सेवा पर्व 2025: विकसित भारत के रंग, कला के संग
नईदिल्ली। संस्कृति मंत्रालय ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक सेवा पर्व 2025 को सेवा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक गौरव के राष्ट्रव्यापी उत्सव के रूप में मनाया। गांधी जयंती पर संपन्न इस पर्व ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित किया, जिसमें सेवा और कला से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से देश भर के छात्रों, कलाकारों, संस्थानों और समुदायों को एक साथ जोड़ा गया।
इस पर्व के समापन दिवस 2 अक्टूबर 2025 को, "विकसित भारत के रंग, कला के संग" विषय के अंतर्गत श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश) और दीव (दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश) में प्रमुख कला कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
श्रीनगर में, एसकेआईसीसी में एक विशाल कला कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें एक हज़ार से ज़्यादा छात्रों और कलाकारों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में श्री बृज मोहन शर्मा (प्रमुख सचिव, संस्कृति, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर), प्रो. ज़हूर ज़रगर (विभागाध्यक्ष, एनआईएसटी) और पद्मश्री फ़ारूक़ अहमद मीर (प्रख्यात शिल्पकार) उपस्थित थे। गणमान्यों ने प्रतिभागियों को एक आधुनिक, विकसित भारत की कल्पना करते हुए क्षेत्र की समृद्ध कलात्मक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
दीव में, आईएनएस खुखरी मेमोरियल और जीएचएसएस (बालिका), राजकीय उच्च विद्यालय (बालक) और गैलेक्सी इंग्लिश मीडियम स्कूल, फुदम सहित कई विद्यालयों में कला कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई। 500 से अधिक छात्रों ने रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम में श्री शिवम मिश्रा (डिप्टी कलेक्टर, दीव), श्री हरेश कपाड़िया (अध्यक्ष, दीव नगरपालिका), श्री रामजी भाई बामनिया (अध्यक्ष, जिला पंचायत, दीव) और श्री अरविंद सोलंकी (निदेशक, शिक्षा विभाग, दीव) उपस्थित थे, जिन्होंने छात्रों को विकसित भारत के विजन में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
2 अक्टूबर को सेवा पर्व 2025 के समापन पर श्रीनगर और दीव में कला कार्यशालाओं के माध्यम से सेवा और रचनात्मकता की भावना को आगे बढ़ाया गया। जहां श्रीनगर ने जम्मू और कश्मीर के सांस्कृतिक गौरव और शिल्प कौशल को प्रतिबिंबित किया, वहीं दीव ने राष्ट्र निर्माण के लिए रचनात्मकता को दिशा देने में विद्यालयों और स्थानीय संस्थानों की सक्रिय भागीदारी को प्रस्तुत किया।
देश भर में सेवा पर्व 2025 के पखवाड़े के दौरान आयोजित होने वाले समारोहों ने भारत की सांस्कृतिक यात्रा के अभिन्न स्तंभों के रूप में सेवा और कला के सार की पुष्टि की और विकसित भारत@2047 के स्वप्न को साकार करने की दिशा में सामूहिक संकल्प को दृढ़ किया।