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दिल्ली में भाजपा को बहुमत के रुझान... अब कौन बनेगा CM? जानें संभावित चेहरे
डेस्क। दिल्ली विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। अगर नतीजे भी ऐसे ही रहते हैं और भाजपा सरकार बनाने में सफल होती है, तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
भाजपा आमतौर पर अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर अंतिम समय में चौंकाने वाले फैसले लेती रही है। क्या दिल्ली में भी ऐसा ही होगा? फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में कुछ नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं—प्रवेश वर्मा, रमेश बिधूड़ी, दुष्यंत गौतम और विजेंदर गुप्ता।
प्रवेश वर्माः प्रवेश वर्मा का नाम सबसे चर्चित इसलिए है क्योंकि अगर वह चुनाव जीतते हैं, तो आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल को हराकर आएंगे। केजरीवाल को मात देना भाजपा के लिए बड़ी रणनीतिक जीत मानी जाएगी, जिससे प्रवेश वर्मा की दावेदारी मजबूत हो सकती है। इसके अलावा, वह जाट समुदाय से आते हैं, जिससे दिल्ली और हरियाणा के जाट वोटर्स को भाजपा के पक्ष में जोड़ने में मदद मिल सकती है।
रमेश बिधूड़ीः गुर्जर समुदाय से आने वाले रमेश बिधूड़ी भी सीएम पद की दौड़ में एक महत्वपूर्ण नाम माने जा रहे हैं। भाजपा के कालकाजी सीट से उम्मीदवार बिधूड़ी अपने आक्रामक बयानों और पार्टी के प्रति निष्ठा के लिए जाने जाते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह चर्चा में रहे हैं और भाजपा में उनकी गहरी पकड़ है।
दुष्यंत गौतमः दिल्ली के करोल बाग से भाजपा के उम्मीदवार दुष्यंत गौतम को भी संभावित सीएम चेहरों में गिना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा कोई चौंकाने वाला फैसला लेते हुए एससी समुदाय से आने वाले दुष्यंत गौतम को मुख्यमंत्री बना सकती है। इससे न केवल दिल्ली में एससी वोट बैंक को साधने की कोशिश होगी, बल्कि बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए एक बड़ी रणनीतिक चाल भी हो सकती है।
विजेंदर गुप्ताः वरिष्ठ भाजपा नेता विजेंदर गुप्ता भी इस रेस में शामिल हैं। वह दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं और आम आदमी पार्टी के खिलाफ खुलकर अपनी राय रखते आए हैं। 2020 के चुनाव में जब भाजपा मात्र 8 सीटें जीत पाई थी, तब भी विजेंदर गुप्ता ने अपनी सीट बरकरार रखी थी। इस बार वह रोहिणी सीट से आगे चल रहे हैं, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है।
एआई-सक्षम राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन प्रणाली स्थापित की गई : यह शिकायतों का क्षेत्रवार विश्लेषण करता है
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1915 या वेब पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध है
नई दिल्ली | केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, एआई-सक्षम राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) प्रणाली विकसित की है। यह प्रणाली शिकायतों का क्षेत्रवार विश्लेषण करती है।
इस नई प्रौद्योगिकी-संचालित पहल का उद्देश्य, उपभोक्ता से जुड़े मुद्दों का, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में त्वरित समाधान खोजना और कार्य-दक्षता में सुधार लाना है।

इन तकनीकी प्रगति के फलस्वरूप, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में आने वाली कॉलों की संख्या दस गुना अधिक बढ़ गई है। दिसंबर 2015 में जहां यह संख्या 12,553 थी, दिसंबर 2024 में बढ़कर यह 1,55,138 तक पहुंच गई है। यह उल्लेखनीय वृद्धि, हेल्पलाइन व्यवस्था में उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। इसी तरह, प्रति माह दर्ज की जाने वाली शिकायतों की औसत संख्या 2017 में 37,062 से बढ़कर 2024 में 1,12,468 हो गई है। डिजिटल रूप से दर्ज की जाने वाली शिकायतों की मासिक औसत संख्या वित्त वर्ष 2023-24 में 54,893 से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 68,831 हो गई है (दिसंबर 2024 तक)।
उपभोक्ता मामले विभाग, सभी उपभोक्ताओं से आग्रह करता है कि वे उत्पादों या सेवाओं से संबंधित किसी भी शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1915 या वेब पोर्टल https://consumerhelpline.gov.in/user/signup.php के माध्यम से राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का उपयोग करें जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी आवाज सुनी जाए और उनके मुद्दों का शीघ्र तथा प्रभावी ढंग से समाधान किया जाए।
इस पहल के बाद शिकायत निपटान समय में उल्लेखनीय कमी आई है। 2024 में उपभोक्ता शिकायतों के निपटान की दर 2023 के 66.26 दिनों से घटकर 48 दिन हो गई। यह, समाधान के लिए लगने वाले समय में पर्याप्त सुधार को दर्शाता है और यह भी सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ताओं की चिंताओं का तुरंत समाधान किया जाए।
इस रणनीति का प्रमुख उद्देश्य सक्रिय रूप से उन कंपनियों की पहचान करना और उन्हें 'सम्मिलित भागीदार' के रूप में बदलना है, जिनके पास सबसे ज़्यादा शिकायतें हैं। एनसीएच के साथ 'सम्मिलित भागीदार' के रूप में शामिल होने के बाद, ज्यादा शिकायतें वाली इन कंपनियों को एनसीएच के साथ मिलकर त्वरित और प्रभावी रूप से शिकायत निवारण को प्राथमिकता देनी होगी। उपभोक्ता कल्याण और निष्पक्ष व्यापार नियमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई इस पहल के तहत, एनसीएच के साथ जुड़ने वाली कंपनियों की संख्या 1,038 तक पहंच गई है जबकि 2017 में यह आंकड़ा सिर्फ 263 का था।
इस पहल ने पहले ही आशाजनक परिणाम दिए हैं, खासकर शिक्षा जैसे क्षेत्रों में, जहाँ उपभोक्ता शिकायतों का तेजी से समाधान प्राथमिकता बन गया है। एनसीएच के एआई-संचालित, क्षेत्र-विशिष्ट विश्लेषण के साथ, ये कंपनियां उपभोक्ता मुद्दों को हल करने में अधिक प्रभावी और कुशलता से कार्य कर सकती हैं जिससे उपभोक्ता का विश्वास और संतुष्टि बढ़ेगी। इससे उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों को लाभ मिलेगा।
इस पहल के फलस्वरूप, सबसे अधिक उपभोक्ता शिकायतों के लिए पहचानी जाने वाली कई बड़ी कंपनियां अब राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की आधिकारिक भागीदार बन गई हैं। इससे उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित समाधान और उच्च निपटान दर की उम्मीद है जिससे देश भर के लाखों उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन, केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो उपभोक्ता शिकायतों के प्रभावी और समय पर निवारण में महत्वपूर्ण साबित हुई है। हेल्पलाइन ने ब्रॉडबैंड और इंटरनेट, ई-कॉमर्स, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, डिजिटल भुगतान मोड, पेट्रोलियम, बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल आदि सहित कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की शिकायतों को हल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसके चलते उपभोक्ताओं को औपचारिक कानूनी कार्यवाही का सहारा लेने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
ब्रॉडबैंड और इंटरनेट: पश्चिम बंगाल के एक उपभोक्ता को इंटरनेट सेवा प्रदाता से उन सेवाओं के लिए रिफंड प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिनका उसने लाभ उठाया ही नहीं था। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से संपर्क करने के बाद, समस्या का तुरंत समाधान किया गया। सेवा प्रदाता ने पूरा रिफंड जारी किया। इसके अतिरिक्त, अन्य संतुष्ट उपभोक्ताओं ने विभाग के साथ अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया साझा की और उनकी समस्याओं के कुशल और प्रभावी समाधान की सराहना की।
