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छठ पूजा पर रेलवे की सांस्कृतिक सौगात: स्टेशनों पर गूंजे छठ गीत, यात्रियों का भक्ति भाव से हुआ स्वागत

नई दिल्ली| भारतीय रेलवे ने लोक आस्था के महापर्व छठ पर एक अनोखी पहल करते हुए देशभर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों को भक्ति और संस्कृति की सुगंध से सराबोर कर दिया है। पटना, दानापुर, हाजीपुर, भागलपुर, जमालपुर, सोनपुर, नई दिल्ली, गाज़ियाबाद और आनंद विहार टर्मिनल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर अब छठ गीतों की मधुर धुनें उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों का स्वागत कर रही हैं।

पहली बार स्टेशन उद्घोषणा में छठ गीतों की गूंज
इस वर्ष पहली बार रेलवे ने उद्घोषणा प्रणाली पर पारंपरिक छठ गीतों का प्रसारण शुरू किया है। जैसे ही ट्रेनें प्लेटफॉर्म पर पहुंचती हैं, यात्रियों का स्वागत “कांच ही बांस के बहंगिया” जैसे लोकगीतों से होता है, जिससे माहौल में भक्ति, उल्लास और घर की सोंधी महक घुल जाती है। यह पहल न केवल यात्रियों को त्योहार की भावना से जोड़ती है, बल्कि उन्हें बिहार और पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत अनुभव भी कराती है।

12,000 से अधिक विशेष ट्रेनें, सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम
छठ पूजा के अवसर पर रेलवे ने 12,000 से अधिक विशेष गाड़ियों और हजारों नियमित ट्रेनों के माध्यम से लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की व्यवस्था की है। प्रमुख स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं, जहां यात्री आराम से ट्रेन का इंतजार कर सकते हैं। साथ ही, आरपीएफ की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी से सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

लोकगीतों से सजी छठ की यात्रा
छठ पूजा की पहचान लोकगीतों से जुड़ी है। घाटों की ओर जाती महिलाएं पारंपरिक गीतों के माध्यम से छठी मैया से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। रेलवे की यह पहल उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए यात्रियों को सफर में ही त्योहार का पवित्र अनुभव दे रही है।

संस्कृति से जुड़ने की पहल को यात्रियों ने सराहा
रेलवे की इस सांस्कृतिक पहल को यात्रियों ने खूब सराहा है। कई यात्रियों ने कहा कि स्टेशन पर छठ गीत सुनकर ऐसा लगा जैसे वे अपने गांव के घाट पर पहुंच गए हों। यह पहल न केवल एक यात्रा को यादगार बनाती है, बल्कि लोक आस्था को सम्मान देने का भी प्रतीक है।

छठ पर रेलवे की यह पहल एक मिसाल है—जहां तकनीक, संस्कृति और श्रद्धा का संगम यात्रियों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। 

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