छत्तीसगढ़
नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता : राज्यपाल
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि यह सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करता है। राज्यपाल श्री डेका आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
दीक्षांत समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित विभिन्न संकायों के कुल 9 हजार 194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 7 हजार 545 स्नातक, 1 हजार 645 स्नातकोत्तर तथा 5 सुपर स्पेशियलिटी उपाधिधारी शामिल हैं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया।
राज्यपाल डेका ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समाज को नवस्नातक चिकित्सकों से बड़ी अपेक्षाएं हैं और वे प्रदेश के स्वास्थ्य प्रहरी हैं। विशेष रूप से जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से करुणा, नवाचार, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों के साथ चिकित्सा सेवा प्रदान करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करे, यह हम सबका लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई है।
शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करना सेवा का सर्वोत्तम अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली के राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष एवं दीक्षांत समारोह के अभिभाषक डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
भिलाई में एक शाम बशीर बद्र के नाम’ कार्यक्रम 6 जून को.... देश के ख्यातिप्राप्त कलाकार देंगे प्रस्तुति
रायपुर। भिलाई इस्पात संयंत्र के क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं विभाग द्वारा पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र की स्मृति को समर्पित विशेष सांस्कृतिक संध्या ‘एक शाम बशीर बद्र के नाम’ का आयोजन 06 जून 2026 को महात्मा गांधी कला मंदिर में सायं 7:30 बजे से किया जाएगा। ग़ज़ल, संगीत और साहित्य की समृद्ध परंपरा को समर्पित यह आयोजन सांस्कृतिक एवं साहित्यिक रसिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका डॉ. साधना रहाटगांवकर, युवा ग़ज़ल गायक परन राज भाटिया तथा अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त भजन एवं ग़ज़ल गायक प्रभंजय चतुर्वेदी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर करेंगे। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र की कालजयी रचनाओं एवं लोकप्रिय ग़ज़लों की संगीतमय प्रस्तुति के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
संगत के लिए इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के ख्यातिलब्ध कलाकारों के साथ-साथ भिलाई के राष्ट्रीय स्तर के कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत, ग़ज़ल गायन और साहित्यिक अभिव्यक्ति का समन्वय देखने को मिलेगा। भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने नगरवासियों, साहित्य प्रेमियों एवं संगीत रसिकों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने की अपील की है। कार्यक्रम में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क रहेगा।
मेट्रो रेल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का लें सहयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल संचालन के प्रथम चरण के कार्य पूर्ण होने के बाद परियोजना के आगामी चरणों के कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। सघन आबादी के क्षेत्रों और कामकाजी नागरिकों की सुगम आवाजाही के लिए मेट्रो रेल व्यवस्था एक वरदान है।
प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रमुख व्यवसायिक केन्द्र इंदौर में मेट्रो रेल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाए। दोनों नगरों की मेट्रो रेल परियोजना के सभी चरणों के सम्पूर्ण कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। समग्र प्रगति की दृष्टि से दोनों परियोजनाओं के दो तिहाई कार्य पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में भोपाल और इंदौर के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी बन रहे हैं। प्रमुख धार्मिक केंद्रों, पर्यटन स्थलों, पुरातात्विक धरोहर स्थलों और टाइगर रिजर्व एवं अभयारण्य की सैर के लिए विद्यार्थियों सहित अन्य नागरिकों के लिए प्रबंध होने से मेट्रो रेल का उपयोग बढ़ेगा। इन प्रयासों में पर्यटन विभाग सहित मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
भोपाल मेट्रो परियोजनाः बैठक में बताया गया कि भोपाल मेट्रो रेल परियोजना में फेज़-1 में सुभाष नगर से एम्स तक दिसम्बर 2025 से संचालन हो रहा है। इस ट्रेक पर 7.1 किलोमीटर क्षेत्र में 8 एलिवेटेड स्टेशन बनाए गए हैं। फेज़-2 में सुभाष नगर से करोंद चौराहा तक 9.64 से किलोमीटर सेक्शन में कार्य हो रहा है, जो जून 2028 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। इस सेक्शन में 6 एलिवेटेड और दो भूमिगत स्टेशन होंगे। इसी तरह फेज़-3 में भदभदा चौराहा से रत्नागिरी चौराहे तक 14.16 लम्बाई के सेक्शन में कार्य हो रहा है। इस सेक्शन में 13 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। यह कार्य भी आने वाले 2 वर्ष में पूर्ण होगा।
