रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक से पहले मौसम का मिजाज बदलने लगा है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले पांच दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। साथ ही दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थिति अनुकूल हैं।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। बुधवार को प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस रायपुर में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में रिकॉर्ड किया गया। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार दुर्ग में सर्वाधिक 3 सेमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा जशपुरनगर में 2 सेमी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के केल्हारी में 1 सेमी, जशपुर के मनोरा में 1 सेमी और बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर में 1 सेमी वर्षा दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार पंजाब से हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक समुद्र तल पर एक मौसमी द्रोणिका बनी हुई है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश से पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी विदर्भ और तेलंगाना होते हुए दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश तक समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक एक द्रोणिका सक्रिय है। वहीं पूर्वी विदर्भ और उससे लगे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर श्री डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले बने।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मश्री अजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है।
रायपुर। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार, 16 जून को एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि अब कफ सीरप खरीदने के लिए डॉक्टर का पर्चा होना जरूरी होगा. सीरप वाली सभी दवाइयों पर यह नियम लागू होगा. सरकार ने एक संशोधन के जरिए ड्रग रूल्स, 1945 के 'शेड्यूल के' से सीरप शब्द हटा दिया है, जिसके बाद यह बदलाव लागू हुआ है.
नए नियमों के तहत, ग्रामीण इलाकों में अब पंजीकृत फार्मेसियों पर ही कफ सीरप बेची जा सकेंगी. इससे पहले तक 1,000 से कम लोगों की आबादी वाले गांवों में, जहां कोई पंजीकृत फार्मेसी मौजूद नहीं होती थी, वहां दुकानदारों को कफ सीरप जैसे मेडिकल उत्पादों को बेचने का सीमित लाइसेंस जारी किया जाता था.
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस कदम से कफ सीरपों के जिम्मेदार वितरण और बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इन कदमों के जरिए भारत सरकार, कफ सीरपों की बिक्री पर अपनी निगरानी बढ़ा रही है. बीते साल अक्टूबर में मिलावट वाली कफ सीरप के चलते कई बच्चों की मौत होने के बाद सरकार ने इस मामले में सख्ती बढ़ाई है.
रायपुर। रायपुर के लाखे नगर क्षेत्र स्थित मुकुट नगर कॉलोनी में आवारा पशुओं और कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों के कारण आए दिन लोगों को परेशानी और खतरे का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में सांड के हमले में एक व्यक्ति के घायल होने की घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार मुकुट नगर निवासी बाबू पाण्डेय सांड के हमले में घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। इस घटना ने कॉलोनी में आवारा पशुओं की समस्या को फिर से उजागर कर दिया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कॉलोनी की सड़कों पर बड़ी संख्या में आवारा मवेशी और कुत्ते खुलेआम घूमते रहते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। खासकर छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने में डर महसूस होता है। शाम के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब पशुओं के झुंड सड़कों पर जमा हो जाते हैं और आवागमन बाधित होता है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम प्रशासन द्वारा इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कॉलोनीवासियों ने नगर निगम से मांग की है कि आवारा पशुओं और कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि सड़क पर चलना अब सुरक्षित नहीं रह गया है और हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इस कारण क्षेत्र में रहने वाले लोग लगातार प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। नगर निगम प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन घटना के बाद लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ गई है।
