छत्तीसगढ़
जगदलपुर के ट्राईफूड पार्क के व्यवस्थित संचालन को लेकर मंत्रालय में हुई बैठक
मशहूर भजन गायक हंसराज रघुवंशी ने अपनी सुरमयी प्रस्तुति से जीता सभी का दिल



महिला आयोग में नियुक्त सदस्यों ने किया पदभार ग्रहण... आयोग अध्यक्ष ने दी बधाई
जल जीवन मिशन के संचालक डॉ. भुरे ने गांवों का दौरा कर कार्यों का किया निरीक्षण
रायपुर। जल जीवन मिशन के संचालक डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने मुंगेली जिले के लोरमी विकासखण्ड के विभिन्न गांवों का दौरा कर मिशन के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर नल जल योजना से पेयजल आपूर्ति की जानकारी ली। उन्होंने जल जीवन मिशन के ठेकेदारों की बैठक लेकर मिशन के शेष कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ जल्दी पूर्ण करने के निर्देश दिए।
जल जीवन मिशन के संचालक डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने मुंगेली जिले के घोरबंधा, गोड़खाम्ही और तेलीखाम्ही का दौरा कर मिशन के कार्यों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से चर्चा कर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने तीनों गांवों में जल जीवन मिशन के कार्यों की प्रगति, हितग्राहियों की संख्या, उपलब्ध कराए गए नल कनेक्शन, पानी टंकी की क्षमता इत्यादि की जानकारी ली और अधिकारियों को प्रत्येक घर में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सरपंचों से गांव की समस्याओं और उनके निराकरण के बारे में भी चर्चा की।
मिशन संचालक डॉ. भुरे ने लोरमी रेस्ट हाउस में जल जीवन मिशन के ठेकेदारों की बैठक लेकर मिशन के शेष बचे हुए कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी पूरी सक्रियता से कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन शासन की महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत हर घर में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुंगेली जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभाकर पाण्डेय, लोरमी के एसडीएम अजीत पुजारी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता कुंदन राणा सहित विभागीय अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे।
रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनावः 1500 से अधिक मतदाता वाले 13 मतदान केंद्रों में बनाए जाएंगे सहायक मतदान केंद्र
रायपुर। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रीना बाबासाहेब कंगाले ने प्रदेश के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक ली। उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में आयोजित बैठक में रायपुर नगर (दक्षिण) विधानसभा उप-निर्वाचन के लिए आदर्श आचार संहिता, निर्वाचन व्यय, मतदान के दिन की व्यवस्था और भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 15 अक्टूबर को रायपुर नगर (दक्षिण) विधानसभा उप-निर्वाचन के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। रायपुर नगर (दक्षिण) उप-निर्वाचन के लिए 13 नवम्बर को मतदान और 23 नवम्बर को मतों की गिनती होगी।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बताया कि निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही रायपुर नगर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचारसंहिता प्रभावशील हो गई है। उन्होंने बताया कि मतदान के लिए रायपुर नगर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 253 मतदान केंद्र हैं जो सभी शहरी क्षेत्र में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि 1500 से अधिक मतदाता संख्या वाले 13 मतदान केंद्रों में सहायक मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।
कोलता समाज वार्षिक स्नेह सम्मेलन व बंधु मिलन कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बसना विकासखंड के गढ़फुलझर में बाबा बिसाशहे कुल कोलता समाज द्वारा आयोजित बाबा बिसाशहे कुल कोलता समाज वार्षिक स्नेह सम्मेलन व बंधु मिलन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री साय रामचंडी मंदिर पहुंच कर पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। साथ में छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री दयाल दास बघेल, ओपी चौधरी, सांसद रूपकुमारी चौधरी, बसना विधायक सम्पत अग्रवाल, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, सरायपाली विधायक चातुरी नंद मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलता समाज द्वारा आयोजित गरिमामय कार्यक्रम मे शामिल होना सौभाग्य की बात है। सौभाग्य है कि आप सबका दर्शन लाभ लेने