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विज्ञापन होर्डिंग के गिरने से दो की मौत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
नईदिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है जिसमें बताया गया है कि गुजरात के अहमदाबाद के बोपल इलाके में एक सात मंजिला इमारत की छत से एक विज्ञापन होर्डिंग गिरने से दो मज़दूरों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना 27 सितंबर, 2025 को हुई थी ।
आयोग ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट की सामग्री, यदि सत्य है, तो मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मुद्दा उठाती है। इसलिए, आयोग ने गुजरात सरकार के मुख्य सचिव और अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
29 सितंबर, 2025 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार , लगभग 15 मज़दूर एक आवासीय इमारत पर लगभग 80 फीट ऊपर एक होर्डिंग लगा रहे थे, तभी वह गिर गई। नीचे गिरे दस मज़दूरों में से दो की मौत हो गई, एक गंभीर रूप से घायल हो गया और सात अन्य को मामूली चोटें आईं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जनजातीय योजनाओं के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता बनें सहभागी
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि संचालित जनजातीय योजनाओं के जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन के लिए सरकार के साथ जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी सक्रिय सहभागिता करें। जनजातीय समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र और प्रदेश सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों को प्राथमिकता के साथ लाभान्वित कर रही है। पीएम जन-मन योजना में बैगा,सहरिया एवं भारिया विशेष पिछड़ी जनजातीय बसाहटों में पक्का आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया है।
राज्यपाल पटेल रविवार को कटनी ज़िले के स्लीमनाबाद में आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आदि साथी और आदि सहयोगियों से ग्रामीण जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने ग्राम हरदुआ में आदि सेवा केन्द्र का शुभारंभ किया और यहां जनजातीय बच्चों को पोलियो की दवा भी पिलाई। राज्यपाल श्री पटेल ने ग्राम हरदुआ में प्रधानमंत्री आवास हितग्राही मीरा बाई के घर पहुंच कर आत्मीय चर्चा की।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान में केन्द्र सरकार ने 80 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया है। इसमें 18 विभागों की 25 बिंदुओं को शामिल किया गया है। सरकार वंचित जनजातियों के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण की दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आम जनों को शासकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ सिकल सेल, टी.बी. आदि रोगों के कारण, लक्षण और उपाय के प्रति भी जागरूक किया जाना चाहिए। लोगों को सिकल सेल के सामान्य लक्षण बचाव आदि के बारे में बतायें। उन्होंने कहा कि जनजातीय परिवार शादी के पूर्व सिकल जेनेटिक कार्ड का मिलान जरूर करें। उन्होंने पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत दी जा रही शासकीय सहायता और सुविधाओं की विस्तार से चर्चा की।
राज्यपाल ने कहा कि ‘आदि सेवा केंद्र’ सरकार की योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने में का सेतु है। आदि सेवा केन्द्र में सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक जनजातीय समुदाय के लोगों की समस्यायें सुनीं जायेंगी। हर गांव में आदि सेवा केंद्र के प्रशिक्षित कर्मचारी जनजाति वर्ग के लोगों को सरकार की योजनाओं की जानकारी देगें और लाभ भी दिलायें। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर घर की बहुयें भी कमाने लग गई हैं। अब बेटे और बहु दोनों के कमाने से घर की आमदनी में वृद्धि हुई है। सरकार द्वारा लाड़ली बहना और नि:शुल्क अनाज योजना का भी लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को ज़रूर पढ़ाये। सरकार प्रारंभिक शिक्षा से लेकर विदेश तक की शिक्षा हेतु सुविधा और सहायता देती है। जनसंवाद में सिकल सेल पीड़ितों ने अनुभव साझा किये।
ग्राम प्रवास के दौरान राज्यपाल पटेल ने महात्मा गांधी और भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर हितलाभ का वितरण किया। टीबी मरीज को पोषण आहार किट के अलावा हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किये। उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी योजना, जाति प्रमाण पत्र और ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत किसान उत्पादक स्व-सहायता समूहों को ऋण एवं अनुदान राशि का चेक प्रदान किये। राज्यपाल ने इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
