रायपुर
अमृत सरोवरों के तट पर मनेगा स्वतंत्रता दिवस
ड्रोन दीदियों ने आधुनिक कृषि यंत्र ड्रोन की पूजा कर चढ़ाया गुड़-चीला और नारियल का भोग
CM साय संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘आजादी की धुन’ समारोह में हुए शामिल
देशभर के टूर ऑपरेटर्स ने देखा छत्तीसगढ़, महसूस किया प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सौंदर्य
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल से छत्तीसगढ़ के पर्यटन को न केवल प्रचार मिलेगा, बल्कि यह सीधे राष्ट्रीय पर्यटन बाजार से जुड़ेगा। जब टूर ऑपरेटर्स खुद राज्य की सुविधाओं, खान-पान, रिसॉर्ट्स और संस्कृति का प्रत्यक्ष अनुभव करेंगे, तो वे अपने ग्राहकों को छत्तीसगढ़ आने के लिए बेहतर ढंग से प्रेरित कर सकेंगे। इससे राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय होटल व्यवसाय, हस्तशिल्प, परिवहन और रोजगार के अवसरों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचेगा।
एम्स रायपुर और संबलपुर विवि के बीच क्रॉनिक किडनी डिजीज एवं क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान पर एमओयू
रायपुर। मध्य भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर और संबलपुर विश्वविद्यालय (ओडिशा) के बीच आज एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस रणनीतिक साझेदारी का प्राथमिक उद्देश्य छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों में संयुक्त क्लिनिकल रिसर्च को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा क्षमता का विस्तार करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य व चिकित्सा विज्ञान क्षेत्र में नवोन्मेषी समाधान विकसित करना है।
इस अंतर-संस्थानी सहयोग का मुख्य केंद्र बिना स्पष्ट कारणों के होने वाली क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKDu) तथा सिकल सेल रोग जैसी गंभीर क्षेत्रीय स्वास्थ्य समस्याएं रहेंगी। संबलपुर विश्वविद्यालय के उप पंजीयक (अकादमिक) डॉ. ईश्वर बैथारू के अनुसार, ओडिशा के कई जिलों में किडनी रोग के मामलों में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है, जिनके लक्षण छत्तीसगढ़ के CKDu प्रभावित क्षेत्रों के मरीजों से काफी मिलते-जुलते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए दोनों राज्यों में इस स्वास्थ्य चुनौती की सटीक पहचान और रोकथाम के लिए समन्वित अनुसंधान की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह समझौता केवल अकादमिक शोध पत्र प्रकाशित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका ध्येय शोध के निष्कर्षों को व्यावहारिक स्वास्थ्य रणनीतियों और जन-नीतियों में परिवर्तित करना है। उन्होंने रेखांकित किया कि भविष्य में इस साझेदारी का दायरा सिकल सेल रोग सहित अन्य क्षेत्रीय स्वास्थ्य जटिलताओं के निवारण तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे आम जनता को सुलभ व किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकें।
हस्ताक्षर समारोह के दौरान दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और शोधकर्ता उपस्थित रहे। एम्स रायपुर का प्रतिनिधित्व डीन (अकादमिक्स) डॉ. एली मोहापात्रा, एसोसिएट डीन (रिसर्च) डॉ. एकता खंडेलवाल, डॉ. पुगझेंथन थंगराजू, डॉ. विराट गहलोतरा, डॉ. सुप्रवा पटेल, डॉ. विनय राठौर और डॉ. नीलम देवी मरावी ने किया। वहीं, संबलपुर विश्वविद्यालय की ओर से उप पंजीयक डॉ. ईश्वर बैथारू तथा शोधार्थी प्रलय बिस्वास एवं सावन कुमार साहू उपस्थित थे।
सीएम हाउस नया रायपुर में आज मनाया जाएगा हरेली तिहार
मुख्यमंत्री निवास में होने वाले आयोजन का एक उद्देश्य नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन से जोड़ना भी है। कार्यक्रम में पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए हरेली से जुड़ी परंपराओं को सामने रखा जाएगा। राज्य सरकार की ओर से लोक संस्कृति और पारंपरिक त्योहारों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव की ओर छत्तीसगढ़, 103 करोड़ की परियोजनाओं से लेकर नए मेडिकल कॉलेजों तक बढ़ी रफ्तार
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, दूरस्थ इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच और मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को और मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