ई-कॉमर्स क्षेत्र: कर्नाटक के एक उपभोक्ता ने ऑनलाइन रिटेलर से मिले दोषपूर्ण उत्पाद के रिफंड और वापसी का मुद्दा उठाया। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के हस्तक्षेप के बाद, उत्पाद को बदल दिया गया और तुरंत रिफंड जारी किया गया जिससे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता का भरोसा बढ़ा। उपभोक्ता ने अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया साझा की, जो एनसीएच 2.0 में उनके बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। इसकी समीक्षा ने मुद्दों को तेजी से और कुशलता से हल करने में हेल्पलाइन की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता पर बल दिया, जिससे प्लेटफॉर्म की सेवाओं में उपभोक्ता का विश्वास और भी बढ़ गया।
उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं: राजस्थान के एक नागरिक ने खुद के खरीदे गए उत्पाद में खराबी की शिकायत की। उसके लगातार अनुरोध के बावजूद, कंपनी ने समस्या का समाधान नहीं किया। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) की सहायता से, उत्पाद को तुरंत बदल दिया गया और कंपनी ने माफ़ी भी मांगी। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों के उपभोक्ताओं ने एनसीएच टीम के बारे में अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया साझा की और शिकायतों के समाधान में उनकी सेवा भाव एवं दक्षता की सराहना की।
डिजिटल भुगतान मोड: दिल्ली के एक उपभोक्ता ने शिकायत की थी कि वह ऑनलाइन लेनदेन सेवा का उपयोग करने में असमर्थ था और उसके खाते में 45,000/- रुपये की राशि फ्रीज हो गई थी। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) से संपर्क करने के बाद, इस समस्या का त्वरित समाधान किया गया। बैंक ने राशि को अनफ्रीज कर दिया और उपभोक्ता को उनके खाते तक पहुंच बहाल कर दी। इसके अलावा, अन्य संतुष्ट उपभोक्ताओं ने विभाग के साथ अपनी सकारात्मक समीक्षा साझा करते हुए उनकी शिकायतों के समाधान के लिए प्रशंसा की।
पेट्रोलियम: तेलंगाना में एक खरीदार को बुक किए गए सिलेंडर को प्राप्त करते समय एमआरपी से अधिक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के हस्तक्षेप से इस समस्या का तुरंत समाधान किया गया और उपभोक्ता को मुआवजा दिया गया जिससे उसके अधिकारों की रक्षा हुई। इसके अलावा, देश के विभिन्न कोनों से उपभोक्ताओं ने एनसीएच 2.0 के संचालन के बारे में अपने विचार साझा किए।
ग्रीन हाइड्रोजन पर कार्यशाला का उद्देश्य भारत-ब्रिटेन सहयोग को मजबूत करना है
भारतीय मानक ब्यूरो (भारत) और ब्रिटिश मानक संस्थान (यूनाइटेड किंगडम) ने हाइड्रोजन मानकीकरण पर चर्चा की
नई दिल्ली | भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने ब्रिटिश मानक संस्थान (बीएसआई) और यूनाइटेड किंगडम सरकार के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और विनियमन के माध्यम से हाइड्रोजन मानकीकरण पर भारत-यूनाइडेट किंगडम सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से, नई दिल्ली में ग्रीन हाइड्रोजन पर दो दिवसीय भारत-यूनाइडेट किंगडम मानक साझेदारी कार्यशाला की मेजबानी की।

ग्रीन हाइड्रोजन पर भारत-यूनाइटेड किंगडम मानक भागीदारी कार्यशाला स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को प्राप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में एक सराहनीय कदम है। कार्यशाला के दौरान ब्रिटिश मानक संस्थान में ऊर्जा क्षेत्र प्रमुख एबे डोरियन ने कहा कि यह एक सतत हाइड्रोजन बाजार के निर्माण में ज्ञान के आदान-प्रदान, मानकीकरण और नवाचार के महत्व का प्रमाण है।
उन्होंने कहा, "भारत और यूनाइटेड किंगडम की ग्रीन हाइड्रोजन में अग्रणी बनने की साझा महत्वाकांक्षा है, जो नेट जीरो भविष्य के लक्ष्य को समर्थन करता है।"
यह कार्यक्रम यूनाइटेड किंगडम सरकार के मानक भागीदारी कार्यक्रम के माध्यम से व्यापक गतिविधि की एक अनुसूची का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत में विकास को गति देने, निवेश को आकर्षित करने और व्यापार को बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों के उपयोग को बढ़ाना है। यह कार्यक्रम सुरक्षित, मापनीय और वैश्विक रूप से सुसंगत विनियमों, संहिताओं और मानकों (आरसीएस) पर जोर देता है। यह कार्यक्रम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विनिर्देश (फास्ट-ट्रैक पीएएस) मानकों और वैश्विक हाइड्रोजन प्रमाणन को अपनाने पर भी केंद्रित था।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत भारतीय मानक ब्यूरो के प्रयासों को भी मजबूत करता है। इसने मानकों में कमियों की पहचान करने, नए क्षेत्रों की खोज करने और विशेषज्ञों से जुड़ने में मदद की। वैश्विक सर्वोत्तम विधियों से प्राप्त अंतर्दृष्टि भारत के प्रमाणन, परीक्षण और मानकीकरण को बढ़ाएगी, जिससे एक सतत और प्रतिस्पर्धी हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को सहयोग मिलेगा।
इस कार्यक्रम में भारत और यूनाइटेड किंगडम के नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विशिष्ट उद्योगपतियों ने गहन विचार-विमर्श किया। कार्यशाला का उद्घाटन राजीव शर्मा, उप महानिदेशक (मानकीकरण-I), भारतीय मानक ब्यूरो; लॉरा एलेट, जलवायु और ऊर्जा प्रमुख (ब्रिटिश उच्चायोग) और एबे डोरियन, ऊर्जा क्षेत्र प्रमुख, भारतीय मानक ब्यूरो ने किया। उन्होंने हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए भारत और यूनाइटेड किंगडम के साझा दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
केजरीवाल के घर पहुंची ACB : दिल्ली LG के आदेश पर
दिल्ली | आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नाम लिए बिना भाजपा पर कैंडिडेट्स की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए। केजरीवाल ने दावा किया कि उनके विधायकों और उम्मीदवारों को फोन पर 15-15 करोड़ के ऑफर दिए गए। इस मुद्दे पर आज सुबह 11.30 बजे सभी 70 कैंडिडेट्स की मीटिंग बुलाई थी।
केजरीवाल के आरोपों के बाद भाजपा ने LG वीके सक्सेना को पत्र लिखकर आरोपों की जांच की मांग की। इसके बाद LG ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को मामले की जांच का आदेश दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ACB की टीम केजरीवाल, सांसद संजय सिंह और मुकेश अहलावत के घर जांच के लिए पहुंची।

करीब डेढ़ घंटे तक ACB की टीम ने केजरीवाल के घर में जांच की। जांच के बाद टीम ने केजरीवाल को लीगल नोटिस दिया और रवाना हो गई।
केजरीवाल ने 6 फरवरी को 3 एजेंसियों का एग्जिट पोल आने के बाद यह आरोप लगाए। दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 सीटों के लिए 5 फरवरी को 60.54% मतदान हुआ। नतीजे 8 फरवरी को आएंगे।
AAP नेता गोपाल राय ने कहा कि इस मीटिंग में सभी कैंडिडेट्स ने अपनी रिपोर्ट पेश की है। हमारी पार्टी करीब 50 सीटें जीतेगी। 6-7 सीटों पर करीबी मुकाबला है। गाली-गलौज पार्टी एग्जिट पोल्स के जरिए महौल बनाना चाह रही है कि वही सत्ता में आएगी। वह हमारे विधायकों को कॉल कर उन्हें लालच दे रही है।
केजरीवाल के घर ACB टीम के पहुंचने के बाद सांसद संजय सिंह भी वकीलों की टीम लेकर पहुंचे। रिपोर्ट्स के मुताबिक ACB की टीम केजरीवाल के लीगल टीम के साथ बैठी है। संजय सिंह का बयान रिकॉर्ड हो गया है। संजय का कहना है कि ACB की टीम बिना पूर्व नोटिस के आई है और जब से पहुंची है।
LG वीके सक्सेना के ऑर्डर के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने 3 टीमें बनाई हैं। जो केजरीवाल, संजय सिंह और मुकेश अहलावत के दावों पर उनके बयान रिकॉर्ड करेंगी।
