देश-विदेश
दिवंगत निरीक्षक स्व. शर्मा के परिजन को 1 करोड़ रुपये आर्थिक सहायता की स्वीकृति
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस-नक्सल मुठभेड़ मे 19 नवम्बर 2025 को वीरगति को प्राप्त हुए निरीक्षक (विशेष सशस्त्र बल) आशीष शर्मा, हॉक फोर्स बालाघाट के परिजन को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की स्वीकृति प्रदान की गयी है। साथ ही उनके छोटे भाई अंकित शर्मा को जिला पुलिस बल में उप निरीक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है।
दिवंगत निरीक्षक आशीष शर्मा अत्यंत होनहार, प्रतिभाशाली और साहसी थे। उन्हें 2 बार राष्ट्रपति द्वारा वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। इसके पहले वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री के द्वारा आंतरिक सेवा पदक और 2023 में दुर्गम सेवा पदक प्रदान किया गया था। साथ ही राज्य शासन द्वारा वर्ष 2023 मे आउट ऑफ प्रमोशन दिया गया। मंत्रि-परिषद की बैठक वंदे मातरम गान के साथ शुरू हुई।
मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष पद का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा कराए जाने संबंधी विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत किये जाने की स्वीकृति दी गयी है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वर्ष 1999 से 2014 तक नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा कराए जाते रहें है। वर्ष 2022 में नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से वार्डों के निर्वाचित पार्षदों के द्वारा कराए गए। महापौर का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड के विकास पर विशेष फोकस
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास और रोजगार संपन्न बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, सड़कों के निर्माण सहित नौरादेही अभ्यारण्य में चीता के रहवास के लिए विकास कार्यों को स्वीकृति जैसे अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्रि-परिषद के सदस्यों ने बुंदेलखंड के विकास पर केंद्रित विकास के महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने पर करतल ध्वनि से स्वागत किया गया। बैठक में छतरपुर और दमोह के मेडिकल कालेजों में पदों की स्वीकृति सहित शासकीय चिकित्सालयों के उन्नयन और नवीन पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई।
मंत्रि-परिषद ने बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से सागर के औद्योगिक क्षेत्र 'मसवासी ग्रंट' के लिए एक विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी। स्वीकृति अनुसार भूमि प्रब्याजी और वार्षिक भू-भाटक की दर केवल एक रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित की है। इसके अतिरिक्त, विकास शुल्क चुकाने के लिए 20 समान वार्षिक किश्तों की सुविधा दी गई है और संधारण शुल्क 8 रुपये प्रति वर्गमीटर वार्षिक तय किया गया है।
निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए स्टाम्प और पंजीयन शुल्क में 100% प्रतिपूर्ति की स्वीकृति दी गई है। साथ ही, इकाइयों को वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तारीख से पांच वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट दी गई है।
वित्तीय सहायता पैकेज के तहत वृहद श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों पर उद्योग संवर्धन नीति 2025 और निवेश प्रोत्साहन योजना 2025 के नियम लागू होंगे, जबकि एमएसएमई (MSME) इकाइयों के लिए एमएसएमई विकास नीति-2025 और एमएसएमई प्रोत्साहन योजना-2025 के प्रावधान प्रभावी होंगे। सीमेंट निर्माण इकाइयों को इस विशेष वित्तीय सहायता पैकेज का लाभ नहीं मिलेगा। यह विशेष पैकेज आगामी पांच वर्षों के लिए प्रभावशील रहेगा।
चार जिलों में बनेंगे विशेष जनजातीय सांस्कृतिक केंद्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में अनुसूचित जाति कल्याण और जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा कर रहे थे। अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छात्रों के हित के लिए छात्रावासों में नवीन तकनीक का उपयोग कर उन्हें आधुनिक बनाया जाए। निर्माणाधीन छात्रावास भवनों का कार्य शीघ्रता से पूर्ण करें। उच्च शिक्षा एवं स्वरोजगार योजनाओं के तहत युवाओं को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को त्वरित और सरल बनाने के निर्देश भी दिए गए।
जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की समृद्ध जनजातीय विरासत को सहेजने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए संबंधित क्षेत्रों में 'जनजातीय सांस्कृतिक केंद्र' स्थापित किए जाएं। इसके अंतर्गत मंडला में बैगा जनजाति, छिंदवाड़ा में भारिया जनजाति, श्योपुर में सहरिया जनजाति और धार में भील जनजाति के लिए सांस्कृतिक केंद्र बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में 'पीएम जनमन योजना' और 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इन योजनाओं से न केवल मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, बल्कि 'आदि कर्मयोगी अभियान' में समाज में प्रतिबद्ध नेतृत्व भी तैयार किए जाएं, जिससे जनजातीय समाज का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय पूजा स्थलों (देव स्थानों) का उन्नयन करने और स्थानीय जनजातीय नायकों के बलिदान का स्मरण करने के लिए स्थानीय स्तर पर भव्य आयोजन करने के भी निर्देश दिए।
जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान,मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव अनुसूचित जाति कल्याण ई रमेश कुमार, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा उपस्थित थे।
वाराणसी एयरपोर्ट पर इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन का असर, यात्रियों में हाहाकार
वाराणसी एयरपोर्ट पर इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन ने यात्रियों को असहाय बना दिया। लंबे इंतजार, महंगे टिकट और अनिश्चित यात्रा ने हवाई सफर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों की नाराजगी और हंगामा इस बात का संकेत है कि एयरलाइंस को पारदर्शिता और त्वरित समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
वाराणसी में ट्रैफिक सुधार की नई पहल: चौराहों पर लगेंगे टाइमर
वाराणसी में ट्रैफिक पुलिस की यह पहल न केवल जाम से राहत दिलाने की कोशिश है, बल्कि प्रदूषण और ईंधन की बर्बादी रोकने का भी व्यावहारिक समाधान है। टाइमर व्यवस्था से शहर की सड़कों पर अनुशासन बढ़ेगा और यातायात का प्रवाह अधिक सुगम होगा।
'डम डम डमरू बजावेला हमार जोगिया' गीत पर झूमे दर्शक, नमो घाट पर आयोजित हुआ सांस्कृतिक संध्या
नईदिल्ली। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, तंजावूर एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित काशी तमिल संगमम् 4.0 संस्करण का छठवां दिन नमोघाट स्थित मुक्ताकाशी प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ। इसमें तमिलनाडु एवं काशी के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम प्रस्तुति आरंभ हुई ममता शर्मा एवं दल, वाराणसी द्वारा लोक गायन से। गायन में सर्वप्रथम गंगा भजन से जिसके बोल थे चलोमन गंगा जमुना तीर, इसी क्रम में शिव भजन की प्रस्तुति सम्पन्न हुई जिसके बोल थे जेकर नाथ विश्वनाथ उ अनाथ कैसे.., इसके उपरांत डम डम डमरू बजावेला हमार जोगिया... की प्रस्तुति की गई। तबला पर संगीत कुमार तथा आर्गन पर दिलीप कुमार ने संगत किया।
द्वितीय प्रस्तुति रही डॉ शिवानी शुक्ला एवं दल, वाराणसी द्वारा भजन गायन की। गायन का आरंभ एकताल में निबध्य रचना से किया जिसके बोल थे आदि देव महादेव..., इसकी क्रम में भजन गायन की प्रस्तुति सम्पन्न हुई जिसके बोल थे अवगुन चित न धरो...., गायन का समापन भजन कर मनवा राम रघुराई ... के किया गया। इस प्रस्तुति में तबला पर अंकित कुमार सिंह, वायलिन पर सुखदेव मिश्रा तथा साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव ने साथ दिया।
तृतीय प्रस्तुति रही गीतांजलि एवं दल, तमिल नायडू द्वारा लोक नृत्य की। जिसमें करकट्टम, मईलाट्टम, पोईक्कल कुटीरई अट्टम की प्रस्तुति की गई। चतुर्थ प्रस्तुति रही सुश्री शुभांगी सिंह एवं दल, वाराणसी द्वारा भरतनाट्यम नृत्य नाटिका की। नृत्य नाटिका में रामायण पर आधारित प्रस्तुति की गई जिसमें जटायु मोक्ष प्रसंग को प्रस्तुत किया गया। नृत्य में कलाकार थे शुभांगी सिंह, वागीशा सिंह, जयरसा यशोमिया, आरती कंदु।
