दिव्य महाराष्ट्र मंडल
गीता जयंती यानी मोक्षदा एकादशी पर गीता का सामूहिक पाठ 30 नवंबर को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल और संस्कृत भारती की ओर से मोक्षदा एकादशी यानी गीता जयंती के अवसर पर रविवार, 30 नवंबर को महाराष्ट्र मंडल भवन में शाम 4 से 6 बजे तक गीता का सामूहिक पाठ किया जाएगा। आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल द्वारा हर वर्ष गीता जयंती मनाई जाती है।
आस्था ने आगे बताया कि गीता जयंती का आयोजन महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति और संस्कृत भारती द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर गीता के 12वें और 15वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया जाएगा। पाठ में शामिल होने वाले इच्छुछ भक्तगण 10 नवंबर तक अपना नाम समिति को जरूर दें। अधिक जानकारी के लिए आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले 9479164401, संध्या खगन 7389646029, सृष्टि दंडवते 7000480971 और आकांक्षा गद्रे 9406291016 से उनके नंबर पर संपर्क कर सकते है।
आस्था काले ने आगे बताया कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया था। यह दिन पवित्र ग्रंथ भगवद गीता के जन्म का प्रतीक है, जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने और धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा देती है। भगवद गीता को जीवन का मार्गदर्शन ग्रंथ माना जाता है, क्योंकि इसमें जीवन को बेहतर बनाने वाले 700 श्लोक हैं जो कर्म, धर्म और मोक्ष के बारे में बताते हैं। गीता जयंती के दिन व्रत रखने और गीता का पाठ करने से मानसिक शांति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मुख्यमंत्री साय द्वारा ऊर्जा विभाग के मण्डप का अवलोकन
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती के अवसर पर राज्योत्सव में लगे ऊर्जा विभाग के मण्डप का अवलोकन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 4 नवंबर को किया। इस अवसर पर पॉवर कंपनी के अध्यक्षगण सुबोध कुमार सिंह एवं डॉ. रोहित यादव तथा तीनों एमडी एस.के. कटियार, राजेश शुक्ला, भीमसिंह कंवर उपस्थित थे। साय ने ऊर्जा विभाग द्वारा सु-सज्जित एवं प्रदर्शित विभिन्न प्रादर्शों की सराहना की।
संगीतमय काकड़ आरती के समापन पर उत्सव जैसा माहौल.. तात्यापारा स्थित हनुमान मंदिर में पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
तात्यापारा स्थित हनुमान मंदिर में पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा लगातार हो रही भव्य, बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या
रायपुर। कार्तिक मास के अंतिम दिन कलचुरी काल से प्रतिष्ठित प्राचीन हनुमान मंदिर तात्यापारा में सुमधुर संगीतमय काकड़ आरती की गई। अलसुबह की जाने वाली इस आरती के लिए परंपरानुसार सभी भक्त घर पर स्नान- ध्यान व पूजा करके मंदिर पहुंचे और लगभग घंटेभर भजन करने के बाद काकड़ आरती की।
इस अवसर पर विश्वास शेष, मनोहर शेवलीकर, कपिल कुसरे, निशा राहटगांवकर, अनिल गनोदवाले, अनिल ठोबंरे, रंजन मोड़क, सुमीत मोड़क, वैभव डांगे, राहुल खानखोजे, अशोक भाले, सतीश अग्रवाल, सौरभ देव, नंदकुमार लेले, अजय पोतदार, शरद देशपांडे, नवीन शेष, सुकृत गनोदवाले, वैभव कान्हे, शरद डांगे, मिलिंद कौडीसाव, विशाल डांगे, रिया खानखोज, श्याम शेष, संजीव बल्लाल, सुनील शेष सहित अनेक श्रद्धालु भक्तिभाव से भजन और काकड़ आरती करते दिखे। इन भक्तों का कार्तिक मासभर सुबह 5:30 बजे आने और इसी तरह भजन-कीर्तन और काकड़ आरती करने का क्रम जारी है।

