देश-विदेश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शहीद दिवस पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की
देलही : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शहीद दिवस के अवसर पर महान स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के लिए इन महान नायकों का बलिदान भारत की सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित है; उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि कम उम्र में ही उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दिखाई। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि औपनिवेशिक शासन की ताकत से विचलित हुए बिना, उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ बलिदान का मार्ग चुना और राष्ट्र को अपने जीवन से ऊपर रखा; न्याय, देशभक्ति और निडर प्रतिरोध के उनके आदर्श आज भी अनगिनत भारतीयों के मन में प्रेरणा का संचार करते हैं।
"आज हम भारत माता के वीर सपूतों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। राष्ट्र के लिए उनका बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में सदा के लिए अंकित है।
कम उम्र में ही उन्होंने असाधारण साहस और भारत की स्वतंत्रता के उद्देश्य के प्रति अटूट निष्ठा का परिचय दिया। औपनिवेशिक शासन की ताकत से विचलित हुए बिना, उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ बलिदान का मार्ग चुना और राष्ट्र को अपने जीवन से ऊपर रखा; न्याय, देशभक्ति और निडर प्रतिरोध के आदर्श आज भी अनगिनत भारतीयों के मन में प्रेरणा का संचार करते हैं।
देश के दिल और असीम विकास अवसरों के केन्द्र मध्यप्रदेश से जुड़िए : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान जुड़वा भाइयों की तरह हैं। दोनों राज्य मिलकर विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत तैयार कर रहे हैं। हम सिर्फ विरासतों और विविधताओं के ही नहीं, आर्थिक दृष्टि से भी एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं। राजस्थान का विकसित टेक्सटाइल, जेम्स-एंड-ज्वेलरी और मध्यप्रदेश की ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन क्षमता, टेक्सटाइल पार्क एवं मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मिलकर एक सशक्त वैल्यू चैन तैयार कर सकते हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है।
ये परियोजना दोनों राज्यों की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। लगभग 1 लाख करोड़ रूपए की इस परियोजना में दोनों राज्यों को मात्र 5-5 प्रतिशत राशि देनी होगी। इसकी 90 प्रतिशत लागत भारत सरकार देगी। उन्होंने कहा है कि दोनों राज्यों के बीच रोटी-बेटी का संबंध रहा है और अब पानी का संबंध भी बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को जयपुर में आयोजित 'इन्टरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' में राजस्थान के निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर सेशन का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य के सभी निवासियों को हाल ही में मनाए गए राजस्थान राज्य के स्थापना दिवस (19 मार्च) और अखंड सौभाग्य के लोक-पर्व गणगौर पूजन की बधाई और मंगलकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। राज्यों के बीच प्राकृतिक संसाधनों के बंटवारे मधुरता से पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के व्यापारियों ने देश-दुनिया में व्यापार-व्यवसाय में अपना नाम कमाया है। धन कमाने के लिए मन और बुद्धि चाहिए। राजस्थान के व्यापारियों ने अपनी क्षमता, युक्ति-बुद्धि और योग्यता से अपना लौहा मनवाया है। हम यहां दोनों राज्यों के बीच व्यापार संबंध प्रगाढ़ करने के लिए आए हैं। वर्तमान हालातों में कई तरह की चुनौतियां हैं, साथ ही हमारे पास आगे बढ़ने के स्वर्णिम अवसर भी हैं। कुछ साल पहले तक हमारे निवेशक खाड़ी देशों में निवेश के लिए जा रहे थे, लेकिन अब वहां स्थिति तेजी से बदल गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र में नियमों-कानूनों का सरलीकरण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए 26 प्रकार की नई नीतियां लागू की हैं। अब स्पेस और एआई सेक्टर के लिए भी हम पॉलिसी लाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, देश के सरप्लस बिजली स्टेट्स में से एक है। अब हम देश के 'ग्रीन, क्लीन एंड सोलर एनर्जी कैपिटल' के रूप में उभर रहे हैं। इलेक्ट्रिसिटी सरप्लस राज्य बनने के बाद अब मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन संचालित हो रही है। प्रदेश में लगभग 2 रुपए 90 पैसे प्रति यूनिट दर पर घरेलू बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
विधानसभा चुनावः असम, केरल और पुडुचेरी में ईवीएम-वीवीपीएटी का पहला यादृच्छिकीकरण कार्य पूरा
नईदिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और छह राज्यों में उपचुनाव कार्यक्रम घोषित किया है। ईवीएम का आवंटन दो चरणों वाली यादृच्छिक प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित मतदान केंद्रों को किया जाता है। पहले चरण में, जिला स्तरीय गोदामों से विधानसभा क्षेत्रों को ईवीएम का यादृच्छिक आवंटन किया जाता है। दूसरे चरण में विधानसभा क्षेत्र स्तर से मतदान केंद्र स्तर तक ईवीएम का यादृच्छिक आवंटन किया जाता है।
