रायपुर
दाल की कीमतों पर प्रशासन की कड़ी नजर... कारोबारियों को दिए गए ये निर्देश
रायपुर। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा दाल के व्यापारियों (मिलर्स, डीलर्स, ट्रेडर्स, स्टॉकिस्ट, आयातक) को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। जिला स्तर पर इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक कार्यवाही तेज कर दी गई है।
महासमुंद जिले के खाद्य अधिकारी ने बताया कि दाल कारोबारियों को निर्देश दिया गया है कि अरहर और अन्य दालों पर लागू स्टॉक सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी व्यापारी जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें तत्काल पंजीकरण कराना होगा। साथ ही, अपने स्टॉक की नियमित घोषणा उपभोक्ता मामले विभाग के पोर्टल (fcainfoweb.nic.in@psp) पर दर्ज करनी होगी।
मौजूदा स्थिति के अनुसार, राज्य में लगभग 50% पंजीकृत व्यापारियों द्वारा ही स्टॉक की घोषणा की जा रही है। शेष व्यापारियों को भी नियमित घोषणा करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी व्यापारी का स्टॉक निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाता है, तो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी और मामला सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत किया जाएगा।
दालों की निगरानी और मॉनिटरिंग के लिए मनीष यादव, सहायक खाद्य अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। संपर्क के लिए उनका मोबाइल नंबर +91-9926545105 जारी किया गया है। त्योहारी मौसम में दाल की कीमतों पर अनुचित वृद्धि को रोकने के लिए प्रशासन सक्रिय रूप से सतत निगरानी करेगा।
प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि वे अपने प्रभार क्षेत्र में खुदरा संघों के साथ समय-समय पर बैठकें आयोजित करें। दाल कारोबारियों को पोर्टल पर स्टॉक की घोषणा करने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके अलावा, बड़े खुदरा विक्रेताओं द्वारा 30 किलो के थोक पैक में दाल बेचने की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी, ताकि जीएसटी से बचने के प्रयासों को रोका जा सके।
अनियंत्रित कार ने बिजली के खंभे को मारी टक्कर, बाल-बाल बचे मॉर्निंग वॉक कर रहे लोग
रायपुर। राजधानी के सत्ती बाजार इलाके में सोमवार सुबह तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर कार ने बिजली के खंभे में टक्कर मार दी, जिससे क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति बाधित हो गई। इस टक्कर का असर सड़क के पास स्थित एक स्टेशनरी दुकान पर भी पड़ा, और दुकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई।
हादसे के वक्त स्थानीय लोग जो मॉर्निंग वॉक पर थे, उन्होंने किसी तरह से अपनी जान बचाई। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई। कार का चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया, जबकि कार के पास पुलिस का तख्ती भी लगी हुई थी।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने कार को जब्त कर लिया है, और अब चालक की तलाश में जुट गई है। कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने इलाके में डर का माहौल बना दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की जांच करेंगे और दोषी चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
नंदनवन जंगल सफारी के ‘‘प्रकृति दर्शन’’ कार्यक्रम में 7000 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया भाग
पर्यावरण शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा नंदनवन
रायपुर | नंदनवन नया रायपुर द्वारा संचालित ‘‘प्रकृति दर्शन कार्यक्रम’’ के तहत प्रदेश के 50 से अधिक स्कूल और 10 से अधिक कॉलेज के लगभग 7000 विद्यार्थियों ने भाग लिया है। प्रकृति दर्शन कार्यक्रम से विद्यार्थियों को प्रकृति और वन्यजीवों से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना, पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है। नंदनवन जंगल सफारी में भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को न केवल प्रकृति और जैव विविधता के अद्भुत पहलुओं को समझने का अवसर मिलता है, बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण के महत्व और उससे संबंधित चुनौतियों को भी समझने का मौका मिलता है।
अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी का लिया जा रहा है सहयोग: नंदनवन द्वारा अज़ीम प्रेम जी यूनिवर्सिटी फाउंडेशन फॉर द लॉजिकल सिक्योरिटी और अन्य संस्थाओं के सहयोग से फारेस्ट ऑफ़ लाइफ थीम तथा विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण शिक्षा अंतर्गत विभिन्न मोड्यूल तैयार किए गए है।
