निर्णय लेने की स्वतंत्रता है आत्मनिर्भरता: महिमा तारे
2026-09-29 06:56 PM
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- महाराष्ट्र मंडल में महिला स्वावलंबन पर आधारित ‘स्वयं सिद्धा’ रहा प्रेरणास्पद, सशक्तिकरण की ओर बढेंगे कदम
रायपुर। आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ पैसे कमाना नहीं है। धन उपार्जन आत्मनिर्भरता का केवल एक भौतिक पहलू है, जबकि वास्तविक आत्मनिर्भरता एक मानसिक, भावनात्मक और निर्णय लेने की स्वतंत्रता है। आप अपने घर से निकले और अपने लिए जीयें। आपको अपने काम से खुशी मिले, आपके काम से दूसरे प्रसन्न हो, यही आत्मनिर्भरता है। उक्ताशय के विचार मंगलवार, 29 सितंबर को महाराष्ट्र मंडल में महिला स्वावलंबन पर आधारित कार्यक्रम ‘स्वयं सिद्धा’ में पहुंचीं मुख्य अतिथि महिमा तारे ने कहीं।

बताते चलें कि महिमा तारे महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक सशक्तिकरण के लिए प्रेरक काम कर रही हैं। महिलाओं द्वारा बनाए गए भारतीय परंपरागत व्यंजनों व उनके विविध घरेलू उत्पादों की सफल मार्केटिंग करना व प्रशिक्षित करना इनका मुख्य लक्ष्य है। महिलाओं को आंवला प्रोसेसिंग आलू प्रोसेसिंग सभी प्रकार के सीजनल अचार, पापड़, मुरब्बा की प्रोसेसिंग व मार्केटिंग कैसे करना, इसका प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। अब तक उनके समूह में 450 महिलाएं जुड़ चुकी हैं, जो स्वयं उत्पाद बनाती है और बेचती भी हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिमा ने कहा कि आत्मनिर्भर होने के लिए पर्सनालिटी डेवलपमेंट को लेकर आमतौर पर हम महिलाएं यह सोचतीं हैं कि हमारी उम्र हो चुकी। पर्सनालिटी डेवलपमेंट युवाओं के लिए हमें इसकी क्या जरूरत। लेकिन ऐसा नहीं है, हम कभी भी आत्मनिर्भर हो सकती हैं। ग्वालियर में चलाए जा रहे उनके स्वयं सिद्धा स्व सहायता समूह में अभी 450 महिलाएं जुड़ी हैं। हम वह सब बनाती हैं, जिसकी हमें जरूरत है। कुछ महिलाएं चिप्स, चिवड़ा, चकली, तो कुछ कपड़े के बैग, कुछ क्रुशिया के सामान बनातीं हैं। यह वो चीज है, जिसकी हमें आपस में जरुरत पड़ती है। फिर हम, एक- दूसरे से यह सामान खरीद लेती हैं। पिछले चार सालों से यह अभियान चल रहा है। समय के साथ माउथ पब्लिसिटी के जरिए हम दूसरों का अपना उत्पाद बेच रहे हैं।

खुद का उत्पादों के लिए ग्राहक तलाशने के सवाल पर उन्होंने कहा कि एक पुरानी कहावत है, ‘पहले पंगत फिर संगत’ ठीक उसी तरह जब आप कोई घरेलू उत्पाद का प्रोडक्शन करती हैं, तो आपको पहले लोगों को अपनी चीजें चखानी होंगी। आप अपने घर में छोटे-मोटे आयोजन करें, तो यह उत्पाद आपको उन लोगों के सामने रखना होगा, ताकि वो उसे देखें, फिर आपके घर आने वाली महिलाएं इसके बारे में पूछेंगी, कुछ लेंगी, कुछ बाद में लेंगी। इस तरह सिलसिला शुरू होगा। एक दिन में सफलता नहीं मिलती। सफलता की सीढ़ी धीरे-धीरे चढ़नी पड़ती है।

कार्यक्रम को स्वदेश समाचार पत्र के समूह संपादक किशोर तारे, महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले और स्वावलंबन समिति की प्रमुख और भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता शताब्दी पांडे ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले और आभार प्रदर्शन मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों की महिलाएं उपस्थित थीं। इस अवसर पर बीते दिनों रक्तदान महाकुंभ में रक्तदान करने वाली मंडल की 23 महिला सभासदों का सम्मान भी किया गया।