देश-विदेश
भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिये अत्याधुनिक निजी अस्पताल भी जरूरीः मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिये अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित निजी अस्पताल भी जरूरी हैं। खुशी की बात है ग्वालियर की धरती पर आज ऐसे ही एक बड़े अस्पताल की शुरूआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम ग्वालियर में 100 बिस्तरीय देवराज अस्पताल (देवराज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अस्पतालों को आरोग्य मंदिर का नाम दिया है। प्रसन्नता का विषय है कि एक किसान परिवार ने ग्वालियर में अपने बेटे की स्मृति में एक अस्पताल अर्थात आरोग्य मंदिर की स्थापना की है। उन्होंने इसके लिये देवराज अस्पताल के संस्थापक श्री करन सिंह किरार एवं उनके परिवार को बधाई और शुभकामनायें दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी इस पुनीत पहल के लिये करन सिंह के परिवार का सम्मान और आदर करती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब पूरी दुनिया में कोरोना का हाहाकार मचा हुआ था, तब प्रधानमंत्री ने भारत के संसाधनों और बौद्धिक क्षमताओं का उपयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया। प्रधानमंत्री ने भारत के समस्त नागरिकों को कोरोना से बचाव के नि:शुल्क टीके लगवाए। साथ ही दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन भेजकर “जियो और जीने दो” के सिद्धांत को चरितार्थ करके दिखाया। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि ऋषि गालव की तपोभूमि, तानसेन की साधना स्थली, वीरांगना लक्ष्मीबाई की बलिदान स्थली एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया की कर्म भूमि ग्वालियर में यह अस्पताल गरीब मरीजों के इलाज में अहम योगदान देगा।
रतन टाटा का 86 वर्ष की उम्र में निधन, मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में ली आखिरी सांस
डेस्क। दुनिया के जाने-माने उद्योगपति टाटा ग्रुप के प्रमुख रतन टाटा का बुधवार रात निधन हो गया है। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांसें ली। टाटा के चेयरमैन एन चंद्रशेखर ने बयान जारी करते हुए कहा, ‘हम अत्यंत क्षति की भावना के साथ श्री रतन नवल टाटा को अंतिम विदाई दे रहे हैं। एक असाधारण नेता जिनके अतुलनीय योगदान ने न केवल टाटा समूह को आकार दिया बल्कि हमारे राष्ट्र का मूल ताना-बाना भी बुना। टाटा समूह के लिए, श्री टाटा एक चेयरपर्सन से कहीं अधिक थे। मेरे लिए वह एक गुरु थे, मार्गदर्शक और मित्र भी थे।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा – रतन टाटा जी एक दूरदर्शी बिजनेस लीडर, दयालु आत्मा और एक असाधारण इंसान थे। उन्होंने भारत के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित व्यापारिक घरानों में से एक को स्थिर नेतृत्व प्रदान किया। साथ ही, उनका योगदान बोर्डरूम से कहीं आगे तक गया। अपनी विनम्रता, दयालुता और हमारे समाज को बेहतर बनाने के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने कई लोगों के बीच अपनी जगह बनाई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रतन टाटा के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि रतन टाटा दूरदृष्टि वाले व्यक्ति थे। उन्होंने व्यापार परोपकार दोनों पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके परिवार और टाटा समुदाय के प्रति मेरी संवेदनाएं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उद्योगपति, पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित किया। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, मानव कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उनके योगदान को भारतवासी सदैव याद रखेंगे। उनका सादगी पूर्ण जीवन, नैतिक नेतृत्व और परोपकार की भावना एक मिसाल थी। वह सदैव हमारी यादों में जीवित रहेंगे। उनका निधन भारत और उद्योग जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। देश और समाज में बेहतर बदलाव के लिए उनके द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्य हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों, उनके शुभचिंतकों को संबल प्रदान करने की विनम्र प्रार्थना करता हूं।
सुप्रसिद्ध उद्योगपति, पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित श्री रतन टाटा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित किया। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, मानव कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों और देश की अर्थव्यवस्था को…
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) October 9, 2024
यूएनएफपीए ने मातृ स्वास्थ्य और परिवार नियोजन में अग्रणी भूमिका के लिए भारत का सम्मान किया
2000 और 2020 की अवधि में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) को 70 प्रतिशत तक कम करने के भारत के उल्लेखनीय प्रयासों की सराहना