रायपुर - भारतीय जैन संगठना के केंद्रीय कार्यालय, पुणे के निर्देशानुसार अंतर्राष्ट्रीय फादर्स डे का आयोजन महाराष्ट्र मंडल के सभागार में दिनांक 14.06.2026 (रविवार) को प्रातः 11:00 बजे किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात शिखा जी पारख एवं अमिताजी पारख ने मंगलाचरण एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महासचिव श्री पंकज जी चोपड़ा ने फादर्स डे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा करना, उनकी आज्ञा का पालन करना तथा उनका सम्मान करना प्रत्येक संतान का धर्म है। उन्होंने सभी से अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मनोज जी लुकड़, विजय गंगवाल, राजेंद्र पारख, पुखराज पारख एवं डॉ. अमिताजी पारख ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर स्थानीय जैन समाज के 75 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनो का शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। सम्मानित वरिष्ठजनों में श्री वीरचंद जी कात्रेला, श्री राजेंद्र कुमार जी रामपुरिया, श्री सुमेरमल जी पारख, श्री कांतिलाल जी गोलछा, श्री हंसराज जी कोठारी, श्री शिखरचंद जी जैन, श्री प्रकाशचंद जी चोपड़ा, श्री अखेराज जी लुनिया एवं श्री हीरालाल जी झाबक सहित अन्य वरिष्ठजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन महानगर अध्यक्ष वैभव जी गोलछा ने किया तथा प्रकाश चंदजी चोपड़ा ने आभार व्यक्त किया।
रायपुर: राष्ट्रीय राजमार्ग-130 (कटघोरा-शिवनगर-अम्बिकापुर) के उन्नयन एवं फोरलेन निर्माण कार्य को सुचारू और समयबद्ध रूप से पूरा करने के उद्देश्य से कलेक्टर अजीत वसंत ने प्रभावित क्षेत्रों में भूमि के क्रय-विक्रय, हस्तांतरण, खाता विभाजन तथा व्यपवर्तन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार जिले में प्रस्तावित बायपास, री-अलाइनमेंट और मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ की जानी है। भूमि अर्जन के दौरान लगातार हो रहे क्रय-विक्रय, नामांतरण और खाता विभाजन से स्वामित्व सत्यापन, हिस्सेदारी निर्धारण और मुआवजा तय करने में जटिलताएं उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
आदेश के तहत प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने से लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक राष्ट्रीय राजमार्ग-130 की मध्य रेखा से दोनों ओर 50-50 मीटर की सीमा के भीतर स्थित तहसील उदयपुर के ग्राम साल्ही, गुमगा, डांड़गांव, मनोहरपुर, दावा, विशुनपुर, पण्डरीडांड़, सोनतराई, डूमरडीह, उदयपुर, झिरमिटी और जजगा, तहसील लखनपुर के ग्राम अमगसी, अंधला, जुड़वानी, केंवरा, केंवरी, लहपटरा, रजपुरीकला और सिंगीटाना तथा तहसील अम्बिकापुर के ग्राम भिट्ठीकला, जोगीबांध, माझापारा, मेन्ड्राकला, सांड़बार, सुन्दरपुर और उदयपुर ढाब की भूमि प्रतिबंधित श्रेणी में रहेगी।
इसके अलावा नगर पंचायत लखनपुर, ग्राम पंचायत हंसडांड़ और ग्राम पंचायत कुंवरपुर के प्रस्तावित री-अलाइनमेंट क्षेत्र में आने वाली सम्पूर्ण भूमि पर भी क्रय-विक्रय, हस्तांतरण, खाता विभाजन एवं व्यपवर्तन पर रोक लागू रहेगी। यह निर्णय राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के चौड़ीकरण एवं फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और विवादरहित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार केवल जनसंवाद का मंच नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं को शीघ्रता से पूरा करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सरगुजा प्रवास के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर की गई घोषणाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर अमल में लाया गया है।
उल्लेखनीय है कि 03 मई 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के अंतर्गत सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे थे। जन चौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने क्षेत्र की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली तथा विभिन्न विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है। ग्राम सिलमा में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन, डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम तथा मनरेगा मद से 11.63 लाख रुपये की लागत से नवीन पीडीएस भवन निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार ग्राम कुनकुरीकला में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणाओं पर त्वरित अमल के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया है। उनका कहना है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचकर न केवल समस्याएं सुन रहा है, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित कर रहा है।
राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त मांगों और जनसमस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे विकास कार्यों का लाभ समय पर आमजन तक पहुंच रहा है और सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार हो रही है।
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है। संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रायपुर। स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण एक सुरक्षा अभियान है, जिसे परिवहन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित वाहनों की फिटनेस जांचना और छात्रों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है।
विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गरियाबंद जिले में स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। यह अभियान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुरूप संचालित किया गया। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला सेनानी कार्यालय की संयुक्त टीम ने 15 जून को जिले में संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों और परमिट संबंधी शर्तों की जांच की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में पंजीकृत 75 स्कूल बसों में से 30 बसों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बसों में निर्धारित सड़क सुरक्षा प्रोटोकॉल, आवश्यक उपकरणों तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषण प्रमाण-पत्र, कर (टैक्स), बीमा, फिटनेस प्रमाण-पत्र और परमिट सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई, ताकि विद्यार्थियों के परिवहन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल बस चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी शारीरिक रूप से स्वस्थ हों और अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें। जिला सेनानी कार्यालय द्वारा बसों में लगाए गए अग्निशमन यंत्रों की जांच की गई तथा चालक-परिचालकों को इनके उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
निरीक्षण के दौरान 45 स्कूल बसें उपस्थित नहीं मिलीं। इस पर संबंधित स्कूल बस संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
जिला प्रशासन ने कहा कि स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का पालन बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। संयुक्त निरीक्षण अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी स्कूल वाहन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिल सके।
रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित राज्य की प्रमुख नदियों के पुनरूद्धार एवं पुनर्जीवित करने गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में प्रवाहित हो रही नदियों के पुर्नजीवन हेतु किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। नदियों का संरक्षण से जन स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में बैठक में जिलों के कलेक्टरों से नदियों के कैचमेंट एरिया में बनायी गई विविध जल संरक्षण एवं संचयन की कार्य योजनाओं को लेकर चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि हाईकोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार नदियों के पुनर्जीवित एवं पुनरूद्धार के कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों से नदियों के कैचमेंट एरिया में ऐसे जनउपयोगी कार्यों को लिया जाए जो भविष्य में नदियों के आस-पास रहने वाले लोगों की जरूरतों के अनुरूप हो। मुख्य सचिव ने नदियों के कैचमेंट एरिया में किए जाने वाले कार्यों से स्थानीय सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से जोड़ने के लिए कहा। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिले से उद्गम होने वाली नदियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी रखी जाए। जिससे नदियों के बारे में छात्रों को जानकारी मिले। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं का भ्रमण नदियों के उद्गम स्थल पर कराया जाए और नदियों की जानकारी के संबंध में छात्रों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए। कलेक्टर ने नदियों के उद्गम स्थलों पर मेला उत्सव जैसे आयोजनों को करने के लिए भी कहा। बैठक में कलेक्टर रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, सरगुजा, कोरिया, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, गरियाबंद और धमतरी के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिले में स्थित नदियों की वास्तविक स्थिति और संचालित कार्ययोजनाओं एवं परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कलेक्टरों को नदियों के संरक्षण, संवर्धन के लिए जिला स्तरीय समितियों के संबंध में जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को नदियों के कैचमेंट एरिया में वृक्षारोपण, जल ग्रहण, वाटर रिचार्ज और आवश्यकतानुसार जल संरचनाओं के निर्माण के लिए वीबीजीरामजी, कैम्पा, नरेगा, डीएमएफ सहित अन्य मदो से विविध कार्ययोजना बनाने कहा है। नदियों के महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन से जोड़ने के लिए भी कार्ययोजना तैयार कर कार्यवाही करने कहा है। इसी तरह से नदियों में किसी भी तरह के अपशिष्ट नहीं डाले जाना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए है। बैठक में प्रोफेसर डॉ. एम.