रायपुर। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल रविवार को यूनियन क्लब द्वारा आयोजित 'मेगा समर कैम्प' के समापन समारोह एवं समर कैम्प के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित सिल्वर जुबली समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यूनियन क्लब के समर कैम्प से उनका जुड़ाव प्रारंभ से ही रहा है। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष पूर्व जब इस समर कैम्प की शुरुआत हुई थी, तब भी उन्हें इसमें शामिल होने का अवसर मिला था और आज इसके 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में उपस्थित होकर उन्हें विशेष प्रसन्नता हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के समर कैम्प नई पीढ़ी के बच्चों और युवाओं में छिपी प्रतिभाओं को पहचानने, निखारने और उन्हें उचित दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को सीखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजनों से नई प्रतिभाएं उभरकर सामने आती हैं और भविष्य के लिए तैयार होती हैं।
अग्रवाल ने कहा कि हाल ही में आयोजित 'आकार' कार्यक्रम की तरह यह समर कैम्प भी बच्चों के सर्वांगीण विकास का उत्कृष्ट मंच बना है। उन्होंने यूनियन क्लब, गुरुचरण सिंह होरा एवं पूरी आयोजन समिति को इस सफल आयोजन तथा 25 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) में आयोजित कार्यक्रम में जिलेवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने 295 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 341 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 70.10 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 159 कार्यों का लोकार्पण तथा 224.90 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 182 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इन विकास कार्यों के माध्यम से सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, नगरीय अधोसंरचना तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा और जिले के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विधिविधान से पूजा-अर्चना कर विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया तथा बटन दबाकर पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण कर उन्हें जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज का दिन जांजगीर-चांपा जिले के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जांजगीर चांपा जिले को लगभग 295 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मिल रही है, जिससे क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और जनजीवन अधिक सुगम बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और अधोसंरचना से जुड़े कार्यों के माध्यम से लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से जिले में विकास की नई संभावनाएं सृजित होंगी तथा आमजन को सीधे लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित 159 कार्यों में जल संसाधन, वन, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, सीजीएमएससी, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्य शामिल हैं। वहीं भूमिपूजन के 182 कार्यों में जल संसाधन विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, लोक निर्माण विभाग, सीजीएमएससी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्य शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्य केवल निर्माण नहीं होते, बल्कि वे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है और इसी सोच के साथ प्रदेश में विकास एवं जनकल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
रायपुर।विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा द्वारा लोकभवन, रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ मंडप में विश्व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल एवं इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अध्यक्ष रमेन डेका जी थे, कार्यक्रम की अध्यक्षता इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के चेयरमैन तोमन साहू ने की।
इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 130 स्वैच्छिक रक्तदाताओं को उनके उत्कृष्ट मानवीय योगदान, सेवा भावना तथा समाज के प्रति समर्पण के लिए सम्मानित किया गया। अपने करकमलों से रक्तदाताओं का सम्मान करते हुए महामहिम राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है। रक्तदाता किसी अपरिचित व्यक्ति के जीवन को बचाकर समाज में करुणा, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है और प्रत्येक स्वस्थ नागरिक का नियमित रक्तदान अनेक परिवारों के लिए जीवन की आशा बन सकता है। महामहिम ने युवाओं एवं समाज के सभी वर्गों से स्वैच्छिक रक्तदान को जनआंदोलन बनाने में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चेयरमैन तोमन साहू ने कहा कि इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा का सतत प्रयास है कि प्रदेश में किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त के अभाव का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदाता समाज के वास्तविक नायक हैं, जिनके निस्वार्थ योगदान से प्रतिवर्ष हजारों लोगों को नया जीवन मिलता है। उन्होंने रक्तदान को सामाजिक दायित्व एवं मानवीय कर्तव्य बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की।
