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महाशिवरात्रि पर बन रहा शिव, सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग.... शिव की उपासना देगी उत्तम फल

डेस्क। देशभर में 8 मार्च को महा शिवरात्रि धूमधाम से मनाई जाएगी। ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार की महाशिवरात्रि कई मायनों में खास रहने वाली है। महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, शिव योग, सिद्धि योग, श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है।

हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। पंचांग की गणना व धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि पर इस प्रकार के योग संयोग व ग्रह स्थिति 300 साल में एक बार ही बनती है। इस दुर्लभ योग में भगवान शिव की पूजा शीघ्र फल प्रदान करने वाली मानी गई है।

पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 8 मार्च रात में 9:47 मिनट से 9 मार्च शाम 06:17 मिनट तक रहेगी। महाशिवरात्रि व्रत के दिन भगवान शिव की उपासना निशिता काल में की जाती है, इसलिए महाशिवरात्रि व्रत इस साल 8 मार्च शुक्रवार के दिन रखा जाएगा।

शिव योग यह योग 8 मार्च 2024 को सुबह 4:46 मिनट से शुरू होगा और 9 मार्च 2024 को देर रात्रि 12:46 मिनट पर समाप्त हो जाएगा. शिव से जुड़ा यह योग शिवरात्रि के पर्व पर बन रहा है जो महादेव की कृपा पाने कि लिए बेहद शुभ है। मान्यता है कि इस योग में शिव आराधना करने से महादेव जल्दी प्रार्थना स्वीकार कर लेते हैं। यह योग भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

सिद्ध योगयह योग 9 मार्च 2024 की देर रात्रि 12:46 मिनट से शुरू होगा और शाम 8:32 मिनट तक रहेगा. यह योग सिद्धि प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है. इसी के साथ यह योग निशिता काल मुहूर्त में पड़ रहा है. इस दौरान शिव आराधना करने से आपकी पूजा सिद्ध मानी जाएगी. जिस पूजा पद्धति के माध्यम से आप भोलेनाथ की पूजा इस योग में करते हैं वह सिद्धी को प्राप्त होगी।

सर्वार्थ सिद्धि योग यह योग 8 मार्च 2024 को सुबह 6:38 बजे से शुरू होगा और 10:41 मिनट तक रहेगा। यह योग कार्यों को सिद्ध करने और उसमें सफलता प्रदान करने वाला होता है। ऐसे में शिवरात्रि वाले दिन महादेव की उपासना करने से आपको हर कार्य में प्रसिद्धि मिलेगी।

श्रवण नक्षत्र: महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र के होने यह दिन और भी शुभफलदायी बन गया है। श्रवण नक्षत्र के स्वामी शनि देव माने जाते हैं जोकि शिवजी के परम भक्त हैं, इसलिए महाशिवरात्रि के दिन श्रवण नक्षत्र होने से यह व्रत और भी फलदायी हो गया है। श्रवण नक्षत्र में शिव पूजा करने से आपको शिवजी की कृपा का लाभ बहुत ही जल्द देखने को मिलता है।