रायपुर
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह : राज्य स्तरीय समारोह में NHAI सम्मानित
रायपुर। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत परिवहन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्यों के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर परियोजना कार्यान्वयन ईकाई (PIU) बिलासपुर के परियोजना निदेशक श्री मुकेश कुमार तथा PIU अभनपुर के प्रबंधक श्री प्रखर अग्रवाल को उनके-अपने कार्यक्षेत्र में सड़क सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा सम्मानित किया गया।
NHAI द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें ब्लैक स्पॉट्स का चिन्हांकन एवं सुधार, साइन बोर्ड एवं रोड मार्किंग, क्रैश बैरियर की स्थापना, स्पीड कंट्रोल उपाय, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग, सर्विस रोड का विकास, सड़क प्रकाश व्यवस्था, तथा आईआरसी मानकों के अनुरूप इंजीनियरिंग सुधार शामिल हैं।
इसके साथ ही NHAI द्वारा जन-जागरूकता अभियानों, सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण, हेलमेट एवं सीट बेल्ट के उपयोग को प्रोत्साहन, तथा आपातकालीन सेवाओं की त्वरित उपलब्धता के माध्यम से दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
NHAI का उद्देश्य केवल बेहतर सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं निर्बाध यात्रा उपलब्ध कराना है। इस दिशा में प्राधिकरण केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से लगातार कार्य कर रहा है।
रायपुर साहित्य उत्सव: लोक साहित्य जन–जीवन की गहरी अनुभूतियों से उपजा समृद्ध साहित्य
राष्ट्रीय मतदाता दिवस–2026 पर माय भारत... 25 जनवरी को निकलेगी विशाल युवा मतदाता जागरूकता पदयात्रा
रायपुर। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में माय भारत, रायपुर द्वारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस–2026 के अवसर पर 25 जनवरी को राज्य स्तर पर एक भव्य मतदाता जागरूकता पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं एवं नागरिकों को मताधिकार के महत्व के प्रति जागरूक करना, लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाना तथा अधिकाधिक युवाओं को सक्रिय लोकतांत्रिक सहभागिता हेतु प्रेरित करना है। यह रैली इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर से प्रारम्भ होगी, जिसमें युवाओं, माय भारत स्वयंसेवकों, छात्र-छात्राओं तथा जनसामान्य की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु विशेष अपील की जा रही है।
इस अवसर पर अर्पित तिवारी, उप निदेशक, माय भारत, रायपुर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी का उत्सव है, और एक सशक्त राष्ट्र की नींव तभी मजबूत होती है जब प्रत्येक युवा नागरिक जागरूक होकर निर्भीक, निष्पक्ष एवं नैतिक मतदान करता है। उन्होंने प्रेस वार्ता के माध्यम युवाओं से आग्रह किया कि वे 25 जनवरी 2026 को अधिक से अधिक संख्या में रैली में सम्मिलित होकर “माय भारत – माय वोट” का संदेश जन-जन तक पहुँचाएँ तथा लोकतांत्रिक सहभागिता को जनआंदोलन का रूप दें। साथ ही उन्होंने युवाओं से यह भी अपील की कि वे MY Bharat Portal पर स्वयं को पंजीकृत (रजिस्टर) कर माय भारत के साथ सक्रिय रूप से जुड़ें, ताकि देश निर्माण से जुड़ी विभिन्न जनहितकारी गतिविधियों में सहभागिता कर सकें।
माय भारत, रायपुर द्वारा राज्य के समस्त युवा संगठनों, शिक्षण संस्थानों, इकाइयों, स्वयंसेवी समूहों एवं नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस रैली में सहभागिता कर राष्ट्रीय मतदाता दिवस–2026 को ऐतिहासिक एवं प्रभावशाली बनाएं।
रायपुर साहित्य उत्सव में ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ सत्र बना वैचारिक मंथन का केंद्र
एल्बेंडाजोल दवा के कई बैच फेल, स्वास्थ्य केंद्रों से वापस मंगाई गई दवा
रायपुर। कृमि संक्रमण से मुक्ति के लिए शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित की जाने वाली एल्बेंडाजोल दवा भी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सर्कुलर जारी कर प्रभावित बैच की दवा स्वास्थ्य केंद्रों से वापस मंगाई है। दवा निगम ने इसके बाद नया टेंडर जारी कर तीसरी कंपनी से दवा की खरीदी की है।
सीजीएमएससी के माध्यम से हुए टेंडर में एल-1 कंपनी द्वारा आपूर्ति की गई एल्बेंडाजोल दवा को लेकर कुछ स्वास्थ्य केंद्रों से शिकायतें मिली थीं। इसके बाद सभी केंद्रों से दवा वापस मंगाई। जांच के दौरान करीब चार बैच के सैंपल फेल पाए गए, जिसके बाद दवा की सप्लाई रोकते हुए संबंधित कंपनी से अनुबंध समाप्त कर दिया गया।
इसके बाद एल-2 कंपनी को दवा सप्लाई का आदेश दिया गया, लेकिन करीब आठ महीने बाद उसकी दवा को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। इस पर दवा निगम ने एहतियातन रायपुर और बलौदाबाजार जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित दवा तत्काल वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं। पेट से कृमि नष्ट करने वाली इस दवा के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, सीजीएमएससी ने एल्बेंडाजोल दवा की खरीदी के लिए नया टेंडर जारी कर प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस दवा का उपयोग प्रदेश में विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों के तहत किया जाता है। आगामी फरवरी माह में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान भी कुछ जिलों में इस दवा की खुराक शामिल की जानी है।
