रायपुर
हर नागरिक तक सुलभ चिकित्सा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताः सीएम साय
रायपुर। “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः…” की भारतीय जीवनदृष्टि को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिला चिकित्सालय में ‘अटल आरोग्य लैब’ का राज्यस्तरीय शुभारंभ किया। यह पहल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई क्रांति का आधार बनेगी, जो विशेष रूप से दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों को आधुनिक एवं सुलभ जांच सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य शासन का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के हर नागरिक तक उत्कृष्ट, किफायती और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं। उन्होंने कहा कि अटल आरोग्य लैब के माध्यम से अब प्रदेश के 1046 स्वास्थ्य संस्थानों - जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक -मुफ्त जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे लाखों नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा। इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मरीजों को 133 प्रकार की जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। जांच रिपोर्ट एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से सीधे मरीजों तक पहुंचेगी, जिससे उन्हें बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं होगी और उपचार प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह व्यवस्था न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ भी बनाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की डायग्नोस्टिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। इससे रक्त जांच सहित विभिन्न रोगों की पहचान शीघ्र और सटीक रूप से संभव होगी, जिससे समय पर उपचार शुरू कर मरीजों के स्वास्थ्य लाभ की दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से बस्तर जैसे दूरस्थ अंचलों में ऐसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है, ताकि यहां के नागरिकों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। अटल आरोग्य लैब इस दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।
उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय सुकमा में पहले से ही ब्लड बैंक, सोनोग्राफी, एक्स-रे, ईसीजी, आपातकालीन सेवाएं, सीजेरियन प्रसव, एनआरसी एवं डायलिसिस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब अटल आरोग्य लैब के जुड़ने से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक हो जाएंगी। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, बस्तर सांसद महेश कश्यप, महिला आयोग सदस्य दीपिका सोरी, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी. सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर प्रेस क्लब में ‘खेल मड़ई-2’ का आगाज जल्द... कैरम, शतरंज, बैडमिंटन और टेबल टेनिस की होंगी स्पर्धाएं
रायपुर। रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित खेल प्रतियोगिता ‘खेल मड़ई’ के दूसरे चरण ‘खेल मड़ई-2’ का आगाज जल्द ही किया जाएगा। इस चरण में इंडोर खेलों के अंतर्गत कैरम, शतरंज, बैडमिंटन और टेबल टेनिस की स्पर्धाएं आयोजित होंगी। प्रतियोगिताएं एकल एवं युगल वर्ग में कराई जाएंगी। आगामी प्रतियोगिता की तैयारियों को लेकर रविवार को रायपुर प्रेस क्लब की खेल समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा, नियमों और व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने खेल प्रतियोगिताओं को प्रेस क्लब के दिवंगत वरिष्ठ पत्रकारों की स्मृति को समर्पित करने के निर्णय को आगे बढ़ाते हुए इस बार की इंडोर स्पर्धाओं को भी अलग-अलग पत्रकारों की स्मृति में आयोजित करने का फैसला लिया है। इसके तहत बैडमिंटन स्पर्धा (एकल एवं युगल) स्व. देवेंद्र कर की स्मृति में आयोजित होगी। टेबल टेनिस स्पर्धा (एकल एवं युगल) स्व. सत्येंद्र गुमास्ता की स्मृति में आयोजित की जाएगी। कैरम स्पर्धा (एकल एवं युगल) स्व. रमेश नैयर की स्मृति में होगी। शतरंज स्पर्धा स्व. योगेश यदु की स्मृति में आयोजित की जाएगी।
