दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों में दासबोध चक्र परायण 25 जुलाई आषाढी एकादशी से

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति द्वारा 25 जुलाई यानी आषाढी एकादशी से आनलाइन मोड पर दासबोध चक्र पारायण उपासना की जाएगी। समर्थ रामदास स्वामी के विचारों को आत्मसात करने के लिए श्रीमत् दासबोध का वाचन एवं पारायण चैतन्य ज्ञानपीठ की ओर से प्रत्येक वर्ष चातुर्मास में आयोजित किया जाता है। समर्थ विचारों का मनन, चिंतन और आचरण कर समर्थ मार्ग पर आगे बढ़ने के उद्देश्य से यह उपक्रम किया जाता है।

महाराष्ट्र मंडल की कार्यकारिणी आस्था काले ने बताया कि चैतन्य ज्ञानपीठ की ओर से इस वर्ष पारायण का प्रारंभ शनिवार, 25 जुलाई 2026 को आषाढ़ी एकादशी के दिन किया जाएगा। इस दिन 20 साधकों के समूह में पहले साधक द्वारा प्रथम दशक, दूसरे साधक द्वारा द्वितीय दशक, इसी प्रकार बीसवें साधक द्वारा बीसवें दशक का पाठ किया जाएगा।

प्रथम दशक का पाठ करने वाले साधक को पहले मंगलाचरण करना है, उसके बाद मन के श्लोक क्रमांक 1 से 13 तक पढ़ने हैं। तत्पश्चात साथ में दिए गए नित्य के तीन श्लोक पढ़कर दशक पूर्ण होने पर नीचे दी गई प्रार्थना करनी है।

दूसरे दशक का पाठ करने वाले साधक को पहले मन का प्रथम श्लोक, उसके बाद 14 से 25 तक के मन के श्लोक पढ़ने हैं। फिर नित्य के तीन श्लोक पढ़कर प्रार्थना करनी है। इसी प्रकार तीसरे, चौथे… सत्रहवें दशक तक क्रमशः मन के श्लोक 26 से 37, 38 से 49… 194 से 205 तक पढ़े जाएँगे। इसके बाद नित्य के तीन श्लोक तथा अंत में प्रार्थना करनी है।  18वें, 19वें और 20वें दशक का पाठ करने वालों को मन के श्लोक पढ़ने की आवश्यकता नहीं है।

प्रत्येक सप्ताह बीसवें दशक का पाठ करने वाले साधक को पाठ पूर्ण होने के बाद नैवेद्य अर्पित करना, मंगल आरती करना तथा अंत में प्रार्थना करनी है। शनिवार, 5 दिसंबर को दासबोध का संपूर्ण वाचन पूर्ण होगा। इसके बाद शनिवार, 12 दिसंबर तथा रविवार, 20 दिसंबर को आत्माराम ग्रंथ के क्रमशः पहले तीन तथा बाद के दो समासों का पाठ करके पारायण की समाप्ति करनी है।

इस वर्ष मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती) रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है। इसलिए उसी दिन आत्माराम ग्रंथ के अंतिम दो समासों का पाठ कर पारायण का समापन किया जाएगा। अधिकाधिक साधक इस समापन अवसर पर जांब समर्थ में उपस्थित होकर सहभागिता करें, यह विनम्र अनुरोध है।