देश-विदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को अरेरा कॉलोनी श्रेत्र में स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में स्व. मुखर्जी की 125वीं जयंती मनाई गई। ज्ञात हो कि स्व. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था।
माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रहित में किए गए योगदानों को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक स्व मुखर्जी सच्चे राष्ट्रभक्त थे। वे प्रबल राष्ट्रवाद के प्रखर प्रणेता और सदैव राष्ट्रहित चिंतन में जीने वाले मुखर विचारक थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनीतिज्ञ नहीं, बल्कि एक दूरदृष्टि वाले राष्ट्रनायक थे। उनका जीवन राष्ट्र प्रेम, आत्मबलिदान और सेवा भावना की प्रेरणा देता है। उन्होंने भारतीय जनमानस की आवाज को बड़ी मुखरता से तत्कालीन सरकार के सामने रखा। स्व. डॉ. मुखर्जी ने ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का नारा देकर राष्ट्रीय एकता की आधारशिला को शिद्दत से मजबूत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. डॉ. मुखर्जी देश की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के पक्षधर थे। उन्होंने देश को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए नई दिशा, नये विचार दिये। उनके विचारों और मूल्यों को आत्मसात करने की जरूरत है। भारत राष्ट्र को और अधिक शक्तिशाली, समरस एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए आज श्री मुखर्जी के विचार और भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्र सदैव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ऋणी रहेगा। कार्यक्रम को सांसद भोपाल आलोक शर्मा ने भी संबोधित कर अपनी बात रखी।
इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, महापौर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, पूर्व सांसद आलोक संजर, समाजसेवी रविन्द्र यति, राहुल कोठारी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं नागरिकगण उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे उद्योग जगत से सीधा संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बेंगलुरु और सूरत के सफल रोड शोज़ के बाद अब मध्यप्रदेश के निवेश संवादों की तीसरी कड़ी के रूप में 7 जुलाई को लुधियाना में रोड शो का आयोजन किया जा रहा है। देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शुमार लुधियाना में यह आयोजन टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और आईटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश साझेदारी के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।लुधियाना में यह रोड शो मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, नीतिगत स्थिरता और निवेश-अनुकूल वातावरण को देश के अग्रणी उद्योग समूहों के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रभावी मंच बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पूरे दिन विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे और उद्योगजगत की हस्तियों से प्रत्यक्ष संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लुधियाना स्थित वर्धमान टेक्सटाइल और दीपक फास्टनर जैसे प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा करेंगे। ये यात्रा उत्पादन प्रक्रियाओं, तकनीकी दक्षता और प्रबंधन प्रणाली की समझ को गहरा करने के साथ-साथ इन समूहों के साथ संभावित निवेश के बिंदुओं पर चर्चा का अवसर भी प्रदान करेगी।मुख्यमंत्री उद्योगों की कार्य संस्कृति और नवाचार क्षमताओं को जानने के साथ मध्यप्रदेश में व्यवहारिक सहयोग के रास्ते भी तलाशेंगे।
वनवासियों के कल्याण के लिए करें सभी प्रबंध - मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्नेह का बंधन एकतरफा नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार हर पल वनवासियों के साथ खड़ी है, यह बात पूरी शिद्दत से उन तक पहुंचनी चाहिए। सभी वनवासियों को सरकार की योजनाओं से जोड़ें और उनके जीवन में विकास का प्रकाश लाने की दिशा में काम करें। वनवासियों के कल्याण के लिए हरसंभव प्रबंध किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय वर्ग के अध्ययनरत एवं रोजगार कर रहे बच्चों का सामाजिक सम्मेलन बुलाएं। इस सम्मेलन के जरिए सरकार इन बच्चों को उन तक पहुंचने वाले लाभ का फीड-बैक भी लेगी और जिन्हें जरूरत है, उन तक सरकार की योजनाएं तथा सुविधाएं भी पहुंचाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम और पेसा एक्ट के क्रियान्वयन के लिए गठित की गई राज्य-स्तरीय टास्क फोर्स की शीर्ष समिति तथा इसी विषय के लिए गठित कार्यकारी समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय कार्य एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को वनाधिकार के व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों का तेजी से निराकरण कर 31 दिसंबर 2025 तक पेंडेसी जीरो करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पेसा एक्ट यानि पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 लागू है। इसमें पेसा मोबालाईजर्स के जरिए जनजातियों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देकर योजनाओं से लाभान्वित भी कराया जाता है। इन सभी पेसा मोबालाईजर्स की अपने काम पर उपस्थिति और उच्च कोटि का कार्य प्रदर्शन फील्ड में दिखाई भी देना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेसा मोबालाईजर्स को नियुक्त करने और संतोषजनक प्रदर्शन न करने पर इन्हें हटाने के अधिकार सरकार अब ग्राम सभाओं को देने जा रही है।इस निर्णय से एकरूपता आएगी और ग्राम सभाएं पेसा मोबालाईजर्स से अपने मुताबिक काम भी ले सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वनवासियों की बेहतरी के लिए संकल्पित है। उनके सभी हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि वन विभाग का मैदानी अमला यह सुनिश्चित करे कि वन भूमि पर अब कोई भी नये अतिक्रमण कदापि न होने पाएं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम के सुचारू क्रियान्वयन के लिए महाराष्ट्र सरकार के 'जलयुक्त शिविर' अभियान की तरह समन्वय पर आधारित मॉडल मध्यप्रदेश में भी अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों द्वारा इस अधिनियम के अमल के लिए की जा रही कार्यवाही के सभी पहलुओं का अध्ययन कर लें और जो सबसे उपयुक्त है उसी मॉडल पर आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों के विकास के लिए विधायकों द्वारा विजन डॉक्यूमेंट बनाया गया है। वनाधिकार अधिनियम और पेसा कानून के अमल के लिए समुचित प्रावधान भी इसी विजन डॉक्यूमेंट में शामिल कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार क्रमबद्ध रूप से विशेष रूप से पिछड़े जनजातीय समूहों और अन्य जनजातीय बहुल गांव, मजरों-टोलों तक सड़कों का निर्माण कर रही है। ग्राम पंचायत विकास कार्ययोजना में पेसा कोष की राशि खर्च करने का अधिकार भी संबंधित पेसा ग्राम सभा को दिया जा रहा है।
बैठक में समिति के सदस्य एवं पूर्व विधायक भगत सिंह नेताम ने बताया कि वनाधिकार अधिनियम के प्रभावी अमल के लिए बालाघाट जिले में पुलिस विभाग द्वारा सभी पुलिस चौकियों में एकल सुविधा केन्द्र स्थापित कर इसके जरिए कैम्प लगाकर जनजातियों को लाभान्वित किया जा रहा है। अब तक 450 वनाधिकार दावे भरवाए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस नवाचार की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी 88 जनजातीय विकासखंडों वाले जिलों के कलेक्टर को बालाघाट मॉडल भेजकर इसी अनुरूप कार्यवाही करने के लिए कहा जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र के सभी गांवों के विकास के लिए प्रस्ताव दिए जाएं। उन्होंने कहा कि यह कार्य एक्शन प्लान बनाकर किया जाए। उन्होंने कहा कि 31 दिसम्बर 2025 तक सभी गांवों के दावे प्राप्त कर लें और इसी दौरान इनका निराकरण भी कर लें। वन अधिकारियों की ट्रेनिंग का काम 15 अगस्त तक पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई तकनीकी परेशानी आ रही है तो इसके लिए वन और जनजातीय कार्य विभाग मिलकर एक नया पोर्टल भी विकसित कर लें।
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कुदरत के कहर से जरा बचके! देवभूमि में होगी आफत की बारिश, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
देहरादून. मौसम विभाग ने आगामी 9 जुलाई तक का अलर्ट जारी किया है. रविवार को पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना है. विभाग की मानें तो गढ़वाल मंडल के 3 और कुमाऊं मंडल के एक जिले में भारी से बहुत भारी बारिश होने के आसार हैं.
विभाग के मुताबिक गढ़वाल मंडल के 3 जिले देहरादून, रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल के लिए अलर्ट जारी किया गया है. कुमाऊं के बागेश्वर जिले में बादल बरस सकते हैं. इन जिलों में गर्जना के साथ गरज चमक की भी संभावना है. वहीं प्रदेश के बाकी 9 जिलों में भी बारिश होने की संभावना है.
मौसम विभाग के अनुसार 7, 8 और 9 जुलाई के लिए भी मौसम का अलर्ट जारी किया गया है. 7 जुलाई को भी 6 जुलाई जैसा ही मौसम का पैटर्न रहेगा. 8 जुलाई को मानसून और भी ज्यादा सक्रिय हो सकता है. 9 जुलाई को कुमाऊं मंडल के 4 जिलों में भारी से भारी बारिश होने का अनुमान है. इन जिलों में नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर शामिल हैं.
