देश-विदेश
तेंदुए के शावक ने गौशाला में मचाया हड़कंप, वन विभाग ने किया रेस्क्यू, गांव में हाई अलर्ट
यह घटना एक बार फिर इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की ओर इशारा करती है। वन विभाग अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और शावक के संरक्षण पर काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने टोक्यो के ‘लिटिल इंडिया’ पहुँचकर महात्मा गांधी को किया नमन
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज अपने जापान प्रवास के दौरान टोक्यो स्थित ‘लिटिल इंडिया’ पहुंचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि महात्मा गांधी जी का शांति, अहिंसा और सद्भाव का अमर संदेश भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व में मानवता के लिए प्रेरणास्त्रोत है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘लिटिल इंडिया’ में गांधी जी की प्रतिमा भारत-जापान मैत्री और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। यह स्थान न केवल भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि जापानी नागरिकों को भी भारत की महान परंपराओं और मूल्यों से जोड़ता है। मुख्यमंत्री साय के साथ इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यगण भी उपस्थित थे।
गंगा स्नान के लिए जा रहे 8 लोगों की मौत….4 की हालत गंभीर
पटना के ग्रामीण एसपी विक्रम सिहांग ने सड़क दुर्घटना में आठ लोगों की मौत की पुष्टि की है जबकि चार गंभीर रूप से घायल हैं। जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। मृतकों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है, सभी हिलसा नालंदा जिला के रहने वाले हैं।
आईएनएस तमाल ने ग्रीस की सौडा खाड़ी में बंदरगाह पर अपनी यात्रा पूरी की
देलही : भारतीय नौसेना का आधुनिकतम और उन्नत तकनीकों से लैस युद्धपोत आईएनएस तमाल भारत में अपने घरेलू बंदरगाह के लिए आने के मार्ग में 19-22 अगस्त, 2025 को ग्रीस के सौडा खाड़ी में रुका। बंदरगाह पर आगमन के दौरान भारतीय जहाज के चालक दल ने हेलेनिक नौसेना और नाटो अधिकारियों के साथ बातचीत की। इसमें 19 अगस्त, 2025 को सौडा खाड़ी नौसेना बेस पर कमांडर कमोडोर डायोनिसियोस मंतादाकिस, नाटो समुद्री अवरोधन परिचालन प्रशिक्षण केंद्र (एनएमआईओटीसी) के प्रमुख कैप्टन कोप्लाकिस इलियास और अमरीकी नौसेना के नौसेना सहायता गतिविधि के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन स्टीफन स्टीसी से कमांडिंग ऑफिसर की मुलाकात भी शामिल थी। बैठकों के दौरान चर्चा परिचालन संबंधी मामलों और समुद्री सहयोग पर केंद्रित रही। आईएनएस तमाल के चालक दल के लिए सौडा खाड़ी में इतालवी नौसेना के लैंडिंग हेलीकॉप्टर डॉक, बहु-भूमिका वाले हमले की इकाई आईटीएस ट्राइस्टे पर एक क्रॉस डेक दौरा आयोजित किया गया।
ग्रीस में भारत के राजदूत रुद्रेन्द्र टंडन ने 20 अगस्त, 2025 को जहाज का दौरा किया और चालक दल के साथ बातचीत की। चालक दल ने युद्धपोत के बंदरगाह प्रवास के दौरान, सौडा नौसेना बेस और आयुध सुविधा, एनएमआईओटीसी और स्थानीय समुद्री संग्रहालय का दौरा किया। जहाज के चालक दल ने क्रेते में द्वितीय विश्व युद्ध के कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि अर्पित की।
आईएनएस तमाल 22 अगस्त, 2025 को सौडा खाड़ी से रवाना हुआ और उसने हेलेनिक नौसेना की रूसेन श्रेणी की गश्ती नौका एचएस रिटोस के साथ एक अभ्यास में भाग लिया, जिसका उद्देश्य नौसेनाओं के बीच आपसी सहभागिता को बढ़ावा देना था।
आईएनएस तमाल का बंदरगाह पर आगमन भारत द्वारा ग्रीस के साथ अपने संबंधों को दिए जाने वाले महत्व और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को सशक्त करने के प्रयासों को दर्शाता है। इसने दोनों नौसेनाओं को सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने और संयुक्त सहयोग के लिए आगे के अवसरों का लाभ उठाने का अवसर भी प्रदान किया है।
भारत में अपने घरेलू बंदरगाह पहुंचने के रास्ते में यह युद्धपोत एशिया के मित्र देशों के बंदरगाहों का दौरा करेगा, जिससे समुद्री कूटनीति को बढ़ावा मिलेगा और सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार होगा।
ग्रीस में भारत के राजदूत रुद्रेन्द्र टंडन ने 20 अगस्त, 2025 को जहाज का दौरा किया और चालक दल के साथ बातचीत की। चालक दल ने युद्धपोत के बंदरगाह प्रवास के दौरान, सौडा नौसेना बेस और आयुध सुविधा, एनएमआईओटीसी और स्थानीय समुद्री संग्रहालय का दौरा किया। जहाज के चालक दल ने क्रेते में द्वितीय विश्व युद्ध के कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि अर्पित की।
आईएनएस तमाल 22 अगस्त, 2025 को सौडा खाड़ी से रवाना हुआ और उसने हेलेनिक नौसेना की रूसेन श्रेणी की गश्ती नौका एचएस रिटोस के साथ एक अभ्यास में भाग लिया, जिसका उद्देश्य नौसेनाओं के बीच आपसी सहभागिता को बढ़ावा देना था।
आईएनएस तमाल का बंदरगाह पर आगमन भारत द्वारा ग्रीस के साथ अपने संबंधों को दिए जाने वाले महत्व और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को सशक्त करने के प्रयासों को दर्शाता है। इसने दोनों नौसेनाओं को सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने और संयुक्त सहयोग के लिए आगे के अवसरों का लाभ उठाने का अवसर भी प्रदान किया है।
भारत में अपने घरेलू बंदरगाह पहुंचने के रास्ते में यह युद्धपोत एशिया के मित्र देशों के बंदरगाहों का दौरा करेगा, जिससे समुद्री कूटनीति को बढ़ावा मिलेगा और सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार होगा।
"स्वास्थ्य कोई सीमा नहीं जानता; सहयोग लचीला चिकित्सा उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र की कुंजी है ": अमित अग्रवाल,