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के निर्देशों के अनुसार, सभी मतदान वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) में मानकों को पूरा करने वाली ईवीएम-वीवीपीएटी मशीनों का पहला यादृच्छिकीकरण पूरा करना होगा। तदनुसार, असम और केरल राज्यों और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के आम चुनावों के साथ-साथ गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा राज्यों में होने वाले उपचुनावों के लिए ईवीएम का पहला यादृच्छिकीकरण पूरा हो चुका है, जिनके लिए मतदान 9 अप्रैल, 2026 को होगा।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में डीईओ द्वारा ईवीएम प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) के माध्यम से पहला यादृच्छिकीकरण किया गया। सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ उनके संबंधित जिला मुख्यालयों में यादृच्छिक रूप से चयनित ईवीएम और वीवीपीएटी की निर्वाचन क्षेत्रवार सूचियां साझा की गई हैं।
इन ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संबंधित विधानसभा के सुरक्षित कक्ष में रखा जाएगा। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के बाद, यादृच्छिक रूप से पहली और दूसरी चयनित ईवीएम और वीवीपीएटी की सूची भी सभी चुनावी उम्मीदवारों के साथ साझा की जाएगी।
भारतीय नौसेना अपने नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत 'तारागिरी' को कमीशन करने के लिए तैयार
नईदिल्ली। भारतीय नौसेना, भारत की समुद्री संप्रभुता के एक निर्णायक समारोह में 3 अप्रैल 2026 को अपने नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत, तारागिरी (एफ41) को कमीशन करने की तैयारी कर रही है। विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इस समारोह की अध्यक्षता माननीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। यह राष्ट्र के पूर्णतः आत्मनिर्भर नौसैनिक शक्ति बनने की दिशा में किए जा रहे प्रयास का एक सशक्त प्रमाण होगा। प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी के चौथे शक्तिशाली प्लेटफॉर्म के रूप में तारागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं है; यह 6,670 टन का 'मेक इन इंडिया' भावना और हमारे स्वदेशी शिपयार्डों की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रतीक है।
मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती डिज़ाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसका आकार अधिक सुव्यवस्थित है और इसमें कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जिससे यह घातक स्टील्थ तकनीक से कार्य करने में सक्षम है। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना यह युद्धपोत घरेलू औद्योगिक तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है। इस कार्य में अब 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं। जो भारत सरकार की आत्मनिर्भरता पहल में योगदान करते हुए हजारों भारतीयों को रोजगार प्रदान करते हैं।
तरागिरी एक संयुक्त डीजल या गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन संयंत्र द्वारा संचालित है, जिसे 'उच्च गति- उच्च सहनशक्ति' की बहुमुखी प्रतिभा और अनेक समुद्री अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है। युद्धपोत का हथियार भंडार विश्व स्तरीय है। इसमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली हैं। ये प्रणालियाँ अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से निर्बाध रूप से एकीकृत हैं जिससे चालक दल पलक झपकते ही खतरों का जवाब दे सकता है।
समुद्र में अग्रणी शिकारी होने के अलावा, तारागिरी आधुनिक कूटनीति और मानवीय संकटों की जटिलताओं के लिए भी उपयुक्त है। इसकी अनुकूल मिशन प्रोफ़ाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) तक हर चीज के लिए आदर्श बनाती है।
भारतीय नौसेना एक युद्ध-परिचित, एकजुट, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर बल के रूप में निरंतर विकसित हो रही है, जो भारतीयों द्वारा डिज़ाइन किए गए, भारतीयों द्वारा निर्मित और भारतीयों द्वारा संचालित जहाजों से संरक्षित विकसित और समृद्ध भारत के लिए समुद्रों की रक्षा कर रही है। तारागिरी एक उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार है, जो बढ़ती समुद्री शक्ति का प्रतीक और हमारी नीली सीमाओं का अभेद्य रक्षक है।
स्वयं को स्वस्थ रखने के लिये खेलों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय जीवन पद्धति में खेलों का विशेष महत्व रहा है। रामायण और महाभारत काल में भी खेल और शरीर को स्वस्थ रखने में व्यायाम के महत्व का कई स्थानों पर उल्लेख है। भारतीय संस्कृति में यह माना गया है कि खेल हमें स्वस्थ रखने का प्रभावी माध्यम है। खेल जब तक हमारी जीवनशैली का भाग रहेंगे, हम बीमार नहीं होंगे। इसी का परिणाम है कि निरोगी काया को ही उत्तम सुख माना गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक निजी टीवी चैनल द्वारा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित पंख खेल पुरस्कार 2026 के अंतर्गत पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में टॉक-शो के प्रश्नों के उत्तर देते हुए यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी कमलापति रेल्वे स्टेशन स्थित होटल हयात प्लेस बंसल प्लाजा में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया और प्रदेश की खेल प्रतिभाओं और उन्हें प्रोत्साहन दे रहे व्यक्तियों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वस्थ तन और प्रसन्न मन के साथ लक्ष्य की स्पष्टता और निरंतर प्रयासरत रहना सफलता के लिये आवश्यक है। राज्य सरकार खेलों और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी जिलों में खेल सुविधाओं का विस्तार और उन्नयन किया जा रहा है। एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है।
आठ लाख आबादी वाले उज्जैन में 30 करोड़ लोगों के लिये व्यवस्था करना राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार प्रदेशवासियों के सहयोग से सिंहस्थ-2028 के आयोजन में सफल होगी। उन्होंने जनसामान्य को अपनी रोजमर्रा के जीवन के साथ आध्यामिक दृटिकोण को भी विकसित करने के लिये प्रेरित किया। इस अवसर पर पंख खेल पुरस्कार से संबंधित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