डागा कन्या महाविद्यालय में नवप्रवेशित छात्राओं के लिए शैक्षणिक शुभारंभ समारोह
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ संगीता घई ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम ने नवप्रवेशित छात्राओं के महाविद्यालयीन जीवन के लिए एक सकारात्मक एवं प्रेरणादायी शुरुआत प्रदान की। कार्यक्रम मे महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ उपस्थित रहा।
आदिवासी समुदायों तक न्याय की पहुंच मजबूत करने पर एचएनएलयू में मंथन
रायपुर। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर के सेंटर फॉर लॉ एंड इंडिजिनस पीपल द्वारा सेंटर फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ एंड फेडरलिज्म के सहयोग तथा सीजी लर्न कार्यक्रम के अंतर्गत “ऑडिटिंग एक्सेस टू जस्टिस फॉर इंडिजिनस कम्युनिटीज: मेजरिंग इनक्लूजन, अकाउंटेबिलिटी एंड ट्रांसफॉर्मेटिव जस्टिस” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यशाला में न्यायपालिका, शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं, शोधकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान संवैधानिक शासन, आदिवासी अधिकार, सामुदायिक सहभागिता, पारिस्थितिक न्याय तथा न्याय तक पहुंच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
उद्घाटन सत्र में हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने कहा कि न्याय तक पहुंच का आकलन समाज के सबसे कमजोर वर्गों के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। उन्होंने आदिवासी समुदायों तक न्याय की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक न्याय फेलो, आदिवासी भाषाओं में कानूनी नोटिस के कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुवाद, विधिक स्वास्थ्य क्लीनिक, मोबाइल संवैधानिक कारवां तथा आदिवासी ज्ञान परिषद जैसे नवाचारों का सुझाव दिया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा ने अपने संबोधन में न्याय तक पहुंच को “सस्ता, सुलभ और स्वच्छ न्याय” की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो समुदायों की सांस्कृतिक विशेषताओं और स्थानीय परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील हो। उन्होंने आदिवासी समुदायों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम, जवाबदेह और समुदाय-केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में अनुसूचित जनजातियों के लिए संवैधानिक संरक्षण, आवासीय एवं वन अधिकार, ग्राम सभा की भूमिका, सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण तथा न्यायिक उपचार और राज्य की संस्थाओं तक पहुंच बनाने में आदिवासी समुदायों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में रायपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अविनाश दुबे, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई के डीन डॉ. गीतांजॉय साहू तथा सेंटर फॉर सोशल जस्टिस और अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट, बेंगलुरु के विशेषज्ञ एवं संसाधन व्यक्तियों ने सहभागिता की।
कार्यशाला की रूपरेखा सेंटर फॉर लॉ एंड इंडिजिनस पीपल के प्रमुख डॉ. अयान हजरा ने तैयार की। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। समापन सत्र में डॉ. अविनाश सामल ने कार्यक्रम का सार प्रस्तुत किया। छात्र एंकर के रूप में सुश्री श्रेया केसरी और सुश्री तन्जील ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण आरण्यका के प्रथम अंक का औपचारिक विमोचन रहा। यह सहकर्मी-समीक्षित शोध पत्रिका विधि, आदिवासी समुदायों, संवैधानिक शासन, पारिस्थितिकी और परिवर्तनकारी न्याय से जुड़े शोध एवं अकादमिक विमर्श को समर्पित है।
कार्यशाला का समापन न्याय तक समावेशी पहुंच को मजबूत करने के लिए शोध सहयोग बढ़ाने, विधिक साक्षरता कार्यक्रमों को विस्तार देने, समुदाय-केंद्रित न्याय तंत्र विकसित करने तथा नीति-निर्माण में प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करने के आह्वान के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने भारत में अधिक समावेशी, जवाबदेह और परिवर्तनकारी न्याय व्यवस्था के लिए अकादमिक संस्थानों, न्यायिक संस्थाओं और समुदायों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
दुर्गम पहाड़ी गांव सरुवत में आंगनबाड़ी की नई शुरुआत