समारोह में महामहिम राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, महामहिम राज्यपाल के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी हरेन्द्र सिंह जडेजा,भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के वाइस चेयरमैन रुपेश कुमार पाणिग्राही, सचिव डॉ. रुपोल पुरोहित, रेडक्रॉस सोसायटी ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सत्यनारायण पाण्डेय, तथा राज्य प्रबंध समिति के सदस्य अशोक अग्रवाल, जय नारायण सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार साहू, नरेंद्र मेश्राम, अमित हलदर एवं राजेन्द्र राव उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रदेश के विभिन्न जिला शाखाओं के पदाधिकारी, स्वैच्छिक रक्तदाता, गणमान्य नागरिक तथा इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अधिकारी एवं कर्मचारीगण भी समारोह में सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि स्वैच्छिक रक्तदान केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति समर्पण का सशक्त माध्यम है। रक्तदान के माध्यम से हम न केवल किसी का जीवन बचाते हैं, बल्कि एक संवेदनशील, सहयोगी और जागरूक समाज के निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के सचिव डॉ. रुपोल पुरोहित द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। उन्होंने महामहिम राज्यपाल महोदय, सभी विशिष्ट अतिथियों, सम्मानित रक्तदाताओं, रेडक्रॉस पदाधिकारियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उपस्थित जनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान की भावना को जन-जन तक पहुंचाना और सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना रेडक्रॉस का सतत संकल्प है।
विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह समारोह केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में सेवा, संवेदना और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक प्रेरणादायी अभियान भी था। इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे स्वैच्छिक रक्तदान को अपने सामाजिक दायित्व का हिस्सा बनाकर मानवता की इस महान सेवा में सहभागी बनें।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भारतीय अंडर-18 हॉकी टीम के एशिया कप विजेता सदस्य अवि मानिकपुरी ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अवि मानिकपुरी को अंडर-18 एशिया कप में भारत की ऐतिहासिक विजय में महत्वपूर्ण योगदान के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा, अनुशासन और कड़ी मेहनत के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अवि मानिकपुरी को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इसी समर्पण और लगन के साथ आगे बढ़ते रहें तथा आने वाले समय में भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि अवि की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह साबित करती है कि अवसर और संकल्प मिलने पर छत्तीसगढ़ की प्रतिभाएं विश्व मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास और खिलाड़ियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयासों से युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के नए अवसर मिल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि बिलासपुर निवासी अवि मानिकपुरी भारत के उभरते हुए हॉकी खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने हाल ही में जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप प्रतियोगिता में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जिसमें अवि मानिकपुरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर परछत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष फिरोज अंसारी, महासचिव डॉ. मनीष श्रीवास्तव तथा अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मृणाल चौबे उपस्थित थे।
रायपुर। बलौदाबाजार- भाटापारा जिले के वनमंडल बलौदाबाजार के देवपुर परिक्षेत्र में शुक्रवार को औषधीय वनस्पतियों की पहचान और महत्व पर केंद्रित एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों की पहचान कराना, छाल, पत्ती, तना, जड़, फल एवं फूल के आधार पर वर्गीकरण सिखाना तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी देना था।
