छत्तीसगढ़
CM आईटी फेलोशिप कार्यक्रम” से खुलेगा अवसरों का द्वार
CRPF जवानों ने निभाया इंसानियत का फर्ज.... बीमार ग्रामीण को दुर्गम रास्तों से पहुंचाया कैंप
रायपुर। प्रदेश के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सीआरपीएफ के जवानों ने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए एक बीमार ग्रामीण को दुर्गम रास्ते से कैंप पहुंचाया। जवानों का यह कार्य सुरक्षा और संवेदना दोनों की मिसाल बन गई है। नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात सुरक्षाबल सिर्फ बंदूक नहीं, इंसानियत के फर्ज को भी निभा रहे हैं। घटना छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर स्थित कर्रेगुट्टा के पटेलपारा गांव की है, जहां एक ग्रामीण की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन और ग्रामीण घबरा गए, क्योंकि दुर्गम इलाका होने की वजह से मदद तक पहुंचना मुश्किल था।
जैसे ही यह सूचना आसपास तैनात CRPF जवानों को मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे। बिना समय गंवाए मरीज को ट्रैक्टर के माध्यम से कठिन और कच्चे रास्तों से होते हुए अपने कैंप तक पहुंचाया गया, जहां उसे प्राथमिक इलाज मिला। समय पर सहायता मिलने से मरीज की जान बच गई और अब उसकी हालत पूरी तरह सुरक्षित है। इस मानवीय पहल पर ग्रामीणों ने सुरक्षाबलों का आभार जताया। उन्होंने कहा— “ये जवान सिर्फ नक्सलियों से नहीं, हमारी जिंदगी की भी हिफाजत करते हैं।”CRPF की यह तत्परता और संवेदनशीलता दुर्गम इलाकों में लोगों के विश्वास को और मजबूत कर रही है।
3 साल के मासूम तेज बहाव में लापता, परिवार बाल-बाल बचा
अब पुलिस को उम्मीद है कि नाले के 800 मीटर आगे स्थित झलमला सेलर एनीकट में बच्चा और कार मिलने की संभावना है। सुबह से SDRF की टीम तलाशी अभियान चला रही है। फिलहाल, पूरे गांव और परिजन गमगीन माहौल में हैं और मासूम के सकुशल मिलने की दुआ कर रहे हैं।
शिक्षकों के तबादले से हैं नाराज छात्राओं ने हाइवे किया जाम...
यह प्रदर्शन सिर्फ शिक्षकों की वापसी की मांग नहीं था, बल्कि उस भरोसे की वापसी की गुहार थी जो इन बच्चियों को कभी दिखाया गया था. अब प्रशासन जांच और समाधान की बात कर रहा है, पर बच्चियों के मन में असमंजस बना हुआ है. सवाल यह है कि जब भविष्य की ये बेटियां अपने अधिकारों के लिए बारिश में भीगती सड़क पर बैठने को मजबूर हो जाएं, तो क्या इसे सिर्फ विरोध मानना चाहिए या सिस्टम के लिए एक आईना और चेतावनी के रूप में देखना चाहिए?
“रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को सीएम ने किया सम्मानित
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सेवा भावना का श्रेष्ठतम उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री साय आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समय पर रक्तदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। यह पहल जीवनरक्षक सहायता को सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जशपुर जिले में हर वर्ग के नागरिक स्वैच्छिक रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। आज रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि जीवनदान देने वाला व्यक्ति वास्तव में ईश्वर के समकक्ष होता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जशपुर के आजीवन सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए और “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने नीरज शर्मा, अजय कुमार कुशवाहा और शिव नारायण सोनी को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री, जिला प्रशासन एवं भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला जशपुर की एक अभिनव पहल है, जिसके अंतर्गत 480 स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम एवं मोबाइल नंबर सूचीबद्ध किए गए हैं। इस डायरेक्ट्री के माध्यम से जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होगी, वह सीधे सूची में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर रक्त प्राप्त कर सकता है।
जशपुर के पीएमश्री विद्यालय में अब एनसीसी एयर स्क्वाड्रन शुरू... स्थानीय युवाओं को कैरियर बनाने में मिलेगी मदद
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के युवाओं को अब एनसीसी में एयर स्क्वाड्रन के जरिए अपना कैरियर बनाने के लिए मदद मिल पाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जिले के पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय में एनसीसी की एयर स्क्वाड्रन शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। यह छत्तीसगढ़ की 3 सीजी एनसीसी एयर स्क्वाड्रन होगी। साय के प्रयासों से यह जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो स्थानीय युवाओं के भविष्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने विद्यालय में एयर एनसीसी के लिए चयनित 25 मेधावी विद्यार्थियों को एनसीसी कैडेट्स का बैच लगाकर पंजीयन की शुरुआत की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इनमें 13 बालिकाएं और 12 बालक शामिल हैं। इस अवसर पर विंग कमांडर विवेक कुमार साहू ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान विधायक गोमती साय और रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने पिछले एनसीसी दिवस समारोह के दौरान रायपुर के समान राज्य के अन्य हवाई पट्टी वाले शहरों में भी एनसीसी की एयर स्कवाड्रन शुरू करने की इच्छा व्यक्त की थी। अभी तक छत्तीसगढ़ में केवल रायपुर में ही एयर एनसीसी और उड़ान का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि जगदलपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जशपुर जैसे स्थानों पर भी हवाई पट्टियों की सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री की इस पहल पर मार्च माह में जशपुर की आगडीह हवाई पट्टी को 3 सीजी एयर एनसीसी स्क्वाड्रन के लिए स्वीकृति प्रदान की गई और एक माइक्रोलाइट विमान को प्रशिक्षण हेतु जशपुर भेजा गया। इस दौरान लगभग 100 कैडेट्स को उड़ान का वास्तविक अनुभव प्रदान किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं हवाई पट्टी पहुंचकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया और कैडेट्स से संवाद किया। कैडेट्स ने उन्हें विमान से संबंधित तकनीकी जानकारियाँ भी साझा कीं।
वर्तमान में 3 सीजी एयर एनसीसी एयर स्क्वाड्रन, पूरे देश में एकमात्र एयर स्क्वाड्रन है जिसमें एम्स, एमबीबीएस और नर्सिंग के छात्र कैडेट के रूप में जुड़े हुए हैं। कैडेटों को यूपीएससी और एसएसबी साक्षात्कार के माध्यम से सेना में 25 वैकेन्सी /पाठ्यक्रम के अवसर मिलते हैं, एसएससी के माध्यम से ऑफिसर्स ट्रेनिग अकादमी के लिए 50 वैकेंसी/पाठ्यक्रम के अवसर मिलते हैं जिसमें यूपीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है और केवल एसएसबी साक्षात्कार के माध्यम से चयन के अवसर मिलते है। 20 सीटें लडकियों के लिए आरक्षित होती हैं। वायु सेना के उड़ान प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों सहित सभी पाठ्यक्रमों में 10 प्रतिशत वेकेंसी होती है। जिसके लिए एएफसीएटी, यूपीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। इसी तरह से पैरामिलिट्री फोर्स भर्ती में 2 से 10 बोनस अंक दिया जाता है।कई उद्योगों में भी एनसीसी सी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरियों में प्राथमिकता दी जाती है।
