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बच्चे खूब पढ़ें, आगे बढ़ें, बेहतर शिक्षा देना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता : डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए पहले मां सरस्वती को प्रसन्न करना पड़ता है, अर्थात् विद्यार्थियों के लिए मन लगाकर पढ़ाई में मेहनत करना जरूरी है। बच्चे खूब पढ़ें, आगे बढ़ें, इसके लिए सरकार हर समय विद्यार्थियों के साथ खड़ी है। राज्य सरकार सभी विद्यार्थियों को त्वरित रूप से सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सुखद परिणाम है कि प्रदेश में सामान्यत: छात्रवृत्ति अप्रैल के महीने में सत्र खत्म होने पर मिलती थी, वह अब अक्टूबर माह में ही विद्यार्थियों के खातों में जारी की जा रही है। पात्र विद्यार्थियों को स्कूटी, लैपटॉप, ड्रेस और साइकिल आदि भी समय पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश के 52 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में समेकित छात्रवृत्ति योजना की 300 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सिंगल क्लिक से जारी की जा रही है। आज देव दीपावली से पहले विद्यार्थियों की दीपावली मन रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समेकित छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत राशि अंतरण के लिए मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सिंगल क्लिक से विद्यार्थियों के खातों में राशि जारी की। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा मंत्रीगण का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। राज्य स्तरीय कार्यक्रम से प्रदेश के सभी जिले वर्चुअली जुड़े।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने व्यक्त किया आभार
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सौजन्य भेंट कर रीवा एयरपोर्ट से प्रारंभ होने वाली रीवा-दिल्ली एवं रीवा-इंदौर हवाई सेवाओं के लिए आभार व्यक्त किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश के सर्वांगीण विकास के इस ऐतिहासिक कदम के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अधोसंरचना विकास सहित प्रदेश में हर क्षेत्र में तेज गति से विकास कार्य हो रहे हैं। सड़क, एयर कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में क्षेत्रीय संपर्क सेवाओं का तेज गति से विस्तार हो रहा है, जिससे प्रदेश के विभिन्न अंचलों को नई गतिशीलता मिल रही है। उन्होंने कहा कि रीवा-दिल्ली एवं रीवा-इंदौर हवाई सेवाओं के प्रारंभ होने से विंध्य क्षेत्र के नागरिकों को राजधानी दिल्ली एवं वाणिज्यिक नगरी इंदौर से सीधा हवाई संपर्क प्राप्त होगा जिससे क्षेत्र के औद्योगिक, आर्थिक एवं पर्यटन विकास को नई दिशा मिलेगी।
ड्रोन तकनीक का सभी क्षेत्रों में उपयोग के लिए राज्य सरकार ने बनाई नई ड्रोन पॉलिसी : डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र की सहायता से प्रदेश में विकास के हर संभव प्रयास जारी हैं। प्रदेश सरकार ने अपनी नई ड्रोन पॉलिसी भी तैयार की है। हमें दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। भारतीय समाज नई तकनीक और नवाचारों को शीघ्रता से आत्मसात करने में कभी पीछे नहीं रहा है। ड्रोन, विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव है। ड्रोन कृषि कार्यों में आज अन्नदाता की मदद कर रहा है। इससे खेतों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव आसान हुआ है। ड्रोन तकनीक से देश के दुश्मनों का खात्मा भी हो रहा है। अब तो शादियां भी ड्रोन के बिना पूरी नहीं होती हैं। हमारे वैज्ञानिक वाइस कमांड कंट्रोल की सहायता से ड्रोन को ज्यादा आधुनिक बने रहे हैं। दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारतीय ड्रोन तकनीक की ताकत देखी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से भारत ने दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ड्रोन तकनीक कार्यशाला एवं एक्सपो 2025 का विज्ञान भवन- नेहरू नगर में दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी और वर्कशॉप का शुभारंभ कर अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं, स्टार्टअप और औद्योगिक संस्थानों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स पर पहुंचकर ड्रोन तकनीक के शैक्षणिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में उपयोग के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ड्रोन टेक एक्सपो वर्कशॉप का आयोजन भारत की तकनीकी क्रांति का प्रतीक है। किसान भाइयों के लिए ड्रोन वरदान बन गया है। आपदा कीस्थिति हो या पुलिस प्रशासन के लिए मॉनीटरिंग की आवश्यकता ड्रोन तकनीक ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जिस प्रकार से बदलाव किया है वह अभूतपूर्व है। राज्य सरकार विकास-नवाचार और आत्मनिर्भरता के सशक्त वाहक के रूप में ड्रोन तकनीक का उपयोग करने के पथ पर अग्रसर है।