कार्यक्रम में अर्जुन, आंवला, बहेड़ा, बेल, काली मुसली, हाथीपांव, दूधी, भुईनीम, सतावर, खरहर, ठेलका, नरनारी, गरुड़ सहित लगभग 80 औषधीय वनस्पति प्रजातियों की पहचान कराई गई। विशेषज्ञों ने इन प्रजातियों के पर्यावरणीय व्यवहार, संरक्षण की आवश्यकता और फल, फूल, पत्ती, जड़ आदि के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। स्वस्थ, निरोग और दीर्घायु जीवनशैली के लिए प्रकृति आधारित ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला में वनमंडल बलौदाबाजार, वनमंडल कवर्धा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान रखने वाले वैद्यगण, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, बारनवापारा के गाइड्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वन मंडल अधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि कार्यशाला का मकसद केवल औषधीय ज्ञान का प्रसार नहीं था, इसका उद्देश्य इस ज्ञान को समाज के अधिक लोगों तक पहुंचाकर वृक्षों एवं वनस्पतियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता को प्रोत्साहित करना भी है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल होकर एनएचएम कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एनएचएम कर्मियों के 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन दिए जाने की घोषणा की।उन्होंने एनएचएम कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की “रीढ़ की हड्डी” बताते हुए कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण में एनएचएम कर्मियों का योगदान अतुलनीय है और सरकार उनके कार्यों का सम्मान करती है।
मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निभाई गई भूमिका को याद करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब एनएचएम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में स्वास्थ्य कर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश की, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों में, जहां सड़कें और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, स्वास्थ्य कर्मी पैदल चलकर, नदी-नाले पार कर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में संचालित “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही है और अब तक लगभग 90 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के साहसिक प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद का उन्मूलन हुआ है। अब वहां विकास और जनकल्याण की नई संभावनाएं खुल रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोलने से लेकर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी है और सभी के सहयोग से विकसित एवं स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि जशपुर से लेकर सुकमा तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में एनएचएम कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि “स्वस्थ बस्तर अभियान” का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कर्मचारियों के लिए की गई विभिन्न घोषणाओं और सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगें पूरी की जा चुकी हैं तथा स्थानांतरण नीति भी जारी कर दी गई है।उन्होंने कहा कि अब एनएचएम कर्मचारी भी कैशलेस उपचार योजना के दायरे में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि एनएचएम कर्मियों के लिए जीवन बीमा सुविधा लागू की गई है, जिसके तहत सामान्य मृत्यु की स्थिति में 6 लाख रुपये, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 1 करोड़ 40 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी आई है और नर्सों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के लिए विशेषीकृत 116 नए स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्थानों का चयन किया जा चुका है।
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा के बाद एनएचएम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने गजमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी तथा एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
रायपुर। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में रेशम, खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास और रोजगार सृजन की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्देश और दिशा-निर्देश जारी किए।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को एक विशेष और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण एवं कुटीर उद्योग क्षेत्र में कार्यरत प्रत्येक उद्यमी की वार्षिक आय को 5 लाख रुपये तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि हथकरघा बुनकरों, शिल्पियों एवं कारीगरों को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप नियमित डिजाइन विकास प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सके।
स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने पर जोर देते हुए श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के उद्यमियों को प्रमुख निर्यात एजेंसियों के साथ जोड़ा जाए। इससे न केवल उनके उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि देश के सुदूर क्षेत्रों के कारीगरों की पहुंच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी हो सकेगी।