रायपुर के रोजगार मेले में 400 से अधिक अभ्यर्थियों को मिले नियुक्ति पत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुरक्षा और विकास के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी 'रोजगार मेला' के तहत रायपुर के आरंग स्थित सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के 400 से अधिक युवाओं को केंद्र सरकार के विभिन्न सुरक्षा बलों के लिए नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। ये युवा अब सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे प्रतिष्ठित सुरक्षा बलों का हिस्सा बनकर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू ने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें देश सेवा की नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित 18वें राष्ट्रीय रोजगार मेले के दौरान देशभर के 61 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र सौंपे। इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का आयोजन देश के 45 विभिन्न स्थानों पर किया गया, जहां नवनियुक्त अभ्यर्थियों को सुरक्षा बलों और अन्य केंद्रीय विभागों में अपनी सेवाएं देने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ये नियुक्तियाँ राष्ट्र निर्माण का निमंत्रण हैं, जो न केवल युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करेंगी बल्कि देश की सीमाओं और आंतरिक व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेंगी।
ग्रुप केन्द्र, सीआरपीएफ, रायपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी ने रोजगार को मिशन मोड में लाकर युवाओं के आत्मविश्वास, सामर्थ्य और सपनों को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं की क्षमता और भारत के उज्ज्वल भविष्य पर प्रधानमंत्री के अटूट विश्वास को दर्शाती है।
साहू ने रोजगार मेला के माध्यम से नियुक्ति प्राप्त करने वाले युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता मेहनत, अनुशासन और संकल्प का प्रतिफल है। उन्होंने सभी नवनियुक्त युवाओं एवं उनके परिवारजनों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव का क्षण है।
उन्होंने जानकारी दी कि रायपुर केंद्र में कुल 400 से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 25 युवाओं को केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने स्वयं मंच से नियुक्ति पत्र प्रदान किए। ये सभी युवा सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ सहित विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र बलों एवं विभागों में अपनी सेवाएं देंगे। अपने संबोधन में साहू ने कहा कि रोजगार मेला यह सिद्ध करता है कि आज युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है, और यही शक्ति आने वाले वर्षों में भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।
इस अवसर पर शालिन, आईपीएस, आईसीजी, सीआरपीएफ, अजय कुमार सिंह, उप महानिरीक्षक, सीआरपीएफ, दुर्गा भवानी राजनाला, उप महानिरीक्षक (चिकित्सा), सीआरपीएफ तथा अजय कुमार सिंह, कमांडेंट, सीआरपीएफ विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में केंद्रीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, नवनियुक्त युवा, उनके परिजन एवं मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के युवा अब अपनी योग्यता के दम पर देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैयार हैं। सरकार का यह कदम प्रदेश में शांति और विकास के एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सुप्रसिद्ध अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने की सौजन्य मुलाकात
सियान गुड़ी में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान कार्ड शिविर 25 जनवरी को
रायपुर। अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की कड़ी में महाराष्ट्र मंडल, रायपुर द्वारा अपने नये प्रकल्प सियान गुड़ी में रविवार, 25 जनवरी को वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान कार्ड शिविर का आयोजन किया जा रहा है। आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए अपने साथ आधार कार्ड और राशन कार्ड लाना अनिवार्य होगा।
सियान गुड़ी के प्रभारी और महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि रविवार, 25 जनवरी को सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक आयुष्मान कार्ड शिविर का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने अधिक से अधिक वरिष्ठजनों से इस शिविर में उपस्थित होकर अपना आयुष्मान कार्ड बनवाकर योजना का निःशुल्क लाभ लेने की बात कहीं। शिविर का आयोजन सियान गुड़ी, दिव्यांग बालिका विकास गृह, समता कॉलोनी, रायपुर में किया जाएगा। शिविर में आने वाले वरिष्ठजनों के लिए आधार कार्ड एवं राशन कार्ड साथ लाना अनिवार्य है।