सरुवत की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं के प्रभावी अभिसरण, ग्राम पंचायत की सक्रिय भागीदारी और स्थानीय स्तर पर निरंतर प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में भी बाल विकास सेवाओं को मजबूत बनाया जा सकता है। किराये के कमरे से अपने भवन तक पहुंची यह आंगनबाड़ी आज गांव के नौनिहालों के लिए सुरक्षित बचपन, बेहतर पोषण और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन चुकी है।
"समयोपदेश वर्षायोग में गूंजे मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन
रायपुर। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में आयोजित श्री दिगंबर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत आज 11 अगस्त मंगलवार को प्रातःकालीन अभिषेक, शांतिधारा व पूजन के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। प्रातः 8 बजे विभिन्न जिनालयों से आए समाजजनों की उपस्थिति में जिनालय के मूलनायक भगवान के समक्ष श्री जी की शांतिधारा करने का सौभाग्य नरेश-रीतु जैन पाटनी परिवार तथा यशवंत जैन अमरचंद जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
श्री दिगंबर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग 2026 समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ने जानकारी दी कि अभिषेक और शांतिधारा के उपरांत संतों की नवधाभक्ति के साथ आहारचर्या हुई। आज मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य श्रीमती शालिनी आनंद जैन, पूर्वा ग्राफिक्स, बढ़ईपारा, ललिता चौक को प्राप्त हुआ। वहीं ऐलक 105 श्री धैर्य सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य श्री राजकुमार श्री संस्कार जैन भाटापारा परिवार एवं झाबक बाड़ा परिवार को तथा ऐलक 105 श्री स्वागत सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य पुष्पादेवी बंशीलाल जी जैन, जैन बाड़ा को प्राप्त हुआ।
मुनि ससंघ के दिव्य सान्निध्य में धार्मिक कक्षा,स्वाध्याय का आयोजन हुआ, जिसमें मुनि श्री 108 पुनीत सागर जी महाराज द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र के तृतीय अध्याय का अध्ययन कराया गया। इसके साथ ही मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज द्वारा छह ढाला की प्रथम ढाल में नर्क गति का वर्णन करते हुए मंगल देशना प्रदान की गई।
मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि नारकीय जीवों की प्यास ऐसी होती है कि यदि वे तीन लोकों के समुद्र का पानी भी पी लें तब भी उनकी प्यास नहीं बुझती और उनका भोजन इतना होता है कि तीन लोगों का अनाज कम पड़ जाए। अत्यधिक भोजन करना बीमारी का लक्षण है। पिछले जन्म में दूसरों को न खिलाने, दूसरों के भोजन को देखकर ग्लानि करने और भोजन में कमियां निकालने के परिणाम स्वरूप आने वाले जन्म में तीव्र भूख लगती है। पूर्व जन्म के पाप और भस्मक व्याधि के कारण कितना भी खाया जाए भूख नहीं मिटती। जो लोग माता-पिता को कष्ट देते हैं और चोरी करते हैं, उन्हें नर्क में ऐसी तीव्र प्यास लगती है कि कई समुद्रों का पानी भी कम पड़ जाता है। जो संसार में मांसाहार करते हैं, उन्हें नर्क में भोजन-पानी नहीं मिलता और नारकीय जीव अपना अंग-भंग काटकर दूसरे को खिलाते हैं।
मुनि श्री ने आगे बताया कि भोजन में संतोष रखना अति आवश्यक है। पाप और पुण्य की कड़ी जुड़ी होती है। पापी व्यक्ति पाप ही करता है और जैसे कर्म होते हैं वैसे ही परिणाम सामने आते हैं, इसलिए अपने मन को हमेशा अच्छा रखें। बुराई हमेशा बुराई की ओर ले जाती है। अभक्ष्य और अमर्यादित वस्तुएं भी मांसाहार की श्रेणी में आती हैं। जान से मारा गया व्यक्ति वापस नहीं आता, लेकिन अहसान से मारा हुआ व्यक्ति सामने तो रहता है पर सिर नहीं उठा पाता। इसलिए बड़ा मन रखकर सभी का भला करना चाहिए। अपने प्रेम में इतनी ताकत होनी चाहिए कि दगा करने वाले को भी सगा बनाया जा सके। अपनी क्षमता पहचान कर दिल बड़ा करें और सभी की बात सुनकर सबका कल्याण करें।