योग निवारक स्वास्थ्य और कल्याण का एक शक्तिशाली साधन : केंद्रीय आयुष मंत्री
नईदिल्ली। भूमि से 35,000 फीट ऊपर, समय धीमा होता हुआ प्रतीत होता है और शरीर भी सुस्त पड़ जाता है। एक सीमित सीट पर घंटों बिताने से सबसे अनुभवी यात्री भी थका हुआ, तनावग्रस्त और मानसिक रूप से निर्बल महसूस कर सकता है। यात्रा की इस आधुनिक चुनौती का समाधान करने के लिए, एक सरल लेकिन शक्तिशाली उपाय सामने आ रहा है: हवाई यात्रा के लिए योग —एक सोच-समझकर तैयार किया गया 5 मिनट का इन-फ्लाइट वेलनेस प्रोटोकॉल।
आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव द्वारा योग महोत्सव 2026 के दौरान शुरू की गई यह अभिनव पहल, योग के शाश्वत ज्ञान को आपके केबिन के दायरे में लाती है और आपकी सीट को कायाकल्प के स्थान में बदल देती है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा विकसित यह प्रोटोकॉल आज के नियमित हवाई यात्रियों के लिए तैयार किया गया है—यह हवाई यात्रा के दौरान तरोताजा रहने का एक त्वरित, सुरक्षित और प्रभावी तरीका प्रदान करता है।
आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने इस पहल के पीछे की सोच को उजागर करते हुए बताया, “योग निवारक स्वास्थ्य और कल्याण का एक शक्तिशाली साधन है। यह इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल हर परिस्थिति में—यहां तक कि 35,000 फीट की ऊंचाई पर भी—योग को सुलभ बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, ताकि व्यक्ति यात्रा के दौरान सक्रिय, तनावमुक्त और संतुलित रह सकें।”
हवाई यात्रा, विशेषकर लंबी दूरी की यात्राएं, अक्सर लंबे समय तक गतिहीनता का कारण बनती हैं। इससे मांसपेशियों में अकड़न, रक्त संचार में कमी, थकान, जेट लैग और कुछ मामलों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यात्रा संबंधी तनाव और केबिन के दबाव में बदलाव के साथ, एक सरल स्वास्थ्य उपाय की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है।
5 मिनट का योग प्रोटोकॉल हल्की चहलकदमियों, सचेत श्वास और कुछ समय के ध्यान के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करता है, जिससे शरीर और मन दोनों में संतुलन बहाल करने में मदद मिलती है।
आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने वैज्ञानिक और निवारक पहलुओं पर बल देते हुए कहा, “दैनिक दिनचर्या में—यहां तक कि हवाई यात्रा जैसी सीमित परिस्थितियों में भी योग को शामिल करने से रक्त संचार में अत्यधिक सुधार हो सकता है, तनाव कम हो सकता है और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा मिल सकता है। इस तरह के व्यावहारिक उपाय निवारक स्वास्थ्य देखभाल को सरल और सुलभ बनाते हैं।”
पानी की बूंद-बूंद बचाने के लिए सनातन संस्कृति की पवित्र धारा का अभियान है जल गंगा संवर्धन
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान हमारी सनातन संस्कृति की सबसे पवित्र धारा का अभियान है। जल की महत्ता ऐसी है कि इसके बिना कोई जीवित नहीं रह सकता है। शरीर 5 तत्वों से मिलकर बना है। ये सभी तत्व कभी अकेले नहीं रह सकते हैं। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुड़ी पड़वा, विक्रम संवत्, चेटीचंड, चैत्र नवरात्रि की बधाई देते हुए प्रदेश में तीसरे चरण के जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, जहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं।
मां नर्मदा के पवित्र जल से मध्यप्रदेश के साथ गुजरात में भी आनंद की धारा बह रही है। हमारी नदी जोड़ो परियोजनाओं का लाभ पड़ौसी राज्य राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जल संचय के अभियान में देशभर के जल स्त्रोतों के विकास कार्य करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के तीसरे जल गंगा संवर्धन अभियान में 3 महीने तक लगातार जल संचय की गतिविधियां संचालित होंगी, जिसमें 2500 करोड़ की राशि से सभी विधानसभा, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचय के कार्य किए जाएंगे। हमारी सरकार ने पहले वर्ष में 30 दिन, दूसरे वर्ष में 120 दिन चलाया और मौजूदा तीसरे वर्ष में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक 139 दिनों तक प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को इंदौर के इस्कॉन मंदिर में आयोजित तीसरे राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में अमृत 2.0 परियोजना में सिंगल क्लिक से 12.72 करोड़ लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ लागत से लिम्बोदी तालाब, 3.82 करोड़ लागत से छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार कार्यों के भूमि-पूजन सहित 22 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में जल के अपव्यय को रोकने और एक-एक बूंद संग्रहण के लिए शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि 'जल ही जीवन है, जल है तो कल है' के मूल मंत्र के साथ जागरूकता फैलाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार्मिक और पर्यावरणीय संदेशों से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों में भी शामिल हुए। उन्होंने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन किया और गौ माता की पूजा कर उन्हें गौ-ग्रास खिलाया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान इसी का हिस्सा है। पिछले वर्षों में प्रदेश में लाखों जल संरचनाओं पर कार्य किया गया है। इंदौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान के पहले वर्ष में इंदौर नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में पुरानी बावड़ियों और तालाबों के गहरीकरण और पुनरुद्धार का कार्य किया गया। साथ ही सैकड़ों कुओं का भी जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यह अभियान केवल सरकारी नहीं, बल्कि जन-जन का आंदोलन होना चाहिए।
हिंद महासागर के आसपास के देशों के साथ सामुद्रिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए आईओएस सागर पहल
नईदिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, इंडियन ओशन शिप (आईओएस) सागर की 16 मार्च 2026 को शुरूआत हुई। यह आईओएस सागर पहल का दूसरा आयोजन है। फरवरी 2026 में भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर नौसेना सिम्पोजियम (आईओएनएस) की अध्यक्षता ग्रहण की थी। इसलिए, इस आयोजन में हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर ) के 16 आईओएनएस देशों की भागीदारी शामिल है।
यह पहल भारत के दीर्घकालिक सामुद्रिक सहयोग के प्रयासों पर आधारित है और क्षेत्र में सभी के लिए सरकार के सुरक्षा और विकास (सागर) के संबंध में दृष्टिकोण को दर्शाती है, साथ ही यह पूरे क्षेत्र में महासागर यानी पारस्परिक और समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा विकास के व्यापक कार्यक्रम को भी आगे बढ़ाती है।
आईओएस सागर एक अद्वितीय संचालन सहभागिता कार्यक्रम है जो विदेशी मित्र देशों के नौसैनिकों को भारतीय नौसेना के जहाज पर एक साथ प्रशिक्षण और नौकायन करने में सक्षम बनाता है। जहाज पर होने वाली गतिविधियों और व्यावसायिक प्रशिक्षण मॉड्यूल में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को शामिल करके, यह पहल व्यावहारिक सहयोग, अंतरसंचालनीयता और सामुद्रिक संचालन की साझा समझ को बढ़ावा देती है। आईओएस सागर के वर्तमान आयोजन के हिस्से के रूप में, 16 विदेशी मित्र देशों के नौसैनिक इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
कार्यक्रम का प्रारंभ कोच्चि में स्थित भारतीय नौसेना प्रशिक्षण केंद्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण सत्रों के साथ होगा, जहां प्रतिभागियों को नौसेना संचालन, समुद्री कौशल और सामुद्रिक सुरक्षा से जुड़ी अवधारणाओं के प्रमुख पहलुओं से अवगत कराया जाएगा। इस चरण के बाद, प्रतिभागियों को भारतीय नौसेना के जहाज पर तैनात किया जाएगा, जहां वे भारतीय नौसेना कर्मियों के साथ मिलकर समुद्री यात्रा करेंगे और समुद्र में संचालनात्मक गतिविधियों में भाग लेंगे।
यात्रा के दौरान, जहाज सामुद्रिक गतिविधियों और बंदरगाह के दौरे में भाग लेगा, जिससे क्षेत्र भर में सहयोगी नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ संवाद स्थापित करने में मदद मिलेगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य पेशेवर संबंधों को मजबूत करना, सर्वोत्तम प्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और साझा सामुद्रिक चुनौतियों की एक गहरी समझ को विकसित करना है।
कोरबा में मेधावी बच्चों की शिक्षा में मददगार होगा 'अनिकेत'... मंचन 21 मार्च को
0- महाराष्ट्र मंडल रायपुर के नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ का मंचन 21 को, रोटरी क्लब व महाराष्ट्र मंडल कोरबा भी जुटे हैं तैयारियों में
0- संत ज्ञानेश्वर सभागृह में अनिकेत की टीम जी जान से जुटी है रिहर्सल में, ताकि कोई कमी न रह जाए नाटक के मंचन में
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के ख्याति प्राप्त नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ के चार सफलतम मंचन के बाद अब इसका पांचवा प्रयोग शनिवार, 21 मार्च को कोरबा के राजीव गांधी ऑडिटोरियम, इंदिरा स्टेडियम टीपी नगर में होगा। रोटरी क्लब कोरबा और महाराष्ट्र मंडल कोरबा के संयुक्त तत्वावधान में व्यावसायिक स्तर पर मंचित होने वाले नाटक की आय से आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपनी शिक्षा जारी रखने में असमर्थ मेधावी विद्यार्थियों को सहयोग प्रदान किया जाएगा।
अनिकेत... टीम के सामने बड़ी चुनौती इस बात की है कि जिस सेवाभावी कार्य के लिए ‘मैं अनिकेत हूं’ का मंचन किया जा रहा है, ऐसा पहले नहीं हुआ था। जाहिर है, जब नाटक का मंचन व्यावसायिक स्तर पर होगा तो नाट्य मंडली पर भी अपेक्षाकृत अधिक दबाव होगा कि कहीं कोई चूक न हो जाए, कहीं कोई कमी न रह जाए। यही वजह है कि निर्देशक और नाटक में अनिकेत की केंद्रीय भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ रंगसाधक शशि वरवंडकर के निर्देशन में पूरी टीम गत कई दिनों ने रिहर्सल कर रही है।
बताते चलें कि 90 मिनट के नाटक ‘मैं अनिकेत हूं में अनिकेत की पत्नी मीनाक्षी शर्मा का रोल बहुमुखी प्रतिभा की धनी वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनुराधा दुबे निभा रहीं हैं। वहीं पूरे नाटक के हर दृश्य में भारद्वाज वकील की दमदार भूमिका में आचार्य चेतन दंडवते नजर आएंगे। जज के प्रभावी रोल में दिलीप लांबे और गवाहों की भूमिकाओं में प्रकाश खांडेकर, रंजन मोड़क, रविंद्र ठेंगड़ी, समीर टुल्लू, भारती पलसोदकर, सुमीता रायजादा और श्याम सुंदर खंगन नाटक में दिलचस्प उतार-चढ़ाव लाएंगे। विनोद राखुंडे, पंकज सराफ भी अपनी अहम भूमिकाओं से प्रभावित करेंगे। पर्दे के पीछे डॉ. शुचिता देखमुख, अजय पोतदार और प्रवीण क्षीरसागर तकनीकी पहलुओं को सशक्त बनाएंगे।
अब तक चार बार मंचन
वरिष्ठ रंगसाधक रंजन मोड़क बताते हैं कि ‘मैं अनिकेत हूं’ का पहला मंचन चार अक्टूबर 2025 को महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में, दूसरा मंचन 9 अक्टूबर को एम्स रायपुर के ऑडिटोरियम में, तीसरा 26 दिसंबर को नूतन कला निकेतन बालाघाट में और महाराष्ट्र मंडल धमतरी में चौथा नाट्य प्रयोग 21 जनवरी को किया जा चुका है। एक जानकारी के अनुसार बिलासपुर, जबलपुर, जगदलपुर, भिलाई और राजनांदगांव की संस्थाएं भी ‘मैं अनिकेत हूं’ के यथाशीघ्र मंचन को लेकर निर्देशक शशि वरवंडकर, मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले व सचिव चेतन दंडवते के संपर्क में हैं।
लघु कृषकों को उन्नत खेती के लिए किराये पर उपलब्ध कराये जाएंगे कृषि यंत्र
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और कृषक कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी उपायों पर क्रियान्वयन तेज किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष का लाभ किसानों के परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जो 5 रुपए में किसानों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवा रहा है। ये किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में कृषक कल्याण वर्ष में सक्रिय सहभागिता जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास डॉ. राजेश राजौरा ने प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं से निरंतर बढ़ रहे सिंचाई प्रतिशत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आने वाले कुछ समय में एक लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। डॉ. राजौरा ने अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी और बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से इन परियोजनाओं की स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त हुआ। मध्यप्रदेश का बड़ा क्षेत्र इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से लाभान्वित होगा।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक वर्णवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश पिछले 10 साल से कृषि क्षेत्र में 2 अंकों में वृद्धि कर रहा है। इस गति को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार कई विभागों को जोड़कर कृषक कल्याण वर्ष मना रहे हैं। कार्यशाला में जैविक खेती, उद्यानिकी में नर्सरी, कोदो-रागी जैसे मोटे अनाजों से आइसक्रीम निर्माण, केज कल्चर सहित अनेक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। मत्स्य पालन, संस्कृति, पर्यटन, खाद्य एवं नवकरणीय ऊर्जा सहित कई विभागों ने अपनी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की है।
अपर मुख्य सचिव कुटीर और ग्रामोद्योग विभाग श्री के.सी. गुप्ता ने मध्यप्रदेश में छोटे और कुटीर उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न शिल्पों के विशेषज्ञ कलाकारों और अन्य शिल्पियों की सहायता के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। शिल्पियों को उत्पादों की बिक्री के लिए भी आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जा रही है।
अध्ययन भ्रमण विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने, सीखने का सुअवसर : राज्यपाल पटेल
रायपुर। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि अध्ययन भ्रमण आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और संसाधन प्रबंधन के विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने का अवसर होता है। अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे भ्रमण के दौरान समझने और सीखने का प्रयास करें। प्रतिदिन भ्रमण के अंत में दिनभर की गतिविधियों और अनुभवों का चिंतन करें। भ्रमण टीप का अभिलेखन करें।
राज्यपाल पटेल रविवार को लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली में अध्ययनरत वरिष्ठ सैन्य एवं सिविल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। दल 15 से 21 मार्च तक मध्यप्रदेश के अध्ययन भ्रमण आया है। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।
राज्यपाल ने कहा कि भ्रमण नये अनुभवों, सामाजिक विशिष्टताओं, आध्यात्मिक आस्था और विकास के विभिन्न आयामों को देखने और उनसे प्रेरणा प्राप्त करने का सुअवसर होता है। विगत दिनों बौद्ध अवशेषों को कोलंबो, श्रीलंका से वापस भारत लाने की उनकी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीलंका में 7 दिवस की अवधि के लिए प्रदर्शित पवित्र अवशेषों का 14 लाख लोगों ने दर्शन किया। प्रदर्शन के आखिरी दिन सारी रात लाखोंश्रद्धालुओं ने लाइन लगाकर दर्शन किए। आस्था के प्रति समर्पण और आध्यात्मिकता का उनके लिए यह अद्भुत अनुभव रहा है।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भारत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक क्षेत्रों में आई क्रांतिकारी प्रगति, वास्तव में 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के विराट स्वरूप को समझने का सुअवसर है। जरूरी है कि आप प्रशासनिक ढांचे, विकास योजनाओं तथा सामाजिक-आर्थिक प्रगति के विभिन्न आयामों को नजदीक से देखे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, की महत्ता का अनुभव करें।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य की धरती आदिम सभ्यता, प्राचीन भारत की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत स्वरूप है।यहां कि विश्व धरोहर सांची स्तूप, भीमबेटका और खजुराहों, उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसे पवित्र स्थल हमारे गौरवशाली इतिहास के साक्षी है। भ्रमण अवसर पर ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन, पर्यटन संवर्धन तथा औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के मॉडल में जन सहभागिता की भूमिका और महत्व को भी जानने का प्रयास करें। उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में बड़े आयोजनों में प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और औद्योगिक विकास के मॉडल का गहन अध्ययन जरूर करें।कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल को प्रशासन अकादमी और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। राज्यपाल ने भ्रमण दल के प्रमुख मेजर जनरल पवन पाल सिंह को गोंड कला की पेटिंग भेंट की।
आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालक श्री मुजीबुर्रहमान खान ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में 47 सप्ताह के पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारियों में से 16 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल प्रदेश प्रवास पर आया है।उन्होंने बताया कि अध्ययन दल प्रदेश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा। उनको राज्य के आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, स्थलों औद्योगिक प्रगति, विभिन्न नवाचारों और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं से रू-ब-रू कराया जाएगा।
दूरसंचार विभाग की “समृद्ध ग्राम फिजिटल सेवाएं पायलट पहल” का हिस्सा ‘समृद्धि केंद्र’
भोपाल। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने दूरसंचार विभाग की “समृद्ध ग्राम फिजिटल सेवाएं” पायलट पहल के अंतर्गत मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में एकीकृत फिजिटल (भौतिक + डिजिटल) सेवा केंद्र समृद्धि केंद्र का उद्घाटन किया। यह पहल भारतनेट के तहत निर्मित उच्च गति ब्रॉडबैंड अवसंरचना का उपयोग करते हुए डिजिटल कनेक्टिविटी को ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक-केंद्रित सेवाओं की एकीकृत आपूर्ति के मंच में परिवर्तित करने का प्रयास करती है।
समृद्धि केंद्र की परिकल्पना एक सिंगल-विंडो ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में की गई है, जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि, वित्तीय सेवाएं, ई-गवर्नेंस सहायता, उद्यमिता प्रोत्साहन तथा डिजिटल कनेक्टिविटी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इस अवसर पर सिंधिया ने कहा, “गुना के उमरी में समृद्ध ग्राम पहल के शुभारंभ के साथ हम दुनिया को उमरी तक ला रहे हैं। शिक्षा और कृषि से लेकर स्वास्थ्य तथा सरकारी सेवाओं तक, प्रौद्योगिकी हमारे नागरिकों के हाथों में नए अवसर सीधे पहुंचा रही है।”
पहल के लाभों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किसानों को मिट्टी की नमी, पोषक तत्वों तथा फसल के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्राप्त होगी, जिससे कृषि अधिक स्मार्ट और उत्पादक बनेगी। छात्रों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों तक पहुंच मिलेगी। उमरी के नागरिकों को यहीं पर जांच सुविधाएं तथा दिल्ली और अन्य राज्यों के चिकित्सकों से टेली-परामर्श के माध्यम से त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। रक्त परीक्षण रिपोर्ट 30 मिनट से भी कम समय में प्राप्त की जा सकेगी। प्रमाणपत्रों से लेकर ई-बैंकिंग तक आवश्यक सरकारी सेवाएं अब समृद्ध ग्राम के भीतर ही उपलब्ध होंगी। यह वास्तव में ‘भविष्य का कार्यक्रम’ है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास की गति हर गांव और हर नागरिक तक पहुंचे।”
मंत्री सिंधिया ने कहा कि भारतनेट के माध्यम से देश में विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड अवसंरचनाओं में से एक का निर्माण हुआ है। भारत के डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण में इस कनेक्टिविटी का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि गांवों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके। मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एकीकृत फिजिटल सेवा केंद्र ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्तीय तथा ई-गवर्नेंस सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना को साकार करने में सहायक होगा। उन्होंने आगे कहा कि समृद्ध ग्राम पहल केवल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने तक सीमित न रहकर, ग्रामीण भारत में एकीकृत डिजिटल सेवा वितरण तंत्र विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।
भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी माल्टा के पहुंचा वैलेटा
नईदिल्ली। भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 12 मार्च 2026 को माल्टा के ऐतिहासिक बंदरगाह वैलेटा पहुंचा। यह उसके ऐतिहासिक समुद्री अभियान लोकायान-26 में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह यात्रा भारत और माल्टा के बीच गहरे समुद्री संबंधों को दर्शाती है और पोत की महत्वाकांक्षी 22,000 समुद्री मील की वैश्विक यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण है। वैलेटा पहुंचने से पहले पोत ने स्वेज नहर को सफलतापूर्वक पार किया और हाल ही में अलेक्जेंड्रिया में भी रुका था।
आगमन पर, कमांडिंग ऑफिसर ने माल्टा गणराज्य में भारत की उच्चायुक्त सुश्री रचिता भंडारी से भेंट की। इस भेंट में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय नौसेना की भूमिका पर चर्चा की गई। उच्चायुक्त ने कहा कि माल्टा में आईएनएस सुदर्शिनी की उपस्थिति महासागर परियोजना की परिकल्पना का एक सशक्त प्रतीक है। यह समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने के साथ-साथ जन-जन संबंधों को भी बढ़ावा देती है।
इस यात्रा के दौरान, पोत के चालक दल माल्टा के सशस्त्र बलों के साथ पेशेवर बातचीत और शिष्टाचार भेंट करेंगे। इससे आपसी विश्वास और सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा। पोत पर सामुदायिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें माल्टा में रहने वाले स्कूली बच्चों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के लिए निर्देशित "ओपन शिप" कार्यक्रम शामिल है।
आईएनएस सुदर्शिनी वर्तमान में अपनी यात्रा के दूसरे महीने में है। यह यात्रा 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से शुरू हुई थी। माल्टा की यात्रा के बाद, जहाज एस्केल आ सेट समुद्री उत्सव में भाग लेने के लिए फ्रांसीसी तट की ओर रवाना होगा, जहां वह दुनिया के कुछ सबसे प्रसिद्ध विशाल जहाजों के साथ भारत का गौरवपूर्वक प्रतिनिधित्व करेगी।
