दिव्य महाराष्ट्र मंडल
विश्व पर्यावरण दिवस पर महाराष्ट्र मंडल में संगोष्ठी... 1000 पौधों का होगा रोपण
रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पांच जून, बुधवार को शाम छह बजे चौबे कालोनी स्थित महाराष्ट्र मंडळ में संगोष्ठी होगी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में महाराष्ट्र मंडळ के आजीवन सभासद, पर्यावरण विशेषज्ञ और कृषि वैज्ञानिक डा. जेएस उरकुरकर उपस्थित रहेंगे। इस मौके पर मंडळ 1000 पौधों के रोपण का प्लान भी तैयार करेगा। इसमें मंडळ की सभी समितियां अपना- अपना वह स्थान सार्वजनिक करेंगी, जहां पौधारोपण किया जाना है।
संयुक्त सचिव और पर्यावरण समिति की प्रमुख गीता दलाल ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर महाराष्ट्र मंडळ में संगोष्ठी का आय़ोजन किया गया है। इसमें मानसून के दौरान अपने निवास के आसपास पौधारोपण कैसे किया जाए, इसका मार्गदर्शन डॉ. जेएस उरकुरकर करेंगे।
साथ ही पर्यावरण समिति के अभय भागवतकर सभी से पिछले कुछ वर्षों में लगाए गए पौधों की वर्तमान स्थिति की जानकारी देंगे। बताते चलें कि पिछले वर्ष भी मंडल की पर्यावरण समिति ने हजारों पौधे रोपे थे, जो अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं।
राम रक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा पाठ अभियान जारी... डंगनिया और बूढ़ापारा केंद्र ने किया पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति का राम रक्षा स्तोत्र व हनुमान चालीसा पाठ अभियान लगातार जारी है। महाराष्ट्र मंडल के अनेक केंद्रों की महिला सदस्यों ने इस शनिवार शाम को भी समीपस्थ मंदिरों में पहुंचकर राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का कई बार पाठ किया।
आध्यात्मिक समिति की प्रमुख आस्था काळे ने बताया कि अभियान के 22वें सप्ताह भी लोगों में उत्साह बना रहा। भीषण गर्मी और शाम के वक्त चल रही गर्म हवाओं के बाद भी मंडळ की महिला केंद्रों की टीम समीपस्थ मंदिर पहुंच राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया।

डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने 12 बार राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान अनुभा जाउळकर, अनामिका महाजन, शुभांगी रुद्रजवार, सरोज परहाड, ज्योति डोळस, श्रध्दा देशमुख, रश्मि डांगे, प्रियंका राजपूत, नमिता शेष, रंजना राजीमवाले, भावना राजीमवाले, श्रध्दा मरघडे प्रमुख रुप से उपस्थित थीं। वहीं दूसरी ओर बूढ़ापारा केंद्र की महिलाओं ने बूढ़ापारा हनुमान मंदिर में पहुंच राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान प्रणिता नलगुडवार, अंजलि नलगुंडवार, ज्योति पवार, डा. सुहासिनी पट्टलवार, श्रीमती लोखंडे सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
महाराष्ट्र मंडल का सात दिवसीय ग्रीष्मकालीन संस्कार शिविर 9 जून से
विश्व पर्यावरण दिवस पर रोपे पौधे और हमें भेजे फोटो, दिव्य महाराष्ट्र मंडळ न्यूज़ पोर्टल में होंगे प्रकाशित
महाराष्ट्र मंडल का शिवाजी महाराज राज्याभिषेक समारोह 6 को
0- तात्यापारा चौक पर सात नदियों के पानी से छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का होगा अभिषेक
0- महाआरती, महाप्रसाद के बाद भव्य आतिशबाजी होगी आकर्षण का केंद्र