आए है। उन्होंने कोलता समाज को रामचंडी दिवस और शरद पूर्णिमा की बधाई दी। कोलता समाज द्वारा मुख्यमंत्री का हुलहुली बजाकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समाज बड़ा शिक्षित, समृद्ध है। यह समाज भारतीय समाज, संस्कृति एवं परंपरा को लेकर चलने वाला समाज है, जो दूसरे समाज को प्रेरणा देने वाला समाज है, कृषक समाज है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की संस्कृति प्राचीन संस्कृति है और छत्तीसगढ़ मुख्य रूप से सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से इस राज्य से जुड़ा है। दोनों प्रदेश के लोगों का रोटी-बेटी का संबंध है। दोनों के अचार-विचार मिलते हैं।

साय ने कहा कि मोदी जी की गारंटी के अनुरूप हम काम कर रहे है। तेंदूपत्ता संग्रहण के माध्यम से 13 लाख परिवारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे आदिवासी और वनवासी समुदायों की आजीविका को बढ़ावा मिल रहा है। रामलला दर्शन योजना से लाखों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्रा और दर्शन की सुविधा दी जा रही है, जिससे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने युवाओं से नशा के खिलाफ जागरूक होने की अपील की, जिससे समाज स्वस्थ और प्रगतिशील बन सके। उन्होंने सभी को शासकीय योजना का लाभ लेने आह्वान भी किया और कहा कि समाज के सभी वर्ग सामने आएं।

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 21 क्विंटल धान की खरीदी का प्रबंध किया है, साथ ही किसानों को बोनस भी प्रदान किया जा रहा है। 18 लाख गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की योजना है। 9 लाख 25 हजार गरीबों को पहली किश्त वितरित की गई है। 70 लाख महिलाओं (दीदियों) को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। ऐसे मुख्यमंत्री का अभिनन्दन है।
डचरोज की खेती से कमलाडांड़ के एबी अब्राहम बने आत्मनिर्भर
सरगुजा सहित मध्यप्रदेश के सीमावर्ती शहरों के बाजारों में बिखेर रहीं हैं छत्तीसगढ़ की खुशबू
उद्यानिकी फसल को बढ़ावा देने राज्य सरकार कर रही है निंरतर प्रयास

रायपुर | छत्तीसगढ़ सरकार के उद्यानिकी विभाग द्वारा उद्यानिकी फसल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसके लिए परंपरागत रूप से खेती-किसानी कर रहे किसानों को प्रशिक्षण और सहयोग भी प्रदान किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि उद्यानिकी मंत्री रामविचार नेताम ने कृषि विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश में उद्यानिकी फसल को बढ़ावा देेने तथा किसानों के लिए उद्यानिकी फसलों को लाभकारी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसी कड़ी में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला प्रशासन के सहयोग से कमलाडांड़ के किसान एबी अब्राहम डचरोज (गुलाब) की खेती कर आत्मनिर्भर बन गए हैं। वहीं गांव के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत का काम कर रहे हैं। कमलाडांड़ के डचरोज सरगुजा सहित मध्यप्रदेश के सीमावर्ती शहरों के बाजारों में छत्तीसगढ़ की खुशबू बिखेर रही हैं।

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के कमलाडांड़ में फूलों की खेती ने एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है। यहां के किसान एबी अब्राहम ने पारंपरिक खेती छोड़कर गुलाब की खेती में हाथ आजमाया और अब वह इस क्षेत्र में न केवल अपनी पहचान बना रहे हैं। गुलाब की खेती से जहां उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं।

मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के इस छोटे से गांव के किसान, जो पहले गेहूं, धान, और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, अब उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से रुझान दिखा रहे हैं। एबी अब्राहम इस बदलाव के मुख्य उदाहरण हैं, जिन्होंने एक एकड़ भूमि में डचरोज गुलाब की खेती शुरू की। फूलों की खेती न केवल उनकी उम्मीदों पर खरी उतरी, बल्कि इसके माध्यम से उन्हें उम्मीद से कहीं अधिक मुनाफा भी हुआ। अब उनके खेत में गुलाब की खुशबू फैली हुई है, जिसे वह आसपास के शहरों और कस्बों में बेच रहे हैं।
एबी अब्राहम द्वारा उगाए गए गुलाब की मांग पूरे सरगुजा संभाग और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती शहरों में बढ़ रही है। मनेन्द्रगढ़ और आस-पास के बाजारों में भी उनकी आपूर्ति की जा रही है। फूलों की खेती से उन्हें मिलने वाला मुनाफा पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक है। खास बात यह है कि फूलों की खेती में अधिक लागत की आवश्यकता नहीं होती, जिससे किसान अपनी आर्थिक स्थिति को तेजी से सुदृढ़ कर पा रहे हैं। गुलाब की खेती न केवल एबी अब्राहम के लिए लाभकारी साबित हो रही है, बल्कि इसने ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। फूलों की देखभाल, तुड़ाई, पैकिंग, और परिवहन से जुड़े कार्यों में कई स्थानीय लोगों को काम मिला है, जिससे आने वाले समय में इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं।
फूलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह से सक्रिय है। उद्यानिकी विभाग द्वारा समय-समय पर किसानों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे फूलों की खेती में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर अधिक से अधिक लाभ कमा सके। एबी अब्राहम की मेहनत और प्रशासन के सहयोग से फूलों की खेती ने कमलाडांड़ में एक नई दिशा और गति प्राप्त की है। फूलों की खेती ने न केवल एबी अब्राहम को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान भी दी है। अब वह स्थानीय स्तर पर एक सफल किसान के रूप में पहचाने जाते हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और सही दिशा में कदम बढ़ाकर अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। पारंपरिक फसलों से हटकर फूलों की खेती करना उनके लिए न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक रूप से भी एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुआ है। एबी अब्राहम के खेतों में खिले गुलाबों की विभिन्न प्रजातियों से पूरा कमलाडांड़ क्षेत्र सुगंधित हो रहा है। गुलाब की खेती के कारण गांव का माहौल भी बदल रहा है। अब हर तरफ फूलों की खुशबू फैली हुई है, जिससे न केवल किसानों का जीवन बेहतर हो रहा है, बल्कि पर्यावरण में भी सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है। कमलाडाड़ के किसान एबी अब्राहम की फूलों की खेती की सफलता ने न केवल उनके जीवन को संवारा है, बल्कि इसने पूरे गांव में रोजगार और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दिया है।
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व का ऐतिहासिक मुरिया दरबार संपन्न
बस्तर दशहरा हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
माडिया सराय में विकास कार्य हेतु 50 लाख रुपए की घोषणा
मांझी-चालकी और मेम्बर-मेंबरीन के मानदेय में बढ़ोतरी हेतु प्रशासन और बस्तर दशहरा समिति से प्रस्ताव प्रस्तुत करने दिए निर्देश
मुरिया दरबार में जनप्रतिनिधियों सहित माटी पुजारी और मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन एवं गणमान्य नागरिक हुए शामिल

रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व हमारी आस्था और परम्परा का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो सर्वाधिक लम्बी अवधि तक मनाया जाता है। बस्तर दशहरा पर्व को बस्तर अंचल के सभी लोग पूरी श्रद्धा-आस्था के साथ मनाते हैं और इसमें सक्रिय सहभागिता निभाते हैं। वहीं ऐतिहासिक बस्तर दशहरा अब देश-दुनिया के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हो गया है, जिससे अब पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के साथ ही स्थानीय लोगों की आय को संबल मिला है।

मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद से बस्तरवासियों की अगाध श्रद्धा और सभी लोगों के सहयोग से इस वर्ष भी बस्तर दशहरा का भव्य एवं सफल आयोजन हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उक्ताशय के उद्गार जगदलपुर के सिरहासार भवन में विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व के अवसर पर आयोजित मुरिया दरबार को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने इस अवसर पर माडिया सराय में विकास कार्य के लिए 50 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मांझी-चालकी और मेम्बर-मेंबरीन के मानदेय में बढ़ोतरी हेतु जिला प्रशासन और बस्तर दशहरा समिति से प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर दशहरा पर्व के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में सम्मिलित होने पर खुशी व्यक्त की और कहा कि मुरिया दरबार का आयोजन सदियों से होता आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है जिसे हम सभी एकजुट होकर श्रद्धा और सहकार की भावना के साथ हर्षाेल्लास मनाते हैं। मुख्यमंत्री ने करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से विकसित दशराहा पसरा को बस्तर दशहरा पर्व में आए मांझी-चालकी तथा अन्य लोगों को सुविधा मुहैया करवाने की दिशा में सार्थक प्रयास बताया और कहा कि बस्तर दशहरा पर्व के लिए निर्धारित बजट को 50 लाख रुपए कर दिया गया है। उन्होंने मुरिया दरबार में मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन और बस्तर दशहरा समिति के पदाधिकारियों की मांग एवं समस्याओं को निराकृत किए जाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने बस्तर दशहरा पर्व में सक्रिय सहभागिता निभाने के लिए सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने मुरिया दरबार में बस्तर विकास प्राधिकरण के पुरखती कागजात का अंग्रेजी संस्करण का विमोचन भी किया।
