दिव्य महाराष्ट्र मंडल
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मनाया गया शाला प्रवेशोत्सव
रायपुर। महाराष्ट्र मंडळ द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर स्कूल में सोमवार, 16 जून को शाला प्रवेशोत्सव मनाया गया। शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए शाला के प्रथम दिन बच्चों का तिलक लगाकर फूलों की वर्षा कर स्वागत किया गया। गर्मी की छुट्टी के बाद स्कूल लौटे बच्चे काफी खुश थे।
स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि शाला प्रवेशोत्सव को लेकर बच्चों के साथ शिक्षकों में भी उत्साह था। बच्चों को स्कूल के माहौल में ढालने के लिए आज पहले दिन बच्चों को एक्टिविटी कराई गई। नर्सरी में आए बच्चों का आज स्कूल में पहला दिन था, इसलिए शुरू में बच्चे थोड़ा रोए फिर अन्य बच्चों और शिक्षिकाओं के साथ घुल मिल गए।
हिंदी की स्वदेशी पत्रकारिता पर एक दिवसीय संगोष्ठी 19 जून को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर, छत्तीसगढ़ मित्र एवं छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान की ओर से पं माधवराव सप्रे जयंती समारोह के उपलक्ष्य पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में गुरूवार 19 जून को शाम चार बजे किया जा रहा है। संगोष्ठी का विषय हिंदी की स्वदेशी पत्रकारिता है।
महाराष्ट्र मंडल की साहित्य एवं भाषा प्रचार समिति प्रभारी सुश्री कुमुद लाड ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी रायपुर के अध्यक्ष शशांक शर्मा होंगे। अध्यक्षता वरिष्ठ भाषाविद् डा. चितरंजन कर करेंगे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रुप में वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज और महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले उपस्थित रहेंगे।
कुमुद लाड ने आगे बताया कि इस अवसर इंदौर से प्रकाशित वीणा के संपादक राकेश शर्मा को छत्तीसगढ़ मित्र पं. माधवराव सप्रे साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से नवाजा जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ मित्र के जून अंक को विमोचन भी होगा। इसके साथ डा. सीमा अवस्थी और डा. सीमा निगम द्वारा लिखित आपरेशन सिंदूर, डा. सुरेंद्र कुमार तिवारी द्वारा लिखित KABUI GRAMMAR AND VOCABULARY, डा ऋचा यादव द्वारा लिखित पर्यावरणीय मुद्दे और सामाजिक परिपेक्ष्य और दीप्ती श्रीवास्तव द्वारा लिखित मां उदास क्यूं है का विमोचन भी किया जाएगा।
पं. माधव राव सप्रे शोध केंद्र के सचिव डा, सुधीर शर्मा और छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान के कोषाध्यक्ष डा. सुरेश शुक्ला ने बताया कि इस अवसर पर मराठी और हिंदी लेखक प्रो. आरडी हेलोडे, प्रो. अनिल काळेले, भाउराम ढोमने, शशि वरवंडकर रायपुर से और अनिता करडेकर व त्र्यंबक राव साटकर भिलाई का सम्मान किया जाएगा।
आज भी प्रासंगिक हैं समर्थ रामदास स्वामी की ‘दासबोध’

महिलाओं ने रामरक्षा और हनुमान चालीसा पाठ के साथ किया अथर्वशीर्ष का पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से प्रति शनिवार होने वाला राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा पाठ अभियान इस शनिवार 14 जून को संकष्टी चतुर्थी पर भी जारी रहा। मंडल के चौबेकालोनी, रोहिणीपुरम, सरोना, देवेंद्रनगर, टाटीबंध और कोटा केंद्र में महिलाओं ने रामरक्षा और हनुमान चालीसा पाठ के साथ अथर्वशीर्ष का पाठ किया।

आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि चौबे कालोनी महिला केंद्र की टीम ने केंद्र की सदस्या श्रुति बर्वे के घर राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। चौबे कालोनी केंद्र की महिलाओं द्वारा गत 40 सालों से हर महीने संकष्टी चतुर्थी पर अथर्वशीर्ष का पाठ किया जा रहा है। चतुर्थी शनिवार को होने के कारण महिलाओं ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। इस दौरान श्रुति बर्वे, मनीषा वरवंडकर, अक्षता पंडित, प्राची डोंनगावकर, अपर्णा कालेले, सुषमा आप्टे, शीतल आर्विकर, अवंती अग्निहोत्री, कीर्ति हिशिकर, आरती करांडे, गौरी क्षीरसागर, पुष्पा गोवर्धन, मालविका राजिमवाले और सुनीति परांजपे उपस्थित रही।

आस्था काले ने आगे बताया कि इसी तरह देवेंद्र नगर महिला केंद्र द्वारा हुए पाट के दौरान सविता भागड़ीकर, स्नेहलता दुबे, साक्षी टोले, शताब्दी पांडेय और माधवी पांडे उपस्थित रहीं। टाटीबंध केंद्र में शिल्पा भोपापुरकर, लीना साठे, मंजू मरकले, विनोद गोवर्धन, विद्या डेंगे, मोहन परमानंद उपस्थित रहे। सरोना केंद्र की महिलाओं ने सहसंयोजिका विभा पांडे के निवास पर गणपति अथर्वशीर्ष एवं हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान विभा पांडे, डॉ अलका गोळे, जयश्री ढेकणे, दीप्ती शिलेदार, आरती ठोंबरे उपस्थित रही।

आस्था काले ने आगे बताया कि रोहिणीपुरम महिला केंद्र की महिलाओं ने रोहिणीपुरम स्थित गौरीशंकर मंदिर में रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा पाठ के साथ अथर्वशीर्ष का पाठ किया। इसके साथ गणपति, शिव और हनुमान जी के भजन का गायन भी महिलाओं ने किया। इस दौरान श्यामल जोशी, राजेश्री वैद्य, अनुभा साड़ेगांवकर, रचना ठेंगड़ी, अल्का कुलकर्णी, चित्रा बल्की, मीना विभुते, साधना बहिरट और श्रीदेवी उपस्थित रहीं।

काले ने आगे बताया कि कोटा केंद्र की महिलाओं ने प्रीति यादव (मलेवार) के निवास में रामरक्षा और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान मोहिनी भिड़े, शुभांगी शेडें, कुसुम मलेवार, वैजयंती शेडें, शुदक्षणा शेडें, जया देशमुख, माधुरी इंगोले, विदुला चिखलीकर, वंदना कालमेघ, गौरी शेडें, श्वेता खरे, पूर्वा खरे, वर्षा चोपकर, साक्षी परमानंद, वैशाली पुरोहित सम्मिलित रही।
पांच दिवसीय 'टीचर्स डेवलपमेंट वर्कशॉप' के समापन समारोह में पहुंचे मंडल अध्यक्ष काले... बोले- कमजोर बच्चों पर शुरू से हो फोकस