सावधान... बारिश के दिनों में नालों में चढ़ जाए पानी तो न करें उसे पार
रायपुर। बारिश के दिनों में आमतौर पर नदी नाले उफान पर आ जाते है। ऐसे में उन्हें पार करना काफी रिस्क होता है। बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र में ऐसे ही एक नाले को पार करते हुए एक परिवार हादसे का शिकार हो गया। हरेली पर्व के दिन दर्शन कर लौट रहा एक परिवार तेज बहाव में कार सहित नाले में बह गया। कार में सवार 9 लोगों में से आठ किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए, लेकिन 3 साल का मासूम तेज बहाव में बह गया।
यह हादसा सीपत थाना क्षेत्र के तुंगन नाला में हुआ, जहाँ खम्हरिया निवासी मोहनलाल साहू उर्फ भोला अपनी पत्नी, बच्चे और रिश्तेदारों के साथ उच्चभट्ठी स्थित शिव शक्ति पीठ मंदिर से दर्शन कर वापस लौट रहा था। उनकी वेगनआर कार में कुल 9 लोग सवार थे, जिनमें 4 बड़े और 5 बच्चे शामिल थे।रास्ते में तुंगन नाला का पुल पार करते समय लगभग 3 फीट पानी बह रहा था। मोहनलाल ने कार चलाते हुए पुल पार करने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव में कार 60 फीट तक बह गई।
किसी तरह सभी ने जान बचाई और तैरकर बाहर निकल आए, साथ ही 4 बच्चों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लेकिन हादसे में मोहनलाल का 3 वर्षीय बेटा तेजस पानी के साथ बह गया।हादसे की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी गोपाल सतपथी अपनी टीम और SDRF के 12 सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचे। रात के अंधेरे में मासूम तेजस और कार का कोई सुराग नहीं मिल सका।
अब पुलिस को उम्मीद है कि नाले के 800 मीटर आगे स्थित झलमला सेलर एनीकट में बच्चा और कार मिलने की संभावना है। सुबह से SDRF की टीम तलाशी अभियान चला रही है। फिलहाल, पूरे गांव और परिजन गमगीन माहौल में हैं और मासूम के सकुशल मिलने की दुआ कर रहे हैं।
गड़बड़ी पकड़े जाने के 51 दिन बाद आबकारी विभाग ने दिया नोटिस
आबकारी विभाग ने 31 मई को लिस्टोमेनिया क्लब एंड किचन में छापाकर 62 पेटी शराब जब्त किया था. जिला आबकारी अधिकारी ने प्रारंभिक जांच में पाया था कि निर्धारित समय सीमा (रात 12 बजे) के बाद भी बार का संचालन करना पाया गया था जो कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन है.
मणिपुर में 6 महीने के लिए बढ़ाया गया राष्ट्रपति शासन, प्रस्ताव को मिली मंजूरी
उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव और फ्लोर टेस्ट से ठीक एक दिन पहले इस्तीफा दिया था। मई 2023 से राज्य में जातीय हिंसा हो रही थी। विपक्ष लगातार सिंह को हटाने की मांग कर रहा था
जवानों की हत्या के गुनाहगार नक्सली समेत 13 माओवादियों का सरेंडर, 62 लाख रुपये का था ईनाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समूल उन्मूलन निश्चित है।हम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास एवं समाज में सम्मानजनक जीवन देने का हर प्रयास सुनिश्चित करेंगे।
पाट जात्रा के साथ शुरू हुआ विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा
रायपुर। बस्तर की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी के सामने गुरुवार को पाट जात्रा पूजा विधान के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया। बस्तर दशहरा पर्व के इस प्रथम पूजा विधान में बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण देव, महापौर संजय पाण्डे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और बस्तर दशहरा पर्व समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों के साथ ही बड़ी संख्या में जनसमुदाय शामिल हुआ।
बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के पहले पूजा विधान पाट जात्रा में रथ निर्माण के लिए बनाए जाने वाले औजार ठुरलू खोटला तथा अन्य औजारों का परम्परागत तरीके से पूजा-अर्चना कर रस्म पूरी की गयी। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया, जो इस वर्ष करीब 75 दिवस की अवधि तक पूरे आस्था, श्रद्धा और पूरे हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाएगा।
बस्तर दशहरा पर्व के प्रमुख पूजा विधानों को निर्धारित तिथि अनुसार सम्पन्न की जाती है। जिसके तहत आगामी शुक्रवार 05 सितम्बर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, रविवार 21 सितम्बर को काछनगादी पूजा विधान, सोमवार 22 सितम्बर को कलश स्थापना पूजा विधान, मंगलवार 23 सितम्बर को जोगी बिठाई पूजा विधान सहित बुधवार 24 सितम्बर से सोमवार 29 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, सोमवार 29 सितम्बर को सुबह 11 बजे बेल पूजा, मंगलवार 30 सितम्बर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, बुधवार 1 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव, गुरुवार 2 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शुक्रवार 3 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शनिवार 4 अक्टूबर को काछन जात्रा पूजा विधान एवं मुरिया दरबार होगा। वहीं रविवार 5 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी और मंगलवार 7 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगी।