काकड़ आरती की प्रथा कब और कैसे शुरू हुई, इसके बारे में एक पौराणिक कथा है। लोगों को भगाने वाले, डराने वाले महाक्रूर तारकासुर का वध भगवान शिव के पुत्र कार्तिक स्वामी ने किया था। इसी कार्य के लिए उनका जन्म कार्तिक माह में हुआ था। ऐसा माना जाता है कि उन्हीं के नाम पर इस माह का नाम 'कार्तिक' पड़ा। शिव के इस महान पुत्र को नमन करते हुए हमारे जीवन में सदैव सुख समृद्धि और शांति बनी रहे इसलिए काकड़ आरती की प्रथा प्रचलित हुई।
ऐसा माना जाता है काकड़ आरती की रचना संत तुकाराम महाराज, संत रामदास और संत एकनाथ महाराज ने की थी। यह आरती कार्तिक महीने के शुक्ल एकादशी से त्रिपुरी पूर्णिमा तक हर रोज सुबह मंदिर में की जाती है। काकड़ आरती मतलब अलसुबह सूर्योदय के पहले भगवान की प्रार्थना से उन्हें जगाना महाराष्ट्र में लगभग सभी देवस्थानों विशेषत: पांडुरंग विट्ठल और दत्त मंदिर में विशेषकर यह आरती सुबह सूर्योदय के पहले होती है। इसमें एक प्रकार की बाती होती है, जिसे हम काकड़ कहते हैं। इसको जलाकर दीया के स्वरूप हम उससे आरती करते हैं।

कार्तिक मास की पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसका गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। भक्तगण भगवान शिव की आराधना में अनुष्ठानों में भाग लेते हैं और शांति, ज्ञान और आध्यात्मिक परिवर्तन के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। काकड़ आरती का समापन इसी दिन किया जाता है।
त्रिपुरासुर पर विजय: पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक शक्तिशाली राक्षस का वध किया था। त्रिपुरासुर के वध से सभी देवी-देवता प्रसन्न हुए और उन्होंने काशी (वाराणसी) में आकर दीप प्रज्जवलित कर यह उत्सव मनाया। इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
छत्तीसगढ राज्योत्सव आयोजित करने वाली महाराष्ट्र मंडल अकेली संस्था: थौरानी
भव्य छत्तीसगढ राज्य स्थापना दिवस उत्सव को देखकर भौंचक हो गई छत्तीसगढ चेंबर ऑफ कॉमर्स की टीम
महाराष्ट्र मंडल में यादगार रहा छत्तीसगढ़ राज्योत्सव

रायपुर। कला संस्कृति समिति की ओर से राजगीत ‘अरपा पैरी के धार....’ की सुमधुर गीत की पेशकश से शुरू हुआ महाराष्ट्र मंडल का राज्योत्सव अपने अनेकानेक बेहतरीन प्रस्तुतियों के कारण यादगार बन गया। यादगार इसलिए भी कि ज्यादातर महाराष्ट्रियन दर्शकों ने न केवल हर एक प्रस्तुति का तालियों की गडगडाहट से स्वागत किया बल्कि कार्यक्रम को मंचित करने में भी अपनी अहम भूमिका निभाई। वहीं चेंबर ऑफ कामर्स के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के मुख्य अतिथ्यि से कार्यक्रम और भी गरिमामय हो गया।




पंथी, सुआ नृत्य, गौरा-गौरी व कर्मा ददरिया में दर्शक भी झूमेंगे 4 नवंबर को महाराष्ट्र मंडल में


महाराष्ट्र मंडल में हुआ 'मेक मी टैगोर, मदर' का मंचन
रिंग फाइट के लिए खिलाड़ियों में उत्साह... तीन दिन जमकर किया अभ्यास
रायपुर। छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन की टीम पश्चिम बंगाल में होने वाले नेशनल चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए जमकर अभ्यास कर रही है। बीते दिनों हुए सात दिवसीय कैंप के बाद अब हर शनिवार और रविवार को संत ज्ञानेश्वर स्कूल में कैंप लगाया जा रहा है। 31 अक्टूबर को अवकाश होने के काऱण इस बार तीन दिवसीय कैंप लगाया गया। प्रतिदिन सुबह 7 बजे संत ज्ञानेश्वर स्कूल ग्राउंड पहुंचकर खिलाड़ियों ने जमकर अभ्यास किया।
छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि एसोसिएशन के सचिव ओपी कटारिया और स्कूल की स्पोर्ट्स शिक्षिका ज्योति साहू खिलाड़ियों को लगातार प्रशिक्षण दे रही है। 31 अक्टूबर, 1 और 2 नवंबर को संत ज्ञानेश्वर स्कूल खेल मैदान में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण आगामी शनिवार-रविवार को भी दिया जाएगा। 9वां नेशनल रिंग फाइट चैम्पियनशिप 12 से 14 दिसंबर को पश्चिम बंगाल में खेला जाएगा।
महाराष्ट्र मंडल में संपूर्ण रीति–रिवाजों का पालन कर संपन्न हुआ तुलसी शालिग्राम विवाह
देवउठनी एकादशी पर आध्यात्मिक समिति ने किया विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से देवउठनी एकादशी के अवसर पर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया गया। सुबह 7 बजे सभी सदस्यगण आनलाइन मोड पर जुड़े और पूरे उत्साह के साथ पाठ किया। बताते चले कि मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर हर एकादशी पर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है।
आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि देवउठनी एकादशी के दिन श्रीहरि योगनिद्रा से जागते हैं और चातुर्मास्य व्रत का समापन होता है। यह दिन व्रत, दान और भक्ति साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन रात्रि जागरण, कथा-कीर्तन और भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी होती है। देवउठनी एकादशी के दिन किया गया दान सहस्रगुना बढ़कर फल देता है।
पाठ में दिवाली अलोनी, दीपाजंलि भालेराव, हेमंत मार्डीकर, ज्योत्सना किरवई, मंजूषा मरकले, प्राची पराड़कर, प्रणिता नलगुंडवार, रोहिनी नेने, संध्या खंगन, शताब्दी पांडे, वर्षा करंजकर, आस्था काले, अलखनंदा नारद, अंजलि नलगुंडवार, अनुपमा नलगुंडवार, अर्चना जतकर शामिल हुई।
रंगमंच के भविष्य को लेकर चिंतित दिखा जम्मू का वरिष्ठ रंगसाधक लकी गुप्ता
राजेंद्र नगर- कमल विहार महिला केंद्र ने मनाया दिवाली मिलन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के राजेंद्र नगर-कमल विहार महिला केंद्र की महिलाओं ने शनिवार, 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस और दिवाली मिलन बड़े धूमधाम के साथ मनाया। दिवाली मिलन का यह कार्यक्रम केंद्र की संयोजिका सुखदा लाखे के निवास पर संपन्न हुआ। बताते चले कि राजेंद्र नगर-कमल विहार महिला केंद्र महाराष्ट्र मंडल का 17वां और नवीन महिला केंद्र है, जहां लगातार सामाजिक गतिविधियां संचालित हो रही है।
महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि एक नवंबर को शनिवार होने के कारण सबसे पहले रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। जिसके बाद सभी ने एक दूसरे को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर सभी ने कई रोचक गेम्स भी खेले। जिसमें ज्योति बनकर प्रथम, अल्का बापट द्वितीय और मैथिली ठोके तृतीय रही। इसके उपरांत भी ने दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया और एक दूसरे को मिठाईयां खिलाया। इस अवसर पर ज्योति बनकर, सुखदा लाखे, अल्का बापट, नीलिमा लखपाले, सरिता लुलु, तृप्ति करमरकर, मंगला मिश्रेकर, स्मिता कायदे, मैथिली ठोके, मनीषा चौंखं, पुष्पा चिलमवार प्रमुख रुप से उपस्थित थीं।
कर्मठता व दृढ़ इच्छाशक्ति से सरदार पटेल बने लौहपुरुषः काले