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि मध्यप्रदेश के 70वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में ड्रोन टेक वर्कशॉप एक्सपो-2025 आयोजित की गई है। इसमें ड्रोन तकनीक के प्रशिक्षण के लिए प्रदेशभर के 4 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा उन्हें स्वरोजगार एवं तकनीक आधारित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जाएगी। विज्ञान एवं तकनीकी नवाचारों के माध्यम से मध्यप्रदेश विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा परिषद मध्यप्रदेश के विकास के लिए हर स्तर पर सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर है।
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के निदेशक कैलाशा राव ने कहा कि आज ड्रोन तकनीक अधोसंरचना विकास कार्यों को मूर्तरूप देने में अहम भूमिका निभा रही है। उज्जैन सहित प्रदेश के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों के मानचित्र तैयार करने में यह तकनीक उपयोगी सिद्ध हुई है। ड्रोन तकनीक पर आधारित यह कार्यशाला युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और जनसामान्य को ड्रोन तकनीक के विविध उपयोगों की जानकारी देने में सहायक सिद्ध होगी।
अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा श्री संजय दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विविध गतिविधियां जारी हैं। प्रदेश के युवाओं को आगे बढ़ने के अनेक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ड्रोन टेक्नोलॉजी के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। ड्रोन अब केवल रक्षा या निगरानी का साधन नहीं रहे बल्कि कृषि, भू-सर्वेक्षण, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएँ, परिवहन, उद्योग एवं मीडिया जैसे अनेक क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो रहे हैं। भारत सरकार की “ड्रोन नीति 2021” तथा “मेक इन इंडिया” अभियान के अनुरूप राज्य स्तर पर भी ड्रोन तकनीक को नवाचार, स्टार्टअप और रोजगार के नए अवसरों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
विकास की नई ऊंचाइयां छूने को तैयार मध्यप्रदेश
भोपाल : मध्यप्रदेश अपनी स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। सभी नागरिकों को बधाई और शुभकामनाएं। प्रदेश के नागरिकों के लिए यह शुभ अवसर है। उत्साह और उल्लास के साथ यह अवसर प्रदेश की उपलब्धियों पर गर्व करने का है। आज उन सभी महान विभूतियों को याद करने का भी अवसर है, जिन्होंने मध्यप्रदेश के निर्माण में अपना योगदान दिया।
आज हम इस बात को दृढ़ आत्मविश्वास के साथ कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश अब पूरी तरह से बदल चुका है। अब और अधिक ऊंचाइयां तय करने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश के सामने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य है। भारत के अमृतकाल में मध्यप्रदेश ने भी अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। वर्ष 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का निर्माण करना सर्वोच्च लक्ष्य है। इसे हासिल करते हुए मध्यप्रदेश स्वयं भी पूर्ण रूप से विकसित राज्य बन जाएगा। अर्थव्यवस्था की दृष्टि से मध्यप्रदेश आज महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने के लिये तैयार है। मध्यप्रदेश अपनी युवा शक्ति के साथ आर्थिक विकास को तेज गति से आगे ले जाने की क्षमता रखता है। मध्यप्रदेश की धरा पर हर जरूरी संसाधन है जो विकास के लिए आधार स्तंभ हैं। कृषि क्षेत्र में खाद्यान्न, दलहन उत्पादन में अग्रणी राज्य में है। आधुनिक सिंचाई की आदर्श संरचनाएं स्थापित है। बिजली की भरपूर उपलब्धता है। ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार और पर्याप्त औद्योगिक निवेश है। उद्योगों के लिए 1.2 लाख एकड़ से ज्यादा लैंड-बैंक है। वर्तमान में 112 से ज्यादा औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहे हैं । साथ ही 14 ग्रीन फील्ड औद्योगिक स्थलों की भी पहचान की गई है। उद्योगों के लिए सबसे जरूरी आकर्षक नीतियां मध्यप्रदेश ने बनाई है, जिससे प्रदेश में व्यवसाय करना बहुत आसान हो गया है।
प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि के लिए मध्यप्रदेश विख्यात है। यहां की जमीन उपजाऊ है, जल संसाधनों की कमी नहीं है। भारत की सबसे बड़ी वन संपदा प्रदेश में उपलब्ध है। समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी है। वर्ष 2029 तक राज्य की जीएसडीपी दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने एक ऐसे समाज की कल्पना की है जहां गरीब से गरीब व्यक्ति भी समृद्ध हो।
शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में राष्ट्रीय एफपीओ समागम 2025 का शुभारंभ किया