दिल्ली सरकार में मंत्री और सुल्तानपुर मजरा से उम्मीदवार मुकेश अहलावत ने कहा, “मुझे भी एक नंबर से फोन आया। कॉलर बोला कि उनकी सरकार बन रही है। अगर मैं AAP छोड़कर उनकी पार्टी में जाता हूं तो वो मुझे 15 करोड़ देंगे और मंत्री बना देंगे। मैं मरते दम तक आम आदमी पार्टी नहीं छोड़ूंगा।”
6 फरवरी की रात केजरीवाल ने ट्वीट किया, “कुछ एजेंसीज दिखा रही हैं कि गाली गलौज पार्टी की 55 से ज्यादा सीट आ रही हैं। पिछले दो घंटे में हमारे 16 उम्मीदवारों के पास फोन आ गए हैं कि AAP छोड़ उनकी पार्टी में आ जाएं, मंत्री बना देंगे और हर एक को 15-15 करोड़ देंगे।
अगर इनकी पार्टी की 55 से ज्यादा सीटें आ रहीं हैं तो हमारे उम्मीदवारों को फोन करने की क्या जरूरत है। जाहिर तौर पर फर्जी सर्वे कराए ही इसलिए हैं ताकि माहौल बनाकर कुछ उम्मीदवारों को तोड़ा जा सके। पर गाली गलौज वालों, हमारा एक भी आदमी नहीं टूटेगा।”
दिल्ली चुनाव पर 14 एग्जिट पोल आ चुके हैं। इनमें 12 ने भाजपा को बहुमत दिखाया है। वहीं 2 में कहा गया है कि AAP की सरकार आ सकती है। एक्सिस माई इंडिया पोल के मुताबिक, भाजपा दिल्ली की 70 सीटों में से 45 से 55 सीटें जीत सकती है, जबकि सीएनएक्स का अनुमान इससे भी ज्यादा है, जो भाजपा को 49 से 61 सीटें दे रहा है। सभी के ऐवरेज यानी पोल ऑफ पॉल्स में भाजपा को 41, AAP को 28 और कांग्रेस को 1 सीट मिलने का अनुमान है।
दिल्ली इंटरनेशनल लेदर एक्सपो 2025 का 20-21 फरवरी को यशोभूमि में आयोजन
डीआईएलईएक्स 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहलों के साथ मिलकर निर्यात और रोजगार को प्रोत्साहन देगा
चर्म निर्यात परिषद ने वर्ष 2030 तक 47 बिलियन डॉलर का लक्ष्य रखा, जिसमें फुटवियर और चर्म निर्यात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
नई दिल्ली | चर्म निर्यात परिषद (सीएलई) 20-21 फरवरी को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि, आईसीसी द्वारका, में दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय चर्म एक्सपो (डीआईएलईएक्स) 2025 का आयोजन कर रही है। डीआईएलईएक्स एक प्रमुख बी टू बी कार्यक्रम है जिसे निर्माताओं और निर्यातकों को अपने नवीनतम संकलन, नवाचारों और क्षमताओं को अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रदर्शित करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करने के लिए बनाया गया है, जो व्यवहार्य सोर्सिंग विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। "मेक इन इंडिया" और आत्मनिर्भर भारत पहलों के साथ समन्वय करते हुए, डीआईएलईएक्स 2025 निर्यात को बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और वैश्विक बाजारों में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सरकार ने व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार लागू किए हैं। उद्योग जगत की एक प्रमुख मांग को पूरा करते हुए गीले नीले चमड़े पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) को 2 फरवरी 2025 से 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इसके साथ ही क्रस्ट चर्म पर निर्यात शुल्क समाप्त कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, विशेष रूप से फुटवियर क्षेत्र में विनिर्माण और निर्यात को सहयोग देने के लिए एक विशेष पैकेज पेश किया गया है, साथ ही उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने के उद्देश्य से एक फोकस उत्पाद योजना भी शुरू की गई है, जिससे 4 लाख करोड़ रुपए का व्यापार और 1.1 लाख करोड़ रुपए का निर्यात होगा और 22 लाख नौकरियां सृजित होंगी।
एमएसएमई को सहयोग देने के लिए निवेश और टर्नओवर वर्गीकरण सीमा बढ़ा दी गई है, और सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी कवरेज को दोगुना करके 10 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जिससे पांच वर्षों में ऋण में अतिरिक्त 1.5 लाख करोड़ रुपए की सुविधा मिलेगी। सूक्ष्म उद्यमों के लिए कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति महिला उद्यमियों के लिए सहायता सहित कस्टम वित्तीय सहायता, समावेशी विकास को और बढ़ावा देगी। क्षेत्रीय और मंत्रिस्तरीय लक्ष्यों के साथ एक निर्यात संवर्धन मिशन भी शुरू किया जाएगा, जबकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुव्यवस्थित करने के लिए व्यापार दस्तावेज़ीकरण और वित्तपोषण के लिए एक एकीकृत मंच भारत ट्रेडनेट (बीटीएन) की स्थापना की जाएगी।
चर्म निर्यात परिषद (सीएलई) चर्मक्षेत्र को उनके अटूट समर्थन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त करती है। सीएलई उद्योग विस्तार को प्रोत्साहन देने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए समर्पित है।
चर्म निर्यात परिषद के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार जालान ने बताया कि बजट में की गई घोषणाएं भारत के चर्म और फुटवियर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर हुई है, जो दूरदर्शी “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” पहलों के तहत तेजी से वैश्विक विनिर्माण और सोर्सिंग हब के रूप में विकसित हो रहा है। सीएलई ने 2030 तक 47 बिलियन अमरीकी डॉलर का लक्ष्य तय किया है। इसमें से 13.7 बिलियन अमरीकी डॉलर निर्यात क्षेत्र के लिए है।
राजेंद्र के. जालान ने बताया कि, "उद्योग जगत के मुद्दों का समाधान करने में सरकार का सक्रिय रुख - विशेष रूप से शुल्क में कटौती और एमएसएमई के लिए वित्तीय सहायता - भारत के चर्म क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अहम भूमिका में लाने में सहायक होगा। सीएलई सतत विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।"
संयुक्त सचिव विमल आनंद ने कहा, "केंद्रीय बजट 2025 ने ऋण पहुंच को बढ़ाकर, शुल्कों को युक्तिसंगत बनाकर और प्रमुख नीतिगत ढांचे को बनाए रखते हुए चर्म और फुटवियर क्षेत्र को बहुत जरूरी प्रोत्साहन दिया है। उद्योग नए विशेष पैकेज और निर्यात-उन्मुख प्रोत्साहनों के साथ अहम वृद्धि के लिए तैयार है।"
एक राष्ट्रव्यापी प्रजाति-केंद्रित अभियान “शतावरी – बेहतर स्वास्थ्य के लिए” की शुरुआत की गई
शतावरी महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और विकसित भारत के पंच प्राण लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी: प्रतापराव जाधव, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय
नई दिल्ली | औषधीय पौधों के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, आज आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव द्वारा “शतावरी-बेहतर स्वास्थ्य के लिए” नाम से एक प्रजाति-केंद्रित अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आयुष मंत्रालय में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) के सीईओ डॉ. महेश कुमार दाधीच और आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में, प्रतापराव जाधव ने पिछले दशक में आयुष मंत्रालय द्वारा की गई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला और शतावरी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस नई पहल को शुरू करने के लिए एनएमपीबी के प्रयासों की सराहना की। मंत्री ने एनएमपीबी द्वारा संचालित पिछले सफल अभियानों का भी उल्लेख किया, जिनमें आंवला, मोरिंगा, गिलोय और अश्वगंधा के लिए चलाए गए अभियान शामिल हैं। इन पहलों ने पूरे देश में औषधीय पौधों के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने में योगदान दिया है।
