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आदिवासी आश्रम स्कूल में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप, भोजन के बाद 70 छात्र बीमार, कई की हालत गंभीर, ICU में भर्ती
दालें प्रोटीन का सबसे बढ़ा स्रोत, इसकी उत्पादकता और पोषण बढ़ाने के लिए आगे आएं किसान
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतर्राष्ट्री य अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है “अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है। मध्यप्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस मिशन किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन भवन प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ और समृद्ध कृषि का राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर का यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, मूल संवेदनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा और नीति निर्धारण व अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं इकार्डा की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुसंधान केंद्र प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा और किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा।
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भारतीय तटरक्षक बल ने समन्वित समुद्री-हवाई अभियान के जरिए अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया
भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने 5-6 फरवरी 2026 को एक सुनियोजित समुद्री-हवाई समन्वित अभियान के जरिए एक अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया। इस अभियान से संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले भारी मात्रा में तेल और तेल-आधारित कार्गो के अवैध हस्तांतरण में शामिल एक जटिल नेटवर्क ध्वस्त हुआ है।
5 फरवरी 2026 को, मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों ने तीन संदिग्ध जहाजों को रोका। आईसीजी की विशेषज्ञ बोर्डिंग टीमें जहाजों की लगातार तलाशी, जहाज पर बरामद इलेक्ट्रॉनिक डेटा की पुष्टि, दस्तावेजों का सत्यापन और चालक दल के सदस्यों से विस्तृत पूछताछ के द्वारा घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाने और आपराधिक कार्यप्रणाली की पुष्टि कर पाई।
तस्करी करने वाले गिरोह ने एक ऐसी कार्यप्रणाली अपनाई जिसमें सस्ते तेल को समुद्री जहाजों द्वारा ले जाया जाता था और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मोटर टैंकरों में स्थानांतरित किया जाता था। प्रारंभिक जांच से पता चला कि गिरोह में कई देशों में काम करने वाले दलाल शामिल थे, जो समुद्र में जहाजों के बीच माल की बिक्री और हस्तांतरण कार्य का समन्वय करते थे।
आईसीजी की तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियों द्वारा पता चलने के बाद यह अभियान शुरू किया गया, जिसमें देलही :भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के भीतर संदिग्ध गतिविधि में लिप्त एक मोटर टैंकर की पहचान की गई। इसके बाद, जहाजों की आवाजाही की डिजिटल जांच और डेटा पैटर्न विश्लेषण से टैंकर की ओर आ रहे दो अतिरिक्त जहाजों की पहचान हुई, जिन पर अवैध रूप से तेल के जहाज-से-जहाज पर हस्तांतरण में शामिल होने का संदेह था, जिससे भारत सहित तटीय राज्यों को देय भारी शुल्क की चोरी हो रही थी।
5 फरवरी 2026 को भौतिक तलाशी से डिजिटल साक्ष्य की पुष्टि होने पर तीनों जहाजों को जब्त कर लिया गया। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए ये जहाज अक्सर अपनी पहचान बदलते रहते थे। शुरुआती जांच से यह भी पता चलता है कि जहाजों के मालिक विदेशी देशों में रहते हैं। जब्त किए गए जहाजों को आगे की जांच के लिए मुंबई ले जाया जाएगा और बाद में उचित कानूनी कार्रवाई के लिए भारतीय सीमा शुल्क और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया जाएगा।
उन्नत डिजिटल निगरानी के माध्यम से शुरू किया गया और भारतीय तटरक्षक बल की बढ़ती समुद्री उपस्थिति द्वारा लागू किया गया यह अभियान, समुद्री क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में और समुद्र में अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था के एक दृढ़ प्रवर्तक के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है।
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एनएमडीसी ने कौशल विकास से प्रशिक्षित किए युवा, सभी को मिला रोजगार
नईदिल्ली। भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी लिमिटेड ने रोजगार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर 100% प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले बस्तर प्रभाग के 80 युवाओं के पहले बैच का स्वागत किया। यह छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और कौशल विकास, समावेशी विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
यह कार्यक्रम एनएमडीसी के सीएसआर प्रयासों के हिस्से के रूप में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी) के सहयोग से लागू की गई कौशल विकास पहल के तहत किया गया था। इस पहल का उद्देश्य बस्तर के बेरोजगार और वंचित आदिवासी युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल से लैस करके स्थायी आजीविका में सक्षम बनाकर सशक्त करना है।
यह सम्मान समारोह और चर्चा सत्र एनएमडीसी के वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति में आयोजित किया गया जिसमें अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, विनय कुमार, निदेशक (तकनीकी) और निदेशक (वाणिज्यिक, अतिरिक्त प्रभार), जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) और निदेशक (कार्मिक, अतिरिक्त प्रभार), पी.श्याम, महाप्रबंधक (सीएसआर) और बी. रवि, प्रधान निदेशक, सीआईपीईटी, एनएमडीसी और सीआईपीईटी के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और साधारण परिवारों (दंतेवाड़ा, बस्तर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और बीजापुर सहित) से आए छात्रों ने वहां के जीवन के बारे में बात की, जहां अवसर सीमित थे और विकल्प कम थे। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल रोजगार प्रदान करता है, बल्कि अपने गृहनगर से बाहर निकलकर अपनी शर्तों पर आय अर्जित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।