नई दिल्ली | संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) ने मातृ स्वास्थ्य और परिवार नियोजन को आगे बढ़ाने में भारत की उल्लेखनीय प्रगति को मान्यता दी है। यूएनएफपीए की कार्यकारी निदेशक डॉ. नतालिया कनम ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को पट्टिका और प्रमाण पत्र से सम्मानित किया। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में भारत के साथ साझेदारी के लिए यूएनएफपीए की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, मातृ मृत्यु दर को शून्य पर लाने के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए मातृ स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए कई कार्यक्रम चला रहा है। इनमें सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना (सुमन), प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) और दाई सेवा पहल के तहत सुनिश्चित गुणवत्ता और सम्मानजनक मातृत्व देखभाल शामिल है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक आराधना पटनायक, प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) की संयुक्त सचिव मीरा श्रीवास्तव, यूएनएफपीए के एशिया प्रशांत क्षेत्रीय निदेशक पियो स्मिथ और यूएनएफपीए में भारत की प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोजनार की उपस्थिति में, डॉ. कनम ने 2000 और 2020 के बीच मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) को 70 प्रतिशत तक कम करने में भारत के उल्लेखनीय प्रयासों की सराहना की, जिससे भारत 2030 से पहले एमएमआर को 70 प्रतिशत से नीचे लाने के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को प्राप्त करने की स्थिति में आ गया है। इस उल्लेखनीय प्रगति ने देश भर में हजारों महिलाओं, विशेष रूप से वंचित समुदायों की महिलाओं के जीवन को बचाया है।
भारत का परिवार नियोजन कार्यक्रम नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, कुल प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर (टीएफआर-2) से नीचे आ गई है। पिछले कुछ वर्षों में और हाल ही में सबडर्मल इम्प्लांट्स और इंजेक्टेबल डिपो मेड्रोक्सीप्रोजेस्टेरोन एसीटेट (डीएमपीए) को शामिल करने के साथ-साथ यूएनएफपीए ने गर्भनिरोधक विकल्पों का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जैसे कि भारत ने मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य (पीएमएनसीएच) और परिवार नियोजन 2030 (एफपी 2030) वैश्विक साझेदारी में प्रमुख स्थान प्राप्त किया, वैश्विक प्रजनन स्वास्थ्य मंचों पर मंत्रालय की अग्रणी भूमिका को स्वीकार किया गया है।
बैठक के दौरान, डॉ. कनम ने महिलाओं, लड़कियों और युवाओं के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने में भारत के प्रयासों में सहयोग के लिए यूएनएफपीए की दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
यूएनएफपीए, भारत सरकार के साथ साझेदारी के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। हमारा देश 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण की ओर आगे बढ़ रहा है और यह आयोजन भारत में प्रत्येक महिला और युवा व्यक्ति के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने के साझा मिशन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस कार्यक्रम में परिवार नियोजन/गर्भाधान-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक/एबीपी अतिरिक्त आयुक्त डॉ. इंदु ग्रेवाल, मातृ स्वास्थ्य एवं टीकाकरण अतिरिक्त आयुक्त डॉ. पवन कुमार, पोषण एवं किशोर स्वास्थ्य उपायुक्त डॉ. जोया अली रिजवी, यूएनएफपीए के प्रतिनिधि और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भारतीय वायु सेना की 92वीं वर्षगांठ पर वायु योद्धाओं, सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं
नई दिल्ली | चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने 08 अक्टूबर, 2024 को वायु सेना (आईएएफ) की 92वीं वर्षगांठ पर सभी वायु योद्धाओं, सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दी हैं।
सीडीएस ने अपने संदेश में कहा, “1932 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय वायु सेना वीरता, उत्कृष्टता और राष्ट्रीय गौरव के एक उज्ज्वल उदाहरण के रूप में उभरी है। वायु वीरों ने युद्धों और मानवीय मिशनों में निर्णायक योगदान देते हुए भारत के वायु क्षेत्र की रक्षा की है। उनकी निस्वार्थ सेवा, सूक्ष्मता और बहादुरी श्रद्धा को प्रेरित करती है, और उनके अटूट समर्पण और अद्वितीय सेवा का प्रमाण हैं। आज हम इस विरासत का सम्मान करते हैं और स्वीकार करते हैं।”

“हमने राफेल जेट और अपाचे हेलीकॉप्टर जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को शामिल करके अपनी क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारतीय वायुसेना के आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करने से हल्के लड़ाकू विमान तेजस और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड का सफल विकास हुआ है, जो स्वदेशी नवाचार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारे वायु योद्धाओं ने मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रयासों सहित विभिन्न अभियानों में असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया है, जो भारतीय वायुसेना की तत्परता और जवाबदेही को दर्शाता है। रखरखाव सहायता प्रणालियों को मजबूत किया गया है, जिससे विमान की अधिकतम सेवा क्षमता सुनिश्चित हुई है और डाउनटाइम यानी किसी खामी की वजह से बेकार पड़े रहने का समय कम हुआ है। हमने मित्र देशों के साथ संयुक्त अभ्यास और सहकार्यता में भाग लेकर अपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत किया है। इन गतिविधियों ने हमारी परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाया है और वैश्विक विमानन समुदाय में सहयोग को बढ़ावा दिया है।
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि एक शक्तिशाली तकनीक-संचालित बल के रूप में भारतीय वायुसेना भारत की संप्रभुता और हितों की रक्षा करते हुए सतर्क है। यह प्रौद्योगिकी में नवीनतम प्रगति का उपयोग करने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और अपने जवानों की विशेषज्ञता को पोषित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना हमारे देश के हितों की रक्षा करते हुए और साहस, प्रतिबद्धता तथा उत्कृष्टता के मूल्यों को बनाए रखते हुए और अधिक ऊंचाइयों को छूती रहेगी।