प्रतापराव जाधव ने 15 अगस्त, 2022 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बताए गए पंच प्राण लक्ष्य को प्राप्त करने में शतावरी की प्रासंगिकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने 2047 में भारत के 100वें स्वतंत्रता दिवस तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना की है। इस मिशन के तहत, शतावरी के पौधे को भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए एक प्रमुख संसाधन के रूप में पहचाना गया है। यह नागरिकों के समग्र कल्याण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।
आयुष मंत्रालय में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने औषधीय पौधों को बढ़ावा देने में एनएमपीबी की गतिविधियों और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना के बारे में भी जानकारी साझा की, जो शतावरी सहित महत्वपूर्ण औषधीय प्रजातियों के दीर्घकालिक संरक्षण और खेती को सुनिश्चित करने से जुड़ी पहल है।
एनएमपीबी के सीईओ डॉ. महेश कुमार दाधीच ने खासकर महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए शतावरी के लाभों के बारे में इसके औषधीय महत्व पर प्रकाश डाला, और इस पौधे की कृषि-आर्थिक क्षमता पर चर्चा की। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि अभियान का समर्थन करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्य में शतावरी के बारे में अधिक जागरूकता बढ़ाने और इसे व्यापक रूप से अपनाने के लिए पात्र संगठनों को ₹18.9 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
अनेक स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाने वाली शतावरी विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए, अब इस अभियान के माध्यम से ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह पूरे देश में व्यापक दर्शकों तक पहुंचे। यह अभियान भारत में बेहतर स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के लिए पारंपरिक चिकित्सा और औषधीय पौधों को बढ़ावा देने के आयुष मंत्रालय के निरंतर प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
7 पाकिस्तानी घुसपैठियों को ढेर किया : इंडियन आर्मी ने
नई दिल्ली | भारतीय सेना ने 7 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया है। इनमें 2-3 पाकिस्तानी आर्मी के जवान भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि घटना 4 फरवरी की रात हुई, जब स्भष्ट के पास घुसपैठ की कोशिश की गई। सूत्रों ने बताया कि पुंछ जिले में कृष्णा घाटी के पास यह घटना हुई। घुसपैठियों का मकसद भारतीय पोस्ट को निशाना बनाना था। भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम पर हमला किया, यह टीम क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन में माहिर होती है। आतंकवादी अलबद्र ग्रुप के हो सकते हैं सूत्रों ने बताया कि इस ऑपरेशन में जो आतंकवादी मारे गए वी अलबद्र ग्रुप के मेंबर्स हो सकते हैं। घुसपैठ की यह कोशिश तब की गई है, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कह चुके हैं कि हम भारत के साथ सभी मसले बातचीत के जरिए सुलझाएंगे।

बातचीत से मसले सुलझाएंगे घुसपैठ की यह कोशिश तब की गई है, जब एक दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कह चुके हैं कि हम भारत के साथ सभी मसले बातचीत के जरिए सुलझाएंगे। जैश-लश्कर की मीटिंग, सरकार ने दी मंजूरी पाकिस्तानी पीएम के बयान के बाद ही सरकार ने के रावलाकोट में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को एक रैली की मंजूरी दी गई। इसमें बंदूकें औरच 47 लहराई गईं। इस रैली में एंटी इंडिया नारे लगाए गए। इसमें हमास के लीडर्स भी मौजूद थे। तारीख-18 सितंबर 2016, समय सुबह के साढ़े 5 बजे। चार आतंकवादी भारतीय सैनिकों के वेश में स्पष्ट को पार कर कश्मीर में घुस आते हैं। उनके निशाने पर था, उरी में भारतीय सेना का ब्रिगेड हेडक्वार्टर।
प्रयागराज महाकुंभ 2025: बसंत स्नान के बाद गंगा पंडाल में 7 से 10 फरवरी तक होगा सांस्कृतिक संगम
डेस्क। बसंत पंचमी के पुण्य स्नान के बाद प्रय़ागराज महाकुंभ 2025 में एक बार फिर संस्कृति का भव्य संगम शुरू होने जा रहा है। गंगा पंडाल में आयोजित होने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। केन्द्रीय संस्कृति विभाग ने इस आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, जिसमें 7 से 10 फरवरी तक संगीत, नृत्य और कला की भव्य प्रस्तुतियां होंगी।
गंगा पंडाल में होने वाले मुख्य सांस्कृतिक आयोजन में 7 फरवरी को ओडिशी नृत्यांगना डोना गांगुली, 8 फरवरी को प्रसिद्ध गायिका कविता कृष्णमूर्ति और डॉ. एल सुब्रह्मण्यम, 9 फरवरी को सुरेश वाडेकर और सोनल मान सिंह तथा 10 फरवरी को सुप्रसिद्ध गायक हरिहरन अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके अलावा, विभिन्न भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत विधाओं के प्रतिष्ठित कलाकार भी महाकुंभ की सांझ को संगीतमय और भव्य बनाएंगे।
महाकुंभ 2025 न केवल श्रद्धा और आस्था का महापर्व है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, संगीत, नृत्य और साहित्य के वैश्विक मंच के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। गंगा पंडाल में होने वाले ये आयोजन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत करेंगे, जिससे श्रद्धालु आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों रूपों में इस अद्भुत महापर्व का आनंद उठा सकेंगे।
गंगा पंडाल पर मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा
7 फरवरी:
• डोना गांगुली (कोलकाता) – ओडिशी नृत्य
• योगेश गंधर्व एवं आभा गंधर्व – सूफी गायन
• सुमा सुधींद्र (कर्नाटक) – कर्नाटिक गायन
• डॉ. देवकी नंदन शर्मा (मथुरा) – रासलीला
8 फरवरी:
• कविता कृष्णमूर्ति और डॉ. एल सुब्रह्मण्यम – सुगम संगीत
• प्रीति पटेल (कोलकाता) – मणिपुरी नृत्य
• नरेंद्र नाथ (पश्चिम बंगाल) – सरोद वादन
• डॉ. देवकी नंदन शर्मा (मथुरा) – रासलीला
9 फरवरी:
• सुरेश वाडेकर – सुगम संगीत
• पद्मश्री मधुप मुद्गल (नई दिल्ली) – हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत
• सोनल मान सिंह (नई दिल्ली) – ओडिशी नृत्य
• डॉ. देवकी नंदन शर्मा (मथुरा) – रासलीला
10 फरवरी:
• हरिहरन – सुगम संगीत
• शुभदा वराडकर (मुंबई) – ओडिशी नृत्य
• सुधा (तमिलनाडु) – कर्नाटिक संगीत
तुलसी साहित्य और भारतीय संस्कृति का हो प्रचार-प्रसार - मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मानस भवन में तुलसी मानस प्रतिष्ठान की प्रबंधकारिणी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस प्रतिष्ठान की गतिविधियों को और अधिक विस्तारित करने का सुझाव दिया और संबंधितों को इस पर अमल करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रतिष्ठान से रामायण, तुलसी साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने युवाओं और विद्वानों को जोड़ने के लिए चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थल पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया। बैठक में प्रबंधकारिणी समिति के कार्याध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा, संयोजक श्री राजेन्द्र शर्मा, कोषाध्यक्ष श्री विजय अग्रवाल, वरिष्ठ सदस्य श्री सुरेश पचौरी एवं श्री कैलाश जोशी, समिति सदस्य एवं कलेक्टर भोपाल श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह सहित समिति के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिष्ठान की आगामी योजनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों को इस पहल से जोड़ा जाए, जिससे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूती मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऑनलाइन माध्यमों से भी रामायण और तुलसी साहित्य को अधिक लोगों तक पहुंचाये। उन्होंने आगामी आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने और इनसे जनसामान्य को जोड़ने के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। प्रतिष्ठान की गतिविधियों को और प्रभावी बनाने के लिए सुझावों पर बैठक में गहनता से विचार-विमर्श किया गया। कार्याध्यक्ष श्री शर्मा ने मानस भवन के सामने न रोड का चौड़ीकरण किये जाने और मानस भवन, हिंदी भवन और गांधी भवन के बीच अवैध निर्माण हटवाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कलेक्टर भोपाल को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिति को अवगत कराया कि सरकार प्रदेश में शराबबंदी पर गंभीरता से विचार कर रही है। गीता के ज्ञान और हमारी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश में 'गीता भवन' बनाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. ने बताया कि हमारी सरकार पुण्यभूमि हरिद्वार जैसे प्रबंध अब महाकाल नगरी उज्जैन में भी कराने की ओर अग्रसर है। साधु-संतों, अखाड़ों और धर्मशालाओं को उज्जैन के सिंहस्थ मेला क्षेत्र में स्थायी प्रकृति के निर्माण कार्यों की अनुमति दी गई है। इससे स्थायी आश्रम, मठ, धर्मशालाएं, सत्संग स्थल बनाये जा सकेंगे। कलेक्टर ने समिति को अवगत कराया कि भोपाल में भी स्मार्ट सिटी रोड पर टीटी नगर के पास करीब एक एकड़ भूमि में गीता भवन बनाया जाएगा।
पालपुर-कूनो नेशनल पार्क में 2 चीते और 3 शावकों को बाड़े से मुक्त
भोपाल। एशिया महाद्वीप से विलुप्त हो चुके चीते आज मध्यप्रदेश की पावन धरा पर रफ्तार भर रहे हैं और अपना कुनबा भी बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पालपुर-कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता आशा, धीरा और आशा के 3 शावकों को बाड़े से खुले जंगल में स्वछंद विचरण के लिए मुक्त किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चीतों की पुनर्स्थापना से कूनो की पर्यटन के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पहले 2 चीते खुले जंगल में छोड़े थे, जिससे वन्य जीवन में चीतों की पुन: बसाहट हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि आज 5 चीतों को जंगल में छोड़ने का अवसर मिला है। मैं प्रदेशवासियों को इसकी बधाई देता हूँ।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो अभयारण्य में ईको-टूरिज्म की पहल को प्रोत्साहित किया। इससे न केवल संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिये रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि चीतों की पुनर्स्थापना के लिये भविष्य में कूनो राष्ट्रीय उद्यान को एक आदर्श वन्य-जीव अभयारण्य बनाने के लिये आवश्यकतानुसार प्रबंध किए जाएंगे।
कूनो नेशनल पार्क से अभी तक 7 चीतों को जंगल में स्वछंद विचरण के लिये छोड़ा गया है। कूनो में वीरा के नये 2 शावकों को मिलाकर कुल 26 चीते हो गये हैं। इन चीतों की मॉनीटरिंग के लिये 2 दल गठित किये गये हैं, जो छोड़े गये शावकों की निगरानी और सुरक्षा करेंगे।
कूनो नेशनल पार्क में चीता रिलीज कार्यक्रम के दौरान कमिश्नर ग्वालियर-चंबल मनोज खत्री, आईजी चंबल सुशांत सक्सेना, कलेक्टर श्योपुर अर्पित वर्मा, सीसीएफ उत्तम शर्मा और डीएफओ कूनो आर. थिरुकुराल सहित प्रशासनिक एवं वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
प्रयागराज महाकुंभ 2025 में 233 वॉटर एटीएम के जरिए 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को 24 घंटे शुद्ध आरओ जल की आपूर्ति
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ जल आपूर्ति के लिए महाकुंभ में प्लास्टिक मुक्त पेयजल व्यवस्था लागू
डेस्क | प्रयागराज महाकुंभ-2025 में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन द्वारा स्वच्छ और शुद्ध पेयजल की व्यापक व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए महाकुंभ मेला क्षेत्र में 233 वॉटर एटीएम स्थापित किए गए हैं, जो 24 घंटे बिना किसी बाधा के कार्यरत हैं। इन वॉटर एटीएम के माध्यम से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शुद्ध आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) जल प्राप्त कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 21 जनवरी 2025 से 1 फरवरी 2025 तक 40.85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इन वॉटर एटीएम का लाभ उठाया है।

महाकुंभ में श्रद्दालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने वॉटर एटीएम के माध्यम से निःशुल्क पेयजल वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की है। पहले यह सुविधा 1 रुपये प्रति लीटर के शुल्क पर उपलब्ध थी, जिसमें श्रद्धालु या तो सिक्का डालकर या यूपीआई स्कैन के माध्यम से भुगतान कर आरओ जल प्राप्त कर सकते थे। लेकिन अब यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क कर दी गई है, जिससे श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो।
हर वॉटर एटीएम पर एक ऑपरेटर तैनात किया गया है, जो श्रद्धालुओं के अनुरोध पर बटन दबाते ही शुद्ध जल उपलब्ध कराता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि श्रद्धालुओं को जल प्राप्त करने में कोई समस्या न हो और पेयजल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहे।
महाकुंभ में स्थापित वॉटर एटीएम आधुनिक तकनीक से लैस हैं, जिससे इनकी कार्यप्रणाली पूरी तरह स्वचालित और सुचारू बनी रहती है। इन मशीनों में सेंसर-आधारित निगरानी प्रणाली लगी हुई है, जो किसी भी तकनीकी खामी का तुरंत पता लगाती है। यदि किसी वॉटर एटीएम में कोई तकनीकी समस्या आती है, तो इसे जल निगम के तकनीशियन तुरंत ठीक कर देते हैं, जिससे श्रद्धालुओं को निर्बाध जल आपूर्ति मिलती रहे।
महाकुंभ क्षेत्र में श्रद्धालुओं की विशाल संख्या को देखते हुए प्रत्येक वॉटर एटीएम से प्रतिदिन 12 से 15 हजार लीटर आरओ जल की आपूर्ति की जा रही है। सभी वॉटर एटीएम में सिम-आधारित तकनीक लगी हुई है, जिससे ये प्रशासन के केंद्रीय नेटवर्क से जुड़े रहते हैं।
इस तकनीक के माध्यम से कुल जल खपत, जल स्तर प्रबंधन, जल की गुणवत्ता और वितरण की मात्रा पर निरंतर निगरानी रखी जाती है। हर बार जब कोई श्रद्धालु वॉटर एटीएम का उपयोग करता है, तो एक लीटर शुद्ध जल निकलता है, जिसे वह मशीन में लगी टोंटी के नीचे रखी बोतल में भर सकता है।
पिछले महाकुंभ आयोजनों में देखा गया था कि संगम और अन्य घाटों के आसपास प्लास्टिक की बोतलों और अन्य कचरे की समस्या गंभीर रूप से बढ़ जाती थी। इस बार प्रशासन ने न केवल स्वच्छ जल आपूर्ति की व्यवस्था की है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया है।
महाकुंभ प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया है कि वॉटर एटीएम पूरे महाकुंभ आयोजन के दौरान बिना किसी बाधा के कार्य करते रहें। किसी भी प्रकार की समस्या से निपटने के लिए विशेष तकनीकी टीमें गठित की गई हैं, जो नियमित रूप से वॉटर एटीएम की निगरानी कर रही हैं।
इसके अलावा, प्रशासन आगे भी इसी तरह की पहल करने पर विचार कर रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में महाकुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल की सुविधा सहज रूप से उपलब्ध हो सके।
महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन की यह पहल सुरक्षित, स्वच्छ और सुगम पेयजल आपूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वॉटर एटीएम की सहायता से अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालु शुद्ध आरओ जल प्राप्त कर चुके हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासन द्वारा उठाए गए इन कदमों से न केवल श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध हो रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक कचरे में कमी लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है।
