सावरकर जानते थे, जेल में रहकर देश की सेवा संभव नहीं: काले
2024-02-26 10:00 PM
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रायपुर। सन 1920 में वल्लभभाई पटेल और बाल गंगाधर तिलक के कहने पर ब्रिटिश कानून न तोड़ने व विद्रोह न करने की शर्त पर विनायक दामोदर सावरकर अंडमान के सेल्यूलर जेल से बाहर आए। सावरकर अच्छे से जानते थे कि जब तक वह जेल में रहेंगे, तब तक अपने देश के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे। 4 जुलाई 1911 को सेल्यूलर जेल में प्रवेश करने के लगभग 10 सालों तक उनका यही अनुभव रहा। सावरकर जेल से बाहर भूमिगत रहकर देश के स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते थे। जेल से बाहर आकर उन्होंने ऐसा किया भी। बाहरी तौर पर वे सामाजिक कुरूतियों अस्पृश्यता, विधवा विवाह, छूआछूत के खिलाफ अभियान छेड़े हुए थे। विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर महाराष्ट्र मंडल में आयोजित एक सादगीपूर्ण आयोजन में इस आशय के विचार अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने व्यक्त किया।
काले ने कहा कि नासिक के कलेक्टर जैक्सन की हत्या के लिए नासिक षड्यंत्र कांड के अंतर्गत उन्हें 7 अप्रैल 1911 को काला पानी की सजा दी गई थी। काला पानी की सजा के तहत वहां स्वतंत्रता सेनानियों को कड़ा परिश्रम करना पड़ता था। कैदियों को वहां नारियल छीलकर उसमें से तेल निकालना होता था, वो भी कोल्हू में बैल की तरह जुत कर। इस दौरान यदि कोई स्वतंत्रता सेनानी थककर लड़खड़ाने लगता, तो उन्हें बेरहमी से कोड़ों से अथवा बेंत से पीटा जाता था। इतना ही नहीं, उन्हें जेल से लगे बाहर के जंगल को साफ करने, दलदली भूमि और पहाड़ी क्षेत्र को समतल करने का काम भी करना पड़ता था। 10 सालों तक अकल्पनीय यातना सहन करने के बाद विनायक दामोदर सावरकर जेल से बाहर आ पाए थे।
काले ने कहा कि 1924 में सदाशिव राजाराम रानाडे ने 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर यांचे संक्षिप्त चरित्र' नामक लघु जीवनी लिखी थी। इसमें पहली बार विनायक दामोदर सावरकर के लिए 'वीर' शब्द का उपयोग किया गया था। काले के अनुसार सेल्यूलर जेल में काला पानी की सजा काट रहे विनायक को यह बात पता नहीं थी कि बाजू के सेल में उनके भाई गणेश सावरकर हैं और न ही गणेश को यह बात अपने छोटे भाई के संदर्भ में पता थी।
सावरकर पुण्यतिथि कार्यक्रम में महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल कालेले, सचिव प्रसन्न निमोणकर, महाराष्ट्र मंडल के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन, स्वास्थ्य समिति के प्रमुख अरविंद जोशी, वरिष्ठ आजीवन सभासद दीपक पात्रीकर, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी समेत अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।