देलही : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दिल्ली में "राष्ट्रीय एफपीओ समागम 2025" का शुभारंभ किया। इस आयोजन में 24 राज्यों और 140 जिलों के 500 से अधिक प्रगतिशील किसान, एफपीओ, कार्यान्वयन एजेंसियां (IA) और क्लस्टर-आधारित व्यावसायिक संगठन (CBBO) शामिल हुए हैं। मंत्री चौहान ने किसानों, एफपीओ सदस्यों और सहभागी संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की और FPO के माध्यम से किसानों को उत्पादक के साथ ही व्यापारी और उद्यमी बनाने का भी आह्वान किया, ताकि पूरा लाभ सीधे किसानों को मिल सकें।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने देश के किसान हितों से कोई समझौता नहीं करने के दृढ़ संकल्प पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किसानों की ओर से आभार माना। साथ ही कहा कि आजीविका के साथ ही देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खेती बहुत जरूरी है। शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के फायदे के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर हमारा फोकस है। अकेले अनाज से काम नहीं चलेगा, साथ में किसानों की आय बढ़ाने के लिए अन्य संबद्ध कार्य भी करना होंगे।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि मंत्री के नाते मेरी चिंता है कि किसानों को उनकी कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल की अच्छी कीमत मिलें, किसान दिन रात अथक परिश्रम करके अपनी फसल उगाते है, कई बार उन्हें समुचित कीमत नहीं मिलती, वहीं उपभोक्ताओं को अधिक कीमत पर ये खरीदना पड़ता है, इस अंतर को कम करना होगा।
शिवराज सिंह ने कहा कि हम सीड एक्ट भी जल्दी लाने वाले है, जिसमें प्रावधान होगा कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज मिले। शिवराज सिंह ने साफ तौर पर कहा कि नकली और घटिया बीज और पेस्टीसाइड के मामले में सरकार सख्त है, हम कड़ा कानून लाएंगे और हमारे किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
एल्यूमीनियम कंपनी पर जीएसटी टीम की छापेमारी, दस्तावेजों की जांच में जुटी पुलिस
भोपाल। मध्यप्रदेश के जबलपुर में सेंट्रल जीएसटी टीम ने मां नर्मदा एल्युमीनियम एक्सट्रूशन प्राइवेट लिमिटेड में छापेमारी की है। कार्रवाई का नेतृत्व जीएसटी कमिश्नर लोकेश कुमार लिल्हारे कर रहे हैं। समाचार के समय तक कार्रवाई जारी थी।
सूचना के आधार पर छापेमारी की गई। आरोप है कि कंपनी ने एल्यूमीनियम उत्पादों का गुप्त रूप से निर्यात कर जीएसटी का भुगतान नहीं किया। प्रोडक्शन के हिसाब से कर नहीं भरा जा रहा था और उचित कर चालान भी जारी नहीं किए जा रहे थे।
मनेरी स्थित फर्म का निरीक्षण कर आवश्यक दस्तावेजों की तलाशी ली गई। कंपनी एल्यूमीनियम उत्पाद तैयार कर सप्लाई करती है। जीएसटी टीम ने टैक्स चोरी के कई दस्तावेज बरामद किए हैं और फिलहाल सभी कागजातों की जांच की जा रही है।
'आदर्श युवा ग्राम सभा' पहल का राष्ट्रव्यापी शुभारम्भ 30 अक्टूबर को
नईदिल्ली। पंचायती राज मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग) और जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 30 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में अपनी तरह की पहली पहल आदर्श युवा ग्राम सभा (एमवाईजीएस) का संयुक्त रूप से राष्ट्रीय शुभारम्भ करेगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल और केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम के दौरान आदर्श युवा ग्राम सभा और एमवाईजीएस पोर्टल पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी अनावरण किया जाएगा। ये डिजिटल उपकरण इस पहल के प्रभावी कार्यान्वयन को सुगम बनाने, शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र में छात्रों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विकसित किए गए हैं। यह पहल जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी), एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) और राज्य सरकार के स्कूलों सहित देश भर के 1,000 से अधिक स्कूलों में शुरू की जाएगी। इस अवसर पर पंचायती राज, शिक्षा और जनजातीय कार्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के पंचायती राज संस्थानों और राज्य पंचायती राज विभागों आदि के छात्रों, शिक्षकों और निर्वाचित प्रतिनिधियों सहित 650 से अधिक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे।
आदर्श युवा ग्राम सभा (एमवाईजीएस) जनभागीदारी को मज़बूत करने और छात्रों को ग्राम सभा सत्रों में शामिल करके सहभागी स्थानीय शासन को बढ़ावा देने की एक अग्रणी पहल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, इसका उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व क्षमता का विकास करना और पारदर्शिता, जवाबदेही और विकसित भारत के दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध नागरिक तैयार करना है।
ईपीएफ अधिकारियों को दिया जा रहा “निवेश एवं जोखिम प्रबंधन” पर प्रशिक्षण
नईदिल्ली। ईपीएफ अधिकारियों के लिए नई दिल्ली स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) में “निवेश एवं जोखिम प्रबंधन” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन अकादमी के निदेशक कुमार रोहित ने किया। देशभर से प्रशिक्षण हेतु अकादमी पहुंचे अधिकारियों को संबोधित करते हुए रोहित ने उन्हें सत्रों के दौरान सक्रिय भागीदारी करने और खुले मन से प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि निवेश प्रबंधन एवं वित्तीय विवेक पर केंद्रित इस प्रकार के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन पीडीयूएनएएसएस की एक समयानुकूल एवं सार्थक पहल है, जिससे अधिकारियों की वित्तीय समझ तथा रणनीतिक निर्णय क्षमता को और सुदृढ़ होगी।