बता दें कि बीते कुछ दिनों से उत्तराखंड में मानसून सक्रिया है. राज्य के पहाड़ी जिलों में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है. उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में बहुत ज्यादा बारिश हो रही है. यहां कई सड़कें बंद पड़ी हैं. उत्तरकाशी में सेब की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है.
हमारी संस्कृति में समरसता व ज्ञान की गौरवशाली परंपराः मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी संस्कृति में समरसता और ज्ञान की हजारों साल पुरानी गौरवशाली परंपरा है। हमारे पूज्य संत रविदास, कबीर तथा भगवान गौतम बुद्ध से लेकर अन्य पुराने ऋषि-मुनियों एवं महापुरुषों ने समरसता की ज्योति जलाई। इसी से हमारे देश में अच्छाई-सच्चाई तथा मानवता के मूल सिद्धांतों की स्थापना हुई।
बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भी सामाजिक समरसता और समता का सिद्धांत दिया। साथ ही संविधान में सबको समान अधिकार प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्वालियर में आयोजित “समरसता सम्मेलन” को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा खुशी की बात है कि ग्वालियर की पवित्र धरा से सामाजिक समरसता का आज नया सवेरा आया है, जिसके माध्यम से पूरे प्रदेश में सामाजिक समरसताऔरसौहार्द्र का वातावरण और मजबूत होगा।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालयग्वालियरके दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुए “समरसता सम्मेलन” में मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर सहित अन्य अतिथियों ने संतजन एवं विभिन्न क्षेत्रों में ग्वालियर व प्रदेश का नाम रोशन कर रहीं आधा दर्जन विभूतियों को समरसता सम्मान से विभूषित किया। साथ ही सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे समाज के आखिरी छोर पर खड़े हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए। सम्मेलन में मौजूद सभी प्रतिभागियों को सामाजिक समरसता की शपथ दिलाई। इसके बाद सामूहिक भोज में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री सहित सभी अतिथियों ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर सामाजिक समरसता सम्मेलन का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समरसता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि लम्बे समय तक संगठित व आजाद रहने के लिये हमें भेदभाव को दूर रखना जरूरी है। इसीलिए हमारी संस्कृति अमीरी – गरीबी एवं ज्ञान में कोई भेदभाव नहीं करती। उन्होंने महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि मित्रता का यह उदाहरण पूरे विश्व में अद्वितीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा हम सब देशवासियों के लिये स्वाभिमान की बात है कि भगवान गौतम बुद्ध द्वारा चलाया गया बौद्ध धर्म आज विश्व का बड़ा धर्म है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इकबाल रचित गीत की पंक्तियां “कुछ बात है हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा” का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता व सदभाव की बदौलत ही हजारों वर्षों से तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारा देश मजबूती के साथ खड़ा है।
‘बहुदा यात्रा’ में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर भक्त हुए भावुक
पुरी। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की बहुदा यात्रा शनिवार को निकाली जाएगी। यह यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की गुंडिचा मंदिर से श्री मंदिर वापसी में निकाली जाती है। इस यात्रा को लेकर भक्तों में उत्साह दिखाई दे रहा है। भक्तों ने बहुदा यात्रा के अपने अनुभव को साझा किया।
यह सब भगवान जगन्नाथ की दिव्य लीला है, सब कुछ उन्हीं की वजह से होता है
बहुदा यात्रा भक्तों के लिए बेहद खास है। अपनी खुशी और उत्साह को साझा करते हुए एक भक्त ने कहा, “यह सब भगवान जगन्नाथ की दिव्य लीला है, सब कुछ उन्हीं की वजह से होता है। आज हम जो कुछ भी हैं, उनकी इच्छा से हैं। अगर वे नहीं चाहते तो हम यहां तक नहीं आ पाते। यह सब उनकी माया है, उनकी लीला है।”
मैं खुद को भगवान के करीब पाकर बहुत खुश और भाग्यशाली मानती हूं
इस विशेष आयोजन में शामिल होने वाले खुद को भाग्यशाली मानते हैं। एक श्रद्धालु बोली, “मैं खुद को भगवान के करीब पाकर बहुत खुश और भाग्यशाली मानती हूं। आज का दिन हम सभी के लिए वास्तव में एक खुशी का दिन है। हालांकि, यह भगवान के विदा होने का दिन भी है, लेकिन फिर भी यह अच्छा लगता है कि वे अपने सभी भक्तों के सामने आते हैं और अपनी उपस्थिति से उन्हें आशीर्वाद देते हैं।”
हजारों लोग गुंडिचा मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन के लिए जुटे हैं
बहुदा यात्रा पर एक भक्त ने कहा, “हम भी यहां दर्शन के लिए आए हैं। साल में एक बार भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर आते हैं और सभी भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।” भक्त कीर्ति गौरंग दास ने बहुदा यात्रा के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा, “हमारे गुरु महाराज ने हमें यहां आने का मार्गदर्शन किया। हम शुक्रवार रात यहां पहुंचे हैं और यहां का माहौल आध्यात्मिक है। हजारों लोग गुंडिचा मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन के लिए जुटे हैं।”
महाप्रभु का एक दर्शन जीवन को हमेशा के लिए बदल देता है
एक भावुक भक्त ने कहा, “जगन्नाथ के दैवीय रूप को एक बार देखने से पूरा जीवन बदल जाता है। इसलिए भगवान हर साल यह यात्रा करते हैं, ताकि हर आत्मा को मुक्ति का अवसर मिले। महाप्रभु का एक दर्शन जीवन को हमेशा के लिए बदल सकता है।”
अमरनाथ यात्रियों की तीन बसें आपस में टकराईं, 36 तीर्थयात्री घायल
जम्मू-कश्मीर| जम्मू-कश्मीर के रामबन में अमरनाथ तीर्थयात्रा काफिले की तीन बसें आपस में टकरा गईं। इस हादसे में अमरनाथ जा रहे 36 तीर्थयात्री मामूली रूप से घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को रामबन जिले में तीन बसों की टक्कर में 36 अमरनाथ तीर्थयात्री मामूली रूप से घायल हो गए।
ये बसें जम्मू के भगवती नगर से दक्षिण कश्मीर के पहलगाम बेस कैंप की ओर जा रहे काफिले का हिस्सा थीं। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंद्रकूट के पास हुई। उन्होंने बताया कि दुर्घटना एक बस के ब्रेक फेल होने के कारण हुई, जिसके बाद बस ने दो अन्य वाहनों को टक्कर मार दी।
बसों की टक्कर के बाद घायल यात्रियों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज हुआ। इलाज के बाद उन बसों को बदल दिया गया, जिनमें नुकसान हुआ था। नई बसों के साथ काफिला आगे रवाना हो गया। इस हादसे में किसी को गंभीर चोटें नहीं आईं।
दीपावली के बाद बहनों को हर महीने देंगे 1500 रुपए : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंगरौली प्रदेश का सीमावर्ती, खनिज सम्पन्न और सर्वप्रिय जिला है। सिंगरौली को शीघ्र ही मेडिकल कॉलेज की सौगात मिलने वाली है। अगले साल से यहां पढ़-लिखकर डॉक्टर निकलेंगे। आज प्रदेशभर के 94 हजार 234 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप की राशि ट्रांसफर की गई है। इसमें 60 प्रतिशत छात्राएं और 40 प्रतिशत छात्र शामिल हैं। राज्य सरकार जनजातीय अंचल में सभी वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। बीते 2 साल में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को 15 हजार से अधिक स्कूटी बांटी गई हैं। हमारी सरकार सबके चतुर्दिक विकास के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को सिंगरौली जिले के सरई गांव में महिला सशक्तिकरण तथा जनजातीय गौरव सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। कुछ दिनों बाद 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है, इस दिन प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेज, हॉस्टल सहित बच्चों की सुविधा से जुड़े निर्माण कार्यों का एक साथ लोकार्पण होगा। शासकीय स्कूलों के बच्चों को साइकिल, ड्रेस और किताबों का वितरण भी किया जाएगा। भागवत गीता से मध्यप्रदेश का संबंध है। वृंदावन ग्राम बनाकर भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता को जीवंत करना है। बच्चे पढ़ाई करके कहीं भी जाएं, पर अपने गरीब मित्र को न भूलें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विपक्षी दल की सरकार के समय प्रदेश में बेटे-बेटियों के लिंगानुपात में बड़ा अंतर था। हमारी सरकार में लाड़ली बेटी जन्म से ही लखपति हो, इसकी शुरुआत मध्यप्रदेश से हुई। बेटियाँ जब 18 वर्ष की उम्र पूरी करेंगी, तो सरकार की ओर से उन्हें एक-एक लाख रुपए से अधिक राशि दी जाएगी। राज्य सरकार लाड़ली बहनों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को और अधिक सशक्त करने के लिए कार्य कर रही है। पहले प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय मात्र 11 हजार थी, लेकिन अब हमारी सरकार के प्रयासों से यह 1 लाख 52 हजार रुपए हो गई है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन से पहले सभी पात्र बहनों को 250 रुपए की अतिरिक्त राशि शगुन के रूप में भेजी जाएगी। दीपावली के बाद हम प्रदेश की सभी लाडली बहनों को हर माह 1500 रुपए महीना देंगे। उन्होंने कहा कि बहन-बेटियों के हाथ में पैसा रहे तो घर ठीक से चलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों के सम्मान और गरीबों के कल्याण के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। हमने रानी दुर्गावाती और राजा भभूत सिंह की स्मृति में कैबिनेट की बैठक भी आयोजित की है। श्रीअन्न खरीदने पर किसानों को एक हजार रूपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि दी जा रही है। किसानों से 26 सौ रूपये प्रति क्विंटल में गेंहू की खरीद की गई जो देश में सर्वाधिक है।
Manhole Ambulance : पटना में देश की पहली ‘मैनहोल एम्बुलेंस’ सेवा शुरू, 48 घंटे में सुलझेगी मैनहोल की समस्या
पटना। नगर निगम एक अनोखी और सराहनीय पहल के तहत ‘मैनहोल एम्बुलेंस’ (Manhole Ambulance) सेवा शुरू करने जा रहा है। इस अभिनव प्रयोग के तहत अब शहर के किसी भी वार्ड में टूटी-फूटी या खुली मैनहोल (Patna Launches India First Manhole Ambulance) की समस्या को सिर्फ एक कॉल पर 48 घंटे के भीतर सुलझाया जाएगा। इस तरह का प्रयास करने वाला पटना देश का पहला शहर बन गया है।
नगर निगम की यह नई योजना खासतौर पर मॉनसून के मद्देनजर तैयार की गई है। बारिश के दौरान खुले या जर्जर मैनहोल जानलेवा साबित हो सकते हैं, ऐसे में ‘मैनहोल एम्बुलेंस’ तुरंत पहुंचकर मरम्मत कार्य पूरा करेगी। एम्बुलेंस में एक प्रशिक्षित टीम, प्री-फैब मैनहोल कवर, उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री मौजूद रहेगी।
इस एम्बुलेंस सेवा को ‘वेस्ट टू वंडर’ कांसेप्ट पर तैयार किया गया है। पटना नगर निगम ने अपनी बेकार और वर्षों से कबाड़ हो चुकी गाड़ियों को मॉडिफाई कर 6 मैनहोल एम्बुलेंस तैयार की हैं। ये गाड़ियां शहर के छह अंचलों में तैनात की जाएंगी। निगम पहले भी इसी तर्ज पर पिंक टॉयलेट और लू कैफे जैसे प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक लागू कर चुका है।
ये आम, ‘आम’ नहीं खास है… ‘योगी आम’ देख चौंक गए ‘बाबा’, मुस्कुराते हुए जो कहा…
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में आयोजित आम महोत्सव में एक खास किस्म की आम चर्चा में रही। इस अनोखी किस्म के आम का नाम योगी आम है। योगी आम ढाई से तीन किलो का है। महोत्सव का उद्घाटन करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब योगी आम देख तो मुस्कुरा दिए और एक आम उठाकर बोले कि इतने बड़े आम देखकर आश्चर्य होता है न… यह न केवल स्वाद में बेजोड़ हैं, बल्कि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की शान बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि हमारे बागवानों ने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों के बावजूद तकनीक का उपयोग कर शानदार प्रदर्शन किया है। डबल इंजन सरकार की डबल इंजन नीति ने औद्यानिक फसलों के निर्यात को कई गुना बढ़ाया है। इस महोत्सव के दौरान दो देशों के लिए आमों का एयर कार्गो रवाना किया गया, जिसमें सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी ने बागवानों को बेहतर दाम दिलाने में मदद की। मुख्यमंत्री ने महोत्सव में सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया और लखनऊ की दशहरी, वाराणसी का लंगड़ा, गोरखपुर का गवर्जीत, बस्ती का आम्रपाली, मेरठ और बागपत का रटोल जैसी किस्मों की जानकारी ली।
सीएम योगी ने बताया कि एक समय उत्तर प्रदेश की जीडीपी में कृषि और औद्यानिक फसलों का योगदान 25-30% था। आज सरकार की नीतियों ने इस क्षेत्र को और सशक्त किया है। अर्जुन सहायक, बांध सागर और सरयू नहर जैसी परियोजनाओं ने बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जल की समस्या का समाधान किया है। परिणामस्वरूप, जहां पहले एक या दो फसलें होती थीं, वहां अब किसान तीन फसलें ले रहे हैं। उन्होंने हरदोई, कानपुर और औरैया के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि मक्का की खेती से किसान प्रति एकड़ 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।
पटना में 'पिंक मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी ' और मोबाइल पिंक टॉयलेट्स का निर्माण
