देश-विदेश
भारतीय नौसेना में 40 वर्षों की सेवा के बाद सेवामुक्त हुए आईएनएस चीता, गुलदार और कुंभीर
नईदिल्ली। भारतीय नौसेना के युद्धपोत चीता, गुलदार और कुंभीर को राष्ट्र की चार दशकों की गौरवशाली सेवा प्रदान करने के बाद 12 जनवरी, 2024 को सेवामुक्त कर दिया गया। इन जहाजों को कार्य मुक्त करने का कार्यक्रम पोर्ट ब्लेयर में एक पारंपरिक समारोह में आयोजित किया गया था, जिसमें सूर्यास्त के समय राष्ट्रीय ध्वज, नौसेना पताका और तीन जहाजों के डीकमीशनिंग प्रतीक को अंतिम बार नीचे उतारा गया।
आईएनएस चीता, गुलदार और कुंभीर को पोलैंड के ग्डिनिया शिपयार्ड में पोल्नोक्नी श्रेणी के ऐसे जहाजों के रूप में तैयार किया गया था, जो टैंकों, वाहनों, कार्गो तथा सैनिकों को सीधे कम ढलान वाले समुद्र तट पर बिना गोदी के पहुंचा सकते थे। इन युद्धपोतों को क्रमशः 1984, 1985 और 1986 में पोलैंड में भारत के तत्कालीन राजदूत श्री एस के अरोड़ा (चीता एवं गुलदार) तथा श्री ए के दास (कुंभीर) की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
तीनों जहाजों के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर क्रमशः कमांडर वीबी मिश्रा, लेफ्टिनेंट कमांडर एसके सिंह और लेफ्टिनेंट कमांडर जे बनर्जी को तैनात किया था। अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान, आईएनएस चीता को कुछ समय के लिए कोच्चि व चेन्नई में रखा गया था और आईएनएस कुंभीर तथा गुलदार विशाखापत्तनम में सेवा दे रहे थे। बाद में इन जहाजों को अंडमान और निकोबार कमान में तैनात किया गया, जहां उन्होंने कार्यमुक्त होने तक अपनी सेवाएं दीं। ये युद्धपोत भारतीय नौसेना सेवा में लगभग 40 वर्षों तक सक्रिय रहे थे और 12,300 दिनों से अधिक समय तक समुद्र में रहते हुए सामूहिक रूप से लगभग 17 लाख समुद्री मील की दूरी तय की। अंडमान और निकोबार कमान के जल स्थलचर मंच के रूप में, इन जहाजों ने तट पर सेना के जवानों को उतारने के लिए समुद्र तट पर 1300 से अधिक अभियान संचालित किए हैं।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2024 के लिए नामांकन आमंत्रित
नईदिल्ली। भारत सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में "राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार" की घोषणा की है। राष्ट्रीय पुरस्कार शोधकर्ताओं, प्रौद्योगिकीविदों और नवप्रवर्तकों के उत्कृष्ट और प्रेरक वैज्ञानिक, तकनीकी और नवाचार योगदान को मान्यता प्रदान करता है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों में व्यक्तियों या टीम से राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी) के लिए नामांकन/आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं।
पुरस्कार निम्नलिखित चार श्रेणियों में प्रदान किए जाएंगे।
विज्ञान रत्न (वीआर): विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जीवनकाल की उपलब्धियों और योगदान को मान्यता देने के लिए अधिकतम तीन पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
विज्ञान श्री (वीएस): विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए अधिकतम 25 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
विज्ञान युवा: शांति स्वरूप भटनागर (वीवाई-एसएसबी) पुरस्कार: विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले युवा वैज्ञानिकों की प्रतिभा को पहचान दिलाने और उन्हेंव प्रोत्साहित करने के लिए अधिकतम 25 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
विज्ञान टीम (वीटी) पुरस्कार: तीन या अधिक वैज्ञानिकों/शोधकर्ताओं/नवप्रवर्तकों की एक टीम को अधिकतम तीन पुरस्कार प्रदान किए जा सकते हैं, जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक टीम में काम करते हुए असाधारण योगदान दिया हो।
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार निम्नलिखित 13 प्रक्षेत्र में दिए जाएंगे, जिनमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जैविक विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग विज्ञान, कृषि विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और अन्य शामिल हैं।
पुरस्कारों के इस गुलदस्ते के लिए गृह मंत्रालय के पुरस्कार पोर्टल (https://awards.gov.in/) पर 14 जनवरी 2024 से 28 फरवरी 2024 तक नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं। सामान्य दिशानिर्देश और राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का विवरण, पुरस्कार पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इस वर्ष पुरस्कारों का संचालन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा किया जा रहा है।
पुरस्कारों की घोषणा 11 मई 2024 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर की जाएगी। सभी श्रेणियों के पुरस्कारों के लिए पुरस्कार समारोह 23 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।
मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ का 10वां वार्षिक सम्मेलन.... संघ के नवीन “लोगों और मोटो” का अनावरण