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को अनुभवी प्राकृतिक विशेषज्ञों और वन्यजीव संरक्षणविदों से प्रत्यक्ष रूप से सीखने का अवसर प्रदान करता है। इसके साथ ही, यह कार्यक्रम युवाओं में प्रकृति के प्रति लगाव विकसित कर उन्हें पर्यावरणीय समस्याओं और उनके समाधान की दिशा में प्रेरित करता है। नंदनवन जंगल सफारी का यह प्रयास पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है और भावी पीढ़ियों को प्रकृति से जोड़ने का एक ठोस कदम है। इस कार्यक्रम के लिए स्कूली छात्रों के लिए 50 रूपए एवं कॉलेज के छात्रों के लिए 100 रूपए निर्धारित किया गया है।
नंदनवन के संचालक धम्मशील गणवीर ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि इस कार्यक्रम से अधिक से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ा जाए और उन्हें प्रकृति के महत्व को समझने व उसके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाए। हमारा यह प्रयास न केवल पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित करता है, बल्कि एक हरित और स्थायी भविष्य के निर्माण में योगदान देने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
इस कार्यक्रम के साथ जुड़ने क़े लिए नंदनवन के पर्यावरण शिक्षा कोऑर्डिनेटर चन्द्रमणी साहू +91-8120855525, +91-9302325664, +91-9893108393 से संपर्क किया जा सकता है।
शासकीय सेवकों पर आश्रितों के लिए आय की अधिकतम सीमा में वृद्धि को वित्त विभाग से मंजूरी
रायपुर | वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों पर आश्रितों की अधिकतम आय सीमा में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब शासकीय सेवकों के आश्रितों के लिए आय की अधिकतम सीमा 3 हजार 50 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 7 हजार 750 रुपये प्रतिमाह करने को स्वीकृति प्रदान की गई है।
उल्लेखनीय है कि साल 2014 के बाद से शासकीय सेवकों के आश्रितों के लिए आय की अधिकतम सीमा में कोई वृद्धि नहीं की गई थी, जबकि राज्य में श्रमिकों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है। अर्द्ध कुशल श्रमिकों के लिए दैनिक मजदूरी की दर अब 10,900 रुपये प्रति माह तक पहुंच गई है। ऐसे में शासकीय सेवकों के आश्रित सदस्य 3 हजार 50 रुपये प्रतिमाह से अधिक आय प्राप्त कर रहे थे, उन्हें परिवार पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब, आय सीमा बढ़ाने के साथ जिन आश्रितों की आय 3,050 रुपये से अधिक थी, वे सभी परिवार पेंशन का लाभ प्राप्त करने के पात्र हो सकेंगे।
इस कदम से शासकीय सेवकों के आश्रितों की स्थिति सुधरेगी और आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी, जो शासकीय सेवक के निधन के बाद परिवार पेंशन पर निर्भर रहते हैं। आय सीमा में इस वृद्धि से उन्हें भी अब परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा।
एनआईटी में ह्यूमन कंप्यूटर इंटरैक्शन और कंप्यूटर विजन पर कार्यशाला
रायपुर। एनआईटी रायपुर के रोबोटिक्स क्लब द्वारा 16 नवंबर को ह्यूमन कंप्यूटर इंटरैक्शन और कंप्यूटर विजन पर वर्कशॉप का आयोजन किया गया था, जिसमें स्पीकर के रूप मे एआई विशेषज्ञ डॉ. अविनाश कुमार सिंह मौजूद रहे, उन्होंने ह्यूमन कंप्यूटर इंटरैक्शन और रोबोटिक्स विजन के बारे में चर्चा की। इस कार्यशाला का आयोजन रोबोटिक्स क्लब के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. राजेश डोरिया के मार्गदर्शन में किया गया।
डॉ. राजेश डोरिया ने सत्र की शुरुआत करते हुए चर्चा की जाने वाली योजनाओं को साझा किया और एआई और रोबोटिक्स के क्षेत्र में डॉ. अविनाश कुमार सिंह के योगदान के बारे में बताया। डॉ. अविनाश ने अपनी बात की शुरुआत ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरैक्शन (HCI) के महत्व को समझाकर की। उन्होंने इसके अनुप्रयोगों जैसे विज़ुअल ग्राउंडिंग और जेस्चर रिकग्निशन के उदाहरण दिए और दैनिक जीवन में इसकी भूमिका पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने HCI तकनीक के भविष्य के विकास पर भी अंतर्दृष्टि प्रदान की।
इंटरैक्टिव सत्र के दौरान, छात्रों ने रोबोटिक्स में चुनौतियों, नवीनतम प्रगति और मौजूदा तकनीकों में आवश्यक सुधारों के बारे में कई सवाल पूछे। डॉ. अविनाश ने कॉम्प्लेक्स एआई और रोबोटिक्स समस्याओं को छोटे भागों में विभाजित करके प्रभावी समाधान खोजने की रणनीति पर जोर दिया, जिससे प्रतिभागियों ने सहमति जताई। सेमिनार में छात्रों को मूल्यवान ज्ञान प्रदान किया गया और उन्हें ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरैक्शन और रोबोटिक्स विज़न के क्षेत्रों में अवसरों की खोज करने के लिए प्रेरित किया।
