शिव तांडव स्तोत्र के साथ शुरू हुआ पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन
2024-07-29 04:59 PM
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रायपुर। जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्... रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र के पठन के साथ चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल में विभिन्न केंद्रों की महिला श्रद्धालुओं ने मिट्टी के शिवलिंग का निर्माण किया और उसे प्रतिष्ठित कर उसकी पूजा अर्चना की।

महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि मंडल की वरिष्ठ सदस्य ज्योति कान्हे, कुमुद कान्हे और नमिता शेष ने शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर पूजन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उपरांत आचार्य चेतन गोविंद दंडवते ने हल्ली-कुंकू, गंगा जल, इत्र से मिट्टी की पूजा कराई। फिर 12 ज्योतिर्लिंग के स्वरूप 12 शिवलिंग का निर्माण मंत्रों के साथ किया गया। पूजन के लिए संकल्प किया गया। संकल्प के बाद गणपति पूजन, पृथ्वी पूजन, दीप, कलश पूजन किया गया। उपरांत मंत्रोच्चार के साथ पार्थिव शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की गई। पंचोपचार पूजन के साथ रूद्राभिषेक किया गया। फिर भगवान को भोग लगाया गया और अंत में आरती की गई। आज के आयोजन में 80 से अधिक महिलाओं ने सहस्त्र शिवलिंग का निर्माण किया।
आचार्य चेतन गोविंद दंडवते ने बताया कि मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर कूच करने से पहले भगवान शिव की पार्थिव पूजा की थी। पार्थिव शिवलिंग का अर्थ होता है मिट्टी से बना हुआ शिवलिंग। यह पूजा शिवलिंग की शुद्धता और साकारता को दर्शाती है। शिवपुराण कथा के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग की पूजा को भगवान शिव के सभी रूपों में से अधिक फलदायी माना गया है। पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करने से हाथों की रेखाएं बदलती हैं और जीवन में अगर कुछ बुरा होने वाला होता है, तो वह अनहोनी टल जाती है। पार्थिव शिवलिंग की पूजा से कालसर्प दोष से मुक्ति, संतान प्राप्ति और दुखों का नाश होता है। कलयुग में भगवान शिव का पार्थिव पूजन कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने किया था जिसके बाद से अभी तक शिव कृपा बरसाने वाली पार्थिव पूजन की परंपरा चली आ रही है। शास्त्रों में वर्णित है कि शनिदेव ने अपने पिता सूर्यदेव से ज्यादा पराक्रम पाने के लिए काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी।

दंडवते ने बताया कि आयोजन के दौरान उपस्थित महिला सदस्यों के साथ युवा पीढ़ी को पार्थिव शिवलिंग के निर्माण, पूजन के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व बताया गया। उन्होंने कहा कि भारत का रेडियो एक्टिविटी मैप उठा लें, हैरान हो जायेंगे। भारत सरकार के न्युक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है। इसका तात्पर्य हुआ कि भारत में स्थापित ज्योतिर्लिंग कुछ और नहीं बल्कि न्युक्लियर रिएक्टर्स हैं, तभी तो उन पर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वो शांत रहें।

उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में कुछ भी बिना कारण के नहीं होता। उज्जैन पृथ्वी का केंद्र माना गया है, जो सनातन धर्म में हजारों सालों से मानते आ रहे हैं। इसलिए उज्जैन में सूर्य की गणना और ज्योतिष गणना के लिए मानव निर्मित यंत्र भी बनाये गये हैं करीब 2050 वर्ष पहले और जब करीब 100 साल पहले पृथ्वी पर काल्पनिक रेखा (कर्क) अंग्रेज वैज्ञानिक द्वारा बनायी गयी तो उनका मध्य भाग उज्जैन ही निकला। आज भी वैज्ञानिक उज्जैन ही आते हैं सूर्य और अन्तरिक्ष की जानकारी के लिये।

शिवलिंग सजावट और पूजा की तैयारी में रश्मि गोवर्धन, गौरी क्षीरसागर, मनीषा वरवंडकर, अजय पोतदार, शेखर क्षीरसागर, बीएन नायडू, रमा नहरगढ़कर की अहम भूमिका रही। पूजन कार्यक्रम में महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, गीता दलाल, नमिता शेष, अपर्णा देशमुख, आस्था काले, मालती मिश्रा, सृष्टि दंडवते, अंजली काले, अर्चना मुकादम, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।