सीडीएस ने सभी श्रेणी के जवानों और उनके परिवारों के प्रति हार्दिक आभार और प्रशंसा व्यक्त की और कहा कि उनकी निस्वार्थ सेवा प्रेरणा की किरण है और राष्ट्र इस महत्वपूर्ण अवसर पर उनका सम्मान करता है।
सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून ने 83वां सीएसआईआर स्थापना दिवस मनाया
नई दिल्ली | सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) ने 7 अक्टूबर, 2024 को बड़े गौरव के साथ वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) का 83वां स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान इसकी उपलब्धियों और निरंतर विकास के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया गया।
बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशक एवं प्रमुख (अनुसंधान और विकास) श्री चंद्रशेखर एन इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और लुम्मस टेक्नोलॉजी के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रामा राव मर्री विशिष्ट अतिथि थे।
समारोह की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई जो ज्ञान के आलोक और शुभारंभ का प्रतीक है। अपने उद्घाटन भाषण में सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डॉ. एचएस बिष्ट ने स्वतंत्रता की शतवार्षिकी मनाने के करीब पहुंचने के साथ ही भारत में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे अभिनव समाधानों की आवश्यकता पर भी जोर दिया जो दीर्घकालिक रूप से भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंद्रशेखर एन ने कार्बन उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन के संबंध में भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों को पूरा करने के लिए संसाधनों का मिलकर उपयोग करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने नवाचार और ऐसे व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए सार्थक बदलाव लाने में अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के बीच साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया जो टिकाऊ हों।
मुख्य अतिथि रामा राव मर्री ने "भारत की विकास पहलों के लिए भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) और लुम्मस के संभावित सहयोग" पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उन प्रौद्योगिकियों के महत्व पर जोर दिया जिससे स्वच्छ भारत और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (जीबीए) पहलों का संबंध है। उन्होंने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रदूषण के निपटारे, अकार्बनीकरण से जुड़ी रणनीतियों को लागू करने तथा जैव ईंधन उत्पादन और जैव-पेट्रो रसायन उत्पादों सहित हरित प्रौद्योगिकियों के विकास के उन प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डाला जिन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
समारोह में सीएसआईआर में 25 वर्षों की समर्पित सेवा देने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ 30 सितंबर, 2023 और 31 अगस्त, 2024 के बीच सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। उनके योगदान ने संस्थान की विरासत को समृद्ध किया है।
इस दौरान, उत्कृष्टता को मान्यता देने की परंपरा के अनुरूप, "स्वच्छता मिशन" पहल के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। आईआईपी का स्वच्छता अभियान समुदाय को प्रेरणा देने का काम करता है, स्वच्छता बनाए रखने में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करता है और पर्यावरण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देता है। सीएसआईआर-आईआईपी के प्रयोगशाला प्रतिनिधियों को स्वच्छ और व्यवस्थित कार्यस्थल बनाए रखने की उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया।
इस उत्सव के दौरान शाम को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें आईआईपी के कर्मचारियों, छात्रों, परियोजना कर्मियों और नियमित कर्मचारियों के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने गीत और नृत्य के माध्यम से उत्साह के साथ प्रस्तुतियां दीं। समारोह में बैडमिंटन स्पर्धा के लिए पुरस्कार वितरण भी किया गया, जिससे समुदाय में और अधिक उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम का समापन सीएसआईआर-आईआईपी के मुख्य वैज्ञानिक और एससीडीडी के प्रमुख डॉ. हेमंत मधुकर कुलकर्णी के हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
सीएसआईआर-आईआईपी विश्व स्तरीय अनुसंधान संगठन होने के सीएसआईआर के दृष्टिकोण को कायम रखते हुए, राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने वाले उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उमर अब्दुल्ला होंगे जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री
डेस्क। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन जीत की ओर बढ़ रहा है। रुझानों में गठबंधन ने बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री होंगे। आगे उन्होंने कहा, ‘लोगों ने अपना जनादेश दे दिया है। उन्होंने साबित कर दिया है कि वे 5 अगस्त को लिए गए फैसले को स्वीकार नहीं करते।
बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बडगाम सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने पीडीपी के आगा सैय्यद मुंतजिर मेहदी को 18,485 वोटों से हराया। उमर अब्दुल्ला को 36010 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी आगा सैय्यद मुंतजिर मेहदी को 17,525 वोट मिले।
आईआईपीए को कर्मयोगी कार्यक्रम के साथ मिलकर काम करना चाहिए : केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों के क्लब तक ही सीमित रखने के बजाय आईआईपीए की सदस्यता को युवा अधिकारियों के लिए खोलने का निर्णय लिया