इंदौर मेट्रो परियोजनाः बैठक में बताया गया कि इंदौर मेट्रो रेल परियोजना में फेज-1 के रीच वन में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर 3 तक 5.26 किलोमीटर के सेक्शन का शुभारंभ मई 20 25 में हो चुका है। फेज-1 के रीच-2 में सुपर कॉरिडोर 3 से मालवीय नगर चौराहे तक 11.43 किलोमीटर के सेक्शन के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। फेज-2 के अंतर्गत रीच-1 में शहीद बगीचा से खजराना चौराहा तक 1.77 किलोमीटर सेक्शन के कार्य और फेज-2 के ही रीच-2 के एयर पोर्ट से गांधी नगर तक 1.5 किलोमीटर सेक्शन के कार्य जून 2028 तक पूर्ण होंगे। फेज-3 में खजराना चौराहा से एयरपोर्ट के 11.59 किलोमीटर लम्बाई के सेक्शन के कार्य होंगे।
जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ.... प्रशासन जवाबदेही के साथ करें कार्य : मुख्यमंत्री
रायपुर। शासन प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत बिलासपुर प्रवास के दौरान बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने विकास कार्यों की प्रगति, राजस्व मामलों, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों की समीक्षा करते हुए समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरण सीधे नागरिकों के जीवन और आजीविका से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक विलंब आमजन की परेशानी बढ़ाता है, इसलिए इनके त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए खाद एवं बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता का उल्लेख करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी जैसे विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे तकनीक आधारित कृषि गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का विस्तार होगा और महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित होंगे।
राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील ने एसएलबीसी के बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को उनके हिस्से की राशि के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण करें, जिससे हितग्राही आवास शीघ्रता से बना सकें। मुख्य सचिव ने नगरीय-प्रशासन विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को आवास स्वीकृत हुए हैं, उनके लिए एक विशेष शिविर लगाकर बैंकर्स से ऋण दिलवाये। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केन्द्रांश एवं राज्यांश की राशि हितग्राहियों को दी जाती है।
मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसी तरह से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक भागीदारी में किफायती आवास निर्माण के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में भारत सरकार के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की प्रविष्टी में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु भौतिक प्रगति अनुसार केन्द्रांश राशि एक लाख 50 हजार रूपए तथा अनिवार्य राज्यांश की राशि एक लाख रूपए दी जाती है। हितग्राही द्वारा निर्धारित समयावधि में आवास पूर्ण करते हुए गृह प्रवेश करने पर राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति आवास 32 हजार 850 रूपए पृथक से हितग्राही के खाते में हस्तांतरित की जायेगी। प्रति आवास डीपीआर और पीएमसी शुल्क की राशि 6 हजार 150 रूपए राज्य शासन द्वारा दिया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण घटक अंतर्गत 10 हजार 549 हितग्राही हेतु नवीन आवास निर्माण के लिए केन्द्रांश राशि 158 करोड़ 23 लाख 50 हजार रूपए तथा राज्यांश 146 करोड़ 63 लाख 11 हजार रूपए एवं हितग्राही अंशदान राशि 105 करोड़ 49 लाख शामिल करते हुए 144 नगरीय निकायों में 410 करोड़ 35 लाख 61 हजार रूपए की लागत की 114 परियोजनाओं को स्वीकृत करने हेतु प्रस्तावित किया गया है। जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश श्री अवनीश कुमार शरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री ईफ्फत आरा सहित वित्त, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, गृह निर्माण मंडल, हुडको एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक शामिल हुए।
मुख्यमंत्री 5 जून को पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को करेंगे सम्मानित
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शुक्रवार 5 जून को दोपहर 2.30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर में एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले पंजीकृत श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों को सम्मानित करेंगे। इस गरिमामय अवसर पर श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन एवं छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