डबल इंजन की सरकार में बहनों को मिल रही हैं डबल खुशियां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की बहनें आत्मनिर्भरता एवं स्वावलम्बन के मामले में पूरे देश के लिए उदाहरण बन रही हैं। प्रदेश के 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से जुड़कर करीब 65 लाख बहनें आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। आज प्रदेश में 12 लाख से अधिक लखपति दीदियां कार्यरत हैं। हम महिला उद्यमियों को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। हमारी बहनें अब फैक्ट्रियों और उद्योगों का नेतृत्व कर रही हैं। प्रदेश के 47 प्रतिशत नए स्टार्ट-अप का नेतृत्व अब हमारी बहनों के हाथों में है। हम सभी बहनों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए मिशन मोड में कार्य करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, इसलिए यहां की बहनों को लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहना योजना के रूप में डबल खुशियां मिल रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को ग्वालियर जिले के शबरी माता मंदिर परिसर, घाटीगांव में आयोजित राज्य स्तरीय महिला सम्मेलन में लाड़ली बहनों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत प्रत्येक कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें प्रदेश की बहन-बेटियां भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नवरात्रि से पहले आज बहनों को 1500 रुपए की सौगात मिल रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाड़ली बहना योजना में बहनों को योजना की 34वीं किश्त प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 27 हजार से अधिक बहनों के खाते में 1 हजार 836 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इनमें ग्वालियर जिले की 3 लाख 16 हजार से अधिक लाड़ली बहनें भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश की हर लाड़ली बहनों के खाते में हर महीने 1500 रुपये भेजे जा रहे हैं। लाड़ली बहन योजना में अब तक 52 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि बहनों को दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी लाड़ली बहनों से अपील करते हुए कहा कि वे हर महीने मिलने वाली इस राशि से अपनी बेहतरी के लिए कोई भी रुचिकर काम-धंधा शुरु करें और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण में योगदान दें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर जिले को 121 करोड़ 95 लाख रुपये की लागत वाले 54 विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने सिंगल क्लिक से लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत के 35 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लगभग 62 करोड़ रुपये की लागत वाले 19 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इसमें 39 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से कुलैथ घाटीगांव में शासकीय सांदीपनि विद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी शामिल है।
जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय की परामर्श समिति की बैठक का आयोजन
देलही : केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय से संबद्ध सांसदों की परामर्श समिति की बैठक गुरुवार को आयोजित की गई। कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, समिति के सदस्य, कोयला मंत्रालय और कोयला कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
इस बैठक में कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने 'कोयला कंपनियों में प्रौद्योगिकी उन्नयन' पर प्रमुख नीतिगत पहलों, प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने सभी गणमान्य व्यक्तियों और समिति के सदस्यों का स्वागत किया। दत्त ने बताया कि वर्तमान में देश में कोयले की अभूतपूर्व मांग नहीं है।
कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोल इंडिया खनन, अनुसंधान और विकास तथा कोयला गैसीकरण के क्षेत्रों में काम कर रही है।
जी किशन रेड्डी ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में प्रौद्योगिकी उन्नयन केवल एक अवसर नहीं बल्कि एक स्थायी लक्ष्य बन गया है। उन्होंने कहा कि सरकार उत्पादन, सुरक्षा, दक्षता और पर्यावरण संबंधी उत्तरदायित्व सहित कोयला क्षेत्र के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है। जी किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोयला क्षेत्र में क्रांतिकारी तकनीकी परिवर्तन हो रहा है। सर्वेक्षण में ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग, 3डी लेजर स्कैनिंग, एआई और मशीन लर्निंग आधारित भविष्यसूचक विश्लेषण यह क्षेत्र पारंपरिक खनन से स्मार्ट, सुरक्षित और डिजिटल खनन की ओर अग्रसर हो रहा है।
केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय की परामर्श समिति की हुई बैठक
रायपुर। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय से संबद्ध सांसदों की परामर्श समिति की बैठक गुरुवार को आयोजित की गई। कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, समिति के सदस्य, कोयला मंत्रालय और कोयला कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। इस बैठक में कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने 'कोयला कंपनियों में प्रौद्योगिकी उन्नयन' पर प्रमुख नीतिगत पहलों, प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने सभी गणमान्य व्यक्तियों और समिति के सदस्यों का स्वागत किया। श्री दत्त ने बताया कि वर्तमान में देश में कोयले की अभूतपूर्व मांग नहीं है। कोयला और खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोल इंडिया खनन, अनुसंधान और विकास तथा कोयला गैसीकरण के क्षेत्रों में काम कर रही है।