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भगवान श्रीराम ने संबंधों को जाति, वर्ग या रूप से नहीं, हृदय की शुद्धता से जोड़ा : डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के चरित्र 'रामायण' के रूप में मानवता को अनुपम उपहार दिया है। महार्षि वाल्मीकि की वाणी से जो रामायण निकली वह केवल ग्रंथ नहीं भारत की आत्मा है। उनकी रामायण में समरसता केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीता-जागता संदेश है। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन के माध्यम से दिखाया कि ईश्वर की दृष्टि में सब समान हैं। भगवान श्रीराम ने निषादराज को मित्र बनाया, शबरी माता के झूठे बेर प्रेम से खाए, श्री हनुमान और वानर सेना को परिवार की तरह गले लगाया और धर्म युद्ध में सबको साथ लेकर चले। मुख्यमंत्री ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का आचरण हमें सिखाता है कि सच्ची समरसता वही है, जहां सबमें परमात्मा का अंश देखा जाए। उनका जीवन इसी भावना का मूर्त रूप है। भगवान श्रीराम के चरित्र को शब्दों में पिरोने वाले आदि कवि महर्षि वाल्मीकि अजर-अमर रहेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती प्रकटोत्सव के अवसर पर भोपाल के मानस भवन में ‘समरसता सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्यसभा सांसद एवं पीठाधीश्वर श्री क्षेत्र वाल्मीकि धाम, उज्जैन बालयोगी उमेशनाथ महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का विधिवत् शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि समाज के सतत् विकास की पहली जरूरत सामाजिक समरसता है, जो साहचर्य और भाईचारे की भावना से जन्म लेती है। समरसता केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। जब समाज आपसी सौहार्द, प्रेम और अपनत्व की भावना से मिल-जुलकर चलता है, तभी कोई राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सच्ची समरसता वहीं है, जहां सबमें परमात्मा का अंश देखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति को अनादिकाल से अविरल करने में महर्षि वाल्मीकि जी के योगदान को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने रामायण जैसी अमर कृति के माध्यम से न केवल मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का चित्रण किया, बल्कि उस समय की सामाजिक व्यवस्था और मानवीय मूल्यों को भी प्रतिबिंबित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम का उलटा नाम निरंतर जपते-जपते वाल्मीकि महर्षि हो गए। डाकू रत्नाकर से ज्ञानी वाल्मीकि बनने तक की उनकी संघर्ष यात्रा तपस्या और आत्मसुधार की मिसाल है। महर्षि वाल्मीकि ने केवल श्रीराम का चरित्र नहीं लिखा, बल्कि उन्होंने मानवता का लेखन किया। रामायण सिर्फ एक ग्रंथ नहीं, सेवा, समरसता और करुणा का उत्तम उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने पिता-पुत्र संबंधों से लेकर अनुसूईया माता, शबरी माता, निषादराज, हनुमान, बाली-सुग्रीव जैसे चरित्रों के माध्यम से समाज में करुणा, निष्ठा, सेवा, सामाजिक समरसता, समानता और आत्मीयता का संदेश मंत्र दिया।
'वन रेंजरों के सम्मान समारोह' में शामिल हुए केंद्रीय राज्य मंत्री
नईदिल्ली केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 11 अक्टूबर, 2025 को अबू धाबी में कहा, "मेरे लिए हमारे उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं के प्रयासों को मान्यता देने वाले पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल होना सम्मान की बात है, जिन्होंने वनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है।" वह आईयूसीएन विश्व संरक्षण कांग्रेस 2025 के अवसर पर आयोजित 'वन रेंजरों के सम्मान समारोह' में भाग ले रहे थे। उन्होंने 'गार्डियंस ऑफ द वाइल्ड' रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि ये वे लोग हैं जो सुनिश्चित करते हैं कि देश की समृद्ध वन्यजीव विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहे।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, सिंह ने कहा कि दुनिया भर के देशों ने हमारे वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए व्यापक कानून और नीतिगत ढांचे बनाए हैं। लेकिन इन नीतियों, नियमों और विनियमों का सही मायने में पालन सुनिश्चित करने के लिए ये वन रेंजर और सहायक कर्मचारी ही काम करते हैं। उनके काम में गश्त, वन्यजीव गणना, जंगल की आग बुझाने आदि सहित कई तरह की गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें शिकारियों और लकड़ी तस्करों से जान का भारी खतरा रहता है। उनमें से कई ने वनों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति भी दी है।
केंद्रीय मंत्री ने वन रक्षकों और सहायक कर्मचारियों के समर्पण की सराहना की और आईयूसीएन तथा डब्ल्यूटीआई को यह सम्मान देने और उनकी बहुमूल्य सेवा को मान्यता देने के लिए बधाई दी। श्री सिंह ने अपने बचपन से लेकर अब तक वन कर्मचारियों के साथ हुई विभिन्न मुलाकातों का जिक्र किया और हमारे वनों और वन्यजीवों के बारे में उनके द्वारा साझा किए गए स्वदेशी ज्ञान और पारंपरिक ज्ञान की सराहना की। सरकारों को अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के पास मौजूद इस ज्ञान संपदा को मान्यता देनी चाहिए और उसका दस्तावेजीकरण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत में, हमारे वनों की रक्षा करने वाले पुरुषों और महिलाओं को वनरक्षक और वनरक्षिका जैसे सम्मानों से सम्मानित किया जाता है।