बस्तर दशहरा पर्व के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में बस्तर अंचल के मंत्री, सांसद एवं विधायकों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बस्तर राज परिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचन्द्र भंजदेव, बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष, बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से आये मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, ग्रामीणजन सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर माटी पुजारी कमलचन्द्र भंजदेव ने बस्तर दशहरा पर्व के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देते हुए इसे सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बताया। उन्होंने बस्तर दशहरा पर्व में शामिल होने के लिए आने वाले देवी-देवताओं हेतु देव सराय की व्यवस्था तथा मांझी-चालकी, पुजारी, गायता सहित ग्रामीणों के ठहरने के लिए बेहतर सुविधा को राज्य सरकार के पहल की सराहना की। मुरिया दरबार में वन मंत्री केदार कश्यप सहित सांसद बस्तर एवं अध्यक्ष बस्तर दशहरा समिति महेश कश्यप और विधायक जगदलपुर किरणदेव ने बस्तरवासियों को बस्तर दशहरा पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस दौरान बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष लक्ष्मण मांझी ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व सभी के सहयोग तथा व्यापक सहभागिता से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ है। आने वाले साल में इसे और अधिक बेहतर और भव्यता के साथ मनाएंगे। इस अवसर पर मांझी-चालकी और मेम्बर-मेम्बरीन को मोबाइल भेट किया गया।
बारनवापारा अभ्यारण्य में 21 से 23 अक्टूबर को बटरफ्लाई मीट का होगा आयोजन
तितलियों को जानने और पहचानने का मिलेगा मौका
रायपुर | वन विभाग एवं बारनवापारा अभ्यारण्य के संयुक्त तत्वाधान में 21 से 23 अक्टूबर 2024 को अभ्यारण्य में बटरफ्लाई मीट का आयोजन किया जाएगा। जिसके माध्यम को प्रकृति प्रेमियों को तितलियों को करीब से जानने और पहचानने का मौका मिलेगा। साथ ही विषय विशेषज्ञों द्वारा तितलियों के पर्यावास एवं उनके महत्त्व के संबध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रतिभागियों के साथ साझा की जाएंगी। उक्त आयोजन की तीसरी कड़ी है। इसके पूर्व 2022 एवं 2023 में यह आयोजन किया गया था। विभाग द्वारा बटरफ्लाई मीट की तैयारी पूरी कर ली गई है। आयोजन में भाग लेने एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए क्यू आर कोड भी जनरेट किया गया है जिसके माध्यम से आसानी से पंजीयन कराया जा सकता है। मीट में प्रतिभागी स्टूडेंट के 15 सौ रूपये एवं अन्य व्यक्तियों के लिए 2 हजार रूपये पंजीयन शुल्क रखा गया है। इसके साथ ही भाग लेने के लिए 18 वर्ष से 60 वर्ष की आयु निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि बारनवापारा अभ्यारण्य में 150 प्रजाति के तितली एवं मोथ पायी जाती हैं। जिसमे से वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की शेड्यूल वन की क्रिमसन रोज (पैचीलौप्टा हेक्टर) डनाइड इगली (हाइपो सिलिमस मिसीपस) शेड्यूल दो की सिपोरा निरिसा,होगारा एनेक्स, यूक्रीशॉप्स सीनेजस, जेनेलिया लेपीडिया रपेला वरुणा,लैंपिडर्स बोइहन, तजुना शिप्स आदि पाई जाती है। शेड्यूल छह के भी बहुत से प्रजातियां पाई जाती हैं। विगत तीन वर्षों से बारनवापारा अभ्यारण्य में 14-16 हाथियों का दल निवास कर रहा है। साथ ही साथ विगत 8 माह से एक बाघ लगातार अभ्यारण्य में विचरण कर रहा है। बारनवापारा नाम बार और नवापारा गाँव से मिलकर बना है। बारनवापारा अभ्यारण्य अपनी स्थापना के बाद से ही देश के हर हिस्से से पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार भाटापारा जिले में स्थित है। अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 244.66 वर्ग किमी है। अभ्यारण्य की स्थलाकृति समतल और लहरदार इलाका है। ऊँचाई 640 मीटर समुद्र तल तक है। बालमदेही, जोंक और महानदी नदियाँ अभयारण्य की जीवन रेखा हैं जो अभयारण्य की जल कमी को पूरा करने के लिए अभयारण्य के साथ बहती हैं। वार्षिक वर्षा 1200 मिमी है इस अभ्यारण्य में सागौन, साल और मिश्रित वन की मुख्य वनस्पति है। पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए इसमें शिकार और शिकारियों का अच्छा घनत्व है। अभ्यारण्य के अंदर स्थित बलार जलाशय में कई आर्द्रभूमि पक्षी और मछलियाँ पाई जाती हैं। यह अभ्यारण्य लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए इकोटूरिज्म को बढ़ावा देता है।