नई दिल्ली | केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) जैसे संस्थानों को शासन प्रणाली की नई चुनौतियों से निपटने के लिए न केवल केंद्र सरकार, बल्कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवा सिविल सेवकों को प्रशिक्षण देने के भारत सरकार के कर्मयोगी कार्यक्रम के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
जितेंद्र सिंह ने यहां भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) की 325वीं कार्यकारी परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में कार्यरत सहायक सचिवों को बेहतर समझ के लिए आईआईपीए में उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं प्रशासन विधियों से अवगत कराया जाना चाहिए। ऐसा अनुभव हासिल करके वे अधिक जागरूक नौकरशाह बन सकेंगे।
स्मरणीय है कि 2020 में परिकल्पित, प्रमुख मिशन कर्मयोगी को सिविल सेवकों की दक्षता और क्षमता निर्माण की नींव को मजबूत करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है ताकि वे दुनियाभर के सर्वोत्तम संस्थानों और विधियों से ज्ञान हासिल करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और इसकी भावनाओं तथा अपनी जड़ों से जुड़े रहें। इस कार्यक्रम को एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण-आईगॉटकर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।
सिविल सेवाओं की क्षमता विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान करने, कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने और मुख्य शासन कार्यों को करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नागरिकों तक सिविल सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के समग्र उद्देश्य के साथ सिविल सेवा क्षमता का निर्माण करने, कार्य संस्कृति में परिवर्तन लाने, लोक संस्थानों को मजबूत करके आधुनिक तकनीक को अपनाकर सिविल सेवा क्षमता में परिवर्तनकारी बदलाव लाने का प्रस्ताव है।
जितेंद्र सिंह ने आईआईपीए में युवा अधिकारियों को शामिल करने के बारे में कहा, "हमने इसकी सदस्यता युवा अधिकारियों के लिए खोलने का निर्णय लिया क्योंकि यह सिर्फ सेवानिवृत्त अधिकारियों के क्लब तक सीमित हो रहा था और सदस्यता संबंधी परिणाम बहुत ही फायदेमंद रहे हैं। पिछले दो वर्षों में हमारे पास सहायक सचिवों में ऐसे सबसे युवा सदस्य हैं जो हाल ही में मसूरी से प्रशिक्षण पूरा करके आये हैं।
उन्होंने आईआईपीए को अपने सदस्यता अभियान के बारे में सोचने का सुझाव भी दिया क्योंकि बहुत से लोगों ने जानकारी नहीं होने की वजह से इसकी सदस्यता नहीं ली है। उन्होंने कहा, "हम हर साल यही कर रहे हैं कि हमारे पास सहायक सचिवों का एक समूह होता है और इससे पहले कि वे अपने संबंधित कैडर में जाएं, हम उनसे अनुरोध करते हैं या उन्हें सदस्यता प्राप्त करने का सुझाव देते हैं क्योंकि सामान्य तौर पर उनमें से अधिकांश को इसकी जानकारी नहीं होती है, लेकिन एक बार जब उन्हें इसके बारे में बताया जाता है तो वे इसके सदस्य बनकर बहुत खुश होते हैं।"
आईआईपीए की स्थापना 29 मार्च, 1954 को की गई थी और यह सिविल सेवाओं में दक्षता निर्माण संबंधी अपने संस्थापकों के दृष्टिकोण में विश्वास करता है। आईआईपीए का लक्ष्य लोक शासन, नीतियों और कार्यान्वयन पर विचार और प्रभाव रखने वाले विश्व के अग्रणी शैक्षणिक केंद्रों में से एक बनना है ताकि लोक सुशासन प्रणालियां मानवीय आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं के प्रति अधिक उत्तरदायी हो। यह सरकार के मानव संसाधनों के विकास और प्रबंधन के लिए कुशल, प्रभावी, जवाबदेह, उत्तरदायी, पारदर्शी और नैतिक शासन के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने में भी विश्वास करता है।
एक दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर गंभीर बीमारी : प्रोजेरिया से पीड़ित 28 साल के सैमी बैसो का निधन
डेस्क | एक दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर गंभीर बीमारी प्रोजेरिया से पीड़ित 28 साल के सैमी बैसो का रविवार को निधन हो गया। यह जानकारी इटालियन प्रोजेरिया एसोसिएशन ने दी। प्रोजेरिया एक ऐसी बीमारी है, जिसे हचिंसन-गिलफोर्ड सिंड्रोम (एचजीपीएस) के नाम से भी जाना जाता है। इस बीमारी से ग्रसित लोगों की उम्र तेजी से बढ़ने लगती है और वे अपनी उम्र से ज्यादा बूढ़े दिखाई देने लगते हैं। इस बीमारी में जीवन की आयु खुद-ब-खुद कम हो जाती है और इलाज के बिना जीने की उम्मीद केवल 13.5 साल रह जाती है।
यह जन्म लेने वाले प्रत्येक आठ मिलियन लोगों में से एक को प्रभावित करती है, दुनिया भर में इसकी घटना प्रत्येक 20 मिलियन में से एक को होती है। 1995 में उत्तरी इतालवी क्षेत्र वेनेटो के शिओ में जन्मे बैसो को दो साल की उम्र में प्रोजेरिया का पता चला था। 2005 में उन्होंने और उनके माता-पिता ने इटालियन प्रोजेरिया एसोसिएशन की स्थापना की।
वह नेशनल ज्योग्राफिक डॉक्यूमेंट्री “सैमीज जर्नी” के जरिए पॉपुलर हुए जिसमें उनके माता-पिता और उनके सबसे अच्छे दोस्तों में से एक, रिकार्डो के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका में शिकागो से लॉस एंजिल्स तक रूट 66 की यात्रा का वर्णन है।
सैमी बैसो 28 वर्षीय एक इतालवी व्यक्ति हैं जो हचिंसन-गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम से प्रभावित हैं, जो अब दुनिया में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं। वह सैमी बैसो के प्रोजेरिया के लिए इतालवी एसोसिएशन के प्रवक्ता और प्रोजेरिया रिसर्च फाउंडेशन के अंतर्राष्ट्रीय राजदूत रहे। एक आणविक जीवविज्ञानी होने के नाते, वह अपनी बीमारी को दो अलग और पूरक तरीकों से जीते रहे, रोगी वाला और शोधकर्ता वाला। वास्तव में, वह प्रोजेरिया के रोगियों का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ इस बीमारी का आणविक और चिकित्सकीय रूप से अध्ययन करने में भी शामिल हैं। वह अपने देश और दुनिया भर में प्रोजेरिया और सामान्य रूप से दुर्लभ बीमारी पर वैज्ञानिक खुलासे पर अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। उन्हें बीमारी के संबंध में जीवन की गरिमा के बारे में बोलने के लिए भी कहा जाता है।