निदेशक कुमार रोहित ने बताया कि इस पहल के प्रेरणास्रोत केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) और पीडीयूएनएएसएस के डीन रमेश कृष्णमूर्ति हैं। उन्हीं की दूरदर्शी सोच और नेतृत्व दृष्टि के माध्यम से अकादमी के पेशेवर विकास और संस्थागत उत्कृष्टता के निरंतर प्रयासों को दिशा मिलती है। रोहित ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को ईपीएफओ अधिकारियों के क्षमता निर्माण और कौशल उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण व दूरदर्शी पहल बताया। उन्होंने इस अवसर पर विवेकानंद गुप्ता, आरपीएफसी-II का उदाहरण देते हुए यह बताया कि उन्हें विश्व बैंक और मिल्केन इंस्टीट्यूट के पब्लिक फाइनेंशियल एसेट मैनेजमेंट (पीएफएएम) कार्यक्रम 2025–26 के लिए चुना गया है, जिसका आयोजन यूनाइटेड किंगडम के बेयस बिजनेस स्कूल में किया जा रहा है। यह उपलब्धि ईपीएफओ अधिकारियों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती पेशेवर पहचान और क्षमताओं को प्रदर्शित करती है।
आईसीएफएआई बिजनेस स्कूल, हैदराबाद के प्रोफेसर सतीश कुमार इस कार्यक्रम में संसाधन कार्मिक के रूप में आमंत्रित थे। उन्होंने संस्थागत निवेश, पोर्टफोलियो निर्माण, बॉन्ड मूल्यांकन, परिसंपत्ति-देयता प्रबंधन और जोखिम प्रबंधन के अंतर्गत पोर्टफोलियो मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण एवं उभरते विषयों पर कई ज्ञानवर्धक सत्रों का संचालन किया। अपने व्याख्यानों के दौरान प्रोफेसर कुमार ने इस बात पर विशेष बल दिया कि “यदि किसी परिसंपत्ति का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, तो उसका प्रबंधन भी संभव नहीं है।” उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि मूल्यांकन सभी निवेश निर्णयों का आधार है। प्रोफेसर सतीश कुमार ने प्रतिभागियों को आधुनिक पोर्टफोलियो सिद्धांत के जनक हैरी मार्कोविट्ज तथा कैपिटल एसेट प्राइसिंग मॉडल (सीएपीएम) और शार्प रेशियो के लिए प्रसिद्ध विलियम शार्प के योगदानों से भी अवगत कराया, जिन्हें वर्ष 1990 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।
राजभवन को लोक कल्याण का केन्द्र बनाया : राज्यपाल पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल से गोवा के सूचना एवं प्रचार विभाग का प्रतिनिधि मंडल बुधवार को राजभवन में मिला। निदेशक सूचना एवं प्रचार दीपक बांडेकर के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल मध्यप्रदेश के पांच दिवसीय प्रवास के दौरान राजभवन आया था। राज्यपाल पटेल का निदेशक सूचना एवं प्रचार ने गोवा का पारंपरिक परिधान पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया और दल के सदस्यों का परिचय कराया।इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।
राज्यपाल ने दल के साथ चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के मंशा-अनुसार उन्होंने राजभवन को लोक कल्याण का केन्द्र बनाया है। प्रदेश के दूरस्थ पिछड़े और वंचित क्षेत्रों के साथ जीवंत संवाद कायम किया है। कार्यकाल के पहले दो वर्षों में ही प्रदेश के सभी जिलों का भ्रमण किया है। वंचितों के साथ आत्मीयता के सूत्र कायम किए है। वे प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के घर पर परिजनों के साथ सह भोज करते है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सजग करने की मंशा से पूर्व में पांच गांवों के भ्रमण का कार्यक्रम देते हैं। अंतिम क्षण में किसी एक गांव का भ्रमण कर सम्पर्क और संवाद के द्वारा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं।
राज्यपाल ने मध्यप्रदेश के वनों, दर्शनीय स्थलों के संबंध में भी दल को जानकारी दी। प्रदेश के विकास कार्यों और गतिविधियों के बारे में बताया। उन्होंने दल को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कार्य के अनुभवों को साझा किया।बताया कि प्रधानमंत्री में जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशीलता है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना की पहल अभूतपूर्व है। योजनाओं के माध्यम से देश के हर जनजातीय परिवार को लाभान्वित करने का प्रयास है। उन्होंने आदि कर्मयोगी योजना के माध्यम से जनजातीय जन जागरण के प्रयासों का भी ब्यौरा दिया।
राज्यपाल ने दल के सदस्यों को जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य की प्रमुख बाधा सिकल सेल एनीमिया रोग के संबंध में बताया। उन्होंने रोग के प्रत्यक्ष लक्षणों व्यवहारिक समस्याओं और रोग के चिकित्सकीय कारणों के बारे बताया। मध्यप्रदेश में रोग नियंत्रण, उपचार प्रबंधन प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल रोग उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय मिशन गठित कर प्रयास किए जा रहे हैं। मिशन के क्रियान्वयन में प्रदेश का देश में अग्रणी स्थान है। उन्होंने बताया कि सिकल सेल रोग नियंत्रण में दो पहलू बहुत महत्वपूर्ण है।