इन प्रतियोगिताओं को लेकर प्रेस क्लब के सदस्यों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक विभिन्न स्पर्धाओं में भाग लेने के लिए 100 से अधिक प्रतिभागी आवेदन कर चुके हैं, जिससे इस बार प्रतियोगिता के और भी रोचक होने की उम्मीद जताई जा रही है।बैठक में प्रतियोगिता के नियमों पर भी चर्चा की गई। तय किया गया कि सभी स्पर्धाओं में केवल रायपुर प्रेस क्लब के सदस्य ही भाग ले सकेंगे। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रेस क्लब की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
प्रतिभागियों की संख्या अधिक होने के कारण स्पर्धाएं निर्धारित समय पर ही प्रारंभ की जाएंगी। निर्धारित समय के 10 मिनट तक प्रतिभागी के उपस्थित नहीं होने पर विरोधी खिलाड़ी को वॉकओवर दिया जाएगा। सभी मुकाबले निर्धारित खेल नियमों के अनुसार होंगे तथा किसी भी विवाद की स्थिति में निर्णायक एवं प्रेस क्लब कार्यकारिणी का निर्णय अंतिम माना जाएगा। प्रतियोगिता के विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कार राशि एवं ट्रॉफी भी प्रदान की जाएगी।
प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने बताया कि वरिष्ठ दिवंगत पत्रकारों की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे इसी कड़ी खेल मड़ाई 2 में दिवंगत पत्रकार जनों को समर्पित किया जा रहा है, हमारी कोशिश है कि नई पीढ़ी तक दिवंगत पत्रकारों के विचार एवं मार्गदर्शन पहुंचे इसलिए आयोजनों को दिवंगत पत्रकारों को समर्पित किया जा रहा है। बैठक में रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव भूपेश जांगड़े, खेल समिति के संयोजक विजय मिश्रा, सह संयोजक शंकर चंद्राकर सहित खेल समिति के सदस्य कमलेश गोगिया, दिनेश कुमार, राजेंद्र निगम, संतोष साहू, पी. रामाराव नायडू, लविंदर पाल सिंह, तिलक साहू, स्टार जैन और लक्ष्मण लेखवानी , हेमंत डोंगरे उपस्थित रहे।
महतारी वंदन योजना : ई-केवायसी अनिवार्य
रायपुर के 35 वार्डों में जल संकट, महापौर ने कहा – जहां समस्या वहां टैंकरों से भेज रहे पानी
महापौर चौबे ने कहा, शहर में जहां-जहां पानी की समस्या है वहां पानी टैंकर भेजा जा रहा है। एक करोड़ 50 लाख का टेंडर अभी टैंकर के लिए किया गया है। पिछले साल एक करोड़ का टेंडर हुआ था। जल आपूर्ति के लिए जल बोर्ड का भी गठन किया गया है।
बरसात का पानी बह जाता है। भूजल रिचार्ज के लिए निगम द्वारा क्या प्लान किया गया है? इस सवाल पर महापौर ने कहा, हमारे दसों जोन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 8 करोड़ तो कहीं 10 करोड़ जमा था, लेकिन मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लग पाया, जिसे राजसात किया गया। इस राशि से ठेका के माध्यम से घरों में हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाएंगे। बता दें कि पिछले दो सालों से महापौर यही राग अलाप रही है।
बिजली कंपनी के एमडी के नाम से फर्जी संदेश भेजकर साइबर ठगी की कोशिश
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला के नाम का दुरुपयोग करते हुए अज्ञात व्यक्तियों व्दारा अधिकारियों को ठगने का प्रयास किया गया। अधिकारियों की सजगता एवं सतर्कता से ठगों के मनसूबे नाकाम हो गए और इसकी शिकायत टोल फ्री नंबर 1930 में कर दी गई है।
ट्रांसमिशन कंपनी के कुछ अधिकारियों को आज दोपहर में एक फर्जी मोबाइल नंबर 99315-25803 से व्हाट्सएप के माध्यम से संदेश भेजे गए, जिनमें स्वयं को एमडी बताते हुए यह कहा गया कि वे किसी महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल प्रभाव से एक बड़ी राशि 49 लाख 60 हजार 801 आरटीजीएस के माध्यम से एक निर्दिष्ट खाते में स्थानांतरित की जाए। संदेश में जल्दबाजी का माहौल बनाते हुए अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव भी बनाया गया, जो कि साइबर ठगों द्वारा अपनाई जाने वाली सामान्य रणनीति मानी जाती है। मैसेज में बैंक का नाम, खाता संख्या, आईएफएसई कोड और लाभार्थी के संस्थान का नाम लिखा था।