छत्तीसगढ़ में पिछले 11 महीनों में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) : अंतर्गत आवासों के निर्माण में आई तेजी
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लिए सर्वेक्षण शुरू, नए हितग्राहियों को भी अब मिलेंगे आवास
पिछले 11 माह में लगभग 50 हजार आवासों का निर्माण पूर्ण
रायपुर | छत्तीसगढ़ में पिछले साल दिसम्बर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद से शहरों में प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों में तेजी आई है। दिसम्बर-2023 से अक्टूबर-2024 के बीच पिछले 11 महीनों में ही करीब 50 हजार आवासों के निर्माण पूर्ण किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर गरीब के लिए आशियाने के सपने को पूरा करने का काम छत्तीसगढ़ में तेजी से हो रहा है। दिसम्बर-2023 में राज्य में नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों में तेजी लाते हुए 49 हजार 834 आवासों का काम पूर्ण किया गया है। इनमें विभिन्न शहरों के हितग्राहियों द्वारा अपनी खुद की जमीन पर बनाए गए 44 हजार 419 और योजना के साथ भागीदारी में किफायती आवासीय परियोजनाओं के माध्यम से निर्मित 5415 आवास शामिल हैं।
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने बताया कि बीते 11 महीनों में योजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति में अच्छी तेजी आई है। सभी नगरीय निकायों में बनाए जा रहे आवासों और निर्माण एजेंसियों के कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है और उन्हें गरीबों के आशियाने के सपने को जल्द पूरा करने के लिए तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 11 महीनों के दौरान हर माह औसतन हितग्राहियों द्वारा अपनी खुद की भूमि में बनाए जा रहे 4002 मकानों के काम पूर्ण किए गए हैं, जबकि वर्ष 2018 से 2023 के बीच यह औसत केवल 1592 थी। योजना के साथ भागीदारी में बनाए जा रहे किफायती आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और आबंटन में भी तेजी लाते हुए विगत 11 महीनों में 7348 परिवारों को आवास आबंटित कर 5855 हितग्राहियों को पूर्ण आवासों में व्यवस्थापित किया गया है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लिए भी प्रदेश में सर्वेक्षण शुरू हो गया है। इसके अंतर्गत ऐसे शहरी पात्र परिवार जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के पहले चरण में आवास नहीं मिल पाए थे, उन्हें पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 में हितग्राहियों की सुविधा के लिए आवास हेतु आवेदन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। आवास के आवेदन सरलतापूर्वक ऑनलाईन माध्यम से भारत सरकार के अधिकृत पोर्टल पर स्वयं हितग्राही द्वारा दर्ज किया जा सकता है। इसके साथ ही प्रदेश की सभी 189 अधिसूचित नगरीय निकायों में हेल्पडेस्क के माध्यम से भी आवेदन की प्रक्रिया संपादित की जा सकती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में कुल दो लाख 49 हजार 166 आवास स्वीकृत हैं। इनमें लाभार्थियों द्वारा अपनी खुद की भूमि पर बनाए जाने वाले दो लाख 11 हजार 069 और किफायती आवासीय परियोजनाओं के तहत बनने वाले 38 हजार 097 आवास शामिल हैं। शहरी गरीबों के स्वयं के पक्के मकान का सपना जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा तेजी से इन आवासों का निर्माण किया जा रहा है। योजना के तहत राज्य में अब तक कुल एक लाख 96 हजार 967 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं, जिनमें से एक लाख 74 हजार 967 आवास हितग्राहियों द्वारा बनाए गए हैं। वहीं किफायती आवासीय परियोजनाओं के तहत 21 हजार 600 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत प्रदेश के नगरीय निकायों में अभी कुल 48 हजार 346 आवासों का काम प्रगति पर है, जिन्हें तेजी से पूरा किया जा रहा है।
ड्रग्स सप्लायर गैंग का सरगना 'प्रोफेसर' गिरफ्तार... जेल से छूटने के बाद फिर हो गया था सक्रिय
रायपुर। रायपुर क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स का कारोबार करने वाले आयुष अग्रवाल उर्फ 'प्रोफेसर' को गिरफ्तार कर लिया है। आयुष पर आरोप है कि वह रायपुर समेत पूरे प्रदेश में अवैध रूप से ड्रग्स की सप्लाई का संचालन कर रहा था। पहले भी इस मामले में गिरफ्तार हो चुका आयुष जेल से रिहा होने के बाद फिर से अपने गिरोह को सक्रिय कर रहा था।
