दिव्य महाराष्ट्र मंडल

प्रायोगिक ज्ञान से बच्चों को सीखा रहे वर्णमाला.... संत ज्ञानेश्वर स्कूल के शिक्षकों की पहल की खूब हो रही चर्चा

रायपुर। किसी चीज को रटकर याद करना और प्रायोगित तौर पर समझकर उसे याद रखना। दोनों में बड़ा अंतर होता है। आमतौर पर बच्चे हो या बड़ा सभी को प्रायोगिक तौर पर मिला ज्ञान अच्छे और लंबे समय तक याद रहता है। राजधानी के संत ज्ञानेश्वर स्कूल के शिक्षक भी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए इसी तरीके का उपयोग करते है। स्कूल की शिक्षिकाओं द्वारा कराई गई एक्टिविटी की पालकों के बीच खूब चर्चा होती है। इन दिनों शिक्षिका शिखा शर्मा ने बच्चों को बहुत सुंदर एक्टिविटी के माध्यम से हिंदी वर्णमाला को पढ़ाया। 
 
शिक्षिका शिखा शर्मा ने बताया कि स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन के निर्देशन में स्कूल के सभी कक्षाओं में शिक्षकों द्वारा समय़-समय़ पर प्राय़ोगिक तौर पर बच्चों को पढ़ाया जाता है। यानी खेल-खेल में बच्चों को मनोरंजन के साथ खूब सारी जानकारी दी जाती है। खेल-खेल में पढ़ी हुई सभी चीजें बच्चों को अच्छे से याद रहती है। 
 
शिखा शर्मा ने बताया कि आज बच्चों को हिंदी वर्णमाला के सभी वर्णों को पहचानना सीखाया गया। ड्राइडशीट में हिंदी के सभी वर्णमाला और मात्राएं अलग-अलग लिखी गई। इसे सभी बच्चों को दिया गया। अब बच्चों ने अपना-अपना स्टीकर आगे करके शब्द बनाए। फिर ब्लैकबार्ड में आकर शब्द लिखे। इसमें बच्चों ने उत्सुकता के साथ भाग लिया।