रेशम उत्पादन की पारंपरिक पद्धतियों में नवाचार लाते हुए केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि रेशम केंद्रों में रेशम के पौधों के साथ-साथ फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) और सब्जी उत्पादन जैसी मिश्रित खेती को बढ़ावा दिया जाए। इस कदम से कीटपालकों और रेशम कृषकों को आय के अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, बैठक में सिल्क और कॉटन उत्पादों के साथ अन्य प्राकृतिक रेशों (Natural Fibers) के मिश्रण से नए और विविध उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्री ने कपड़ों की रंगाई में हल्दी, कत्था, मेहंदी और विभिन्न फूलों से तैयार प्राकृतिक रंगों (Natural Dyes) के अधिकतम उपयोग पर बल दिया। हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र में आधुनिक डिजाइनों और नए उत्पाद विकास को गति देने के लिए उन्होंने अधिकारियों को राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) के विशेषज्ञों का तकनीकी सहयोग लेने का निर्देश दिया।
बैठक में रायपुर के लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन और ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इस समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों से छत्तीसगढ़ के खादी, हथकरघा और रेशम क्षेत्र को एक नई दिशा मिलेगी, जिससे न केवल बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का सृजन होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नया संबल मिलेगा।
रायपुर : छत्तीसगढ़ का कबीरधाम (कवर्धा) जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरा है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ के तहत जिले में इतिहास, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े 38 दुर्लभ व महत्वपूर्ण प्राचीन दस्तावेजों की पहचान की गई है। कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान ने जिले की बौद्धिक विरासत के ऐसे अनमोल साक्ष्य उजागर किए हैं, जो मध्यभारत के इतिहास को एक नई दृष्टि प्रदान करेंगे।
सर्वेक्षण में मिला सबसे अनोखा और महत्वपूर्ण दस्तावेज लगभग 375 वर्ष पुरानी तालपत्र (पाम लीफ) पांडुलिपि है। बंगाली भाषा में लिखी गई यह पांडुलिपि प्राचीन पाक-कला (कुकिंग आर्ट) से संबंधित है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दुर्लभ दस्तावेज उस दौर की जीवनशैली, खानपान संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को समझने का एक बेहद अहम और जीवंत स्रोत है।
इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण के दौरान भारतीय भक्ति साहित्य और काव्य परंपरा से जुड़ी कई अमूल्य कडि़यों की पहचान की गई है। सन 1839 की संस्कृत में लिखित गीत गोविंद की दुर्लभ पांडुलिपि। सन 1856 की हस्तलिखित श्रीमद्भगवद्गीता और गजेंद्र मोक्ष से संबंधित प्राचीन प्रतियां मिली हैं।
अभिलेखीय अध्ययन और क्षेत्रीय इतिहास को खंगालने की दृष्टि से इस अभियान को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सर्वेक्षण में मध्यभारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को बयां करने वाले कई महत्वपूर्ण अनुवाद हाथ लगे हैं, जिनमें रामनगर (मंडला) शिलालेख का हिंदी अनुवाद, सन 1867 में किया गया प्रसिद्ध भोरमदेव शिलालेख का अनुवाद, सन 1898 का मड़वा महल शिलालेख का पद्यात्मक (काव्य रूप) अनुवाद शामिल हैं।
खगोल विज्ञान, ज्योतिष और वैदिक चिंतन को दर्शाती कई पोथियां भी इस अभियान में सामने आई हैं। इनमें ब्रह्मांड के चित्रांकन से संबंधित संस्कृत दस्तावेज और जैमिनी परंपरा की पोथियां शामिल हैं। प्राप्त दस्तावेजों में से अधिकांश कवर्धा निवासी आदित्य श्रीवास्तव तथा अजय कुमार चंद्रवंशी के निजी संग्रह से मिले हैं। इसके अलावा, ग्राम बसनी के सुभाष पाण्डेय के निजी संग्रह से महामृत्युंजय स्रोत, संध्या विधि, तांत्रिक संध्या, श्राद्ध पद्धति, और जलाशयराम मठोत्सर्ग विधि जैसी कई दुर्लभ तांत्रिक व वैदिक अनुष्ठान पद्धतियों की पांडुलिपियां मिली हैं।
रायपुर: कृषि क्षेत्र में नवाचार आधारित तकनीकों का उपयोग किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में नई संभावनाएं प्रदान कर रहा है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक न केवल फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कृषि विज्ञान केन्द्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ (मृदा विज्ञान) डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से दीर्घकाल में मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में नैनो उर्वरक आधुनिक कृषि के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ फसलों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराते हैं।
उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया का उपयोग पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) के माध्यम से किया जाता है। पौधे इसकी पत्तियों द्वारा पोषक तत्वों को सीधे अवशोषित करते हैं, जिससे इसकी उपयोग दक्षता पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक होती है। वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार नैनो यूरिया का उपयोग 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से किया जाना चाहिए तथा 500 मिलीलीटर की एक बोतल एक एकड़ क्षेत्र के लिए पर्याप्त होती है।
