ईश्वर ने कुंजबिहारी को रंगमंच के लिए भेजा था दुनिया मेः अख्तर अली
- हिंदी रंगमंच दिवस पर किया गया पत्रिका रंगकुंज का विमोचन
- नाट्य लेखक अख्तर अली बोले कुंजबिहारी से बचपन का याराना
रायपुर। परमपिता परमेश्वर ने स्व. कुंजबिहारी शर्मा को खास तौर पर रंगमंच के लिए ही इस दुनिया में भेजा था। तभी को उनका जन्म 3 अप्रैल को हुआ। किसी और दिन भी हो सकता था, लेकिन ईश्वर ने उसके लिए यही दिन चुना और मेरे बालसखा कुंज बिहारी ने उसे चरितार्थ किया। आज उनके पुण्य स्मरणों की पत्रिका के इस प्रकाशन अवसर पर मैं उपस्थित हूं यह मेरा सौभाग्य है। उक्ताशय के विचार ख्याति लब्ध नाट्य लेखकर अख्तर अली ने व्यक्त किए। वे महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि द्वारा आयोजित हिंदी रंगमंच दिवस को संबोधित कर रहे थे।

अख्तर अली ने रायपुर। स्व डॉक्टर कुंजबिहारी शर्मा की जन्मतिथि के अवसर पर पुण्य स्मरण करते हुए कुंजबिहारी और मेरी दोस्ती कक्षा 6वीं से रही। हम गवर्मेंट स्कूल में एक साथ पढ़ते थे। कुंज बिहारी जो भी कार्य करते है, पूरा करते थे, अधूरा काम उनका डिक्शनरी में नहीं था। बात गायन की हो, निर्देशन की या रंगमंच में अभियन है। उन्होंने हमेशा अपना पूरा दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि सुधीर सोनी, रसिक बिहारी अवधिया और महाराष्ट्र मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बता दें कि सुधीर सोनी और रसिक बिहारी अवधिया स्व डॉक्टर कुंजबिहारी शर्मा के बचपन के दोस्त है।

इस अवसर पर वरिष्ठ कला समीक्षक राजेश गनोदवाले की परिकल्पना ‘रंगकुंज’ पत्रिका का विमोचन किया गया। जिसमें कुंज बिहारी शर्मा के 50 वर्षों के रंगमंचीय सफर का उल्लेख और उनके साथ जुड़े लोगों के विचार को भी समाहित है। इस अवसर पर स्व डॉक्टर कुंजबिहारी शर्मा की पत्नी ममता शर्मा, पुत्र दीप्तांशु शर्मा पूरे परिवार के सहित उपस्थित थे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कला समीक्षक राजेश गनोदवाले ने किया।