महाराष्ट्र मंडल में लौह पुरुष वल्लभभाई पटेल के साथ बृहन्महाराष्ट्र मंडल के छत्तीसगढ़ कार्यवाह सुबोध टोले की मनाई गई वर्षगांठ
रायपुर। स्वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री व गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल अपनी कर्मठता और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर देशभर में लौहपुरुष कहलाए। आज़ादी के बाद के कठिन हालातों में उन्होंने अपनी सूझबूझ और फौलादी इरादों से 562 रियासतों का भारत में विलय कर अखंड भारत का निर्माण किया। किसानों के संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अमूल्य रहा। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर व्यक्त किए।
काले ने कहा कि अपने विशिष्ट व्यक्तित्व में कठोरता और करुणा का अद्भुत संगम लिए वे जहां एक ओर राष्ट्रहित प्रथम के पक्ष पर सदैव अडिग थे, वहीं देश की जनता के प्रति वे गहरी संवेदना रखते थे। वे जनता की नब्ज़ समझते थे। सरदार पटेल ने अपने जीवन से सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व, स्पष्ट वक्तव्य, निर्णायक कार्यों, स्थिर बुद्धि, लौह संकल्प और शक्तिशाली निर्णयों से राष्ट्र को सशक्त बनाया जा सकता है।
मंडल के पदाधिकारियों के साथ अपनी 48वीं वर्षगांठ मना रहे बृहन्न महाराष्ट्र मंडल के छत्तीसगढ़ कार्यवाह सुबोध टोले ने कहा कि सरदार पटेल साधारण किसान परिवार से थे। बड़े भाई विठ्ठलभाई पटेल व उन्होंने अपने- अपने क्षेत्रों में असाधारण काम किया। वल्लभभाई ने अपने भाई के कहने पर विदेश जाकर कानून की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने किसानों के साथ हुए अन्याय को देखकर गांधी जी के आंदोलन में सक्रियता से भाग लेना शुरू किया।
टोले ने बताया कि बारडोली आंदोलन के बाद वल्लभभाई को “सरदार” की उपाधि मिली। फिर चाहे नमक आंदोलन हो या भारत छोड़ो आंदोलन, सरदार वल्लभभाई पटेल हर आंदोलन की रीढ़ बन गए। स्वतंत्रता संग्राम में सरदार पटेल का योगदान वास्तव में अद्वितीय था। जयंती के मौके पर सचिव चेतन गोविंद दंडवते, मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी, वरिष्ठजन सेवा समिति के प्रभारी दीपक पात्रीकर, सांस्कृतिक समिति के प्रवीण क्षीरसागर, रंगसाधक समीर टुल्लू सहित अनेक लोग शामिल रहे।
बूढ़ापारा केंद्र की महिलाओं ने मनाया दिवाली मिलन... तुलसी विवाह और आंवला नवमीं भी
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के बूढ़ापारा महिला केंद्र की महिलाओं ने शुक्रवार, 31 अक्टूबर को दिवाली मिलन उत्सव मनाया। दिवाली मिलन का कार्यक्रम आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले के निवास पर मनाया गया। इस अवसर पर सर्वप्रथम आंवले के पेड़ की पूजा की गई। जिसके उपरांत रामरक्षा, हनुमान चालीसा पाठ और राम स्तुति का गायन किया गया।
केंद्र की महिलाओं ने दिवाली मिलन पर आंवला नवमी, दीपोत्सव और एकादशी की पूर्व संघ्या तुलसी महारानी की भी पूजा अर्चना की और 11 बार उनकी प्रदक्षणा भी की। देवी तुलसी के भजन के गायन ने कार्यक्रम को और भी भक्तिमय बना दिया। महिलाओं के मनोरंजन के लिए कई गेम्स खेले और होजी खेली गई। जीतने वाले को पुरस्कृत भी किया गया।

माचिस की एक तीली से मोमबत्तियां लगाने की प्रतियोगिता रोचक रही। इसमें प्रथम सुचिता काले, सेकंड गीता दलाल और थर्ड सविता मोघे रहीं। इसी तरह दूसरा गेम में फर्स्ट रूपाली लोखंडे, सेकंड जयश्री केलकर और थर्ड अनुपमा नलगुंडवार रहीं।