भोपाल। मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ के दसवें द्विवर्षीय सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में मुख्य अतिथि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति संजीव खन्ना, विशिष्ट अतिथि माननीय न्यायाधिपति अनिरूद्ध बोस, न्यायाधिपति जेके माहेश्वरी तथा माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ ने दीप प्रज्जवलन कर किया। इसमें संघ के नवीन “लोगों और मोटो” का अनावरण किया। माननीय न्यायाधिपति संजीव खन्ना द्वारा “बैकलॉग्स टू ब्रेकथ्रुस” किताब का विमोचन किया गया। इसमें एक “सोवेनियर” का विमोचन भी न्यायामूर्ति अनिरूद्ध बोस, न्यायाधीश संघ के संविधान के द्विभाषी संस्करण का विमोचन न्यायामूति जेके माहेश्वरी द्वारा किया गया।
सुबोध जैन, अध्यक्ष मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ द्वारा स्वागत उदबोधन में मध्यप्रदेश के माननीय मुख्य न्यायामूर्ति द्वारा न्यायाधीशों के उत्थान हेतु किये गये कार्यों का उल्लेख कर जिला न्यायालय के न्यायाधीशों को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों को प्रकट किया। इस अवसर पर उन्होंने न्यायालय की कार्यवाही की लाईवस्ट्रीमिंग की शुरूआत एवं विगत वर्षों में दिवंगत हुये न्यायाधीशों के संबंध में आयोजित सभा आदि विषयों पर विचार व्यक्त करते हुये आयोजित अधिवेशन को न्यायाधीशों के लिये एक अलग पहल होना बताया।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति संजीव खन्ना ने कहा कि वे स्वयं एक जिला न्यायाधीश के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी संपूर्ण न्यायिक यात्रा न्यायाधीशों से साझा कर प्रकट किया कि न्यायाधीशों को न सिर्फ न्यायालयों में अपितु समाज के प्रत्येक हिस्से में सम्मान मिलता है। उनके द्वारा न्यायाधीशों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संवेदनशील होने और समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति न्यायिक कार्य को और अधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार से करने की अपेक्षा की।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति अनिरूद्ध बोस ने कहा कि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या और उनके निराकरण में विलंब होने के संबंध में अपनी चिंता प्रकट करते हुय यह अपेक्षा की कि न्यायाधीश अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण कर इसमें वैकल्पिक विवाद समाधान के तरीकों का प्रभावी उपयोग करें।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायामूर्ति जेके माहेश्वरी द्वारा न्यायाधीशों के अपने कर्म के प्रति सजग होने के लिये एवं न्यायाधीश के कार्य को पुनीत कार्य होना प्रकट कर न्यायाधीशों को उनकी नियुक्ति से समय दिलाये जाने वाली शपथ एवं संविधान के अंतर्गत न्यायालयों को नागरिकों के मूलभूत अधिकार की रक्षा के प्रति सजग किया। उनके द्वारा राग, लोभ, भय द्वेष से विमुक्त होकर कार्य करने की सलाह दी है।
माननीय मुख्य न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय श्री रवि मलिमठ द्वारा अपने अभिभाषण में 60 वर्ष से लंबित एक प्रकरण के निराकरण का उदाहरण देते हुये बताया कि न्यायाधीश को मेहनत कर प्रकरण के अंतिम निराकरण हेतु सर्वोच्च कार्यकरना चाहिये। उनके द्वारा “25 पुराने प्रकरण” निराकरण योजना के अंतर्गत न्यायाधीशों द्वारा तेज गति से कार्य करने पर उन्हें बधाई दी साथ ही कहा कि प्रकरण विलंबन की अंतहीन प्रक्रिया को समाप्त कर न्यायाधीश अपनी मेहनत से प्रकरण को अंतिम निराकरण तक पहूँचा सकता है।
जेलों का सतत निरीक्षण करें और बंदियों के पुर्नवास की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मेाहन यादव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे जेलों का सतत निरीक्षण करें और जेलों में अच्छी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराएं। जेलों में बंद बंदियों के पुर्नवास की व्यवस्था कराएं तथा आवश्यक होने पर उन्हें विधिक सहायता भी मुहैया कराएं। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया है कि लगातार अपराध करने वाले अपराधियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज संभागीय मुख्यालय शहडोल में संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक में कानून व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे।
बैठक में खुले में अवैध रूप से मांस के विक्रय पर प्रतिबंध के प्रयासों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर पालिकाएं मांस बेचने वालों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं कराएं तथा माँस बेचने के लिए उन्हें सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि डीजे वालों का रोजगार प्रभावित न हो इसके भी प्रयास किये जाएं। बैठक में एडीजीपी श्री डी.सी. सागर ने शहडोल संभाग में बेहतर कानून व्यवस्था कायम करने के लिए किए गए नवाचारों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर विभागों का औचक निरीक्षण करें तथा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाएं। उन्होंने निर्देशित किया कि औचक निरीक्षण के दौरान किसी को अनावश्यक परेशान न करें बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों को सकारात्मक और परिणाम मूलक कार्य करने के लिए प्रेरित करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य दूर-दराज के क्षेत्रों में अपराधों को रोकने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि आम लोगों के मन से पुलिस का डर निकलना चाहिए, इस दिशा में पुलिस विभाग के अधिकारी कर्मचारी सकारात्मक प्रयास करें। युवाओं से मिलकर सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करें।