‘अपने मोबाइल पर सेव नंबर को पहले करें फोन, फिर ले सोशल मीडिया का सहारा’
रक्तदाता दिवसः रक्तदाता दिवस पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष ने की लोगों से अपील
रायपुर। आज मेडिकल इमरजेंसी होने पर हर चौथे मरीज को ब्लड की आवश्यकता पड़ ही जाती है। ऐसे में हमारे अपने लोग तत्काल सोशल मीडिया में मैसेज फावर्ड करने लग जाते है। ताकि कोई आए और उनके काम आ सके। 67 बार रक्तदान कर चुके महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि जब भी किसी को रक्त की आवश्यकता हो तो उन्हें पहले अपने मोबाइल पर सेव नंबरों पर काल करना चाहिए। आजकल सभी के मोबाइल में हजार से अधिक लोगों के नंबर सेव होते है, ऐसे में कोई न कोई आपकी मदद के लिए आगे जरूर आएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सिर्फ शादी पार्टी में न्यौता देने के लिए नहीं है। यह आपके अपने लोग है, जो जरूरत पड़ने पर आपके काम आएंगे।
काले ने कहा कि 14 जून को प्रतिवर्ष विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन स्वैच्छिक और अवैतनिक रक्तदाताओं को समर्पित होता है जो अपने रक्तदान के माध्यम से अनगिनत जीवन बचाते हैं। यह न केवल आभार व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि सुरक्षित और नियमित रक्तदान की निरंतर आवश्यकता को उजागर करने का भी समय है। आज की युवा पीढ़ी को रक्तदान के लिए प्रेरित करना जरूरी है। मेडिकल इमरजेंसी होने पर हम तत्काल समाजसेवी संगठनों के वाट्सएप ग्रुप से आस लगा बैठते है, जबकि आप सभी के पास अपने-अपने मोबाइल नंबर पर न जाने कितने रक्तदाताओं के नाम होंगे। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि मेडिकल इमरजेंसी पर रक्त की आवश्यकता होने पर अपने मोबाइल में सेव नंबरों पर पहले काले करें, यह काम एक-दो घंटें में आसानी से हो सकता है। फिर भी आपूर्ति नहीं होती है तो समाजसेवी संगठनों के वाट्सएप ग्रुप में मैसेज शेयर करें।
भीमराव मेडिकल कालेज में पैथोलाजी विभाग के अध्यक्ष और अब तक 43 वर्षों में 126 से अधिक बार रक्तदान कर चुके डा. अरविंद नेरल ने कहा कि सेवा का संकल्प लिया जाए तो उसकी कोई सीमा नहीं होती है। उन्होंने बताया कि नया साल पर, अपने जन्मदिन 2 जून पर और राष्ट्रीय रक्तदान दिवस 1 अक्टूबर को वें नियमित रुप से रक्तदान करते आ रहा है। डा नेरल इस माह जून 2025 65 वर्ष की हो गए। मेडिकली रुप से वे अब रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन लोगों को जागरूक करने के लिए उनका अभियान जारी रहेगा। अब वे रक्तदान को आयोजित कार्यशाला, स्कूल और कालेजों में सेमिनार पर अपनी सहभागिता बढ़ाएंगे ताकि इसके प्रति युवा पीढ़ी का रूझान बढ़ सके।
महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद और 100 बार रक्तदान और 5 बार एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) कर चुके अरविंद जोशी ने कहा कि आज से समय में युवाओं को एसडीपी करना चाहिए। एसडीपी का मतलब सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (Single Donor Platelets) है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक ही रक्तदाता से प्लेटलेट्स को एक विशेष मशीन (एफेरेसिस मशीन) द्वारा अलग करके इकट्ठा किया जाता है, और फिर वह प्लेटलेट्स, बाकी रक्त के साथ, दाता को वापस कर दी जाती है। यह उन रोगियों के लिए उपयोगी है जिन्हें प्लेटलेट्स की आवश्यकता होती है, जैसे कि डेंगू, मलेरिया, या ब्लड कैंसर जैसी बीमारियों में। एसडीपी का उपयोग करने से, संक्रामक रोगों का खतरा कम होता है, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज को एक ही दाता से पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स मिलें, जिससे अन्य दाताओं से प्लेटलेट्स को मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है।
टीचिंग को धारदार बनाने स्वयं का अपडेटशन बेहद जरूरीः नीपा चौहान
संपूर्ण व्यक्ति विकास पर शिक्षकों को ध्यान देना होगा: अर्पिता
संस्कार सीखें ही नहीं, आत्मसात भी करें: काले
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति के ऑनलाइन शिविर की सफलता में जितने बधाई के पात्र शिविरार्थी बच्चे हैं, उससे कहीं ज्यादा उनके अभिभावक प्रशंसा के पात्र हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को एकदम सही उम्र में संस्कार सीखने के लिए प्रेरित किया और उनका प्रतिदिन ऑनलाइन क्लास के समय साथ भी दिया। साथ ही शिविर में बच्चों को विभिन्न विधाओं में पारंगत करने वाली प्रशिक्षिका भी अभिनंदनीय हैं। काले ने कहा कि बच्चों ने शिविर में जो संस्कार सीखें हैं, उसे जीवन में आत्मसात करना है और इसे अपनी दिनचर्या भी बनाना है।
मुख्यमंत्री साय से मुलाकात में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष काले ने रखी मांग... बच्चों को सेल्यूलर जेल की प्रेरक यात्रा कराए सरकार
अनुपयोगी सामग्रियों का रचनात्मक प्रयोग... सजे घर के आंगन
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ योजना अंतर्गत समुदाय प्रबिंधत प्रशिक्षण केंद्र में लाभार्थी महिलाओं को संत ज्ञानेश्वर हायर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षिका अस्मिता कुसरे ने अनुपयोगी सामग्रियों का रचनात्मक प्रयोग पर घर सजाने के टिप्स दिए। अभियान की लाभार्थी महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना था।
प्रशिक्षण के दौरान अस्मिता कुसरे ने प्रतिभागियों को घर में अनुपयोगी पड़ी सामग्रियों का रचनात्मक उपयोग करते हुए सजावटी और दैनिक उपयोग की वस्तुएं तैयार करना सीखाया। खासकर महिलाओं ने आसानी से और खूबसूरती से कारपेट रंगोली, फ्लावर रंगोली बनाना सीखा। उन्हें फूलों की पंखुड़ियों, गुलाल, रंगोली, सुपारी, मास्किटो क्वाइल सहित विभिन्न डिजाइनों और तकनीकों का उपयोग करते हुए रंगोली बनाना सिखाया गया। जो व्यावहारिकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
महाराष्ट्रीयन महिलाओं ने पति के लिए की वट सावित्री की पूजा
रायपुर। राजधानी में मंगलवार को ज्येष्ठ मास के पूर्णिमा के दिन महाराष्ट्रीयन समाज की महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु की कामना की।
इस दौरान शहर के अलग-अलग कॉलोनी-मोहल्ले में बरगद पेड़ की पूजा कर समाज की महिलाओं फेरे लिए। उत्तर भारत के अधिकतर क्षेत्र में ज्येष्ठ मास के अमावस्या के दिन वट सावित्री की पूजा की जाती है। शहर में डीडीनगर, डंगनिया, रोहिणीपुरम, रायपुरा, फाफाडीह, प्रोफेसर कॉलोनी, सुंदर नगर, कुशालपुर समेत शहर के अन्य कॉलोनियों में मराठी समाज की महिलाएं मनाते हुए दिखाई दी।
महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि महाराष्ट्रीयन समाज के लोग हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट सावित्री की पूजा करते हैं। वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के लिए किया जाने वाला एक विशेष व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश सहित महाराष्ट्र में मनाया जाता है।
शिवाजी महाराज के 352वें राज्याभिषेक दिवस पर 365 दीपों से महाआरती
- महाराष्ट्र मंडल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया शिवाजी का दुग्धाभिषेक

