्शन डिटेल्स भी प्रस्तुत किए हैं, जिनमें कथित रूप से जेल कर्मचारियों या उनके परिजनों के खातों में भेजी गई रकम का उल्लेख है। उसने बताया कि जब उसने इस वसूली का विरोध किया, तब उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उसे धमकियां दी गईं।

मुकेश कांत ने अपनी शिकायत में अंबिकापुर जेल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक अनियमितताओं की भी ओर इशारा किया है। उसने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि उसे बिलासपुर सेंट्रल जेल में ट्रांसफर किया जाए ताकि उसे निष्पक्ष माहौल में अपनी सजा काटने का अवसर मिल सके।

कलेक्टर कार्यालय में आत्मसमर्पण की जानकारी मिलते ही पुलिस और जेल विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। वहीं, अंबिकापुर जेल प्रशासन ने फिलहाल इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।जेल प्रशासन पर लगे इन गंभीर आरोपों ने जेल व्यवस्था की पारदर्शिता और मानवाधिकारों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों द्वारा जांच की संभावना जताई जा रही है।