बता दें कि रायपुर में हाल के दिनों में ड्रग्स की आपूर्ति बढ़ने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गुप्त रूप से जांच शुरू की। क्राइम ब्रांच को आयुष अग्रवाल के सक्रिय होने की सूचना मिली, जिसके बाद टीम ने छापा मारकर उसे हिरासत में ले लिया।
जांच में पता चला कि 'प्रोफेसर' जेल से बाहर आने के बाद ड्रग्स सप्लाई के अपने पुराने नेटवर्क को फिर से मजबूत कर रहा था। क्राइम ब्रांच की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आयुष का नेटवर्क केवल रायपुर तक सीमित नहीं था, उसकी गैंग प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी ड्रग्स की आपूर्ति कर रही थी।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने ड्रग्स की डिलीवरी के लिए नई रणनीतियां और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो रहा था. अब गिरोह के सरगना की गिरफ्तारी से बाकी सदस्यों तक पहुंचने की संभावना बढ़ गई है। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने कहा है कि यह गिरफ्तारी उनकी बड़ी सफलता है, लेकिन मामले की जांच अभी जारी है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों की पहचान कर उन्हें भी गिरफ्तार करने की योजना है।
पुलिस ने ड्रग्स जैसे घातक कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है. उन्होंने साफ किया कि राज्य में ड्रग्स के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। अधिकारियों ने कहा है कि वे इस मामले में और सबूत इकट्ठा कर रहे हैं ताकि गिरोह के हर सदस्य को कानून के दायरे में लाया जा सके।
एनआईटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटर टेक्नोलॉजीज, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डेटा एनालिटिक्स पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर के आईटी विभाग द्वारा 15 से 17 नवंबर तक हाइब्रिड मोड में चलने वाले द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटर टेक्नोलॉजी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डेटा एनालिटिक्स" एआईसीटीए 2024 का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एनवी रमना राव ने ऑनलाइन माध्यम से डेटा एनालिटिक्स और एआई के विभिन्न अनुप्रयोगों से हो रहे परिवर्तन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह तीन दिवसीय सम्मेलन आधुनिक तकनीकियों में रुचि रखने वाले सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए लाभदायक साबित होगा और तकनीकी प्रगति में नए आयाम स्थापित करेगा। उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में ब्रेन एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर डॉ अविनाश कुमार सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान निदेशक महोदय द्वारा सम्मेलन की एब्सट्रेक्ट बुक का अनावरण भज किया गया|
AICTA 2024 के सचिव डॉ. राजेश डोरिया ने सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया और सम्मेलन का सार प्रदान किया। डॉ. डोरिया ने कार्यक्रम पर प्रकाश डाला और बताया कि 1 जुलाई 2024 से 18 सितंबर 2024 तक शोध पत्र आमंत्रित किए गए। सम्मेलन में तीन प्राथमिक ट्रैक शामिल हैं- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरसिक्यूरिटी (CT), और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) | एक महीने में 130 समीक्षकों द्वारा प्रस्तुत किए गए 320 शोध पत्र की समीक्षा की गई, जिसमें प्रत्येक पेपर को कम से कम 3 समीक्षकों द्वारा जांचा गया और इनमें से 62 पेपर (19.3%) मौखिक प्रस्तुतियों के लिए चुने गए।
आईटी विभाग के एचओडी और इस सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बताया कि माइंड इंटरनेशनल सोसाइटी और संस्थान के आईटी विभाग के सहयोग से आयोजित इस विशेष सम्मेलन में 13 तकनीकी सत्र, 3 विशेष सत्र और जनरेटिव एआई पर एक निःशुल्क कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा जिसमें देश-विदेश से कई शोधकर्ता और विशेषज्ञ भाग लेंगे जो इस क्षेत्र में हो रहे अत्याधुनिक अनुसंधान और उनके प्रभाव पर चर्चा करेंगे।
इसके बाद आयोजित वर्कशॉप में डॉ अविनाश सिंह ने अपने संबोधन में एआई व जनरेटिव एआई के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि तकनीक तेजी से बदल रही है और एआई हमारे दैनिक जीवन को नया आयाम दे रहा है। उन्होंने जनरेटिव एआई की परिभाषा देते हुए कहा, "यह ऐसी प्रणाली है जो अपने प्रशिक्षण डेटा की संरचना को समझकर नई जानकारी उत्पन्न करती है।" उन्होंने जनरेटिव एआई के विकास, उपयोग और इसके द्वारा आने वाले बदलावों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रमुख वक्ता ने एआई के अलग-अलग मॉडल्स जैसे विज़न लैंग्वेज मॉडल, ऑडियो लैंग्वेज मॉडल, और मल्टीमॉडल एलएलएम पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह तकनीक चित्रों की कैप्शनिंग, टेक्स्ट को ऑडियो में बदलने और भाषाओं का अनुवाद करने जैसी क्षमताओं के लिए उपयोगी है।
