देश-विदेश
भारत में समावेशी वॉइस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा: नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स
देलही : वॉइस टेक्नोलॉजी भारत में डिजिटल समावेशन का मूलभूत आधार बन रही है, जो लाखों लोगों के सार्वजनिक सेवाओं, सूचनाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंचने के तरीके को आकार दे रही है। इसी पृष्ठभूमि में, 20 फरवरी, 2026 को इंडिया एआई समिट एक्सपो 2026 में वॉइस टेक्नोलॉजी पर एक नई नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट लॉन्च की गई, जिसका उद्देश्य खुली, समावेशी और जिम्मेदार वॉइस टेक्नोलॉजी को समर्थन देने के लिए एक नीति और व्यवहारिक ढांचा तैयार करना है।
नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट को आर्टपार्क @आईआईएससी, डिजिटल फ्यूचर्स लैब और ट्राइलीगल ने संयुक्त रूप से विकसित किया था, जिसमें भाषिनी और फेयर फॉरवर्ड - एआई फॉर ऑल पहल का सहयोग था। इसे जीआईजेड (जर्मन विकास सहयोग) ने कार्यान्वित किया था और जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (बीएमजेड) ने फंड मुहैया कराया था , जो भारत में जिम्मेदार स्पीच टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने के लिए अनुसंधान, तकनीकी विशेषज्ञता और परितंत्र सहयोग को एक साथ लाता है।
भारत जैसे भाषाई विविधता वाले देश में, वॉइस टेक्नोलॉजीज डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो वाक्-आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से डिजिटल पहुंच की बाधाओं को कम करती हैं। हालांकि, वॉइस टेक्नोलॉजीज के विकास और उपयोग से डेटा प्रबंधन, समावेशन, पारदर्शिता, गुणवत्ता और ज़िम्मेदार उपयोग से संबंधित जटिल प्रश्न भी उठते हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीतिगत ढांचों, तकनीकी प्रक्रियाओं और परितंत्र स्तर पर समन्वय की आवश्यकता है।
नीति रिपोर्ट में भारत में खुले और ज़िम्मेदार वाक् प्रणालियों के निर्माण में डेटा संग्रहण और मॉडल विकास से लेकर बुनियादी ढांचे और शासन प्रथाओं तक आने वाली प्रमुख बाधाओं का विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट में वॉइस-टेक्नोलॉजी परितंत्र को मजबूत करने के लिए लक्षित नीतिगत सिफारिशें की गईं हैं। इनमें मूलभूत वाक् डेटासेट को डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में मानना, मॉडलों की पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व में सुधार करना, टिकाऊ सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश करना और नवाचार को सक्षम बनाते हुए दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को शामिल करना शामिल है।
1 अप्रैल से नहीं चलेगा कैश में लेनदेन, शत-प्रतिशत डिजिटल की ओर Toll Gate
आपदा प्रबंधन नीति अनुसंधान को मजबूत करने के समझौता ज्ञापन पर हुआ हस्ताक्षर
दिल्ली। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) और सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) ने आज आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण (डीएमआरआर) में शैक्षणिक कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण, नीति अनुसंधान और संचार के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इस साझेदारी का उद्देश्य संरचित शैक्षणिक पहलों, अंतःविषयक अनुसंधान और सशक्त जन सहभागिता के माध्यम से आपदा प्रतिरोधी भारत के निर्माण के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति को एकीकृत करना है।
· एनडीएमए के सहयोग से सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर में एसीएसआईआईआर के तहत आपदा प्रबंधन में पीएचडी कार्यक्रम का शुभारंभ।
· डीएमआरआर में विज्ञान संचार और क्षमता निर्माण पहलों सहित संयुक्त अनुसंधान और नीति अध्ययन।
