दिव्य महाराष्ट्र मंडल

बच्चों की प्रस्तुति दे गई संदेश... हर बात को जानने का होता है उचित समय

- 15 मिनट के उत्‍तर रामायण प्रसंगका मंचन ने बटोरी तालियां

रायपुर। डायलॉग डिलीवरी अभिनय का वह हुनर है जिसके जरिए रंगमंच का कलाकार अपनी भावनाओं और आवाज़ को उतार-चढ़ाव के साथ दर्शकों के सामने प्रस्तुत करता है। ऐसी रोचक डायलॉग डिलीवरी अगर बच्चों द्वारा की जाए तो तालियां तो बजनी ही है। ऐसा ही नजारा रविवार की शाम महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में देखने को मिला। जब मंडल में चल रहे वाल्मिकी रामायण कथा के दौरान बाल कलाकारों द्वारा उत्‍तर रामायण प्रसंग का मंचन किया गया।

 

नाट्य अभिनय के दौरान गुप्तचर की  सूचना पर राम की प्रतिक्रिया, हनुमान की स्वामी भक्ति, राम से प्रश्न पूछने के लिए लव-कुश की जीजीविशा, माता सीता का दुखी भाव, उत्साह और जिज्ञासा बच्चों के चेहरे में देखने को मिली।  उत्तर रामायण के इस प्रसंग में के दौरान बाल कलाकारों ने यह संदेश दिया कि हर बात को जानने का एक सही समय होता है। जिस तरह लव-कुश को अपनी सच्चाई पता चली। उसी तरह हर बात का को जानने का एक सही समय होता है।

वरिष्ठ रंगकर्मी अपर्णा कालेले के निर्देशन में तैयार हुए बाल नाटक उत्‍तर रामायण प्रसंगमें सभी बच्चों ने अपने अपने पात्र के साथ इंसाफ किया। नाटक में तनिष्क डोनगांवकर, तन्वी डोनगांवकर, प्रणीश डोनगांवकर, अनय पंडित, अक्षत पंडित, प्रथमेश पुराणिक, कियान महाजन, विहान कालेले, मायरा गुप्ते सहित कई बाल कलाकारों ने भाग लिया। नाटक में तकनीकी पक्ष परितोष डोनगांवकर और प्रवीण क्षीरसागर ने संभाला था।