बारनवापारा तक पहुँचने के लिए रायपुर से सड़क मार्ग से दो घंटे का सफर करना पड़ता है। यह रायपुर से NH 53 पर 78वें किलोमीटर पर 106 किलोमीटर दूर है। पटेवा एक छोटा शहर है जहाँ बारनवापारा से 28 किलोमीटर की दूरी पर मौसम अनुकूल सड़क पर गाड़ी चलाकर पहुँचा जा सकता है।
शरद पूर्णिमा पर मां पाताल भैरवी सिद्धपीठ में : 16 अक्टूबर को बांटी जाएगी जड़ी बुटीयुक्त खीर प्रसाद
*लोक कलामंच स्वरधारा की होगी प्रस्तुति*
रायपुर | राजनांदगांव मानव सेवा व जनकल्याण के लिए अंचल सहित देशभर में पहचान बना चुकी बर्फानी सेवाश्रम समिति द्वारा अपने आशीर्वादक राष्ट्रीय संत श्री श्री 1011 योगाधिराज ब्रम्हर्षि बर्फानी दादा जी के आशीर्वाद से संस्था द्वारा संचालित गर्भगृह में विराजमान मां पाताल भैरवी राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी दश महाविद्या द्वादश ज्योर्तिलिंग शिव शक्ति सिद्धपीठ बर्फानी आश्रम परिसर में शरद पूर्णिमा 16 अक्टूबर बुधवार की रात्रि में मनाई जाएगी। इस अवसर पर स्वांस, दमा व अस्थमा पीड़ितों को जड़ी बुटीयुक्त खीर प्रसाद का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक कलामंच स्वरधारा की भी प्रस्तुति रात्रि में होगी।
संस्था के सचिव गणेश प्रसाद शर्मा ‘गन्नू’ ने बताया कि सारे देश में मनाए जाने वाले मां भगवती के साधना व भक्ति का महापर्व शारदीय क्वांर नवरात्रि पर्व बर्फानी आश्रम स्थित मां पाताल भैरवी राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी दश महाविद्या द्वादश ज्योर्तिलिंग शिव शक्ति सिद्धपीठ में संपन्न होने के बाद संस्था द्वारा मानव एवं जनकल्याण के तहत स्वांस, दमा व अस्थमा पीड़ितों को पिछले 27 वर्षों से दुर्लभ जड़ी बुटियां एकत्रित कर पौराणिक मान्यताओं अनुसार जड़ी बुटी युक्त खीर प्रसादी तैयार कर स्वांस, दमा व अस्थमा पीड़ितों को ब्रम्हमुहूर्त में वितरीत की जाती है। इस वर्ष भी संस्था द्वारा लगभग 30 हजार से भी अधिक पीड़ितों के लिए खीर प्रसाद तैयार करवाया जा रहा है। जिसे शरद पूर्णिमा की रात्रि चन्द्रकला से प्राप्त होने वाली अमृतरूपी प्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं को नि:शुल्क वितरीत किया जाएगा। इसके लिए संस्था ने व्यापक पैमाने पर तैयारी प्रारंभ कर दी है। वहीं पीड़ितों से पंजीयन कराने की अपेक्षा की है। पीड़ित प्रसाद ग्रहण करने से 6 घंटा पूर्व व पश्चात न सोये। संस्था द्वारा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने की दृष्टिकोण से प्रतिवर्ष विलुप्त होती व मनोरंजन के भरपूर रहने वाली नाचा पद्धति के अलावा लोक कलामंच व लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस वर्ष भी संस्कारधानी के लोक कलाकार विष्णु कश्यप द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक कलामंच स्वरधारा के कलाकारों द्वारा कर्मा, ददरिया, सुवा, जस व पारंपरिक गीत व नृत्य के अलावा हास्य व्यंग्य प्रहसन प्रस्तुत किया जाएगा।
इस आयोजन को लेकर संस्था के अध्यक्ष राजेश मारु, उपाध्यक्ष दीपक जोशी, सचिव गणेश प्रसाद शर्मा ‘गन्नू’, कोषाध्यक्ष नीलम जैन, महंत गोविंद दास, गुरुचरण सिंह छाबड़ा, महेन्द्र लुनिया, दामोदर अग्रवाल, कमलेश सिमनकर, संतोष खंडेलवाल, सूरज जोशी, आलोक जोशी, लीलाधर सिंह, कुलबीर छाबड़ा, संजय खंडेलवाल, योगेन्द्र पांडे, मनीष परमार सहित अन्य सदस्यगण तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं।
समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का की खरीदी के लिए : किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक
रायपुर | खरीफ विपणन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान और मक्का की खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन एक जुलाई से चल रहा है, जो 31 अक्टूबर तक चलेगा। पंजीयन के लिए सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सहकारी समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन करा सकते हैं।
