शिवाजी महाराज में थी लोगों को पहचानने की अद्भुत क्षमताः निमोणकर
2024-09-19 08:56 PM
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0- महाराष्ट्र मंडल में हुई छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में गुरुवार, 19 सितंबर को छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती की गई। इस मौके पर दिव्यांग बालिका विकास गृह के प्रभारी प्रसन्न निमोणकर ने शिवाजी महाराज से जुड़ा एक प्रसंग सबके सामने रखा। उन्होंने बताया कि शिवाजी महाराज में लोगों को पहचानने की अद्भुत क्षमता थीं।
निमोणकर ने कहा कि शिवाजी महाराज के राज में एक नट जीवा माला कलाबाजी दिखा रहा था। वह नट दानपट्टा चलाने में इतना माहिर था, कि 20 फीट दूर रखें नारियल पर वार करता तो वह उसे दो भागों में विभक्त कर देता, लेकिन नारियल दूर से ऐसा प्रतीत होता कि वह साबूत ही रखा है। पास जाकर उसे उठाने पर लोगों को पता चलता कि नारियल के दो टुकड़े हो चुके है। जीवा माला की इस प्रतिभा को शिवाजी महाराज ने पहचाना और उसे अपनी सेना में शामिल कर लिया।
प्रसन्न निमोणकर ने बताया कि कुछ समय बाद जब संधि के लिए शिवाजी महाराज और अफजल खान को मिलने था, तो उनके एक सैन्य सलाहकार हीजो नायक ने उन्हें अफजल खान के षड़यंत्र के बारे में बता दिया था। इसलिए शिवाजी महाराज अपने साथ बाघनख और जीवा माला को लेकर गए थे। संधि के अनुसार जीवा माला शिवाजी से 20 फीट दूर खड़ा था। जैसे ही अफजल खान ने शिवाजी के सिरस्थान पर वार किया, तो शिवाजी महाराज ने बाघनख से अफजल खान के पेट पर वार कर दिया। इधर अफजल खान के खास सैनिक अहमद बंद्रा जो जीवा माला की तरह दानपट्टा चलाने में माहिर था, उसने शिवाजी पर वार करना चाहा, लेकिन उसके सोचने और कुछ कर पाने के पहले जीवा माला ने अपने दानपट्टा से वार कर उसके दोनों हाथ काट दिए। फिऱ दोनों तरफ की सेनाएं आपस में टूट पड़ी। इस तरह शिवाजी ने सही समय में जीवामाला की प्रतिभा को पहचाना और समय आने पर उसका सही उपयोग किया। महा आरती के दौरान अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन गोविंद दंडवते, सखी निवास प्रभारी नमिता शेष, युवा समिति के समन्वयक विनोद राखुंडे, प्रवीण क्षीरसागर सहित विभिन्न समितियां के अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे।