दिव्य महाराष्ट्र मंडल

सुधाकर कोंडापुरकर: एक सैद्धांतिक प्रेरणादायी व्यक्तित्व

 (अजय मधुकर काले)

इच्छाशक्ति हो तो सामाजिक कार्य करने की कोई उम्र नहीं होती और व्यक्ति को भी स्‍वयं की उम्र का पता नहीं चलता। ये बात शत- प्रतिशत सही बैठती है सुधाकर माधव कोंडापुरकर के व्यक्तित्व पर। ईमानदारी, जुनून, अनुशासन, नियमों के अंतर्गत कार्य करना... चाहे पारिवारिक कार्य हो, शासकीय कार्य हो, धार्मिक कार्य हो, सामाजिक कार्य हो, व्यावसायिक सहकारी बैंक के काम हो, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य हो, सेवा भारती के कार्य हो, महाराष्ट्र मंडल के कार्य हो या मातृछाया संस्था के कार्य हो, वरिष्ठजनों की संस्था के कार्य हो, सभी कार्यस्‍थल उनके सिद्धांत व नियम स्‍वमेव लागू हो जाते थे। आप पाएंगे कि कोंडापुरकर की ओर से संस्थाओं के सटीक संचालन में उनके सिद्धांत व नियम के साथ उनका मृदभाषाी व्‍यवहार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। 
साल 1989 में जब मैं महाराष्ट्र मंडल की कार्यकारिणी में आया, तो उस समय मेरा सुधाकर कोंडपुरकर से परिचय हुआ था। कोंडापुरकर जब साल 1991 में महाराष्ट्र मंडल में ट्रस्टी बने, तो कार्यों, कार्यक्रम के माध्यम से परिचय घनिष्ठ संबंध में परिवर्तित हो गया। फिर हमारी प्लानिंग मंडल के कार्यों को लेकर चलने लगी। मेरे साथ यशवंत गोविंद जोगलेकर सर का सामाजिक कार्यों के संबंध में मार्गदर्शन था। साथ में मंडल के वरिष्ठ सभासद कोंडापुरकर सर का मार्गदर्शन मिलने लगा। इधर महाराष्ट्र मंडल सन् 1944 के पुराने संविधान में संशोधन से लेकर नए कार्यों की और अग्रसर होने लगा। उनका गुरुवार, 24 सितंबर को 94 वर्ष की उम्र में निधन पश्चात देहदान के रूप में एक और सेवा का संकल्प ‘जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’ सिद्ध हो गया। सुधाकर राव कोंडापुरकर आज इस दुनिया से अलविदा होते- होते भी हमें एक सीख दे गए कि ‘समाज... राष्ट्र का चिंतन करते रहना हमारी जिंदगी का बहुत बड़ा उद्देश होना चाहिए। 
एक महत्‍वपूर्ण बात सुधाकर कोंडापुरकर की, कि कभी भी कोई बात आपसे किसी अन्य के विषय में करें तो 50% डिस्काउंट दीजिए। फिर ये विचार कीजिए कि आपको यह बात जो बता रहे हैं, उन्‍हें क्या फायदा है, आपको क्या फायदा है, आपके निर्णय से आगे की क्या संभावना है। क्या ये बात, जो उन्‍होंने बताईं हैं, वो सही है या बढ़ा- चढ़ाकर बताई जा रही है। यदि आप नेतृत्व कर रहे हैं, तो संस्था को क्या फायदा होगा, समाज, राष्ट्र हित में उनकी बात का क्या प्रभाव होगा, बस ये विचार कर लीजिए। जिंदगी के उद्देश्य पूरे होने लगेंगे।  
 
आदरांजलि‍ आदरणीय सुधाकर कोंडापुरकर सर को.... 
 
लेखक महाराष्‍ट्र मंडल रायपुर के अध्यक्ष हैं।