92 वर्ष की आयु में ली मशहूर शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रे ने अंतिम सांस... किराना घराने का किया प्रतिनिधित्व
नईदिल्ली। 92 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से जानी मानी शास्त्रीय गायिका डॉ. प्रभा अत्रे का शनिवार को निधन हो गया हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के किराना घराने का प्रतिनिधित्व करने वाली अत्रे को भारत सरकार ने तीनों पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया था। एक सूत्र ने कहा, “अत्रे को अपने घर पर सोते समय दिल का दौरा पड़ा। उन्हें शहर के कोथरुड इलाके में एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें सुबह 5.30 बजे मृत घोषित कर दिया गया।” सूत्र ने कहा, चूंकि अत्रे के परिवार के कुछ करीबी सदस्य विदेश में रहते हैं, इसलिए उनका अंतिम संस्कार उनके यहां पहुंचने के बाद किया जाएगा।
The great Vidushi Prabha Atre who singing and scholarship transformed Hindustani music, has passed. Here is her iconic tarana in Kalavati https://t.co/KnMQhQdUml pic.twitter.com/xmJ30BKPKV
— Vijayendra Rao (@bijurao) January 13, 2024
बतादें कि 13 सितंबर 1932 को जन्मे अत्रे एक वर्सेटाइल पर्सनालिटी के रूप में जानी जाती थे। एक शास्त्रीय गायिका होने के अलावा, उन्होंने एक शिक्षाविद, शोधकर्ता, संगीतकार और लेखिका के रूप में भी काम किया हैं। विज्ञान और कानून में स्नातक, उन्होंने संगीत में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। जनवरी 2022 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इससे पहले उन्हें 1990 में पद्म श्री पुरस्कार और 2002 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने संगीत रचना पर किताबें भी लिखी। ‘स्वरांगिनी’ और ‘स्वरंजनी’ उनकी ही रचना है। ‘अपूर्व कल्याण’, ‘मधुर कौंस’, ‘दरबारी कौंस’, ‘पटदीप-मल्हार’, ‘शिव काली’ को भी प्रभा ने ही अपनी कलम दी है। हमेशा अपनी आवाज से लोगों को कायल करने वाली प्रभा आज हमारे बीच नहीं रहीं। उनका निधन म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए बड़ी क्षति है। उनके निधन से हर कोई दुखी है। सभी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
कैपिटल फूड्स और फैब इंडिया अब टाटा ग्रुप की.... 7000 करोड़ रुपये में हुई डील!
डेस्क। रतन टाटा की टाटा ग्रुप में अब दो और कंपनियां जुड़ने जा रही है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्टस लिमिटेड ने कैपिटल फूड्स और फैब इंडिया को खरीद रही है। इसके लिए कंपनी ने दोनों फर्मों से डील पर हस्ताक्षर किए हैं। ये डील पूरा होने के बाद ये दोनों कंपनियां टाटा ग्रुप का हिस्सा बन जाएंगी।
टाटा ने ऐलान किया है कि वह 5,100 करोड़ रुपये में 'चिंग्स सीक्रेट' और 'स्मिथ एंड जोन्स' जैसे ब्रांड के मालिक कैपिटल फूड्स कंपनी को खरीदने जा रही है। टाटा इसमें 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी, जिसके लिए एक डील पर हस्ताक्षर हुए हैं। इसके अलावा 1,900 करोड़ रुपये में फैबइंडिया ब्रांड की ऑर्गेनिक इंडिया कंपनी को भी खरीदेने जा रही है। यह कंपनी पैकेज्ड ऑर्गेनिक चाय, हर्बल उत्पाद और हेल्थ संबंधी अन्य उत्पाद बेचती है।
टाटा की कंपनी ने कहा कि बाजार में बढ़ती मांग और अपने बिजनेस को एक नया मुकाम देने के लिए कैपिटल फूड्स का अधिग्रहण किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024 के लिए कैपिटल फूड्स का अनुमानित कारोबार 750 से 770 करोड़ रुपये है, जबकि वित्त वर्ष 2024 के लिए ऑर्गेनिक इंडिया का अनुमानित कारोबार 360 से 370 करोड़ रुपये है।
आकस्मिक भुगतान वाले श्रमिकों को मिलेगा 10 लाख का बीमा.... रक्षामंत्री ने दी प्रस्ताव को मंजूरी
नईदिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन/जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स द्वारा विभिन्न जारी परियोजना कार्यों के लिए नियोजित आकस्मिक भुगतान वाले श्रमिकों (सीपीएल) के लिए एक समूह (टर्म) बीमा योजना शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत आकस्मिक भुगतान वाले श्रमिकों (सीपीएल) की किसी भी प्रकार की मृत्यु पर उनके परिवार/निकट संबंधियों को बीमा के रूप में 10 लाख रुपये मूल्य की बीमा राशि प्रदान की जायेगी।