प्रोफेसर राजकुमार बुय्या, मेलबर्न विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया ने क्लाउड और एज कंप्यूटिंग में प्रगति: मांजरासॉफ्ट के अनेका प्लेटफॉर्म के साथ नेक्स्ट-जेन IoT और क्वांटम अनुप्रयोगों को सशक्त बनाना" और प्रोफेसर आयोनिस पिटास, प्रोफेसर, अरस्तू यूनिवर्सिटी ऑफ थेसालोनिकी (AUTH), ग्रीस ने प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के लिए बिग डेटा एनालिटिक्स पर अपने व्यक्तव्य दिए।
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रदेश के 14 स्वास्थ्य संस्थाओं को मिला गुणवत्ता आश्वासन प्रमाण
रायपुर। उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा और मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने वाले छत्तीसगढ़ के 14 शासकीय अस्पतालों को केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS – National Quality Assurance Standard) प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। इनमें 10 आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र, 03 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञों की टीम द्वारा विगत अक्टूबर व नवंबर माह में इन अस्पतालों में मरीजों के लिए उपलब्ध सेवाओं की गुणवत्ता के परीक्षण के बाद राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गुणवत्ता आश्वासन के मानकों पर खरा उतरने वाले स्वास्थ्य केंद्रों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार बेहतर हो रही हैं और 14 शासकीय अस्पतालों को केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र मिलना इसी का नतीजा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा महासमुंद ज़िले के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र भदरसी को 91.29% , बड़े टेमरी को 90.27%, झलप को 91.93% व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नयापारा को 88.89% के साथ सूरजपुर ज़िले के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र नवापाराकला को 76.09%, धरमपुर को 87.75% व कांकेर जिले आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र मुसरपट्टा को 94.2%,पीवी89 को 85.58%, कोदागांव को 93.36%, माकरीखुना को 81.54 व बलौदाबाजार ज़िले के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद् ठेलकी को 86.83%, रायगढ़ जिले के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र छर्राटानगर को 82.39%, बस्तर जिले के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र जमावड़ा को 88.99% व रायपुर ज़िले के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सिलयारी को 88.15% अंक प्राप्त हुए हैं ।
राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र प्रदान करने के पूर्व विगत माह भारत सरकार के विशेषज्ञों की टीम द्वारा अस्पताल की सेवाओं और संतुष्टि स्तर का विभिन्न मानकों पर परीक्षण किया गया। इनमें उपलब्ध सेवाएं, मरीजों के अधिकार, इनपुट, सपोर्ट सर्विसेस, क्लिनिकल सर्विसेस, इन्फेक्शन कंट्रोल, गुणवत्ता प्रबंधन और आउटकम जैसे पैरामीटर शामिल हैं। इन कड़े मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गुणवत्ता प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।
जशपुर से राजधानी पहुंचे मुंडारी नर्तक दल के कलाकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात
रायपुर में ग्रामीण आवास पर 2 दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का हुआ आयोजन
ग्रामीण आवास के प्रभावी कार्यान्वयन और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय सुदृढ़ कार्यशाला का हुआ आयोजन
कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश राज्य के प्रतिनिधियों ने लिया भाग
रायपुर | भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से रायपुर में दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। 13 और 14 नवंबर को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीण आवास के प्रभावी कार्यान्वयन और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के ग्रामीण आवास के उप महानिदेशक गया प्रसाद, ग्रामीण आवास निदेशक शक्तिकांत सिंह, एकीकृत वित्त प्रभाग (आईएफ़डी) के निदेशक शैलेश कुमार, संयुक्त निदेशक आशीष शिंदे और आईटी के संयुक्त निदेशक अजय मोरे शामिल थे। उपस्थित अधिकारियों ने ग्रामीण आवास परियोजनाओं में नवाचार और सहयोग को बढ़ाने के लिए विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की।
इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इस बहु-राज्यीय सहभागिता ने देशभर में ग्रामीण आवास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राज्यों के बीच ज्ञान-विनिमय और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
13 नवंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यशाला का शुभारंभ हुआ, जहां विशेषज्ञों और अधिकारियों ने ग्रामीण आवास में सर्वोत्तम प्रक्रियाओं, समन्वय मॉडलों और तकनीकी समाधानों पर गहन विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव निहारिका बारीक सिंह, संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना रजत बंसल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
राज्यपाल डेका ने हमारा समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट के कार्यों को सराहा
रायपुर | राज्यपाल रमेन डेका ने राजधानी दिल्ली में गरीब महिलाओं एवं बच्चों के लिए कार्य कर रही संस्था हमारा समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारिका स्थित संस्था का भ्रमण किया। उन्होंने संस्था के कार्यों की जानकारी ली। यह संस्था छोटे-मोटे रोजगार कर अपना जीवन यापन करने वाले गरीब परिवारों के महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल एवं उनके व्यक्तित्व विकास, और उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रही है। डेका ने ट्रस्ट के कार्यों की सराहना की साथ ही छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में भी स्वास्थ्य कैंप लगाने का अनुरोध किया।
जनजातीय गांवों में धार्मिक और मांगलिक कार्य के लिए अखरा निर्माण विकास की योजना होगी शुरू
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साइंस कॉलेज मैदान में राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास बहुत समृद्ध और गौरवशाली है। पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समुदाय के मान, सम्मान और गौरव को बढ़ाने का काम किया है। अटल जी ने जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए पृथक से मंत्रालय बनाया और इस समुदाय के विकास को एक नई दिशा दी। प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं शुरू की है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 24,000 करोड़ रूपए और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए 80,000 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया है, जिसके चलते जनजातीय इलाकों में तेजी से बुनियादी सुविधाओं का विकास और जनजातियों की बेहतरी के काम हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती वर्ष समारोह के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बैगा, गुनिया, सिरहा लोगों के लिए मुख्यमंत्री सम्मान निधि दिए जाने की घोषणा की। इसके तहत उन्हें प्रति वर्ष 5 हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने जनजातीय गांवों में धार्मिक एवं मांगलिक कार्य के लिए अखरा निर्माण विकास योजना शुरू करने और जनजातीय समुदाय के शहीदों की प्रतिमाएं चिन्हित स्थलों पर स्थापित किए जाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने समारोह में जनजातीय समुदाय के विभूतियों, राज्य में हुए जनजातीय विद्रोह के शहीदों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया। उन्होंने जनजातीय चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर वन अधिकार अधिनियम से संबंधित ‘‘एटलस‘‘, कैलेण्डर ‘‘शौर्यांजलि‘‘ तथा ‘‘हल्बा जनजातीय की वाचिक परंपराएं‘‘ विषय पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया। इनका प्रकाशन छत्तीसगढ़ आदिम जाति विकास विभाग द्वारा किया गया है।
आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए चिंता की है। उन्होंने इस समुदाय के विकास के लिए कई योजनाएं संचालित की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से छत्तीसगढ़ के साढे छह हजार गांवों और ग्रामीणों का समग्र विकास होगा। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समुदाय के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।