सिंह ने इस अवसर पर अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों को उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक सभी सरकारी सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत सरकार नियमित रूप से क्षमता निर्माण की पहल करती है, ड्रोन के माध्यम से वन निगरानी, उपग्रह ट्रैकिंग और जानवरों पर रेडियो कॉलर लगाने सहित तकनीकी सहायता का उपयोग करती है। उन्होंने अंत में कहा कि ये कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारी नवीनतम तकनीक से सुसज्जित हों और न केवल वनों और वन्यजीवों को अवैध गतिविधियों से बचाने, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्षों को रोकने के लिए भी हमेशा तत्पर रहें।
मध्यप्रदेश में प्रति वर्ष होगा मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट - मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पर्यटन क्षेत्र को आगे बढ़ाया है। उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। मध्यप्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए नीतियां निर्धारित की गई हैं। ट्रैवल मार्ट पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। इस तरह का ट्रैवल मार्ट प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तीन दिवसीय मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ट्रैवल मार्ट में 3 हजार 665 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जो इस आयोजन के पहले ही दिन की सफलता का प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह ट्रैवल मार्ट मध्यप्रदेश के पर्यटन की विशेषताओं को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का जीवंत प्रमाण हैं। ट्रैवल मार्ट में 27 देशों की भागीदारी इसे वैश्विक आयोजन का दर्जा दे रही है। पर्यटन के माध्यम से विकास का प्रकाश प्रदेश के हर कोने तक पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव की अभिनव श्रृंखला प्रारंभ की गई जो उद्योग और रोजगार वर्ष में प्रत्येक संभाग के पश्चात सेक्टर वार आयोजन में परिवर्तित हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में एक वर्ष में डॉ. वाकणकर वन्य प्राणी अभ्यारण्य और माधव नेशनल पार्क प्रारंभ हुए हैं। माण्डव में रानी रूपमती और बाजबहादुर के प्रेम के प्रतीक स्मारक हैं। उज्जैन में बाबा महाकाल के साथ अनेक देवी-देवताओं की जीवंत प्रतिमाएं हैं। प्रदेश में भीमबेटका, सांची और खजुराहो जैसी विश्व धरोहर हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मार्ट से युवाओं के सपनों को नई उड़ान मिलेगी। मध्यप्रदेश में प्लेन की तरह हेलीकॉप्टर सर्विस भी पर्यटन क्षेत्र में प्रारंभ होगी। नए अनुबंधों से पुरातत्व और पर्यटन विभाग मिलकर कार्य करेंगे। रायसेन के किले के भ्रमण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का सहयोग लिया जाएगा, क्योंकि अनेक स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भारत सरकार के अधीन हैं।
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रदेश की अनेक पर्यटन विशेषताएं बताई। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वन्य जीवन, इतिहास पुरातत्व के साथ पर्यटन सुविधा बढ़ाई जा रही हैं। प्रदेश में सशक्त अधोसंरचना है। प्रदेश में आठ एयरपोर्ट हैं। इसके साथ ही 230 हेलीपैड भी हैं। कम समय में अधिक से अधिक स्थानों पर पहुंचा जा सकता है। विभिन्न धार्मिक पर्यटन के स्थानों में सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। होटल व्यवसाय और रहवास व्यवस्थाओं को सशक्त बनाया जा रहा है। डेढ़ वर्ष में पर्यटन क्षेत्र में तेजी से कार्य हुआ है। हेल्थ टूरिज्म के बारे में भी मध्य प्रदेश सरकार गंभीर है। प्रदेश में 13 मेडिकल कॉलेज लोकार्पित हुए हैं। राज्य के नागरिकों के साथ अन्य स्थानों के लोग भी उपचार के लिए मध्य प्रदेश आया करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के गौरवशाली अतीत से भी सबको परिचित करवाने के लिए ट्रेवल मार्ट का आयोजन हर वर्ष होगा। इसका आयोजन प्रत्येक वर्ष 11 से 13 अक्टूबर को भोपाल में इसी स्थान पर किया जाएगा। यह आयोजन हमे और आपके हर बार मिलने का स्थल बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार 30 प्रतिशत अनुदान उद्योगों को दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में एकमात्र राज्य मध्यप्रदेश है जो आयुष्मान कार्ड के माध्यम से एयर एंबुलेंस की सुविधा दे रहा है। हेल्थ टूरिज्म के सेक्टर में निवेशको से आगे आने का आव्हान किया।
