देश-विदेश

तुलसीघाट पर आज द्वापर का पुनर्जागरण: गंगा बनेंगी कालिंदी, कन्हैया करेंगे कालिया मर्दन

वाराणसी| आज की शाम काशी में केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा होगी—जहां समय की सीमाएं मिट जाएंगी और गंगा की लहरों पर द्वापर युग की छाया उतर आएगी। तुलसीघाट पर जब मां गंगा यमुना का रूप धारण करेंगी, तब काशीवासी साक्षात उस लीला के दर्शक बनेंगे जिसमें बालकृष्ण ने कालिय नाग का दमन किया था।

गंगा की गोद में यमुना का रूप
हर वर्ष एक दिन ऐसा आता है जब गंगा, कालिंदी बनकर श्रीकृष्ण की लीला का मंच बनती हैं। आज वही दिन है। तुलसीघाट पर दोपहर तीन बजे से श्रीकृष्ण लीला का आरंभ होगा, और ठीक 4:40 बजे कान्हा कदंब के वृक्ष से यमुना में छलांग लगाकर कालिय नाग के फन पर नृत्य करेंगे।

लीला का दृश्य: गेंद, वृक्ष और बांसुरी
कन्हैया अपने गोप मित्रों संग कंदुक क्रीड़ा में लीन होंगे। खेलते-खेलते गेंद यमुना में जा गिरेगी। सखाओं के आग्रह पर कान्हा कदंब वृक्ष पर चढ़ेंगे और यमुना में कूद पड़ेंगे। वहां कालिय नाग के फन पर गेंद लिए, बांसुरी बजाते हुए उनका नृत्य होगा—एक ऐसा दृश्य जो हर दर्शक के हृदय में अमिट छाप छोड़ता है।

परंपरा और प्रतिष्ठा का संगम
यह आयोजन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा आरंभ श्रीकृष्ण लीला का हिस्सा है, लेकिन इसकी भव्यता इसे काशी के लक्खा मेलों में स्थान दिलाती है। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र स्वयं श्रीकृष्ण की आरती करेंगे, और पूर्व काशी नरेश परिवार के अनंत नारायण सिंह सपरिवार इस दिव्य लीला के साक्षी बनेंगे।

जयकारों से गूंजेगा घाट
जब श्रीकृष्ण यमुना में उतरेंगे, तब घाट पर उपस्थित हजारों श्रद्धालु “कन्हैया लाल की जय” से वातावरण को गुंजायमान करेंगे। यह केवल एक मंचन नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कृति और स्मृति का संगम है। 
----------