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन 2024-25 में नया पंजीयन, फसल, रकबा संशोधन एवं कैरी फारवर्ड हेतु 1 जुलाई 2024 से किसानों का पंजीयन प्रारंभ किया गया है। सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन, फसल, रकबा संशोधन एवं कैरी फारवर्ड शीघ्र पूर्ण करा सकते हैं एवं वारिसान पंजीयन हेतु तहसील कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं, ताकि धान विक्रय करने वाले किसान को कृषक उन्नति योजना का लाभ प्राप्त हो सके।
कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदेश के किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने की दृष्टि से कृषक पंजीयन की प्रकिया के सरलीकरण हेतु एकीकृत किसान पोर्टल विकसित किया गया है। एकीकृत किसान पोर्टल के नवीन पंजीयन तथा पंजीकृत फसल और रकबे में संशोधन की कार्यवाही 31 अक्टूबर तक सहकारी समिति के माध्यम से पंजीयन की जाएगी।
एकीकृत किसान पोर्टल में धान एवं मक्का उपार्जन योजना को भी सम्मिलित किया गया है। धान एवं मक्का कृषक को समर्थन मूल्य पर विक्रय करने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों को आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए पंजीकृत माना जाए एवं इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे एवं खसरे को राजस्व विभाग के माध्यम से अद्यतन करा लिया जाए। यह कार्य एकीकृत किसान पंजीयन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में आधार आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली के लिए किसान द्वारा धान विक्रय के समय धान खरीदी केन्द्र में स्वंय उपस्थित होकर या उनके द्वारा नामांकित नामिनी के द्वारा उपस्थित होकर बायोमेट्रिक आधारित खरीद प्रणाली के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया जा सकता है। इसके लिए किसान पंजीयन हेतु एकीकृत कृषक पंजीयन पोर्टल पर किसान का पंजीयन निर्धारित अवधि के दौरान किसान का एवं उसके एक नामिनी का आधार नंबर लिया जाएगा।
नामिनी के रूप में किसान के परिवार के नामित सदस्य में माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, दामाद-पुत्रवधू, सगा भाई-बहन एवं अन्य करीबी रिश्तेदार को मान्य किया जाएगा। किसान यदि गत वर्ष पंजीकृत नॉमिनी में परिवर्तन करना चाहता है, तो समिति स्तर पर संशोधन की कार्यवाही की जाएगी। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में नवीन पंजीयन कराने वाले किसान से नॉमिनी की जानकारी एकत्र किया जाएगा।
हिस्सेदार, बटाईदार तथा अधिया रेगहा के तहत फसल उगाने वाले कृषकों के लिए खेत का मालिकाना हक रखने वाले कृषक स्वंय पंजीयन करा सकेगा अथवा संबंधित कृषक का नॉमिनी के तौर पर पंजीयन करा सकेगा। प्रत्येक खरीदी केन्द्रों में बायोमेट्रिक व्यवस्था के सुचारू एवं व्यवस्थित संचालन हेतु एक स्थायी खरीदी केन्द्र प्रभारी नामांकित किया जाएग। खरीदी केंद्र प्रभारी का भी आधार नंबर एकत्रित किया जाएगा।
साय कैबिनेट की बैठक 16 अक्टूबर को... जानिए किन मुद्दों में हो सकती है चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 16 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक होगी। यह बैठक मंत्रालय में सुबह 11 बजे शुरू होगी। बैठक पर किसानों, सरकारी कर्मचारियों, और युवाओं की खास नजर रहेगी, क्योंकि इसमें कई अहम मुद्दों पर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
बतादें कि पिछली कैबिनेट 20 सितंबर को हुई थी, जिसके बाद से अब तक कोई बैठक नहीं हुई। इस महीने के पहले सप्ताह में बैठक आयोजित करने की योजना थी, लेकिन मंत्रियों की क्षेत्रीय व्यस्तताओं के कारण इसे स्थगित करना पड़ा। अब यह बैठक 16 अक्टूबर को आयोजित की जा रही है।
राज्य सरकार इस बैठक में धान खरीदी के मुद्दे पर चर्चा कर सकती है। मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने इस वर्ष के लिए 160 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रस्तावित तारीख 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की योजना है, जिस पर कैबिनेट की मंजूरी दी जा सकती है। बैठक में आगामी राज्योत्सव की तैयारियों पर भी चर्चा की जा सकती है। राज्योत्सव को भव्य रूप से मनाने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं और योजनाओं पर विचार हो सकता है।
गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित प्रसव के लिए बेहतर सुविधा : स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल
बलौदाबाजार के जिला अस्पताल में 9 महीने में हुए 462 सिजेरियन सहित 1 हजार 800 से अधिक प्रसव