डॉ. कुमार ने बताया कि बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए नैनो यूरिया का पहला छिड़काव फसल की 30 से 35 दिन की अवस्था में तथा दूसरा छिड़काव 55 से 60 दिन की अवस्था में किया जाना चाहिए। इससे फसलों की वृद्धि, विकास और उत्पादन क्षमता में सकारात्मक सुधार देखा गया है।
नैनो डीएपी के संबंध में उन्होंने बताया कि यह फसलों को फास्फोरस उपलब्ध कराने का एक प्रभावी माध्यम है। इसका उपयोग बीजोपचार और पर्णीय छिड़काव दोनों रूपों में किया जा सकता है। बीजोपचार के लिए 5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज तथा छिड़काव के लिए 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से उपयोग करने की अनुशंसा की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसलों को अधिक लाभ मिलता है। साथ ही मिट्टी पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता, जिससे उसकी उर्वरता और उत्पादक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। राज्य सरकार और कृषि विभाग किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभ और उनके वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी दी जा रही है।
डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग निर्धारित मात्रा और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार करें, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सके।
रायपुर : राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिज संपदा के अवैध दोहन को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध मुरुम उत्खनन और रेत परिवहन में संलिप्त कुल 9 वाहनों को जब्त किया है।
कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के निर्देश पर जिला खनिज उड़नदस्ता दल द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर यह कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान सिवनी और मरवाही क्षेत्र में अवैध रूप से मुरुम उत्खनन किए जाने की सूचना पर खनिज विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच में अवैध उत्खनन की पुष्टि होने पर 2 जेसीबी मशीन एवं 3 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया। सभी जब्त वाहनों को संबंधित पुलिस थानों में सुरक्षित रखा गया है।
इसी प्रकार मरवाही, कोलबीरा एवं कोटमी क्षेत्र में अवैध रूप से रेत का परिवहन करते पाए जाने पर 4 ट्रैक्टर वाहनों को भी जब्त किया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की गई है। वाहन मालिकों को नियमानुसार अर्थदंड जमा करने के बाद ही वाहनों की रिहाई की अनुमति दी जाएगी।
राज्य सरकार द्वारा खनिज संपदा को सार्वजनिक संपत्ति मानते हुए उसके संरक्षण और वैध उपयोग को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अवैध उत्खनन और परिवहन न केवल शासन को राजस्व हानि पहुंचाते हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी गंभीर चुनौती उत्पन्न करते हैं। इसी कारण प्रदेश सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संदेश देते हुए लगातार निगरानी और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
रायपुर : सुशासन तिहार आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के साथ जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बना है। कबीरधाम जिले के ग्राम मोहगांव, तहसील पण्डरिया निवासी 85 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग मनुराज बंजारे को आवेदन करने पर बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। ट्रायसायकल मिलने से अब उनके लिए आवागमन आसान हुआ है और लंबे समय से अधूरी रह गई शिक्षा तथा आत्मनिर्भर बनने के सपनों को नई दिशा मिली है। यह सहायता उनके लिए केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का सशक्त माध्यम बनी है।
मनुराज बंजारे 85 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग हैं। उन्होंने सुशासन तिहार 2026 के दौरान बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया था। समाज कल्याण विभाग द्वारा उनके आवेदन पर त्वरित कार्यवाही करते हुए उन्हें यह सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके आवागमन में अब काफी सहजता आएगी। मनुराज ने बताया कि पिता के निधन के बाद उनका जीवन कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। शारीरिक दिव्यांगता एवं आर्थिक अभाव के कारण वे कक्षा 5वीं के बाद अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके। इन परिस्थितियों के चलते वे मानसिक रूप से भी काफी परेशान और निराश रहने लगे थे। लेकिन अब बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने से उनके जीवन में एक नई आशा आई है।