देलही : अमित अग्रवाल, सचिव, फार्मास्युटिकल्स विभाग ने कल “मेडिकल-टेक नवाचारों के लिए अंतर-क्षेत्रीय नेटवर्किंग का लाभ उठाना” सत्र की अध्यक्षता की। यह दो दिवसीय दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशिया क्षेत्रीय बैठक “सार्वजनिक स्वास्थ्य में स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार: रिसर्च प्लेटफॉर्म पर अच्छे प्रथाओं का आदान-प्रदान” के हिस्से के रूप में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। सत्र में भारत, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और तिमोर-लेस्ते की सरकारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों के वरिष्ठ स्वास्थ्य पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य अनुसंधान प्रणालियों को मजबूत करने, अच्छे प्रथाओं के आदान-प्रदान की सुविधा और दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में सीमा पार सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया। बैठक दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया स्वास्थ्य अनुसंधान (रिसर्च) प्लेटफॉर्म के लिए क्षेत्रीय प्रवर्तक का हिस्सा है
सत्र को संबोधित करते हुए, औषधि विभाग के सचिव, अमित अग्रवाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि "स्वास्थ्य की कोई सीमा नहीं होती"। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने लचीली और मज़बूत स्वास्थ्य सेवा प्रणालियाँ बनाने के लिए, सीमाओं के पार, विभिन्न क्षेत्रों के बीच, सरकारी विभागों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण आवश्यकता को दर्शाया है।
अग्रवाल ने केवल तकनीक और कुशल जनशक्ति के माध्यम से, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की स्थापना, वैश्विक रूप से सुसंगत मानकों को अपनाने और नवीन उपकरणों के लिए नैदानिक जांच को समर्थन देकर, चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया ताकि बड़े पैमाने पर अर्थव्यवस्थाएँ हासिल की जा सकें और राष्ट्रीय सीमाओं से परे भी मांग को बढ़ाया जा सके। भारत में चिकित्सा उपकरण पार्कों के निरंतर विकास और आईसीएमआर की मेडटेक मित्र और पेटेंट मित्र पहलों, नैदानिक परीक्षण सहायता योजनाओं और मज़बूत अनुसंधान प्लेटफार्मों के साथ, भारत व्यवस्थित रूप से एक महत्वपूर्ण मेडटेक नवाचार केंद्र के रूप में उभरने की नींव रख रहा है।
सचिव ने कुशल मानव पूंजी के विकास में राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) के योगदान पर भी प्रकाश डाला। चिकित्सा उपकरणों पर विशेष पाठ्यक्रम अब सात एनआईपीईआर में चलाए जा रहे हैं, और इन्हें विदेशी नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया है।
अग्रवाल ने कहा कि डिजिटलीकरण के माध्यम से चिकित्सा प्रौद्योगिकियाँ अस्पतालों से घरों तक पहुँचेंगी, जिससे स्वास्थ्य सेवा अधिक सुलभ और सस्ती हो जाएगी। उन्होंने औषधि विभाग द्वारा विकसित "अकादमिक से उद्योग: डिस्कवरी मार्केटप्लेस" प्लेटफ़ॉर्म के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य उद्योग, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों और फार्मा-मेडटेक क्षेत्र के अन्य हितधारकों को नवीन उत्पादों के लिए साझेदारी, सहयोग और गठजोड़ के लिए जोड़ने में सक्षम बनाना और वाणिज्यिक और सार्वजनिक हित दोनों के लिए सफलताओं को बढ़ावा देना है।
अग्रवाल ने दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशियाई क्षेत्र को मेडटेक नवाचारों के लिए एक वैश्विक शक्ति केंद्र बनाने में अनुसंधान मंच के महत्व पर बल देते हुए सत्र का समापन किया।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश का मूल पाठ
देलही : केंद्रीय कैबिनेट के साथी, इसरो और स्पेस सेक्टर के सभी वैज्ञानिक एवं इंजीनियर्स, और मेरे प्यारे देशवासियों!
आप सभी को नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। इस बार Space Day की थीम है-आर्यभट्ट से गगनयान तक! इसमें अतीत का आत्मविश्वास भी है, और भविष्य का संकल्प भी है। आज हम देख रहे हैं, इतने कम समय में ही, नेशनल स्पेस डे हमारे युवाओं में उत्साह और आकर्षण का अवसर बन गया है। ये देश के लिए गर्व की बात है। मैं स्पेस सेक्टर से जुड़े सभी लोगों को, वैज्ञानिकों को, सभी युवाओं को नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। अभी भारत ने International Olympiad on Astronomy and Astrophysics, उसकी मेज़बानी भी की है। इस competition में दुनिया के साठ से ज्यादा देशों से लगभग 300 युवाओं ने हिस्सा लिया। भारत के युवाओं ने मेडल भी जीते, ये Olympiad स्पेस सेक्टर में भारत की उभरती लीडरशिप का प्रतीक है।
मुझे ख़ुशी है कि युवा साथियों में स्पेस के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए, ISRO द्वारा भारतीय अंतरिक्ष हैकाथोन और Robotics Challenge जैसी पहल भी की गई है। मैं इन प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेने वाले स्टूडेंट्स और विजेताओं को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।
स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक नए माइल स्टोन गढ़ना, ये भारत और भारत के वैज्ञानिकों का स्वभाव बन गया है। दो साल पहले ही भारत पहला ऐसा देश बना था, जिसने चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने का इतिहास रचा। हम स्पेस में docking-undocking की क्षमता रखने वाले दुनिया के चौथे देश भी बन गए हैं। अभी तीन दिन पहले ही मेरी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात हुई है। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तिरंगा फहराकर हर भारतीय को गर्व से भर दिया। जब वो तिरंगा मुझे दिखा रहे थे, वो जो पल थी, वो जो अनुभूति थी, वो शब्दों से परे है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु से हुई चर्चा में मैंने नए भारत के युवा के असीम हौसले और अनंत सपनों को देखा है। इन सपनों को आगे बढ़ाने के लिए हम भारत का “Astronaut Pool” भी तैयार करने जा रहे हैं। मैं आज स्पेस डे पर अपने युवा साथियों को भारत के सपनों को उड़ान देने के लिए, इस Astronaut Pool से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ।
आज भारत semi-cryogenic engine और electric propulsion जैसी breakthrough technology में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही, आप सब वैज्ञानिकों की मेहनत से, भारत गगनयान की उड़ान भी भरेगा, और आने वाले समय में भारत अपना स्पेस स्टेशन भी बनाएगा। अभी हम मून और मार्स तक पहुंचे हैं। अब हमें गहरे अन्तरिक्ष में उन हिस्सों में भी झांकना है, जहां मानवता के भविष्य के लिए कई जरूरी रहस्य छिपे हैं! Beyond galaxies lies our horizon!!!
अनंत अन्तरिक्ष हमें हमेशा ये एहसास दिलाता है कि वहां कोई भी पड़ाव अंतिम पड़ाव नहीं है। मैं मानता हूं, स्पेस सेक्टर में, पॉलिसी लेवेल पर भी, कहीं कोई आखिरी ठहराव नहीं होना चाहिए। और इसीलिए, मैंने लालकिले से कहा था, हमारा रास्ता Reform, Perform और Transform का रास्ता है। इसलिए बीते 11 वर्षों में देश ने स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक लगातार बड़े reforms किए हैं। एक समय था, जब स्पेस जैसे futuristic सेक्टर को देश में अनेक पाबंदियों से बांध दिया गया था। हमने इन बेड़ियों को खोला। हमने प्राइवेट सेक्टर को स्पेस-टेक में परमीशन दी। और आज देखिए, देश में 350 से ज्यादा स्टार्टअप्स स्पेस-टेक में innovation और acceleration का इंजन बनकर उभर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भी उनकी बढ़-चढ़कर के उपस्थिति दिख रही है। हमारे प्राइवेट सेक्टर द्वारा बनाया गया पहला PSLV रॉकेट भी जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। मुझे खुशी है कि भारत की पहली private communication satellite भी बनाई जा रही है। Public Private Partnership के जरिए Earth Observation Satellite Constellation भी लॉन्च करने की तैयारी है। आप कल्पना कर सकते हैं, स्पेस सेक्टर में भारत के युवाओं के लिए बहुत बड़ी संख्या में अवसर बनने जा रहे हैं।
मैंने 15 अगस्त को लाल किले से ऐसे अनेक क्षेत्रों का जिक्र किया था, जिसमें भारत को आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। मैंने हर सेक्टर को अपने लक्ष्य तय करने को कहा है। आज स्पेस डे के दिन, मैं देश के स्पेस स्टार्टअप्स से कहूंगा, क्या हम स्पेस सेक्टर में अगले पांच वर्षों में पांच यूनिकॉर्न खड़े कर सकते हैं? अभी हम भारत की धरती से साल में 5-6 बड़े लॉन्च देखते हैं। मैं चाहूंगा कि प्राइवेट सेक्टर आगे आए और अगले 5 साल में हम उस स्थिति में पहुंचे की हर साल पचास रॉकेट लॉन्च कर पाएं। हर सप्ताह एक, इसके लिए देश को जिन next gen reforms की जरूरत है, वो करने का सरकार का इरादा भी है और इच्छाशक्ति भी है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ, सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़ी है।
भारत, स्पेस टेक्नोलॉजी को scientific exploration के साथ ही Ease of Living का भी माध्यम मानता है। आज स्पेस-टेक भारत में गवर्नेंस का भी हिस्सा बन रही है। फसल बीमा योजना में satellite based आकलन हो, मछुआरों को satellite से मिल रही जानकारी और सुरक्षा हो, Disaster management हो या PM Gati Shakti National Master Plan में geospatial data का इस्तेमाल हो, आज स्पेस में भारत की प्रगति सामान्य नागरिकों का जीवन आसान बना रही है। इसी दिशा में, केंद्र और राज्यों में स्पेस-टेक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए कल National Meet 2.0 का आयोजन भी हुआ है। मैं चाहूँगा, ऐसे प्रयास आगे भी चलते रहें। हमारे स्पेस स्टार्टअप्स भी नागरिकों की सेवा के लिए नए solutions दें, नए इनोवेशन्स करें। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में अन्तरिक्ष में भारत की यात्रा नई ऊंचाइयों को छुएगी। इसी विश्वास के साथ, आप सभी को एक बार फिर नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत बधाई। धन्यवाद!
57वीं युवा संसद प्रतियोगिताः उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी और विद्यालय पुरस्कृत
नईदिल्ली। शिक्षा निदेशालय, दिल्ली सरकार और एनडीएमसी के अंतर्गत आने वाले स्कूलों के लिए 57वीं युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 का पुरस्कार वितरण समारोह आज (शुक्रवार, 22 अगस्त, 2025) जीएमसी बालयोगी सभागार, संसद पुस्तकालय भवन, संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने समारोह की अध्यक्षता की तथा प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं विद्यालयों को पुरस्कार वितरित किए।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने छात्रों के साथ एक संवाद सत्र का आयोजन किया। उन्होंने छात्रों से बातचीत करते हुए आह्वान किया कि युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिकता को सीखना और अपनाना चाहिए तथा दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की सद्भावना और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए। उन्होंने समारोह में उपस्थित सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की शपथ भी दिलाई।
संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. सत्य प्रकाश ने अपने स्वागत भाषण में विद्यार्थियों से युवा संसद कार्यक्रम को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने तथा अपने दैनिक जीवन में लोकतंत्र के मूल्यों को आत्मसात करने का आग्रह किया। संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव श्री निकुंज बिहारी धल ने सभा को संबोधित किया और छात्र समुदाय को लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय प्रथाओं से परिचित कराने के महत्व पर बल दिया।
57वीं युवा संसद प्रतियोगिता (2024-25) के विजेता, सर्वोदय कन्या विद्यालय नंबर 1, सी-ब्लॉक, यमुना विहार, दिल्ली ने इस अवसर पर अपनी "युवा संसद" बैठक का पुनः प्रदर्शन किया। संसदीय कार्य मंत्रालय पिछले 59 वर्षों से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के स्कूलों के लिए युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन करता आ रहा है। शिक्षा निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार और नई दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले स्कूलों के लिए युवा संसद प्रतियोगिता कार्यक्रम के अंतर्गत, इस श्रृंखला की 57वीं प्रतियोगिता 2024-25 के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में आयोजित की गई।
युवा संसद कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी में आत्म-अनुशासन, विविध विचारों के प्रति सहिष्णुता, विचारों की उचित अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक जीवन शैली के अन्य गुणों का संचार करना है। इसके अलावा, यह कार्यक्रम छात्रों को संसद की कार्यप्रणाली, चर्चा और वाद-विवाद की तकनीकों से भी परिचित कराता है और उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रभावी भाषण कला का विकास करता है। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए “जीवी मावलंकर रनिंग पार्लियामेंट्री शील्ड” और ट्रॉफी सर्वोदय कन्या विद्यालय नंबर 1, सी-ब्लॉक, यमुना विहार, दिल्ली को प्रदान की गई।
ऑनलाइन गेमिंग विधेयक बना कानून, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, रियल मनी गेम्स की 400 कंपनिया स्वाहा!
डेस्क। देश में ऑनलाइन गेमिंग को लेकर एक बड़ा बदलाव हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद अब राष्ट्रपति ने ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंजूरी दे दी है। यह अब एक आधिकारिक कानून बन गया है।
नए कानून का उद्देश्य ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके साथ ही रियल मनी गेम्स (real money games) पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। यानी अब ऐसे ऑनलाइन गेम्स, जहां पैसे लगाकर पैसा कमाने का लालच दिया जाता है, उन्हें पूरी तरह बंद किया जाएगा। पूर्ण प्रतिबंध से 400 से अधिक कंपनियां बंद हो जाएंगी।
इस कानून का असर गेमिंग इंडस्ट्री पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है, खासकर उन कंपनियों पर जो रियल मनी गेम्स के जरिए मुनाफा कमा रही थीं। आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024 में रियल मनी गेम्स से 2.4 बिलियन डॉलर की कमाई हुई थी, जो पूरे गेमिंग सेक्टर की कुल 3.8 बिलियन डॉलर की कमाई का बड़ा हिस्सा थी।
बुधवार को यह बिल लोकसभा में और गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया था, जहां दोनों सदनों से इसे मंजूरी मिल गई। अब राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद इस पर कानूनन अमल शुरू हो गया है।
नए नियमों के तहत अगर कोई कंपनी या व्यक्ति इस कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को जुए जैसी लत से बचाया जा सकेगा और गेमिंग सेक्टर में एक सकारात्मक और सुरक्षित माहौल तैयार किया जा सकेगा।
फास्टैग वार्षिक पास योजना... तीन हजार में मिलेगा वार्षिक पास.. जानिए क्या बोले नितीन गडकरी
नईदिल्ली। सरकार ने 17 जून, 2025 को प्रकाशित राजपत्र संशोधन अधिसूचना संख्या जीएसआर 388 (ई) के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों और संग्रह का निर्धारण) नियम, 2008 में संशोधन किया है। संशोधन में सभी गैर-व्यावसायिक कार, जीप और वैन के लिए एक फास्टैग वार्षिक पास पेश किया, जो 15 अगस्त, 2025 से प्रभावी हो गया है। वार्षिक पास योजना 3000/- रुपये के शुल्क के भुगतान पर सभी राष्ट्रीय राजमार्ग/राष्ट्रीय एक्सप्रेस वे शुल्क प्लाजा पर एक वर्ष के लिए या 200 शुल्क प्लाजा क्रॉसिंग तक जो भी पहले हो, यात्रा की सुविधा प्रदान करेगी। एक बंद उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह प्रणाली में, शुल्क प्लाजा के माध्यम से वाहन का प्रवेश और निकास एक ही क्रॉसिंग माना जाएगा। वार्षिक पास योजना का उद्देश्य गैर-व्यावसायिक वाहन (कार/जीप/वैन) उपयोगकर्ताओं पर फास्टैग और उपयोगकर्ता शुल्क के बोझ को कम करना है।
वार्षिक पास राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (एनई) शुल्क प्लाज़ा पर लागू है। हालांकि वार्षिक पास वर्तमान में राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लागू नहीं है, फिर भी यदि राज्य सरकार राज्य राजमार्गों/एक्सप्रेसवे के लिए ऐसी पास प्रणाली शुरू करने को इच्छुक है, तो इस उद्देश्य के लिए पूर्ण तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों के शुल्क प्लाजा पर उपयोगकर्ता शुल्क में कमी लाने के लिए निम्नलिखित उपाय शुरू किए हैं:
गैर-वाणिज्यिक कार/जीप/वैन के लिए फास्टैग आधारित वार्षिक पास योजना 15 अगस्त, 2025 से प्रभावी हो गई है, जैसा कि राजपत्र अधिसूचना संख्या जीएसआर 388 (ई) दिनांक 17 जून 2025 में अधिसूचित किया गया है। यह योजना 3000/- रुपये (तीन हजार रुपये) के भुगतान पर 200 राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क प्लाजा क्रॉसिंग या एक वर्ष की वैधता, जो भी पहले हो, प्रदान करती है।
मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना संख्या जीएसआर 437 (ई) दिनांक 1 जुलाई, 2025 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग के एक खंड के उपयोग के लिए शुल्क की दर को युक्तिसंगत बनाया है, जिसकी गणना संरचना या संरचनाओं की लंबाई को छोड़कर राष्ट्रीय राजमार्ग के खंड की लंबाई में संरचना या संरचनाओं की लंबाई का दस गुना जोड़कर या राष्ट्रीय राजमार्ग के खंड की कुल लंबाई का पांच गुना, जो भी कम हो, जोड़कर की जाएगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
"संस्कृति आंतरिक जीवन का विकास है, बाह्य व्यवस्थाओं से परे एक खोज।" प्रो. नंदकिशोर आचार्य
नईदिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, कला निधि प्रभाग द्वारा 'आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का संस्कृति-चिंतन' विषय पर 'आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मारक व्याख्यान' (आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मृति व्याख्यान) का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान प्रख्यात विद्वान प्रो. नंदकिशोर आचार्य, पूर्व एमेरिटस प्रोफेसर, आईटीएम, ग्वालियर द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने की, जबकि स्वागत भाषण एवं परिचय डीन (प्रशासन) एवं प्रमुख, कला निधि प्रो. रमेश चंद्र गौड़ ने प्रस्तुत किया।
प्रो. नंदकिशोर आचार्य ने कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का सांस्कृतिक दर्शन आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मारक व्याख्यान में बोलते हुए, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि संस्कृति आंतरिक आत्म का विकास और मूल्यों की खोज है, जबकि सभ्यता सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संरचनाओं जैसी बाह्य प्रणालियों से संबंधित है। उन्होंने द्विवेदी जी के इस दृष्टिकोण पर बल दिया कि सभ्यता को सांस्कृतिक मूल्यों की प्राप्ति के साधन के रूप में कार्य करना चाहिए और वास्तविक सांस्कृतिक प्रगति तभी संभव है जब बाह्य व्यवस्थाएं इन मूल्यों के अनुरूप हों। प्रो. आचार्य ने द्विवेदी जी के इस विश्वास को और स्पष्ट किया कि मूल्य सार्वभौमिक हैं और ब्रह्मांडीय सत्य में निहित हैं, पूर्व और पश्चिम के कृत्रिम विभाजनों से परे और सच्ची संस्कृति एकता और सद्भाव की ओर बढ़ती है, विभाजन की ओर नहीं।
पंचकोश की अवधारणा का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि अंतिम लक्ष्य 'आनंदमय कोष' है - एक परमानंद की अवस्था, जिसके सहायक तत्व अन्य मूल्य हैं। उन्होंने द्विवेदी जी की 'ऋत' (ब्रह्मांडीय व्यवस्था) और 'अनेकान्तवाद' (सत्य की बहुलता) की व्याख्या का भी उल्लेख किया और कहा कि संस्कृति को लोकतांत्रिक बने रहना चाहिए, क्योंकि कोई भी एक दृष्टिकोण संपूर्ण सत्य को धारण नहीं करता। प्रो. आचार्य ने द्विवेदी जी के इस विश्वास को दोहराते हुए समापन किया कि संपूर्ण संस्कृति की ओर यात्रा निरंतर चलती रहती है और केवल वैश्विक बाज़ार ही नहीं, बल्कि वैश्विक सहमति ही अंततः मानवता को उच्चतर चेतना और एकता की ओर ले जाएगी।
राम बहादुर राय ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के सांस्कृतिक दर्शन पर प्रो. नंदकिशोर आचार्य से सुनना एक समृद्ध अनुभव था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अपने छात्र जीवन के दौरान द्विवेदी जी से जुड़ी अपनी व्यक्तिगत स्मृतियों को याद किया और द्विवेदी जी की सभी छात्रों के लिए अपने द्वार खुले रखने की अद्वितीय क्षमता पर प्रकाश डाला। राय ने द्विवेदी जी के लेखन, विशेषकर भारतीय संस्कृति पर उनके निबंध को एक विकासशील परंपरा बताया। उन्होंने द्विवेदी जी के इस आग्रह का उल्लेख किया कि भारतीय संस्कृति प्राचीन ज्ञान के साथ निरंतरता बनाए रखते हुए नए विचारों को आत्मसात करके गतिशील बनी रही है। उन्होंने कहा, "हमारे ऋषियों ने कर्म और पुनर्जन्म जैसे मूलभूत सिद्धांतों की खोज की, न कि उन्हें रचा, जो सांस्कृतिक धारा का अभिन्न अंग बन गए।"
मध्यप्रदेश को बना रहे हैं देश का नया फूड बॉस्केट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बीते 20 सालों में मध्यप्रदेश का परिदृश्य बड़ी तेजी से बदला है। हम मध्यप्रदेश को देश का 'मॉडल स्टेट' बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। हमारी सरकार मध्यप्रदेश को देश का 'न्यू फूड बॉस्केट' बनाने के लिए तेजी से प्रयत्नशील हैं। हमारे अन्नदाता किसानों की मेहनत से प्रदेश के अनाज भंडार अन्न से भरे पड़े हैं। मध्यप्रदेश वह प्रदेश है, जहां तेजी से जिलों में मैडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। हमारी सरकार पीपीपी मॉडल पर मैडिकल कॉलेज खोलने के लिए निवेशकों को मात्र एक रूपए में 25 एकड़ जमीन और 10 साल के लिए अपना जिला-संभागीय अस्पताल भी देने को तैयार है। निवेशक मेडिकल कॉलेज के लिए जब अपना खुद का अस्पताल तैयार कर लेंगे, तब 10 साल बाद हम अपना जिला चिकित्सालय उनसे वापस ले लेंगे। यह निवेशकों को सरकार की ओर से दोहरी मदद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नई दिल्ली में एक निजी मीडिया समूह द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का शुभारंभ मध्यप्रदेश से हुआ। करीब एक लाख करोड़ रूपए की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड के सारे जिले और लगभग 70 हजार करोड़ रूपए लागत की पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से मालवा और चंबल के सभी जिलों में सिंचाई और पेयजल की स्थाई सुविधा उपलब्ध कराएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारी पूरे जोर-शोर से जारी है। श्रीमहाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन की तस्वीर ही बदल गई है। उज्जैन शहर की आबादी फिलहाल 7 लाख है, पर अब देश-विदेश से हर साल 7 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालु श्रीमहाकाल बाबा और श्रीमहाकाल लोक के दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्री महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन शहर में ही 200 से अधिक होटल खुल गये हैं, इससे शहर और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए एक हजार एकड़ जमीन भी पूरी उपयोग में आ गई, इसलिए अब हम एक हजार एकड़ जमीन का लैण्ड बैंक पुन: आरक्षित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एयर कनेक्टिविटी पर हमारा पूरा फोकस है। हम मध्यप्रदेश में नई एविएशन पॉलिसी लेकर आए हैं। इस पॉलिसी के अंतर्गत हमारे खुद के प्लेन प्रदेश में शुरू करने के लिए इंसेंटिव भी दिए जा रहे हैं। गंभीर रोग के इलाज के लिए बड़े शहर जाने की आवश्यकता पड़ने पर हम समर्थ को सशुल्क और आयुष्मान कार्डधारियों को नि:शुल्क एयर एम्बुलेंस उपलब्ध करा रहे हैं। इनके लिए हमारी हेलीकॉप्टर सेवा भी जारी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। मानवता के विकास के लिए सड़क हादसे के घायलों की सहायता के लिए राहवीर योजना के तहत मददगार व्यक्ति को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार मध्यप्रदेश में शहरीकरण को बढ़ावा दे रही है। इंदौर मेट्रो की शुरूआत के बाद भोपाल मेट्रो पर काम तेजी से चल रहा है। इसके बाद हम जबलपुर और ग्वालियर शहर में भी मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए आगे बढ़ेंगे। इंदौर और भोपाल में मेट्रोपोलिटन सिटी एरिया बनाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए हमारी सरकार निवेशकों को तरह-तरह के इंसेंटिव दे रही है। यही कारण है कि फरवरी 2025 में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मध्यप्रदेश सरकार को 30.77 लाख करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उज्जैन में इलेक्ट्रानिक्स क्लस्टर भी तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना पर हमारा पूरा फोकस है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति मजबूत है। इसे और मजबूत करने के लिए बजट को डबल करने की योजना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। श्रम कानूनों में सुधार किया गया है। देश में सर्वाधिक तीव्र गति से खर्च करने में राज्य देश के तीन राज्यों में से एक है। देश को आत्मनिर्भर बनाने में मध्यप्रदेश अपना योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में देश में नई शिक्षा नीति लागू करने में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। हमने टूरिज्म में अवॉर्ड जीते और शासकीय संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया है।
पशुपालन से किसानों की बढ़ेगी आय, बनेंगे आत्मनिर्भर
भोपाल :प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें पशुपालन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह हमारा संकल्प है कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन निरंतर बढ़े और वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की 'मिल्क कैपिटल' बनाया जाये। गो- संरक्षण और गो-संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किये जा रहे हैं।
प्रदेश में पशुपालन विभाग को गो-पालन विभाग का नाम दिया गया है। प्रदेश में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9% होता है, जिसे 20% तक ले जाने का सरकार का लक्ष्य है। प्रदेश में गोवंश के लिए आहार की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रतिमाह दी जाने वाली राशि को रू.20 से बढ़कर रू.40 कर दिया गया है। 'हर घर गोकुल' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश में 946 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना में प्रदेश के ग्रामों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के लिए प्रत्येक जनपद में एक वृंदावन ग्राम बनाया जा रहा है।
दुग्ध उत्पादन से अधिक आय के लिए मध्यप्रदेश दुग्ध संघ के सांची ब्रांड को अधिक लोकप्रिय बनाया जा रहा है, इसके लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से करार भी किया गया है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ दुग्ध उत्पादों की बेहतर ब्राडिंग, गोवंश की समुचित देखभाल, वेटनरी क्षेत्र में आवश्यक प्रशिक्षण और उन्नत अधोसंरचना स्थापित करने में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की विशेषज्ञता का हरसंभव लाभ लिया जा रहा है। वर्ष 2030 तक प्रदेश के 26 हजार गांवों तक डेयरी नेटवर्क का विस्तार सुनिश्चित किया जाना है। इससे 52 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन होगा। बढ़े हुए दुग्ध संकलन का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए आधुनिकतम दुग्ध प्रसंस्करण अवसंरचना विकसित की जाएगी। प्रदेश में निर्मित होने वाले दुग्ध उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर ब्राडिंग सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश में पशुपालन और डेयरी विकास के लिए सरकार द्वारा नई योजनाएं शुरू की गई हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना में पशुपालक को 25 दुधारू पशु गाय, संकर गाय, भैंस की इकाई प्रदान की जाएगी। इस इकाई की लागत 36 से 42 लाख रुपए के बीच रहेगी। योजना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों के लिए 33 प्रतिशत एवं अन्य वर्ग के लिए 25% अनुदान की व्यवस्था की गई है। सरकार अब सिर्फ भैंस का नहीं गाय का दूध भी खरीदेगी। गाय के दूध की खरीद की कीमत बढ़ाई जाएगी। प्रदेश में "स्वावलंबी गो-शालाओं की स्थापना नीति 2025" भी लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्र में उपलब्ध गो वंश के आश्रय एवं भरण पोषण के लिए 05 हजार गो-वंश से अधिक की क्षमता वाली वृहद गो-शालाएं नगर निगम ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, भोपाल और जबलपुर में स्थापित की जा रही हैं।
गो-संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, नस्ल सुधार कार्यक्रम के साथ ही विभिन्न केंद्रीय योजनाओं का प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में न केवल गोवंश का समुचित पालन-पोषण किया जा रहा है, अपितु दुग्ध उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
प्रदेश में स्वाबलंबी गो-शालाओं की स्थापना नीति पर तेज गति से कार्य किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत प्रदेश में 28 स्थान चिन्हित किए गए हैं तथा 8 स्वयं सेवी संस्थाओं को भूमि भी आबंटित भी की जा चुकी है। योजना में 5000 एवं अधिक गो-वंश के पालन पर शासन की ओर से 130 एकड़ तक भूमि आवंटित किए जाने का प्रावधान है। गो-शालाओं के लिए चारा-भूसा अनुदान योजना के अंतर्गत इस वित्त वर्ष में विभिन्न गो-शालाओं को 133.35 करोड रुपए दिए गए हैं। गत वर्ष इस योजना में 270.40 करोड़ रुपए गो-शालाओं को अनुदान के रूप में दिए गए थे।
प्रदेश में गो संवर्धन बोर्ड के अंतर्गत 2942 गो-शालाएं पंजीकृत हैं, जिनमें 2828 गो-शालाएं संचालित हैं। इन गो-शालाओं में 04 लाख 22 हजार गो-वंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। गत एक वर्ष में प्रदेश में कुल 623 गौशालाएं पंजीकृत हुई हैं, जिनमें 596 गौशालाएं मनरेगा योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं तथा 27 का संचालन स्वयंसेवी संस्थाएं कर रही हैं।
प्रदेश में अति पिछड़े बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति के पशुपालकों के लिए प्रदेश के 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारु पशु योजना संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा 90% अनुदान पर प्रत्येक हितग्राही को दो-दो मुर्रा भैंस/ गाय प्रदान की जाती है। योजना में गत वर्ष 660 के विरुद्ध 639 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया था तथा इस वर्ष 483 को पशु प्रदान किए जाने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर विदिशा तथा रायसेन जिलों में चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत प्रदेश में कुल 1500 " मैत्री" की स्थापना के लिए 12 करोड़ 15 लख रुपए की राशि प्राप्त हुई है। प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशु नस्ल सुधार के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
“गांव की पगडंडियों पर जो सुकून है, वो शहर की गलियों में कहां”
भोपाल : सतपुड़ा की वादियों में बसे छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन-ग्राम अब पर्यटकों के लिये विशेष आकर्षण बन गये हैं। ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, पहाड़ी ट्रैकिंग और लोक नृत्य सब कुछ एक ही जगह पर्यटकों को मिल रहा है। पिछले 2 वर्षों में यहां बनाये गये होम-स्टे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली है। मध्यप्रदेश में होम-स्टे के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति तथा ग्रामीण जीवन के अनुभव कराने के उद्देश्य से ग्रामीण पर्यटन परियोजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के 100 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है।मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित किये गये छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे देश-प्रदेश के पर्यटकों को खूब भा रहे हैं। हर सप्ताह यहां हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। जिले के 12 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित किया गया है। इनमें से 7 गांव सावरवानी, देवगढ़, काजरा, गुमतरा, चोपना, चिमटीपुर और धूसावानी में 36 होम-स्टे पर्यटकों के लिये खोले जा चुके हैं। होम-स्टे खुलने से ग्रामीण रोजगार और उच्च शिक्षा का रूझान बढ़ा है। साथ ही जनजातीय परिवारों का पलायन भी रूक गया है। गांव के युवा गाइड के रूप, लोक नृत्य और भजन मंडली की प्रस्तुति और बैलगाड़ी संचालन से सैलानियों को ग्रामीण जन-जीवन से अवगत कराते हुए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। छिंदवाड़ा जिले के हर पर्यटन ग्राम की अपनी विशेषता है। भोपाल मार्ग पर साल के जंगल के बीच बसे चोपना में देवना नदी का अद्भुत नजारा, पातालकोट के चिमटीपुर गांव की रहस्यमयी वादियां, पेंच नेशनल पार्क के करीब ऑफबीट डेस्टीनेशन गुमतारा, देवगढ़ में गोंड शासन का ऐतिहासिक किला, काजरा में बंधान डेम के बेकवॉटर्स का सौंदर्य और धूसावानी गांव के चौरागढ़ महादेव मंदिर का दृश्य और आम के बागान पर्यटकों को यहां बार-बार आने के लिये प्रेरित करते हैं। होम-स्टे में पर्यटक गाय का दूध दोहने, खेत के कामों में हाथ बटाने और पहाड़ियों पर ट्रैकिंग करने जैसे अनुभव जीते हैं। ढोलक-मंजीरे के साथ भजन और कर्मा नृत्य मंडलियों की प्रस्तुति भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। अब छिंदवाड़ा सिर्फ पर्यटन नहीं बल्कि सतत ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।
उद्योगपति मुकेश और अनिल अंबानी की मां कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती
“स्पोर्ट्स साइंस सेंटर” मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर देगा नयी पहचान
भोपाल अब स्पोर्ट्स साइंस और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग का राष्ट्रीय हब बनने जा रहा है। खेल विभाग द्वारा नाथु बरखेड़ा स्थित स्पोर्ट्स सिटी में लगभग 25 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एवं हाई-परफॉर्मेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र नवीनतम खेल प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक शोध से लैस होगा, जिससे खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ मानसिक दृढ़ता, चोट से बचाव और प्रदर्शन सुधार का भी संपूर्ण सहयोग मिलेगा।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं खेलों में गहरी रूचि रखते हैं और युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिये प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि आज के दौर में खिलाड़ियों को केवल पारंपरिक प्रशिक्षण से सफलता नहीं मिल सकती, उन्हें वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों का सहयोग भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ भोपाल में स्पोर्ट्स साइंस और हाई-परफॉर्मेंस सेंटर की स्थापना की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई खेलों में गहन ध्यान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्कता होती है। अक्सर प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल तकनीकी कमी, मनोवैज्ञानिक दबाब या चोटो के कारण लक्ष्य हासिल करने में असफल हो जाते हैं। वर्तमान में खेलों में केवल कौशल या अच्छी कोचिंग ही पर्याप्त नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कढ़ी प्रतिस्पर्धा में खिलाड़ियों को हर उस कमी पर काम करना पड़ता है, जो उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती है। जैसे मनोविज्ञान, पोषण, बॉयोमेकेनिक्स। ऐसे परिदृश्यों को देखते हुए भोपाल में बड़े पैमाने पर स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की आवश्यकता महसूस की गई। खिलाड़ियों के लिये अत्याधुनिक