इस पहल से महाकुंभ 2025 का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बन गया है, जिससे यह आयोजन एक ऐतिहासिक और अनुकरणीय उदाहरण बन गया है।
वेव्स 2025 "रील मेकिंग" चैलेंज के लिए 20 देशों और पूरे भारत से 3,300 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं
डिजिटल रील्स से लेकर ग्लोबल डील्स तक : विजेताओं को लाभ का अनूठा अवसर और मान्यता प्राप्त होगी, मंत्रालय के समर्थन से फाइनलिस्ट विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करेंगे |
"विकसित भारत की थीम" में भारत की मौजूदा तकनीकी और बुनियादी ढांचे की प्रगति पर प्रकाश डाला गया है और "भारत @ 2047" को दर्शाया गया है |
नई दिल्ली | देश की प्रगति के लिए रचनात्मकता और दूरदर्शिता का प्रदर्शन करके भारत की नवाचार यात्रा का प्रस्तुतीकरण, पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 मार्च 2025 | विश्व ऑडियो विजुअल एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) 2025 में "रील मेकिंग" चुनौती को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें भारत और 20 देशों से 3,379 पंजीकरण प्राप्त हुए हैं।

वेव्स 2025 के तहत एक प्रमुख पहल के रूप में शुरू की गई यह प्रतियोगिता, मीडिया और मनोरंजन के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में भारत के बढ़ते प्रभाव को उजागर करती है, साथ ही देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल क्रिएटर अर्थव्यवस्था को भी दर्शाती है। यह भारत सरकार के "भारत में सृजन" दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो देश भर से और अन्य देशों से प्रतिभाओं को सशक्त बनाता है।
इस प्रतियोगिता में अफगानिस्तान, अल्बानिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, अंडोरा, एंटीगुआ और बारबुडा, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी सहित अन्य देशों से उल्लेखनीय अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी देखी गई है। यह वैश्विक पहुंच भारत के रचनात्मक क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव और दुनिया भर में कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में वेव्स की महत्ता को उजागर करती है।
घरेलू स्तर पर इस चुनौती में भारत भर के विविध और दूरदराज के स्थानों से प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें तवांग (अरुणाचल प्रदेश), दीमापुर (नागालैंड), कारगिल (लद्दाख), लेह, शोपियां (कश्मीर), पोर्ट ब्लेयर (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह), तेलियामोरा (त्रिपुरा), कासरगोड (केरल) और गंगटोक (सिक्किम) शामिल हैं। छोटे शहरों और उभरते रचनात्मक केंद्रों से वेव्स की “रील मेकिंग” चुनौती प्रतियोगिता को मिली मजबूत प्रतिक्रिया भारत की समृद्ध कहानी सुनाने की परंपराओं और बढ़ते डिजिटल क्रिएटर इकोसिस्टम को दर्शाती है।
चुनौती के तहत 20 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों को "विकसित भारत" जैसे विषयों पर रील बनानी होगी, जिसमें भारत की मौजूदा तकनीकी और बुनियादी ढांचे की प्रगति पर प्रकाश डाला जाएगा, और "भारत @ 2047" में इन क्षेत्रों में देश के भविष्य के विकास की कल्पना की जाएगी। ये थीम कहानीकारों को 30-60 सेकंड की संक्षिप्त फिल्मों के माध्यम से भारत की नवाचार यात्रा को प्रस्तुत करने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं, जिसमें देश की प्रगति के लिए उनकी रचनात्मकता का प्रदर्शन होगा।
वेव्स 2025 में उनके सभी व्ययों का भुगतान किया जाएगा, जहां उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
मंत्रालय द्वारा फाइनलिस्टों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कंटेंट क्रिएटर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।
विजेता रीलों को प्रतिष्ठित वेव्स हॉल ऑफ फेम में, आधिकारिक वेव्स वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया जाएगा।
वेव्स 2025 की प्रेरणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण और मिशन से ली गई है, जिसका उद्देश्य भारत की रचनात्मक क्षमता को एक नई वैश्विक पहचान प्रदान करना और भारत को मीडिया, मनोरंजन और कंटेंट निर्माण के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। यह शिखर सम्मेलन इस उद्योग के अग्रजों, हितधारकों और नवप्रवर्तकों को उभरते रुझानों पर चर्चा करने, सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक साथ लाएगा, भारत के समृद्ध रचनात्मक इकोसिस्टम को प्रदर्शित करेगा और प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के दृष्टिकोण को क्रियान्वित करेगा।
अब तक भारत के लगभग पूरे क्षेत्र और 20 अन्य देशों की भागीदारी के साथ यह रील मेकिंग चैलेंज, भारत के विविध और गतिशील कहानीयों को सुनाने के परिदृश्य का एक प्रमाण है, जो वैश्विक मीडिया और मनोरंजन उद्योग में एक शक्तिशाली देश के रूप में भारत स्थिति को मजबूत बनाता है।
भारत टेक्स-2025, वैश्विक वस्त्र महाशक्ति बनने की भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है : कपड़ा सचिव
वस्त्र सचिव ने अब तक के सबसे बड़े वैश्विक वस्त्र शो के लिए उद्योग निकायों की सराहना की
भारत टेक्स-2025 उद्योग-सरकार सहयोग का एक आदर्श उदाहरण है
भारत टेक्स-2025 के लिए ऐप और वेबसाइट शुभारम्भ
नई दिल्ली | वर्ष 2024 में शुभारंभ और उसकी सफलता के आधार पर, भारत टेक्स-2025 का लक्ष्य 5,000 से अधिक प्रदर्शकों, 120 से अधिक देशों के 6,000 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और 1,20,000 से अधिक आगंतुकों को आकर्षित करके अपने कद को और ऊंचा करना है। इस कार्यक्रम में व्यापक मंडप होंगे, जिसमें एक ही स्थान पर संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला का प्रदर्शन किया जाएगा।

केंद्रीय वस्त्र सचिव नीलम शमी राव ने भारत टेक्स 2025 के आयोजन में वस्त्र उद्योग निकायों के सक्रिय प्रयासों की सराहना की। इसे अब तक का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक वस्त्र आयोजन बताते हुए उन्होंने वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषदों और अन्य उद्योग निकायों की प्रतिबद्धता की सराहना की, जिन्होंने वस्त्रों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को भारत टेक्स के अंतर्गत लाने के लिए अथक प्रयास किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत टेक्स एक विश्वसनीय, सतत सोर्सिंग गंतव्य के साथ-साथ वस्त्रों के लिए बड़े पैमाने पर निवेश गंतव्य के रूप में भारत के आकर्षण की पुष्टि करेगा। उन्होंने कहा कि पूरा आयोजन वैश्विक वस्त्र महाशक्ति बनने के लिए भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
सचिव उद्योग भवन में भारत टेक्स 2025 ऐप और वेबसाइट के अनावरण के अवसर पर बोल रहे थे।
11 प्रमुख वस्त्र उद्योग निकायों द्वारा आयोजित और वस्त्र मंत्रालय द्वारा समर्थित भारत टेक्स 2025, भारत के वस्त्र क्षेत्र की विविधता, पैमाने और क्षमता को प्रदर्शित करने वाला एक ऐतिहासिक कार्यक्रम है। 2.2 मिलियन वर्ग फीट के क्षेत्र में फैले इस कार्यक्रम में 5,000 से अधिक प्रदर्शकों, 120 देशों के 6,000 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और 1,20,000 से अधिक आगंतुकों के आने की उम्मीद है। प्रदर्शक परिधान, रंग और रसायन, मशीनरी और उपकरण, घरेलू सामान, तकनीकी वस्त्र, हथकरघा और हस्तशिल्प सहित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला का प्रदर्शन करेंगे।
इस कार्यक्रम में 70 से अधिक सम्मेलन सत्र, गोलमेज सम्मेलन और मास्टर कक्षाएं भी होंगी, जिनमें लगभग 100 अंतर्राष्ट्रीय वक्ता चर्चा करेंगे। स्थिरता, निवेश, विनिर्माण 4.0 और भविष्य के फैशन रुझान जैसे विषय एजेंडे पर हावी रहेंगे।