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को बहुमत
नईदिल्ली। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती शुरू हो गई है। शुरुआती रुझानों में हरियाणा में कांग्रेस ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं जम्मू कश्मीर में भी कांग्रेस गठबंधन आगे चल रहा है। जम्मू कश्मीर में 90 सीटों के लिए तीन फेज में वोटिंग हुई थी। वहीं हरियाणा में सिर्फ एक फेज यानी 5 अक्तूबर को मतदान हुआ था।
यहां देखें सुबह 9.30 बजे तक के शुरुआती रूझान
हरियाणा कुल सीट 90 बहुमत 46
जम्मू कश्मीर कुल सीट 90 बहुमत 48

बच्चों को वन्य जीवन और जैव विविधता की महत्ता से बचपन में ही करें संस्कारित : मंगुभाई पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि बच्चों को वन, वन्य जीव और जैव विविधता की महत्ता के बारे में बचपन से ही संस्कारित किया जाना चाहिए। माता-पिता उन्हें जैव संरक्षण की बहुलता और आवश्यकता के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाए। राज्यपाल आज भोपाल में राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने एक से 7 अक्टूबर 2024 तक आयोजित वन्य जीव सप्ताह की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए। साथ ही वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कृत कर बधाई दी। राज्यपाल पटेल ने उपस्थित जनों को वन्य जीव संरक्षण की शपथ भी दिलाई।
राज्यपाल ने कहा कि हमारा संविधान पर्यावरण के संरक्षण, वन और वन्य जीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रदान करता है। मौलिक कर्तव्यों के तहत प्रत्येक नागरिक से पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान की अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के हिसाब से देश के सबसे बड़े वन क्षेत्र होने गौरव प्राप्त है। बाघों के अलावा, तेंदुए, घड़ियाल, चीता, भेड़िये और गिद्धों की सर्वाधिक संख्या के लिये भी प्रदेश पहचाना जाता है। हर प्रदेशवासी की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे वन और वन्य जीव रूपी अमूल्य धरोहर की विरासत को सहेज कर भावी पीढ़ी को सौंपने में अपना योगदान दे।
राज्यपाल ने कहा कि सदी की सबसे बड़ी त्रासदी कोविड ने हम सबको यह सबक दिया है कि हमें सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति की विविधता के प्रति श्रद्धा और सौहार्द्र के साथ रहना होगा। हमारे ऋषि-मुनियों ने भी अपने तप त्याग और साधना से हजारों साल पहले ही इकोलॉजी तंत्र के संरक्षण के लिए प्राणियों में सद्भावना का संदेश दिया था। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वन और वन्यजीवों का विशिष्ट स्थान रहा है। विभिन्न देवी-देवताओं के वाहन वन्यजीव है। अनेक विधि-विधानों में भी पेड़-पौधों की आराधना होती है।
राज्यपाल ने राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह के समापन अवसर पर उपस्थित जनों को वन्य जीव संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि आप सभी अपने कार्य, और व्यवहार में शपथ का 24 घंटे और 365 दिन पालन करे। आपका यह संकल्प वनों और वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा प्रयासों को जन आन्दोलन बनाने में योगदान देगा। इसे अपना कर्तव्य मानकर कार्य करे।
दिल्ली एनसीआर में केंद्र सरकार की वैन पर टमाटर का भाव 65 रुपये प्रति किलोग्राम
उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव ने कहा, इस पहल से उपभोक्ताओं को टमाटर की बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी
नई दिल्ली | उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने टमाटर की बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से टमाटर बेचने वाली राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) वैन को हरी झंडी दिखाई।
एनसीसीएफ मंडियों से सीधे टमाटर खरीदकर 65 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बाजार में उपलब्ध करा रही है। इस पहल का उद्देश्य आम लोगों को टमाटर की कीमतों में हाल ही में हुई वृद्धि से राहत देना और बिचौलियों को होने वाले अप्रत्याशित लाभ को रोकना है। एनसीसीएफ देश भर के प्रमुख शहरों में आम लोगों को सरकारी बफर से 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की आपूर्ति भी लगातार कर रहा है।
मंडियों में लगातार बड़ी मात्रा में टमाटर की आवक के बावजूद हाल के हफ्तों में टमाटर के खुदरा मूल्य में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है। टमाटर के प्रमुख उत्पादक आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लंबी अवधि के मॉनसून के चलते बारिश और उच्च आर्द्रता के कारण हाल के हफ्तों में गुणवत्ता सम्बंधी चिंताएं पैदा हुई हैं। उच्च मांग वाले त्यौहारी सीज़न में टमाटर मौजूदा बढी हुई कीमत में बाज़ार के बिचौलियों की संभावित भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
एनसीसीएफ की पहल निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने, मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने और उपभोक्ता हितों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। किसानों से सीधे जुड़कर और रियायती दर पर टमाटर की पेशकश करके, एनसीसीएफ आम लोगों के लिए कीमत में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