गुरुनानक देव जी ने दिया समतामूलक समाज के निर्माण पर जोर- मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री साय की पहल पर नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए भारत सरकार ने मंजूर किए 230 करोड़ रुपए
सभी नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अधोसंरचना को किया जाएगा मजबूत
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल से मिलकर राशि स्वीकृत करने का किया था अनुरोध
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 230 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत स्वीकृत इस राशि से सभी नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अधोसंरचना और तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाएगा। इससे राज्य में अपशिष्ट प्रबंधन और ज्यादा पुख्ता तथा टिकाऊ होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के इस सहयोग के लिए भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस राशि से शहरों में स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों को नया आयाम मिलेगा। यह राज्य के प्रत्येक नगरीय निकाय को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा स्वीकृत इस राशि से प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अपशिष्ट प्रबंधन के इन्फ्रॉस्ट्रक्चर को बेहतर और स्थाई बनाया जाएगा। इससे राज्य में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक तकनीकी, भौतिक और मानव संसाधन जुटाए जाएंगे, जिससे न केवल स्वच्छता की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि नागरिकों को भी बेहतर पर्यावरणीय सुविधाएं मिलेंगी।
उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने विगत दिनों अपने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात कर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यों के लिए राशि मंजूर करने का आग्रह किया था। उन्होंने राज्य के शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को और अधिक सुगम तथा प्रभावी बनाने केंद्र सरकार से सहयोग का अनुरोध किया था। राज्य शासन के नगरीय प्रशासन विभाग के प्रस्तावों के आधार पर केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए छत्तीसगढ़ के लिए 230 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि इस पहल से छत्तीसगढ़ को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने स्वच्छता को हर नागरिक के दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर देते हुए कहा कि संपूर्ण स्वच्छता के लिए सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं जीवन में उल्लास भी भरती हैं : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री शामिल हुए महादेव घाट के कार्तिक पुन्नी मेला में
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर राजधानी रायपुर के पवित्र खारून नदी के तट महादेव घाट पहुंचकर श्री हाटकेश्वर महादेव और मां काली के दर्शन किए। उन्होंने श्री हाटकेश्वर महादेव और मां काली की पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों के खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने पवित्र महादेव घाट में कार्तिक स्नान के लिए जुटे श्रद्धालुओं का अभिवादन कर सभी को कार्तिक पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरूण साव और विधायक मोतीलाल साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर महादेव घाट में आयोजित होने वाला पुन्नी मेला बहुत लोकप्रिय है। दूर-दूर से लोग इसमें बड़ी श्रद्धा के साथ हिस्सा लेने आते हैं। श्री साय ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक, धार्मिक परंपराएं न केवल हमारी आस्था को मजबूत करती हैं अपितु हमारे जीवन में उल्लास भी भरती हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से हमने प्रदेशवासियों को अपने आराध्य भगवान श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या भेजने की निःशुल्क की व्यवस्था की है। साय ने मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के शीघ्र शुरू किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि इससे 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक तीर्थ यात्रा पर जा सकेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज से हमने प्रदेश के 25 लाख से अधिक किसानों से धान खरीदी की शुरूआत कर दी है। जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर देश भर से आए जनजाति कलाकारों ने राजधानी में मनमोहक नृत्यों की प्रस्तुति दी। उन्होंने आज नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने की जानकारी भी लोगों के साथ साझा की।