खतरनाक कार्य स्थलों, खराब मौसम वाले, दुर्गम इलाकों और पेशे की वजह से उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरे वाली स्थितियों में तैनात सीपीएल के जीवन के गंभीर जोखिम को ध्यान में रखते हुए और उनके नियोजन काल के दौरान हुई/रिपोर्ट की गई मौतों पर विचार करते हुए, मानवीय आधार पर बीमा कवरेज का प्रावधान सीपीएल के लिए मनोबल बढ़ाने वाला एक ठोस कदम साबित होगा। यह योजना देश के अंदरूनी और दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाले सीपीएल के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण से जुड़े एक उपाय के रूप में काम करेगी। इससे उनके परिवारों की आजीविका सुरक्षित करने में काफी मदद मिलेगी।
इस तथ्य को याद रखा जा सकता है कि रक्षा मंत्री ने हाल ही में सीपीएल की बेहतरी के लिए कई कल्याणकारी उपायों को मंजूरी दी थी। इसमे पार्थिव शरीर का संरक्षण एवं परिवहन तथा सहायक (अटेंडेंट) के परिवहन भत्ते की पात्रता। अंत्येष्टि संबंधी सहायता को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया और मृत्यु आदि की स्थिति में तत्काल सहायता के रूप में 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि का अग्रिम भुगतान शामिल है।
सड़क निर्माण की कार्य योजना बनाते समय शहरों की सुंदरता का रखें ध्यानः मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सड़कों के निर्माण की योजना बनाते हुए शहरों की सुंदरता का ध्यान रखें। जन आकांक्षाओं के अनुरूप और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर सड़क निर्माण की योजना बनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में एमपीआरडीसी के संचालक मंडल की बैठक ले रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दो स्थानों के बीच दूरी और यात्रा का समय कम हो, इन मुख्य बिन्दुओं को ध्यान में रखकर नए वैकल्पिक मार्ग की तलाश करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड के संचालक मंडल निगम द्वारा किए गए कार्यों का प्रेजेंटेशन दिया। संचालक मंडल के प्रस्तावों पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वीकृति के साथ आवश्यक निर्देश दिए।
बैठक में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव वीरा राणा, प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखवीर सिंह, संचालक मंडल के सदस्य, प्रबंध संचालक एमपीआरडीसी अविनाश लवानिया सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
गांधी उद्यान में तीन दिवसीय फल और फूलों की प्रदर्शनी... विद्यार्थियों के लिए कई स्पर्धाएं भी
रायपुर। प्रकृति और पर्यावरण प्रेमियों की संस्था ‘प्रकृति की ओर सोसायटी’ की ओर से मुख्यमंत्री निवास के पास गांधी उद्यान में फल, फूल और सब्जियों की प्रदर्शनी लगाई गई है। तीन दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारंभ शनिवार 13 जनवरी को हुआ है।
‘प्रकृति की ओर सोसायटी’ के अध्यक्ष व सचिव मोहन वल्र्यानी ने बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ अंचल में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्शय से 13 से 15 जनवरी तक तीन दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। प्रदर्शनी मुख्यमंत्री निवास के पास गांधी उद्यान में लगाई जाएगी।
मोहन वल्र्यानी ने आगे बताया कि इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए तोरण सजाओ, चित्रकला, सलाद सजाओ, फूल और बुके सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। 13 जनवरी को फल, फूल, पत्तियों और सब्जियों से तोरण सजाओ प्रतियोगिता होगी। शिल्पी नागपुरे (8839120445) और उषा सिंघल (7000691354) को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। वहीं रविवार, 14 जनवरी को चित्रकला प्रतियोगिता होगी। इस स्पर्धा में भाग लेने के लिए प्रतिभागी जया भगवानानी (9425506672) के पास अपना पंजीयन करा सकते है। चित्रकला पर्यावरण पर आधारित होनी चाहिए। इसी दिन बुके सजाओ स्पर्धा भी होगी। इसके लिए मनीषा त्रिवेदी (9425509229) पर संपर्क किया जा सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि प्रदर्शनी के तीसरे दिन सोमवार, 15 जनवरी को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच सलाद सजाओ प्रतियोगिता होगी। सुनीता चंसोरिया (9425504069) को इसका प्रभारी बनाया गया है। सलाद सजाओं प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए इनके पास पंजीयन कराना होगा।
खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रत्येक सुझाव और प्रस्ताव मान्य होगाः मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। प्रदेश के युवा खिलाड़ियों की एशियाड और ओलम्पिक खेलों में अर्जित उपलब्धियां सराहनीय हैं। खेलों और खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रबंधन को बेहतर बनाते हुए राज्य सरकार प्राप्त सुझावों एवं प्रस्तावों को मान्य करते हुए उन पर अक्षरश: अमल करेगी। खिलाड़ियों के कोच अर्थात खेल प्रशिक्षक भी सामान्य शिक्षकों की तरह पदोन्नति के पात्र होंगे। उक्त बातें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में राष्ट्रीय युवा दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुरस्कार प्राप्त समस्त खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। युवा दिवस के उपलक्ष्य में नासिक में राष्ट्रीय युवा दिवस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा दिए गए संबोधन का मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में