के. वर्मा ने नदी जल संरक्षण के संबंध में विस्तार से तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। इसी तरह से एनआईटी के प्रोफेसर जल विज्ञानी श्री इश्तियाक अहमद ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नदी जल संरक्षण और पर्यावरण सहित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता सहित वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन, खनिज, छत्तीसगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के अधिकारी शामिल हुए।
रायपुर। इस संसार में कुछ नियत है तो वो है मात्र परिवर्तन... और हर परिवर्तन के पीछे कह कहानी छुपी होती है। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में मंचित नाटक कथा में 11वीं शताब्दी के महाकवि सोमदेव की कालजयी रचना कथासरित्सागर पर आधारित इन नाटक का प्रारंभ देवादिदेव महादेव द्वारा माता पार्वती को कथा सुनाने से शुरू होती है। जिसमें सात कथाएं हैं इन सात कथा की हर कथा के भीतर 100 कथाएं। उन्हीं में एक कथा मगध के राजा नंद की थी। नाट्य संस्था रंगभूमि की इस प्रस्तुति का निर्देशन किशोर वैभव ने किया।
नाटक के प्रारंभ में महादेव माता पार्वती को ऐसी कथा सुनाने है, जिसे आज तक किसी ने नहीं सुनी थी। लेकिन गण पुष्पदंत माल्यवान की मदद से शुक का रुप धारण कर कथा सुन लेता है। इतनी ही नहीं पुष्पदंत ने यह कथा अपनी पत्नी को भी सुना दी। एक दिन माता पार्वती पुष्पदंत की पत्नी को एक कथा सुनाना शुरू करती है, तभी पुष्पदंत की पत्नी जया बताती है उसे यह कथा पहले से पता है। इस बात से माता पार्वती क्रोधित होती है जया से पुछती है कि तुमने यह कथा किससे सुनी और फिर वह महादेव का आह्वान करती है और पुष्पदंत और माल्यवान को धरती पर जन्म देने का श्राप देती है। यहां से कथा नई दिशा में बढ़ जाती है।
इन्होंने निभाई भूमिका
नाटक में सूत्रधार और पुष्पदंत की भूमिका हेमंत यादव, शिव की भूमिका निलेश पटेल, माता पार्वती की भूमिका अक्षदा मातुरकर, माल्यवान एवं सोमदत्त की भूमिका में आदित्य अखंड नजर आए। वहीं राजा नंद की भूमिका के साथ आदित्य दास ने न्याय किया। रानी की भूमिका आस्था जांगड़े, वररूचि की भूमिका विजय शर्मा ने निभाई। संगीत चैतन्य मोड़क, प्रकाश संयोजन लोकेश साहू तथा अभिकल्पना और निर्देश किशोर वैभव का रहा। पूरे आयोजन में विशेष सहयोग और मार्गदर्शन आचार्य रंजन मोड़क ने दिया।
रायपुर प्रेस क्लब के प्रस्ताव पर रामकृष्ण प्रबंधन ने दी सहमति
रायपुर प्रेस क्लब में स्वास्थ्य शिविर का ‘आभार एवं समापन समारोह’ संपन्न
डॉ. संदीप दवे की बड़ी घोषणा: पत्रकारों और उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य जाँच शिविर अब 30 जून तक बढ़ा
अस्पताल की ओपीडी और निशुल्क दवाइयों के साथ हॉस्पिटल चार्ज में हमेशा मिलेगी भारी छूट
रायपुर। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के तत्वावधान में रायपुर प्रेस क्लब के सम्मानित सदस्यों, पत्रकार साथियों एवं उनके परिजनों के लिए आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर का "आभार एवं समापन समारोह" आज रविवार को रायपुर प्रेस क्लब, मोती बाग में गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ।
रामकृष्णा केयर हॉस्पिटल, रायपुर द्वारा आयोजित इस शिविर के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. संदीप दवे उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सतीश थोरानी ने की। इस दौरान रायपुर प्रेस क्लब के तमाम पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पत्रकारगण मौजूद थे।
शिविर की अवधि 30 जून तक बढ़ी, कूपन धारकों को राहत
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. संदीप दवे ने पत्रकारों की सामाजिक सहभागिता और उनके कठिन कार्य परिवेश की सराहना की। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि पत्रकारों और उनके परिवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर की अवधि को अब 30 जून 2026 तक के लिए बढ़ाया जा रहा है। पूर्व में पत्रकारों को जारी किए गए कूपन के माध्यम से वे इस विस्तारित अवधि तक अपनी निशुल्क जाँचें करवा सकेंगे
डॉ. संदीप दवे ने पत्रकार जगत को एक और बड़ी सौगात देते हुए घोषणा की कि शिविर समाप्त होने के बाद भी रामकृष्णा केयर हॉस्पिटल में पत्रकारों और उनके परिजनों के लिए विशेष रियायतें जारी रहेंगी। इसके तहत:
नि:शुल्क ओपीडी (OPD) की सुविधा मिलेगी। दवाइयों पर 10% की छूट प्रदान की जाएगी।
हॉस्पिटल चार्ज (अस्पताल के अन्य शुल्कों) में 30% की स्थायी छूट हमेशा लागू रहेगी।
कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री सतीश थोरानी और रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने इस मानवीय पहल के लिए रामकृष्णा केयर हॉस्पिटल प्रबंधन और डॉ. संदीप दवे का आभार व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि इस शिविर से सैकड़ों पत्रकार परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिला है और भविष्य में मिलने वाली छूट से उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी राहत मिलेगी।
समारोह के अंत में रायपुर प्रेस क्लब द्वारा सफल आयोजन के लिए सभी सम्माननीय अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के कार्यकारी अध्यक्ष जसप्रीत सिंह सलूजा एवं राधा कृष्ण सुंदरानी के अलावा कार्यक्रम संयोजक अमर गीदवानी, के साथ कार्यक्रम समन्वयक अनिल जोतसिंघानी और चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के प्रमुख पदाधिकारी गण मौजूद रहे एवं कार्यक्रम में प्रेस क्लब के महासचिव गौरव शर्मा भारतीय, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े के साथ वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश शर्मा ,प्रशांत शर्मा, संदीप पुराणिक, ताहिर हैदरी, प्रदीप दुबे, विजय शर्मा , विद्या भूषण सिन्हा, रमेश पांडेय, प्रत्यूष शर्मा एवं पत्रकारगण उपस्थित थे।
रायपुर। विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर 241 बस्तरिया बटालियन द्वारा सेडवा स्थित वाहिनी मुख्यालय में रक्तदान शिविर का आयोजन कर मानवता, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसेवा का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया गया। एक यूनिट सुरक्षित रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। रक्तदान करने में केवल एक घंटा लगता है, लेकिन इसका प्रभाव जीवन भर रहता है। इस पुनीत आयोजन में डिमरापाल स्थित स्वर्गीय बलिराम कश्यप मेमोरियल शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की विशेषज्ञ चिकित्सक टीम ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
देश की सुरक्षा के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी संवेदनशील प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए बटालियन के अधिकारियों एवं जवानों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान अभियान में भाग लिया। शिविर के दौरान कुल 24 अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों एवं जवानों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस अवसर पर बटालियन के द्वितीय कमान अधिकारी श्री संजय कुमार ने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि रक्तदान मानव सेवा का सर्वाेच्च कार्य है। एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकती है। उन्होंने जवानों से भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी एवं मानवीय कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों एवं जवानों ने जरूरतमंदों की सहायता के लिए नियमित रूप से रक्तदान करने तथा समाज में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प भी लिया। रक्तदान शिविर ने यह संदेश दिया कि सुरक्षा बल केवल देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के प्रहरी ही नहीं, बल्कि समाज की सेवा और मानवता की रक्षा के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं।
रायपुर। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल रविवार को यूनियन क्लब द्वारा आयोजित 'मेगा समर कैम्प' के समापन समारोह एवं समर कैम्प के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित सिल्वर जुबली समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यूनियन क्लब के समर कैम्प से उनका जुड़ाव प्रारंभ से ही रहा है। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष पूर्व जब इस समर कैम्प की शुरुआत हुई थी, तब भी उन्हें इसमें शामिल होने का अवसर मिला था और आज इसके 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में उपस्थित होकर उन्हें विशेष प्रसन्नता हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के समर कैम्प नई पीढ़ी के बच्चों और युवाओं में छिपी प्रतिभाओं को पहचानने, निखारने और उन्हें उचित दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को सीखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजनों से नई प्रतिभाएं उभरकर सामने आती हैं और भविष्य के लिए तैयार होती हैं।