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सुविधाओं एवं संसाधनों में लगातार इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास सतत रूप से जारी है। इसी कड़ी में बलौदाबाजार में कलेक्टर दीपक सोनी के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जिला अस्पताल बलौदाबाजार में इस वर्ष जनवरी 2024 से माह सितंबर तक 9 माह में कुल 1816 सफल प्रसव कराए गए हैं। उक्त प्रसव में से 1354 सामान्य प्रसव तथा 462 सिजेरियन शामिल है। सिजेरियन में आकस्मिक और पूर्व नियोजित दोनों ही सम्मिलित हैं।
जिला अस्पताल बलौदाबाजार के सिविल सर्जन डॉक्टर के. के. टेम्भूरने ने बताया कि अस्पताल में तीन स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ कुशल प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ अपनी सेवाएं देते हैं। यहाँ आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रसव कक्ष स्थापित है। प्रसव के बाद नवजात शिशु के देखभाल हेतु विशेष एस.एन.सी.यू. भी स्थापित है। उक्त कुल प्रसव में 161 बच्चों को उक्त एस.एन.सी.यू. में भर्ती कर उनकी विशेष देखभाल भी की गई।
ग्राम खैरा से माह सितंबर में अपनी 23 वर्षीय पत्नी को प्रसव पीड़ा पर जिला अस्पताल लेकर आएं नोहर पटेल ने बताया कि अस्पताल में आने पर उन्हे बताया गया कि फीटल डिस्ट्रेस की स्थिति है जिसमें भ्रुण तक ऑक्सीजन पहुँचने में दिक्कत होती है और बच्चे की धड़कन बढ़ती है। ऐसे में ऑपेरशन के माध्यम से प्रसव हुआ जिसमें मां और बच्चे दोनों ही स्वस्थ हैं। इसी प्रकार प्रोलांग लेबर (देर तक प्रसव पीड़ा) की स्थिति में आये हुए गिरौदपुरी के पास स्थित ग्राम खोसड़ा के रहने वाले महेंद्र पैकरा ने बताया कि 28 वर्षीय उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा काफी देर से हो रही थी जिस कारण जिला अस्पताल लेकर आया तथा यहाँ ऑपेरशन के माध्यम से प्रसव हुआ। अस्पताल में दवाई और अन्य सुविधाएं निःशुल्क प्राप्त हुई। इस प्रकार के ऑपेरशन का निजी अस्पताल में काफी पैसा खर्च होता, जो बच गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बलौदाबाजार डॉ. राजेश कुमार अवस्थी के अनुसार जिला अस्पताल एन.क्यू.ए.एस. प्रमाण पत्र धारी संस्था है। यह प्रमाण पत्र उच्च गुणवत्त्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करने के कारण राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन के बाद प्राप्त हुआ है। अस्पताल में प्रसव की इस सुविधा को लगातार बेहतर से और बेहतर करने का प्रयास जारी है, जिससे आम जनता को इसका लाभ प्राप्त हो सके।
अपनी क्षमताओं को पहचानने और जीवन में नई उचाईयों को छूने मिलेगी प्रेरणा
हरिलीला ट्रस्ट के मोटिवेशनल आयोजन में 16 को अवध ओझा और ओ.पी. चौधरी करेंगे शिरकत : सपनों को साकार करने का मिलेगा मंत्र
रायपुर | क्षेत्र की अग्रणी समाज सेवी संस्था हरिलीला ट्रस्ट का नि:शुल्क मोटिवेशनल आयोजन 16 अक्टूबर को अपरान्ह 4 बजे स्टेशन रोड जांजगीर-नैला में आयोजित होने जा रहा हैं। इस संबंध में ट्रस्ट के सचिव अमर सुल्तानिया ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा हैं। विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर अवध ओझा सर और पूर्व आई.ए.एस. तथा छ.ग. शासन के ऊर्जावान मंत्री ओ.पी. चौधरी सर सेशन के दौरान मौजूद विद्यार्थियों और जनसमूह को संबोधित करेंगे जिसमें उनके द्वारा सफलता के नई ऊचाईयों को छूने की कला तथा सपनों को साकार करने के मंत्र दिये जायेंगे। इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद कमलेश जांगड़े, जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, अकलतरा विधायक राघवेन्द्र सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, पूर्व विधायक सौरभ सिंह, जांजगीर-नैला नगर पालिका अध्यक्ष भगवान दास गढ़ेवाल विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
गौरतलब है कि हरिलीला ट्रस्ट बनारी समाज सेवा के लिए जांजगीर-चांपा जिले मे ही नही बल्कि पूरे अंचल में सुप्रसिद्ध है हर साल ट्रस्ट के अध्यक्ष लीलाधर सुल्तानिया जी के जन्मदिवस 16 अक्टूबर के अवसर पर जरूरतमंदो के विशेष सहयोग के लिए आयोजन कराये जाते है, गतवर्षो में भी छात्र छात्राओं और आमजन के लिए प्रेरणादायी आयोजन कराये जाते रहे हैं। जिसमें विश्वविख्यात मोटिवेटर और स्पीकर सोनू शर्मा, पूर्व आई.ए.एस. ओ.पी. चौधरी, शंकर गोयनका दिल्ली, डॉ. संतोष राय भिलाई शिरकत कर चुकें हैं। इन आयोजनों को आमजनता ने भरपूर स्नेह दिया था जिसकी वजह से यह आयोजन जिले के इतिहास में मील का पत्थर बन चुके हेैं।