संयुक्त सचिव और एमडी एनसीसीएफ अनुपम मिश्रा, वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार आई.एस. नेगी, आर्थिक सलाहकार डॉ. कामखेंथांग गुइटे सहित विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी टमाटर की खुदरा बिक्री शुभारंभ के मौके पर उपस्थित थे। इस पहल का उद्देश्य देश भर में विभिन्न स्थानों पर उपभोक्ताओं को टमाटर के लिए अधिक किफायती विकल्प प्रदान करके लाभान्वित करना है।
अंतरिक्ष स्टार्टअप के क्षेत्र में कार्य निधि के लिए 1,000 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई हैः जितेंद्र सिंह
‘अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अंक की शुरुआत से अब हमारे 200 से अधिक स्टार्टअप हैं’
अंतरिक्ष क्षेत्र में शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई
नई दिल्ली | केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अंतरिक्ष स्टार्टअप के क्षेत्र में कार्य निधि (वेंचर फंड) के लिए 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने यहां कहा कि यह निर्णय मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों की अवधि में लिया गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को दी जाने वाली उच्च प्राथमिकता का संकेत है। उन्होंने कहा कि देश का अंतरिक्ष क्षेत्र उन तीन या चार क्षेत्रों में से एक है जिन पर सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल 3.0 में ध्यान दिया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि लगभग चार वर्ष पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने का एक क्रांतिकारी निर्णय लिया गया था। न्यू इंडिया स्पेस लिमिटेड (एनआईएसएल) एक नया सार्वजनिक उपक्रम था, जबकि इन-स्पेस इंडिया की स्थापना निजी क्षेत्र के साथ सम्पर्क सेतु (इंटरफेस) के रूप में की गई थी।
उन्होंने बताया कि इसका परिणाम बहुत ही आश्चर्यजनक रूप से सामने आया है और इतने कम समय में सिर्फ एक अंक के स्टार्टअप से आज हमारे 200 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप हैं। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, भारत के कुछ अंतरिक्ष स्टार्टअप वैश्विक क्षमता वाले हैं जो अपनी तरह के स्टार्टअप में से एक हैं। उन्होंने देश के पहले निजी रॉकेट विक्रम-एस का जिक्र किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी, जब अमेरिका के पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने चांद की सतह पर कदम रखा था। हालांकि, 60 वर्ष से भी कम समय की अवधि में भारत का चंद्रयान 3 दुनिया के किसी भी अन्य देश से पहले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि भारत न केवल अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र है, बल्कि अन्य देशों को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण जानकारी देने की स्थिति में भी है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे बताया कि सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रावधान की अनुमति दी है, जो नई पहल और नए उद्यमियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन साबित हुआ है। भारत में 2014 में स्टार्टअप्स की संख्या 350 थी, जो बढ़कर 1.5 लाख से अधिक हो गई है, जिससे भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स ने भी भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था में विशाल योगदान देना शुरू कर दिया है, जो पहले की कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में से प्रथम पांच की ओर बढ़ रही है और कुछ वर्षों में इसके चौथे और तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह रविवार को नई दिल्ली में मोदी सरकार 3.0 के पहले 100 दिनों की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओं के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने गगनयान का जिक्र करते हुए कहा कि हम इस वर्ष के अंत या अगले वर्ष की शुरुआत से पहले रोबोट व्योम मित्र के साथ अंतिम परीक्षण उड़ान भरने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अगले साल यानी 2025 के दौरान गगनयान के माध्यम से पहले भारतीय नागरिक को अंतरिक्ष में भेजा जा सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की एक अनूठी विशेषता यह है कि जिन लोगों का अंतरिक्ष से सीधा संबंध नहीं है और जो भारत के आम नागरिक हैं, वे भी इस बात से गर्व महसूस कर रहे हैं कि भारत अब एक ऐसा राष्ट्र बन गया है जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि अब हम केवल रॉकेट प्रक्षेपण करने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी ने कृषि, सड़क और भवन, स्मार्ट सिटी, शहरी विकास, भूमि राजस्व रिकॉर्ड, स्वास्थ्य सेवा और विभिन्न बुनियादी ढांचे एवं विकास क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू कर दी है।
भारत ने सदैव फर्स्ट रिसपॉन्डर की भूमिका निभाई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
मुझज्जू के सामने मोदी ने गिनवा दिए मालदीव को किए सारे एहसान