मोशन कैप्चर, गेट एनालिसिस, फोर्स-प्लेट टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त प्रयोगशालाएँ और इकाइयां बनाई जा रही हैं। इसमें फिजियोलॉजी लैब, जिसमें VO2 मेक्स टेस्टिंग, बॉडी कंपोजीशन एनालिसिस, बॉयोमेकेनिक्स लैब जिसमेंमनोविज्ञान इकाई जिसमें खिलाड़ियों की मानसिक दृढता, तनाव एवं चिंता प्रबंधन पर काम किया जायेगा। सेंटर में पोषण और बॉयोकेमिस्ट्री सपोर्ट यूनिट की स्थापना भी की जायेगी, जिसमें ब्लड मार्कर टेस्टिंग और वैज्ञानिक डाईट सपोर्ट से खिलाड़ियों पर निगरानी रखी जायेगी। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिये रिकवरी सूट की भी व्यावस्था की गई है, जिससे हाईड्रोथेरेपी, क्रायोथेरेपी और फिजियोथेरेपी की जा सकेगी।
केंद्र में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, पोषण विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट और डेटा विश्लेषक खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रोफाइल बनाकर उनके प्रदर्शन सुधार के लिए सलाह देंगे। खिलाड़ी की कमजोरियों और आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार होंगे।
स्पोर्ट्स साइंस सेंटर न केवल ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नई ऊँचाई देगा, साथ ही प्रदेश के उभरते हुए खिलाड़ियों को भी वैज्ञानिक प्रशिक्षण का लाभ उपलब्ध कराएगा। यह पहल भोपाल को स्पोर्ट्स साइंस का राष्ट्रीय हब बनायेगी और भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने की दीर्घकालिक रणनीति को गति देगी।
मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में आकार ले रहा है भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भोपाल देश के सुंदरतम शहरों में से एक है। प्रदेश की राजधानी के विकास को सुनियोजित करते हुए भोपाल को राज्य सरकार मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका लाभ भोपाल के आसपास के जिलों को भी मिलेगा। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के आवागमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से वेस्टर्न बायपास भी विकसित किया जा रहा है। अक्टूबर 2025 तक भोपाल में मेट्रो ट्रेन का संचालन भी आरंभ होगा। भोपाल के बड़े तालाब में कश्मीर की डल झील के समान शिकारो का संचालन भी पर्यटन विकास निगम के सहयोग से किया जाएगा। भोपाल में नगर निगम के माध्यम से प्रमुख मार्गों पर भव्य द्वार बनाए जा रहे हैं। साथ ही नगर में विशाल कन्वेंशन सेंटर का निर्माण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नगरपालिका निगम भोपाल द्वारा निर्माण कार्यों के भूमिपूजन, नियुक्ति-पत्र वितरण और सफाई मित्रों के सम्मान के लिए कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में अमृत 2.0 परियोजना के अंतर्गत रुपए 582.32 करोड़ की लागत से विभिन्न जलापूर्ति संबंधी कार्यों और 16 करोड़ 76 लाख रूपए लागत से विभिन्न वार्डों में होने वाले 50 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। साथ ही नियुक्ति एवं अनुकंपा-पत्र प्रदान किए और स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में भोपाल को उत्कृष्ट स्थान प्राप्त होने पर सफाई मित्रों का सम्मान भी किया।
खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास में नगरों का विकास अति महत्वपूर्ण है। नगरों में लगातार रोजगार के अवसर सृजित होते हैं तो नगरों का आकार बढ़ता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शहरों के विकास के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जो मील का पत्थर साबित हो रही हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्मार्ट सिटी विकसित करने और स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत की। इस वर्ष भोपाल को स्वच्छता में दूसरा स्थान मिला है। अमृत परियोजना 2.0 योजना से शहरों की समस्याओं को दूर करने और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए टंकियों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के कार्य हो रहे हैं। उन्होंने भोपलवासियों से भोपाल को अगले स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर-1 बनाने के लिए हरसंभव योगदान देने का आहवान किया।
महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय ने कहा कि भोपाल नगर निगम द्वारा अमृत परियोजना 2.0 योजना के अंतर्गत भविष्य की दृष्टि से पेयजल के लिए 4 फिल्टर प्लांट और 4 इंटेकवेल बनाए जाएंगे। साथ ही 36 उच्चस्तरीय टंकियों से 700 किमी लंबी पाइपलाइन से पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। भोपाल नगर निगम के 31 कर्मचारियों की असमय मृत्यु के बाद उनके परिवार के सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति के पत्र वितरित किए जा रहे हैं। सीधी भर्ती से चयनित 24 अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। सफाई मित्रों के सहयोग के कारण ही भोपाल को स्वच्छता सर्वेक्षण में उपलब्धि प्राप्त हुई है।
शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में पूसा, दिल्ली में हुआ वृहद "कर्मचारी संकल्प सम्मेलन"
दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में आज नई दिल्ली, पूसा स्थित सी. सुब्रहमण्यम हॉल में ‘कर्मचारी संकल्प सम्मेलन’का वृहद आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी सहित कृषि मंत्रालय के सचिव देवेश चतुर्वेदी, ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव शैलेश कुमार सिंह, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट सहित दोनों मंत्रालय के कर्मचारी-अधिकारी शामिल रहें। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कर्मचारी-अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में हरेक दिन, हर क्षण अहम हैं, जनता की जिंदगी को बेहतर बनाने में सभी अपना योगदान दें। हमारा काम राष्ट्र निर्माण का है, एकजुट होकर टीम भावना से काम करने से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष इस सम्मेलन को ‘कर्मयोगी संकल्प सम्मेलन’का नाम दिया जाए, तो यह प्रसन्नता का विषय होगा। उन्होंने कहा कि कार्यालय में प्रत्येक भूमिका निभाने वाले कर्मचारी-अधिकारी महत्वपूर्ण हैं। मैं हर किसी की मानवीय गरिमा का सम्मान करता हूं।