दिव्य महाराष्ट्र मंडल

समाज की उन्नति के लिए शत्रुघ्न रूपी निःस्वार्थ और निष्काम कर्मयोगी होना आवश्यकः मार्डीकर

रायपुर। किसी देश, समाज या संगठन के विकास और उन्नति के लिए शत्रुघ्न रूपी निःस्वार्थ और निष्काम कर्मयोगी की प्रासंगिकता और आवश्यकता श्रीराम के युग में भी थी, आज भी है और हर युग में रहेगी। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित रामाय़ण के पात्रों पर चर्चा के दौरान हेमंत मार्डीकर ने शत्रुघ्न की चर्चा करते हुए कहा कि शत्रुघ्न का शाब्दिक अर्थ है, शत्रु का नाश करने वाला, शत्रुघ्न का एक अन्य नाम रिपुदमन है, जो रिपु अर्थात शत्रुओं का दमन करें।

मार्डीकर ने आगे बताया कि राजा दशरथ व रानी सुमित्रा के पुत्र, लक्ष्मण के जुड़वा भाई तथा राम व भरत के सौतेले भाई थे। शत्रुघ्न अपने भाइयों की तरह अत्यंत पराक्रमी थे। श्रीराम की आज्ञा से उन्होंने मधुवन के क्रूर राक्षस लवणासुर का वध करके वहां की प्रजा और साधुसंतों को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई। श्रीराम ने शत्रुघ्न को मधुवन का राजा घोषित किया। जिसे आज मथुरा के नाम से जाना जाता है। राजा दशरथ के स्वर्गवास और श्रीराम व लक्ष्मण के वनगमन के पश्चात भरत श्रीराम की पादुका अयोध्या के राज सिंहासन पर रखकर अयोध्या के पास स्थित नंदीग्राम मे चले गए। ऐसे में राज्य का कार्यभार संभालने का उत्तर दायित्व शत्रुघ्न के कंधों पर आन पड़ा। वो भी पूरे चौदह वर्षों तक, जिसे शत्रुघ्न ने पूरी निष्ठा के साथ निभाया, यही नहीं पूरे चौदह वर्ष तीनों राजमाताओं कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा और लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला, भरत की पत्नी मांडवी व स्वयं की पत्नी श्रुतकीर्ति को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की और  दुःखद परिस्थितियों में उनका संबल बने। सेना, मंत्रिमंडल, राज्यकोष का कुशलतापूर्वक संचालन किया।

श्रीराम के वनवास से लौटने पर उनका स्वागत करने गुरू वशिष्ठ सर्वप्रथम आगे आए,और उनके पीछे चरण पादुका लेकर भरत आए, कथाओं मे राम भरत मिलाप का वर्णन तो है लेकिन शत्रुघ्न का कहीं कोई उल्लेख नहीं है, शत्रुघ्न की तुलना उस भव्य दिव्य मंदिर की नींव में लगे पत्थर से की जा सकती है, जिसके शिखर, ध्वज, दीवारों की सुंदरता की प्रशंसा तो सभी करते हैं, लेकिन उसे आधार देने वाले पत्थर को भी स्मरण रखना चाहिये, शायद इसीलिए हम किसी मंदिर में दर्शन को जाते हैं तो सर्वप्रथम उसकी सीढियों को प्रणाम करते हैं, ऐसा करके हम मंदिर की नींव में स्थित शत्रुघ्नरूपी आधार का ही स्मरण करते है।