वैश्विक आकार के व्यापार मेले और एक्सपो तथा अंतर्राष्ट्रीय वस्त्र सम्मेलन के अलावा, वस्त्र जगत के इस भव्य आयोजन में कई तरह की गतिविधियां, सेमिनार, सीईओ गोलमेज बैठकें और बी2बी (बिज़नेस-टू-बिज़नेस) तथा जी2जी (सरकार से सरकार तक की सेवाएं) बैठकें भी होंगी। इसमें रणनीतिक निवेश घोषणाएँ, उत्पाद लॉन्च और वैश्विक वस्त्र उद्योग को नया आकार देने के लिए सहयोग की भी घोषणाएं होंगी। उपस्थित लोग लाइव प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और फैशन प्रस्तुतियाँ, डिज़ाइनर और ब्रांड प्रदर्शनियाँ और स्थिरता कार्यशालाएँ और विशेषज्ञ वार्ताएँ देख सकते हैं। भारत टेक्स 2025 का उद्देश्य भारत की संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला को प्रदर्शित करने के लिए एक अद्वितीय और समेकित मंच के रूप में काम करना है। फैशन, पारंपरिक शिल्प और स्थिरता पहलों में इसकी ताकत को उजागर करना है। यह आयोजन एक उद्योग द्वारा संचालित पहल है और इसे 11 वस्त्र संबंधी निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और अन्य उद्योग निकायों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाएगा। इसे वस्त्र मंत्रालय का सहयोग प्राप्त है।
भारत टेक्स को एक उन्नत प्रौद्योगिकी मंच पर चलाया जा रहा है जो आगंतुकों, प्रदर्शकों और खरीदारों को एक स्रोत से जुड़ने की सुविधा प्रदान करता है। भारत टेक्स ऐप, इस सबसे बड़े वैश्विक टेक्सटाइल इवेंट के लिए निर्बाध जुड़ाव, नेटवर्किंग और सूचना प्रसार की सुविधा के लिए डिज़ाइन किए गए समग्र प्रौद्योगिकी प्लेटफ़ॉर्म का एक हिस्सा है। प्रदर्शक प्रोफाइल, सत्र विवरण और इंटरैक्टिव मानचित्रों की पेशकश करके उपयोगकर्ता की सुविधा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह खरीदारों, प्रदर्शकों और आगंतुकों के लिए भारत के टेक्सटाइल इको-सिस्टम के विशाल पैमाने और विविधता का पता लगाने, वैश्विक हितधारकों से जुड़ने और एक्सपो के दौरान और बाद में प्रमुख घटनाओं के बारे में जानकारी रखने के लिए एक व्यापक उपकरण है।
ऐप उपयोगकर्ताओं को फाइबर, यार्न, परिधान और फैशन, होम टेक्सटाइल, हैंडलूम, तकनीकी वस्त्र और बुद्धिमान विनिर्माण को कवर करने वाली संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला में नवीनतम विकास और तकनीकी उन्नति का पता लगाने की अनुमति प्रदान करता है। स्थल मानचित्रों, सत्र विवरण और अधिक लोगों तक आसान पहुंच के साथ, ऐप पेपर गाइड की आवश्यकता को समाप्त करता है, जो एक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल अनुभव प्रदान करता है। ऐपल ऐप स्टोर और गुगल प्ले स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध, भारत टेक्स 2025 ऐप उन सहभागियों के लिए एक आवश्यक उपकरण है जो अपने अवसरों का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए कार्यक्रम को कुशलतापूर्वक नेविगेट करना चाहते हैं। भारत टेक्स 2025 के लॉन्च के साथ प्रदर्शकों, खरीदारों और आगंतुकों के पास इवेंट की जानकारी तक पहुँचने, नेटवर्क विकसित करने और अपनी भागीदारी को कुशलतापूर्वक योजना बनाने के लिए उपयोग में आसान प्लेटफ़ॉर्म तक पहुंच होगी।
प्रयागराज महाकुंभ 2025 में साहित्य, संस्कृति और ज्ञान का संगम : रीडिंग लाउंज बना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
मोबाइल पुस्तक प्रदर्शनी और राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय ऐप से श्रद्धालुओं को मिल रही डिजिटल सुविधा
डेस्क | प्रयागराज महाकुंभ 2025 में जहां करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, वहीं मेले में लगे विभिन्न प्रदर्शनी पंडालों में साहित्य, संस्कृति और ज्ञान की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा महाकुंभ में श्रद्धालुओं के ज्ञानवर्धन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे आम जनता को न केवल सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी मिल रही है, बल्कि वे आधुनिक तकनीकों के जरिए इन योजनाओं को और बेहतर ढंग से समझ भी रहे हैं। इसी कड़ी में शिक्षा मंत्रालय के तहत कार्यरत स्वायत्त संस्थान नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) ने एक अनूठी पहल करते हुए महाकुंभ मेले में रीडिंग लाउंज की स्थापना की है, जहां श्रद्धालु निःशुल्क किताबें पढ़ सकते हैं और ज्ञान के इस भव्य मेले में साहित्यिक आनंद का अनुभव कर सकते हैं।

एनबीटी का यह रीडिंग लाउंज सेक्टर 1, परेड ग्राउंड, प्रयागराज में नमामि गंगे मंडप के अंदर स्थापित किया गया है, जो श्रद्धालुओं के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो रहा है। इस लाउंज में 619 शीर्षकों की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें भारतीय दर्शन, भारतीय संस्कृति और कुंभ मेले पर आधारित साहित्य शामिल है। श्रद्धालुओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए यहां 'कुंभ के मेले में मंगलवासी', 'भारत में कुंभ' और 'ए विजिट टू कुंभ' जैसी पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा, इस लाउंज में अन्य भाषाओं की किताबें भी मौजूद हैं, जिससे गैर-हिंदीभाषी श्रद्धालु भी इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। विशेष रूप से 'प्रधानमंत्री युवा योजना' के तहत युवा लेखकों द्वारा लिखी गई किताबें भी यहां प्रदर्शित की गई हैं, जिससे नए लेखकों को प्रोत्साहन मिल रहा है।
एनबीटी के मार्केटिंग से जुड़े अधिकारी आशीष राय ने बताया कि महाकुंभ में भारत की संस्कृति पर आधारित पुस्तकों की मांग सबसे अधिक है, जिसे देखते हुए इस लाउंज में विशेष रूप से सांस्कृतिक साहित्य को प्रमुखता दी गई है। गैर-हिंदीभाषी श्रद्धालु गंगा नदी पर लिखी किताब 'द गंगा', 'वेदा कल्पतरु' और 'एंसिएंट तमिल लीजेंड' जैसी पुस्तकों में विशेष रुचि ले रहे हैं। इस लाउंज की एक और विशेषता यह है कि अगर किसी श्रद्धालु को कोई किताब पसंद आती है, तो वह उसे 25 प्रतिशत की छूट के साथ खरीद भी सकता है।
एनबीटी ने महाकुंभ मेला 2025 में 'एनबीटी पुस्तक परिक्रमा' (मोबाइल पुस्तक प्रदर्शनी) की भी व्यवस्था की है, जिसके तहत 1150 शीर्षकों की किताबों से सुसज्जित एक सचल पुस्तक प्रदर्शनी बस चलाई जा रही है। इस मोबाइल पुस्तक प्रदर्शनी में श्रद्धालु महाकुंभ परिसर में कहीं भी चलते-फिरते अपनी पसंद की किताबें देख और खरीद सकते हैं। इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के बारे में भी जानकारी दी जा रही है, जिसमें श्रद्धालुओं को बताया जा रहा है कि वे अपने मोबाइल फोन पर राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय ऐप कैसे इंस्टॉल कर सकते हैं और क्यूआर कोड स्कैन करके हजारों ई-पुस्तकों को पढ़ने की सुविधा कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
महाकुंभ में स्थापित एनबीटी का यह रीडिंग लाउंज न केवल श्रद्धालुओं के लिए ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान कर रहा है, बल्कि साहित्य, संस्कृति और डिजिटल ज्ञान की नई धारा को भी प्रवाहित कर रहा है। यह पहल श्रद्धालुओं को धार्मिक, आध्यात्मिक और समकालीन साहित्य के करीब ला रही है, जिससे महाकुंभ केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और साहित्य के अद्भुत संगम का केंद्र बन गया है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बना : अश्विनी वैष्णव
आयात से स्वतंत्रता तक: भारत में बिकने वाले 99.2% मोबाइल फोन अब स्थानीय स्तर पर बनाए जाते हैं, विनिर्माण मूल्य बढ़कर 4,22,000 करोड़ रुपये हो गया है जबकि निर्यात 2024 में 1,29,000 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा।
