दिव्य महाराष्ट्र मंडल

उर्मिला के पतिव्रत धर्म ने लक्ष्मण को दिलाई मेघनाथ पर विजयः जोशी

रायपुर।  रामायण में इंद्रजीत एक अद्वितीय योद्धा है जिनका वध शेषनारायण के अवतार लक्ष्मण ने किया। पहली बार जब लक्ष्मण और मेघनाथ को युद्ध हुआ तो मेघनाथ ने लक्ष्मण पर शक्तिबाण चलाया था। जिसके कारण वो मुर्छित हो गए थे। फिर संजीवनी लाइ गई और उन्हें बचा लिया गया। दूसरी बार युद्ध में लक्ष्मण ने मेघनाथ का वध किया। मेघनाथ के वध के उपरांत की एक कथा प्रचलित है, जिसमें यह बताया गया है कि मेघनाथ की पत्नी सुलोचना लक्ष्मण से कहती कि मेघनाथ का वध आपने किया है, यह सोचकर अहंकार में मत आना। वो तो अपराजेय योद्धा थे, उनका वध उर्मिला के पतिव्रत धर्म और नारी का सम्मान न करने वाले मेरे ससुर अर्थात रावण का साथ देने के अधर्म के कारण हुआ। उक्ताशय के विचार अरविंद जोशी ने रामायण के पात्रों की चर्चा के दौरान रामनवमीं के दिन कहे।

अरविंद जोशी ने आगे कहा कि सुलोचना का विवाह देवराज इन्द्र के पुत्र जयंत से निश्चित हुआ। किन्तु जब सुलोचना को पता चला कि असुरों के सम्राट रावण के पुत्र मेघनाद ने इन्द्र और उनके पुत्र जयंत को हरा दिया है तो सुलोचना को मन ही मन मेघनाद से प्रेम हो गया और मेघनाद भी सुलोचना के सौंदर्य पर मुग्ध हो गया और दोनों ने विवाह कर लिया।

जोशी ने आगे बताया कि मेघनाद, लंका के राजा रावण का सबसे बड़ा पुत्र था। मेघनाद अपने पिता की तरह स्वर्ग विजयी था। मेघनाद के पास सारे दिव्यास्त्र थे तथा बहुत से मायावी शक्तियां भी थीं। मेघनाद को एक वरदान था कि उसकी मृत्यु किसी ऐसे ही व्यक्ति के हाथों होगी जिसने १२ वर्ष से भी ऊपर ब्रह्मचर्य का पालन किया हो. इसीलिए लक्ष्मण जी उसका वध कर पाए।