श्रवण किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में खेलों का विशेष स्थान है। प्राचीन काल में होने वाले स्वयंवर में तींरदाजी जैसी गतिविधि को स्थान प्राप्त था। स्वामी विवेकानंद जी युवाओं के लिए खेल आवश्यक मानते थे। उन्होंने उस कठिन समय में शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में अपनी बात रखी, जब भारत को दकियानूसी लोगों और सपेरों का देश कहा जाता था। वास्तविकता यह है कि भारत की संस्कृति की ऊंचाइयां हिमालय की ऊंचाइयों से भी बढ़कर हैं। आज प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हम चंद्रयान से गगनयान तक पहुंच रहे हैं। हमारे यान सूर्य देव (आदित्य) तक भी पहुंच सकते हैं। इक्कीसवीं सदी भारत की होगी, यह कोई कल्पना नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के कार्य को गौरवशाली बताते हुए कहा कि भगवान राम आदर्श पुत्र, आदर्श पिता और आदर्श शासक थे। उनका प्रकृति के प्रति सम्मान था। वनवासियों और मनुष्यों के साथ वन्य प्राणियों के प्रति भी प्रेम था। भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को जहाँ स्वामी विवेकानंद ने विश्व तक पहुंचाया, वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी प्रत्येक कार्य से अमिट छाप छोड़ रहे हैं। उन्होंने कोविड वैक्सीन, देशवासियों के साथ ही अन्य देशों तक भी नागरिकों की जीवन रक्षा के लिए पहुंचाने का कार्य किया। हाल ही में उन्होंने लक्षद्वीप जाकर यात्रा को ऐतिहासिक बनाया। यहाँ पर पर्यटन की असीम संभावनाओं को साकार किया जा सकेगा। इसी माह विश्व के अन्य स्थानों पर पर्यटन के लिए जाने वाले लोग अपनी यात्रा निरस्त कर लक्षद्वीप जाने लगे हैं।
प्रधानमंत्री ने आज से शुरू किया श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 11 दिवसीय विशेष अनुष्ठान
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी को अयोध्या धाम में मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 11 दिवसीय विशेष अनुष्ठान शुरू कर दिया है। “ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। जैसा हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है, हमें ईश्वर के यज्ञ के लिए, आराधना के लिए, स्वयं में भी दैवीय चेतना जागृत करनी होती है। इसके लिए शास्त्रों में व्रत और कठोर नियम बताए गए हैं, जिन्हें प्राण प्रतिष्ठा से पहले पालन करना होता है। इसलिए, आध्यात्मिक यात्रा की कुछ तपस्वी आत्माओं और महापुरुषों से मुझे जो मार्गदर्शन मिला है...उन्होंने जो यम-नियम सुझाए हैं, उसके अनुसार मैं आज से 11 दिन का विशेष अनुष्ठान आरंभ कर रहा हूं।”
अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में केवल 11 दिन ही बचे हैं।
— Narendra Modi (@narendramodi) January 12, 2024
मेरा सौभाग्य है कि मैं भी इस पुण्य अवसर का साक्षी बनूंगा।
प्रभु ने मुझे प्राण प्रतिष्ठा के दौरान, सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का निमित्त बनाया है।
इसे ध्यान में रखते हुए मैं आज से 11 दिन का विशेष…
एक भावनात्मक संदेश में प्रधानमंत्री ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले पूरे देश में राम भक्ति की भावना का उल्लेख किया। इस क्षण को ईश्वर का आशीर्वाद बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, मैं भावुक हूँ,भाव-विह्वल हूँ! मैं पहली बार जीवन में इस तरह के मनोभाव से गुजर रहा हूँ, मैं एक अलग ही भाव-भक्ति की अनुभूति कर रहा हूं। मेरे अंतर्मन की ये भाव-यात्रा, मेरे लिए अभिव्यक्ति का नहीं, अनुभूति का अवसर है। चाहते हुए भी मैं इसकी गहनता, व्यापकता और तीव्रता को शब्दों में बांध नहीं पा रहा हूं। आप भी मेरी स्थिति भली भाँति समझ सकते हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर के लिए आभार व्यक्त किया, ''मुझे उस सपने के पूरा होने के समय उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है, जिस स्वप्न को अनेकों पीढ़ियों ने वर्षों तक एक संकल्प की तरह अपने हृदय में जिया, मुझे उसकी सिद्धि के समय उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है। प्रभु ने मुझे सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का निमित्त बनाया है। ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है।”
प्रधानमंत्री ने इस पवित्र अवसर पर ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों और परमात्मा का आशीर्वाद मांगा और खुशी व्यक्त की कि वह नासिक धाम- पंचवटी से अनुष्ठान शुरू करेंगे जहां प्रभु श्रीराम ने काफी समय बिताया था। उन्होंने आज स्वामी विवेकानन्द एवं माता जीजाबाई की जयंती के सुखद संयोग का भी उल्लेख किया और राष्ट्र चेतना के दो दिग्गजों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री को इस पल में अपनी मां की याद आई जो हमेशा सीता-राम के प्रति भक्ति से भरी रहती थीं।
भगवान राम के भक्तों के बलिदान को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “शरीर के रूप में, तो मैं उस पवित्र पल का साक्षी बनूंगा ही, लेकिन मेरे मन में, मेरे हृदय के हर स्पंदन में, 140 करोड़ भारतीय मेरे साथ होंगे। आप मेरे साथ होंगे...हर रामभक्त मेरे साथ होगा। और वो चैतन्य पल, हम सबकी सांझी अनुभूति होगी। मैं अपने साथ राम मंदिर के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाले अनगिनत व्यक्तित्वों की प्रेरणा लेकर जाऊंगा''।