मनुराज बंजारे ने कहा कि अब उन्हें विद्यालय आने-जाने में सुविधा होगी और वे अपनी अधूरी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए नियमित रूप से अध्ययन करने का प्रयास करेंगे। यह सहायता उनके लिए केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्राप्त कर मनुराज बंजारे ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सरकार को आभार ज्ञापित किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल ने उनके जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास मिला है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजनांदगांव जिले की प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर सुश्री महक नरवासे ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह तथा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम के आगामी श्रीलंका दौरे के लिए टी-20 एवं वनडे दोनों टीमों का उपकप्तान नियुक्त किए जाने पर सुश्री महक नरवासे को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर महक का सम्मान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महक नरवासे की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार या राजनांदगांव जिले की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही हैं। महक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायी है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महक आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ और देश का नाम गौरवान्वित करेंगी। उन्होंने महक को प्रोत्साहित करते हुए कहा, "खूब खेलो, आगे बढ़ो और नई ऊंचाइयों को छुओ। आपकी सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगी।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महक नरवासे का भारतीय अंडर-19 महिला टीम की उपकप्तान के रूप में चयन प्रदेश में विकसित हो रहे खेल वातावरण और खिलाड़ियों को मिल रहे अवसरों का उत्कृष्ट उदाहरण है।
सुश्री महक नरवासे ने सम्मान एवं शुभकामनाओं के लिए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उनके पिता राधेश्याम नरवासे, महापौर मधुसूदन यादव, कोच मनोज तिवारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर : खैरागढ़ जिले के विकासखंड छुईखदान के ग्राम गर्रा स्थित बैगा बसाहट कोहकाझोरी में पेयजल समस्या का समाधान होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से पेयजल की समस्या का सामना कर रहे बसाहट के ग्रामीणों ने ग्राम के पंचगणों के साथ जिला कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को अपनी समस्या से अवगत कराया था। ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को स्थल निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निर्देश के बाद विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पेयजल समस्या के निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ की।
कलेक्टर के निर्देशानुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा कोहकाझोरी बैगा बसाहट में नवीन नलकूप का खनन कर हैंडपंप स्थापित किया गया। हैंडपंप स्थापना के बाद क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है, जिससे ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो सका है। नए हैंडपंप के शुरू होने से अब ग्रामीणों को पानी के लिए दूरस्थ स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को राहत मिली है, जिन्हें पहले पेयजल की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त समय और श्रम लगाना पड़ता था।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा स्थापित हैंडपंप से वर्तमान में कोहकाझोरी बैगा बसाहट के सभी परिवारों को नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। पेयजल व्यवस्था सुचारू होने से ग्रामीणों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति सहज रूप से हो रही है। ग्रामीणों ने पेयजल समस्या के निराकरण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारियों के प्रति आभार जताया है
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।
रायपुर : ग्रीष्मकालीन उड़द एवं मूंग की खेती किसानों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रही है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन, उन्नत बीजों की उपलब्धता तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों के कारण बेमेतरा जिले में इस वर्ष ग्रीष्मकालीन दलहन खेती का रकबा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। जहां पिछले वर्ष केवल 285 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द-मूंग की खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 1191 हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इसमें लगभग 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में 1280 किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन उड़द का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों को नई तकनीकों को सीखने और अपनाने का अवसर मिला। इस सकारात्मक परिवर्तन की कहानी ग्राम गाड़ाभाठा के कृषक अमर सिंह साहू तथा ग्राम बिजागोंड के कृषक चंद्रकुमार कुंभकार जैसे प्रगतिशील किसानों से जुड़ी हुई है, जिन्होंने पहली बार ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती कर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हैं।
