शबरी की वेदना देख आंखें हुई नम... राम के दर्शन पाकर हुए तृप्त
2026-03-31 08:28 PM
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- महाराष्ट्र मंडल में हुआ एक पात्रीय नाटक शबरी का मंचन
रायपुर। सनातन संस्कृति और आध्यात्म में वेदना का अर्थ शारीरिक पीड़ा से नहीं बल्कि आत्मा को ईश्वर की ओर मोड़ने का एक आधारभूत कारक है। महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में जब एक पात्रीय नाटक शबरी का मंचन हुआ तो शबरी की वेदना देख दर्शकदीर्घा में बैठे लोगों की आंखें नम हो गई। वहीं जब श्रीराम ने शबरी को दर्शन दिए तो शबरी के साथ दर्शक भी तृप्त नजर आए। 15 मिनट के एकाकी नाटक को महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि के कलाकारों ने प्रस्तुत किया।

आचार्य रंजन मोड़क द्वारा निर्देशित शबरी एकपात्री नाटक में मुख्य भूमिका चंचल ध्रुव ने निभाई। चंचल अपने पात्र के साथ न्याय करती नजर आई। चेहरे पर झुर्रियां, झुकी हुई कमर और चलने के लिए लाठी का सहारा। शबरी के उम्र के पड़ाव को परिलक्षित कर रहा था। राम भजन करते हुए जब शबरी ने ‘राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी’ का गायन किया तो दर्शक भी खुद को रोक नहीं पाए और राम के भजन में डुब गए।
आचार्य मोड़क ने बताया कि वंदना ठाकुर की कविता का आलेख लोकेश साहू द्वारा तैयार किया गया। जिसमें राम की प्रतीक्षा में शबरी वेदना को महज 15 मिनट में दिखाने का छोटा सा प्रयास किया गया। कार्यक्रम का संचालन चैतन्य मोड़क, मंच सज्जा अजय पोतदार, रूप सज्जा अक्षदा मातुरकर, ध्वनि व्यवस्था संतोष नियाल, नेपथ्य में प्रकाश गुरव की भूमिका रही। राम की भूमिका में भूपेंद्र साहू मंच पर नजर आए।