श्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में प्रौद्योगिकी उन्नयन केवल एक अवसर नहीं बल्कि एक स्थायी लक्ष्य बन गया है। उन्होंने कहा कि सरकार उत्पादन, सुरक्षा, दक्षता और पर्यावरण संबंधी उत्तरदायित्व सहित कोयला क्षेत्र के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है। श्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोयला क्षेत्र में क्रांतिकारी तकनीकी परिवर्तन हो रहा है। सर्वेक्षण में ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग, 3डी लेजर स्कैनिंग, एआई और मशीन लर्निंग आधारित भविष्यसूचक विश्लेषण यह क्षेत्र पारंपरिक खनन से स्मार्ट, सुरक्षित और डिजिटल खनन की ओर अग्रसर हो रहा है।
श्री जी किशन रेड्डी ने समिति को कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज, बायोमास कोफायरिंग और कोल गैसीफिकेशन जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए मंत्रालय के प्रयासों से अवगत कराया। उन्होने कहा कि निरंतर नवाचार और प्रौद्योगिकी का एकीकरण ही कोयला क्षेत्र का भविष्य है। कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष श्री बी. साईराम ने बताया कि सीआईएल अपने सभी परिचालनों में प्रौद्योगिकी का व्यापक उन्नयन कर रही है। इसमें अन्वेषण के लिए 3डी भूकंपीय सर्वेक्षण और ड्रोन जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग, और दक्षता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए निरंतर खनन मशीनें और हाईवॉल प्रणाली जैसे आधुनिक उपकरण शामिल हैं। कंपनी कोयला परिवहन को बेहतर बनाने और इसके पर्यावरण पर प्रभाव को कम करने के लिए नए रेलवे कॉरिडोर और कन्वेयर सिस्टम के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में भी सुधार कर रही है। एसएपी ईआरपी और 5जी-सक्षम आईओटी सिस्टम जैसी पहलों के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन को गति दी जा रही है। सीआईएल शीर्ष भारतीय संस्थानों के साथ अनुसंधान और सहयोग के माध्यम से स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों और सतत खनन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
बैठक में बताया गया कि नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन ने प्रौद्योगिकी उन्नयन और व्यापक डिजिटलीकरण पहलों के माध्यम से अपने संचालन में उल्लेखनीय प्रगति की है। सभी नेवेली परिसरों और बाहरी परियोजनाओं में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए डैशबोर्ड और कोयले की आपूर्ति की निगरानी और प्रबंधन के लिए डिजिटल लॉजिस्टिक प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है। इन पहलों में ओआईटीडीएस और जियो-फेंसिंग तकनीक के माध्यम से निगरानी और खानों के कुशल सर्वेक्षण के लिए स्थलीय 3डी लेजर स्कैनर और ड्रोन का उपयोग शामिल है। एनएलसी ने चोरी और दुरुपयोग को रोकने के लिए एक ईंधन प्रबंधन प्रणाली भी लागू की है।
बैठक में समिति को जानकारी दी गई कि सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के तकनीकी उन्नयन तथा प्रमुख परिचालन सुधारों में एकीकृत नियंत्रण एवं कमांड सेंटर, 3डी लेजर स्कैनिंग, डीजीपीएस और ड्रोन आधारित जीआईएस सर्वेक्षण शामिल हैं। इंटेलिजेंट कोल लॉजिस्टिक्स डैशबोर्ड, विजुअल मॉनिटरिंग सिस्टम और 410 से अधिक डंपरों में सुरक्षा उपकरणों के माध्यम से लॉजिस्टिक्स में सुधार किया जा रहा है। समिति के सदस्यों को कोयला खान भविष्य निधि संगठन की तकनीकी पहलों के बारे में भी जानकारी दी गई। समिति के सदस्यों ने मंत्रालय के सक्रिय प्रयासों की सराहना की और प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से कोयला कंपनियों में उत्पादन के इष्टतम तरीके अपनाने के सुझाव दिए।
राष्ट्रीय कैडेट कोर के दो दिवसीय एडीजी, डीडीजी सम्मेलन का नई दिल्ली में शुभारंभ
नईदिल्ली। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के अपर महानिदेशकों (एडीजी) और उप महानिदेशकों (डीडीजी) का दो दिवसीय सम्मेलन 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में प्रारंभ हुआ। सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में रक्षा सचिव ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) को रूपांतरित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देशभर में संचालित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों और जनहितकारी पहलों में एनसीसी के महत्वपूर्ण योगदान की भी सराहना की।
रक्षा सचिव ने सभी राष्ट्रीय कैडेट कोर निदेशालयों के एडीजी और डीडीजी के साथ बातचीत के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों के अनुरूप समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास राष्ट्रीय कैडेट कोर के लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति को अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के महानिदेशक वीरेंद्र वत्स ने एनसीसी के विस्तार तथा बुनियादी ढांचे और रसद सहायता को सुदृढ़ बनाने के लिए पिछले वर्ष शुरू की गई विभिन्न गतिविधियों का उल्लेख किया। सम्मेलन में प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास तथा ड्रोन और साइबर प्रशिक्षण जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा की गई।
यह सम्मेलन एनसीसी के वरिष्ठ नेतृत्व के लिए प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर विचार-विमर्श करने, सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने व आने वाले वर्षों में संगठन एवं उसके प्रशिक्षण ढांचे को पहले से अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।