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Carbon dioxide की सघनता से बढ़ रहे हारमोन, चयापयन और बिगड़ रहा भावनात्मक संतुलन

नईदिल्ली।  सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक प्रो. रंजना अग्रवाल ने कहा है कि कार्बन डाइऑक्साइड की सघनता में वृद्धि ने हमारे हारमोन, चयापचय तथा समग्र भावनात्मक संतुलन को प्रभावित किया है और इसीलिए आज के समय में तनाव, अवसाद, चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य की स्थितियां बहुत सामान्य हैं। 
निदेशक प्रो. रंजना अग्रवाल ने कहा कि अपने परिवार तथा मित्रों के मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का समाधान करना समय की आवश्यकता है। सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च (एनआईएससीपीआर) द्वारा भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (आईडब्ल्यूएसए) के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य तथा वेलबिंग पर आयोजित आधे दिन के शिविर के उद्घाटन सत्र के दौरान अपना विचार व्यक्त कर रही थीं।
प्रो. अग्रवाल ने कहा कि हम सामान्य रूप से अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर चर्चा करते हैं, लेकिन सामाजिक कलंक हमें मानसिक स्वास्थ्य की बात करने से रोकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी से हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। मानव विकास, भावनाओं तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों के साथ इसके संबंधों के बारे में उन्होंने कहा कि पिछली लगभग दो शताब्दियों के दौरान हमने धरती माता पर कार्बन डाइऑक्साइड की सघनता की क्रमिक वृद्धि देखी है।
 
सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला की मुख्य वैज्ञानिक और आईडब्ल्यूएसए की अध्यक्ष डॉ. रीना शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थीं। उन्होंने आईडब्ल्यूएसए के उद्देश्यों की चर्चा की और बताया कि यह संगठन किस तरह विज्ञान को समाज में ले जाता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान के अनुसंधान अधिकारी डॉ. अमित मदान ने “एक संतुलित जीवन शैली तथा मानसिक स्वास्थ्य” पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने शारीरिक और मानसिक वेलबिंग के बीच प्राकृतिक संबंध को बताया। 
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य शिविर की समन्वयक डॉ. कणिका मलिक ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम के बाद एक स्वास्थ्य जांच सत्र भी आयोजित किया गया जहां सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के कर्मचारियों ने डॉक्टरों से मिलकर स्वास्थ्य समस्याओं को साझा किया और परामर्श किया।
 
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