कंपनी के सतर्क अधिकारियों ने इस संदिग्ध संदेश को गंभीरता से लेते हुए इसकी पुष्टि करने का प्रयास किया, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड है। इस घटना की जानकारी मिलते ही प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने तत्काल सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी और स्पष्ट निर्देश दिए कि इस प्रकार के किसी भी संदेश पर कोई प्रतिक्रिया न दी जाए तथा किसी भी स्थिति में कोई भी वित्तीय लेन-देन न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों के जरिए भुगतान का निर्देश देना पूरी तरह असंगत और संदिग्ध है।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर अपराधी अब बड़े अधिकारियों के नाम और पद का दुरुपयोग कर संगठनों को निशाना बना रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को भ्रमित कर त्वरित आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के मामलों में “मैं मीटिंग में हूं”, “तुरंत भुगतान करें” और “गोपनीय रखें” जैसे शब्दों का प्रयोग कर मानसिक दबाव बनाया जाता है, ताकि व्यक्ति बिना सोचे-समझे निर्णय ले ले।
प्रबंधन द्वारा सभी कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध संदेश, कॉल या ईमेल से सतर्क रहें, संबंधित नंबर को तुरंत ब्लॉक करें तथा आवश्यक होने पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। साथ ही, यह भी कहा गया है कि किसी भी असामान्य वित्तीय निर्देश की पुष्टि सदैव संबंधित अधिकारी के आधिकारिक संपर्क माध्यम से ही की जाए। यह मामला समय रहते पकड़ में आ जाने से किसी प्रकार की आर्थिक क्षति नहीं हुई, किंतु यह घटना सभी के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
कला हमेशा से अभिव्यक्ति, प्रतिबिंब और परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम रहीः मंत्री खुशवंत साहेब
रायपुर। गौरा में आपका स्वागत है। यह प्रदर्शनी आने वाले सभी लोगों के लिए खुशी, प्रेरणा और चिंतन का स्रोत बने। छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप (CGPAG) द्वारा आयोजित तीसरी दृश्य कला प्रदर्शनी ‘गौरा’ का आयोजन 10 अप्रैल से 12 अप्रैल 2026 तक महंत घासीदास संग्रहालय, राजभवन के निकट स्थित आर्ट गैलरी, रायपुर में किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित प्रदर्शनी देशभर के 100 प्रसिद्ध कलाकारों की कलाकृतियों को एक मंच पर प्रस्तुत करेगी। इस अवसर पर चार विशिष्ट अतिथि कलाकारों की सहभागिता भी रहेगी।
इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 10 अप्रैल 2026 को मुख्य अतिथि श्री गुरु खुशवंत,तकनीकी शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन व विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ. चित्तरंजन कर ,लेखक रायपुर और वेद प्रकाश भारद्वाज,दृश्य कलाकार, कला लेखक, क्यूरेटर और संपादक, नई दिल्ली के करकमलों द्वारा किया जाएगा, जो इस अवसर को गौरवान्वित करेंगे। उद्घाटन के पश्चात प्रदर्शनी दर्शकों के लिए खुली रही।‘गौरा’ प्रदर्शनी समकालीन भारतीय कला की विविधता, सृजनात्मकता और अभिव्यक्ति का उत्सव है। यह कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम दर्शकों को देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों की कृतियों को देखने और समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगी।
गुरु खुशवंत,तकनीकी शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन ने कहा कि मुझे बेहद खुशी और गर्व है कि मैं छत्तीसगढ़ की जीवंत और विविध कलात्मक भावना के उत्सव, सीजीपीएजी की उद्घाटन प्रदर्शनी ‘गौरा’ में आपका स्वागत करता हूँ। यह प्रदर्शनी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि इसमें हमारे क्षेत्र के 100 प्रगतिशील कलाकार एक साथ आ रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक ने हमारे सांस्कृतिक परिदृश्य के कैनवास पर अपनी अनूठी दृष्टि और रचनात्मकता का योगदान दिया है।
डॉ. ध्रुव तिवारी -क्यूरेटर, छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप (CGPAG),रायपुर ने कहा कि कला हमेशा से अभिव्यक्ति, प्रतिबिंब और परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम रही है। गौरा के माध्यम से हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ में मौजूद कलात्मक प्रतिभा के समृद्ध ताने-बाने को प्रदर्शित करना है, जो हमारे कलाकारों को अपनी कहानियों, सपनों और दृष्टिकोणों को दुनिया के साथ साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह प्रदर्शनी केवल कलाकृतियों का प्रदर्शन नहीं है। यह एक संवाद है, कलाकार और दर्शक के बीच एक वार्तालाप है, जो आपको व्यक्तिगत स्तर पर कलाकृतियों का पता लगाने, व्याख्या करने और उनसे जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है।