कृषि विकास में नया अध्याय लिखेगी प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना : डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पी एम धन-धान्य कृषि योजना कृषि विकास के क्षेत्र में नया अध्याय लिखेगी। मुख्यमंत्री डॉ यादव शनिवार को इंदौर से केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा दिल्ली में आयोजित 'अन्नदाताओं का सम्मान, समृद्ध राष्ट्र का निर्माण" कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संबोधित किया और इंदौर में 30 लाख टन क्षमता के अत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण संयंत्र का वर्चुअली शुभारंभ भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इंदौर, ग्वालियर सहित अन्य सहकारी संघों को पैक्स से जोड़े जाने को भी ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को दी गई इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार माना।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर से वर्चुअली श्रवण किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल, विधायकगण मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, मनोज पटेल, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, मध्यप्रदेश दुग्ध महासंघ के एमडी डॉ. संजय गोवानी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
कार्यक्रम के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के किसानों के लिए दो बड़ी योजना - प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्म-निर्भरता मिशन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना देश के कृषि विकास और इससे जुड़े सेक्टर्स में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि देश में अब तक 10 हजार एफपीओ के अंतर्गत 50 लाख किसान सदस्यता ले चुके हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण कृषि मिशन में एक लाख किसानों का प्रमाणन, 4275 मैत्रीय का प्रमाणन, कंप्युटराइजेशन में 10 हजार से अधिक बहुउद्देशीय पैक्स को मंजूरी, डेयरी, मत्यपालन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण जैसे कई प्रकार के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश के इंदौर में 30लाख टन की क्षमता और 79 करोड़ रुपये की लागत वाले आत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण सयंत्र का वर्चुअली शुभारंभ भी किया है। साथ ही प्रदेश के इंदौर और ग्वालियर सहकारी संघों को पैक्स से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को दी गई इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार माना।
भिलाला समाज ने जगाई सामाजिक चेतना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय वर्ग का समग्र कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी कोशिश है कि जनजातीय वर्ग का कोई भी व्यक्ति शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि भिलाला समाज एक साहसी और संस्कारित समाज है, जिसने मां नर्मदा के आशीर्वाद से नशामुक्ति और मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नशा नाश की जड़ है, जो कई पीढ़ियों को बर्बाद कर देता है। समाज की कुरीतियों को खत्म करने का प्रयास एक सामाजिक क्रांति का संकेत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को धार के किला मैदान में जय ओमकार आदिवासी भिलाला समाज संगठन द्वारा आयोजित 12वें प्रांतीय वार्षिक सामाजिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम शुभारंभ किया। सम्मेलन के तहत भिलाला समाज द्वारा युवक-युवती वैवाहिक परिचय सम्मेलन, रोजगार पंजीयन शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, नशामुक्ति जागरूकता शिविर, कैरियर मार्गदर्शन शिविर सहित सामाजिक कुरीतियों के निवारण के लिए जागरुकता शिविर भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीथमपुर थाना (बगदून) के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने धार जिले की भिलाला समाज की जुझारू महिला नेत्री को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान देकर समाज का गौरव बढ़ाया है। राज्य सरकार ने अलीराजपुर का नाम परिवर्तन कर आलीराजपुर कर दिया है। क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना और महाराजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह की जयंती को भव्य रूप से मनाकर हमारी सरकार ने जनजातीय नायकों और परम्पराओं को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का राष्ट्ररक्षा और स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान रहा है। भगोरिया के उल्लास को हमने राज्यस्तरीय पर्व का दर्जा देकर जनजातीय लोक परंपराओं को सम्मानित किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक समाज को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्योग के क्षेत्र में तेज़ी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब भारत माता के लाल हैं, ऐसे में भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। राज्य सरकार ने समाज के वंचित वर्ग को आरक्षण का लाभ दिया है। हमारी सरकार ने सबको विकास की मुख्यधारा में जोड़ने का कार्य किया है।