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की
देलही : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और राज्य में मौसम पूर्वानुमान और आपदा तैयारी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान हिमाचल प्रदेश में डॉप्लर मौसम रडार स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। इससे क्षेत्र में मौसम के पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनियों की सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हाल ही में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के मद्देनजर, मुख्यमंत्री ने राज्य भर में अतिरिक्त डॉप्लर रडार और स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) स्थापित करने का अनुरोध किया। इससे प्रत्येक जिले, विशेष रूप से आपदा-प्रवण क्षेत्रों में मौसम सम्बंधी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से तैयारी सुनिश्चित की जा सकेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना करते हुए दोहराया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और आपदा न्यूनीकरण की दिशा में सभी राज्यों के प्रयासों में सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय देश के मौसम विज्ञान नेटवर्क का विस्तार करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। विशेष रूप से पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में जनता और स्थानीय अधिकारियों तक महत्वपूर्ण मौसम सम्बंधी जानकारी का समय पर प्रसार सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के शासन दर्शन का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि केंद्र सरकार ने 2014 से ही सहकारी संघवाद की भावना को निरंतर बनाए रखा है और क्षेत्र तथा राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना प्रत्येक राज्य के लिए निष्पक्ष और समतापूर्ण सहयोग सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण राज्यों की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाना रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय प्रशासन उभरती चुनौतियों का तेज़ी से और प्रभावी ढंग से सामना करने योग्य बनाना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि डॉप्लर रडार और एडब्ल्यूएस जैसे उन्नत मौसम विज्ञान उपकरण न केवल आपदा तैयारियों में, बल्कि कृषि, जलविद्युत और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों को कवर करने और जन सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस बुनियादी ढांचे के विस्तार में पूर्ण केंद्रीय सहायता का आश्वासन दिया।
इस बैठक में, पहाड़ी राज्य में विकास टिकाऊ और जलवायु जोखिमों के प्रति लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन के वैज्ञानिक ढांचे को मज़बूत करने की साझा प्रतिबद्धता उभरकर समाने आई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मौसम विभाग और राज्य के अधिकारियों के बीच घनिष्ठ तालमेल से हिमाचल प्रदेश की चरम मौसम सम्बंधी घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता और बढ़ेगी।
खातेगांव जल प्रदाय परियोजना का कार्य तेजी से जारी
भोपाल : देवास जिले की खातेगांव जल प्रदाय परियोजना का कार्य एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से तेजी से किया जा रहा है। परियोजना के तहत नर्मदा नदी से जल लेकर 7.9 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र में शुद्ध किया जाएगा। वर्तमान में 4.75 एमएलडी क्षमता का नया जल शोधन संयंत्र बनाया जा रहा है, जबकि 3.75 एमएलडी क्षमता का संयंत्र पहले से ही कार्य कर रहा है। जल संग्रहण के लिए 1000 किलोलीटर क्षमता का नया ओवरहेड टैंक बनाया जा रहा है। साथ ही एक मौजूदा ओवरहेड टैंक का उपयोग भी किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत कुल 6 हजार 300 घरों में नल कनेक्शन दिए जाने का कार्यक्रम बनाया गया है, इनमें से अब तक 3 हजार 526 घरों को जल प्रदाय नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है।
इस योजना से खातेगांव की लगभग 18 हजार से अधिक की आबादी को शुद्ध पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। परियोजना की कुल लागत करीब 33 करोड़ 21 लाख रुपये है और कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा तथा नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उल्लेखनीय है कि कार्य के अंतर्गत नर्मदा नदी पर निर्माणाधीन इंटेक वेल का कार्य भी पंप के फ्लोर लेवल तक पूर्ण होकर एपोर्च ब्रिज का कार्य जारी है। वहीं खातेगॉव नगर परिषद के पुराने ट्रेंचिंग ग्राउंड पर जल शोधन संयंत्र के विभिन्न घटकों का निर्माण भी तेज गति से जारी है। नेमावर इनटेक वेल से खातेगॉव तक रॉ वॉटर पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी शीघ्र प्रारंभ किया जा रहा है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की उज्जैन इकाई के अंतर्गत यह कार्य किया जा रहा है। कंपनी द्वारा कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यह परियोजना लंबे समय तक जनहित में उपयोगी सिद्ध हो सके। परियोजना की खास बात यह है कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जा रहे हैं और शीघ्र ही खातेगांव को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