इस अवसर अपने संबोधन में एनडीएमए के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने डीएमआरआर के लिए सामाजिक तैयारियों के साथ विज्ञान को जोड़ने के एनडीएमए के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर प्रधानमंत्री के नौ सूत्री एजेंडा के अनुरूप, हम आपदा संबंधी अनुसंधान और शैक्षणिक कार्यक्रमों पर सहयोगात्मक रूप से कार्य करने वाले शैक्षणिक संस्थानों का एक सशक्त नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, जोखिम संचार और सामुदायिक संपर्क को बढ़ाने के लिए संचार चैनलों की परिवर्तनकारी क्षमता का पूर्ण उपयोग करना चाहिए। आपदा के बाद व्यवस्थित अध्ययन और दस्तावेज़ीकरण के माध्यम से प्रत्येक आपदा से सीखने का हमारा संकल्प भी उतना ही महत्वपूर्ण है। निरंतर सीखने की इस संस्कृति को संस्थागत रूप देकर ही हम तैयारियों को मजबूत कर सकते हैं, प्रतिक्रिया तंत्र को परिष्कृत कर सकते हैं और वास्तव में एक सुदृढ़ राष्ट्र बना सकते हैं। इस संदर्भ में, यह समझौता ज्ञापन आपदाओं से जुड़ी जटिल और उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए वैज्ञानिकों और नीति विशेषज्ञों के बीच एक मजबूत सेतु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
एसीएसआईआर के निदेशक प्रोफेसर मनोज कुमार धर ने इस सहयोग के माध्यम से सृजित शैक्षणिक और अनुसंधान अवसरों पर जोर दिया।0
धर ने कहा, “एसीएसआईआर में 7,000 से अधिक छात्र नामांकित हैं जो भारत के शीर्ष अनुसंधान संस्थानों में शुमार है। हमारा अनुसंधान अंतरिक्ष विज्ञान को छोड़कर लगभग सभी वैज्ञानिक क्षेत्रों में फैला हुआ है, और हम अंतर्विषयक सहयोग को दृढ़ता से प्रोत्साहित करते हैं। यह समझौता ज्ञापन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आपदा प्रबंधन चुनौतियों के लिए नवीन और अनुसंधान-आधारित समाधान विकसित करने के नए रास्ते खोलता है। इस समझैता ज्ञापन से विकसित भारत 2047 की दिशा में देश के आपदा-प्रतिरोधी ढांचे को मजबूत करने के लिए समर्पित विशेषज्ञों की एक नई पीढ़ी को पोषित करने में मदद मिलेगी।”
डीएमआरआर में विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने जोर दिया।
शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा विस्तार के साथ संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक के उपयोग के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़े रहने को अवश्य प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार शाम भोपाल के गांधी नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल के रजत जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में उन्होंने सागर पब्लिक स्कूल के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों सहित सेवाभावी पदाधिकारियों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिये विद्यार्थी प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी बनने के साथ श्रेष्ठ शिक्षक, समर्पित जनप्रतिनिधि, कुशल व्यापारी और अच्छे किसान बनने का भाव भी बनाये रखें। विद्यार्थी ऐसे प्रकल्पों से जुड़ें, जिससे वे नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीवन में श्रेष्ठ का अनुसरण करने की प्रवृत्ति होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति मानवीय मूल्यों को महत्व देती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र आगे बढ़ रहा है। आज गूगल हो या अन्य कोई वैश्विक संस्थान, इनमें भारतीय ही कार्यपालन अधिकारी या अन्य प्रमुख भूमिकाओं में कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर समूह को स्कूल सहित 6 शिक्षण संस्थानों के बाद 7वें संस्थान के शुभारंभ की बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समूह की शिक्षा क्षेत्र में 25 वर्ष की उपलब्धियों भरी यात्रा पूर्ण होने पर भी बधाई दी।
होली से पहले ताबड़तोड़ छापेमारी, 13 क्विंटल सड़े-गले खजूर को नष्ट कराया
सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय विजय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि खोया, पनीर, दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल, घी, वनस्पति, रंगीन कचरी, पापड़, चिप्स, नमकीन, मिठाइयों, बेसन और मैदा पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. टीम ने छह नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशाला भेजा है. रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है.
इस एक्शन से साफ है कि त्योहारों की मिठास में जहर घोलने वालों पर इस बार प्रशासन की पैनी नजर है. साथ ही प्रशासन ने आमजन से भी अपील है कि संदिग्ध खाद्य सामग्री की सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.
