छत्तीसगढ़
ग्राम-बाना में धूमधाम से मनाया गया करमा पर्व
समिति के अध्यक्ष संतोष धनुवार,चैतराम एवं गांव के भक्तों ने करम डाली लाकर पूजन स्थल में प्रतिष्ठित किया। यहां गणमान्य लोगो की उपस्थिति रही। कथा श्रवण कर उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया। मौके पर देर रात तक नृत्य और गीत का क्रम जारी रहा। रातभर ग्राम-बाना धनुवार पारा करमा पूजा का उल्लास छाया रहा। घरों में सामूहिक रूप से पूजा अर्चना की गई। जिले के सतीगुड़ी,अमेरी,सराईपाली भी करमा का पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। मौके पर युवतियों ने विधि-विधान के साथ करम डाली की पूजा अर्चना कर क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई। इसके बाद ढोल,मांदर और छत्तीसगढ़ लोक गीतों की धुन में लोग रात भर थिरकते रहे!
अज्ञात वाहन ने पिकअप को मारी टक्कर, चालक की मौत, वाहन क्षतिग्रस्त
संघ के वरिष्ठ प्रचारक शांताराम जी का निधन, संघ कार्यालय जागृति मंडल में होगा अंतिम दर्शन
रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक शांताराम जी का 94 वर्ष की आयु में रायपुर के वी.व्हाय. अस्पताल में निधन हो गया। बीते कुछ समय से अस्वस्थता के चलते अस्पताल में भर्ती थे। 5 सितंबर 2025 को शाम 5.45 को उनका देवलोकगमन हो गया है। 6 सितंबर 2025, शनिवार को सुबह 8 से 10 बजे तक संघ कार्यालय जागृति मंडल में उनके पार्थिव शरीर का नगर वासियों के लिए अंतिम दर्शन होगा। उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सर्राफ जी का संपूर्ण जीवन समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण, अनुशासन तथा प्रेरणा का अद्वितीय उदाहरण रहा है। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सामाजिक कार्यों में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। शांताराम जी का जीवन त्याग, अनुशासन और समाजोत्थान का ऐसा उदाहरण रहा, जिसने अनेकों लोगों को प्रेरित किया और राष्ट्र कार्य में लगाया। ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
बैक की नौकरी छोड़ चुना राष्ट्र सेवा का मार्ग
शांताराम जी ने अपने जीवन की शुरुआत सामान्य परिवार से की और आगे पढ़ाई-लिखाई के बाद उन्हें भारतीय स्टेट बैंक में प्रबंधक के रूप में नौकरी लगी। शांताराम जी ने समाज और राष्ट्र के निर्माण के कार्य की इच्छा शक्ति के साथ नौकरी से त्याग पत्र दिया और उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बनना चुना और प्रचारक के रूप में उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।
आरएसएस के कई पदों को किया निर्वहन
शांताराम जी ने संघ में क्रमशः मध्यप्रदेश में सागर जिला प्रचारक, रायपुर विभाग प्रचारक, छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रांत प्रचारक, मध्य क्षेत्र के प्रचार प्रमुख और मध्य क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख जैसे अनेक महत्त्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। इन भूमिकाओं में रहते हुए उन्होंने न केवल संगठन को मज़बूत किया, बल्कि समाज को ही अपना परिवार बना लिया।
“शुद्ध सात्विक प्रेम ही कार्य का आधार” के चरितार्थ शांताराम
डॉ. मोहन भागवत ने दिल्ली के विज्ञान भवन में 27 अगस्त 2025 को तीन दिवसीय व्याख्यानमाला 100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज में कहा था की, “शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है, यही संघ है।” यह कोई बोलने या कहने मात्र की बात नहीं है, वरिष्ठ प्रचारक शांताराम जी ने स्वयं को समाज का एक ऐसा अभिन्न अंग बना लिया जिसे सब एक प्रिय “बड़े भैया” मानने लगे। किसी के घर का अचार, किसी के घर का कोई पकवान, किसी मंदिर की बैठक, किसी के माता-पिता के स्वास्थ्य का हाल, किसी के पढ़ाई की पूछताछ, तो किसी को ठीक से ना पढने पर डांट ऐसा उनका प्रेम था। कार्यकर्ताओं की पीड़ा को स्वयं को पीड़ा मानना और उसके समाधान के लिए हर संभव प्रयास करना, कार्यकर्ताओं के सुख को अपना सुख मानना यह सब शांताराम जी का महान स्वभाव था। इसी वात्सल्य भाव से प्रभावित होकर छोटे-बड़े हर प्रकार के लोग उनसे सुख-दुःख बाँटने और मार्गदर्शन प्राप्त करना नहीं चुंकते थे।
मदकू द्वीप को किया पुनर्जीवित