बच्चों में सीखने की ललक बढ़ाने के लिये शिक्षक प्राप्त करते रहें नई-नई जानकारी: केन्द्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान
भोपाल। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि बच्चों के व्यक्तित्व का बहुआयामी विकास हो, इसके लिये जरूरी है कि उन्हें मातृभाषा में पढ़ने के लिये प्रेरित किया जाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई गई बातें समझने में मातृभाषा ज्यादा कारगर होती है। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में अध्ययन को प्राथमिकता दी गई है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रधान रविवार को भोपाल के शासकीय कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय टी.टी. नगर के निरीक्षण के बाद शिक्षकों से चर्चा कर रहे थे। इस मौके पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और विधायक श्री भगवानदास सबनानी भी उनके साथ थे।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने सांदीपनि विद्यालय की कक्षाओं में जाकर बच्चों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों की पाठ्यपुस्तकों को देखा और बच्चों से पढ़ाई के संबंध में बात की। उन्होंने आर्ट गैलरी, पुस्तकालय, बच्चों की मार्शल आर्ट 'वुशु' के अभ्यास को देखा और विद्यालय के म्यूजिक रूम का भ्रमण किया। उन्होंने बच्चों द्वारा देशभक्ति गीत पर प्रस्तुत धुनों को सुना और उसकी प्रशंसा की। मंत्री प्रधान विद्यालय की अटल टिकरिंग लैब में भी गए। वहां उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए साइंस मॉडल के बारे में जानकारी प्राप्त की। साइंस मॉडल और रोबोटिक्स लैब के उपकरणों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। मंत्री श्री प्रधान ने विद्यालय के ऑडिटोरियम को भी देखा और उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न खेलकूद, संगीत और साहित्यिक गतिविधियों के प्रति भी प्रेरित करें। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रधान ने कहा कि बच्चों को पोषण आहार मिले, इसके लिये जन-भागीदारी के प्रयास किये जायें।
मंत्री प्रधान ने पालकों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि पालक निरंतर स्कूल पहुँचकर बच्चों के बारे में जानकारी प्राप्त करते रहें। पालकों और शिक्षकों के समन्वय से ही बच्चों का सम्पूर्ण विकास हो सकेगा। उन्होंने शिक्षकों को प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के शैक्षणिक अध्ययन पर गहन निगरानी रखने की समझाइश दी। मंत्री श्री प्रधान ने विद्यालय की विजिटर्स बुक पर लिखा कि अगले सत्र में इस विद्यालय की छात्राएं जेईई एवं नीट परीक्षा में चयनित हों इसके लिये शिक्षक सामूहिक रूप से प्रयास करें।
आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता ने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता के लिये प्रदेश में हमारे शिक्षक ऐप के माध्यम से ऑनलाइन ई-अटेंडेंस प्रारंभ की गई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप 799 स्कूलों को मॉडल स्कूलों में बदला जा रहा है। उन्होंने पीएमश्री स्कूल और सांदीपनि विद्यलाय के बारे में भी जानकारी दी। आयुक्त गुप्ता ने बताया कि सांदीपनि विद्यालय के बच्चों को विद्यालय तक लाने के लिए नि:शुल्क परिवहन सेवा उपलब्ध कराई गई है। स्कूलों में बच्चों को डिजिटल शिक्षा दिये जाने की व्यवस्था की गई है। प्राचार्य कमला नेहरू संगीता सक्सेना ने बताया किविद्यालय की स्थापना 1958 में हुई थी। वर्तमान में इस विद्यालय में कक्षा अरूण (के.जी.-1) से लेकर कक्षा 12 तक करीब 1500 छात्राओं को उच्च स्तर की शिक्षा दी जा रही है। निरीक्षण के दौरान श्री राहुल कोठारी, पार्षद श्रीमती आरती अनेजा भी साथ थी।
पन्ना नेशनल पार्क में 10 नई कैंटर बस शुरू... एक साथ 19 पर्यटक ले सकेंगे सफारी का मजा
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार सुबह पन्ना नेशनल पार्क के मंडला गेट से 10 नई वीविंग कैंटर बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अब इन बसों के जरिए पर्यटक जंगल सफारी का रोमांचक अनुभव और अधिक सुविधाजनक तरीके से ले सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पर्यटन की सुविधाओं में लगातार विस्तार किया जा रहा हैं।
मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम ने पर्यटकों को एक और सौगात देते हुए प्रदेश के विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अहम कदम उठाया है। जंगल सफारी के लिए 10 नई आरामदायक वीविंग कैंटर बसें उपलब्ध करायी हैं। इन कैंटर बसों में एक साथ 19 पर्यटकों के बैठने की क्षमता है। यह बसें अन्य सफारी वाहनों की तुलना में अधिक लंबी और ऊंची हैं, जिससे पर्यटकों को बेहतर दृश्य और अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये बसें अधिक सुरक्षित मानी जा रही हैं। इन बसों की लंबाई और ऊंचाई भी अधिक है, जिससे सफर के दौरान पर्यटकों को ज्यादा जगह और आराम मिलता है। वहीं बच्चों और सीनियर सिटिज़न्स के लिए यह बसें सुरक्षित और अनूठा अनुभव प्रदान करेंगी। इन बसों में बैठकर पर्यटक न केवल वन्यजीवों के विचरण का नज़ारा देख सकेंगे, बल्कि जंगल सफारी का एक सुखद और यादगार अनुभव भी कर सकेंगे।
10 नई वीविंग कैंटर बसों के संचालन से उन पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी। ऑनलाइन बुकिंग न होने पर भी जंगल सफारी के आनंद और अनुभव से वंचित नहीं होंगे। ऑनलाइन स्लॉट जल्दी भर जाने से पर्यटकों को नेशनल पार्क पहुंचकर भी सफारी से वंचित होने जैसी असुविधा अब नहीं होगी।
नई कैंटर बसों के संचालन के बाद अब पर्यटकों को नेशनल पार्क के गेट पर ही सफारी बुक करने की सुविधा मिलेगी। ऑनलाइन बुकिंग पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इन वाहनों से जंगल सफारी का आनंद लेने के लिए प्रति व्यक्ति/प्रति राउंड लगभग 1150 से 1450 रुपए तक शुल्क देना होगा। ये 10 नई कैंटर बसें प्रदेश के प्रमुख नेशनल पार्कों और पर्यटन स्थलों जैसे बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, पन्ना, परसिली (सीधी) सहित अन्य नेशनल पार्क्स और अन्य पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की सुविधा के लिए संचालित की जाएंगी।
मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ विकास की दिशा में हो रहा निरंतर कार्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विरासत के संरक्षण के साथ विकास की बात की है। हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत प्रवास में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उन्हें रूसी भाषा में प्रकाशित गीता की प्रति भेंट की। यह एक उदाहरण है जो विरासत से विकास की अवधारणा को स्पष्ट करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दैनिक स्वदेश ज्योति के "विकसित मध्यप्रदेश@2047 विरासत भी विकास भी" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 के बाद दो दशक में मध्यप्रदेश में विकास के क्षेत्र में काफी कार्य हुआ है। जहां सिंचाई क्षमता मात्र 7 लाख 50 हजार हेक्टेयर थी, जो अब 55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। अब यह सिंचाई क्षमता 100 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। गत 2 वर्ष में ही 9 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है। साथ ही बीते डेढ़ दो वर्ष में अनेक नए मेडिकल कॉलेज खुल गए हैं। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की संख्या जो कभी सिर्फ 5 होती थी, अब बढ़ते- बढ़ते 39 तक हो चुकी है। प्रदेश में पीपीपी मॉडल को अपनाकर नए चिकित्सा महाविद्यालय खुल रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में भी प्रधानमंत्री मोदी की विरासत से विकास की कल्पना को साकार किया जा रहा है। जहां अयोध्या में भगवान श्रीराम मुस्करा रहे हैं वही चित्रकूट धाम में विकास की पहल हुई है। ओरछा में रामराजा सरकार आध्यात्मिक क्षेत्र का विकास हो रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में इंदौर और भोपाल दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित होंगे जहां अधोसंरचना विकास के कार्य हो रहे हैं। मेट्रो ट्रेन का शुभ आगमन हुआ है। मध्यप्रदेश में विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के कार्य प्रारंभ करने की पहल हुई और 6 लाख लोगों को रोजगार का लाभ देने की शुरुआत हुई है।
एनएमडीसी का आईआईटी कानपुर से करार... मजबूत होगी साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी
डेस्क। भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी ने उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत एनएमडीसी के प्रचालनों में साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में नई पहल की सुविधा प्रदान करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) सहित आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस समझौता ज्ञापन पर एनएमडीसी की ओर से श्री सत्येंद्र राय, अधिशासी निदेशक (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) और प्रोफेसर अशोक डे, डीन, आर एंड डी, आईआईटी कानपुर ने प्रो. मनिंद्र अग्रवाल, निदेशक, आईआईटी कानपुर, एनएमडीसी के वरिष्ठ अधिकारियों और आईआईटी कानपुर के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
इस साझेदारी के माध्यम से एनएमडीसी साइबर सुरक्षा जोखिम आकलन; नीति, शासन और अनुपालन समर्थन; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) एकीकरण और उन्नयन; सुरक्षा संचालन और घटना प्रतिक्रिया; क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करना; और संयुक्त अनुसंधान और नवाचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आईआईटी कानपुर के साथ काम करेगा। इसके अतिरिक्त, एनएमडीसी और आईआईटी कानपुर संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे, अनुसंधान गतिविधियां करेंगे, पायलट परियोजनाएं चलाएंगे और प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट समाधान का सामूहिक रूप से विकास करेंगे।
श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने इस साझेदारी पर कहा, "यह समझौता ज्ञापन एनएमडीसी के व्यापक परिचालन पारिस्थितिकी तंत्र में आईआईटी कानपुर की उन्नत अनुसंधान क्षमताओं को समाहित करेगा। यह सहयोग हमें अपनी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने, परिचालन इंटेलिजेंस में सुधार करने और एनएमडीसी के लिए एक सुरक्षित और भविष्य के अनुरूप तकनीकी आधार बनाने में मदद करेगा।” यह समझौता ज्ञापन डिजिटल रूप से मजबूत और भविष्य के लिए तैयार खनन संगठन बनने की एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पीएम मोदी की परीक्षा पर चर्चा जनवरी 2026 में... 11 जनवरी तक करें पंजीकरण
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अनूठा चर्चा कार्यक्रम, परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी), अपने 9वें संस्करण के साथ वापस आ गया है। यह जनवरी 2026 में आयोजित किया जाएगा, जहां भारत और विदेश के छात्र, अभिभावक और शिक्षक परीक्षा के तनाव पर चर्चा करने और परीक्षाओं को एक उत्सव और जीवन का एक अभिन्न अंग मानने के लिए उनके साथ जुड़ेंगे।
प्रतिभागियों के चयन के लिए, माइ गॅव पोर्टल (https://innovateindia1.mygov.in/) पर 1 दिसंबर 2025 से 11 जनवरी 2026 तक एक ऑनलाइन एमसीक्यू-आधारित प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। कक्षा 6 से 12 तक के छात्र, शिक्षक और अभिभावक इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। इस गतिविधि को पूरा करने वाले सभी पंजीकृत प्रतिभागियों को माइ गॅव की ओर से भागीदारी प्रमाण पत्र प्राप्त होगा।
परीक्षा पे चर्चा का आठवाँ संस्करण 10 फ़रवरी 2025 को प्रसारित किया गया था। यह चर्चा नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में एक नए और अभिनव प्रारूप में आयोजित की गई जिसमें प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के 36 छात्र शामिल हुए जिनमें सरकारी स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, सैनिक स्कूल, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, सीबीएसई से संबध स्कूल और नवोदय विद्यालय शामिल थे। इसमें प्रेरणा के पूर्व छात्र और कला उत्सव तथा वीर गाथा के विजेता भी शामिल हुए। इस संस्करण में खेल एवं अनुशासन और मानसिक स्वास्थ्य से लेकर पोषण, प्रौद्योगिकी एवं वित्त तथा रचनात्मकता एवं सकारात्मकता तक, सात अलग-अलग एपिसोड भी शामिल थे जिनमें प्रसिद्ध हस्तियों के प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए।