प्रधानमंत्री ने देश को अपने साथ जुड़ने के लिए कहा और लोगों का आशीर्वाद मांगा तथा उनसे अपने भाव उनके साथ साझा करने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम सब इस सत्य को जानते हैं कि ईश्वर निराकार है। लेकिन ईश्वर, साकार रूप में भी हमारी आध्यात्मिक यात्रा को बल देते हैं। जनता-जनार्दन में ईश्वर का रूप होता है, ये मैंने साक्षात देखा है, महसूस किया है। लेकिन जब ईश्वर रूपी वही जनता शब्दों में अपनी भावनाएं प्रकट करती है, आशीर्वाद देती है, तो मुझमें भी नई ऊर्जा का संचार होता है। आज, मुझे आपके आशीर्वाद की आवश्यकता है।”
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने किया सी-डॉट का दौरा... अनुसंधान एवं विकास प्रयासों की सराहना की
नईदिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के एक प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) दिल्ली परिसर का दौरा किया। सी-डॉट सरकार के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप देश की जरूरतों के लिए स्वदेशी, सुरक्षित दूरसंचार समाधान विकसित करने में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने सीडीएस जनरल अनिल चौहान और सशस्त्र बलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सुरक्षा संचालन केंद्र (नेटवर्क में मैलवेयर का वास्तविक समय में पता लगाना), एंटरप्राइज सुरक्षा केंद्र (सभीएंड प्वाइंट्स को कवर करते हुए एंटरप्राइज स्तर पर द्वेषपूर्ण खतरों और हमलों का वास्तविक समय में पता लगाना और उनको कम करना), क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन, पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, जैसे प्रमुख दूरसंचार सुरक्षा क्षेत्रों से विविध दूरसंचार उत्पाद पोर्टफोलियो/समाधानों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।।
अन्य समाधान जैसे 4जी कोर और 4जी आरएएन, 5जी कोर और 5जी आरएएन, सीएपी का उपयोग करके आपदा प्रबंधन समाधान, ऑप्टिकल ट्रांसपोर्ट और एक्सेस समाधान, स्विचिंग और रूटिंग समाधान आदि पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद उपयोग के मामलों पर प्रकाश डालते हुए इन समाधानों का प्रयोगशाला प्रदर्शन किया गया।
दिव्यांगजनों के लिए 70 घंटे के इंटरैक्टिव रोजगार कौशल पाठ्यक्रम शुरू... बनेंगे रोजगार के नये अवसर
नईदिल्ली। दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण विभाग ने एक अभूतपूर्व सहयोग में, दिव्यांगजनों के लिए एक परिवर्तनकारी 70 घंटे के इंटरैक्टिव रोजगार कौशल पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए सक्षम भारत के साथ समझौता किया है। यह पाठ्यक्रम दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण विभाग के सचिव, राजेश अग्रवाल के दूरदर्शी मार्गदर्शन के अंतर्गत तैयार किया गया। राजेश अग्रवाल के अनुसार, इस अग्रणी पाठ्यक्रम को दिव्यांगजनों के लिए लाभकारी रोजगार के अवसरों तक पहुंच में क्रांति लाने के लिए तैयार किया गया है।
इस नए पाठ्यक्रम का भव्य शुभारंभ पर्पल फेस्ट में हुआ, जो दिव्यांगजनों के लिए एक आशाजनक और उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत करता है। उपस्थित लोगों ने उद्घाटन समारोह देखा, जिसमें एक समावेशी और सशक्त समाज बनाने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया।
इस महत्वपूर्ण घोषणा के अलावा, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद ने, दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से, पहुंच मानकों के लिए व्यापक दिशानिर्देशों का अनावरण किया। भौतिक और डिजिटल कौशल प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे दोनों के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किए गए ये दिशानिर्देश, विविध दिव्यांगजनों के लिए समावेशिता के प्रतीक के रूप में उपस्थित हैं। यह क्रांतिकारी कदम यह सुनिश्चित करता है कि सभी सरकार से जुड़े कौशल प्रशिक्षण संगठनों द्वारा मानकों को देश भर में अपनाया जाएगा, जिससे सभी के लिए अधिक सुलभ वातावरण को प्रोत्साहन मिलेगा।
इन प्रयासों की परिणति कला अकादमी के मुख्य हॉल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम द्वारा चिह्नित की गई, जहां सुभाष फल देसाई और राजेश अग्रवाल ने इन परिवर्तनकारी पहलों की शुरुआत की। यह आयोजन न केवल एक प्रमुख उपलब्धि का प्रतीक है, बल्कि सभी के लिए अधिक सुलभ और समावेशी भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का भी प्रतिनिधित्व करता है। इन पहलों का प्रभाव पूरे देश में दिव्यांगजनों के लिए रोजगार और पहुंच के परिदृश्य में स्थायी बदलाव लाने का आश्वासन प्रदान करता है।
परी बाज़ार हेरीटेज फेस्टिवल सीजन-4 का शुभारंभ... राज्यपाल बोले- दिल और दिमाग़ के अद्भुत समन्वय से सृजित होता है हस्तशिल्प
