तात्यापारा हनुमान मंदिर में 12 घंटे मैराथन चला भजन- कीर्तन
2024-07-17 08:22 PM
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0- आषाढ़ी एकादशी पर 450 वर्षों की पुरातन परंपरा आज भी कायम
0- महाराष्ट्र मंडल के सभी 16 महिला केंद्रों समेत सर्व मराठी समाज की रही श्रद्धापूर्ण सहभागिता
रायपुर। तात्यापारा स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में आषाढ़ी (देवशयनी) एकादशी के अवसर पर बुधवार को सुबह 12 घंटों का अखंड सामूहिक भजन- कीर्तन हुआ। सुबह 10:00 बजे शुरू हुआ यह आयोजन रात 10 बजे तक भक्तिमय जोश के साथ अनवरत जारी रहा। इस आयोजन में महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों का क्रम सुबह 10:00 बजे से शुरू होकर शाम को 7:00 बजे तक बना रहा। इस बीच मंडल के सभी 16 महिला केंद्रों की सभासदों ने समान ड्रेस कोड के साथ सामूहिक भजन- कीर्तन कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

हनुमान मंदिर समिति के अध्यक्ष चंद्रकांत मोहदीवाले ने बताया कि इस अति प्राचीन दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में यह परंपरा लगभग 450 वर्ष पुरानी है। सर्व मराठी समाज के लिए यह गर्व की बात है कि आज तक यह परंपरा अनवरत जारी है। आज भी 12 घंटे के भजन- कीर्तन के कार्यक्रम में तात्यापारा हनुमान मंदिर समिति के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं समेत सर्व मराठी समाज के हर आयु वर्ग के लोगों ने निस्वार्थ सेवाएं दी। मैराथन सामूहिक भजन गायन में हमेशा की तरह सर्व महाराष्ट्रीय समाजों, महाराष्ट्र मंडल महिला केंद्रों, महिला मंडल एवं विभिन्न भजन मंडलियों ने मिलकर श्रीहरि कीर्तन की सेवाएं दी।

महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा मदन तोपखानेवाले ने बताया कि मंडल की ओर से बूढ़ापारा, सिविल लाइन्स, अमलीडीह केंद्र की ओर से सुबह 10 ते 11 बजे तक भजनों की प्रस्तुति हुई। इसी तरह टाटीबंध, कोटा, सरोना केंद्रों ने सुबह 11 बजे से, वल्लभ नगर, मोवा- दलदल सिवनी केंद्रों की महिलाओं ने दोपहर 12:00 बजे से, तात्यापारा महिला केंद्रों ने दोपहर 1:00 से, चौबे कॉलोनी- सुंदर नगर केंद्र ने दोपहर 2:00 से, अंवति विहार, शंकर नगर, देवेंद्र नगर केंद्रों की महिलाओं ने दोपहर 3:00 से, रोहणीपुरम और डंगनिया केंद्रों ने शाम 4:00 से और तात्यापारा केंद्र की महिलाओं ने शाम 5:00 से 7:00 तक संगीतमय भजन का गायन किया।
मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी तन्मय बक्षी के मुताबिक शाम सात बजे से हनुमान मंदिर भजन समिति ने लगातार रात्रि 10 बजे तक संगीतबद्ध, लयबद्ध, सुरबद्ध भजनों की अनुपम प्रस्तुति दी। अंत में भगवान विट्ठल की आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।