दिव्य महाराष्ट्र मंडल

रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मराठी मेला शुरू

- महाराष्ट्र मंडल का साथ मिले, तो लोककला की नई प्रतिभाओं को मिलेंगे अवसर: आस्‍था

 

0- एक से एक स्‍टाल लुभा रहे हर आयुवर्ग के लोगों को, स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजनों के स्‍टाल में जुट रही भीड़ 
 
रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल की 91वीं वर्षगांठ पर शुक्रवार शाम को रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मराठी सोहळा (मेला) का शुभारंभ हुआ। मंडल के महिला केंद्रों, सर्व मराठी समाज और सर्व समाज की महिलाओं ने एक से एक प्रस्‍तुतियों से ऐसा समां बांधा, जिसे दर्शक अरसे तक याद रखेंगे। सांस्‍कृतिक कार्यक्रम शुरू होने से पहले मराठी मेले के आकर्षक स्‍टाल्‍स का विधिवत शुभारंभ विशेष अतिथि चांगदेव ज्ञानीराम भेंडारकर ने किया। वहीं मेले का उद्घाटन दक्षिण मध्‍य क्षेत्र सांस्‍कृतिक केंद्र की डायरेक्‍टर आस्‍था गोडबोले कार्लेकर और सुप्रसिद्ध समाजसेवी भारती ठाकुर ने किया। मराठी मेले में मुख्‍य लॉबी में शेखर क्षीरसागर टीम द्वारा बनाई गई भव्‍य खूबसूरत रंगोली लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
मुख्‍य अतिथि आस्‍था कार्लेकर ने कहा कि महाराष्‍ट्र मंडल निश्चित ही हर क्षेत्र में बेहतर काम कर रहा है। कला के क्षेत्र में मंडल को और अधिक काम करके स्‍थानीय लोक कलाकारों को आगे लाने, मंच प्रदान करने की दिशा में काम करना चाहिए। दक्षिण मध्‍य क्षेत्र सांस्‍कृतिक केंद्र नागपुर इस उद्देश्‍य को लेकर महाराष्‍ट्र मंडल के साथ काम करने को तैयार है, ताकि छत्‍तीसगढ़ का पंथी, करमा, राउत, सुआ जैसी लोक नृत्‍य और आर्ट फार्म को पूरे देश में सामने लाया जा सके। 
विशेष अतिथि भारती ठाकुर ने कहा कि वर्षों पहले जब मैं पहली बार इंदौर गई थी, तो वहां जगह कचरे के ढेर से उठती बदबू को मैंने महसूस किया था। वहां के लोगों ने स्‍वच्‍छता को लेकर जिद पकड़ी और आज इंदौर लगातर आठ बार देश का सर्वाधिक स्‍वच्‍छ शहर होने का गौरव हासिल कर सका है। ऐसा ही उदाहरण यहां का महाराष्‍ट्र मंडल है। इसे बनाते समय पॉकेट में पर्याप्‍त पैसे नहीं थे, फिर भी यहां के लोगों में जिद और टीम वर्क था, जिससे यहां 10 करोड़ रुपये का भवन बन सका। पूरे भारत देश में घूमकर कई महाराष्‍ट्र मंडलों को देखकर मैं कह सकती हूं कि रायपुर जैसा महाराष्‍ट्र मंडल मैंने कहीं नहीं देखा।       
विशेष अत‍िथि‍ पेस्‍ट कंट्रोल विशेषज्ञ चांगदेव ज्ञानीराम भेंडारकर ने महिला बाहुल्‍य दर्शकों से भरे सभागृह में अपने घरों के किचन को काकरोच से लेकर चूहों तक से बचाने के विभिन्‍न उपाय बताए। भेंडारकर ने कहा कि बच्‍चों में मोबाइल को लेकर बढ़ती दीवानगी को नियंत्रित करने की जरूरत है। आज हर किसी को 50 हजार रुपये का मोबाइल चाहिए इसके बजाय हम उन बातों पर ध्‍यान लगाएं, जो हमारे जीवन में काम आए। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कर रहे महाराष्‍ट्र मंडल के अध्‍यक्ष अजय मधुकर काले ने मंडल के 91 वर्षों के गौरवशाली सफर का संक्षेप में वर्णन किया। उन्‍होंने वर्तमान में सक्रिय व समाजसेवा कर रहे प्रकल्‍पों की जानकारी दी और बताया कि भविष्‍य में हमारी योजना गुरुकुल और गौशाला की है।