विक्रम विश्वविद्यालय को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के रूप में नई पहचान मिली है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के स्वर्ण जयंती सभागार में शुक्रवार को विश्वविद्यालय के आधारशिला दिवस के अवसर पर “नवीन नाम पट्टिका अनावरण समारोह” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन केवल एक विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन का नहीं, बल्कि उज्जैन और संपूर्ण मध्यप्रदेश के गौरव के पुनर्जागरण का दिन है। ‘विक्रम विश्वविद्यालय’ अब ‘सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय’ के रूप में नई पहचान लेकर, अपने गौरवशाली इतिहास की नई यात्रा शुरू कर रहा है। यह क्षण हम सभी के लिए गर्व और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन सदैव भारत की सांस्कृतिक राजधानी रही है। यह वह धरा है, जहाँ से ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म और संस्कृति का प्रकाश पूरे विश्व में फैला। यह वही नगरी है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की, जहां। महाकाल का आशीर्वाद हर कण में विद्यमान है और जहां विक्रमादित्य जैसे महान सम्राट ने धर्म, न्याय और ज्ञान की प्रतिष्ठा स्थापित की।
उन्होंने आगे कहा मैं स्वयं इस विश्वविद्यालय का विद्यार्थी रहा हूँ। छात्र जीवन की अनेक स्मृतियां आज ताज़ा हो गई हैं। यह संस्था केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि मेरे जीवन की प्रेरणा रही है। इस विश्वविद्यालय ने मुझे सामाजिक सेवा, नेतृत्व और सार्वजनिक जीवन का मार्ग दिखाया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तन केवल शब्दों का बदलाव नहीं है बल्कि यह उस पहचान की पुनर्स्थापना भी है जो कभी उज्जैन की धरती की शान हुआ करती थीं। ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का नाम हमारी परंपरा, संस्कृति और राष्ट्र गौरव का प्रतीक है। इस नाम के साथ विश्वविद्यालय नई ऊर्जा, नई सोच और नई दिशा में अग्रसर होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यह विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। 175 से अधिक महाविद्यालयों से संबद्ध यह संस्थान हजारों विद्यार्थियों को ज्ञान का प्रकाश दे रहा है। यह देखकर गर्व होता है कि इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश-विदेश में अपने कार्य से नाम रोशन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं जो वीरता, दान, नीति, और न्याय के प्रतीक होते हैं। विक्रमादित्य न केवल उज्जैन की पहचान थे बल्कि भारत की आत्मा का स्वरूप थे। आज जब यह विश्वविद्यालय उनके नाम से जुड़ रहा है तो यह केवल संस्थान का नहीं बल्कि समूचे प्रदेश का सम्मान है।
प्रगति के क्षेत्र में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जोड़ीदार राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए व्यवस्थाओं को सरल बनाया गया है। प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत इस वर्ष सम्पन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, भोपाल के दौरान 18 नई नीतियां लागू की गईं। सरलीकृत की गई व्यवस्थाओं के कारण मध्यप्रदेश में तेज गति से निवेश आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराष्ट्र के उद्यमियों से मध्यप्रदेश में निवेश का अनुरोध करते हुए कहा कि प्रगति के क्षेत्र में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जोड़ीदार राज्य हैं। अतीत के गौरवशाली पृष्ठ को देखें तो महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश का गहरा संबंध रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुम्बई में "इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज इन पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग एंड वाइट गुड्स इन मध्यप्रदेश" को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि व्यापारियों को नई पॉलिसियों का लाभ दिया जा रहा है। बिजनेस और निवेश को लेकर निरंतर सीसीआई की बैठकें आयोजित की जाती हैं। प्रदेश में संभागीय स्तर पर इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर छोटे शहरों को इंडस्ट्री से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आज इस सत्र के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में ₹19,900 करोड़ रूपए से अधिक के निवेश एवं अन्य सभी सेक्टर्स में ₹54,400 करोड़ रूपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार कुल 74,300 करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्राप्त हुए हैं। कार्यक्रम में सन फार्मा के अध्यक्ष दिलीप सांघवी, सीआईआई के अध्यक्ष नील सी. रहेजा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी), ईसीजीसी सृष्टिराज अम्बष्ठा, हिंडाल्को के प्रबंध निदेशक सतीश पाई, हेत्तिच (Hettich) के प्रबंध निदेशक आंद्रे एकहोल्ट, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी (एमडी एवं सीएफओ), आईपीसीए लैब अजीत कुमार जैन और एफआईईओ के उपाध्यक्ष रविकांत कपूर विशेष रूप से मौजूद थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिवाजी महाराज और प्रदेश के सिंधिया, होल्कर, पवार इतिहास के उस दौर में भारतीय समाज के लिए महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। उज्जैन में बाबा महाकाल की ध्वजा जिस शान से लहराती है, उसके अतीत में शिवाजी महाराज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के मध्य उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में संबंध अधिक सशक्त होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मुंबई में “इन्टरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अर्पोच्यूमनिटीज इन मध्य प्रदेश” कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत की आर्थिक राजधानी में उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ हमारा यह संवाद सत्र अत्यंत सकारात्मक और परिणामोन्मुखी रही। महाराष्ट्र की औद्योगिक विशेषज्ञता और मध्यप्रदेश की ‘अनंत संभावनाएं’ मिलकर देश की प्रगति को नई गति देंगे। हमारा लक्ष्य महाराष्ट्र के निवेशकों को मध्यप्रदेश की विकास यात्रा में एक रणनीतिक भागीदार के रूप में जोड़ना है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज के इस इंटरेक्टिव सत्र का मुख्य उद्देश्य था नर्मदापुरम जिले के मोहासा-बाबई में स्थित, भारत के पहले अत्याधुनिक 'मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन फॉर पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट' के बहुप्रतीक्षित फेज़ 2 में निवेश आकर्षित करना। इस ज़ोन में भूमि आवंटन के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि निकट, 12 अक्टूबर 2025, है, जिससे निवेशकों को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए एक स्पष्ट दिशा मिली। यह हमारी दूसरी मुंबई यात्रा है। विगत वर्ष, निवेशकों से चर्चा के दौरान हमें प्रदेश की नीतियों और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव मिले थे। मुझे यह बताते हुए गर्व है कि हमने उन सुझावों पर गंभीरता से काम किया है और अपनी नई औद्योगिक नीतियों में उन्हें शामिल किया है। हमने अपनी 'उद्योग और रोजगार वर्ष 2025' की प्रतिबद्धता और इस वर्ष लॉन्च की गई 18 नई, प्रगतिशील नीतियों को विस्तार से साझा किया। हमने न केवल जेनेरिक अवसर, बल्कि सेक्टर-स्पेसिफिक, रेडी-टू-इन्वेस्ट प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तुत किए जिनमें नर्मदापुरम का पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, टेक्सटाइल पार्क, आईटी पार्क्स, फ़ूड पार्क्स एवं मेडिकल डिवाइस पार्क प्रमुख हैं।
‘सुजलाम भारत’ के तहत जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय
कार्यक्रम में पद्मश्री फूलबासन बाई यादव, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।
कफ सिरप मामले में बड़ा एक्शन….20 बच्चों की मौत का जिम्मेदार कंपनी मालिक रंगनाथन गिरफ्तार
डेस्क। मध्य प्रदेश पुलिस ने कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जहरीली दवा Coldrif कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। मध्य प्रदेश पुलिस की एसआईटी ने रंगनाथन को चेन्नई गिरफ्तार किया है। कफ सिरप से हुई मौतों के मामले में रंगनाथन की तलाश थी। उस पर इनाम भी घोषित किया गया था। मध्य प्रदेश पुलिस ने चेन्नई पुलिस के सहयोग से रंगनाथन को गिरफ्तार किया।
छिंदवाड़ा पुलिस ने रंगनाथन की गिरफ्तारी पर 20000 का इनाम घोषित किया था। पुलिस उप महानिरीक्षक छिन्दवाडा रेंज राकेश कुमार सिंह ने दवा निर्माता कंपनी के फरार आरोपियों की सूचना देने वाले को 20 हजार रुपये का इनाम देने का ऐलान किया था। सूचना देनेवाले का नाम गोपनीय रखने की बात कही गई थी।
मध्य प्रदेश पुलिस की सात सदस्यीय SIT ने कंपनी के चेन्नई स्थित रजिस्टर्ड ऑफिस और कांचीपुरम में स्थित फैक्टरी में जांच की थी। तमिलनाडु सरकार ने भी मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत से जुड़े प्रतिबंधित कफ सिरप Coldrif का उत्पादन करने वाली एक कंपनी के प्लांट को सील कर दिया है साथ ही कंपनी को दूसरा कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
मध्यप्रदेश में इस जहरीले कफ सिरप के सेवन के बाद कई बच्चों की किडनी खराब हो गई। इलाज के दौरान अब तक कुल 20 बच्चों की मौत हो चुकी है। केरल और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों ने भी इसपर प्रतिबंध लगा दिया है। तमिलनाडु सरकार ने एक अक्टूबर से ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगाते हुए दवा के स्टॉक को बाजार से हटाने का आदेश दिया था।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पहली जिम्मेदारी कलेक्टर्स की : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कलेक्टर्स जिले के प्रशासनिक मुखिया होने के साथ-साथ जिला दण्डाधिकारी भी हैं, इसीलिए जिले में कानून व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करने की पहली जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में खुद का प्रभावी सूचना तंत्र विकसित करें, ताकि किसी भी घटना या दुर्घटना की सूचना तत्काल प्राप्त हो और समय पर नियंत्रण किया जा सके। उन्होंने कहा कि किसी घटना या दुर्घटना की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचे। इससे घटना या दुर्घटना और अधिक बड़ा रूप नहीं लेंगी।