नईदिल्ली। भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-Urban) के तहत, शहरी भारत को स्वच्छ, सुंदर और सतत विकासशील बनाने की दिशा में कई नवाचार हो रहे हैं। इसी क्रम में, बिहार की राजधानी पटना में पटना नगर निगम (PMC) द्वारा एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल की गई है जो है 'पिंक मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF)' और मोबाइल पिंक टॉयलेट्स का निर्माण। इन पहलों का उद्देश्य केवल कचरा प्रबंधन ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना भी है। पटना ने पुरानी परंपराओं को तोड़ते हुए स्वच्छता और समावेशिता की नई मिसाल कायम की है।
पटना शहर में स्थापित 'पिंक MRF' (Material Recovery Facility) अपने आप में एक अनूठा मॉडल है, जिसे Mitigation Action Facility के सहयोग से Circular Waste Solutions Project के अंतर्गत तैयार किया गया है। इस फैसिलिटी का संचालन पूरी तरह से महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जिसमें एक महिला सुपरवाइज़र के नेतृत्व में कुल 5 कर्मचारी कार्यरत हैं (4 महिलाएं, 1 पुरुष)। इस MRF की प्रसंस्करण क्षमता 2 टन प्रतिदिन है।
पटना नगर निगम ने हाल ही में मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) में आम जनता के लिए 'कैश फॉर वेस्ट' योजना शुरू की "Waste to Wealth" की थीम पर काम करते हुए, इस योजना के अंतर्गत आम लोगों को उनके सूखे कचरे के लिए निर्धारित मूल्य सूची के अनुसार भुगतान किया जा रहा है। यह अत्याधुनिक फैसिलिटी प्रतिदिन 2 टन सूखे कचरे और 1.5 टन गीले कचरे को संसाधित करने की क्षमता रखती है।
इस परियोजना में भागीदार पटना नगर निगम (PMC) को प्रोजेक्ट टीम द्वारा वेस्ट मैनेजमेंट क्षेत्र में महिलाओं को काम करने का अवसर देने के लिए और पिंक MRF स्थापित करने हेतु संपर्क किया गया, PMC ने इस विचार को पूर्ण समर्थन दिया और मात्र 3 महीनों में यह सुविधा स्थापित हो गई। इस पहल को स्थानीय स्तर पर काफी मान्यता मिल रही है। इस सुविधा के रंग और डिज़ाइन ने स्थानीय लोगों और नागरिकों का ध्यान आकर्षित किया, जिससे बड़े पैमाने पर जागरूकता फैली। इसके अलावा, यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों (जो इस परियोजना को प्रायोजित कर रहे थे) ने पिंक MRF का दौरा कर इस पहल की सराहना की तथा इसे देश भर में दोहराने और विस्तार देने के लिए प्रोत्साहन भी दिया।
पटना नगर निगम ने एक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पुराने और अनुपयोगी हो चुके वाहनों को '3R मॉडल' (Reduce, Reuse, Recycle) के तहत नया जीवन दिया है। एक पुरानी स्क्रैप बस को नवीनीकरण कर 'मोबाइल पिंक टॉयलेट' में बदल दिया, जो न केवल स्वच्छता सुविधा प्रदान करता है, बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में उदाहरण बन चुका है।
पिंक MRF और मोबाइल पिंक टॉयलेट्स, सिर्फ कचरा प्रबंधन के समाधान नहीं हैं, बल्कि यह पहल सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय जागरूकता और आर्थिक अवसर की मिसाल बन चुकी है। यह कदम स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की भावना को और मजबूत करता है, जहां स्वच्छता केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग को जोड़ने वाला एक आंदोलन बन चुका है। पटना की यह "पिंक क्रांति", राज्यों के लिए प्रेरणा है।
सेल ने वैश्विक उपस्थिति को मजबूत बनाने के लिए दुबई में प्रतिनिधि कार्यालय का किया उद्घाटन
नईदिल्ली। भारत के सबसे बड़े इस्पात उत्पादकों में से एक स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने दुबई में अपने प्रतिनिधि कार्यालय का उद्घाटन किया है। मध्य पूर्व में सेल का पहला अंतरराष्ट्रीय कार्यालय इसकी वैश्विक विस्तार रणनीति में एक महत्वपूर्ण पहल है।
केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस कार्यालय का उद्घाटन दुबई में भारत के महावाणिज्यदूत श्री सतीश कुमार सिवन, सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री अमरेंदु प्रकाश, एनएमडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी, इस्पात मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री वी.के. त्रिपाठी तथा सेल, इस्पात मंत्रालय, एनएमडीसी और मेकॉन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।
रणनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित दुबई कार्यालय सेल के इस्पात निर्यात को बढ़ावा देने, उद्योग संबंधों को और परिपुष्ट बनाने और भारत-यूएई व्यापार संबंधों को मजबूत करने में सहायता प्रदान करेगा। मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (एमईएनए) क्षेत्र के प्रवेश द्वार के रूप में दुबई की भूमिका और निवेशक-अनुकूल वातावरण इसे उभरते बाजारों में विस्तार के लिए एक आदर्श आधार बनाता है।