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल 6 जून, गुरुवार को तात्यापारा चौक स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के समक्ष 351वां राज्याभिषेक समारोह आयोजित कर रहा है। भव्य पैमाने पर होने वाले इस कार्यक्रम में मराठा मित्र मंडल, छत्तीसगढ़ प्रदेश कुनबी महासंगठन, मराठा युवा समाज, मराठी स्वर्णकार समाज और मराठी तेली समाज भी महाराष्ट्र मंडल के साथ होंगे।
मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का सात नदियों के पानी और दूध से मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक किया जाएगा। तत्पश्चात शिवाजी महाराज की महाआरती की जाएगी। तत्पश्चात मुख्य वक्ता छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का जीवंत वर्णन करेंगे। इस मौके पर हजारों लोगों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की जाएगी। कार्यक्रम के अंत में भव्य आतिशबाजी लोगों के आकर्षण का केंद्र होगी।
दंडवते ने कहा कि भव्य पैमाने पर होने वाले इस कार्यक्रम की तैयारी को लेकर मंडल के समस्त पदाधिकारियों के अलावा सभी सहायक संगठनों- समाजों के पदाधिकारी भी यहां जुटे थे। बैठक में मिनट- टू- मिनट कार्यक्रम तय करने के साथ विभिन्न समितियों के माध्यम से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को आयोजन की तैयारियों की जिम्मेदारी दी गई है।
महाराष्ट्र मंडल में महिलाओं ने मनाई अहिल्याबाई होल्कर जयंती... कहा- 'आज भी प्रासंगिक हैं अहिल्याबाई'

महाराष्ट्र मंडल में देवी अहिल्याबाई होलकर जयंती 31 मई को
सावरकर को पढ़ लो, दूर हो जाएगा डिप्रेशन: पेंडसे
0- महाराष्ट्र मंडल में मनाई गई स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती
0- अमृत काल में सरकार भी चल रही वीर सावरकर के बताए मार्ग पर: तोपलाल
रायपुर। गोलियां खाकर डिप्रेशन दूर करने वाले एक बार सावरकर को पढ़ लें, तो उनकी डिप्रेशन की बीमारी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। स्वतंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन में ऐसी घटनाएं एक के बाद एक होते चली गईं, जो उन्होंने सोचा ही नहीं था। लगातार विफलताओं के बावजूद सावरकर न कभी निराश हुए और न ही अपने लक्ष्य से भटके। उनके अटूट आत्मबल, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, लेखन कौशल, सहनशीलता, बुद्धिमता, वाकपटुता जैसे अनेक गुणों से आसपास के लोग ही उनसे प्रभावित नहीं थे, बल्कि उनके विचारों से आलोचकों से लेकर ब्रिटिश शासन के अधिकारी भी उनकी अनदेखी नहीं कर पाते थे। वीर सावरकर जयंती पर उक्ताशय के विचार प्रफुल्ल पेंडसे ने व्यक्त किए।
महाराष्ट्र मंडल में सावरकर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष अजय काले के अध्यक्षीय संबोधन के बाद मुख्य वक्ता चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रफुल्ल पेंडसे ने कहा कि वीर सावरकर को पता था कि कौन सी घटना का प्रभाव कब तक और कितनी देर तक रहेगा। वर्ष 1905 में विदेशी कपड़ों की बड़े पैमाने पर होली जलाने की रूपरेखा उन्होंने लोकमान्य गंगाधर तिलक के विचारों से प्रेरित होकर बनाई थी। यह घटना कितनी व्यापक थी कि इससे उस जमाने में ब्रिटिश गवर्नमेंट को 3.5 करोड़ पॉन्ड का नुकसान हुआ था। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर बाजारों विदेशी कपड़ों की बिक्री भी बंद हो गई थी।

