कोरोना के बाद से... युवा दिलों में पड़ रहे ज्यादा जोर के झटके... अधिकांश प्रकरणों में हो रही मौत... स्टडी में जुटा ICMR
2023-03-30 12:52 PM
374
डेस्क। मार्च, 2020 में कोरोना महामारी का अंधड़ शुरु हुआ था। जिसमें विश्व के साथ भारत भी चपेट में आया और करोड़ों लोग संक्रमण के शिकार हुए, जिसमें हजारों की तादाद में लोगों की मौत भी हो गई। इस कोरोना ने विश्व की जड़ों को हिलाकर रख दिया, जिससे हम आज भी नहीं उबर पाए हैं। क्योंकि कोरोना संक्रमण का संकट अब तक नहीं टला है। बल्कि महीनों के अंतराल के बाद एक बार फिर कोरोना संक्रमण नए तरीके से पसरता हुआ दिख रहा है।
कोरोना काल के दो साल बाद यह देखने में आया है कि भारत में हार्ट अटैक के मामलों में एक बारगी इजाफा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके शिकार ज्यादातर युवा हो रहे हैं। कोई शादी के मंडप में कार्डियक अरेस्ट की वजह से मौत की आगोश में सो रहा है, तो कोई खेलते-खेलते दम तोड़ दे रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं इसके पीछे मूल वजह कोरोना तो नहीं है..?
इस सवाल का जवाब तलाशने अब ICMR ने स्टडी शुरु कर दी है, इस संबंध में जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने दी है। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौत और कोविड के बीच संबंध का आकलन करने के लिए स्टडी कर रहा है। इसके नतीजे 2 महीने में सामने आएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौतों के आंकड़ों की समीक्षा AIIMS दिल्ली द्वारा भी की जा रही है। मांडविया ने कहा कि कोरोना वैक्सीन (Corna Vaccine) निर्माण को न केवल भारत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बल्कि निर्यात के लिए भी बढ़ाया गया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा, शुरुआत में कहा गया था कि भारत को विनाशकारी प्रभाव का सामना करना पड़ेगा। लेकिन आज वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ वैक्सीन (Top Vaccine) अभियान और कोरोना प्रबंधन (Corona Manegment) के लिए भारत (India) की तारीफ की जा रही है। यहां तक कि बिल गेट्स ने भी भारत की तारीफ की है।
इंडियन हार्ट एसोसिएशन (IHA) के अनुसार, बीते सालों में 50 वर्ष से कम उम्र के 50 फ़ीसदी और 40 साल से कम उम्र के 25 फ़ीसदी लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम देखा गया है। मतलब, नौजवानों में दिल के दौरे की घटनाएं बढ़ रही हैं और महिलाओं के मुकाबले पुरुष दिल की बीमारी से ज्यादा ग्रसित हो रहे हैं। दिल की बीमारियों के लिए ब्लड प्रेशर, शुगर, तनाव, मोटापा और अनियमित जीवन शैली बड़ा कारण नजर आती हैं।
कई जानकारों का मानना है कि कोविड संक्रमण के बाद शरीर में खून का थक्का जमने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, और इसे लेकर अध्ययन भी जारी हैं कि कहीं दिल की इन बढ़ती बीमारियों के पीछे कोई कोरोना कनेक्शन तो नहीं है।