यह पहल भारत के इस्पात उद्योग की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाने और 2030 तक 300 मिलियन टन के राष्ट्रीय इस्पात उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह सेल के एक वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी इस्पात निर्माता के रूप में विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और अंतरराष्ट्रीय इस्पात क्षेत्र में भारत की निरंतर होती प्रगति की स्थिति को दर्शाता है।
युवा पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास से परिचित कराना जरूरी - मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में माता-बहनों को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। राज्य सरकार नारी सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हरसंभव प्रयास जारी हैं। आज नरसिंहपुर जिले में एसपी और कलेक्टर दोनों पद महिला अधिकारियों के पास हैं। शहडोल संभाग की संभागायुक्त भी महिला ही हैं। प्रदेश की मुख्य सचिव भी महिला अधिकारी रह चुकी हैं। महिला सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार विशेष रूप से संवेदनशील है, मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जिसने दुष्कर्म के मामलों में सबसे पहले फांसी का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य स्तरीय महिला मॉक पार्लियामेंट को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीपुल्स यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, महापौर मालती राय, सांसद वीडी शर्मा, राज्यसभा सांसद माया नारोलिया, विधायक हेमंत खंडेलवाल, हितानंद शर्मा सहित जनप्रतिनिधि तथा प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों की छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीसाबंदी तपन भौमिक का तुलसी पौधा एवं अंगवस्त्रम भेंटकर सम्मान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिभागियों से आपातकाल संबंधित विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला मॉक पार्लियामेंट एक वैचारिक मंच है। संविधान की भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों की हर स्थिति में रक्षा करना सभी नागरिकों का दायित्व है। देश और हम सभी के व्यक्तित्व विकास में इन दोनों बिन्दुओं का महत्वपूर्ण स्थान है। मॉक पार्लियामेंट जैसी पहल से युवाओं में देश की राजनीतिक व्यवस्था की समझ विकसित होती है। युवा पीढ़ी को 50 साल पहले के आपातकाल के इतिहास से परिचित कराना जरूरी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए दिए गए योगदान का स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों, धारा 370, तीन तलाक, आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ हुई सैन्य कार्यवाहियों, संविधान संशोधनों और राजनैतिक मंशा के औचित्य आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
गौरीकुंड के आगे बोल्डर और मलबा गिरने से रास्ता बाधित, पैदल मार्ग हुआ बंद, राहत कार्य जारी
उत्तराखंड| केदारनाथ यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना है. गौरीकुंड से करीब एक किलोमीटर आगे छोड़ी गधेरे नाम की जगह पर अचानक भारी मात्रा में बोल्डर, मलबा और पत्थर गिरने से पैदल मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है. यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फिलहाल सोनप्रयाग से ही यात्रियों का आवागमन रोक दिया गया है. पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ की टीमें और निर्माण कार्य से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारी और मजदूर मौके पर मौजूद हैं.
बाधित पैदल मार्ग को फिर से सुचारु करने के लिए मैनुअल तरीकों से मलबा और पत्थर हटाने का कार्य जारी है, जिसमें समय लग सकता है. प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे अफवाहों से दूर रहें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें. हालांकि, मनकटिया क्षेत्र और गौरीकुंड की छोटी पार्किंग से आगे का मार्ग पैदल चलने योग्य है. लेकिन जब तक मुख्य मार्ग पूरी तरह से साफ नहीं हो जाता, तब तक यात्रा पर संयम और धैर्य बनाए रखना जरूरी है.
बता दें कि गुरुवार को केदारनाथ धाम के रास्ते में भी सोनप्रयाग के पास देर रात अचानक मलबा गिर गया था. जिसके कारण केदारनाथ धाम से लौट रहे 40 से ज्यादा तीर्थयात्री बुधवार रात करीब 10 बजे से फंसे हुए थे. हालांकि SDRF ने उन्हें वहां से निकाल लिया है. सोनप्रयाग क्षेत्रान्तर्गत मुनकटिया स्लाइडिंग जोन में मलबा-पत्थर आने से मार्ग बाधित हो गया.