2014 में 2 इकाइयों से बढ़कर आज देशभर में 300 से अधिक इकाइयां काम कर रही हैं: अश्विनी वैष्णव
'मेक इन इंडिया' ने चार्जर, बैटरी पैक से लेकर कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल आदि प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया है।
भारत सेमीकंडक्टर चिप्स और महीन कलपुर्जों के विकास पर ध्यान देने के साथ विनिर्माण की मूल्य श्रृंखला मज़बूत करके अपनी दिशा बदल रहा है।
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री का 'मेक इन इंडिया' दृष्टिकोण भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने में मदद कर रहा है। अपने शुरू होने के एक दशक के भीतर मेक इन इंडिया कार्यक्रम न केवल हमारी आत्मनिर्भरता को बढ़ा रहा है बल्कि उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है और रोजगार भी पैदा कर रहा है। इस संबंध में डेटा साझा करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दशक में भारत के मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन पर प्रकाश डाला।

भारत ने मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माण देश बन गया है । 2014 में भारत में केवल 2 मोबाइल विनिर्माण इकाइयाँ थीं, लेकिन आज देश में 300 से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ हैं जो इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में महत्वपूर्ण विस्तार को रेखांकित करती हैं।
2014-15 में भारत में बिकने वाले सिर्फ़ 26% मोबाइल फ़ोन भारत में बने थे, बाकी आयात किए जा रहे थे। गौरतलब है कि आज भारत में बिकने वाले 99.2% मोबाइल फ़ोन भारत में ही बनते हैं । मोबाइल फ़ोन का विनिर्माण मूल्य वित्त वर्ष 2014 में 18,900 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 4,22,000 करोड़ रूपये हो गया है ।
भारत में हर साल 325 से 330 मिलियन से ज़्यादा मोबाइल फ़ोन बनाए जा रहे हैं और औसतन भारत में लगभग एक बिलियन मोबाइल फ़ोन उपयोग में हैं। भारतीय मोबाइल फ़ोन ने घरेलू बाज़ार को लगभग परिपूर्ण कर दिया है और यही वजह है कि मोबाइल फ़ोन के निर्यात में काफ़ी वृद्धि हुई है। 2014 में निर्यात लगभग न के बराबर था, जो अब ₹1,29,000 करोड़ से ज़्यादा हो गया है।
इस क्षेत्र का विस्तार रोजगार का एक प्रमुख स्रोत भी रहा है जिसने पिछले दशक में लगभग 12 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा किए हैं । इन रोजगार अवसरों ने न केवल कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाया है, बल्कि देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में भी योगदान दिया है।
इन मील के पत्थरों को हासिल करने में 'मेक इन इंडिया' पहल की अहम भूमिका रही है। इसने चार्जर, बैटरी पैक, सभी प्रकार के मैकेनिक्स, यूएसबी केबल जैसे महत्वपूर्ण कलपुर्जों और उप-असेंबली के घरेलू उत्पादन को सक्षम बनाया है और लिथियम आयन सेल, स्पीकर और माइक्रोफोन, डिस्प्ले असेंबली और कैमरा मॉड्यूल जैसे अधिक जटिल घटकों का उत्पादन किया है।
भविष्य में मूल्य श्रृंखला में और अधिक गहराई से आगे बढ़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विशेष रूप से कलपुर्जों और अर्धचालकों के उत्पादन में। यह बदलाव आत्मनिर्भरता बढ़ाने और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में पंक्ति में पहले स्थान पर स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब मूल्य श्रृंखला में और गहराई से आगे बढ़ने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जिसमें बढ़िया कलपुर्जों और सेमीकंडक्टर उत्पादन पर अधिक जोर दिया जा रहा है जिससे इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे पारिस्थितिकी तंत्र का स्वदेशी विकास सुनिश्चित हो सके। इससे वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
1950 से 1990 के बीच प्रतिबंधात्मक नीतियों ने विनिर्माण को बाधित किया। हालांकि, 'मेक इन इंडिया' मूल्य श्रृंखला में गहराई से प्रवेश करके और घटकों और चिप्स के उत्पादन को बढ़ाकर इस प्रवृत्ति पलट रहा है।
रॉयल भूटान आर्मी के चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर ने नई दिल्ली में रक्षा मंत्री से भेंट की
राजनाथ सिंह ने 'पड़ोसी प्रथम' नीति के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने के लिए भारत की तत्परता की पुष्टि की
नई दिल्ली | रॉयल भूटान आर्मी (आरबीए) के चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर (सीओओ) लेफ्टिनेंट जनरल बातू शेरिंग ने 04 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भेंट की और द्विपक्षीय संबंधों पर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। वार्ता के दौरान, रक्षा मंत्री ने अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार तथा भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति के अनुरूप, भूटान की क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से रक्षा उपकरणों एवं संपत्तियों के प्रावधान सहित, रक्षा तैयारियों के लिए क्षमता बढ़ाने में भूटान का सहयोग करने की भारत की तत्परता की पुष्टि की।

इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल बातू शेरिंग ने भारत सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना की और भूटान को उसकी आधुनिक रक्षा क्षमताओं तथा आरबीए के प्रशिक्षण को बढ़ाने में सहायता करने के लिए भारत को धन्यवाद दिया। उन्होंने क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए साझा दृष्टिकोण को साकार करने के उद्देश्य से भारत के साथ मिलकर कार्य करने की रॉयल भूटान आर्मी की दृढ़ प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की।
रॉयल भूटान आर्मी के चीफ ऑपरेशन्स ऑफिसर 02-05 फरवरी, 2025 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा दोनों देशों के बीच निरंतर उच्च स्तरीय जुड़ाव का हिस्सा है और इसने द्विपक्षीय रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों को अधिक विस्तार देने का अवसर प्रदान किया है।
पीएम मोदी ने त्रिवेणी संगम में किया स्नान... CM योगी संग लिया नौका विहार का आनंद
डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार 5 फरवरी को प्रयागराज पहुंचकर त्रिवेणी संगम में स्नान किया। इस दौरान उनके साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। दोनों ने साथ मिलकर यमुना नदी में नौका विहार भी किया। महाकुंभ 2025 की शुरुआत 13 जनवरी 2025 को हुई थी और 26 फरवरी 2025 तक यानी महाशिवरात्रि तक चलेगा। दुनिया के इस सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आ रहे हैं।
त्रिवेणी संगम में स्नान करने से पहले पीएम मोदी और सीएम योगी ने यमुना नदी में नौका विहार का भी आनंद लिया। पीएम मोदी ने नदी में खड़े होकर मंत्रोच्चार करते हुए मां गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने रुद्राक्ष की माला भी धारण कर रखी थी। बता दें, पिछले तीन महीनों में प्रधानमंत्री का यह यह दूसरा प्रयागराज दौरा है। इससे पहले, पीएम 13 दिसंबर 2024 को प्रयागराज आए थे। तब उन्होंने 5,500 करोड़ रुपये की 167 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया था।
बुधवार सुबह से ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में पर लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान करने पहुंच रहे थे। इनमें कल्पवासी और अन्य तीर्थयात्री शामिल थे। उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार, महाकुंभ में 4 फरवरी 2025 तक स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या लगभग 40 करोड़ पहुंच चुकी है। महाकुंभ हर 12 वर्षों बाद आयोजित होता है।