योजना के अंतर्गत चयनित प्रत्येक मेधावी छात्र को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए दोपहिया वाहन क्रय करने हेतु 1 लाख रुपये का विशेष अनुदान देने का भी प्रावधान है। इस प्रकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को कुल रुपये 2,00,000/- का चेक वितरण कर लाभान्वित किया जाना है।
छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं। हितग्राही श्रमिक का श्रम कल्याण मंडल में कम से कम 90 दिन पूर्व से पंजीकृत होना आवश्यक है। यह वार्षिक प्रोत्साहन राशि पंजीकृत निर्माण श्रमिक के केवल प्रथम दो बच्चों को ही देय होगी। इस योजना का लाभ एक शैक्षणिक वर्ष में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह कल्याणकारी योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक बड़ा संबल प्रदान कर रही है।
कवर्धा के दूरस्थ गांवों में बीएसएनएल के 4जी टॉवरों का भौतिक सत्यापन
रायपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “4जी सैचुरेशन परियोजना” के तहत छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल एवं दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क सेवाओं के विस्तार की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में अब तक किसी भी प्रकार की मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं थी, वहां अब भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के माध्यम से आधुनिक संचार सुविधाएं पहुंचने लगी हैं। परियोजना के अंतर्गत दूरस्थ इलाकों में 4जी मोबाइल टॉवर स्थापित करने की जिम्मेदारी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को सौंपी गई है।
इसी क्रम में कबीरधाम (कवर्धा) जिले के ग्राम मुड़वाही, झलमला तथा घूघवा डहरा में स्थापित 4जी मोबाइल टॉवरों का भौतिक सत्यापन नोडल अधिकारी एवं सहायक लेखा अधिकारी श्री टोपेश कुमार साहू द्वारा किया गया। सत्यापन के दौरान उन्होंने संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर टॉवरों की कार्यप्रणाली का जायजा लिया तथा स्थानीय ग्रामीणों एवं हितग्राहियों से संवाद कर फीडबैक प्राप्त किया।
ग्रामीणों ने बताया कि मोबाइल नेटवर्क सुविधा शुरू होने के बाद उनके दैनिक जीवन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अब वे मोबाइल फोन के माध्यम से सहज संवाद स्थापित कर पा रहे हैं। डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का उपयोग बढ़ा है तथा बच्चों को ऑनलाइन अध्ययन और शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच मिल रही है। इसके अलावा ग्रामीणों को मनोरंजन सहित विभिन्न डिजिटल सेवाओं का लाभ भी मिलने लगा है, जो पहले संभव नहीं था।
ग्रामीण अंचलों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने तथा आधुनिक संचार सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में “4जी सैचुरेशन परियोजना” एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रही है। यह योजना दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में संचार, शिक्षा, डिजिटल लेनदेन और सूचना पहुंच के नए अवसर उपलब्ध करा रही है।
भिलाई इस्पात संयंत्र में ‘समन्वय-2026’ का शुभारंभ, 10.2 मिलियन टन क्षमता विस्तार परियोजना को मिलेगी गति
रायपुर। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में संयंत्र की उत्पादन क्षमता को वर्तमान 6.8 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 10.2 मिलियन टन प्रति वर्ष करने की प्रस्तावित विस्तार परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु बुधवार को दो दिवसीय विक्रेता सहयोग सम्मेलन ‘समन्वय-2026’ का शुभारंभ किया गया। भिलाई निवास में आयोजित इस सम्मेलन का विषय “भविष्य के विस्तार हेतु सहभागिता का सुदृढ़ निर्माण” रखा गया है। सम्मेलन का उद्देश्य प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन एजेंसियों, सलाहकारों, उपकरण निर्माताओं, सेवा भागीदारों तथा अन्य परियोजना हितधारकों के मध्य समन्वित सहयोग को सशक्त बनाना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक प्रभारी, भिलाई इस्पात संयंत्र, चित्त रंजन महापात्र ने किया। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) एके चक्रवर्ती, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) पीके सरकार, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) अरुण कुमार, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी, कार्यवाहक कार्यपालक निदेशक (खदान) आरबी गहरवार सहित सेल निगमित कार्यालय एवं संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सम्मेलन में देशभर की 100 से अधिक विक्रेता कंपनियों के 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
अपने संबोधन में चित्तरंजन महापात्र ने कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2030-31 तक देश की इस्पात उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी लक्ष्य के अनुरूप सेल ने वर्ष 2030 तक अपनी उत्पादन क्षमता को 35 मिलियन टन तक विस्तारित करने की परिकल्पना की है, जिसमें भिलाई इस्पात संयंत्र की क्षमता वृद्धि एक महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने कहा कि देश की तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था इस्पात की मांग को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है, जिससे इस्पात उद्योग के लिए व्यापक अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।