बस्तर से आए कक्षा 12 उत्तीर्ण युवक सुखराम ने बताया कि किस प्रकार उनका बचपन शुरुआत में हुए नुकसान और सीमित साधनों में बीता था। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने से उनके परिवार के जीवन की दिशा बदल जाएगी। उन्होंने कहा, "मुझे कभी नहीं पता था कि मैं अपना गृहनगर कैसे छोड़ूंगा। आज, मैं नौकरी करने और कमाने जा रहा हूं।“
इस अवसर पर बोलते हुए, एनएमडीसी के अध्यक्ष अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि बस्तर के युवाओं को औपचारिक रोजगार में कदम रखते देखना इस यह दर्शाता है कि अवसर क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि 80 प्रशिक्षुओं में से अनेक इस क्षण तक पहुंचने के लिए लगन और आत्मविश्वास दोनों के साथ लंबी यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ नौकरियों के बारे में नहीं है। यह युवा लोगों के बारे में है जो महसूस करते हैं कि वे कार्यबल और देश की विकास यात्रा में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षण इस बात की पुष्टि करते हैं कि आत्मनिर्भर बस्तर और अधिक समावेशी विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को कुशल बनाना केंद्रबिंदु में क्यों है।“
विनय कुमार, निदेशक (तकनीकी) और निदेशक (वाणिज्यिक, अतिरिक्त प्रभार) ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में हुआ परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि एनएमडीसी अपनी स्थापना के बाद से ही इस परिवर्तन यात्रा का एक अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने छात्रों को उनकी पेशेवर करियर की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।
जयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) और निदेशक (कार्मिक, अतिरिक्त प्रभार) ने प्लेसमेंट को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए इसे छात्रों के जीवन में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने छात्रों को निरंतर सीखने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हुए भविष्य में उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के तहत पात्रता को समावेशी रखा गया था, जिसमें न्यूनतम योग्यता कक्षा 8 थी और यह सुनिश्चित किया गया कि स्कूल छोड़ देने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवा कौशल पारिस्थितिकी तंत्र से बाहर नहीं रहने पाएं। पहले बैच में 80 प्रायोजित छात्र शामिल थे, जिनमें से सभी को अब सफलतापूर्वक नियोजित कर दिया गया है। यह कार्यक्रम की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने पूर्वी नागालैंड में विकास को बढ़ावा देने वाले ऐतिहासिक समझौते की सराहना की
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पूर्वी नागालैंड के विकास को गति देने वाले एक ऐतिहासिक समझौते का स्वागत किया। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री अमित शाह द्वारा ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा:
“यह वास्तव में एक ऐतिहासिक समझौता है, जो विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड के विकास की राह को गति प्रदान करेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि इससे लोगों के लिए अवसरों और समृद्धि के के नए रास्ते खोलेगा। यह पूर्वोत्तर में शांति, प्रगति और समावेशी विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
कोयला खदान हादसा: 18 लोगों की जान चली गई थी...हाईकोर्ट ने खदान मालिकों की गिरफ्तारी का दिया आदेश
बेंच ने जिला प्रशासन और पुलिस को बिना किसी देरी के कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने ईस्ट जयंतिया हिल्स के डिप्टी कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक को खदान मालिकों, ऑपरेटरों और कथित अवैध खनन कार्यों में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया। इसने अधिकारियों को खनन गतिविधि से जुड़े सभी उपकरण, दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त करने का भी निर्देश दिया। तत्काल राहत उपायों की आवश्यकता पर जोर देते हुए हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि सभी प्रभावित व्यक्तियों, जिनमें घायल भी शामिल हैं, को जहां भी संभव हो, तत्काल चिकित्सा सहायता और आवश्यक सहायता प्रदान की जाए।
छोटे शहरों से भी दौड़ेगी वंदेभारत स्लीपर: 260 रेक के मेगा प्लान से बदलेगा लंबी दूरी का सफर
पैन कार्ड अनिवार्य...अब घर, दुकान या जमीन की रजिस्ट्री कराना पहले के मुकाबले अधिक सख्त
मध्यप्रदेश, अब पर्यटन और रोज़गार का नया ग्रोथ इंजन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकास भी,विरासत भी' के कालजयी मंत्र को ध्येय वाक्य मानकर मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद उज्जैन में 'श्री महाकाल लोक' के लोकार्पण के साथ किया था, वह यात्रा अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक विराट जन-अभियान का रूप ले चुकी है। प्रदेश की पावन धरा पर लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 'लोकों' का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी गौरवशाली परंपराओं का जीवंत साक्ष्य बनेंगे।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक वैभव की इस अविरल यात्रा में वर्तमान में 580 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 17 महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक पर तीव्र गति से कार्य संचालित है। सागर में 'संत रविदास लोक' 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह हमारी सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सीहोर जिले के सलकनपुर में 'देवी लोक' और ओरछा में 'श्रीरामराजा लोक' जैसे भव्य प्रकल्प अपनी पूर्णता के करीब हैं। सरकार की संकल्प शक्ति का ही परिणाम है कि मंदसौर में 'भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर' का कार्य पूर्ण कर उसे जनता को समर्पित किया जा चुका है। साथ ही भोपाल में 'वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक', जानापाव में 'भगवान परशुराम लोक' और महेश्वर में 'देवी अहिल्या संग्रहालय' जैसे प्रकल्पों ने पूर्ण होकर प्रदेश के सांस्कृतिक मानचित्र को और अधिक समृद्ध किया है।