घासीदास म्युजियम कला वीथिका रायपुर में (CGPAG) की संगठनात्मक संरचना में डॉ. ध्रुव तिवारी -क्यूरेटर, जितेन साहू को- ऑर्डिनेटर,शांति तिर्की एसोसिएट को-ऑर्डिनेटर तथा अनिल खोबरागड़े, कोषाध्यक्ष के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यहाँ प्रस्तुत कृतियाँ हमारे कलाकारों के लचीलेपन, नवाचार और जुनून का प्रमाण हैं। वे हमारे समय के सार को पकड़ते हैं, उन विषयों को संबोधित करते हैं जो हमारी सामूहिक चेतना-पहचान, विरासत, पर्यावरण और मानवीय अनुभव के साथ प्रतिध्वनित होते हैं। प्रत्येक कृति अपने निर्माता की आत्मा में एक खिड़की है, जो शब्दों से परे अंतर्दृष्टि और भावनाएँ प्रदान करती है।
महिला आरक्षण से आधी आबादी को मिलेगा उनका पूरा हक, निर्णय प्रक्रिया में बढ़ेगी भागीदारीः मुख्यमंत्री साय
वलसाड- खड़गपुर- वलसाड के बीच समर स्पेशल ट्रेन की सुविधा, दुर्ग रायपुर बिलासपुर के यात्री होंगे लाभान्वित
आज की संगोष्ठी गीग मजदूरों के पुर्नउत्थान का शंखनादः शोभा सिंहदेव

रायपुर में पनीर फैक्ट्री पर खाद्य विभाग का छापा, उत्पादों के सैंपल लिए गए
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल सभी सैंपलों की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि फैक्ट्री में उपयोग किए जा रहे कच्चे माल और तैयार उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। खाद्य विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की मिलावट या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित फैक्ट्री मालिक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में भी हलचल देखी जा रही है। विभाग ने साफ किया है कि आगे भी इस तरह की जांच अभियान जारी रहेंगे ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
AIIMS का डॉक्टर बनकर करोड़ों की ठगी की साजिश नाकाम, ओडिशा का शातिर ठग रायपुर से गिरफ्तार
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई प्रोएक्टिव पुलिसिंग का उदाहरण है, जहां किसी शिकायत से पहले ही बड़े अपराध को रोक लिया गया। फिलहाल आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। पुलिस ने आम नागरिकों और बैंक अधिकारियों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान की पूरी तरह पुष्टि किए बिना कोई वित्तीय लेन-देन न करें।
पुलिस क्वार्टर में महिला आरक्षक की संदिग्ध हालत में फांसी पर लटकी मिली लाश
रायपुर। राजधानी के आजाद चौक थाने के पास बने पुलिस क्वार्टर में एक महिला आरक्षक की फांसी के फंदे पर लटकी हुई लाश मिली है। मृतिका की पहचान पूजा कुशवाहा के रूप में हुई है। मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, घटना शनिवार की रात लगभग 8:30 बजे के आसपास की बताई जा रही है। थाने में सूचना मिली कि एक महिला की फांसी के फंदे पर लाश लटकी हुई। आजाद चौक पुलिस टीम और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव को नीचे उतार कर पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की बारीकी से जांच की। प्रथम दृष्टया मौत की वजह आत्महत्या सामने आ रही है, लेकिन पुलिस इसके पीछे के कारणों की जांच में जुटी हुई है. पीएम रिपोर्ट आने के बाद पूरी सच्चाई सामने आएगी।
बीजापुर में विकास की नई दस्तक: मनरेगा और PM आवास से बदल रही 224 गांवों की तस्वीर
‘गौरा’ में प्रतिष्ठा के रॉक आर्ट में दिख रही पुरातन संस्कृति
- महंत घासीदास संग्रहालय में लगी दो दिवसीय राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी
रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय की आर्ट गैलरी में छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप की ओर से राष्ट्रीय दृश्य कला प्रदर्शनी गौरा का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में महाराष्ट्र मंडल रायपुर के आजीवन सभासद राजीव गाडगिल की पुत्री प्रतिष्ठा गाडगिल ने रॉक आर्ट बनाया है। जिस आर्ट में आदिवासियों को शिकार करते दिखाया गया है। यह आर्ट हमारी पुरातन संस्कृति को दर्शा रहा है।