बता दे कि जांजगीर नैला शहर में हरिलीला ट्रस्ट के आयोजन में इस बार विश्वविख्यात मोटिवेटर अवध ओझा सर और पूर्व आई.ए.एस. और छ.ग. शासन के मंत्री ओ.पी. चौधरी सर शिरकत कर रहें हैं। 16 अक्टूबर को आयोजित होने जा रहा यह कार्यक्रम छात्रों के साथ ही आम जनता के लिए महत्वपूर्ण और बहुउपयोगी रहेगा क्योकि इस दौरान दोनो मोटिवेटर, स्पीकर और एजुकेटर शिक्षा और समय का सही प्रबंधन, बदलते परिवेश में सफलता पाने, चुनौतियों से सामना करने का तरीका, प्रतियोगी परीक्षाओं के तैयारी के गुण सिखाएंगे साथ ही कल के इस विशेष आयोजन में छात्रों को जीवन बदलने का मौका मिलेगा। वे सफलता की सीढ़ी चढऩे का मंत्र सिखेंगे और इस सेशन के बाद नई ऊर्जा लेकर लौटेंगे जिससे वे अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होंगे।
आयोजक हरिलीला ट्रस्ट की ओर से सचिव अमर सुल्तानिया ने विद्यार्थियों और आमजनता से अनुरोध किया है कि आयोजन स्थल पर तय समय पर कार्यक्रम प्रारंभ हो जायेगा इसलिए असुविधा, अव्यवस्था से बचने और महत्वपूर्ण कार्यक्रम का लाभ उठाने समय से पहले पहुंचकर अपना स्थान सुरक्षित करने की अपील उन्होने की हैं। अमर सुल्तानिया ने बताया कि आयोजन को लेकर अंचल में भारी उत्साह है लगातार ट्रस्ट द्वारा दिये गए लिंक से पंजीयन करने की प्रक्रिया जारी हैं। अमर सुल्तानिया ने यह भी बताया कि 10वीं, 12वीं के प्रावीण्य सूची में स्थान बनाने वाले छात्र-छात्राओं का 21000 रू. नगद और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया जायेगा।
समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का की खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक
त्योहारी सीजन में यात्रियों को मिली बड़ी राहत... हर ट्रेन में लगेंगे चार जनरल कोच
रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर समेत जोन के किसी भी रेलवे स्टेशन की बात कर लीजिए, वहां से सबसे ज्यादा जनरल टिकट लेकर यात्री सफर करते हैं। लेकिन, कोच की कमी के कारण उन्हें या तो यात्रा रद करनी पड़ती है या फिर अतिरिक्त किराया देकर स्लीपर कोच से मंजिल तक पहुंचना पड़ता है।
इसकी वजह से यात्रियों को परेशानी होती थी। खासकर ऐसे यात्री, जो परिवार के साथ चलते हैं, उन्हें बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यात्रियों की इसी समस्या को अब रेल प्रशासन ने गंभीरता से लिया है और इसे दूर करने का प्रयास कर रही है। जब इस समस्या को दूर करने के विषय पर मंथन हुआ तो यह बात सामने आई कि जनरल कोच की संख्या बढ़ाने से न केवल सामान्य बल्कि स्लीपर के यात्रियों को राहत मिलेगी। दरअसल जनरल कोच में जगह नहीं मिलने पर यात्री स्लीपर कोच में जबरिया चढ़ते हैं।
इसके कारण आए दिन विवाद भी होता है। जिसे ध्यान में रखते हुए एक- एक कोच बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इन ट्रेनों में पहले से एक- एक जनरल कोच है, जो ट्रेन के आगे व पीछे जुड़ते हैं। दो अतिरिक्त कोच में ट्रेन की इसे हिस्से में जोड़े जाएंगे। इससे यात्रियों को ट्रेन की आगे की तरह और पीछे के हिस्से में दो- दो जनरल कोच की सुविधा मिलेगी। बिलासपुर रेल मंडल में अभी छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, एर्नाकुलम एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, चेन्नई एक्सप्रेस समेत आठ ट्रेनें एलएचबी कोच के साथ चलती है।
अतिरिक्त कोच इन्हीं में जोड़ने की तैयारी है। इस माह के अंत तक कुछ ट्रेनों में कोच जुड़ जाएंगे और बाकी ट्रेनों में नवंबर तक कोच जोड़ने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। बिलासपुर रेल मंडल से वैसे तो लगभग 17 ट्रेनें छूटती है। पर अभी कुछ ट्रेन पुराने नीले रंग के कोच से चलती है। इनमें अभी चार जनरल कोच की सुविधा लागू नहीं होगी। हालांकि आगामी दिनों में यह भी एलएचबी कोच के साथ चलेंगी।
मुख्यमंत्री साय 14 अक्टूबर को एक दिवसीय सूरजपुर और रायगढ़ प्रवास पर
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 14 अक्टूबर को एक दिवसीय रायगढ़ जिले के लैलूंगा प्रवास पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम अनुसार मुख्यमंत्री साय 14 अक्टूबर को दोपहर 2.15 बजे ग्राम-सिलौटा, जिला-सूरजपुर से हेलीकाप्टर द्वारा प्रस्थान कर अपरान्ह 3 बजे लैलूंगा पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय अपरान्ह 3.05 बजे वृहत सम्मेलन एवं उरांव समाज के करमा महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री श्री साय शाम 4.10 बजे लैलूंगा से रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।
बतादें कि मुख्यमंत्री 11.35 को रायपुर पुलिस परेड ग्राउंड से सूरजपुर के लिए प्रस्थान करेंगे। वे 12.35 को सूरजपुर पहुंचेगे। वहां वे जिला स्तरीय सर्व आदिवासी समाज के कर्मा महोत्सव में शामिल होंगे। दोपहर 2.15 बजे वहां से रवाना होकर वे रायगढ़ पहुंचेगे। जहां वे करमा महोत्सव में शामिल होंगे। वहीं शाम 5 बजे तक रायपुर लौट आएंगे।