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संघ के 100 साल, गांधी की हत्या के बाद शाखाओं में 13 दिन तक मनाया गया शोक

डेस्क। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। 30 जनवरी 1948 को जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी थी तब गुरु गोलवलकर जी चेन्नई में थे। उन्हें जैसे ही यह खबर मिली तो वे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को टेलीग्राम पर शोक संदेश भेजा। साथ ही गोलवलकर ने देशभर की शाखाओं के लिए एक निर्देश भी जारी किया…”आदरणीय महात्माजी के दुखद निधन पर अपनी संवेदनाएं प्रकट करने के लिए शाखाओं में 13 दिन का शोक रहेगा और सभी दैनिक कार्यक्रम स्थगित रहेंगे।हालांकि 2 फरवरी 1948 को गुरु जी की गिरफ्तारी हुई और फिर RSS पर बैन लगा दिया गया। तब एक बार फिर गिरफ्तारी के बाद गोलवलकर ने स्वयंसेवकों के नाम एक संदेश जारी किया- संदेह के बादल छंट जाएंगे और हम बिल्कुल बेदाग बाहर निकलेंगे।

6 महीने की वैधानिक सीमा समाप्त होने के बाद गोलवलकर को रिहा किया गया और 11 जुलाई 1949 को RSS से भी प्रतिबंध हटा लिया गया। प्रतिबंध हटने के बाद गोलवलकर ने RSS के लिए एक नई रणनीति तैयार की। उन्होंने संघ के प्रसार के लिए अलग-अलग सहयोगी संगठन बनाने का फैसला किया। 27 सितंबर 1925, उस दिन विजयादशमी थी। हेडगेवार ने पांच लोगों के साथ अपने घर में एक बैठक बुलाई और कहा- आज से हम संघ शुरू कर रहे हैं।

संघ की जानने लायक बातें

-जुलाई 1948 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बना। ये संघ का स्टूडेंट विंग है।
-1952 में वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की गई।
-1952 में गोरखपुर में पहले सरस्वती शिशुमंदिर की स्थापना हुई।
-भारतीय जन संघ को RSS ने समर्थन दिया।
-1966 में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना की गई।
-40 से अधिक देशों में इसके करीब एक करोड़ स्वयंसेवक हैं।
-नागपुर में 5 लोगों की एक बैठक से शुरू हुआ संघ, 27 सितंबर 1925, उस दिन विजयादशमी थी।
-आर वैंकटरामा शास्त्री ने 1948 में RSS का संविधान लिखा।
-1928 में संघ ने गुरुदक्षिणा की शुरुआत की। पहली बार 84 रुपए इकट्ठा हुए थे।

 

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