अग्रवाल ने कहा कि हाल ही में आयोजित 'आकार' कार्यक्रम की तरह यह समर कैम्प भी बच्चों के सर्वांगीण विकास का उत्कृष्ट मंच बना है। उन्होंने यूनियन क्लब, गुरुचरण सिंह होरा एवं पूरी आयोजन समिति को इस सफल आयोजन तथा 25 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) में आयोजित कार्यक्रम में जिलेवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने 295 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 341 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 70.10 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 159 कार्यों का लोकार्पण तथा 224.90 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 182 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इन विकास कार्यों के माध्यम से सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, नगरीय अधोसंरचना तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा और जिले के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विधिविधान से पूजा-अर्चना कर विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया तथा बटन दबाकर पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण कर उन्हें जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज का दिन जांजगीर-चांपा जिले के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जांजगीर चांपा जिले को लगभग 295 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मिल रही है, जिससे क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और जनजीवन अधिक सुगम बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और अधोसंरचना से जुड़े कार्यों के माध्यम से लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से जिले में विकास की नई संभावनाएं सृजित होंगी तथा आमजन को सीधे लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित 159 कार्यों में जल संसाधन, वन, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, सीजीएमएससी, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्य शामिल हैं। वहीं भूमिपूजन के 182 कार्यों में जल संसाधन विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, लोक निर्माण विभाग, सीजीएमएससी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्य शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्य केवल निर्माण नहीं होते, बल्कि वे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है और इसी सोच के साथ प्रदेश में विकास एवं जनकल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
रायपुर।विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा द्वारा लोकभवन, रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ मंडप में विश्व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल एवं इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अध्यक्ष रमेन डेका जी थे, कार्यक्रम की अध्यक्षता इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के चेयरमैन तोमन साहू ने की।
इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 130 स्वैच्छिक रक्तदाताओं को उनके उत्कृष्ट मानवीय योगदान, सेवा भावना तथा समाज के प्रति समर्पण के लिए सम्मानित किया गया। अपने करकमलों से रक्तदाताओं का सम्मान करते हुए महामहिम राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है। रक्तदाता किसी अपरिचित व्यक्ति के जीवन को बचाकर समाज में करुणा, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है और प्रत्येक स्वस्थ नागरिक का नियमित रक्तदान अनेक परिवारों के लिए जीवन की आशा बन सकता है। महामहिम ने युवाओं एवं समाज के सभी वर्गों से स्वैच्छिक रक्तदान को जनआंदोलन बनाने में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चेयरमैन तोमन साहू ने कहा कि इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा का सतत प्रयास है कि प्रदेश में किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त के अभाव का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदाता समाज के वास्तविक नायक हैं, जिनके निस्वार्थ योगदान से प्रतिवर्ष हजारों लोगों को नया जीवन मिलता है। उन्होंने रक्तदान को सामाजिक दायित्व एवं मानवीय कर्तव्य बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की।