सावरकर पर लगभग 80 मिनट धाराप्रवाह बोलते हुए पेंडसे ने कहा कि जो कर (हाथ) सवार दे, वही सावरकर होता है। दुनिया में वीर सावरकर ऐसे एकमात्र व्यक्ति थे, जिन्हें दो विभिन्न प्रकरणों में 25- 25 साल के कैद की सजा हुई थी। इसके लिए उन्हें अंडमान निकोबार के सेल्यूलर जेल ले जाया गया। जहां के जेलर आइरिश नागरिकता वाले डेविड बेरी से उनका सामना हुआ। डेविड से चर्चा में सावरकर ने कहा कि इस बात की क्या गारंटी है कि मेरे 25- 25 साल के कैद में रहने तक भारत देश में ब्रिटिश सरकार बनी रहेगी। वहीं कानूनन एक मानव जीवन में कार्यावधि 25 साल का होती है और ब्रिटिश अदालत ने मुझे 25- 25 साल की दो बार सजा दी है अर्थात एक सजा मुझे इस जन्म में भुगतनी है और दूसरी अगले जनम में | अर्थात ब्रिटिश सरकार हिंदू धर्म की पुनर्जन्म वाली अवधारणा को मानती है।
इसी तरह सावरकर ने जेल के जमादार मिर्जा बाबू के अत्याचारों का भी जमकर विरोध किया। मिर्जा सेलुलर जेल में कैदियों को क्रूरतम सजा देने के लिए कुख्यात था। इसी दहशत के आधार पर वह कैदियों का मतांतरण भी करवाता था। सावरकर ने न केवल इसका विरोध किया, बल्कि जेल के लगभग सभी कैदियों को उनके मूल धर्म में वापस लाया। साथ ही 90 फीसदी कैदियों को शिक्षित भी किया।
प्रफुल्ल पेंडसे के मुताबिक सेलुलर जेल में सावरकर को बिना किसी औजार के नंगे हाथों से सैकड़ों नारियल छीलने होते थे। उसके बाद नारियल को कोल्हू में डालकर प्रतिदिन 30 पॉन्ड अर्थात 13 किलो नारियल तेल निकालना होता था। बैल के द्वारा किया जाने वाला यह कार्य जेल में न केवल उनसे लिया जाता था, बल्कि काम के अनुपात में भोजन नहीं मिल दिया जाता था। इसके बावजूद वीर सावरकर का आत्मबल अटूट रहा। वह अपने 7×12 के सेल में राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत 20 पंक्तियां लिखते। उसे याद करते और अगले दिन उसे मिटाकर फिर नई 20 पंक्तियां लिखते थे। अपने 10 साल के कारावास में विनायक दामोदर ने 6000 पंक्तियां न केवल लिखीं बल्कि उन्हें याद भी किया। साल 1914 में जेल से रिहा होने के बाद सावरकर जब रत्नागिरी पहुंचे, तो उन्होंने सेलुलर जेल में लिखी हुई 6000 पंक्तियों को अपनी स्मरणशक्ति से कागज पर दोबारा लिख दिया। गौरतलब है कि जेल के नारकीय जीवन में अवसाद तो उन्हें छूट तक नहीं गया था। बल्कि वे राष्ट्र भक्ति से ओतप्रोत ओजस्वी पंक्तियां लिखते थे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक तोपलाल वर्मा ने कहा कि बाल्य काल में ही विनायक दामोदर सावरकर ने मित्र मेला समूह बनाकर आजादी के बारे में विचार करना शुरू कर दिया था। लगभग 10 वर्ष की आयु में प्लेग बीमारी की जांच के नाम पर ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों और डॉक्टर भारतीयों पर जुल्म करते थे, खासकर महिलाओं पर। उससे आक्रोशित चाफेकर बंधुओं ने डब्ल्यूसी रेंड और उसके सहायक लेफ्टिनेंट आयस्टर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसकी पूरे विश्वभर में चर्चा हुई और इस घटना से ही सावरकर को बाल्यकाल में ही देश की आजादी का महत्व समझ में आया और वे इसके लिए संकल्पित हुए।
तोपलाल ने कहा कि युवावस्था में सावरकर ने अभिनव भारत संस्था बनाकर छात्रों को संगठित किया था। वह एकमात्र ऐसे छात्र थे, जिन्हें पुणे के फर्गुसन कॉलेज से वंदेमातरम का नारा लगाने के कारण निष्कासित किया गया था। उन्हें बीए की डिग्री मुंबई में जाकर लेनी पड़ी थी। सावरकर ने गोवा में 11 हजार मतांतरित हिंदुओं का शुद्धिकरण कर दोबारा उन्हें हिंदू बनाया था। ब्रिटिश अधिकारियों के विरोध के बावजूद उनका तर्क यही था कि जब हिंदू क्रिश्चियन बन सकते हैं, तो शुद्धिकरण के बाद दोबारा हिंदू क्यों नहीं बन सकते?