इस जीवन में एक बात का विशेष ध्यान रखें कि साधु बनें या न बनें, लेकिन जैन होने के नाते रात्रि भोजन का पूर्ण त्याग अवश्य करें। दिगंबर मुनि दिन में केवल एक समय नवधाभक्ति के साथ आहार और जल लेते हैं, यही कारण है कि वे जहां भी रहते हैं दुनिया उनके दर्शन करने आती है। जिसने उजाले में भोजन-पानी किया, दुनिया उसे देखने आती है। आप भी दिन में भोजन करें, इससे पंच परमेष्ठि की कृपा बरसेगी और आपको भी लोग देखने तथा मिलने आएंगे। तीर्थंकर, आचार्य और मुनि की तपस्या के प्रभाव से ही व्यक्ति के मन में दर्शन के भाव जागृत होते हैं। पुण्य पूर्व जन्म के अच्छे संस्कारों से बनता है। सज्जन व्यक्ति सबका भला सोचता है जबकि दुर्जन व्यक्ति स्वार्थी होता है। पूर्व जन्म के पापों के कारण बुद्धि ठीक से काम नहीं करती और पाप कर्म के उदय से मन-बुद्धि खराब हो जाती है। जीवन में जिस व्यक्ति के पास किसी चीज का अभाव होता है, वह निरंतर परेशान रहता है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का हुआ शुभारंभ
छत्तीसगढ़: कल स्कूल-कॉलेज के अलावा सरकारी दफ्तर भी रहेंगे बंद, 12 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश
सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है। हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है।
बगिया में मुख्यमंत्री देव साय ने सुनी आम लोगों की आवाज, समस्याओं के निराकरण के दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आम नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर दूर-दराज से मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय तक पहुंचते हैं, इसलिए उनके प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ-साथ शिकायतों के निराकरण की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए।
राज्य सरकार का बड़ा फैसला, नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों की एंट्री पूरी तरह बंद
रायपुर। राज्य शासन ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पारिवारिक सदस्यों के प्रतिनिधियों के रूप में नाम-निर्देशन पर रोक लगा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ नगरपालिक (लोकसभा सदस्य या राज्य विधानसभा के सदस्य या राज्य सभा के सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन हेतु अर्हताएँ) नियम, 2022 में संशोधन कर अधिसूचना प्रकाशित की है।
छत्तीसगढ़ राजपत्र में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ नगरपालिक नियम, 2022 में नवीन संशोधन के अनुसार किसी भी नगरीय निकाय में, निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक, सदस्य या नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि अथवा समन्वयक व्यक्ति के रूप में नाम-निर्दिष्ट अथवा नियुक्त नहीं किया जाएगा। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह प्रतिबंध सभी नगरीय निकायों में लागू हो गया है।
छात्रवृत्ति स्वीकृति और जनसुनवाई को लेकर प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने दिए सख्त निर्देश
रायपुर। आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कहा कि पीएम जनमन (PM-JANMAN) योजना के तहत देश के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बहुउद्देशीय केंद्रों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनका उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सामुदायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। । धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक विकास को बेहतर बनाना है।
आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज बिलासपुर प्रवास के दौरान विभागीय योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मंथन सभाकक्ष में बिलासपुर संभाग के सहायक आयुक्त आदिवासी विकास एवं परियोजना प्रशासकों की उच्चस्तरीय बैठक ली। इस बैठक में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल सहित संभाग के संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान प्रमुख सचिव बोरा ने विद्यार्थियों के हित में छात्रवृत्ति की स्वीकृति निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने जल्द से जल्द संस्था प्रमुखों की बैठक आयोजित करने को कहा। इसके साथ ही, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 13 से 15 अगस्त तक गाँवों के आदि सेवा केंद्रों में आयोजित होने वाली जनसुनवाई की तैयारियों की समीक्षा की गई। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और मैदानी अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर जनसुनवाई को पूरी तरह प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