साइबर अपराध से लड़ाई पुलिस के साथ पूरे समाज की है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'रन फॉर साइबर अवेयरनेस' जागरूकता अभियान के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस सहित सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, पूरे समाज की है। तकनीक और कानून अपने स्थान पर हैं, पर सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। जब नागरिक जागरूक होगा, तभी राष्ट्र सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने डिजिटल युग की सबसे जरूरी पहल को जन-आंदोलन का रूप दिया है। हम जिस रफ्तार से डिजिटल रूप से मजबूत हुए हैं उसी रफ्तार से नई परेशानियां और खतरे सिर उठाने लगे हैं। जिस तकनीक ने हमें जोड़ा है उसी तकनीक ने अपराधियों को नए हथियार भी दिए हैं और आज ठगी के नए-नए तरीके आ गए हैं। डिजिटल अरेस्ट, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी फॉड, ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी और फेक इन्वेस्टमेंट लिंक जैसे अपराध बढ़ते जा रहे हैं। ये हमारे समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं। 'रन फॉर साइबर अवेयरनेस' डिजिटल युग में नागरिक सुरक्षा का कर्तव्य निभा रही है। साइबर सिपाही, जिम्मेदारी, सुरक्षा और जागरूकता की दौड़ के लिए एकजुट हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर सुरक्षा और जागरूकता के लिए आयोजित रन फॉर साइबर अवेयरनेस के प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रन के लिए एकत्र प्रतिभागियों को अटल पथ स्थित प्लेटिनम प्लाजा से झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रन अटल पथ से एपेक्स बैंक तिराहा होते हुए टी.टी. नगर स्टेडियम पर पूर्ण हुई। इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर पुलिस बैंड की धुन के साथ सलामी दी गई। पुलिस महानिदेशक तथा अन्य पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
राजभवन को लोक कल्याण का केन्द्र बनाया : राज्यपाल पटेल
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल से गोवा के सूचना एवं प्रचार विभाग का प्रतिनिधि मंडल बुधवार को राजभवन में मिला। निदेशक सूचना एवं प्रचार दीपक बांडेकर के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल मध्यप्रदेश के पांच दिवसीय प्रवास के दौरान राजभवन आया था।राज्यपाल पटेल का निदेशक सूचना एवं प्रचार ने गोवा का पारंपरिक परिधान पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया और दल के सदस्यों का परिचय कराया।इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दल के साथ चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंशा-अनुसार उन्होंने राजभवन को लोक कल्याण का केन्द्र बनाया है। प्रदेश के दूरस्थ पिछड़े और वंचित क्षेत्रों के साथ जीवंत संवाद कायम किया है। कार्यकाल के पहले दो वर्षों में ही प्रदेश के सभी जिलों का भ्रमण किया है। वंचितों के साथ आत्मीयता के सूत्र कायम किए है। वे प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के घर पर परिजनों के साथ सह भोज करते है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सजग करने की मंशा से पूर्व में पांच गांवों के भ्रमण का कार्यक्रम देते हैं। अंतिम क्षण में किसी एक गांव का भ्रमण कर सम्पर्क और संवाद के द्वारा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश के वनों, दर्शनीय स्थलों के संबंध में भी दल को जानकारी दी। प्रदेश के विकास कार्यों और गतिविधियों के बारे में बताया। उन्होंने दल को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कार्य के अनुभवों को साझा किया।बताया कि प्रधानमंत्री में जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशीलता है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना की पहल अभूतपूर्व है। योजनाओं के माध्यम से देश के हर जनजातीय परिवार को लाभान्वित करने का प्रयास है। उन्होंने आदि कर्मयोगी योजना के माध्यम से जनजातीय जन जागरण के प्रयासों का भी ब्यौरा दिया।