नई दिल्ली | भारत ने सदैव मालदीव के लिए फर्स्ट रिसपॉन्डर की भूमिका निभाई है। चाहे मालदीव के लोगों के लिए जरूरी वस्तुएँ की जरूरत पूरा करना हो, प्राकृतिक आपदा के समय पीने का पानी उपलब्ध कराना हो, कोविड के समय वैक्सीन देने की बात हो, भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी होने के दायित्व को निभाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव में हनीमाधू – अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे का वर्चुअल से उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने बोधनका कारक और मालदावा के संबंध सदियों पुराने हैं। भारत मालदीव का सबसे करीबी पड़ोसी और घनिष्ठ मित्र देश है। हमारी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी और सागर विजन में मालदीव का महत्वपूर्ण स्थान है। हमने रक्षा और सुरक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। एकथा हार्बर प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है। इंडियन ओसियन रोजन में स्थिरता और समृद्धि के लिए हम मिलकर काम करेंगे। कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव में फाउंडिंग मेंबर के रूप में जुड़ने के लिए मालदीव का स्वागत है। भारत ने सदैव मालदीव के लिए फर्स्ट रिसपॉन्डर की भूमिका निभाई है। चाहे मालदीव के लोगों के लिए जरूरी वस्तुएँ की जरूरत पूरा करना हो, प्राकृतिक आपदा के समय पीने का पानी उपलब्ध कराना हो, कोविड के समय वैक्सीन देने की बात हो, भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी होने के दायित्व को निभाया है। हमने मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा करने का निर्णय लिया है। हम स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटाने पर भी काम करेंगे। इसके अतिरिक्त, हमने डिजिटल कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित किया है। हम सब मिलकर एक उज्जवल भविष्य के निर्माण के लिए काम करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि चाहे मालदीव के लोगों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करना हो, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पीने का पानी उपलब्ध कराना हो, या कोविड के दौरान टीके पहुंचाना हो, भारत ने हमेशा एक पड़ोसी के रूप में अपना कर्तव्य निभाया है।
भारत विश्व गुरु के रूप में शिक्षक परंपरा को स्थापित करना चाहता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरुकुल परंपरा हमारे देश की शिक्षा का आधार रही है। शिक्षक हमेशा पूज्य थे और पूज्य रहेंगे। भारत विश्व गुरु के रूप में उस शिक्षक परंपरा को स्थापित करना चाहता है, जो गुरुकुल परंपरा चाणक्य से चंद्रगुप्त तक और चंद्रगुप्त से विक्रमादित्य तक हर जगह, हर समय, हर काल में कायम रही है। मुख्यमंत्री रविवार को रवीन्द्र भवन सभागार में शिक्षा भूषण अखिल भारतीय शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह का आयोजन मध्यप्रदेश शिक्षक संघ द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा सरस्वती वंदना के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सुरेश सोनी, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, राज्यसभा सदस्य स्वामी उमेश नाथ जी महाराज कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षा भूषण अखिल भारतीय शिक्षक सम्मान -2024 से डॉ. रामचंद्रन आर., प्रोफेसर के.के. अग्रवाल और प्रोफेसर कुसुमलता केडिया को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के हित में शिक्षा, शिक्षा के हित में शिक्षक और शिक्षक के हित में समाज के उद्देश्य से आयोजित शिक्षक समारोह के आयोजन में शैक्षिक फाउंडेशन और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत की गुरु और गुरुकुल परंपरा में गुरु का बड़ा महत्व है। इतिहास में जब भी कोई प्रश्न खड़े हुए तो गुरु की भूमिका सामने आई। यदि भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को गुरु वशिष्ठ वनवास के लिए नहीं ले जाते तो रामायण में राम का चरित्र अधूरा रहता। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा में गुरु सांदीपनि का उज्ज्वल चरित्र शिष्यों के लिए अनुकरणीय और चुनौतियों में प्रेरणा का स्रोत रहा है।
अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सुरेश सोनी ने कहा कि वास्तव में विकास तभी हो सकता जब हमारे आसपास के परिवेश और जीवन मूल्यों का विकास हो। उन्होंने 1928 में गुजरात विद्यापीठ में दिए गए काका कालेलकर के संबोधन को उद्घृत करते हुए कहा कि शिक्षा ने अपने स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि शिक्षा न तो सत्ता की दासी है और न ही कानून की किन्करी है, न ही यह विज्ञान की सखी है औप न ही कला की प्रतिहारी यह अर्थशास्त्र की बांदी, शिक्षा तो धर्म का पुनर्रागमन है, यह मानव के हृदय, मन और इन्द्रियों की स्वामिनी है। मानव शास्त्र और समाज शास्त्र, इनके दो चरण हैं, तर्क और निरीक्षण शिक्षा की दो आँखें हैं, विज्ञान मस्तिष्क, इतिहास कान और धर्म शिक्षा के हृदय है। सोनी ने बताया कि काका कालेलकर ने अपने संबोधन में कहा था कि उत्साह और उद्यम शिक्षा के फेफड़े हैं। शिक्षा ऐसी जगत जननी जगदम्बा है, जिसका उपासक कभी किसी का मोहताज नहीं होगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।"
मस्कट, ओमान में प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती
नई दिल्ली | भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के भारतीय नौसेना के जहाज तीर, शार्दुल और भारतीय तटरक्षक जहाज वीरा लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती पर 05 अक्टूबर 24 को मस्कट, ओमान पहुंचे। यह पोर्ट कॅाल यात्रा भारत और ओमान के बीच समुद्री क्षेत्र में मौजूदा रक्षा संबंधों को और मजबूत करने का संकेत देती है।
05 से 09 अक्टूबर 24 तक की यात्रा के दौरान, भारतीय नौसेना ओमान की रॉयल नेवी के साथ बंदरगाह पर बातचीत और संयुक्त अभ्यास सहित समुद्री सुरक्षा और अंतर-संचालन के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत करेगी। तैनाती में दोनों नौसेनाओं के बीच प्रशिक्षण आदान-प्रदान, पेशेवर बातचीत और मैत्रीपूर्ण खेल आयोजनों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पिछले दस वर्षों में, यह मस्कट, ओमान में 1टीएस की तीसरी यात्रा है। ये बातचीत नौसेना सहयोग को मजबूत करने और दोनों नौसेनाओं के बीच मौजूदा साझेदारी को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