2025 में, परीक्षा पे चर्चा ने 245 से ज़्यादा देशों के छात्रों, 153 देशों के शिक्षकों और 149 देशों के अभिभावकों की भागीदारी के साथ एक उल्लेखनीय गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की संख्या में असाधारण वृद्धि देखी गई है जो 2018 के पहले संस्करण में केवल 22,000 प्रतिभागियों से बढ़कर 2025 के आठवें संस्करण में 3.56 करोड़ पंजीकरणों तक पहुँच गई है - जो स्पष्ट रूप से इसकी प्रासंगिकता और लोकप्रियता को दर्शाता है। इसके साथ ही, परीक्षा पे चर्चा 2025 से संबंधित राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन गतिविधियों में 1.55 करोड़ लोगों ने भाग लिया जिससे इसमें कुल भागीदारी लगभग 5 करोड़ हो गई।
एक बीघा से एक लाख की कमाई करने वाले किसानों को किया जाए सम्मानित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लखपति दीदी के समान लखपति बीघा का लक्ष्य रखते हुए एक बीघा से एक लाख रूपए की कमाई करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया जाए। किसानों को बिचौलियों से बचाने और उन्हें बाजार में अपनी उपज का सीधे लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था हो। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और अद्यतन तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर उपज लेने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां संचालित की जाएं। हर संभाग की नर्सरियों को आदर्श रूप में विकसित किया जाए।
नरवाई प्रबंधन के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना विकसित की जाए। साथ ही किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों तथा नवाचारों का प्रस्तुतिकरण किया गया और आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि -
प्रदेश दालो, तिलहन और मक्का उत्पादन में देश में प्रथम तथा खाद्यान्न, अनाज एवं गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है। उर्वरक वितरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 38.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 21.41 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. वितरित किया गया। वर्ष 2025-26 में 29.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 30 नवम्बर तक 19.42 मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का वितरण हुआ।
प्रधानमंत्री फसल बीमा में वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 77 लाख बीमित कृषकों को 961.68 करोड़ रूपए और वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 79 लाख बीमित कृषकों को 1275.86 करोड़ रूपए के दावे का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 4,687 करोड़ रूपए, वर्ष 2024-25 में 4,849 करोड़ रूपए और वर्ष 2025-26 में 3,374 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई।
प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू हो चुकी है। इस उपलब्धि के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड भी प्राप्त हुआ। मंडी बोर्ड द्वारा एमपी फार्म गेट ऐप से किसान अपने दाम पर, अपने घर, अपने खलिहान और गोदामा से अपनी कृषि उपज बेचने में सक्षम हुआ। इस नवाचार को स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ।
पराली प्रबंधन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 1312, वर्ष 2024-25 में 1757 और वर्ष 2025-26 में 2479 नरवाई कृषि यंत्र वितरित किए गए। कृषि यंत्रीकरण के अंतर्गत भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल आरंभ हुए। ई-विकास पोर्टल से उर्वरक वितरण का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में क्रियान्वित किया गया। इसे सम्पूर्ण प्रदेश में लागू करने की योजना है।
गन्ने का परामर्शित मूल्य बढ़ाने के संबंध में आदेश जारी, जानिए किन प्रजातियों का कितना होगा रेट
मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग रणवीर सिंह चौहान ने गन्ना का राज्य परामर्शित मूल्य बढाने के संबंध में शासनादेश जारी करते हुए कहा है कि चीनी मिलों के बाह्य क्रय केन्द्रों से गन्ने का परिवहन मिल तक कराये जाने के मद में होने वाली कटौती रुपये 11 प्रति क्विंटल निर्धारित की जाएगी। पेराई सत्र 2025-26 के लिए उपरोक्तानुसार निर्धारित गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य राज्य की समस्त चीनी मिलों द्वारा देय होगा. पेराई सत्र 2025-26 के लिए निर्धारित उक्त दरों के अनुसार ही प्रदेश की चीनी मिलों द्वारा किसानों को भुगतान कराया जाएगा और भुगतान की सूचना मासिक रूप से शासन को उपलब्ध करायी जाएगी.