कार्यक्रम में संयोजिका अपर्णा मोघे, सह संयोजीका प्रणिता नलगुंडवार, अंजलि नलगुंडवार, सुचिता काले, रीता लोखंडे के अलावा आस्था काले, हेमा पराड़कर, हेमा बर्वे, सविता मोघे, अर्चना मोघे, गीता दलाल, अनुपमा नलगुंडवार, दीपाली बर्वे ,सुनीता साठे, जयश्री काले, रूपाली लोखंडे उपस्थित रही।
पूर्वी ने ‘फ्लोइजी बेल्ट’ बना डाटा एआई स्टार्टअप काम्पिटिशन में जीता सेकंड प्राइज
रायुपर। आज एआई हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। हमारे दैनिक दिनचर्या में शामिल एआई हमारे लिए काफी राहतमंद भी है। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय की छात्रा पूर्वी साहू ने ‘फ्लोइजी बेल्ट’ बना डाटा एआई स्टार्टअप जिला स्तरीय काम्पिटिशन में सेकंड प्राइज जीता। पूर्वी की इस उपलब्धि पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले और स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं दी है।
शिक्षिका रीता संभरकर और रोशन सिंह राजपूत ने बताया कि एआई स्टार्टअप कम्पीटिशन का पहला राउंड संत ज्ञानेश्वर स्कूल में हुआ। जिसमें 10 बच्चों ने भाग लिया था। जिसमें से तीन बच्चे कृष्ण कुमार मलिका, मुस्कान यादव और पूर्वी साहू का सलेक्शन जिला स्तरीय कम्पीटिशन के लिए हुआ। जिला स्तरीय कम्पीटिशन एनएच गोयल स्कूल में आयोजित किया गया। जिसमें बेहतरीन प्रदर्शन और शानदार स्पीच के साथ पूर्वी साहू ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
पूर्वी साहू ने बताया कि ‘फ्लोइजी बेल्ट’ एक स्मार्ट पहनने वाली पीरियड पेन-रिलीफ बेल्ट है, जो लड़कियों को कभी भी, कहीं भी पीरियड्स के दर्द को मैनेज करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह मांसपेशियों को आराम देने और दवाओं या साइड इफेक्ट्स के बिना दर्द कम करने के लिए सुरक्षित गर्मी, हल्की वाइब्रेशन और इलेक्ट्रो-थेरेपी का इस्तेमाल करती है। इसमें बिल्ट-इन सेंसर और AI है, जो दर्द के लेवल को समझता है और अपने आप सही राहत देता है, साथ ही कनेक्टेड ऐप के ज़रिए मैनुअल कंट्रोल भी देता है। इसका मुख्य लक्ष्य लड़कियों को पीरियड्स के दौरान एक्टिव, कॉन्फिडेंट और आरामदायक रहने में मदद करना है - दर्द की वजह से परेशान न होना।
महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों में मनाया गया आंवला नवमीं... पेड़ की पूजा कर रोचक खेलों का महिलाओं ने लिया आनंद
रायपुर। सनातन संस्कृति में कार्तिक मास का अपना अलग ही महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के वृक्ष पर निवास करते हैं, इसलिए इसे आंवला नवमी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा-अर्चना और दान का अक्षय फल मिलता है। इसलिए इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है। महाराष्ट्र मंडल की महिला केंद्रों की महिलाओं ने अपने अपने केंद्र में 31 अक्टूबर को आंवला नवमीं मनाई।
महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने रविवि परिसर स्थित बंजारी माता मंदिर पहुंच आंवला नवमी मनाई। इस दौरान सभी से पूरे विधि-विधान से आंवले के पेड़ की पूजा और पेड़ के नीचे ही स्वादिष्ट भोजन का लुफ्त उठाया। इस दौरान दिव्या पात्रीकर, दीपांजली भालेराव, अनुभा जाऊलकर, श्रुति डोनगांवकर, अनुजा महाडिक, प्रीति रणदिवे, संध्या पद्मटिंटीवार, श्रद्धा देशमुख और विजया भाले उपस्थित थीं।