संयोग से, 1टीएस की यात्रा के दौरान, दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वीएडीएम वी श्रीनिवास 06 से 09 अक्टूबर 24 तक ओमान सल्तनत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यात्रा के दौरान, एफओसीआईएनसी दक्षिण वीएडीएम अब्दुल्ला बिन खामिस बिन अब्दुल्ला अल रइसी, चीफ ऑफ स्टाफ सुल्तान्स आर्म्ड फोर्सेज (सीओएसएसएएफ) और आरएडीम सैफ बिन नासिर बिन मोहसेन अल-रहबी, कमांडर ऑफ रॉयल नेवी ऑफ ओमान (सीआरएनओ) के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। वह ओमान में प्रमुख रक्षा और प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों का भी दौरा करेंगे।
भारतीय नौसेना और ओमान की रॉयल नेवी विभिन्न क्षेत्रों में संचालन, प्रशिक्षण और सहयोगी प्रयासों के अवसरों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग करती हैं। हाल ही में, भारतीय नौसेना और ओमान की रॉयल नेवी स्टाफ वार्ता का छठा दौर 24 जून को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। 1टीएस और सीआईएनसी, एसएनसी की यात्रा दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करती है।
डीआरडीओ ने राजस्थान की पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में चौथी पीढ़ी की वायु रक्षा प्रणाली के सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किए
नई दिल्ली | रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 3 और 4 अक्टूबर, 2024 को राजस्थान की पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में चौथी पीढ़ी की तकनीकी रूप से उन्नत छोटे आकार की अति लघु दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) के तीन उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। ये परीक्षण ऊंची गति वाले लक्ष्यों पर किए गए, जिसमें अधिकतम सीमा और अधिकतम ऊंचाई अवरोधन के बहुत महत्वपूर्ण मापदंडों का प्रदर्शन किया गया। इन विकास परीक्षणों ने विभिन्न लक्ष्यों से संबंधित परिदृश्यों में हथियार प्रणाली की हिट-टू-किल क्षमता को दोहराने की योग्यता को प्रदर्शित किया, जिसमें निकट आना, पीछे हटना और क्रॉसिंग मोड शामिल हैं।
वीएसएचओआरएडीएस मिसाइलों के विकास का काम पूरा हो चुका है और दो उत्पादन एजेंसियों को विकास सह उत्पादन भागीदार (डीसीपीपी) मोड में लगाया गया है। इन परीक्षणों में, डीसीपीपी के माध्यम से प्राप्त मिसाइलों का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप कम समय में प्रारंभिक उपयोगकर्ता परीक्षणों और उत्पादन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
वीएसएचओआरएडीएस एक मानव पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणाली है जिसे अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) द्वारा अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और डीसीपीपी के सहयोग से स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। तीनों सेनाएं शुरू से ही इस परियोजना से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने विकास संबंधी परीक्षणों में भाग लिया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल विकास परीक्षणों में शामिल डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकियों से युक्त यह नई मिसाइल हवाई खतरों के खिलाफ सशस्त्र बलों को और अधिक तकनीकी प्रोत्साहन देगी।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने भी सफल उड़ान परीक्षणों के लिए डीआरडीओ के दल, उद्योग भागीदारों और उपयोगकर्ताओं को बधाई दी।
देश के कई रेलवे स्टेशन ऐसे जहां ट्रेन में बैठने के लिए चाहिए पासपोर्ट
नईदिल्ली। देश में कई रेलवे स्टेशन ऐसे हैं यहां ट्रेन में चढ़ने के लिए आपके पास पासपोर्ट का होना बेहद जरूरी है। इन रेलवे स्टेशनों से ट्रेन पकड़कर आप बहुत कम बजट में विदेश घूम सकते है। आपने ‘पेट्रापोल रेलवे स्टेटशन’ का नाम नहीं सुना हो, लेकिन इस स्टेशन से ट्रेन पकड़कर आप विदेश का सफर कर सकते हैं। इंडो बांग्लादेश बॉर्डर पर ट्रांसिट हब में बने इस रेलवे स्टेशन को एक ब्रॉड गेज लाइन के जरिए बांग्लादेश में खुलना से जोड़ गया है। भारत और बांग्लादेश के बीच चलने वाली इस ट्रेन में चलने के लिए आपके पास टिकट के साथ-साथ लीगल पासपोर्ट और वीजा होना जरूरी है।
इसी तरह से बंगाल के राधिकापुर रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेन आपको विदेश पहुंचाती है। ये स्टेशन पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर में स्थित है, जो दोनों देशों के बीच रेल ट्रांजिट के तौर पर काम करता है। बांग्लादेश की सीमा से महज 4 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल में स्थित हल्दीबाड़ी रेलवे स्टेशन आपको सीधे विदेश पहुंचाती है।
बिहार के सीमा पर बना ये रेलवे स्टेशन आपको नेपाल घूमने का आनंद दिलाता है। आप इस स्टेशन से सीधे नेपाल के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं। जयनगर रेलवे स्टेशन मुख्य तौर पर एक टर्मिनल रेलवे स्टेशन है, जहां से करीब 39 ट्रेनें चलती है। यह ट्रेन नेपाल के जनकपुर में कुर्था रेलवे स्टेशन को जोड़ने का काम करती है। इसके अलावा नेपाल पहुंचाने के लिए जोगबनी रेलवे स्टेशन बिहार को नेपाल से जोड़ती है।
भारत और पाकिस्तान को आपस में जड़ने वाला अटारी रेलवे स्टेशन बेहद अहम है। इसी रेलवे स्टेशन से पाकिस्तान के लिए समझौता एक्सप्रेस चलती है। हालांकि 2019 के बाद से ये ट्रेन भारत की ओर से रोक दी गई है। इस रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ने के लिए भी लोगों को पासपोर्ट और वीजा समेत जरूरी दस्तावेज दिखाना होता है।