उन्होंने विस्तार परियोजना के सफल क्रियान्वयन में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्रणालियों तथा सुरक्षित कार्य-पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। पूर्ववर्ती विस्तार परियोजनाओं के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी हितधारकों से सामूहिक प्रयासों के माध्यम से चुनौतियों का समाधान करते हुए परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों से उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचारी कार्यान्वयन पद्धतियों, लॉजिस्टिक्स अनुकूलन तथा सहयोगात्मक समाधानों पर सार्थक विचार-विमर्श करने की भी अपील की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) पीके सरकार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ‘समन्वय-2026’ की अवधारणा, उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र की प्रस्तावित क्षमता वृद्धि केवल इंजीनियरिंग उत्कृष्टता से संभव नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सभी हितधारकों के मध्य निर्बाध समन्वय और सक्रिय सहभागिता भी आवश्यक होगी। उन्होंने विक्रेताओं और सहयोगी संस्थाओं से राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना में प्रभावी योगदान देने का आह्वान किया।
छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में बारिश-आंधी और वज्रपात का अलर्ट
विधायक-नायब तहसीलदार विवाद सुलझा.... मारपीट के दो आरोपियों ने किया सरेंडर
रायपुर। प्रदेश में पिछले कई दिनों से सुर्खियों में बना विधायक और नायब तहसीलदार विवाद अब खत्म होता नजर आ रहा है। मामले में नया मोड़ तब आया जब नायब तहसीलदार के साथ मारपीट के दो आरोपियों ने थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इसके साथ ही विवाद को लेकर चल रही राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल भी शांत होने के संकेत मिल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, विधायक राम कुमार टोप्पो और भाजपा नेताओं के बीच हुई एक गोपनीय बैठक में विवाद को समाप्त करने को लेकर सहमति बनी। बैठक में मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और समाधान का रास्ता निकाला गया।
जानकारी के मुताबिक बैठक में नायब तहसीलदार तुषार माणिक और एसडीएम फागेश सिन्हा को सीतापुर विधानसभा क्षेत्र से हटाने को लेकर भी चर्चा हुई। सूत्रों का दावा है कि दोनों अधिकारियों के स्थानांतरण पर सहमति बनी है, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
विवाद के चलते नायब तहसीलदार और तहसीलदार संघ द्वारा की जा रही हड़ताल भी अब समाप्त हो सकती है। बताया जा रहा है कि देर शाम तक इस संबंध में औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
गौरतलब है कि नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। कर्मचारी संगठनों ने विरोध में हड़ताल शुरू कर दी थी, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी था।
अब आरोपियों के सरेंडर और दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के बाद विवाद के पटाक्षेप की संभावना बढ़ गई है। प्रशासन और कर्मचारी संगठनों की अगली घोषणा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 का आयोजन 6 से 09 जून तक... सीजीपीएससी ने जारी किया प्रवेश पत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा राज्य सेवा (मुख्य) परीक्षा-2025 की लिखित परीक्षा की समय-सारिणी घोषित कर दी गई है। आयोग द्वारा जारी सूचना के अनुसार परीक्षा का आयोजन 6 जून से 9 जून 2026 तक निर्धारित परीक्षा केन्द्रों में किया जाएगा। परीक्षा दो पालियों में प्रातः 9.00 बजे से दोपहर 12.00 बजे तक तथा दोपहर 2.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक संपन्न होगी।
जारी कार्यक्रम के अनुसार 06 जून 2026 को भाषा एवं निबंध, 07 जून को सामान्य अध्ययन-I एवं II, 08 जून को सामान्य अध्ययन-III एवं IV तथा 09 जून को सामान्य अध्ययन-V की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 सरगुजा (अंबिकापुर), बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर (जगदलपुर) एवं रायपुर के निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जाएगी।
आयोग ने सभी अभ्यर्थियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। आयोग ने स्प्ष्ट किया है कि प्रवेश पत्र दिनांक 25 मई 2026 को अभ्यर्थियों को जारी कर दिया गया है। अभ्यर्थी आयोग की वेबसाईट www.psc.cg.gov.in से प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। आयोग कार्यालय द्वारा किसी भी अभ्यर्थी को पृथक से प्रवेश पत्र अथवा प्रवेश पत्र जारी किए जाने संबंधी कोई सूचना या SMS व्यक्तिशः नहीं भेजा जाएगा।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बना वरदान : चिरायु टीम ने दो साल में 19 बच्चों को दिलाई नई जिंदगी
खाद की कालाबाजारी का भंडाफोड़...
