बच्चों में दिखा कला का नया रूप, वेस्ट को बनाया बेस्ट
रायपुर। घर और अपने आसपास पड़े कचरे को बेस्ट बनाया जा सकता है। कबाड़ हो चुकी चीजों को सहेजने और बच्चों में इस कला के नये रूप को आकार देने संत ज्ञानेश्वर स्कूल में बेस्ट आऊट आफ वेस्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 15 जुलाई को आयोजित इस स्पर्धा में बड़ी संख्या में बच्चों ने भाग लिया। बच्चों का टैलेंट देख शिक्षिकों के साथ अभिभावक भी दंग रह गए।

संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि बच्चों के अंदर के टैलेंट को उचित मंच देने के लिए स्कूल की ओर से बेस्ट आउट आफ द वेस्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। स्पर्धा मे बड़ी संख्या में बच्चों ने भाग लिया। बच्चों ने कचरे से कला की तर्ज पर बहुत ही सुंदर -सुंदर वस्तुएं बनाई। किसी ने बेकार पुट्ठे से घोड़ा गाड़ी, घर बनाया तो किसी ने कोल्ड ड्रिंक की बोतल से प्लांटर्स, पेन स्टैंड और बेकार सीडी से वॉल हैंगिंग तो कुछ बच्चों ने बेकार पड़े पाइप से चंद्रयान-3 के मॉडल भी बनाया।
प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने आगे बताया कि प्री प्राइमरी के बच्चों के लिए ब्रेन डेवलपमेंट एक्टिविटी कराई गई। इसके तहत बच्चों को हस्त मुद्राओं के द्वारा हम एक दूसरे से कैसे जुड़ सकते है यह बताया गया। शिक्षक ने बताया कि ज्ञान मुद्रा के बारे मे बताते हुए कहा कि ज्ञान मुद्रा से शरीर में वायु तत्व को बढ़ाता है। जोश, साहस और रचनात्मक सोच को बढ़ाता है। अवचेतन मन की विचार क्षमता और याददाश्त को बढ़ाता है। ये थकान, आलस्य और मानसिक उलझनों से निपटने में बेहद कारगर है।