जिला अधिकारियों के मौके पर पहुंचने से स्थिति नियंत्रण में बहुत मदद मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर एवं एसपी दोनों में उच्च कोटि का तालमेल होना चाहिए। दोनों संयुक्त रूप से कार्ययोजना बनाकर जिले की कानून व्यवस्था की निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था के दृष्टिगत ऐसी संवेदनशील बस्तियां जहां सड़कें सकरी हैं, तथा फोर्स मूवमेंट में समस्या आती है, सभी कलेक्टर्स ऐसे स्पॉट्स/जगहों को चिन्हित कर वहां का जोनल प्लान स्थानीय नगरीय निकायों के सहयोग से अगले तीन माह में तैयार कर लें, ताकि आवागमन सुगम हो और आवश्यकता पड़ने पर फोर्स मूवमेंट में समस्या न आए।
उन्होंने मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए ठोस रणनीति बनाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस-2025 के आठवें एवं अंतिम सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सेंसिटिव पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि जनता में पुलिस के प्रति विश्वास भाव होना चाहिए। पुलिस अपनी साख बनाएं और अपराधों को रोकने में तत्परतापूर्वक कार्यवाही करें। प्रदेश के सभी कलेक्टर्स-एसपी की संयुक्त कॉन्फ्रेंस का विषय “कानून एवं व्यवस्था की सुनिश्चितता” था। मुख्य सचिव अनुराग जैन की मौजूदगी में हुए इस अंतिम सत्र का संचालन अपर मुख्य सचिव गृह विभाग शिवशेखर शुक्ला ने किया। सत्र में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि मध्यप्रदेश को मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त करने के दृष्टिगत 6 माहों में बालाघाट, मण्डला और डिण्डोरी जिलों के कलेक्टर्स और एसपी लक्ष्य केंद्रित कर यह काम पूरा करें। उन्होंने कहा कि नक्सली घटनाओं को समाप्त करने के लिए हर संभव कार्यवाही करें। नक्सली या तो सरेंडर करें अन्यथा उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि बालाघाट जिले में नक्सली गतिविधियों में बेहद कमी आने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बालाघाट को अति नक्सलवाद प्रभावित जिले की श्रेणी से डाउनग्रेड कर सामान्य श्रेणी में कर दिया है।
राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति (एनएसक्यूसी) की 44वीं बैठक का नई दिल्ली में आयोजन
नईदिल्ली। राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) के तत्वावधान में कल राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति (एनएसक्यूसी) की 44वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की सचिव एवं एनसीवीईटी की अध्यक्ष सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने की।
इस सत्र में अधिनिर्णय करने वाली वाली संस्थाओं (एबीएस), उद्योग, केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख हितधारकों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे (एनएसक्यूएफ) के साथ कौशल योग्यता के अनुरूप संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर लाया गया।
स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ऑटोमोटिव, दूरसंचार, आईटी-आईटीईएस, खुदरा, रसद, पर्यावरण और आतिथ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुल 210 कौशल योग्यताएं मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गईं। इन योग्यताओं का उद्देश्य भारत में व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और सुगमता को बढ़ाना है।
एनएसक्यूसी राष्ट्रीय कौशल विकास इको सिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सुनिश्चित करता है कि योग्यताएं एनएसक्यूएफ के अनुरूप हों, जो एक राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त गुणवत्ता आश्वासन ढांचा है और यह बढ़ती जटिलता और योग्यता के स्तरों के अनुसार योग्यताओं को संरचित करता है। यह संरेखण शिक्षार्थियों के लिए ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज गतिशीलता को सक्षम बनाते हुए सुनिश्चित करता है कि कौशल विकास उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बना रहे।
व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के राष्ट्रीय नियामक के रूप में, एनसीवीईटी, एनएसक्यूसी के माध्यम से एनएसक्यूएफ संरेखण और अनुमोदन प्रक्रिया की देखरेख करता है। इस समिति में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य कौशल विकास मिशनों, यूजीसी, एआईसीटीई, एनएसडीसी, डीजीटी जैसी नियामक संस्थाओं और प्रमुख उद्योग संघों के प्रतिनिधि शामिल हैं। एनएसक्यूसी के समक्ष प्रस्तुत प्रत्येक योग्यता की एनसीवीईटी द्वारा व्यापक और बहु-हितधारक समीक्षा की जाती है, जिसमें विषय विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद और संबंधित मंत्रालय शामिल होते हैं।