खाद की कालाबाजारी से किसान भारी परेशान हैं। निजी कृषि केंद्र संचालकों की मनमानी इस कदर बढ़ी हुई है कि शासन द्वारा बनाई गई पास मशीन सुविधा की कीमत को ठेंगा दिखाते हुए किसानों से कई गुना अधिक राशि वसूली जा रही है। मामले की शिकायत मिलने पर क़ृषि विभाग के उप संचालक राकेश कुमार शर्मा ने अपना सरकारी वाहन और पहनावा बदलकर एक किसान बनकर हकीकत जानने जिला मुख्यालय के नेताजी चौंक पर संचालित नानक चंद नंद किशोर के खाद दुकान पहुंचे और तीन बोरी यूरिया खरीदा। कृषि केंद्र के संचालक ने बकायदा किसान का आधार कार्ड लेकर पास मशीन में एंट्री किया और शासन द्वारा निर्धारित राशि 266 रुपये 50 पैसा दिखाया, लेकिन बिल दिए बिना किसान से तीन बोरी यूरिया की कीमत 2550 रुपये ले लिया।
किसान के रूप में उपस्थित क़ृषि विभाग के उप संचालक ने व्यापारी से ज्यादा कीमत लेने पर आपत्ति भी की, लेकिन संचालक ने किसान से 2550 रुपये ही लिया, जिसके बाद उप संचालक ने अपने विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारियों को कृषि केंद्र बुलाया और खाद गोदाम से भारी मात्रा में यूरिया, डीएपी और अन्य खाद जब्त किया। कृषि विभाग के उपसंचालक राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि खरीफ फसल के लिए किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए लगातार बैठक लेकर कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी कई व्यापारी किसानों से अधिक दाम ले रहे हैं, जिसे रोकने के लिए विभाग की टीम अलग-अलग तरीके से कार्रवाई कर रही है। आगे भी इसी तरह छापामार कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग के उप संचालक द्वारा किसान बनकर की गई छापामार कार्रवाई से खाद की कालाबाजारी करने वालों मे हड़कंप मच गया है। वहीं कृषि विभाग के अधिकारी भी खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए एक कड़ा संदेश दिए हैं और दूसरी बार खाद की कालाबाजारी करते पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।
छत्तीसगढ़ में ईंधन की कालाबाजारी पर सख्ती, जमाखोरों और अवैध खरीद पर होगी कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ में डीजल और पेट्रोल की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन की काला बाजारी, अवैध भंडारण और अनधिकृत बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से विशेष जांच दल गठित कर ऐसे बल्क उपभोक्ताओं और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है, जो खुदरा उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित ईंधन आपूर्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के अवैध विचलन पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी।
तेल कंपनियों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स पर बिक्री बढ़ने का प्रमुख कारण निजी रिटेल आउटलेट्स से बिक्री का स्थानांतरण तथा बल्क उपभोक्ताओं का खुदरा बिक्री केंद्रों की ओर रुख करना है। उद्योग संगठनों से भी अपने सदस्यों को केवल अधिकृत माध्यमों से ही डीजल खरीदने की सलाह देने को कहा गया है।
इस बीच, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य और देशभर में पेट्रोल, डीजल तथा रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है। कंपनियों के अनुसार वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम अपने टर्मिनल, डिपो, पाइपलाइन नेटवर्क, एलपीजी बॉटलिंग संयंत्र तथा खुदरा बिक्री केंद्रों के माध्यम से निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं।
1 मई से 31 मई 2026 के दौरान छत्तीसगढ़ में डीजल (हाई स्पीड डीजल) की खुदरा बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। राज्य के आठ जिलों में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि रही। बस्तर में 32 प्रतिशत, बालोद में 28 प्रतिशत, कोरिया में 25.4 प्रतिशत, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 24.9 प्रतिशत तथा कोंडागांव में 22.1 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। राजधानी रायपुर में भी 19.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि दुर्ग और बलौदाबाजार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी सामने आई।
तेल कंपनियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में अनावश्यक खरीदारी से बचें और ईंधन उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों तथा तेल विपणन कंपनियों की आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