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति ने तात्यापार चौक स्थित शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा के समक्ष शिवाजी महाराज का 352वां राज्याभिषेक दिवस उत्साह के साथ मनाया। सोमवार शाम 6.30 बजे आचार्य चेतन दंडवते और तात्यापारा हनुमान मंदिर के पुजारी संदीप देशपांडे ने मंत्रोच्चार के साथ शिवाजी महाराज का दुग्धाभिषेक कराया। जिसके उपरांत शिवाजी की प्रतिमा में माल्यार्पण कर 365 दीपों से महाआरती की गई। इस दौरान शिवाजी के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा, विशेष अतिथि के रुप में तात्यापारा वार्ड पार्षद श्वेता विश्वकर्मा, कुनबी समाज के प्रदेश संरक्षण एसएस ब्राह्मणकर उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने कहा कि हम आज तक शिवाजी महाराज की जयंती मनाते आ रहे थे। महाराष्ट्र मंडल ने हमें बता दिया है, राज्याभिषेक दिवस जैसी भी कोई चीज होती है। इस आयोजन के माध्यम से हमें शिवाजी महाराज के बारे में जानने का मौका मिलता है। शिवाजी महाराज एक ऐसे साहसी और संकल्पित योद्धा थे, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में ‘हिंद स्वराज्य’ के संस्थापक के रूप में कई ऐतिहासिक कार्य किए। 6 जून, 1674 को अपूर्व भव्यता के साथ वह छत्रपति, ‘सर्वोच्च संप्रभु’ के रूप में सिंहासन पर बैठे। छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिससे इस संप्रभु और शक्तिशाली हिंदू साम्राज्य की नींव पड़ी।

