साल का पहला सूर्य ग्रहण गुरुवार सुबह 7.04 बजे शुरू होकर 5 घंटे 24 मिनट बाद यानी 12.29 बजे समाप्त हो गया है। बता दें कि आज वैशाख अमावस्या भी है। सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले ही सूतक काल लग जाता है। साल का पहला सूर्य ग्रहण कंकणाकृति सूर्य ग्रहण था। यह सूर्य ग्रहण बेहद खास था, क्योंकि इस बार एक ही दिन में तीन तरह का सूर्य ग्रहण देखने को मिला। जिसे वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड सूर्य ग्रहण का नाम दिया है। इनमें आंशिक, पूर्ण और कुंडलाकार सूर्य ग्रहण शामिल थे। ज्योतिष में ग्रहण को अशुभ घटनाओं में गिना जाता है। इस वजह से ग्रहण के दौरान शुभ कार्य और पूजा पाठ वर्जित माने जाते हैं। मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य पीड़ित हो जाते हैं, जिस कारण सूर्य की शुभता में कमी आ जाती है।
यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण था, लेकिन भारत में दर्शनीय नहीं था। इस सूर्य ग्रहण में सूर्य, चंद्रमा, राहु और बुध का संयोग भी बना। साथ ही शनि की दृष्टि भी इस ग्रहण पर है। सूर्य और शनि का प्रभाव होने से आने वाले समय में दुर्घटना की संभावना बन रही है। राजनैतिक रूप से उथल पुथल मच सकती है। शेयर बाजार और दुनिया भर की आर्थिक स्थिति हिल सकती है। बीमारियां बढ़ेंगी, हालांकि औषधियों से नियंत्रित कर सकते हैं। मेष और तुला राशि का प्रभाव विश्व भर में युद्ध के संकेत दे रहा है।
इस सूर्यग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सका। यह सूर्य ग्रहण कंबोडिया, चीन, अमेरिका, माइक्रोनेशिया, मलेशिया, फिजी, जापान, समोआ, सोलोमन, बरूनी, सिंगापुर, थाईलैंड, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, ताइवान, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर जैसी जगहों पर ही दिखाई दिया है।
ज्योतिष मतों के मुताबिक इस सूर्यग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव मेष राशि के जातकों पर पड़ेगा। इसके अलावा सिंह, कन्या, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों पर भी इस सूर्य ग्रहण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं साल का पहला सूर्य ग्रहण वृष, मिथुन, धनु और मीन राशि वालों के लिए बेहद शुभ रहेगा।