बैंक खाता परिवर्तन प्रक्रिया का डिजिटलीकरण, बीएसपी में ‘मेकर-चेकर’ प्रणाली लागू
रायपुर। भिलाई इस्पात संयंत्र में बैंक खाता परिवर्तन की ऑफलाइन प्रक्रिया को पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था में परिवर्तित करते हुए नई ‘मेकर-चेकर’ प्रणाली का शुभारंभ किया गया। इस पहल से वेतन भुगतान प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, त्रुटिरहित और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
भिलाई इस्पात संयंत्र के इस्पात भवन स्थित वित्त एवं लेखा सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम तथा कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार ने संयुक्त रूप से ‘मेकर-चेकर प्रोविजन फॉर बैंक अकाउंट चेंज’ प्रणाली का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) प्रमोद कुमार चोखानी सहित संयंत्र के महाप्रबंधक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
नई व्यवस्था के तहत कम्प्यूटरीकृत वेतन भुगतान प्रणाली (सीपीआरएस) तथा भिलाई इस्पात संयंत्र-सैप प्रणाली में बैंक खाते से संबंधित किसी भी परिवर्तन को अब बहु-स्तरीय सत्यापन एवं अनुमोदन प्रक्रिया के माध्यम से निष्पादित किया जाएगा। इससे डेटा की शुद्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ वित्तीय लेनदेन की सुरक्षा और प्रणाली की पारदर्शिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को नई प्रणाली के संचालन, इसके सुरक्षा प्रावधानों तथा डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने इसे मानव संसाधन एवं वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों में बेहतर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस नई डिजिटल व्यवस्था से कर्मचारियों को बैंक खाता परिवर्तन संबंधी अनुरोधों के त्वरित, सुरक्षित एवं व्यवस्थित निष्पादन का लाभ मिलेगा। साथ ही मैनुअल प्रक्रिया में संभावित त्रुटियों और अनियमितताओं पर भी प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हो सकेगा।उल्लेखनीय है कि इस प्रणाली के सफल क्रियान्वयन में मानव संसाधन विभाग, नियंत्रण एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग तथा वित्त एवं लेखा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से इस डिजिटल पहल को प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
करेठा में भीषण आग से तबाही, 10 एकड़ से अधिक खेत और बाड़ियां जलीं
आग इतनी विकराल थी कि दूर-दूर तक धुआं फैल गया और आसपास की सड़कों पर आवाजाही तक प्रभावित हो गई। खेतों में लगी भिंडी, बरबटी, चेंच भाजी सहित अन्य फसलें आग की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो गईं। आग लगने की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीण अपने घरों से बाल्टी और अन्य बर्तनों में पानी भरकर मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही थी, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
उनके अनुसार बाड़ी में लगी भिंडी, बरबटी और चेंच भाजी पूरी तरह नष्ट हो गई है। सोनकर दंपती का कहना है कि इस आगजनी से उन्हें लगभग दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं आसपास के किसानों की फसलें और खेतों में रखा कृषि सामग्री भी आग की चपेट में आई है। ग्रामीणों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्र 10 एकड़ से अधिक है, जबकि आसपास करीब 15 एकड़ क्षेत्र में बाड़ियां और खेती की जमीन मौजूद है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आग लगने के दौरान दमकल वाहन मौके पर नहीं पहुंचा।
डीजल संकट से थमी रफ्तार, डीजल की किल्लत ने बढ़ाई मुश्किलें, 100 से अधिक बसों के पहिए थमे
उन्होंने शासन और परिवहन विभाग से किराए में 25 से 30 प्रतिशत वृद्धि की मांग भी की है, ताकि बढ़ते खर्च की भरपाई हो सके।इधर परिवहन लागत बढ़ने का असर बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। सब्जियों, दालों और खाद्य तेलों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। टमाटर, करेला, बैंगन और अन्य सब्जियां महंगी हो चुकी हैं, जबकि दाल और तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। महंगाई के इस दौर में आम परिवारों का रसोई बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। डीजल संकट और बढ़ती महंगाई ने परिवहन कारोबार से लेकर आम लोगों की रसोई तक को प्रभावित कर दिया है। अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि आखिर इस संकट से राहत कब मिलेगी।