कार्यक्रम की विशेष अतिथि तात्यापारा वार्ड की पार्षद श्वेता विश्वकर्मा कहा कि मराठी समाज, तात्यापारा चौक और यहां स्थापित वीर शिवाजी प्रतिमा से उनका बरसो पुराना नाता है। आज मेरे लिए यह गौरव की बात है कि मैं इस कार्यक्रम की सहभागी बनीं।
महाराष्ट्र मंडळ के अध्यक्ष अजय काळे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र मंडळ की युवा समिति शिवाजी महाराज की महाआरती हर माह के 19 तारीख को विगत कई वर्षों से कर रही है। इस महाआरती के दिन हम शिवाजी महाराज के जीवन प्रसंगों पर चर्चा भी करते है, ताकि आज की युवा पीढ़ी उनके विचारों और हिंदूत्व की भावना को जान सकें।

कुनबी समाज के प्रदेश संरक्षण एसएस ब्राह्मणकर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 17वीं शताब्दी में ‘हिंद स्वराज्य’ के संस्थापक के रूप में शिवाजी महाराज ने कई ऐतिहासिक कार्य किए। उनकी युद्ध नीति आज हमारे देश के जवानों को लिए वरदान है।

महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने शिवाजी महाराज के युद्ध कौशल और उस समय की परिस्थिति को वर्तमान परिस्थिति से जोड़ते हुए कहा कि आज जो बंगाल में चल रहा, जिसे वहां के लोग महसूस कर रहे है। ठीक वैसी ही स्थिति शिवाजी महाराज के समय में रही होगी।

महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति के समन्वयक विनोद राखुंडे ने बताया कि इससे पूर्व मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन दंडवते, पंडित संदीप देशपांडे सहित अन्य समाजजनों ने शिवाजी महाराज का दुग्धाभिषेक किया। और महिलाओं ने 365 दीयों से शिवाजी महाराज की महाआरती की। बाल शिवाजी के भेष में पार्थ शेष और मोरया जोशी ने मंच पर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम का जय घोष कर लोगों का ध्यान खींचा।