भोपाल। हस्तशिल्प का सृजन दिल और दिमाग़ के अद्भुत समन्वय का परिणाम होता है। परी बाज़ार में देश भर के उत्कृष्ट कलाकारों के शिल्प के प्रदर्शन का अवसर देना सराहनीय है। उक्त बातें बेगम्स ऑफ भोपाल लेडीज क्लब के तत्वावधान में आयोजित परी बाज़ार के शुभारम्भ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहीं। उन्होंने गौहर महल परिसर में परी बाज़ार का शुभारम्भ किया।
राज्यपाल ने सभी से आग्रह किया कि बाज़ार घूमने के लिए आये तो यहां से कुछ ना कुछ ज़रूर ख़रीदे। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने दस्तकारों, हुनरमंद कारीगरों को मंच देने के भोपाल लेडीज़ क्लब के प्रयासों को सार्थक बताया। श्री पटेल ने भोपाल लेडीज़ क्लब द्वारा भारत के एकमात्र महिला बाज़ार को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आयोजन के लिए परी बाज़ार की पूरी टीम को बधाई दी।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण का कार्य चल रहा है। स्व सहायता समूह की गतिविधियों ने महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता प्रदान की है। अब महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वतंत्र होकर आगे बढ़ रही है।
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा है कि भोपाल शहर गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल रहा है। यह समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परम्पराओं का मिलन स्थल है। सुल्तान जहाँ बेगम ने अनेक लोकहित कार्यों के साथ महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा देने परी बाज़ार की स्थापना की थी। यह उनका अभिनव और अद्वितीय प्रयास था।
राज्यपाल का कार्यक्रम के प्रारंभ में स्मृति चिन्ह और खादी के परिधान भेंट कर अभिनंदन किया गया। उन्होंने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। पटेल ने कमला पार्क में देशभर से आये कारीगरों के स्टॉल्स का अवलोकन किया। शुभारम्भ कार्यक्रम में स्वागत भाषण चिरायु फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अजय गोयनका ने दिया। नाबार्ड के चेयरमेन सुनील कुमार ने स्थानीय कारीगरों के प्रोत्साहन के लिए नाबार्ड के प्रयासों की जानकारी दी। बेगम्स ऑफ भोपाल लेडीज क्लब की अध्यक्ष सुश्री रक्षा ज़ाहिद ने आभार व्यक्त किया।
अयोध्या से अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ान शुरू... सप्ताह में तीन बार भरेगी उड़ान
नईदिल्ली। नागर विमानन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने नई दिल्ली से अयोध्या और अहमदाबाद के बीच सीधी उड़ान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस उद्घाटन के साथ ही अयोध्या को अहमदाबाद से सप्ताह में तीन सीधी उड़ानें मिलेंगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, अयोध्या के सांसद लल्लू सिंह और अहमदाबाद से संसद सदस्य डॉ. किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी उपस्थित थे। विमान सेवा इंडिगो इस मार्ग पर परिचालन करेगी और निम्नलिखित समय-सारणी के अनुसार 11 जनवरी 2024 से अहमदाबाद - अयोध्या - अहमदाबाद (सप्ताह में तीन बार) के बीच उड़ान शुरू होगी।
नागर विमानन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि अयोध्या से अहमदाबाद के लिए सीधी उड़ान से दोनों शहरों के बीच हवाई कनेक्टिविटी को और बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि दोनों शहर सही अर्थ में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर अहमदाबाद भारत की आर्थिक शक्ति का प्रतीक है तो दूसरी ओर अयोध्या भारत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों शहरों के बीच हवाई संपर्क से आर्थिक विकास होगा, यात्रा और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने 20 महीने के रिकॉर्ड समय में अयोध्या हवाई अड्डे के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि आवंटित करने में सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने यह भी दोहराया कि हवाईअड्डा प्रधानमंत्री के इस विचार को पूरा कर रहा है कि हवाईअड्डे केवल 'हवाईअड्डे' नहीं हैं बल्कि किसी क्षेत्र के लोकाचार, संस्कृति और इतिहास के प्रवेश द्वार भी हैं। महर्षि वाल्मिकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की बाहरी संरचना राम मंदिर से प्रेरित है, और टर्मिनल भवन सुंदर चित्रों और कलाकृतियों के माध्यम से भगवान राम की जीवन यात्रा को दर्शाता है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों में विमानन क्षेत्र की वृद्धि के बारे में कहा कि 2014 में उत्तर प्रदेश में केवल 6 हवाई अड्डे थे और अब राज्य में 10 हवाई अड्डे हैं, जिनमें अयोध्या में महर्षि वाल्मिकी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है। उत्तर प्रदेश में अगले महीने तक 5 और हवाई अड्डे होंगे, जिनमें आज़मगढ़, अलीगढ़, मोरादाबाद, श्रावस्ती और चित्रकूट में एक-एक हवाई अड्डा होगा। इसके अलावा 2024 के अंत तक जेवर में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी तैयार हो जाएगा। कुल मिलाकर भविष्य में यूपी में 19 हवाई अड्डे होंगे।
रामलला के प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में विशेष यजमान बनेगा डोमराजा परिवार