बताते चले कि भारत सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठजनों के लिए विशेष आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत पांच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार प्राप्त किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए श्याम सुंदर खंगन 9424213238 और दीपक पात्रीकार 9827196125 से संपर्क किया जा सकता है।
रायपुर साहित्य उत्सव में विनोद शंकर शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण
रायपुर। नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया।
परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है।
नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं।
जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं।
राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक अनुभव शर्मा ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं।
अभिनेत्री टीजे भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं।
परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।
वंदेमातरम गीत भारत माता के प्रति प्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक हैः मनोज वर्मा
रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर में प्राचार्य डॉ प्रीति मिश्रा के मार्गदर्शन में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति द्वारा वंदेमातरम गीत की 150 वर्षगांठ एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रायपुर नगर पालिका निगम के एमआईसी सदस्य के गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ नेताजी की छायाचित्र में माल्यार्पण कर किया गया। मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि वंदेमातरम गीत भारत माता के प्रति प्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है।बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में यह गीत लिखा, जिसमें उन्होंने मातृभूमि को देवी माँ के रूप में चित्रित किया। मूल रूप से यह संस्कृत और बांग्ला भाषा का मिश्रण है, जिसके शुरुआती दो पद संस्कृत में हैं।
24 जनवरी,1950 को संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया।इसी प्रकार तरह से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पश्चिमी शक्तियों के विरुद्ध आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व करने वाले बोस भारतीय क्रांतिकारी थे,जिनको ससम्मान 'नेताजी' भी कहते हैं।अदम्य साहस,त्याग और राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक नेताजी के सम्मान में यह दिन पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है,जो उनके निर्भीक नेतृत्व,अनुशासन और स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान को स्मरण करता है।
नेताजी ने देशवासियों में आत्मबल और स्वाभिमान का संचार किया। इस अवसर पर संगीत विभाग द्वारा वंदेमातरम गीत का सामूहिक रूप से गायन हुआ।वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र डॉ विनोद कुमार जोशी ने अतिथि स्वागत करते हुए कहा कि वंदेमातरम गीत देश के प्रति समर्पण के भाव को जागृत करतीं हैं तथा नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की जीवन यात्रा राष्ट्र के लिए समर्पित रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय जागरण में वंदेमातरम का योगदान विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित किया गया।
जिसमें क्रमशः नमिता फरिकार प्रथम,टुकेश्वरी नायक द्वितीय तथा कंचन साहू ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ श्रद्धा मिश्रा ने किया। सफल आयोजन में समिति के संयोजक डॉ निधि गुप्ता तथा डॉ सीमा रानी प्रधान एवं सुश्री नयनी तांडी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ाधिकारी, ग्रंथपाल, कार्यालयीन अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्राएं, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस के स्वयंसेवक उपस्थित रही।
कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी में जीवंत होगी जनजातीय वीरों की गाथा
रायपुर। गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर निकलने वाली छत्तीसगढ़ की झांकी इस वर्ष देशवासियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है। “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को भव्य रूप में प्रस्तुत करेगी।
रक्षा मंत्रालय द्वारा आज राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में आयोजित प्रेस प्रीव्यू के दौरान राष्ट्रीय मीडिया के समक्ष छत्तीसगढ़ की झांकी का प्रदर्शन किया गया। झांकी के माध्यम से उन अमर जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों के विरुद्ध संघर्ष किया और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
इन महान बलिदानियों की स्मृति में नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय स्थापित किया गया है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।
विशेषज्ञ समिति से अंतिम स्वीकृति प्राप्त होने के बाद जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों और कलाकारों ने बीते एक माह से दिन-रात परिश्रम कर झांकी को अंतिम रूप दिया है। इस वर्ष कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया है।
झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया है। धुर्वा समाज के इस महानायक ने अन्याय के विरुद्ध जनजातीय समाज को एकजुट किया। भूमकाल विद्रोह के प्रतीक आम की टहनियां और सूखी मिर्च झांकी में विशेष रूप से प्रदर्शित हैं। विद्रोह की व्यापकता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे।
झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया है। उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के हित में संघर्ष किया तथा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई। पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, देशभक्ति और स्वतंत्रता के प्रति अटूट संकल्प को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है।
CM साय के सलाहकार बनाए गए आर कृष्णा दास... पंकज झा जा सकते हैं दिल्ली
रायपुर। वरिष्ठ पत्रकार आर. कृष्णा दास को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सलाहकार नियुक्त किया गया है. सलाहकार के रूप में वे मुख्यमंत्री को मीडिया एवं अन्य विषयों पर परामर्श देंगेझ कृष्ण दास देश के प्रतिष्ठित मीडिया हाउस बिजनेस स्टैंडर्ड के छत्तीसगढ़ प्रमुख के रूप में लंबे समय से कार्यरत रहे हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार सलाहकार के रूप में आर कृष्णा दास मुख्यमंत्री को मीडिया एवं अन्य विषयों पर परामर्श देंगे। सलाहकार के रूप में दास को रूपये 1.50 लाख (रूपये एक लाख पचास हजार) प्रतिमाह प्राप्त होगा तथा अन्य सुविधाएं राज्य शासन के विशेष सचिव के समकक्ष प्राप्त होगी।
कृष्णा दास की नियुक्ति और भाजपा की राष्ट्रीय कमान नितीन नबीन के पास आने के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री के वर्तमान सलाहकार पंकज झा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में जा सकते हैं। उन्हें नितिन नबीन की मीडिया टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
साय कैबिनेट का फैसला.... नवा रायपुर में स्थापित होगा उच्च कोटि का शैक्षणिक संस्थान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्ताव का अनुमोदन तथा इससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया गया।
मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में उच्च कोटि का शैक्षणिक संस्थान स्थापित किये जाने हेतु श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को उनके नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान की स्थापना के लिए सेक्टर-18 में चिन्हांकित लगभग 40 एकड़ भू-खण्ड का आबंटन लीज के रूप में एकमुश्त 90 वर्षों के लिए करने की स्वीकृति प्रदान की है।
एसव्हीकेएम एक ख्याति प्राप्त संस्था है, जो वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत तथा वर्तमान में 30 शैक्षणिक संस्थान संचालित है, जोकि एक लाख से अधिक छात्रों को प्रति वर्ष प्री-प्राइमरी से लेकर डॉक्टोरल कार्यक्रमों में शिक्षा प्रदान करता है। वर्ष 2025 में एनआईआरएफ यूनिवर्सिटी रैकिंग में इस संस्था को 52वां रैंक प्राप्त हुआ है। नवा रायपुर में इस राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना से राज्य में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और मजबूती मिलेगी।
मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में 04 नवीन उद्यमिता केन्द्रों की स्थापना के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू का निर्णय लिया है। इससे राज्य में आईटी/आईटीईएस उद्योग तथा तकनीकी स्टार्ट-अप इको सिस्टम को प्रोत्साहित करने में यह एमओयू महत्वपूर्ण होगा।
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के 68 केन्द्र संचालित है, जिनमें 60 भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एआई, मेडटेक (हर्बल मेडिसिन एवं वन उत्पाद आधारित), स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट एग्री उद्यमिता केन्द्रों के माध्यम से आगामी तीन से पांच सालों में डोमेन विशेष के 133 स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देंगे। राज्य सरकार द्वारा छात्रों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं तथा उद्योगों को ईएसडीएम उत्पादों के प्रोटोटाइप विकसित करने में सहयोग प्रदान करने के लिए एसटीपीआई के माध्यम से एक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास (ईएसडीडी) केन्द्र स्थापित किया जाएगा, जो प्रति वर्ष 30 से 40 हार्डवेयर, स्टार्टअप और एमएसएमई को सभी सहायता प्रदान करेगा।
मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओ में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वर्तमान संसाधनों को सुदृढीकरण करने तथा निर्धारित मानक के अनुसार जांच की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य के जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में लैब के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक निर्णय लिए गए हैं।
श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का लोकार्पण 21 जनवरी को... आएंगे संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल
रायपुर। उत्तरपूर्वी भारत और मध्यभारत को जोड़ने वाले अकादमिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में पं. रविशंकर शुक्ल वि. वि. रायपुर में 21 जनवरी 2026 को असम के महान संत श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ का लोकार्पण होने जा रहा है। लोकार्पण समारोह में डॉ. कृष्ण गोपाल, सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्य अभ्यागत एवं वक्ता होंगे। कार्यक्रम महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका, माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, तथा उच्च शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन टंकराम वर्मा के आतिथ्य में समपन्न होगा।
इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के मध्य एम.ओ.यू. पर भी हस्ताक्षर होना है। एम.ओ.यू. के पश्चात दोनों ही विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक-दूसरे विश्वविद्यालय में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे।
श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत तथा मध्य भारत के भक्ति आन्दोलन से जुड़े महान संतो के योगदान एवं व्यापक प्रभाव को भारतीय जनमानस के समक्ष लेकर आना साथ ही दोनों ही क्षेत्रों के जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपरा को लेखबद्ध करना है। शोधपीठ के द्वारा 0 2 शोधवृत्ति भी शोधार्थियों को प्रदान किया जाना है। शोधपीठ में भाषा, साहित्य, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय अध्ययन, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य के विषय के शोधार्थी शोधकार्य कर सकते हैं।
बस्तर की इमली चटनी को राष्ट्रीय पहचान दिलाएंगी सुकमा की महिलाएं
रायपुर। बस्तर में इमली की चटनी को काफी पसंद किया जाता है l यह चटनी खाने में बहुत स्वादिष्ठ होती है l सुकमा जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की प्रसिद्ध इमली से तैयार “इमली चटनी” को वन धन विकास केंद्र सुकमा के माध्यम से आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा रहा है। यह उत्पाद स्थानीय वनोपज का मूल्य संवर्धन करने के साथ-साथ बस्तर की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास है।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किए गए अनुसंधान और गुणवत्ता मानकों के आधार पर यह चटनी तैयार की जा रही है। वन धन विकास केंद्र से जुड़ी नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाएँ इस चटनी के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता मानक, वैज्ञानिक विधि तथा आधुनिक पैकेजिंग संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और समूह की महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। बस्तर संभाग में इमली की अधिकता को देखते हुए यह पहल स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
इमली चटनी के उत्पादन से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। वन विभाग की यह पहल महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय कदम है। आने वाले समय में यह उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ के घरों का स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि सुकमा की महिलाओं की मेहनत और सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने ‘नालंदा परिसर’ फेस-2 का भूमिपूजन 23 जनवरी को
रायपुर। युवाओं को बेहतर भविष्य निर्माण में मदद करने वाला एक कंप्लीट एजुकेशन हब नालंदा परिसर के विस्तार के लिए अब नालंदा फेस-2 का निर्माण किया जाना है। जिसका भूमिपूजन कार्यक्रम शुक्रवार, 23 जनवरी को दोपहर 3 बजे एनआईटी कालेज के सामने आयोजित किया गया है। बतादें कि रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत ने वर्ष 2018 में पीडब्लूडी मंत्री रहते हुए अपने विधानसभा क्षेत्र में इसका निर्माण करवाया और तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने इसका लोकार्पण किया था।
रायपुर पश्चिम के विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेश मूणत ने कहा कि रायपुर का एजुकेशन हब वापस अपनी असली पहचान को पाएगा। अब यहां के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए उचित माहौल मिलेगा। जिसकी उन्हें जरूरत है। वर्तमान नालंदा परिसर एक अत्याधुनिक, 24x7 खुला रहने वाला स्टडी सेंटर और लाइब्रेरी है, जिसमें छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा के लिए बेहतर माहौल और सुविधाएं मिलती है। यहां स्मार्ट लाइब्रेरी, ई-लाइब्रेरी, वाई-फाई, कैफे और आउटडोर स्टडी जोन जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, और इसके मॉडल पर पूरे छत्तीसगढ़ में और भी कई परिसर बन गए हैं।
मूणत ने आगे कहा कि हमें यह बताते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है कि ज्ञान के आधुनिक केंद्र 'नालंदा लाइब्रेरी' के विस्तार का समय आ गया है। फेज-2 के निर्माण कार्य का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है। यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाला एक आधुनिक शिक्षा परिसर होगा
रायपुर साहित्य उत्सव–2026: छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना का राष्ट्रीय उत्सव, 23 जनवरी से भव्य आयोजन