शहीद गिरपुंजे को महाराष्ट्र मंडल ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
रायपुर। एर्राबोर मार्ग पर डोण्डरा गांव के पास क्रेशर प्लांट में नक्सलियों की ओर से लगाए गए आईईडी की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल कोंटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आकाश राव गिरपुंजे शहीद हो गए। चंगोराभाठा रायपुर निवासी गिरपुंजे के अंतिम संस्कार पर मंगलवार को महाराष्ट्र मंडल के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। साथ ही उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
एनर्जी का पंप हाउस है स्टाफ और मीटिंग रूमः मुकेश शाह
- संत ज्ञानेश्वर स्कूल में आयोजित कार्यशाला में पहुंचे शिक्षाविद् मुकेश साह
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय का नया शिक्षण सत्र शुरू होने वाला है। इससे पूर्व शिक्षकों में पाजीटिव एनर्जी के संचार के लिए स्कूल में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन शिक्षकों में एनर्जी दोगुनी करने के लिए राजधानी के प्रसिद्ध शिक्षाविद् मुकेश शाह स्कूल पहुंचे। उन्होंने अपनी सकारात्मक बातों से जहां शिक्षकों का मार्गदर्शन किया वहीं उन्होंने कहा कि आपका स्टाफ रूम, मीटिंग रूम स्कूल का सबसे बड़ा एनर्जी हाउस है। अगर आप यहां नियमित रुप से समय देकर अन्य टीचर्स के साथ बैठते है तो आप एनर्जी लेकर क्लासरूम में जाएंगे। और जितनी पाजीटिव एनर्जी के साथ आप बच्चों के पास जाएंगे आप अपना प्रभाव बच्चों पर छोड़ पाएंगे। क्योंकि यही वो प्रोफेशन है जहां आप रिटायर नहीं होते। आपको आपके पढ़ाए बच्चे जीवन पर्यंत याद रखेंगे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि मैं इस प्रोफेशन में फोर्सफुली आया। फिर यह मेरा जुनून बन गया। शुरूआत के साढ़े तीन साल मैंने 300 रुपये महीने की नौकरी की। वह मेरे जीवन का सबसे अच्छा समय था। आप इस क्षेत्र में अपनी च्वाइस से आए है तो यह आपके लिए और भी ज्यादा अच्छा है। उन्होंने कहा कि आप अपने काम से प्रेम करिए। यह मन में बिल्कुल भी न लाए कि मैं तो 9 से 12 या 12 से 5 का टीचर हूं। टीचर तो टीचर होता है, 24 घंटे। आप लोगों ने जिस स्कूल में पढ़ाई की आप वहां जाते होंगे तो यह बोलते होंगे कि इस क्लास रूम में मैंने पढ़ाई की। इस बेंच में मैं बैठा करती थी। जब एक साल पढ़ाई करने पर आपको उस क्लास रूम और स्कूल से प्रेम है। आप यहां न जाने कितने बैच को पढ़ा चुकी है। यहां रोज आती है। हर वर्ष बच्चे बदलते जाते है। तो फिर इस क्लास से भी उतना ही प्रेम होना चाहिए।
मुकेश शाह ने कहा कि बीते शिक्षण सत्र में इस स्कूल के तीन बच्चों ने बोर्ड की मेरिट सूची में स्थान बनाया। जिन टीचर ने उन बच्चों को पढ़ाया सिर्फ उन्हें ही नहीं पूरे स्टाफ को इस बात पर गर्व करना चाहिए कि आप उस स्कूल या उस परिवार के अहम् सदस्य है जिसके बच्चों ने मेरिट में स्थान बनाया। आप यह मन में बिल्कुल मत सोचिए कि यह महाराष्ट्र मंडल का स्कूल है, बल्कि यह सोचिए कि यह मेरा स्कूल है। घर पर 5 या 6 सदस्य होते है और घर पर उठने, खाने, पीने, बैठने, टीवी देखने या कहीं बाहर घुमने के लिए एक सिस्टम बना होता है। वैसे ही स्कूल में नियम और सिस्टम बनाए जाते है। इसलिए स्कूल के नियम कायदे कानून को घर पर बनाए नियम की तरह ही समझे। उन्होंने कहा कि इसके साथ यह भी बेहद जरूरी है कि हमें जहां से अर्थ की प्राप्ति हो रही हो वहां का सम्मान हम अवश्य करें। कार्यशाला में स्कूल प्रभारी परितोष डोनगांवकर, प्राचार्य मनीष गोवर्धन, उपप्राचार्य राहुल वोड़ीतेलवार सहित समस्त शिक्षकगण उपस्थित थे।
पढ़ाई के दौरान बच्चों को आसानी से समझ में आने वाली भाषा में हो संवाद
आईआईटी भिलाई और यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिगेन ने अंतर्राष्ट्रीय सेंसर रिसर्च हब शुरू करने किया एमओयू
रायपुर। इंडो -जर्मन शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के एक ऐतिहासिक कदम में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई ने जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिगेन के साथ एक मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी सह-शोध, शैक्षणिक आदान-प्रदान, और “सेंसर” विषय पर एक संयुक्त केंद्र की स्थापना के मार्ग प्रशस्त करती है, जिसे आईआईटी भिलाई में स्थापित किया जाएगा।
एमओयू पर हस्ताक्षर समारोह यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिगेन में आयोजित किया गया, जहाँ दोनों संस्थानों के गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जर्मनी में भारतीय दूतावास का प्रतिनिधित्व कर रहे डॉ. रामानुज बैनर्जी ने इस सहयोग को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में द्विपक्षीय संबंधों को गहन बनाने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया।
इस एमओयू की एक प्रमुख विशेषता सेंसर प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान के लिए एक संयुक्त केंद्र की स्थापना है, जिसे आईआईटी भिलाई और यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिगेन के प्रमुख विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त रूप से प्रबंधित और संचालित किया जाएगा। यह केंद्र स्वास्थ्य सेवा, स्मार्ट अवसंरचना, और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने वाला एक अत्याधुनिक हब होगा।
आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोगों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह साझेदारी छात्रों और शोधकर्ताओं को वैश्विक दृष्टिकोण, उन्नत अवसंरचना तथा तकनीकी विशेषज्ञता तक पहुँच प्रदान करेगी, जिससे नवाचार और उत्कृष्टता की संस्कृति को पोषण मिलेगा।” इस सहयोग से अंतःविषय अनुसंधान में नए मुकाम हासिल होने और वैश्विक शैक्षणिक तथा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद है।