कैबिनेट मंत्री धालीवाल ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, कहा – ‘मैं पंजाब के लिए लड़ने के लिए अमेरिका से आया हूं’
पंजाब| पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के सीनियर लीडर और पंजाब के कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि, वे पार्टी में बने रहेंगे.
आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने तीन साल के कार्यकाल में सातवीं बार कैबिनेट में फेरबदल किया है. इस दौरान लुधियाना पश्चिम से नवनिर्वाचित विधायक संजीव अरोड़ा को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है. अरोड़ा ने पंजाब के राज्यपाल की मौजूदगी में राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में मंत्री पद की शपथ ली.
कुलदीप धालीवाल ने कहा, “2013 में मैं अपने बच्चों को छोड़कर पंजाब के लिए लड़ने के लिए अमेरिका से आया था. उस दिन से लेकर आज तक मैंने कभी छुट्टी नहीं ली और लगातार पार्टी के लिए काम कर रहा हूं. उन्होंने कहा कि, वे वैसे नेता नहीं हैं जो सिर्फ विभागों के पीछे भागते हैं.
कुलदीप सिंह धालीवाल ने इस निर्णय के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि उनके लिए पंजाब की जनता और राज्य का हित सर्वोपरि है, न कि कोई पद या विभाग उनके लिए कोई मायने रखता है. इस इस्तीफे के साथ ही उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी वफादारी को भी दोहराया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी के आम आदमी पार्टी के साथ बने रहेंगे और पंजाब के लिए काम करना जारी रखेंगे.
पद्म पुरस्कार-2026 के लिए 31 जुलाई, 2025 तक किए जा सकेंगे नामांकन
नईदिल्ली। गणतंत्र दिवस, 2026 के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्कार-2026 के लिए ऑनलाइन नामांकन/सिफारिशें 15 मार्च 2025 से शुरू हो गई हैं। पद्म पुरस्कारों के नामांकन की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2025 है। पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन/सिफारिशें राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल https://awards.gov.in पर ऑनलाइन प्राप्त की जाएंगी।
पद्म पुरस्कार, अर्थात पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं। वर्ष 1954 में स्थापित, इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। इन पुरस्कारों के अंतर्गत ‘उत्कृष्ट कार्य’ के लिए सम्मानित किया जाता है। पद्म पुरस्कार कला, साहित्य एवं शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा, विज्ञान एवं इंजीनियरी, लोक कार्य, सिविल सेवा, व्यापार एवं उद्योग आदि जैसे सभी क्षेत्रों/विषयों में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना सभी व्यक्ति इन पुरस्कारों के लिए पात्र हैं। चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को छोड़कर अन्य सरकारी सेवक, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले सरकारी सेवक भी शामिल है, पद्म पुरस्कारों के पात्र नहीं हैं।
सरकार पद्म पुरस्कारों को “पीपल्स पद्म” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अत:, सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे नामांकन/सिफारिशें करें। नागरिक स्वयं को भी नामित कर सकते हैं। महिलाओं, समाज के कमजोर वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, दिव्यांग व्यक्तियों और समाज के लिए निस्वार्थ सेवा कर रहे लोगों में से ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान करने के ठोस प्रयास किए जा सकते हैं जिनकी उत्कृष्टता और उपलब्धियां वास्तव में पहचाने जाने योग्य हैं।
नामांकन/सिफारिशों में पोर्टल पर उपलब्ध प्रारूप में निर्दिष्ट सभी प्रासंगिक विवरण शामिल होने चाहिए, जिसमें वर्णनात्मक रूप में एक उद्धरण (citation) (अधिकतम 800 शब्द) शामिल होना चाहिए, जिसमें अनुशंसित व्यक्ति की संबंधित क्षेत्र/अनुशासन में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया हो।
इस संबंध में विस्तृत विवरण गृह मंत्रालय की वेबसाइट (https://mha.gov.in) पर ‘पुरस्कार और पदक’ शीर्षक के अंतर्गत और पद्म पुरस्कार पोर्टल (https://padmaawards.gov.in) पर उपलब्ध हैं। इन पुरस्कारों से संबंधित संविधि (statutes) और नियम वेबसाइट पर https://padmaawards.gov.in/AboutAwards.aspx लिंक पर उपलब्ध हैं।