क्लाइमेट चेंज से निपटने में लीडर बन रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्लाइमेट चेंज एक गंभीर वैश्विक चुनौती है। क्लाइमेट चेंज मानव अस्तित्व, आर्थिक स्थिरता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि सतत् विकास की राह में हम पर्यावरण की अनदेखी नहीं कर सकते। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना ही प्रगति का मूल आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि क्लाइमेट चेंज के मामले में ठोस और समयबद्ध समाधान पर काम करना आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की क्लाइमेट चेंज को लेकर प्रतिबद्धताओं में भी राज्यों का योगदान भी महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश क्लाइमेट चेंज से निपटने में सर्वाधिक नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादक बन लीडर की भूमिका में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सबसे तेज गति से विकास करने वाले राज्यों में अग्रणी है। यहां लगभग हर क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। मुख्यमंत्री ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मप्र में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने का विश्वास और सुरक्षा की गारंटी देते हुए कहा कि राज्य और निवेशक मिलकर देश को नवकरणीय ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली देने की दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के साथ हमारा रिश्ता नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम मुंबई में क्लाइमेट वीक-2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग (मप्र शासन) एवं ग्रीन एनर्जी के लिए विख्यात सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के बीच मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओयू हुआ।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का समाधान केवल एक देश, एक राज्य या एक सरकार ही नहीं कर सकती, इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और जलवायु समाधान के लिए आगे बढ़ने की दिशा में मुम्बई क्लाइमेट वीक एक महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए त्वरित और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा देना, हरित तकनीकों को अपनाना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना ही भविष्य का विकास मार्ग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकारों के साथ ही उद्योगों, संस्थाओं और इस देश में रहने वाले हर नागरिक की भी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ‘लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ जैसे व्यवहारिक बदलावों को अपनाने की अपील की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरित ऊर्जा उत्पादन के जरिए क्लाइमेट चेंज से निपटने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार के नवाचारों की जानकारी देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भारत के उन अग्रणी राज्यों में से एक है, जिसने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जिसने ईवी नीति बनाई, जो क्लाइमेट चेंज की ओर कारगर कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार मध्यप्रदेश में 300 मेगावाट 4 घंटे सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजना, 300 मेगावाट 6 घंटे सौर-सह एनर्जी परियोजना सहित 24x7 घंटे नवकरणीय ऊर्जा बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजना पर काम कर रही है। यह एक नया प्रयोग है। यह भारत की अपनी तरह की पहली परियोजना है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जो इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट: छत्तीसगढ़ का स्टॉल बना आकर्षण केंद्र
इस दौरान कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों तथा तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ में एआई और डाटा सेंटर क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं में विशेष रुचि दिखाई तथा राज्य सरकार की दूरदर्शी पहल की सराहना की। यह सहभागिता न केवल निवेश संभावनाओं को सशक्त करने वाली है, बल्कि छत्तीसगढ़ को उभरते टेक्नोलॉजी और इनोवेशन इकोसिस्टम के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
प्रधानमंत्री ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया
देलही : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक एआई इम्पैक्ट समिट भारत में आयोजित हो रहा है, जो मानवता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि भारत में विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी, सबसे बड़े तकनीकी प्रतिभा भंडार और समृद्ध प्रौद्योगिकी-सक्षम इकोसिस्टम है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल नई प्रौद्योगिकियों का निर्माण करता है, बल्कि उन्हें अभूतपूर्व गति से अपनाता भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 14 करोड़ भारतीय नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए उत्सुक हैं और उनकी ओर से उन्होंने शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले राष्ट्राध्यक्षों, वैश्विक एआई इकोसिस्टम के नेताओं और नवप्रवर्तकों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने उनकी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना न केवल देश के लिए बल्कि विकासशील देशों के लिए भी गर्व की बात है।
मोदी ने बताया कि इस शिखर सम्मेलन में एआई जगत की जानी-मानी हस्तियां एक साथ आई हैं। 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और विश्व भर के प्रतिष्ठित प्रतिभागी शामिल होने से इस आयोजन की सफलता नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है। उन्होंने शिखर सम्मेलन में युवा पीढ़ी की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे उन्हें नया आत्मविश्वास मिला। उन्होंने कहा कि जहां नई तकनीकों को अक्सर शुरुआत में संदेह का सामना करना पड़ता है, वहीं जिस गति और विश्वास के साथ विश्व भर के युवा एआई को अपना रहे हैं, उस पर अपना अधिकार जता रहे हैं और उसका उपयोग कर रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री ने एआई शिखर सम्मेलन की प्रदर्शनी के प्रति उत्साह, विशेष रूप से युवा प्रतिभाओं की बड़ी भागीदारी की भी सराहना की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कृषि, सुरक्षा, दिव्यांगजनों की सहायता और बहुभाषी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में प्रस्तुत समाधान 'मेड इन इंडिया' की ताकत को दर्शाते हैं और एआई क्षेत्र में भारत की नवोन्मेषी क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों में एक ऐसा मोड़ आता है जो सभ्यता की दिशा बदल देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षण विकास की गति को बदल देते हैं और सोचने, समझने और काम करने के तरीकों को बदलाव लाते हैं। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के ऐसे दौर में अक्सर वास्तविक प्रभाव तुरंत समझ में नहीं आता। उन्होंने याद दिलाया कि जब पत्थरों से पहली बार चिंगारी निकली थी, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि वही चिंगारी सभ्यता की नींव बनेगी। मोदी ने कहा कि जब बोली जाने वाली भाषा को पहली बार लिपि में बदला गया था, तब किसी को यह एहसास नहीं था कि लिखित ज्ञान, भविष्य की प्रणालियों की रीढ़ बनेगा। उन्होंने कहा कि जब पहली बार वायरलेस तरीके से सिग्नल भेजे गए थे, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया एक-दूसरे से जुड़ जाएगी।
ऊधमसिंह नगर: यहां फर्जी आधार-पैन और मार्कशीट बनाने वाले जन सेवा केंद्र पर STF की बड़ी कार्रवाई
रफ्तार ने लगाया जिंदगी पर ब्रेकः पेड़ से टकराकर खाईं में गिरी कार, पिता-पुत्र और मामा की मौत, मंजर देख सहम उठे लोग
जानकारी मिलते ही पुलिस घटना स्थल पर पहुंची और तीनों को अस्पताल पहुंचाया. जहां डॉक्टर ने पिता-पुत्र को मृत घोषित कर दिया. वहीं युवक के मामा की इलाज के दौरान मौत हो गई. मृतकों की पहचान मुकेश (40 वर्ष), बेटा दिव्यांश (20 वर्ष), और रामू (20 वर्ष) के रूप में हुई है. पुलिस घटना की जांच में जुट गई है.
दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम अल्पसंख्यक कल्याण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के रोडमैप पर ध्यान केंद्रित करेगा
देलही :अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय 18-19 फरवरी 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर, बिहार में दो दिवसीय महत्वपू्र्ण 'चिंतन शिविर' का आयोजन कर रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य तथा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू; केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और विभिन्न राज्य मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा हितधारकों की उपस्थिति होगी, जो अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कार्रवाई-उन्मुख रोडमैप तैयार करेंगे।
इस चिंतन शिविर में अरुणाचल प्रदेश से मंत्री एडवोकेट केंटो जिनी; नागालैंड से मंत्री (सलाहकार एवं विधायक) इमकोंगमार; सिक्किम से सामाजिक कल्याण विभाग के मंत्री समदुप लेप्चा; त्रिपुरा सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री शुक्ल चरण नोआतिया; तथा बिहार से अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री मोहम्मद ज़मा खान सहित राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों की भी भागीदारी होगी। इस कार्यक्रम में मंत्रालय तथा विभिन्न राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी भी रहेगी।