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और विचार विमर्श का एक सशक्त मंच बनेगा, जिसमें देश-प्रदेश के साहित्य प्रेमी, लेखक, विचारक और पाठक बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे।
इस तीन दिवसीय साहित्य उत्सव में देश एवं प्रदेश के लगभग 120 ख्याति प्राप्त साहित्यकारों का आगमन होगा। आयोजन के दौरान कुल 42 साहित्यिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा।
साहित्य उत्सव के सत्रों में बौद्धिक विमर्श, भारतीय ज्ञान परम्परा, संविधान, सिनेमा और समाज, देश में नव जागरण, छत्तीसगढ़ में साहित्य, इतिहास के झरौखे में साहित्य, शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा, जो वर्तमान समय की बौद्धिक आवश्यकताओं को संबोधित करेंगे।
इसके अतिरिक्त नाट्य शास्त्र एवं कला परम्परा, साहित्य और राजनीति, समकालीन महिला लेखन, जनजातीय साहित्य, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पर्यटन, पत्रकारिता और शासन जैसे विषयों पर भी विशद परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। साथ ही प्रकाशकों की चुनौतियां, डिजिटल युग में लेखन और पाठक जैसे समसामयिक विषय भी विमर्श के केंद्र में रहेंगे।
आयोजन की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और प्रशासन द्वारा 21 जनवरी 2026 तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन स्थल पर मंच, पंडाल, तकनीकी व्यवस्थाएं, साज-सज्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं तेजी से अंतिम रूप ले रही हैं।
साहित्य उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी 2026 को राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा वर्धा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
साहित्य उत्सव का समापन 25 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें राज्य सरकार के मंत्रिगणों के साथ-साथ डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विभूतियां विशेष रूप से शामिल होंगी।
साहित्य उत्सव के दौरान 23 जनवरी को सायंकाल 7 बजे से प्रख्यात साहित्यकार एवं रंगमंच कलाकार श्री मनोज जोशी द्वारा चर्चित ‘चाणक्य’ नाटक का विशेष मंचन किया जाएगा, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा। इसके साथ ही महाभारत धारावाहिक में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले श्री नीतीश भारद्वाज तथा सिनेमा जगत के जाने-माने निर्माता-निर्देशक श्री अनुराग बसु भी साहित्य उत्सव में सहभागिता करेंगे। 24 जनवरी 2026 को देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया जाएगा।
साहित्यकारों की परिचर्चाओं एवं सत्रों के लिए आयोजन स्थल पर चार मंडप बनाए गए हैं। मुख्य मंडप का नामकरण ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के एकमात्र साहित्यकार स्व. श्री विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर किया गया है। दूसरे मंडप का नामकरण पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, तीसरे मंडप का नामकरण बस्तर के गौरव साहित्यकार लाला जगदलपुरी तथा चौथे मंडप का नामकरण साहित्यकार अनिरुद्ध नीरव के नाम पर किया गया है।
आयोजन स्थल पर विशाल पुस्तक मेला भी लगाया जाएगा, जहां प्रभात प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, सरस्वती बुक, यशस्वी प्रकाशन, हिन्द युग्म प्रकाशन, राजपाल प्रकाशन सहित लगभग 15 राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशक अपनी पुस्तकों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों एवं स्कूली विद्यार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा तथा साहित्यकारों द्वारा लिखी गई नई पुस्तकों के विमोचन की भी समुचित व्यवस्था की गई है।
आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों में हुए विकास को प्रदर्शित करने वाली आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। स्थानीय युवाओं एवं लोक कलाकारों के लिए टेलेंट ज़ोन बनाया गया है, जहां काव्य-पाठ, कहानी-पाठ, लोकनृत्य एवं गीत-संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही प्रतिदिन क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित कर विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
पुरखौती मुक्तांगन तक पुराने रायपुर से आने-जाने के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 20 निःशुल्क बसों का संचालन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, टाटीबंध, तेलीबांधा सहित छह मार्गों पर किया जाएगा। साहित्य उत्सव के सफल आयोजन हेतु लगभग 500 अधिकारी-कर्मचारी व्यवस्थाओं में जुटे हैं। आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों सहित स्थानीय खान-पान के लिए लगभग 15 फूड स्टॉल लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम स्थल में पेयजल, स्वच्छता एवं शौचालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
रायपुर साहित्य उत्सव–2026 छत्तीसगढ़ की बौद्धिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और समकालीन विचारधारा का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रदर्शन है। यह उत्सव साहित्य, संवाद और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करेगा तथा नई पीढ़ी में अध्ययन, अभिव्यक्ति और सृजनशीलता के प्रति रुचि को और सुदृढ़ करेगा।