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दल के सदस्यों को जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य की प्रमुख बाधा सिकल सेल एनीमिया रोग के संबंध में बताया। उन्होंने रोग के प्रत्यक्ष लक्षणों व्यवहारिक समस्याओं और रोग के चिकित्सकीय कारणों के बारे बताया। मध्यप्रदेश में रोग नियंत्रण, उपचार प्रबंधन प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल रोग उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय मिशन गठित कर प्रयास किए जा रहे हैं। मिशन के क्रियान्वयन में प्रदेश का देश में अग्रणी स्थान है। उन्होंने बताया कि सिकल सेल रोग नियंत्रण में दो पहलू बहुत महत्वपूर्ण है। पहला जेनेटिक काउंसलिंग, रोगी और वाहक युवक-युवती आपस में विवाह नहीं करें। दूसरा स्क्रीनिंग, सामान्य रोग वाहक और रोगी की पहचान करना है। राज्य ने इस दिशा में अग्रणी रहकर कार्य किया है। अनुमानतः 01 करोड़ 90 लाख की जनजातीय आबादी में से 01 करोड़ 23 लाख से अधिक की स्क्रीनिंग कर ली गई है। जेनेटिक काउंसलिंग के लिए 01 करोड़ से अधिक डिजिटल जेनेटिक काउंसिल कार्ड वितरित किए जा चुके है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं 01 करोड़ वॉ कार्ड वितरित कर प्रदेश के प्रयासों का अनुसमर्थन किया है। राज्यपाल पटेल ने दल के प्रतिनिधियों से अपेक्षा की है कि वह जनजातीय समुदाय में स्वास्थ्य, शिक्षा के प्रति जन जागरण के प्रयासों को प्राथमिकता प्रदान करेंगे। विकास का वातावरण निर्मित करने में सक्रिय योगदान देंगे।
प्रतिनिधि दल पांच दिवसीय प्रवास पर मध्यप्रदेश आया है। दल इंदौर, उज्जैन और भोपाल में जनसंपर्क, मीडिया हाऊसेस के साथ चर्चा करेगा। उनकी कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा। इन स्थानों के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भ्रमण भी करेगा।राजभवन के वैंक्वेट हॉल में आयोजित बैठक में सूचना अधिकारी, डीआईपी, ऑल्विन एक्स. परेरा, संपादक, द नवहिंद टाइम्स, विजय डी.सूजा, संपादक, तरूण भारत, सागर जावड़ेकर, संपादक, लोकमत, सदगुरु पाटिल, गोयनकारपोन्न, सूरज नांद्रेकर, संपादक, नवप्रभा, परेश प्रभु, संपादक, आरडीएक्स मीडिया राजन केरकर, इन गोवा संपादक, अनिल लाड, सूचना सहायक, डीआईपी, सिद्धेश सामंत,फोटोग्राफर, डीआईपी, चंदू कोरगांवकर और राज्यपाल के प्रेस अधिकारी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री 30-31 अक्टूबर को गुजरात का दौरा करेंगे
देलही : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30-31 अक्टूबर को गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 30 अक्टूबर को, प्रधानमंत्री केवड़िया के एकता नगर जाएंगे और शाम लगभग 5:15 बजे वहां ई-बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। शाम लगभग 6:30 बजे, वे एकता नगर में 1,140 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
31 अक्टूबर को सुबह लगभग 8 बजे, प्रधानमंत्री स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का आयोजन होगा। बाद में, करीब 10:45 बजे, वे ‘आरंभ 7.0’ में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत करेंगे।
प्रधानमंत्री एकता नगर में विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य इस क्षेत्र में पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना, सुगम्यता में सुधार लाना और सतत विकास पहलों को बढ़ावा देना है। कुल 1,140 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली ये परियोजनाएं दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के आसपास के क्षेत्र में इको-टूरिज्म, ग्रीन मोबिलिटी, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और आदिवासी विकास को बढ़ावा देने के सरकार के विजन को दर्शाती हैं।
जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा उनमें राजपीपला में बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय; गरुड़ेश्वर में आतिथ्य जिला (चरण-1); वामन वृक्ष वाटिका; सतपुड़ा सुरक्षा दीवार; ई-बस चार्जिंग डिपो और 25 इलेक्ट्रिक बसें; नर्मदा घाट विस्तार; कौशल्या पथ; एकता द्वार से श्रेष्ठ भारत भवन (चरण-2) तक पैदल मार्ग, स्मार्ट बस स्टॉप (चरण-2), डैम रिप्लिका फाउंटेन, जीएसईसी क्वार्टर आदि शामिल हैं।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री भारतीय शाही राज्य संग्रहालय; वीर बालक उद्यान; खेल परिसर; वर्षा वन परियोजना; शूलपनेश्वर घाट के पास जेटी विकास; स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर ट्रैवलेटर सहित विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।
प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के दौरान सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 150 रुपये मूल्य का एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी करेंगे।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लेंगे और सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। वे एकता दिवस की शपथ दिलाएंगे और एकता दिवस परेड का अवलोकन करेंगे।
परेड में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के साथ-साथ विभिन्न राज्य पुलिस बलों की टुकड़ियां शामिल होंगी। इस वर्ष के मुख्य आकर्षणों में विशेष रूप से रामपुर हाउंड और मुधोल हाउंड जैसे भारतीय नस्ल के स्वानों से युक्त बीएसएफ का मार्चिंग दस्ता, गुजरात पुलिस का घुड़सवार दस्ता, असम पुलिस का मोटरसाइकिल डेयरडेविल शो और बीएसएफ का ऊंट दस्ता तथा ऊंट पर सवार बैंड शामिल हैं।