44वीं एनएसक्यूसी बैठक के परिणामों, विशेष रूप से 210 कौशल योग्यताओं के मूल्यांकन से भारत के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करने और राष्ट्रीय तथा वैश्विक उद्योग की मांगों को पूरा करने में सक्षम भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण के सरकार के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की आशा है।
यूपी पुलिस की सख्ती: साढ़े 8 लाख वाहन चेक, 9 हजार से ज्यादा की काली फिल्म हटाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाना है, जो नवरात्रि के दौरान और तेज किया गया। पुलिस ने राज्यव्यापी स्तर पर निगरानी बढ़ाई है, ताकि अपराधी तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके।
अनवर ढेबर को मिली सुप्रीम कोर्ट से 4 दिन की अंतरिम जमानत
रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में जेल में बंद कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से चार दिन की अंतरिम जमानत मिली है। कोर्ट ने यह राहत उनकी मां के गंभीर स्वास्थ्य को देखते हुए दी है।
अनवर ढेबर की मां फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। उनके वकीलों ने कोर्ट से अपील की थी कि उन्हें इस मुश्किल समय में मां के पास रहने की अनुमति दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में व्यक्ति को परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलना चाहिए। जमानत केवल मां की तबीयत को ध्यान में रखकर दी गई है और चार दिन बाद अनवर ढेबर को फिर से जेल लौटना होगा।
भविष्य के युद्ध एल्गोरिदम, ऑटोनॉमस सिस्टम और एआई से लड़े जाएंगेःरक्षा मंत्री
नईदिल्ली। विज्ञान भवन में आयोजित आईडेक्स स्टार्टअप्स के साथ परस्पर संवाद' में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्ध एल्गोरिदम, ऑटोनॉमस सिस्टम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लड़े जाएंगे। ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, क्वांटम कंप्यूटिंग और निर्देशित-ऊर्जा हथियार भविष्य की रूपरेखा तैयार करेंगे। हमने ऑपरेशन सिंदूर में भी ऐसा ही एक प्रदर्शन देखा है,"। उन्होंने नवप्रवर्तकों से विद्यमान समाधानों से आगे सोचने और युद्ध को नई परिभाषा देने वाली प्रोद्योगिकियों का विकास करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "हमें प्रौद्योगिकी में न तो नकलची बनना है और न ही अनुयायी, बल्कि हमें विश्व के लिए सृजक और मानक-निर्धारक बनना है।"
स्वदेशीकरण में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि घरेलू स्रोतों से रक्षा पूंजी अधिग्रहण 2021-22 में 74,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने इस बदलाव को "केवल एक सांख्यिकीय परिवर्तन नहीं, बल्कि निर्भरता से आत्मविश्वास की ओर मानसिकता में बदलाव" बताया। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की सार्वजनिक खरीद नीति के तहत, वार्षिक खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए आरक्षित है और 350 से अधिक वस्तुएं विशेष रूप से उनके लिए निर्धारित की गई हैं। रक्षा मंत्री ने कहा, "रक्षा में भारत की आत्मनिर्भरता एक नारे से आगे बढ़कर एक आंदोलन बन गई है। नीति से व्यवहार तक और नवाचार से प्रभाव तक, यह परिवर्तन हमारे नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और युवा उद्यमियों द्वारा संभव बनाया गया है।"
राजनाथ सिंह ने स्टार्टअप्स को ऊंचे मानक स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में आज 100 से ज़्यादा यूनिकॉर्न हैं, लेकिन रक्षा क्षेत्र में एक भी नहीं है। उन्होंने स्टार्टअप्स से इस स्थिति को बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "भारत का पहला रक्षा यूनिकॉर्न आपके बीच से निकलना चाहिए। यह न केवल आपके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात होगी।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस विजन को दोहराया कि सरकार नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और विचार से लेकर कार्यान्वयन तक हर कदम पर उनके साथ रहेगी।
रक्षा मंत्री ने पिछले वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 23,000 करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात में रिकॉर्ड-तोड़ उपलब्धियों में योगदान देने वाले नवप्रवर्तकों के सामूहिक प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा, "आप एक ऐसे नए भारत के निर्माता हैं जो अपने लिए डिज़ाइन, विकास और उत्पादन में विश्वास रखता है। आपके द्वारा लाई गई ऊर्जा और नवाचार, प्रधानमंत्री के प्रौद्योगिकीय रूप से आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।"