भगिनी महिला मंडल और चौबे कालोनी महिला केंद्र की महिलाओं ने आंवला पेड़ के नीचे पूजा अर्चना की। जिसके बाद पेड़ के नीचे बैठकर स्वादिष्ट भोजना का आनंद लिया। इस दौरान मनीषा वरवंडकर, अपर्णा कालेले, सुनीता कुलकर्णी, अनुपमा बोधनकर, संगीता निमोणकर, रोहिणी नेने, श्रुति बर्वे, सुषमा आप्टे, कीर्ति हिशीकर, अवंती अग्निहोत्री, नलिनी राजिमवाले, मालविका राजिमवाले, अंजली वैद्य, गौरी क्षीरसागर, धनश्री पेंडसे, पुष्पा गोवर्धन, अर्चना मुकादम, पल्लवी मुकादम उपस्थित रहीं।

वल्लभ नगर केंद्र की महिलाओं ने गोल्डन गार्डन शैलेंद्र नगर में आंवला नवमी मनाई। महिलाओं ने आंवले के पेड़ की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की और सभी ने मजेदार गेम भी खेले। जिसमें जोड़ी बनाओ में सुवर्णा प्रथम, रोहिणी द्वितीय व स्मिता तृतीय रही। दूसरे गेम पासिंग द पार्सल में शुभांगी प्रथम, शोभा पाटिल द्वितीय, रोहिणी तृतीय रही, फिर सभी महिलाओं ने महाराष्ट्र मंडल से मंगाए खाने का आनंद लिया, और इस तरह वल्लभ नगर केंद्र का आंवला नवमी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस मौके पर अपर्णा देशमुख, मानसी विठाळकर, शुभांगी आप्टे, अर्चना जतकर, कांचन पुसदकर, रोहिणी पेंडसे, अपर्णा आठले, अपर्णा पेंडसे, स्मिता चांदोळकर, सीमा, वंदना पाटील, अमरजीत, लीना केळकर, शोभा पाटील, प्रियंका चांदोलकर, नूतन दामले, मंजूषा चिलमवार, रोहिणी चिमोटे, उषा काकडे, सुवर्णा कस्तुरे, नंदा अगस्ती , सीमा तिघा, सुरेखा मेघावाले, आशा बरेवार, संगीता, अनीता उमाडे, प्रीती केसकर और विजया चौधरी उपस्थित रहीं।

इसी तरह रोहिणीपुरम महिला केंद्र ने भी आंवला नवमीं धूमधाम से मनाया। केंद्र की सदस्या श्यामल जोशी निवास पर एकत्रित होकर सभी ने आंवले के पेड़ की पूजा और प्रसाद अर्पित पर भोजन का आनंद लिया। इस दौरान सभी ने हौजी खेला और नृत्य किया। आयोजन में अलका कुलकर्णी, अचला, अपर्णा जोशी, अपर्णा वरदपांडे, श्यामल जोशी, मीना विभूते, प्रांजल बल्लाल, चित्रा बाल्की, प्राची गनोदवाले, राजश्री वैद्य, उपस्थित थीं।
राज्योत्सव में स्कूली बच्चे देंगे बारहमासी नृत्यों की प्रस्तुति
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा 4 नवंबर को आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर संत ज्ञानेश्वर स्कूल के बच्चे बारहमासी नृत्य की प्रस्तुति देंगे। सावन के महीने में हरेली से छत्तीसगढ़ में त्योहारों का सिलसिला शुरू होता है। जो मानसून की शुरूआत के साथ मनाया जाता है। जिसके बाद यह क्रम लगातार चलता रहता है। स्कूली बच्चियों द्वारा हरेली, सावन, सुआ, गौरी-गौरा, राउतनाचा, छेरछेरा पुन्नी के साथ पंथी नृत्य की प्रस्तुति देंगे।
स्कूल की शिक्षिका रचना तिवारी ने बताया कि 30 से अधिक लड़के और लड़कियों का ग्रुप इसकी तैयारी कर रहा है। 30 बच्चों को अलग-अलग ग्रुप अलग अलग नृत्य में प्रस्तुति देगा। जिसकी शुरुआत हरेली के साथ होगी। जिसमें , सावन, सुआ, गौरी-गौरा, राउतनाचा, छेरछेरा पुन्नी और सुग्घर छत्तीसगढ़ की झलक नजर आएगी। करीब 10 मिनट की इस प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ी संस्कृति को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। अपनी नियमित पढ़ाई के बाद बच्चे तन्मयता के साथ अभ्यास कर रहे है।
राज्योत्सव कार्यक्रम प्रभारी गीता दलाल ने बताया कि कार्यक्रम में संतोष गुरुगोसाई द्वारा छतीसगढी गीत को बासुरी मे सुनाया जाएगा। चौबे कॉलोनी केंद्र द्वारा गौरा-गौरी नृत्य, डंगनिया केंद्र द्वारा सुआ नृत्य, अमलीडीह केंद्र द्वारा राउतनाचा प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन पूरी तरह छत्तीसगढ़ी भाषा में होगा।