प्रतिष्ठा ने बताया कि इन पेंटिंग्स में आदिवासियों को शिकार करते हुए दिखाया गया है। इनमें आदिवासियों का समूह एक साथ चलते हुए भी दिखाया गया है। इस आर्ट में 'पत्थर' जैसा टेक्सचर बनाने के लिए पीओपी और सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। इस आर्ट वर्क को पूरा करने में लगभग दो सप्ताह का समय लगा।
प्रतिष्ठा ने आगे बताया कि उन्होंने इस आर्ट में प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल किया। रंग बनाने के लिए लाल पत्थरों और हरी पत्तियों का उपयुक्त माना। इसके साथ ही, पुआल और रेत जैसे एलिमेंट्स का भी इस्तेमाल किया गया है। यह आर्ट वर्क इंसानी ज़िंदगी में आर्ट की शुरुआत को दिखाता है। इसमें पुराने ज़माने की लाइफस्टाइल कैसी थी, इसका साफ-साफ दिखाया गया है। रंगों के नेचुरल शेड्स की वजह से ये पेंटिंग्स बहुत असली लगती हैं। जैसा कि आर्टिकल में बताया गया है, यह आर्टवर्क 'बेमिसाल' है और इतिहास की कहानी कहता है। ये पेंटिंग्स एग्ज़िबिशन में दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं।
प्रतिष्ठा ने कहा कि इस आर्ट की खासियत मॉडर्न लिटरेचर के ज़रिए पुराने अनुभवों को बताना है। यह इंसान के शुरुआती दिनों के संघर्ष की एक झलक है। इसके ज़रिए पुराने ज़माने की संस्कृति को बचाए रखने की कोशिश दिखती है। इन पेंटिंग्स को देखते हुए ऐसा लगता है जैसे हम पुराने ज़माने में वापस चले गए हैं।
मुख्यमंत्री साय की प्रदेशवासियों से अपील.... पांडुलिपि संरक्षण में आएँ आगे
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारी पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएँ।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा "ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान" एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं डिजिटल माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य की भी नियमित सहभागिता हो रही है।
छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 07 जिलों में गठन / नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रह कर्त्ता व्यक्तियों / संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है, तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। प्रशिक्षकों को नोडल विभाग (संस्कृति विभाग) द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 06 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है।
उद्योग और श्रम विभाग के आपसी समन्वय से संवर रहा है - छत्तीसगढ़
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जिस स्पष्ट नीति के साथ श्रमिकों और उद्योगों के समन्वित विकास को प्राथमिकता दी है, वह आज ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रही है। श्रम विभाग की योजनाओं में यह भावना स्पष्ट झलकती है कि श्रमिक केवल आर्थिक इकाई नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला हैं। उनके जीवन में स्थायित्व, सम्मान और सुरक्षा लाना ही सच्चे विकास का संकेत है। 12 अप्रैल का यह विशेष अवसर उद्योग तथा श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के समर्पण, कार्यक्षमता और जनसेवा की भावना को याद करने का दिन है। आपके कुशल नेतृत्व से ही छत्तीसगढ़ प्रगति, समृद्धि और समान अवसरों का आदर्श राज्य बनकर उभरा है।
2026 रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ के विकास की वर्तमान यात्रा केवल योजनाओं और घोषणाओं की कहानी भर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे नेतृत्व की कथा है जिसने श्रमिक, युवा, उद्यमी और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। इस परिवर्तनकारी दौर में उद्योग व श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनका कार्य केवल प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का जीवंत उदाहरण है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 वर्ष की अल्प आयु में उद्योग के क्षेत्र में जो एक नया इतिहास रचने का संकल्प लिया है वह किसी से छिपा नहीं है। उद्योग के क्षेत्र में आज छत्तीसगढ़ की अपनी एक अलग पहचान है। नई उद्योग नीति (2024-2030) में छत्तीसगढ़ के समावेशी विकास पर जोर दिया गया है।