बेमेतरा के विकासखंड साजा के ग्राम गाड़ाभाठा निवासी कृषक अमर सिंह साहू ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में लगभग 1.5 एकड़ भूमि में ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती की। उन्हें विभाग द्वारा उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए गए तथा कतार पद्धति से बुवाई, समय पर सिंचाई और समुचित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी गई। 21 अप्रैल 2026 को की गई बुवाई के बाद फसल की बढ़वार अत्यंत संतोषजनक रही। वर्तमान में उनकी फसल अच्छी स्थिति में है तथा लगभग 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त होने की संभावना है।
अमर सिंह साहू बताते हैं कि पहले वे केवल परंपरागत फसलों पर निर्भर रहते थे, लेकिन कृषि विभाग की सलाह और प्रदर्शन कार्यक्रम को देखकर उन्होंने ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती अपनाई। फसल की वर्तमान स्थिति देखकर उन्हें बेहतर आय की उम्मीद है और भविष्य में वे अधिक क्षेत्र में दलहन फसलों का उत्पादन करने की योजना बना रहे हैं।
रायपुर : घर केवल ईंट और सीमेंट से बना ढांचा नहीं होता, बल्कि वह परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की नींव होता है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना ने कोरबा जिले के सैकड़ों परिवारों के लिए इस सपने को साकार कर दिखाया है। अपने घर का सपना संजोए अनेक परिवार आज कोरबा नगरीय क्षेत्र के झगरहा में विकसित अटल विहार कॉलोनी में आत्मविश्वास और संतोष के साथ जीवन बिता रहे हैं। यह आवासीय परिसर आज इस बात का प्रमाण है कि सुनियोजित आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार भी बनता है।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा 75 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से 19 एकड़ में यह आवासीय परियोजना विकसित की गई है। विभिन्न आय वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां कुल 335 स्वतंत्र आवासों एवं फ्लैट भवनों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। जिसमें 50 एच.आई.जी., 18 सीनियर एम.आई.जी., 32 जूनियर एम.आई.जी., 75 एल.आई.जी. तथा 160 ई.डब्ल्यू.एस. आवासों सहित प्रकोष्ठ भवन का निर्माण शामिल है।
परियोजना के अंतर्गत अब तक 305 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और उनका चरणबद्ध हस्तांतरण किया जा रहा है। वर्तमान में 22 एच.आई.जी. तथा 5 सीनियर एम.आई.जी. भवनों का हस्तांतरण भी जारी है। यह उपलब्धि केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
अटल विहार कॉलोनी में अब तक 184 आवास हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं, जहां परिवार पिछले तीन वर्षों से शांत, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में निवास कर रहे हैं। पक्की सड़कें, बेहतर आधारभूत सुविधाएं, नियोजित आवासीय परिसर और सामुदायिक वातावरण ने यहां के निवासियों को एक नई जीवन शैली प्रदान की है। जिन परिवारों के लिए स्थायी आवास कभी एक चुनौती था, उनके लिए अटल विहार आज आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन का पर्याय बन चुका है।
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 14 जून को जांजगीर चांपा जिले के प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में जांजगीर-चांपा जिले में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय सत्य निज नाम बोध संस्थान पोड़ी (राछा) में आयोजित सत्य निज नाम सत्संग सम्मलेन में भी शामिल होंगे।
केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि जिले के प्रभारी एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विशिष्ट अतिथि छ.ग. विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसद जांजगीर-चांपा कमलेश जांगड़े, विधायक जांजगीर-चांपा ब्यास कश्यप, विधायक अकलतरा राघवेन्द्र कुमार सिंह, विधायक पामगढ़ शेषराज हरबंश, विधायक जैजैपुर बालेश्वर साहू, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, अध्यक्ष छ.ग. खनिज विकास निगम सौरभ सिंह, पूर्व संसदीय सचिव अम्बेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता आनंद मिरी, उपाध्यक्ष जिला पंचायत गगन जयपुरिया, अध्यक्ष जनपद पंचायत नवागढ़ कांता कश्यप, ग्राम पंचायत पोड़ी सरपंच सरोजनी आशिकर होंगे।
रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पारंपरिक विष्णु भोग चावल की तारीफ किए जाने के बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालत यह है कि अब जिले के बाहर से भी लोग इस विशेष सुगंधित चावल को खरीदने के लिए उत्पादकों तक सीधे पहुंच रहे हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत निमधा में आयोजित जनचौपाल के दौरान स्थानीय किसानों और महिला समूहों द्वारा उपजाए गए विष्णु भोग चावल की विशेष सराहना की थी। मुख्यमंत्री के इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इसी वीडियो को देखकर रायपुर निवासी अजय कुमार इस पारंपरिक चावल की विशेषताओं और गुणवत्ता से इतने प्रभावित हुए कि वे अपने साथियों के साथ सीधे गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले पहुंच गए।