शांताराम जी के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक श्री हरिहर क्षेत्र केदार मदकू द्वीप को पुनर्जीवित करना रहा। मदकू द्वीप को हरिहर क्षेत्र के रूप में बिलासपुर जाना जाता है यह शिवनाथ नदी पर स्थित एक प्राचीन द्वीप है, जिसे भगवान शिव और विष्णु के मिलन का स्थान बताया गया है। वर्ष 1990 में उन्होंने इस पुरातात्विक और आध्यात्मिक धरोहर को पुनः स्थापित करने का संकल्प लिया। उस समय यह क्षेत्र उपेक्षित हुआ करता था और यहाँ कन्वर्जन आदि समस्याएँ होने की बातें होती थी, लेकिन शांताराम जी ने इसे विकसित करने का ध्येय ले लिया और मदकू द्वीप पुनर्स्थापन के लिए उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय प्रदान किया।
सेवा और समाजोत्थान के विविध कार्य
मदकू द्वीप तक सीमित न रहते हुए शांताराम जी ने अनेक क्षेत्रों में समाजसेवा का कार्य किया। बैतलपुर की कुष्ठ बस्ती चंदरपुर में शिव मंदिर निर्माण कर उन्होंने वहां रहने वाले लोगों के आत्मबल को बढ़ाया। इसके साथ ही चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराकर उन्होंने गरीब और असहाय मरीजों को राहत दिलाई।
नवागढ़ के शमी गणेश मंदिर का पुनर्निर्माण भी उनकी प्रेरणा से हुआ। दरूवनकांपा और आस-पास के क्षेत्रों में सेवा और स्वास्थ्य सुविधाओं को गति देने का श्रेय भी शांताराम जी को ही जाता है। उन्होंने हमेशा समाज के अधिक से अधिक व्यक्तियों तक राष्ट्र निर्माण की भावना का निर्माण किया।
प्रेरणा का स्रोत बने शांताराम जी
शांताराम जी का व्यक्तित्व एक कुशल संगठक, मृदुभाषी, राष्ट्र प्रेमी और सेवा भावी के रूप में एक आदर्श रहा। संघ के स्वयंसेवक प्रार्थना में ईश्वर से “अजेय शक्ति, सुशील, ज्ञान, वीरव्रत और अक्षय ध्येयनिष्ठा” इन पाँचों गुण को मांगते है। तपोमय जीवन के फलस्वरूप शांताराम जी का जीवन पाँचों गुणों से व्याप्त होकर समाज और स्वयंसेवकों के लिए एक जीवंत उदाहरण बन गया। वे अपने व्यवहार, त्याग और अनुशासन से कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक बने। उनके संपर्क में आए असंख्य लोगों ने जीवन की दिशा बदली और समाजहित के कार्यों में जुटे। उनके निधन से कार्यकर्ताओं में गहरा शोक है, लेकिन उनकी स्मृतियां सदैव साथ रहेगी जिससे भविष्य की पीढ़ियों को कार्य हेतु एक बड़ी प्रेरणा मिलती रहेगी।
सड़क पर उतरीं महापौर अलका बाघमार, पटेल चौक में किया हेलमेट वितरण
दुर्ग। नगर पालिक निगम जिला प्रशासन द्वारा लागू की गई “नो-हेलमेट, नो-पेट्रोल” नीति को लेकर मंगलवार को दुर्ग शहर में एक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व महापौर अलका बाघमार ने स्वयं किया।महापौर अलका बाघमार ने भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक, एमआईसी सदस्य देव नारायण चंद्राकर, नीलेश अग्रवाल,लीलाधर पाल एवं पार्षदों के साथ पटेल चौक पहुंचीं और वहां दोपहिया चालकों को हेलमेट पहनने के महत्व के बारे में समझाया।इस अवसर पर पार्षद संजय अग्रवाल,साजन जोसफे, गोविंद्र देवांगन, हेमन्त मटियारा,सुरेश गुप्ता के अलावा दुर्ग थाना प्रभारी सहित अन्य मौजूद रहें।
प्रमाणपत्र वैध होने के बावजूद छात्रा को बताया फर्जी मेडिकल सीट पर छाया संकट
संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भीः साय
रायपुर। छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग रायपुर द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत- 2025 करमा तिहार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विगत शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इस संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व और परंपराएँ समाज को एकजुट होने का अवसर देती हैं, जिससे स्नेह, सद्भाव एवं सौहार्द की भावना विकसित होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि कंवर समाज के युवाओं द्वारा राजधानी रायपुर में करमा तिहार का आयोजन किया जा रहा है। हमारी आदिवासी संस्कृति में अनेक प्रकार के करमा तिहार मनाए जाते हैं। आज एकादशी का करमा तिहार है, जो हमारी कुंवारी बेटियों का पर्व है। इस करमा तिहार का उद्देश्य है कि हमारी बेटियों को उत्तम वर और उत्तम गृहस्थ जीवन मिले। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर बेटियाँ अच्छे वर और अच्छे घर की कामना करती हैं। इसके बाद दशहरा करमा का पर्व आता है, जिसमें विवाह के पश्चात पहली बार जब बेटी मायके आती है, तो वह उपवास रखकर विजयादशमी का पर्व मनाती है। इसी प्रकार जियुत पुत्रिका करमा मनाया जाता है, जिसमें माताएँ पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। यह एक कठिन व्रत होता है, जिसमें माताएँ चौबीस घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास करती हैं।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी परंपरा के निर्वहन में आज हम करमा तिहार मना रहे हैं। हमारी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साय जी के नेतृत्व में ही बस्तर संभाग में बस्तर पांडुम के नाम से ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसकी चर्चा पूरे भारत में हुई। श्री कश्यप ने इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
संरक्षक, अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति पमशाला, जशपुर, श्रीमती कौशिल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समाज के लिए प्रकृति सदैव आराध्य रही है। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है। हमारी संस्कृति अत्यंत गौरवशाली रही है और उसका संरक्षण तथा समय के साथ संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि समाज की महिलाएँ आगे आकर इस संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
डेंटल कॉलेज का निःशुल्क दंत परीक्षण शिविर
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से महिला की मौत खाली ऑक्सीजन सिलेंडर देने का आरोप
इस मंत्री के PA की हुई छुट्टी, श्रम विभाग ने अटैचमेंट किया समाप्त
रायपुर। उद्योग, श्रम और आबकारी मंत्री के पीए का दायित्व संभाल रहे प्रवीण शर्मा को राज्य सरकार ने हटा दिया है। श्रम विभाग के अवर सचिव कीर्तिवर्धन उपाध्याय ने 2 सितंबर को आदेश जारी करते हुए लिखा है कि 14 मार्च 2024 को राजनांदगांव के श्रम कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रवीण शर्मा को कार्यालयीन कार्य संपादन हेतु श्रम मंत्री के निजी स्थापना में संलग्न कर पदस्थ किया गया था। प्रवीण शर्मा की श्रम मंत्री के निजी स्थापना में अब जरूरत न होने की वजह से उनका संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उनके मूल कार्यालय में यथावत पदस्थ किया जाता है।
श्रम मंत्री के पीए को हटा देने से लोग हतप्रभ हैं कि ऐसा क्या हुआ कि मंत्री ने अपने निजी स्थापना के स्टॉफ की छुट्टी कर दी। आदेश की भाषा भी काफी नाराजगी भरा है। उसमें लिखा गया है कि तत्काल प्रभाव से उनका अटैचमेंट समाप्त किया जाता है। ऐसा आदेश तभी निकलता है, जब कोई गंभीर टाईप की शिकायत हो।
बता दें, प्रवीण शर्मा कांग्रेस सरकार में खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के पीए रहे। दिसंबर 2023 में सरकार बदलने के बाद वे हट गए थे। मगर तीन महीने बाद 14 मार्च 2024 को श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के निजी स्टाफ में उनकी पोस्टिंग हो गई। आमतौर पर पीए की नियुक्ति में काफी सतर्कता बरती जाती है। खासकर, विरोधी पार्टी की सरकार में किसी मंत्री के साथ रहे स्टॉफ को कोई मंत्री अपना पीएस या पीएस नहीं बनाता। मगर जीएडी ने पता नहीं कैसे कांग्रेस सरकार के मंत्री के पीए को बीजेपी सरकार के मंत्री का पीए बनाने का आदेश जारी कर दिया। ये भी एक चौंकाने वाला फैसला रहा।
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भिलाई में होगा 12 से 20 सितंबर तक पूज्य राजन जी महाराज के श्रीमुख से होगी श्रीराम कथा
श्रीराम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, अपितु समाज में नैतिक मूल्यों, धर्म, कर्तव्य, और सदाचार की स्थापना का माध्यम है।जीवन आनंद फाउंडेशन के इस पुनीत प्रयास के लिए समस्त समिति को हार्दिक बधाई एवं आगामी आयोजन की शुभकामनाएं। राम नाम का स्मरण ही कल्याण का पथ है।
छत्तीसगढ़ जीरो पावर कट स्टेट से अब मुफ्त बिजली की ओर: मुख्यमंत्री साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर सेक्टर-24 में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज के संयुक्त मुख्यालय भवन का शिलान्यास किया। छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष और गणेशोत्सव जैसे पावन अवसर पर सम्पन्न इस समारोह में उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और भवन का थ्री-डी मॉडल अनावृत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भवन अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता को नई ऊँचाई देगा, तीनों पावर कंपनियों के बीच समन्वय को मजबूत करेगा और उपभोक्ताओं को एक ही छत के नीचे सभी सेवाएँ उपलब्ध कराएगा। उन्होंने इस अवसर पर एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत मौलश्री पौधरोपण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 25 वर्षीय यात्रा यह प्रमाण है कि जब संकल्प और संवेदनशीलता साथ चलें तो परिणाम ऐतिहासिक होते हैं। वर्ष 2000 में प्रदेश केवल 1400 मेगावाट बिजली उत्पादन करता था, आज यह क्षमता बढ़कर 30 हजार मेगावाट हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में 1320 मेगावाट क्षमता के नए संयंत्र का शुभारंभ इस उपलब्धि को और सुदृढ़ करने वाला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह प्रगति हर नागरिक के विश्वास, मेहनत और भागीदारी का परिणाम है।
संयुक्त मुख्यालय भवन 10,017 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में नौ मंजिला स्वरूप में निर्मित होगा। इसमें छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड और पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के लिए तीन अलग-अलग टॉवर होंगे। 1300 कर्मचारियों की क्षमता वाले इस भवन में 210 सीटों का प्रेक्षागृह, कर्मचारियों के लिए जिम, दो मंजिला बेसमेंट पार्किंग, मैकेनिकल स्टैक पार्किंग और ई-व्हीकल चार्जिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। यह भवन बीईई की पाँच सितारा और गृहा की फाइव स्टार ग्रीन रेटिंग मानकों के अनुरूप निर्मित होगा तथा भवन प्रबंधन प्रणाली से इसका संपूर्ण संचालन होगा।
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को राज्य निर्माण में उनके योगदान के लिए नमन किया। उन्होंने कहा कि लगभग 270 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन ग्रीन एनर्जी आधारित होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
गणेश विसर्जन की झांकी के दौरान दर्दनाक हादसा... मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुःख
रायपुर। जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के जुरुडांड में गणेश विसर्जन की झांकी के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मृत्यु एवं कई अन्य लोगों के घायल होने की घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हृदयविदारक घटना से मैं व्यथित हूं। ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि इस दुःख की घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार मृतकों के परिजनों एवं घायलों के साथ खड़ी है।
बतादें कि यह हादसा जशपुर के चराईडांड बगीचा स्टेट हाइवे के पास मंगलवार रात करीब 10 बजे हुआ। यहां गणेश विसर्जन करने जा रहे जुलूस के दौरान एक तेज रफ्तार बोलेरो अनियंत्रित होकर अचानक भीड़ में जा घुसी और कई लोगों को कुचलते हुए निकल गई। जिससे की इस हादसे में जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 30 लोग घायल हो गए। बताया जाता है कि हादसे के बाद वहां चालक भागने की कोशिश कर रहा था।
जशपुर के जुरुडांड, बगीचा में गणेश विसर्जन की झांकी के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मृत्यु व कई अन्य के घायल होने की खबर अत्यंत दु:खद है।
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) September 3, 2025
घायलों की समुचित चिकित्सा एवं आवश्यक मदद के निर्देश जिला प्रशासन को दिए हैं।
इस दुःखद घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार मृतकों के परिजनों…
मुख्यमंत्री ने घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन को घायलों की समुचित चिकित्सा व्यवस्था एवं आवश्यक मदद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी घायल को इलाज में कोई कमी न हो और सभी को तुरंत उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए।
राज्य सरकार ने इस हादसे में दिवंगत तीनों व्यक्तियों के परिजनों को पाँच-पाँच लाख रुपए की आर्थिक सहायता एवं घायलों को पचास-पचास हजार रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखे और उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करें।
छत्तीसगढ़ की प्रगतिशील महिला किसान लेकेश जैन को मिला राष्ट्रीय स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार
रायपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधीन राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (एनएएआरएम), हैदराबाद के स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ की प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती लेकेश जैन को प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार-2025’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 1 सितम्बर 2025 को आयोजित भव्य समारोह में एनएएआरएम स्थित डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन सभागार में प्रदान किया गया।