आवासीय विद्यालय व कोचिंग संस्थान प्रयास व एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रवेश व संचालन की स्थिति तथा विद्यार्थियों की कोचिंग हेतु संस्था चयन प्रक्रिया की समीक्षा की गई। पीएम जनमन योजना के तहत निर्मित बहुउद्देशीय केंद्रों के संचालन, धरती आबा अभियान के स्वीकृत कार्यों तथा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत जारी निर्माण कार्यों की प्रगति देखी गई। पठन सामग्री, गणवेश (यूनिफॉर्म) के समय पर वितरण, विद्यार्थी पोषण उपवन तथा पीएचडीटीजी (च्भ्क्ज्ळ) सर्वे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई। सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त आवेदनों के त्वरित निराकरण और विलेज वेरिफिकेशन सर्वे पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि विभागीय योजनाओं का उद्देश्य केवल प्रशासनिक स्वीकृति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक और प्रत्यक्ष लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने और मैदानी स्तर पर आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करने के निर्देश दिए।
तिरंगे के रंग में रंगा रायपुर, राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुआ जनसैलाब
रायपुर। हाथों में लहराता तिरंगा, भारत माता के जयघोष, देशभक्ति के गीत और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हजारों नागरिकों का उत्साह - राजधानी रायपुर आज पूरी तरह तिरंगे के रंग में रंगी नजर आई। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा में हजारों नागरिक राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं हाथ में तिरंगा थामकर जनसैलाब के साथ कदम से कदम मिलाया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। स्कूली विद्यार्थियों द्वारा हाथों में थामा गया लगभग एक किलोमीटर लंबा तिरंगा पूरे आयोजन का विशेष आकर्षण रहा।
तिरंगा यात्रा के शुभारंभ से लेकर समापन तक राजधानी में राष्ट्रभक्ति का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया। हजारों हाथों में एक साथ लहराते राष्ट्रीय ध्वज और भारत माता के जयघोष ने पूरे यात्रा मार्ग को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया। मुख्यमंत्री श्री साय भी नागरिकों के बीच तिरंगा लेकर आगे बढ़े। इस दौरान नागरिकों में मुख्यमंत्री के साथ चलने और राष्ट्रध्वज के सम्मान में आयोजित इस यात्रा का हिस्सा बनने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान है। यह केवल हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता, स्वाभिमान और असंख्य बलिदानों का प्रतीक है। तिरंगे में देश के 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधने की अद्भुत शक्ति है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और क्षेत्रों की विविधता के बावजूद तिरंगा हम सभी को भारतीय होने के एक साझा गौरव से जोड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तिरंगा लहराता है तो प्रत्येक भारतीय के मन में स्वाभाविक रूप से राष्ट्र के प्रति गौरव और सम्मान का भाव जागृत होता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष, स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और एक सशक्त राष्ट्र के रूप में भारत की यात्रा का साक्षी है। तिरंगा हमें अपने अधिकारों के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आज एक व्यापक जनअभियान का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान ने तिरंगे को घर-घर तक पहुंचाने के साथ राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान और गौरव के साथ तिरंगा फहराने तथा तिरंगा यात्राओं से जुड़कर राष्ट्रीय एकता के इस उत्सव को और भव्य बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में गर्व और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं, वह स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई है। इसके पीछे लाखों देशवासियों का संघर्ष, त्याग, तपस्या और बलिदान जुड़ा हुआ है। देश के असंख्य वीर सपूतों ने मातृभूमि को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में देश के हर क्षेत्र और समाज के लोगों ने अपना योगदान दिया। किसी ने अपना जीवन समर्पित किया, किसी ने अपना घर-परिवार छोड़ा और अनेक वीरों ने मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन बलिदानों के कारण ही आज हम स्वतंत्रता और लोकतंत्र के गौरव का अनुभव कर पा रहे हैं।