जयपुर| राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में रविवार देर रात लगी भीषण आग ने छह मरीजों की जान ले ली। इस हादसे में मरने वालों में सीकर के पिंटू, जयपुर के दिलीप और बहादुर, भरतपुर के श्रीनाथ, रुक्मिणी और कुसुमा शामिल हैं। मृतकों के परिजनों ने अस्पताल कर्मचारियों पर लापरवाही और उदासीनता का गंभीर आरोप लगाया है।
टोंक रोड पर स्थित ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के स्टोर रूम में संदिग्ध शॉर्ट सर्किट से आग भड़की। देखते ही देखते धुआं और जहरीली गैस ने पूरे वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया। उस समय आईसीयू में 11 मरीज भर्ती थे, जिनमें से पांच को बचा लिया गया, लेकिन छह मरीज दम घुटने और जलने से जान गंवा बैठे। बगल के एक अन्य आईसीयू में भर्ती 14 मरीजों को सुरक्षित निकालकर दूसरे वार्ड में स्थानांतरित किया गया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि आग की शुरुआती चेतावनियों को कर्मचारियों ने नजरअंदाज किया और हालात बिगड़ते ही वे मौके से भाग गए। पिंटू के चचेरे भाई ओमप्रकाश ने बताया, “हमने धुआं देखकर तुरंत कर्मचारियों को सूचित किया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। 20 मिनट में आग ने पूरे वार्ड को लपेट लिया। मरीजों की मदद करने की बजाय कर्मचारी भाग गए।” ओमप्रकाश ने कहा कि उनके भाई को निकालने में डेढ़ घंटे लगे, लेकिन तब तक उनका चेहरा धुएं से काला पड़ चुका था और कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
रुक्मणी के बेटे जोगेंद्र ने दुखी मन से कहा, “मां की हालत सुधर रही थी, लेकिन इस हादसे ने सब खत्म कर दिया। धुआं इतना घना था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मेरे भाई ने टॉर्च लेकर मां को ढूंढा और बाहर निकाला, लेकिन हम उन्हें बचा नहीं सके।” परिजनों ने यह भी शिकायत की कि पुलिस ने उन्हें धक्के मारकर अस्पताल से भगाया और मरीजों की स्थिति की जानकारी तक नहीं दी गई।
ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. अनुराग धाकड़ ने इसे गंभीर आपात स्थिति बताया। उन्होंने कहा, “हमने अपने अग्निशमन उपकरणों का तुरंत इस्तेमाल किया, लेकिन धुआं और जहरीली गैस तेजी से फैल गई। पांच मरीजों को बचाया गया, पर हालात बदतर होने से बाकी को नहीं बचा सके।” एक अन्य वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि चिंगारी भड़कते ही वार्ड धुएं से भर गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने घटनास्थल का दौरा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया। राज्य सरकार ने आग के कारणों और अस्पताल की कार्रवाई की जांच के लिए एक समिति गठित की है। साथ ही, जयपुर पुलिस ने पुलिस, एफएसएल और अग्निशमन विभाग के विशेषज्ञों की एक टीम बनाकर जांच शुरू कर दी है।
हादसे ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की तत्परता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का गुस्सा और दर्द इस त्रासदी की गंभीरता को उजागर करता है, जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग करता है।