जवानों ने पेश की इंसानियत की मिसाल: बीमार ग्रामीण के लिए देवदूत बने CRPF जवान
बेटे चैतन्य की गिरफ्तारी पर भूतपूर्व CM भूपेश बघेल ने कसा तंज…
वन विभाग ने मल्हार में दो हिरणों का किया रेस्क्यू
मल्हार पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ हटाकर हिरणों की सुरक्षा सुनिश्चित की। इसके बाद वन विभाग की टीम पहुंची और करीब दोपहर 2 बजे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में दोनों हिरणों को सुरक्षित पकड़ लिया गया। एक हिरण को मां डिडनेश्वरी मंदिर के पास और दूसरे को जैतपुर खार से पकड़ा गया। दोनों हिरणों को रेस्क्यू के बाद सीपत के मंजूरपहरी जंगल क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के किए दर्शन
उप मुख्यमंत्री अरुण साव के निवास पर हरेली की धूम
उप मुख्यमंत्री अरुण साव के नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास पर आज सुबह से हरेली की धूम रही। उन्होंने सपरिवार हल और कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गौमाता को आटे की लोंदी और गुड़ खिलाया। उन्होंने गेड़ी का भी आनंद लिया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक रोहित साहू और मोतीलाल साहू भी हरेली पर्व में शामिल हुए।
हरेली पर उप मुख्यमंत्री साव के निवास पर चहुंओर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक जीवन और खानपान की झलक दिखी। उन्होंने हरेली पर्व में शामिल होने अपने निवास पहुंचे सभी लोगों का परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों चौसेला, गुलगुल भजिया, बरा, टमाटर की चटनी और भजिया खिलाकर स्वागत व आवभगत किया। उन्होंने हरेली पर अपने निवास में शीशम का पौधा लगाया।
उप मुख्यमंत्री साव ने प्रदेशवासियों को हरेली की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली तीज-तिहारों से संपन्न छत्तीसगढ़ का साल का पहला लोक पर्व है। मुख्यतः कृषि और किसानों को समर्पित यह पर्व आज पूरे प्रदेश में उत्साह व उमंग के साथ मनाया जा रहा है। हरेली में गेड़ी का परंपरागत साथ बच्चों के लिए भी इस त्योहार को उत्साहपूर्ण बनाता है। हरेली से मेरे बचपन की कई अच्छी और सुखद यादें जुड़ी हुई हैं। रायपुर नगर निगम के सभापति सूर्यकांत राठौर, खनिज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष छगन मूंदड़ा, बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष यशवंत जैन, पवन साय और अनुराग अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी हरेली पर्व में शामिल हुए।
साय ने गौरी-गणेश, नवग्रह की पूजा कर भगवान शिव का किया अभिषेक
रायपुर :छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के पहले पर्व “हरेली” पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में गौरी-गणेश, नवग्रह की पूजा कर भगवान शिव का अभिषेक किया।
पहली बार मुख्यमंत्री निवास में हरेली के पूजन में भिलाई की ग्रेजुएट धनिष्ठा शर्मा ने अपने बड़े भाई दिव्य शर्मा के साथ भगवान शिव के अभिषेक में मंत्रोच्चार किया, इससे मुख्यमंत्री साय एवं उनके परिजनों सहित मौजूद सभी अतिथि प्रभावित हुए।
हरेली के पूजा-पाठ में विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खेती किसानी के कामों में उपयोग होने वाले नांगर, रापा, कुदाल व दूसरे कृषि यंत्रों की विधिवत पूजा-अर्चना कर हरेली उत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के किसानों समेत समस्त छत्तीसगढ़ वासियों की ख़ुशहाली एवं सुख-समृद्धि की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने पशुधन संरक्षण के संदेश के साथ गाय और बछड़े को पारंपरिक लोंदी और हरा चारा खिलाया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हरेली पर्व केवल किसानों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण और पशुधन से जुड़े हमारे गहरे रिश्ते को भी दर्शाता है। इस दिन गाय एवं अन्य मवेशियों को गेहूं के आटे, नमक और अरंडी के पत्तों से तैयार लोंदी खिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पशुओं को कई प्रकार की बीमारियों से बचाव मिलता है और उनकी सेहत बेहतर रहती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में पशुओं को परिवार का सदस्य माना गया है। हरेली का यह पर्व हमें पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी परंपराओं से जुड़ें और पशुधन की देखभाल एवं सुरक्षा को प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस अवसर पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिवेश और पूजा-पद्धति के साथ लोक संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली।