छत्तीसगढ़
स्वच्छता दीदियों की होगी 8 घंटे की ड्यूटी, महीने में एक दिन मिलेगा सवैतनिक आकस्मिक अवकाश
रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मिशन क्लीन सिटी के अंतर्गत नगरीय निकायों में कार्यरत स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों के लिए राहत का पिटारा खोला है। राज्य शासन द्वारा उनके लिए आठ घंटे की कार्यावधि निर्धारित करने के साथ ही साप्ताहिक अवकाश और महीने में एक दिन का सवैतनिक आकस्मिक अवकाश प्रदान करने के संबंध में नए दिशा-निर्देश सभी नगरीय निकायों को जारी किए हैं। साथ ही सभी स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों का श्रम विभाग में पंजीयन कराकर विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान करने के भी निर्देश दिए हैं।
नगरीय प्रशासन विभाग ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नगरीय निकायों में लागू “मिशन क्लीन सिटी” के तहत निर्मित अधोसंरचना तथा स्वसहायता समूहों के संचालन एवं संधारण के लिए वर्ष 2016 में जारी निर्देशों को संशोधित कर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नए दिशा-निर्देश रायपुर, भिलाई और रिसाली को छोड़कर शेष सभी नगर निगमों तथा सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में लागू होंगे। निकायों में कार्यरत् विभिन्न स्वसहायता समूहों की मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने नगर निगम आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को इस संबंध में परिपत्र जारी कर नए निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। सभी क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को समय-समय पर निकायों का भ्रमण कर इन निर्देशों का पालन किया जाना प्रतिवेदित करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार स्वच्छता दीदियों/सफाई मित्रों की कार्यावधि आठ घण्टे निर्धारित की गई है। निकाय सुविधानुसार प्रातः छह बजे से दोपहर तीन बजे (एक घण्टे का भोजन अवकाश मिलाकर) या प्रातः सात बजे से शाम चार बजे तक कार्यावधि निर्धारित कर सकते हैं। विशेष अवसरों के अतिरिक्त निर्धारित कार्यावधि से अधिक कार्य कराया जाना प्रतिबंधित होगा। निकायों में प्रत्येक स्वच्छता दीदी/सफाई मित्र का कार्य रोस्टर स्वसहायता समूह द्वारा इस प्रकार तैयार किया जाएगा कि प्रत्येक सदस्य को रोटेशन आधार पर एक साप्ताहिक अवकाश अनिवार्यतः प्राप्त हो सके। नगरीय निकायों को इस बात का ध्यान रखने कहा गया है कि सभी सदस्यों का साप्ताहिक अवकाश एक ही दिन न पड़े, जिससे डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं निपटान का कार्य प्रभावित न हो, तथा मणिकंचन केन्द्र में कचरे का जमाव न होने लगे।
बलौदाबाजार हिंसा: सतनामी समाज के 112 लोगों को हाईकोर्ट से मिली जमानत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार हिंसा मामले में हाईकोर्ट ने सतनामी समाज के 112 लोगों को जमानत दे दी है। ये सभी हिंसा और आगजनी के आरोप में जेल में बंद थे। वहीं, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव को भी सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, और वे आज शाम तक रिहा हो सकते हैं। बता दें कि इससे पहले इस मामले में 60 से अधिक आरोपी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। 25 हजार के बॉन्ड पर आरोपियों को जमानत मिली है।
बता दें कि कोर्ट ने हर सुनवाई में ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होने निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस एन के व्यास की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। 10 जून 2024 को बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट परिसर में हिंसा और आगजनी की बड़ी घटना हुई थी, जिसमें उपद्रवियों ने कलेक्टर और एसपी कार्यालय में तोड़फोड़ कर आग लगा दी थी। बता दें कि इस मामले में अब कुल 187 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
बलौदाबाजार की इस घटना ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया था। उपद्रव में 12.5 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ था। हिंसा के दौरान 200 से अधिक वाहन जला दिए गए थे, जिनमें दो दमकल गाड़ियां भी शामिल थीं। साथ ही, 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। अदालत के इस फैसले के बाद अब अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई की संभावना है।
अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में डिजिटल भू-प्रबंधन की नई शुरुआत
केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह ने किया नक्शा परियोजना का वर्चुअल शुभारंभ
ड्रोन सर्वे से भूमि विवादों का समाधान, सम्पत्ति रिकॉर्ड में पारदर्शिता
रायपुर | छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में डिजिटल भू-प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए नक्शा परियोजना की शुरुआत की गई। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह ने मध्यप्रदेश के रायसेन से इस परियोजना का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस पहल के तहत ड्रोन सर्वे के माध्यम से शहरी भू-सम्पत्तियों का सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे संपत्ति विवादों का त्वरित समाधान होगा और भूमि स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी बनेंगे।

अंबिकापुर के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज, राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, कलेक्टर विलास भोसकर, अपर कलेक्टर सुनील नायक एवं नगर निगम कमिश्नर डी. एन. कश्यप समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यह परियोजना शहरी भूमि प्रबंधन को आधुनिक बनाएगी और सम्पत्तियों के स्वामित्व से जुड़ी समस्याओं को जल्द सुलझाने में सहायक होगी। उन्होंने बताया कि ड्रोन तकनीक से सम्पत्तियों का हवाई सर्वे कर फोटो और वीडियो डेटा एकत्र किया जाएगा, जिसे भविष्य में सरकारी दस्तावेजों और भूमि रिकॉर्ड में सटीकता लाने के लिए उपयोग किया जाएगा।
यह परियोजना देश के 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 141 जिलों में लागू की जा रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी को इस योजना में शामिल किया गया है। अंबिकापुर नगर निगम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना जाना शहरवासियों के लिए गर्व की बात है।
सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नक्शा परियोजना से भूमि के हर इंच का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे भू-राजस्व संबंधी समस्याएं खत्म होंगी और डिजिटल रिकॉर्ड के चलते पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे शहरवासियों को अनावश्यक कानूनी उलझनों से बचाव मिलेगा और शहरी विकास की योजनाओं का सुचारू क्रियान्वयन संभव होगा।
कलेक्टर विलास भोसकर ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटलीकरण के माध्यम से भूमि प्रबंधन को आसान और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, यह परियोजना बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय है। ऑनलाइन रिकॉर्ड होने से भू-राजस्व की सुरक्षा और योजनाओं की सफलता सुनिश्चित होगी। इस परियोजना के तहत अंबिकापुर नगर निगम में ड्रोन सर्वे से भू-सम्पत्तियों का रिकॉर्ड तैयार कर उसे ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे भविष्य में भूमि संबंधित विवादों का समाधान आसान होगा और शहरी विकास योजनाओं को नई गति मिलेगी।
नक्शा परियोजना के शुभारंभ से अंबिकापुर ने डिजिटल क्रांति की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। इससे न केवल भू-संपत्तियों का प्रबंधन आसान होगा, बल्कि शहरी विकास को भी नया आयाम मिलेगा। ड्रोन तकनीक से होने वाला यह सर्वे भविष्य में शहरों के सुव्यवस्थित विकास की नींव रखेगा।
छत्तीसगढ़ में अब 24 घंटे खुली रहेंगी दुकानें, सप्ताह में एक दिन बंद रखने की बाध्यता भी होगी खत्म
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब बाजारों में 24 घंटे दुकानें खुली रख सकेंगे। यही नहीं सप्ताह में एक दिन दुकान बंद रखने की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी। इसके लिए कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश देना होगा। साय सरकार की पहल पर दुकान एवं स्थापना अधिनियम लागू हो गया है। जिसके तहत मॉल और दुकान अब 24 घंटे तक खुले रख सकेंगे। सरकार बदलाव करते हुए पुराना अधिनियम 1958 और नियम 1959 को निरस्त कर दिया गया है।
श्रम विभाग के अनुसार, नया अधिनियम पूरे राज्य में लागू होगा। इस बदलाव से छोटे दुकानदारों को राहत मिलेगी। क्योंकि, नया कानून केवल 10 या अधिक कर्मचारियों वाली दुकानों और स्थापनाओं पर ही लागू होगा। पहले, बिना किसी कर्मचारी के भी सभी दुकानें अधिनियम के दायरे में आती थीं। नए नियमों के अनुसार, दुकान और स्थापनाओं के पंजीयन शुल्क को कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तय किया गया है।
श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए अधिनियम के लागू होने के 6 महीने के भीतर सभी पात्र दुकानों और स्थापनाओं को पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया श्रम विभाग के पोर्टल shramevjayate.cg.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी। कर्मचारी राज्य बीमा और भविष्य निधि में पहले से पंजीकृत दुकानें नए अधिनियम में शामिल हों जाएंगी। नए अधिनियम के तहत न्यूनतम शुल्क 1,000 रुपये और अधिकतम 10,000 रुपये होगा। पहले यह शुल्क 100 रुपये से 250 रुपये तक था। 24 घंटे हफ्तेभर खुली रह सकेंगी दुकानें पहले से पंजीकृत दुकानों को 6 महीने के भीतर श्रम पहचान संख्या प्राप्त करने के लिए आवेदन करना होगा, लेकिन इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। यदि 6 महीने बाद आवेदन किया जाता है, तो नियमानुसार शुल्क देना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत हर साल 15 फरवरी तक सभी दुकान एवं स्थापनाओं को अपने कर्मचारियों का वार्षिक विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा। भी नियोजकों को अपने कर्मचारियों के रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से मेंटेन करने होंगे। निरीक्षकों की जगह फैसिलिटेटर और मुख्य फैसिलिटेटर नियुक्त किए जाएंगे, जो व्यापारियों और नियोजकों को बेहतर मार्गदर्शन देंगे। पहले दुकान और स्थापनाओं का पंजीयन कार्य नगरीय निकायों द्वारा किया जाता था। अब यह कार्य श्रम विभाग द्वारा किया जाएगा।
वाणिज्य उद्योग और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है छत्तीसगढ़ में 24 घंटे दुकान खुलने से प्रदेश के रहवासियों को एक बड़ा फायदा होगा खासकर मध्यम और छोटे व्यापारियों को इससे एक बड़ा फायदा होगा पहली बार छत्तीसगढ़ में सभी दुकानें खुली रहेगी इससे रोजगार भी पड़ेगा छत्तीसगढ़ के शहर और जिले मेट्रो सिटी के रूप में डेवलप होने जा रहे हैं विकास की गति को और तेजी मिलेगी व्यापारियों में खुशी की लहर है छोटे व्यापारी कर्मचारियों में उत्साह देखा जा रहा है छत्तीसगढ़ सरकार की है सराहनीय पहल है।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद स्टेट बार एसोसिएशन का चुनाव कार्यक्रम हुआ तय
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के स्टेट बार एसोसिएशन का चुनाव पिछले 5 साल से नहीं हो रहा है। इसके चलते होने वाली परेशानी को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की थी। इस मामले को लेकर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई हुई। जिसमें छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल के सिकरेट्री ने शपथ पत्र पेश करते हुए बताया कि चुनाव का कार्यक्रम तय हो गया है।
हाईकोर्ट में बताया गया कि 13 फरवरी को बैठक आयोजित की गई थी। इसमें प्रारंभिक तौर पर संभावित चुनाव कार्यक्रम तैयार किया गया है। 10 मार्च तक मतदाता सूची बनाने का कार्य किया जाएगा। इसके बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। मतदान 18 जुलाई को होगा। मतगणना 7 अगस्त को की जाएगी।
बार कौंसिल आफ इंडिया की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने बताया कि स्टेट बार कौंसिल का चुनाव कार्यक्रम पूर्व के नियमों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 30 जनवरी 2015 की अधिसूचना के अनुसार मतदाता सूची तैयार करने की अवधि में बढ़ोतरी की गई है। पहले 150 की अवधि तय की गई थी। अब इसे बढ़ाकर 180 दिन कर दिया गया है। जरुरी बदलाव के चलते चुनाव प्रक्रिया सितंबर तक पूरी होगी। बार कौंसिल आफ इंडिया के अधिवक्ताओं के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने स्टेट बार कौंसिल के अधिवक्ता से पूछा कि नए नियमों के अनुसार चुनाव कार्यक्रम क्यों नहीं बनाया गया।
राष्ट्र गौरव के लिए जनजागरण विचार मंथन 2 मार्च को... पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ होंगे मुख्य वक्ता
रायपुर। राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में रविवार, 2 मार्च को शाम 4 बजे से राष्ट्र गौरव के लिए जनजागरण विचार मंथन का कार्यक्रम राष्ट्र प्रथम संस्था की ओर से किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में प्रखरवक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ उपस्थित होंगे। वे राष्ट्र प्रेम के साथ वर्तमान मुद्दे, चुनौतियों के साथ बांग्लादेश और कुंभ को लेकर अपने विचार व्यक्त करेंगे। वहीं श्री हरिहर क्षेत्र केदार द्वीप मदकू के मण्डलेश्वर संत रामरूप दास महात्यागी भी राष्ट्र प्रेम को लेकर अपने विचार साझा करेंगे।
कार्यक्रम के आयोजक और राष्ट्र प्रथम के प्रमुख तुषार शाह ने बताया कि यह कार्यक्रम सिर्फ राष्ट्र प्रथम का नहीं बल्कि पूरे समाज का है। इसे राजनीति से दूर रखा गया है। यहां छत्तीसगढ़ के संपूर्ण समाज को एकत्र किया जा रहा है। यहां सभी जाति और धर्म के लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। ताकि हम सभी में राष्ट्र प्रेम की भावना को जागृत कर सके।
शाह ने आगे बताया कि कार्यक्रम को लेकर राजधानी रायुपर ही नहीं अपितु पूरे प्रदेश के विभिन्न समाज प्रमुखों को आमंत्रण दिया गया है। मराठी, छत्तीसगढ़ियां, आंध्र समाज, बंगाली समाज सहित अन्य समाज के प्रतिनिधि में कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम में पहुंचे सभी लोगों द्वारा सामूहिक वंदेमातरम का गायन भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा : छत्तीसगढ़ में डेयरी विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
राज्य सरकार पशुपालन को बना रही समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, किसानों की आय दोगुनी करने के लिए उठाए जा रहे ठोस कदम
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कहा कि छत्तीसगढ़ में श्वेत क्रांति की तर्ज पर डेयरी उद्योग को सशक्त बनाने और किसानों व पशुपालकों की आय दोगुनी करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन को लाभकारी व्यवसाय बनाने और प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, जिसके तहत व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में पशुपालन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि दिसंबर 2024 में राज्य सरकार और NDDB के बीच हुए समझौते के बाद छत्तीसगढ़ में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अधिकांश आबादी कृषि से जुड़ी है और अतिरिक्त आय के लिए पशुपालन का कार्य भी करती है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की विशेषज्ञता में तैयार पायलट प्रोजेक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार लगभग 5 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 6 जिलों को शामिल किया गया है और सफल क्रियान्वयन के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डेयरी उद्योग के विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही, प्रदेशवासियों के पोषण स्तर में भी सुधार होगा, जिससे बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आएगा।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ, प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में वृद्धि और सरप्लस दूध के उपयोग को लेकर ठोस कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि दूध उत्पादन से जुड़े किसानों और पशुपालकों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय को बढ़ा सकें।
बैठक में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन मिनिष शाह ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन 58 लाख किलोग्राम दूध का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य दुग्ध संघ की कार्यप्रणाली का गहन अध्ययन करने के बाद, दुग्ध उत्पादन और मार्केटिंग को बढ़ाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सहकारी समितियों के माध्यम से पशुपालकों को आधुनिक तकनीक और मशीनों से दूध की गुणवत्ता जांच और तत्काल भुगतान की सुविधा प्रदान की जाएगी। बायोगैस और बायो-फर्टिलाइजर प्लांट की स्थापना से पशुपालकों की अतिरिक्त आय के स्रोत बढ़ेंगे, जिससे पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने डेयरी विकास, पशु उत्पादकता संवर्धन, पशु प्रजनन और पशु पोषण को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक योजना के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और पशुपालकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए दृढ़संकल्पित है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार, संचालक पशुपालन रिमिजियूस एक्का सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
प्राकृतिक सौंदर्य और आस्था का संगम है : नारागांव स्थित मां सियादेवी का मंदिर
रायपुर | छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित माँ सियादेवी नारागांव एक ऐसा स्थल है, जहाँ प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। घने जंगलों से घिरा यह स्थान प्राकृतिक जलप्रपात, धार्मिक स्थल और पर्यटन क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु माँ सियादेवी के दर्शन के लिए आते हैं और इस स्थान की अनुपम प्राकृतिक छटा का आनंद लेते हैं। छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों से भी पर्यटक यहाँ घूमने और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने के लिए पहुँचते हैं।

माँ सियादेवी का यह मंदिर बालोद जिले के ग्राम नारागांव के समीप स्थित है। चारों ओर फैले घने जंगल और मंदिर के समीप स्थित जलप्रपात इसे और अधिक आकर्षक बनाते हैं। बारिश के मौसम में जब जलप्रपात पूरी ताकत के साथ प्रवाहित होता है, तब इसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है। झरने का मनमोहक दृश्य और उसके गिरने की मधुर ध्वनि हर पर्यटक को एक रोमांचकारी अनुभव प्रदान करती है। प्रकृति की गोद में बसे इस स्थल की खूबसूरती न केवल आँखों को सुकून देती है, बल्कि मन को भी शांति और आनंद से भर देती है।
माँ सियादेवी मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता रामायण काल से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, देवी सीता की खोज करते हुए इस स्थान पर आए थे। माता पार्वती ने देवी सीता के रूप में भगवान राम की परीक्षा ली, लेकिन भगवान राम ने उन्हें पहचान लिया और माँ के रूप में प्रणाम किया। इस घटना से माता पार्वती को अपराधबोध हुआ, और उन्होंने भगवान शिव से क्षमा मांगी। तब भगवान शिव ने उन्हें इसी स्थान पर माँ सियादेवी के रूप में विराजमान होने का निर्देश दिया। तभी से यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थान बन गया।
माँ सियादेवी नारागांव, आध्यात्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थल बन चुका है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु माँ सियादेवी का आशीर्वाद लेने के साथ ही इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता का भरपूर आनंद उठाते हैं। वर्षभर यहाँ पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन नवरात्रि के समय यह स्थान विशेष रूप से भक्तिमय वातावरण से भर जाता है, जब हजारों श्रद्धालु यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं।
बालोद जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग द्वारा इस स्थल को विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए सीसी सड़क, बैरिकेड्स, सीढ़ियाँ, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, सोलर लाइट, विश्राम शेड और बैठक भवन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। इससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती है। माँ सियादेवी नारागांव तक पहुँचना काफी सरल है। सड़क मार्ग से रायपुर, धमतरी और बालोद से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। ग्राम सांकरा से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी तय कर ग्राम नारागांव होते हुए इस स्थल तक पहुँचा जा सकता है।
छत्तीसगढ़ के एसडीओ से सुप्रीम कोर्ट नाराज... कहा-उस अफसर को पेश करो, जिसने हमारा आदेश नहीं माना
डेस्क। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के एक मामले की सुनवाई हो रही थी, जिसमें अदालत ने पिछली सुनवाई यानी 2 जनवरी को याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से छूट दी थी लेकिन कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर SDO ने UAPA गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 लगाकर आरोपी को हिरासत में ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट इस बात पर भड़क गया और उस अधिकारी को पेश करने का आदेश दिया है, जिसने UAPA लगाया था।
दरअसल, याचिकाकर्ता मनीष राठौर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (बी) के तहत आरोप दर्ज किए गए थे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तारी से छूट दी थी लेकिन जिला प्रशासन ने उस पर UAPA लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया था।
मनीष राठौर बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के मामले में सोमवार को याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील ने अदालत से गुहार लगाई कि उसके मुवक्किल को न सिर्फ गिरफ्तार किया गया बल्कि पूरे शहर में घुमाया भी गया। वकील ने कहा कि उसके पास इस घटना की तस्वीरें भी हैं।
सरकारी कर्मचारियों के हित में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला... इन कर्मचारियों से नहीं की जा सकेगी रिकवरी
रायपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने रिटायर कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। एक याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि रिटायरमेंट के 6 माह बाद जीपीएफ से वसूली नहीं की जा सकती। दरअसल समता नगर, गौरेला निवासी हृदयनारायण शुक्ला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, गौरेला, जिला-गौरेला, पेण्ड्रा, मरवाही में स्वास्थ्य विभाग में पर्यवेक्षक (पुरूष) के पद पर पदस्थ थे। 62 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर खण्ड चिकित्सा अधिकारी, गौरेला द्वारा उन्हें दिनांक 30 जून 2020 को सेवानिवृत्त कर दिया गया।
सेवानिवृत्ति के 9 (नौ) माह पश्चात् वरिष्ठ लेखा अधिकारी, कार्यालय महालेखाकार द्वारा हृदयनारायण शुक्ला के जीपीएफ राशि से अधिक वेतन की निकासी बतातें हुए उनके जीपीएफ एकाउन्ट में ऋणात्मक शेष बताते हुये उनके विरूद्ध वसूली आदेश जारी कर दिया गया। उक्त वसूली आदेश को हृदयनारायण शुक्ला द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं स्वाति सराफ के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर कर वसूली आदेश को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं स्वाति सराफ द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्यनिधि नियम 1955 के उपनियम 14 (7) एवं छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के उपनियम 65 एवं 66 इसके साथ ही उपनियम 66 (3) (a) में यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई शासकीय अधिकारी/कर्मचारी द्वारा अपने सेवाकाल के दौरान सामान्य भविष्य निधि खाता (जीपीएफ) से अपने व्यक्तिगत कार्य हेतु पैसा निकालता है एवं यदि उस शासकीय अधिकारी/कर्मचारी के जीपीएफ खाते में ऋणात्मक शेष है तो उक्त ऋणात्मक शेष राशि की वसूली सेवानिवृत्ति से पूर्व या सेवानिवृत्ति के पश्चात् सिर्फ 6 (छः) माह तक की अवधि में ही दूसली किया जा सकता है।
सेवानिवृत्ति दिनांक से 6 (छः) माह से अधिक की अवधि व्यतीत हो जाने पर जीपीएफ राशि में ऋणात्मक शेष बताते हुये किसी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती है। चूंकि याचिकाकर्ता के मामले में उसके सेवानिवृत्ति दिनांक से 9 (नौ) माह पश्चात् कार्यालय महालेखाकार, रायपुर द्वारा याचिकाकर्ता के जीपीएफ खाते में ऋणात्मक शेष बताते हुये वसूली आदेश जारी किया गया जो कि छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्यनिधि नियम 1955 के उपनियम 14 (7) एवं छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के उपनियम 65 एवं 66 इसके साथ ही उपनियम 66(3) (a) का घोर उल्लंघन है।
उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका को स्वीकार करते हुये याचिकाकर्ता के विरुद्ध जारी वसूली आदेश को निरस्त कर कार्यालय महालेखाकार, रायपुर को यह निर्देशित किया गया कि वे याचिकाकर्ता के सम्पूर्ण बकाया सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) राशि का तत्काल भुगतान करें।
पंचायत चुनाव के पहला चरण की वोटिंग शुरु… गांव की सरकार चुनने पोलिंग बूथों पर कतार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान 17 फरवरी से शुरू हो गया है। मतदान को लेकर ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। मतदाता सुबह 6 बजे से ही मतदान केंद्रों पर पहुंचने लगे हैं, जहां लंबी कतारें लगने लगी हैं। मतदान प्रक्रिया सुबह 7 बजे से शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चलेगी।
जारी अधिसूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ में पंचायत चुनाव कुल 3 चरणों में होने हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण में सोमवार 17 फरवरी को सभी जिलों के 53 ब्लॉक पंचायतों में वोटिंग होना है। मतदान सोमवार को सुबह से दोपहर दो बजे तक होगा।
वोटिंग के दूसरे दिन ही मतगणना भी हो जाएगी। इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। रविवार की सुबह स्थानीय जनपद पंचायत से मतदान दलों को रवाना किया गया। संवेदनशील और अति संवेदनशील केंद्रों पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई गई है।
छत्तीसगढ़ का अनमोल खजाना : 293 मिलियन साल पुराने समुद्री जीवाश्मों का राज़ खोलता गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क
रायपुर | प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर छत्तीसगढ़ में घूमने-फिरने के लिए कई शानदार जगहें हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि हम पारंपरिक पर्यटन स्थलों से आगे बढ़कर राज्य के एक अनमोल खजाने गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क को जाने। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्थित यह पार्क एशिया का सबसे बड़ा समुद्री जीवाश्म उद्यान है, जो पृथ्वी के 293 मिलियन साल पुराने इतिहास की झलक दिखाता है। यह वह दौर था जब आज का यह भूभाग एक ठंडे समुद्र के नीचे डूबा हुआ था। यह जीवाश्म पार्क केवल अतीत की कहानी नहीं बताता, बल्कि भारत की भूगर्भीय विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर भी प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ सरकार इस अनमोल धरोहर को दुनिया के सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे यह स्थान वैज्ञानिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो सके।

इस पार्क की खोज 1954 में भूवैज्ञानिक एस.के. घोष ने कोयला खनन के दौरान की थी। इसकी खासियत न सिर्फ इसका विशाल क्षेत्रफल है, बल्कि यह भारत का एकमात्र ऐसा समुद्री जीवाश्म पार्क है जिसे राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक का दर्जा प्राप्त है। यहां से द्विपटली (बायवेल्व) जीव, गैस्ट्रोपॉड, ब्रैकियोपॉड, क्रिनॉइड और ब्रायोज़ोआ जैसे समुद्री जीवों के जीवाश्म मिले हैं। ये जीवाश्म तालचिर संरचना से संबंधित हैं, जो पर्मियन युग के शुरुआती दौर को दर्शाते हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह क्षेत्र समुद्री जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि के कारण समुद्र में डूब गया था। ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ा और इस क्षेत्र में समुद्री जीवन का जमाव हुआ। बाद में जब जलस्तर घटा, तो ये समुद्री जीव चट्टानों में दब गए और लाखों वर्षों में जीवाश्म के रूप में बदल गए।
गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क केवल छत्तीसगढ़ या भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक स्थल है। ऐसे ही जीवाश्म ब्राजील के पराना बेसिन, ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स, अंटार्कटिका के अलेक्जेंडर आइलैंड और दक्षिण अफ्रीका के कारू बेसिन में भी पाए गए हैं। यह पार्क गोंडवाना महाद्वीप के भूगर्भीय इतिहास को समझने में अहम भूमिका निभाता है।
बदलते मौसम और मानवीय गतिविधियों के कारण इस जीवाश्म उद्यान को नुकसान पहुंचने का खतरा है। इसे संरक्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। अगस्त 2021 में बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज के वैज्ञानिकों, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग के अधिकारियों ने इस क्षेत्र का निरीक्षण किया था। मार्च 2022 में छत्तीसगढ़ वन विभाग ने इसे राज्य का पहला मरीन फॉसिल पार्क घोषित किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इस जीवाश्म पार्क के विकास के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। इसके सौंदर्यीकरण के लिए 41.99 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है। पार्क के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और इसे पर्यटन व अनुसंधान के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।
राजिम कुंभ में पंचकोशी यात्रा की झांकी श्रद्धालुओं को कर रही आकर्षित
राजिम कुंभ में पंचकोशी यात्रा की झांकी श्रद्धालुओं को कर रही आकर्षितराजिम कुंभ में पंचकोशी यात्रा की झांकी श्रद्धालुओं को कर रही आकर्षित
रायपुर | राजिम कुंभ कल्प मेला में इस बार पहले से अधिक भव्य और आकर्षक रूप में आयोजित किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और संस्कृति का संगम इस मेले में देखने को मिल रहा है। मेले में दिनभर भजन-कीर्तन की गूंज के साथ देशभर के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जा रही हैं। इस बार पंचकोशी यात्रा की थीम पर बनी झांकी मेलार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जो आस्था और संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रही है।

चौबेबांधा के नए मेला मैदान में पंचकोशी यात्रा की झांकी बनाई गई है, जो मेलार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है। श्रद्धालु इस झांकी के समक्ष श्रद्धाभाव से शीश झुकाकर पुण्य लाभ ले रहे हैं। इस झांकी के माध्यम से पंचकोशी यात्रा के पांचों महादेव मंदिरों, यात्रा मार्ग और उनकी दूरी की जानकारी दी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में राजिम मेला से एक माह पूर्व पंचकोशी यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु क्षेत्र के प्रमुख शिव मंदिरों की पदयात्रा कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। यह यात्रा राजिम त्रिवेणी संगम में स्थित श्री कुलेश्वर महादेव मंदिर से आरंभ होती है और वहीं समाप्त होती है।
श्रद्धालु पाँच प्रमुख शिवलिंगों के दर्शन करते हुए यह यात्रा पूर्ण करते हैं। यात्रा के मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं। पटेश्वर महादेव मंदिर (पटेवा), राजिम से 5 किमी दूर, यहाँ भगवान शिव अन्नब्रह्मा के रूप में पूजे जाते हैं। चंपेश्वर महादेव (चंपारण) मंदिर राजिम से 14 किमी उत्तर स्थित है, जहाँ स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। ब्रम्हनेश्वर महादेव (बम्हनी, महासमुंद) चंपेश्वर से 9 किमी दूर, यहाँ भगवान शिव का अघोर रूप उकेरा गया है। फणीकेश्वर महादेव (फिंगेश्वर, गरियाबंद) यहाँ शिवलिंग की ईशान रूप में पूजा की जाती है, और माता अंबिका इनकी अर्धांगिनी हैं। कोपेश्वर महादेव (कोपरा, गरियाबंद) यहाँ भगवान शिव वामदेव रूप में पूजे जाते हैं, और माता भवानी आनंद का प्रतीक मानी जाती हैं। यात्रा के समापन पर श्रद्धालु त्रिवेणी संगम स्थित श्री कुलेश्वर महादेव के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
श्रद्धालु अपने सिर पर रोजमर्रा के सामान लादकर ’महादेव’ और ’राम सिया राम’ का जाप करते हुए यात्रा करते हैं। यह यात्रा अध्यात्मिक शांति, पुण्य अर्जन और काम, क्रोध, मोह, लोभ और मद जैसे विकारों से मुक्ति दिलाने में सहायक मानी जाती है। हथखोज स्थित शक्ति लहरी माता के दरबार में श्रद्धालु परसा पान, नारियल, अगरबत्ती और धूप समर्पित करते हैं। मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु नदी में सूखा लहर लेते हैं। इससे पहले रेत से शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
राजिम कुंभ केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। यहाँ श्रद्धालुओं को पंचकोशी यात्रा का आध्यात्मिक लाभ एक ही स्थान पर मिल रहा है। इस मेले में मनोरंजन, आध्यात्म और श्रद्धा का अद्भुत समन्वय देखने को मिल रहा है।
महाकुंभ जा रहे छत्तीसगढ़ के 10 श्रद्धालुओं की सड़क हादसे में मौत
रायपुर। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बड़ा सड़क हादसा हुआ है। हादसे में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से प्रयागराज जा रहे दस श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। जबकि 19 घायल हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं की गाड़ी और बस के बीच जबरदस्त टक्कर हुई है। जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। जबकि 19 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायल श्रद्धालुओं को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है। शुरूआती जानकारी के अनुसार, सभी मृतक कोरबा जिले के रहने वाले थे। ये लोग अपने परिवार के साथ महाकुंभ में संगम स्नान करने के लिए जा रहे थे।
जानकारी के अनुसार, मेजा में प्रयागराज-मिर्जापुर हाईवे पर शुक्रवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसा हुआ। श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो और बस में आमने-सामने की टक्कर हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चार पाहिया वाहन तेज रफ्तार में था। तेज स्पीड होने के कारण गाड़ी अनियंत्रित हो गई। बस वाले ने बचाने की कोशिश में ब्रेक भी लगाया लेकिन गाड़ी सामने से आकर बस में टकरा गई। जिस कारण यह हादसा हो गया। हालांकि अभी मृतकों की पहचान नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने हादसे की जानकारी छत्तीसगढ़ प्रशासन को दी है। फिलहाल घायलों में कई की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
बतादें कि सड़क हादसे में ही प्रधान आरक्षक और उनके परिवार के सदस्यों की मौत हो गई थी। प्रधान आरक्षक अपने परिवार को गंगा स्नान कराने के लिए लेकर जा रहे थे। इसी दौरान गाड़ी हादसे का शिकार हो गए। जिस कारण से उनके और परिवार के सदस्य की मौत हो गई थी। हादसे में सीएम विष्णुदेव साय ने शोक प्रकट किया था।
निकाय चुनाव 2025 : मतगणना की तैयारियों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ली अहम बैठक
रायपुर। नगरीय निकाय चुनाव संपन्न हो गए है। अब परिणाम का इंतजार है। 15 फरवरी को मतगणना होनी है। मतगणना की तैयारियों को लेकर आज आयोग कार्यालय, नवा रायपुर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस दौरान मतगणना प्रक्रिया में आयोग की प्राथमिकताएं सुनिश्चित की गई। राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह के मार्गदर्शन में यह बैठक हुई। जिसमें सभी जिलों के उप जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटरिंग अधिकारी शामिल हुए।
बैठक का उद्देश्य मतगणना पूर्व आवश्यक तैयारियों की समीक्षा, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश देना और संभावित चुनौतियों पर चर्चा करना था। साथ ही मतगणना प्रक्रिया की बारीकियों, सुरक्षा प्रबंधन, तकनीकी सहयोग पर भी गहन चर्चा हुई। राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मतगणना प्रक्रिया किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त हो और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जाए। मतगणना कर्मियों को उचित प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया, ताकि वे सभी तकनीकी प्रक्रियाओं को सही ढंग से संचालित कर सकें।
पूर्व एजी सतीश चंद्र वर्मा को लगा बड़ा झटका, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका
रायपुर। पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। नान घोटाले में आरोपी छत्तीसगढ़ के पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की सिंगल बेंच ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। मामले में हाई कोर्ट ने 10 दिसंबर को मामले की अंतिम सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
हाई कोर्ट से पहले ईओडब्ल्यू-एसीबी की विशेष कोर्ट ने पूर्व महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका को अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए खारिज कर दिया था। जिसके बाद कोर्ट के फैसले को पूर्व एजी ने वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने नान घोटाले में डॉ. आलोक शुक्ला, अनिल टुटेजा, सतीश चंद्र वर्मा और अन्य पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धाराओं 7, 7क, 8, और 13(2) और भारतीय दंड संहिता की धाराएं 182, 211, 193, 195-ए, 166-ए, और 120बी के तहत अपराध दर्ज किया था।
ईओडब्ल्यू की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार, पूर्व आईएएस डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा ने तत्कालीन महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा से पद का दुरूपयोग करते हुए लाभ लिया। दोनों अफसरों ने तत्कालीन महाअधिवक्ता वर्मा को लोक कर्तव्य को गलत तरीके से करने के लिए प्रेरित किया था।
ईओडब्ल्यू का आरोप है कि इसके बाद तीनों ने मिलकर एजेंसी (ईओडब्ल्यू) में काम करने वाले उच्चाधिकारियों से प्रक्रियात्मक दस्तावेज और विभागीय जानकारी में बदलाव करवाया, ताकि नागरिक आपूर्ति निगम के खिलाफ 2015 में दर्ज एक मामले में अपने पक्ष में जवाब तैयार कर हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रख सकें और उन्हें अग्रिम जमानत मिल सके।
प्रशासन की तत्परता से जांजगीर चांपा जिले में 14 बाल विवाह रोके गए
रायपुर | जिला प्रशासन की सक्रियता और महिला एवं बाल विकास विभाग की तत्परता से जांजगीर चांपा जिले में पखवाड़े भर में कुल 14 बाल विवाह रोके गए, जिससे नाबालिग बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो गया। कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, अनिता अग्रवाल के मार्गदर्शन में जांजगीर चांपा जिले में बाल विवाह की रोकथाम का अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है । जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेन्द्र सिंह जायसवाल के नेतृत्व में पुलिस विभाग के समन्वय से विभिन्न गांवों में इन बाल विवाहों को रोका गया।

इस अभियान के तहत 13 फरवरी 2025 को विकासखंड नवागढ़ के ग्राम अवरीद में एक ही दिन में 5 बाल विवाह रोके गए। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। बालक-बालिकाओं की जन्मतिथि एवं अंकसूचियों की जांच की गई, जिसमें उनकी उम्र विवाह की न्यूनतम निर्धारित आयु से कम पाई गई। विभागीय अधिकारियों ने परिजनों और स्थानीय नागरिकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी और उन्हें समझाइश दी। समझाइश के उपरांत परिजनों की सहमति से विवाह रोक दिया गया और गवाहों के समक्ष घोषणा पत्र व राजीनामा पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए।
गौरतलब है कि रोके गए पांच विवाहों में से तीन विवाह 18, 19 और 21 फरवरी 2025 को प्रस्तावित थे, जबकि दो विवाह दिसंबर 2025 में होने वाले थे। विवाह की तैयारियां शुरू होने से पहले ही प्रशासन की सतर्कता के चलते इन्हें रोक लिया गया, जिससे परिवारों को आर्थिक क्षति, सामाजिक अपमान और मानसिक तनाव से बचाया जा सका।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिता अग्रवाल का कहना है कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। छोटी उम्र में विवाह होने से शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। लड़कियों में कुपोषण, रक्त की कमी और जटिल प्रसव संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने से वंचित रह जाते हैं। घरेलू हिंसा, शोषण और सामाजिक असमानता की संभावना बढ़ जाती है।
अनिता अग्रवाल ने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह होने की सूचना मिले, तो तत्काल विभाग को सूचित करें। समय रहते दी गई जानकारी से बच्चों के जीवन को संवारने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा है कि बाल विवाह को रोकना प्रशासन और समाज दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी आवश्यक है। सभी नागरिकों से आग्रह है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करने में सहयोग करें और बच्चों को एक उज्जवल भविष्य देने में भागीदार बनें।