चिंतन शिविर में पाँच महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित सामूहिक चर्चा आयोजित की जाएगी, जो अल्पसंख्यक कल्याण की आधारशिला का निर्माण करते हैं, जैसे: अवसंरचना विकास (प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम - पीएमजेवीके), सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण (पीएम विकास + राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम), वक्फ प्रबंधन, हज प्रबंधन आदि।
ये संवादपूर्ण सत्र सभी हितधारकों को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेंगे, जिसमें सुव्यवस्थित चर्चाओं, साथ मिलकर सीखने और सहयोगात्मक समस्या-समाधान के माध्यम से कार्यान्वयन में अंतराल, सर्वोत्तम पद्धतियों और कार्रवाई योग्य अनुशंसाओं की पहचानी की जाएगी।
मुंबई में भारत-फ्रांस नवाचार मंच के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ
आज के दिन दुनिया के दो बड़े इनोवेशन हब्स एक साथ आ रहे हैं। जब हम भारत और फ्रांस की बात करते हैं, तो हमारा रिश्ता इनोवेशन के साथ-साथ ट्रस्ट का और शेयर्ड वैल्यूस का है। इसी सोच के साथ राष्ट्रपति मैक्रोंऔर मैंने वर्ष 2026 को इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन के रूप में सेलिब्रेट करने का निर्णय किया है। ये एक सेलिब्रेशन ही नहीं, ये हमारा साझा कमिटमेंट भी है। कमिटमेंट टू इनोवेट, कमिटमेंट टू लीड।
भारत और फ्रांस ने अनेक स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में मिलकर काम किया है, इससे हमारा जो आपसी भरोसा मजबूत हुआ है, उसने हमारे रिश्तों को स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के अहम पड़ाव तक पहुंचाया है। आने वाले समय में, हर सेक्टर में हमारी कलेक्टिव क्रिएटिविटी पूरे विश्व का बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेगी।
देलही :भारत अपनी हजारों वर्षों की यात्रा में मैथ्स, मेडिसिन, मेटलर्जी और आर्किटेक्चर जैसे अनेक क्षेत्रों में मानव कल्याण के लिए इनोवेट करता रहा है, और अब 21वीं सदी में भी भारत के युवा ‘इनोवेट फॉर ग्लोबल गुड’ की उस यात्रा पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आप देखिए, भारत के वाइब्रेंट स्टार्टअप इकोसिस्टम से लेकर के हमारी वर्ल्ड क्लास रिसर्च लैब्स तक एक नया can do optimism उभर रहा है। स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम से एक दशक में ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। 2014 में भारत में जहां सिर्फ चार यूनिकॉर्न थे, आज भारत में 120 से अधिक यूनिकॉर्न्स हैं। इनकी टोटल वैल्यू 350 बिलियन डॉलर से अधिक या लगभग 300 बिलियन यूरो है। आज दुनिया की करीब-करीब हर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी भारत के स्टार्टअप, भारत के इनोवेशन से किसी ना किसी रूप में जुड़ी हुई है।
बीते एक दशक में हमने स्कूलों से लेकर इंडस्ट्रीज तक इनोवेशन के लिए एक Conducive Ecosystem तैयार किया है। स्कूलों में अटल टिंकरिंग labs से लेकर मेंटरशिप, स्कॉलरशिप और स्टार्टअप कैपिटल तक आज एक सशक्त नेटवर्क मौजूद है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Hackathon Ecosystems में से एक है। यहां प्राइवेट सेक्टर की रिसर्च इनोवेशन स्कीम के जरिए सीधा सपोर्ट मिल रहा है। स्टार्टअप इंडिया 2.0 से डीप-टेक इनोवेशन के लिए कैपिटल मोबिलाइजेशन किया जा रहा है।
गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, कह दी यह बड़ी बात
10 राज्यों की 37 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में "नवोन्मेलषण से प्रभाव
देलही : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आज भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान "नवोन्मेषण से प्रभाव: सार्वजनिक स्वास्थ्य में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली एआई" विषय पर एक सत्र में भाग लिया। इस सत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को उन्नत बनाने और भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को सुदृढ़ करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के अग्रणी व्यक्तियों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों को संबोधित करते हुए मुख्य भाषण में रेखांकित किया कि “हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार, भारत के लिए एआई केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता नहीं बल्कि सर्व-समावेशी बुद्धिमत्ता है।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब भारत स्वास्थ्य सेवा में एआई की बात करता है, तो यह केवल परिष्कृत एल्गोरिदम या सटीकता के वादे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मापन इस बात से होता है कि प्रौद्योगिकी किस सीमा तक लोगों के जीवन को प्रभावित करती है और देश भर में स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं को दूर करती है।
उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में स्वास्थ्य विकास के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। भारत की विशाल और विविध जनसंख्या, ग्रामीण-शहरी विभाजन और संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों का दोहरा बोझ अद्वितीय चुनौतियां प्रस्तुत करते हैं। ऐसे संदर्भ में, उन्होंने बल देकर कहा कि प्रौद्योगिकी—विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता—एक अपरिहार्य सक्षमकर्ता बन जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि एआई को स्वास्थ्य सेवा के संपूर्ण क्षेत्र - रोग निगरानी और रोकथाम से लेकर निदान और उपचार तक - में एकीकृत किया गया है। उन्होंने मीडिया डिजीज़ सर्विलांस सिस्टम पर प्रकाश डाला, जो एक एआई-सक्षम टूल है और 13 भाषाओं में रोग के रुझानों की निगरानी करता है, वास्तविक समय में अलर्ट जेनरेट करता है और प्रकोप के लिए की जाने वाली तैयारी को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली भारत के रोग नियंत्रण प्रयासों को बढ़ाने और निगरानी क्षमता को मजबूत करने में एआई की शक्ति को प्रदर्शित करती है।
चेन्नई में कट्टुपल्ली स्थित एल एंड टी कंपनी में प्रथम कैडेट प्रशिक्षण पोत - कृष्णा को लॉन्च किया गया
देलही : तमिलनाडु में चेन्नई के कट्टुपल्ली स्थित एल एंड टी कंपनी में निर्माणाधीन तीन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों (सीटीएस) में से पहले जहाज यार्ड 18003 (कृष्णा) को 16 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया। नौसेना की परंपराओं के अनुरूप, अनुपमा चौहान ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की उपस्थिति में इस जहाज को लॉन्च किया। इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी और मेसर्स एल एंड टी शिपबिल्डिंग, चेन्नई के अधिकारी उपस्थित थे।
इस जहाज को स्वदेशी रूप से मेसर्स एल एंड टी ने डिजाइन और निर्मित किया है। इस जहाज को औपचारिक तौर पर वर्ष 2026 के अंत में भारतीय नौसेना को सौंपना है। इन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों का उपयोग बुनियादी प्रशिक्षण के बाद समुद्र में अधिकारी कैडेटों (महिलाओं सहित) और मित्र देशों के कैडेटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा।
स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में यह भारतीय नौसेना के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्वदेशी जहाज का यह लॉन्च भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप है।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने बारामती में लीयरजेट 45 (वीटी-एसएसके) दुर्घटना की जांच पर जानकारी दी
देलही : विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम, 2017 और आईसीएओ अनुलग्नक 13 के अंतरराष्ट्रीय मानकों और अनुशंसित प्रक्रियाओं के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को बारामती में लीयरजेट 45 विमान वीटी-एसएसके से जुड़ी दुर्घटना की विस्तृत जांच कर रहा है।
विमान में दो स्वतंत्र उड़ान रिकॉर्डर लगे हुए थे। दुर्घटना के दौरान दोनों रिकॉर्डर लंबे समय तक तीव्र गर्मी के संपर्क में रहे और आग से क्षतिग्रस्त हो गए।
एल3-कम्युनिकेशंस द्वारा निर्मित डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (डीएफडीआर) को एएआईबी फ्लाइट रिकॉर्डर प्रयोगशाला में सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लिया गया है। हनीवेल द्वारा निर्मित कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की विस्तृत तकनीकी जांच चल रही है। डेटा पुनर्प्राप्ति में विशेष सहायता के लिए निर्माता देश के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि से संपर्क किया गया है।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो एक व्यापक, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित जांच सुनिश्चित करने के लिए सभी निर्धारित तकनीकी और प्रक्रियात्मक प्रोटोकॉल का पूरी निष्ठा से पालन कर रहा है। ब्यूरो पारदर्शिता के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और जांच के उचित चरण में आगे की जानकारी साझा करेगा।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो सभी हितधारकों से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता है कि वे अटकलों से बचें और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ने दें।