जन-आस्था का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने 315 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भविष्य में 3 नए लोक और 2 अन्य लोक के द्वितीय चरण को भी मूर्त रूप दिया जायेगा। 'श्री महाकाल लोक' की भव्यता को प्रेरणा मानकर अब ओंकारेश्वर में 'ममलेश्वर लोक' का निर्माण, बैतूल में ताप्ती उद्गम स्थल में 'ताप्ती लोक' और मैहर में 'माँ शारदा लोक' का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। महेश्वर में 110 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला 'देवी अहिल्या लोक' और अमरकंटक में 'माँ नर्मदा लोक' के द्वितीय चरण का निर्माण सनातन संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा का परिचायक है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निर्मित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक 'लोक' केवल पत्थर और ईंटों के निर्माण मात्र नहीं हैं, अपितु ये मध्यप्रदेश के विकास के नए 'ग्रोथ इंजन' सिद्ध होंगे। प्रधानमंत्री मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' के विज़न को आत्मसात करते हुए ये स्थल पर्यटन के वैश्विक केंद्रों के रूप में उभरेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अभूतपूर्व अवसर सृजित होंगे। हस्त शिल्पियों से लेकर सेवा क्षेत्र तक, इन लोकों का विकास हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगा। आस्था का यह महायज्ञ जहाँ एक ओर हमारी जड़ों को सींच रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
किसानों को सशक्त बनाने किया जा रहा है तकनीक का प्रभावी उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल :मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से राज्य में ग्रामीण डेटा प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की गई है। उन्नत तकनीक, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय से यह पहल किसानों के हित में मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रही है। इससे किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी सुरक्षित की जा रही है, जिससे फसल संबंधी डेटा पूरी तरह प्रमाणिक हो रहा है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थल पर ही किया जाए। सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन एआई/एमएल सिस्टम और पटवारी स्तर पर किया जा रहा है। अन्य विभागों द्वारा भी इस डेटा का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। डीसीएस डेटा के आधार पर उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट उपलब्ध न होने की स्थिति में भी सर्वे की विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे के दौरान ली गई फोटो की प्रामाणिकता और सही लोकेशन की पुष्टि प्रणाली द्वारा की जाती है। सर्वे केवल निर्धारित समयावधि में ही संभव है और समय सीमा के बाहर या मोबाइल समय में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वे स्वतः रुक जाता है। एआई या एमएल एल्गोरिदम के माध्यम से डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया गया है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा-ड्रिवन निर्णय लिए जा रहे हैं।
बोत्सवाना से 28 फरवरी को मध्यप्रदेश आएंगे 8 चीते : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास, रिजर्व फॉरेस्ट के विस्तार और वन्य जीव संरक्षण की असीम संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व कदम उठा रही है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बसाहट के बाद अब असम का जंगली भैंसा भी मध्यप्रदेश के जंगलों में स्वछंद विचरण करता दिखाई देगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने असम से जंगली भैंसा मध्यप्रदेश लाने की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव से विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीते मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। चीतों के पुनर्स्थापन के लिए केंद्रीय मंत्री श्री यादव से आवश्यक सहयोग और व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत रूप से बात की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव संरक्षण और जैव-विविधता संवर्धन के लिए केंद्र सरकार के सहयोग के लिये आभार माना केंद्रीय मंत्री यादव ने प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों के हित में मध्यप्रदेश सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है। इस वर्ष में हमारी सरकार किसानों को उनकी उपज का समुचित मूल्य दिलाने के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश में गेहूं का उपार्जन एवं भंडारण की प्रक्रिया प्रारंभ होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी से मध्यप्रदेश में मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष और गेहूं उपार्जन एवं भंडारण व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में गेहूं का उपार्जन सरलता से पर्याप्त भंडारण व्यवस्था के साथ होता है। केंद्रीय मंत्री जोशी ने मध्यप्रदेश को गेहूं उपार्जन में हरसंभव आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया है।