सहकारी संस्थाएं किसानों को सशक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाना और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाना सहकारी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य है। आगामी वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि एवं किसान वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। अतः किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने और फसल चक्र के अनुसार उन्हें सुगमता से सुविधाऐं उपलब्ध कराने के लिए सहकारिता विभाग कृषि विपणन सहकारी समितियां को मजबूत बनाने बनाने पर विशेष ध्यान दे। सहकारी समितियों का प्राथमिकता के आधार पर कंप्यूटराईजेशन किया जाए, ताकि किसानों को सुगमता और पारदर्शिता के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिति के पदाधिकारियों के लिए प्रतिवर्ष संपत्ति का वार्षिक विवरण आवश्यक रूप से देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायत स्तर पर पैक्स स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में सहकारिता विभाग की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने अपेक्स बैंक की 4 करोड़ 27 लाख 4 हजार 190 रुपए अंश पूंजी का लाभांश चेक भेंट किया। बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता इस अवसर पर उपस्थित थे।
बैठक में अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण, खाद और बीज वितरण, कृषि उपज के समर्थन मूल्य पर उपार्जन, उचित मूल्य दुकानों के संचालन और सहकार से समृद्धि के अंतर्गत संचालित गतिविधियों के तहत पिछले 2 वर्ष में प्राप्त उपलब्धियों, नवाचारों का प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना पर भी विचार विमर्श हुआ।
विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियाँ
· 15 कमजोर जिला सहकारी बैंकों के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रत्येक जिला बैंक को 50-50 लाख रूपए की अंशपूंजी शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई।
· मध्यप्रदेश एम-पैक्स के कम्प्यूटराईजेशन और ऑनलाईन ऑडिट में देश में सबसे आगे है।
· कृषकों को उनके खातों के संबंध में जानकारी एस.एम.एस. से उपलब्ध कराई जा रही है।
· पैक्स के सोसायटी मैनेजर के लिए कैडर व्यवस्था लागू।
· राष्ट्रीयकृत बैंकों के मापदंड के अनुरूप सहकारी बैंकों में प्रबंधकों और बैंकिंग सहायकों की भर्ती तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था।
· पैक्स से बहुउद्देशीय गतिविधियों का संचालन आरंभ।
· कुल 4460 कॉमन सर्विस सेंटर, 4518 प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र, 63 जन औषधि केन्द्र, 59 जल कर वसूली केन्द्र, दो एग्री ड्रोन और 25 इफ्को आउटलेट की व्यवस्था।
· अब तक पैक्स को 4060 तथा डेयरी समिति को एक माइक्रो एटीएम वितरित।
· सहकारी कानूनों में जनसामान्य की सुविधा की दृष्टि से संशोधन किए गए हैं।
· सहकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी से सहकारी समितियों को व्यवसाय के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
· किसानों से पूसा बासमती धान क्रय करने के लिए किसानों का आर्थिक लाभ सुविधा सुनिश्चित करते हुए मैजिस्टिक प्रायवेट लिमिटेड से अनुबंध किया गया है।
· पराली की समस्या के निराकरण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
· बीज संघ द्वारा बीज व्यवसाय को प्रोत्साहन देने के लिए एमपी चीता ब्रांड लांच किया गया है।
· नवीन एम पैक्स, डेयरी सहकारी समिति और मत्स्य सहकारी समिति के तहत कुल 1,601 समितियों का गठन।
· मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अभिनव पहल CPPP के तहत 19 एम.ओ.यू का निष्पादन।
· कंपनियों से 10,000 से अधिक विस्थापित लोगों की 350 सहकारी समितियां गठित कराकर विस्थापितों को सुरक्षा गार्ड, माली, श्रमिक जैसे कार्यों के लिये रोजगार दिया गया।
BHU में देर रात बवाल: छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड आमने-सामने, पत्थरबाजी से थर्राया कैंपस, पुलिस फोर्स तैनात
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसे से उपजी नाराज़गी नहीं थी, बल्कि छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के बीच लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास और तनाव का विस्फोट भी थी। BHU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में बार-बार इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक सख्ती और छात्र असंतोष के बीच गहरी खाई को उजागर करती हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की गतिविधियां आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार लाने में देती हैं योगदान : डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्राम स्तर पर रोजगार सृजन, स्वच्छता और ग्रामों को सड़कों के माध्यम से विकास की मुख्य धारा में जोड़ने में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह गतिविधियां आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुसार वर्ष 2047 तक विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने में इस विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों और योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन तथा अनुवीक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी अद्यतन तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विधानसभा स्थित समिति कक्ष में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की उपलब्धियों और प्राथमिकताओं पर बैठक को संबोधित कर रहे थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राज्य मंत्री राधा सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में महात्मा गांधी नरेगा, पंचायतराज, प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण, स्वच्छ भारत मिशन, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण, म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा की 2 वर्ष की उपलब्धियों और नवाचारों का प्रेजेंटेशन किया गया तथा आगामी कार्ययोजना के संबंध में निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ ही कृषि, सहकारिता, मत्स्य पालन तथा ग्राम विकास से संबंधित अन्य विभागों को सम्मिलित करते हुए समग्र ग्राम विकास की अवधारणा के अनुसार योजनाओं का समन्वित रूप से क्रियान्वयन किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना को गति देने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अर्ध शहरी एवं बड़ी ग्राम पंचायतों को सशक्त करते हुए उनके विकास के लिए कार्य योजना बनाई जाए तथा नगरीय निकायों के मध्य विद्यमान पंचायतें परस्पर समन्वय से सड़कें तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचनाएं विकसित करें।
सरकार ने चाय विकास और संवर्धन योजना के माध्यम से असम के चाय सेक्टर को मजबूत किया
देलही : भारत सरकार चाय बोर्ड के माध्यम से असम राज्य सहित पूरे देश में चाय विकास एवं संवर्धन योजना (टीडीपीएस) कार्यान्वित कर रही है। इस स्कीम का उद्देश्य अन्य बातों के साथ-साथ चाय के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना, बाजारों में प्रवेश करने वाली चाय की गुणवत्ता में सुधार करना, निर्यात में वृद्धि करना, छोटे चाय उत्पादकों को स्व-सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एसएचजी/एफपीओ) के गठन के लिए संगठित करना है। इससे वे मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ सकेंगे, एसएचजी/एफपीओ द्वारा लघु चाय फैक्ट्रियों की स्थापना के लिए सहायता प्रदान की जा सकेंगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकेंगा और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे। इस योजना के तहत, चाय बोर्ड के कुल बजट में से 152.76 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और चाय बोर्ड द्वारा 2021-22 से 2025-26 (31.10.2025 तक) की अवधि के दौरान असम राज्य के लिए विशिष्ट गतिविधियों के लिए 150.20 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया गया था।
इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित होने वाले छोटे उत्पादकों की जिला-वार और वर्ष-वार संख्या का ब्यौरा अनुलग्नक-I के रूप में संलग्न है।
चाय विकास और संवर्धन योजना के तहत, असम राज्य में 2021-22 से 2025-26 (31.10.2025 तक) की अवधि के दौरान की गई गतिविधियों में अन्य बातों के साथ-साथ 437.42 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय का पुन: रोपण; 318 एसएचजी, 143 एफपीओ और 26 एफपीसी का गठन; 31 मिनी चाय कारखानों की स्थापना; चाय बागानों के 30.32 हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक में बदलना; 30 फार्म फील्ड स्कूलों की स्थापना और 1343 क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन शामिल है। भारतीय चाय का निर्यात, जिसमें असम चाय भी शामिल है, 7.15 प्रतिशत की सीएजीआर के साथ 2021-22 में 751.07 मिलियन अमरीकी डालर से बढ़कर 2024-25 में 923.89 मिलियन अमरीकी डालर हो गया है।
नीति आयोग के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) द्वारा 'चाय विकास और संवर्धन योजना (टीडीपीएस)' का मूल्यांकन अध्ययन किया गया था। मई 2023 में प्रस्तुत प्रमुख सिफारिशों के साथ इसकी रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट में अन्य बातों के साथ-साथ बोर्ड की बागान स्कीमों के संतोषजनक कार्यान्वयन के साथ-साथ छोटे चाय उत्पादकों के एसएचजी/एफपीओ के गठन और चाय कारखानों की स्थापना में उनकी सहायता करने में इसकी उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। इसमें उत्पादकता बढ़ाने के मामले में योजना के संतोषजनक प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों में अन्य बातों के साथ-साथ पुनर्रोपण, ब्रांड संवर्धन प्रयासों को बढ़ाना, छोटे चाय उत्पादकों के एसएचजी/एफपीओ का गठन, बेहतर कृषि प्रणालियों के बारे में किसानों को ज्ञान का प्रसार और छोटे चाय उत्पादकों का क्षमता निर्माण शामिल है। 2023-24 से 2025-26 की अवधि के लिए टीडीपीएस योजना को अंतिम रूप देते समय इन सिफारिशों पर विचार किया गया।
वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।