श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों में सबसे प्रेरणादायक पहल श्रमिकों के बच्चों को उत्कृष्ट विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि परिवर्तन का वह मार्ग है जिससे कि आने वाली नई पीढ़ी ज्ञान और अवसरों के माध्यम से अपना सुनहरा और सुरक्षित भविष्य स्वयं गढ़ सके। आज के संदर्भ में श्रमिक परिवारों के बच्चों का राज्य के प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करना, एक नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को लाखों रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करना सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें प्रतिभा का सम्मान सर्वाेपरि है। यह न केवल उन बच्चों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि पूरे श्रमिक समाज के लिए आत्मविश्वास का स्त्रोत भी है।
उद्योग और श्रम विभाग से आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले दो वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये सीधे श्रमिकों के खातों में हस्तांतरित किए गए हैं, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ भी सुनिश्चित हुआ है। प्रतिदिन हजारों श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलना इस बात का प्रमाण है कि शासन की नीतियां धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं। श्रमिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए आवास सहायता, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना, दुर्घटना में त्वरित आर्थिक सहयोग जैसी पहलें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से ’श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन। ’श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, एक मानवीय और संवेदनशील शासन का परिचायक है।
औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी मंत्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने नई ऊंचाईयों को छुआ है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के माध्यम से राज्य में निवेशको को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। करोड़ों रुपये के निवेश प्रस्ताव, सैकड़ों नए उद्योगों की स्थापना और हजारों युवाओं को रोजगार मिलना इस नीति की सफलता को प्रमाणित करता है।
नवा रायपुर में देश का पहला एआई डाटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में बढ़ता कदम, सेमीकंडक्टर और आईटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश, तथा स्टार्टअप नीति का क्रियान्वयन ये सभी पहलें छत्तीसगढ़ को पारंपरिक अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर आधुनिक तकनीकी युग में स्थापित कर रही हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना को भी नई दिशा देने वाला है। प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में ई-निविदा प्रणाली और सिंगल विंडो सिस्टम जैसे कदमों ने पारदर्शिता को बढ़ाया है जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है और राज्य में व्यापार करने की प्रक्रिया सरल बनी है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ आज निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है।
सामाजिक समावेशन को छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और दूरस्थ क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की योजनाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। सामाजिक समावेश नही किसी भी राज्य की वास्तविक प्रगति का आधार होता है।
उद्योग तथा श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने अपने गंभीर व दूर-दृष्टि सोच एवं विभागीय दायित्वों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि यदि नेतृत्व में संवेदनशीलता और स्पष्ट दृष्टि हो, तो विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के मार्गदर्शन में यह परिवर्तन और अधिक सशक्त और व्यापक रूप ले रहा है।