उत्तर बस्तर कांकेर जिले के ग्राम थानाबोडी निवासी लेकेश जैन, जिन्हें आमतौर पर ‘लेकेश बाई’ के नाम से भी जाना जाता है, को यह सम्मान उनके द्वारा 17 एकड़ क्षेत्र में स्थापित एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम) में उल्लेखनीय सफलता के लिए दिया गया। इस प्रणाली में उन्होंने सब्जी उत्पादन, डेयरी, बकरी पालन, मछली-बत्तख तालाब और चारा उत्पादन को सफलतापूर्वक एकीकृत कर लगभग 10 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय का मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल कांकेर कृषि विज्ञान केंद्र और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के सहयोग से न सिर्फ़ आर्थिक रूप से लाभकारी सिद्ध हुआ है, बल्कि आदिवासी किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना है।
इस कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी), नई दिल्ली डॉ. गुरबचन सिंह मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथियों में नाबार्ड के पूर्व अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी की अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) के अध्यक्ष डॉ. गोविन्दराजुलु चिंतला; प्रो. एम. गनना प्रकाश, कुलपति, प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय, हैदराबाद; तथा आईसीएआर, नई दिल्ली की अतिरिक्त महानिदेशक (मानव संसाधन विकास) डॉ. सीमा जग्गी शामिल थीं। समारोह की अध्यक्षता एनएएआरएम, हैदराबाद के कार्यवाहक निदेशक डॉ. गोपाल लाल ने की।
जैन को इस पुरस्कार के लिए आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईएसएमए), रायपुर द्वारा नामांकित किया गया था। यह पहल छत्तीसगढ़ में चल रही आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि विज्ञान कोष (एनएएसएफ) परियोजना के अंतर्गत की गई है, जिसका नेतृत्व संस्थान के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार राय कर रहे हैं। इस परियोजना में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी. मूवेंथन सहयोगी केंद्र के प्रमुख अन्वेषक (सीसीपीआई) हैं। गौरतलब है कि लेकेश जैन को इससे पूर्व वर्ष 2018 में भारत सरकार द्वारा ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय कृषि पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।
‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ के हीरोज को केंद्रीय गृहमंत्री ने किया सम्मानित
रायपुर। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कर्रेगुट्टालु पहाड़ी पर ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले सीआरपीएफ, छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी और कोबरा के जवानों से नई दिल्ली में भेंट की और उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कर्रेगुट्टालु पहाड़ी पर चले अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन ब्लैक फ़ॉरेस्ट’ में वीर जवानों द्वारा शौर्यपूर्ण प्रदर्शन कर अभियान को सफल बनाने के लिए सभी सुरक्षाबलों के जवानों को हृदय से बधाई दी। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के विरुद्ध अभियान के इतिहास में ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ के दौरान जवानों का शौर्य और पराक्रम एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।
शाह ने कहा कि मोदी सरकार तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक सभी नक्सली या तो आत्मसमर्पण न कर दें, पकड़े न जाएँ या समाप्त न हो जाएँ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हम भारत को नक्सलमुक्त बनाकर ही रहेंगे। शाह ने कहा कि गर्मी, ऊँचाई और हर कदम पर आईईडी के खतरों के बावजूद सुरक्षाबलों ने बुलंद हौसले के साथ अभियान को सफल बनाकर नक्सलियों का बेस कैंप समाप्त किया। उन्होंने कहा कि कर्रेगुट्टालु पहाड़ी पर बने नक्सलियों के मैटीरियल डंप और सप्लाई चेन को छत्तीसगढ़ पुलिस, सीआरपीएफ, डीआरजी और कोबरा के जवानों ने पराक्रम से नष्ट कर दिया।
शाह ने कहा कि नक्सलियों ने देश के सबसे कम विकसित क्षेत्रों को बहुत नुकसान पहुँचाया है, स्कूल और अस्पताल बंद कर दिए और सरकारी योजनाओं को स्थानीय लोगों तक नहीं पहुँचने दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलविरोधी अभियानों के कारण पशुपतिनाथ से लेकर तिरुपति तक के क्षेत्र में साढ़े 6 करोड़ लोगों के जीवन में नया सूर्योदय हुआ है। श्री शाह ने कहा कि नक्सलविरोधी अभियानों में गंभीर शारीरिक क्षति उठाने वाले सुरक्षाबलों के जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए मोदी सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का संकल्प है कि हम 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त कर देंगे।