तोपलाल के मुताबिक विनायक दामोदर कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण नीतियों के खिलाफ थे और यही कारण है कि उन्होंने कभी कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली। वे हिंदू महासभा में शामिल हुए। भारत देश के अमृत काल में वीर सावरकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचा जा रहा है। नया भारत बनाने में, विकसित भारत बनाने में वर्तमान सरकार सावरकर के विचारों और सिद्धांतों पर काम कर रही है। इन्हीं प्रयासों से भारत न केवल विश्व का मार्गदर्शन करेगा बल्कि विश्व गुरु भी बनेगा। कार्यक्रम का संचालन सचिव चेतन दंडवते और सह सचिव गीता श्याम दलाल ने किया। आभार प्रदर्शन उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन की ओर से किया गया।
मध्य प्रदेश मराठी अकादमी व महाराष्ट्र साहित्य सभा की स्पर्धा में छत्तीसगढ़ के पांच प्रतिभागियों ने जीते पुरस्कार
महाराष्ट्र मंडल में स्वतंत्र्य वीर सावरकर जयंती पर व्याख्यान 28 मई को
मराठी निबंध लेखन प्रतियोगिता में स्वाति मोडक ने प्राप्त किया प्रथम स्थान
रायपुर। मध्य प्रदेश मराठी अकादमी इंदौर ने अप्रैल 2024 में निबंध और पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया था। इस प्रतयोगिता में महाराष्ट्र मंडल रायपुर के सभी 15 केंद्रों से कई प्रतिभागियों ने भाग लिया। निबंध प्रतयोगिता में रायपुर के प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
महाराष्ट्र मंडळ रायपुर की साहित्यिक कार्यक्रम प्रभारी कुमुद लाड ने बताया कि मध्य प्रदेश मराठी अकादमी इंदौर द्वारा इस प्रतियोगिता का आयोजन देश के चार राज्यों गुजरात, आंध्रप्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किया गया। निबंध प्रतियोगिता में स्वाति मोडक ने चारों राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अकादमी की ओर से उन्हें एक हजार रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। अन्य प्रतिभागियों का निबंध लेखन भी उत्कृष्ट है। सभी को अकादमी की ओर से प्रमाणपत्र दिये जायेंगे। वहीं पत्र लेखन प्रतियोगिता का परिणाम घोषित नहीं हुआ है। बतादें कि पिछले वर्ष हमारे केन्द्र की स्मिता चांदे ने इस प्रतियोगिता में पत्र लेखन में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
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आंखों के यौगिक व्यायाम के बहुत फायदे... डिजीटल दुनिया में यह हर उम्र के लिए बेहद जरूरी
रायपुर। यह आंखों का व्यायाम न केवल आंखों के लचीलेपन में सुधार करने में मदद करता है बल्कि फोकस में भी सुधार करता है। निकट और दूर ध्यान केंद्रित करने वाले अभ्यासों से आपको काफी राहत मिलती है। इसके लिए अपने कमरे के फर्श पर बैठ जाएं और अपने हाथों को सीधा करके अपने अंगूठे को ध्यान केंद्रित कर देखें। वहीं पामिंग एक आरामदायक व्यायाम है, जो आंखों की थकान दूर करने में मदद कर सकता है। सबसे पहले अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ें और गर्म करें। फिर, अपनी आँखें बंद करें और अपनी हथेली को अपनी आँखों पर तब तक रखें जब तक कि बाद की छवि दूर न हो जाए। उक्त बातें महाराष्ट्र मंडळ की आध्यात्मिक समिति द्वारा संचालित आनलाइन योग प्रशिक्षण शिविर में योग समिति की प्रमुख आस्था काळे ने कहीं।
प्रतिदिन सुबह 6.30 से 7.30 बजे तक चलने वाले आनलाइन योग शिविर में प्रतिदिन लोग जुड़ रहे है। सोमवार 27 मई को शिविर में वार्मअप, पवनमुक्तासन, आंखों के यौगिक व्यायाम, उदर व पाचन समूह के आसन, प्राणायाम और ध्यान किया गया। आज आंखों के यौगिक आसन खास रहे। आसन करने वाले लोगों ने यह स्वीकार किया कि इस आसन से उन्हें काफी आराम मिला।
आज के आसन के बाद प्रशिक्षु अलखनंदा नारद ने कहा कि आज का सत्र आंखों के लिए बहुत उपयोगी रहा। इसके साथ सूक्ष्म व्यायाम से शरीर की जकड़न भी दूर हुई। वहीं शिल्पा चांदोकर का कहना है कि सुबह-सुबह योग करके बहुच अच्छा लगता है। अलग-अलग सूक्ष्म व्यायाम करने से मेरे शरीर की नसें और मांसपेशियां धीरे-धीरे खुलने लगी है। अर्चना जतकर ने भी आंखों के यौगिक व्यायाम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आंखों का व्यायाम करने से आज काफी अच्छा महसूस हुआ। नहीं तो बढ़े हुए तापमान के कारण आंखों में जलन महसूस होती है। प्रतिदिन योग शिविर में शामिल हो रही दीपांजलि भालेराव ने कहा कि उन्हें फ्लोटर की समस्या है। ऐसे में चिकित्सीय सलाह और दवाओं के साथ योग काफी लाभकारी है।
मराठी भाषी अब ₹2500 में बन सकेंगे महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद, ₹500 में मिलेगी वार्षिक सदस्यता

दूध बेचने वाले युवक राजा ने बचाई हवलदार शंभूनाथ की जान
रायपुर। शनिवार 25 मई की रात 12 बजे खमतराई थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक 1423 शंभूनाथ सिंह (42) ड्यूटी के बाद अपने घर सेजबहार जा रहा था। घर जाते समय डुंडा पेट्रोल पंप के पास अचानक मवेशी के सामने आ जाने से उनका एक्सीडेंट हो गया। लगभग सड़क किनारे 20 मिनट पड़े रहने के बाद एक राजा नाम के दूधवाले की नजर अचानक पड़ी उसने बड़ी तत्परता के साथ उन्हें वीवाय हॉस्पिटल ले गया। राजा रायपुर पुलिस के गुड समरिटन (नेक इंसान) अभियान से प्रेरित हुए थे।
रायपुर पुलिस उस दूधवाले राजा जो 'नेक इंसान बने उनका धन्यवाद करती है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उनको ट्रैफिक पुलिस द्वारा प्रति माह दिए जाने वाले गुड समरिटन सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। आम नागरिक से अपील है कि अपने मानवीय कर्तव्यों का पालन कर लोगों की जान बचाए, गुड सेमरिटन बने।
प्रतिभा सम्मान समारोह में मंत्री बृजमोहन के हाथों सम्मानित हुए एसडीवी के बच्चे
21 सप्ताह से जारी हैं राम रक्षा स्तोत्र व हनुमान चालीसा पाठ... मंदिरों में जुट रही भीड़
रायपुर। सामाजिक संस्था महाराष्ट्र मंडळ अपनी आध्यात्मिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए 21 सप्ताह से लगातार हर शनिवार को अपने 15 महिला केंद्रों के पास स्थित मंदिरों में पहुंच राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा पाठ कर रहा है। मंडळ की आध्यात्मिक समिति को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। 25 मई को भी शहर के वल्लभनगर, बूढ़ापारा, अमलीडीह, अंवती विहार, दलदल सिवनी मोवा में महिलाओं ने राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा पाठ का पाठ किया।

महाराष्ट्र मंडळ की आध्यात्मिक समिति की प्रभारी आस्था काळे ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय काळे के निर्देश पर मंडल की आध्यात्मिक समिति द्वारा चलाए जा रहे राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा पाठ अभियान से लगातार लोग जुड़ रहे है। समिति की ओर से प्रति शनिवार राम रक्षा स्तोत्र व हनुमान चालीसा पाठ का सिलसिला 21 सप्ताह से लगातार जारी है।

शनिवार, 25 मई को मंडल के पांच केंद्रों में राम रक्षा स्तोत्र व हनुमान चालीसा पाठ किया गया। अमलीडीह केंद्र की महिलाओं ने नर्मदेश्वर मंदिर में 11 बार राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं वल्लभनगर महिला केंद्र द्वारा साई बाबा मंदिर वल्लभ नगर में पाठ किया गया। इस दौरान गीता रावत, लता दुबे, लक्ष्मी आत्मपूज्य, नलिनी काळे, गीता शाह, कुमारी सोनी, सुधा सक्सेना, सरला, सुलु हर्दीकर, शांति साहू, अर्चना जतकर, शुभदा अगस्ती, सुशीला शुक्ला सहित बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं उपस्थित थीं।

आस्था ने आगे बताया कि दलदल सिवनी कालोनी मोवा में रेणुका पुराणिक के मार्गदर्शन में राम रक्षा स्तोत्र व हनुमान चालीसा पाठ किया गया। इस दौरान विशाखा दुबे, वंदना परमार, वर्षा तिवारी प्रमुख रुप से उपस्थित थीं। अवंती विहार विरासत अपार्टमेंट हनुमंतेश्वर महादेव मंदिर में शाम 7 बजे रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक एवं श्रीराम स्तुति की गई। इस दौरान भारती, जागृति, शुभदा, स्वप्निता, संयोगीता, महक , सुनीता प्रमुख रुप से उपस्थित थीं।

आस्था काळे ने बताया कि राजधानी के बूढ़ापारा स्थित हनुमान मंदिर में अभियान के शुरूआत से लगातार राम रक्षा स्तोत्र व हनुमान चालीसा पाठ का पाठ किया जा रहा है। यहां हर शनिवार को अच्छी संख्या में महिलाएं जुटती है। शनिवार 25 मई को यहां 8 बार राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा पाठ किया गया। इस अवसर पर सुहानिसी पट्टलवार, सविता साठे, ज्योति पवार, हेमा पराड़कर, प्रणिता नलगुंडवार, अंजली नलगुंडवार, सौ मोघे, पिंकी शर्मा, नित्या शिंदे, अनिता शिंदे और पंडित प्रदीप शर्मा प्रमुख रुप से उपस्थित थे।