0-साइंस कॉलेज मैदान पर जबर्दस्त भीड़ के बीच मुख्यमंत्री साय सहित कई मंत्रियों व जनप्रतिनिधि भी नाटक से मंत्रमुग्ध
रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक महानाट्य 'जाणता राजा' का साइंस कॉलेज मैदान पर भव्य मंचन हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। इनमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित कई जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे।
इसमें 150 से अधिक कलाकारों ने सजीव दृश्यों, ऊंट- घोड़ों के साथ हिंदवी स्वराज्य की स्थापना और शिवाजी महाराज की वीरता का जीवंत चित्रण किया गया है, जो रोमांचित तो करता ही है, साथ ही राष्ट्रभक्ति का अनुभव भी करता है।
तीन घंटे के इस महानाट्य में शिवाजी महाराज की रणनीति, त्याग और अदम्य साहस को दमदार संवादों और सजीव दृश्यों से प्रस्तुत किया गया है। पुणे से लगभग हफ्तेभर पहले आए विशेषज्ञों ने विशाल मंच, सज्जा और तकनीकी उत्कृष्टता से ऐतिहासिक काल को मंच पर साक्षात पेश कर दिया है। इसी तरह मंच पर असली घोड़ों और ऊंटों की उपस्थिति और करीब 150 कलाकारों का अभिनय दर्शकों के लिए यादगार अनुभव बन गया है।

'जाणता राजा' की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कलाकार संवाद नहीं बोलते, बल्कि पार्श्व संगीत के साथ भाव प्रदर्शन करते हैं, जिससे यह प्रस्तुति और भी दमदार हो जाती है। वजह स्पष्ट है कि सभी पात्रों को अपने- अपने संवाद पूरी तरह कंठस्थ हैं और वे रिकाॅर्डेड संवादों के साथ होंठ हिलाते हुए अहसास कराते हैं कि डायलाॅग वो ही बोल रहे हैं।
नाटक को अविस्मरणीय बनाने वाले कलाकार:-
शिवाजी महाराज- अभिजीत पाटणे, राहुल गांगल
औरंगजेब व कवि भूषण- डॉ अजीत आप्टे
बहिरजी नाइक- ज्ञानेश्वर अवचिते
जिजाऊ बाई- साक्षी पारकाळे,
सोयरा बाई- मानसी सिरोळे
पुतळा बाई- आशा कदम
शाहिर (सूत्रधार)- महेश अंबेकर
बाल राजे- शंभू गायकवाड़
सई बाई- शुभांगी अंबेकर
मदारी मेहतर- गौतम कदम
दौलत खान- विनय हाके
हेनरी ऑक्जेंडर- सुभाष धर्माधिकारी
गागा शाह- सुरेश वैद्य
------------
महाराष्ट्र मंडल सहयोगी की भूमिका में
युवा आयोग के माध्यम से साइंस कॉलेज मैदान पर हो रहे पुणे के महानाट्य ‘जाणता राजा’ के भव्य मंचन में महाराष्ट्र मंडल की भी अहम सहयोगी भूमिका है। पुणे से करीब हफ्तेभर पहले पहुंचे 20 टेक्निशियंस महाराष्ट्र मंडल में रुके हुए हैं। इसी तरह इस महानाट्य के निर्देशक योगेश सिरोळे ने ऑडिशन के बाद महाराष्ट्र मंडल के ही करीब 40 कलाकारों को ‘जाणता राजा’ के लिए चयनित किया और अब वे नाटक में लगातार दिखाई दे रहे हैं। इनमें आस्था काळे ने डच महिला की भूमिका में अपने पहले मंचन में खासा प्रभावित किया। निर्देशक योगेश सिरोळे ने स्थानीय कलाकारों को मंच पर उतारने से पहले मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में जमकर रिहर्सल कराई। वहीं नाटक के प्रचार- प्रसार से लेकर पास वितरण में भी महाराष्ट्र मंडल का पूरा सिस्टम पिछले कई दिनों से जुटा हुआ है।