समारोह में महामहिम राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, महामहिम राज्यपाल के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी हरेन्द्र सिंह जडेजा,भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के वाइस चेयरमैन रुपेश कुमार पाणिग्राही, सचिव डॉ. रुपोल पुरोहित, रेडक्रॉस सोसायटी ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सत्यनारायण पाण्डेय, तथा राज्य प्रबंध समिति के सदस्य अशोक अग्रवाल, जय नारायण सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार साहू, नरेंद्र मेश्राम, अमित हलदर एवं राजेन्द्र राव उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रदेश के विभिन्न जिला शाखाओं के पदाधिकारी, स्वैच्छिक रक्तदाता, गणमान्य नागरिक तथा इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अधिकारी एवं कर्मचारीगण भी समारोह में सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि स्वैच्छिक रक्तदान केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति समर्पण का सशक्त माध्यम है। रक्तदान के माध्यम से हम न केवल किसी का जीवन बचाते हैं, बल्कि एक संवेदनशील, सहयोगी और जागरूक समाज के निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के सचिव डॉ. रुपोल पुरोहित द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। उन्होंने महामहिम राज्यपाल महोदय, सभी विशिष्ट अतिथियों, सम्मानित रक्तदाताओं, रेडक्रॉस पदाधिकारियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उपस्थित जनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान की भावना को जन-जन तक पहुंचाना और सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना रेडक्रॉस का सतत संकल्प है।
विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह समारोह केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में सेवा, संवेदना और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक प्रेरणादायी अभियान भी था। इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे स्वैच्छिक रक्तदान को अपने सामाजिक दायित्व का हिस्सा बनाकर मानवता की इस महान सेवा में सहभागी बनें।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भारतीय अंडर-18 हॉकी टीम के एशिया कप विजेता सदस्य अवि मानिकपुरी ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अवि मानिकपुरी को अंडर-18 एशिया कप में भारत की ऐतिहासिक विजय में महत्वपूर्ण योगदान के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा, अनुशासन और कड़ी मेहनत के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अवि मानिकपुरी को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इसी समर्पण और लगन के साथ आगे बढ़ते रहें तथा आने वाले समय में भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि अवि की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह साबित करती है कि अवसर और संकल्प मिलने पर छत्तीसगढ़ की प्रतिभाएं विश्व मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास और खिलाड़ियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयासों से युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के नए अवसर मिल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि बिलासपुर निवासी अवि मानिकपुरी भारत के उभरते हुए हॉकी खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने हाल ही में जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप प्रतियोगिता में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जिसमें अवि मानिकपुरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर परछत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष फिरोज अंसारी, महासचिव डॉ. मनीष श्रीवास्तव तथा अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मृणाल चौबे उपस्थित थे।
रायपुर। बलौदाबाजार- भाटापारा जिले के वनमंडल बलौदाबाजार के देवपुर परिक्षेत्र में शुक्रवार को औषधीय वनस्पतियों की पहचान और महत्व पर केंद्रित एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों की पहचान कराना, छाल, पत्ती, तना, जड़, फल एवं फूल के आधार पर वर्गीकरण सिखाना तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी देना था।
कार्यक्रम में अर्जुन, आंवला, बहेड़ा, बेल, काली मुसली, हाथीपांव, दूधी, भुईनीम, सतावर, खरहर, ठेलका, नरनारी, गरुड़ सहित लगभग 80 औषधीय वनस्पति प्रजातियों की पहचान कराई गई। विशेषज्ञों ने इन प्रजातियों के पर्यावरणीय व्यवहार, संरक्षण की आवश्यकता और फल, फूल, पत्ती, जड़ आदि के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। स्वस्थ, निरोग और दीर्घायु जीवनशैली के लिए प्रकृति आधारित ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला में वनमंडल बलौदाबाजार, वनमंडल कवर्धा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान रखने वाले वैद्यगण, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, बारनवापारा के गाइड्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वन मंडल अधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि कार्यशाला का मकसद केवल औषधीय ज्ञान का प्रसार नहीं था, इसका उद्देश्य इस ज्ञान को समाज के अधिक लोगों तक पहुंचाकर वृक्षों एवं वनस्पतियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता को प्रोत्साहित करना भी है।