डेस्क। मोक्षदायिनी मणिकर्णिका घाट पर सनानत धर्मावलंबियों का अंतिम संस्कार कराने वाला डोमराजा परिवार रामलला की प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में विशेष यजमान बनकर बैठेगा। डोमराजा अनिल चौधरी अपनी सहधर्मिणी के साथ विशेष यजमान के रूप में अनुष्ठान का हिस्सा बनेंगे। काशी की गोवर्धन पूजा समिति के कोषाध्यक्ष सीताराम यादव भी पत्नी के साथ विशेष यजमान के रूप में अयोध्या जाएंगे।
काशी का डोमराजा परिवार और गोवर्धन समिति से जुड़े सीताराम यादव भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा की पूजा विधि में खास मेहमान के तौर पर मौजूद रहेंगे। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती के साथ संघ के प्रतिनिधि मंडल ने डोमराजा अनिल चौधरी को आमंत्रित किया। इस अवसर पर उनकी माता जमुना देवी और पत्नी सपना चौधरी भी उपस्थित रहीं। स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि काशी में परिवार के साथ अयोध्या जाने का यह पहला निमंत्रण है। डोमराज अनिल चौधरी पत्नी सपना चौधरी के जाएंगे। उन्होंने कहा कि सनातन हिन्दू धर्म और श्रीरामजन्म भूमि ने कभी ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं किया। इस समारोह यदि शंकराचार्य से लेकर राजा तक आमंत्रित हैं, तो काशी के डोमराज परिवार भी आमंत्रित है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र के वंशज रहे हैं। राजा हरिश्चन्द्र ने डोमराजा के यहां नौकरी की। इस नाते डोमराजा परिवार का संबंध भगवान श्रीराम से बताया जाता है। आमंत्रण पाकर बहुत ही प्रसन्न डोमराजा अनिल चौधरी ने कहा कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का दर्शन करने का अवसर मिलेगा। लेकिन, आज उनके मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित होने का अवसर मेरे परिवार को प्राप्त हुआ, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। (साभार-अमर उजाला)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लंदन में इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से की मुलाकात... कई मुद्दों पर हुई चर्चा
नईदिल्ली। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों ब्रिटेन के दौरे पर हैं। बुधवार को उन्होंने यहां 10 डाउनिंग स्ट्रीट में ब्रिटिश प्रधान मंत्री ऋषि सुनक से मुलाकात की और कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक गर्मजोशी और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। रक्षा मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दोनों देशों के नेताओं के नेतृत्व में दोनों ही देशों ने ऐतिहासिक संबंधों को आधुनिक, बहुआयामी और परस्पर लाभकारी साझेदारी में ढालने और उन्हें फिर से तैयार करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
राजनाथ सिंह ने संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, बढ़ी हुई अंतरसंचालनीयता, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में परस्पर सैन्य संबंधों सहित, द्विपक्षीय रक्षा संबंधों में हाल में हुई वृद्धि का स्मरण किया। उन्होंने प्रौद्योगिकी क्षेत्र सहित रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने में हो रहे मौजूदा प्रयासों पर जोर दिया। रक्षा मंत्री ने श्री ऋषि सुनक को इंग्लैंड के रक्षा उद्योग के साथ हुई अपनी सकारात्मक बातचीत और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों में नई सकारात्मक ऊर्जा के बारे में भी जानकारी दी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इंग्लैंड और समान विचारधारा वाले अन्य देशों को शांतिपूर्ण और स्थायी वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहिए, जिसमें भारत के ठोस उत्थान में भागीदारी भी शामिल है, जिसे मैत्रीपूर्ण सहयोग से अधिक मजबूत, सुदृढ़ करने के साथ-साथ गति प्रदान की जा सकती है।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21वीं सदी के मध्य तक एक विकसित देश बनने के राष्ट्रीय उद्देश्य की दिशा में 1.4 बिलियन भारतीयों के लक्ष्य का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से उल्लेखनीय परिणाम मिल रहे हैं, विकास में लगातार वृद्धि हो रही है, गरीबी में लगातार काफी कमी आई है और व्यापार अनुकूल ढांचा स्थापित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार इंग्लैंड जैसे दोस्तों को नियम आधारित विश्व व्यवस्था मजबूत बनाने के लिए साझेदारी करने के लिए तैयार है।
प्रधानमंत्री सुनक व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इंग्लैंड और भारत द्वारा मिलकर काम करने की आवश्यकता पर रक्षा मंत्री से पूरी तरह सहमत हुए। विशेष रूप से, उन्होंने यह आशा व्यक्त की कि मौजूदा मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ताओं को जल्द ही एक सफल निष्कर्ष पर लाया जा सकता है। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के रक्षा और सुरक्षा स्तंभ को मजबूत करने के लिए अपनी और अपनी सरकार की उत्सुकता पर भी जोर दिया, जिसमें भारतीय समकक्ष संस्थाओं के साथ मजबूत व्यापार और प्रौद्योगिकी भागीदारी के लिए सरकार का समर्थन भी शामिल है।