परेड में सीआरपीएफ के पांच शौर्य चक्र विजेताओं और बीएसएफ के सोलह वीरता पदक विजेताओं को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने झारखंड में नक्सल-विरोधी अभियानों और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों में असाधारण साहस का परिचय दिया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बीएसएफ कर्मियों की वीरता के लिए भी उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में एनएसजी, एनडीआरएफ, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, अंडमान- निकोबार द्वीप समूह, मणिपुर, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पुडुचेरी की दस झांकियां शामिल होंगी, जो 'अनेकता में एकता' विषय पर आधारित होंगी। 900 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की समृद्धि और विविधता को दर्शाते हुए भारत के शास्त्रीय नृत्यों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का विशेष महत्व है, क्योंकि राष्ट्र सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है।
प्रधानमंत्री ‘आरंभ 7.0’ के समापन पर 100वें फाउंडेशन कोर्स के प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे। सातवें ‘आरंभ’ को "शासन की पुनर्कल्पना" विषय पर आयोजित किया गया है। इस 100वें फाउंडेशन कोर्स में भारत की 16 सिविल सेवाओं और भूटान की 3 सिविल सेवाओं के 660 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल होंगे।
जयपुर ग्रामीण में हाईटेंशन लाइन से झुलसी मजदूरों की बस, तीन की मौत, दस गंभीर
जयपुर, जयपुर ग्रामीण जिले के मनोहरपुर क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक भयावह सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से मजदूरी के लिए आए लोगों को लेकर जा रही एक प्राइवेट स्लीपर बस अचानक हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गई। हादसे के बाद बस में भीषण आग लग गई, जिसमें तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दस अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
प्रकृति के प्रति आस्था ही हमें जीवन का सच्चा अर्थ सिखाती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति के प्रति आस्था ही हमें जीवन का सच्चा अर्थ सिखाती है। भारतीय संस्कृति ने सदैव प्रकृति के साथ सामन्जस्य से जीने की परम्परा अपनाई है। दुनिया के कई देश प्रकृति का दोहन कर रहे हैं पर भारत ने सदियों से प्रकृति का पोषण किया है। उपभोग प्रधान जीवन शैली वर्तमान के जलवायु संकट को बढ़ाती है जबकि उपयोग से पहले संरक्षण की समझ और भोग से पहले योग का संतुलन ही भारतीय संस्कृति का सार है। भोपाल प्रकृति और प्रगति का अनूठा संगम है। प्राकृतिक सुंदरता और जैव-विविधता सहेजे इस सुंदर शहर में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कार्यशाला का आयोजन शहर की विशेषता के अनुरूप है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण और जीवन शैली-जलवायु परिवर्तन और सतत विकास वैचारिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य नीति आयोग, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और ऐप्को के संयुक्त तत्वावधान में मानव संग्रहालय में आयोजित संगोष्ठी का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। नर्मदा समग्र, सिकोईडिकोन, पैरवी और राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, कार्यक्रम के सह आयोजक हैं। जलवायु परिवर्तन के समाधान में राज्यों की भूमिका पर विचार विमर्श और व्यक्ति-समाज एवं सरकारों की सहभागिता से सतत विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य है। उल्लेखनीय है कि जल, जंगल, जमीन, जैव विविधता और मानव जीवन के पहलुओं को प्रभावित कर रहे जलवायु संकट पर ब्राजील में नवंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन होगा। वैचारिक संगोष्ठी में प्राप्त सुझाव और विचार, ब्राजील के सम्मेलन में साझा किए जाएंगे। मध्यप्रदेश, इस चर्चा को आरंभ करने वाला भारत का पहला राज्य है। लिविंग द राइट वे की थीम पर आधारित संगोष्ठी में पर्यावरण और जीवन शैली, जलवायु और सतत विकास के बीच संबंधों का सुदृढ़ीकरण और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्यों की भूमिका जैसे विषयों पर विचार विमर्श हो रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण जीवन शैली का हिस्सा बनना चाहिए। राज्य सरकार प्रदेश में ग्रीन कव्हरेज बढ़ाने, वेटलैंड संरक्षण, जलस्रोतों के पुनर्जीवन और हरित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित हो रही हैं। प्रदेश के 32 लाख किसानों को सोलर पम्प उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की यह संगोष्ठी मानवता के अस्तित्व, धरती के संतुलन और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा है। हमें स्थानीय सोच को वैश्विक समाधान से जोड़ने और विकास तथा पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, शासकीय अधिकारी और संचार माध्यमों से जुड़े प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।