दिव्य महाराष्ट्र मंडल
16 स्थानों पर लगातार 52वें सप्ताह रामरक्षा स्त्रोत व हनुमान चालीसा पाठ आज
नेशनल रिंग फाइट में शामिल होने छत्तीसगढ़ की टीम कर्नूल रवाना
रायपुर। आंध्रप्रदेश के कर्नूल में आयोजित 8वीं रिंग फाइट नेशनल प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ के 11 खिलाड़ी, दो कोच और टीम मैनेजर गुरुवार सुबह 11.30 बजे वेनगंगा एक्सप्रेस से रवाना हुए। छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन की ओर से टीम कर्नूल में खेल में अपना जौहर दिखाएगी।
टीम के साथ जा रहे छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन के महासचिव ओपी कटारिया ने बताया कि प्रदेश के अलग-अलग स्कूलों से चयनित 11 खिलाड़ी नेशनल खेलने के लिए जा रहे है। इनके साथ पुरुष कोच प्रवीण क्षीरसागर और महिला कोच मालती मिश्रा भी जा रही है।
बतादें कि 27 से 29 दिसंबर को आंध्रप्रदेश में होने वाले नेशनल गेम्स 22 राज्यों की टीम हिस्सा लेगी। छत्तीसगढ़ की टीम पहली बार इस स्पर्धा में भाग लेने जा रही है। टीम को मंगलवार को महाराष्ट्र मंडल में ट्रैक सूट और किट दिया गया।
मुख्यमंत्री ने सीएम कैम्प कार्यालय की उपलब्धियों को दर्शाती 'सेवा एवं समर्पण का 1 साल' पुस्तिका का किया विमोचन
महाराष्ट्र मंडल में सादगीपूर्ण मनाई गई अटल शताब्दी जयंती
तुम मुझे यूं ना भुला पाओगे... के साथ मो. रफी का संगीतमय स्मरण
महाराष्ट्र मंडल में ‘सौ बार जनम लेंगे’ की प्रस्तुति 24 को
रायपुर। भारतीय संगीत के अमर गायक स्व मोहम्मद रफी की शताब्दी जयंती पर राजधानी रायपुर की सुर संतृप्ति इवेंट एवं मैनेजमेंट लाइव बैंड म्यूजिक शो ‘सौ बार जनम लेंगे’ की प्रस्तुति मंगलवार, 24 दिसंबर को शाम 6 बजे से चौबे कालोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल रायपुर में करने जा रही है। इस कार्यक्रम में ग्रुप के कलाकार अपनी आवाजों से रफी साहब के गाए गीतों को बतौर श्रद्धांजलि पेश करेंगे।
सुर संतृप्ति म्यूजिकल क्लब की फाउंडर विश्वास और प्रीति केसकर ने बताया कि भारतीय संगीत के अमर गायक स्व मोहम्मद रफी की 100 वीं जयंती पर लाइव बैंड म्यूजिक शो का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में साउंड स्वरमाला की टीम देगी। वहीं स्पेशल लाइव बैंड म्यूजिक की प्रस्तुति डाल्फिन ग्रुप दुर्ग के संचालक यश यदु और उनकी टीम देगी।
विश्वास और प्रीति केसकर ने बताया कि कार्यक्रम के प्रायोजक सन् एडं सन् ज्वेलर्स है। वहीं सह प्रायोजक की भूमिका में शंकरा हुंडई, सरगम म्यूजिक, बैंक आफ इंडिया, एमआर भागवत मेमोरियल हास्पिटल, प्रिज्म सेल्स है।
फिजियोथैरेपी के लिए आए मासूम का महाराष्ट्र मंडल ने मनाया जन्मदिन
विद्या और निशा की कविता ‘किन्नर व्यथा’ और नाटक ‘शिखंडी’ का वाचन- मंचन 24 दिसंबर को
- महाराष्ट्र मंडल रायपुर और रंगभूमि टीम की प्रस्तुति
- वृंदावन हाल सिविल लाइन में शाम 7.30 बजे से होगा आयोजन
रायपुर। साहित्य और समाज का संबंध अत्यंत प्रगाढ़ होता है। समाज की हर धड़कन को साहित्य अपने भीतर समेटता है, क्योंकि साहित्य अपनी भूमि समाज से ही बनाता है। इसलिए रचनाकार अपने समय और समाज के सच को प्रभावी ढंग से अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के समक्ष प्रस्तुत करते हैं और उन्हीं रचनाओं को टीम रंगभूमि जीवंत रूप प्रदान करती है।
वर्तमान समय विमर्श का समय है। समाज की मुख्यधारा से कोसों दूर हाशिए पर पड़े विषयों की व्यथा- कथा को समाज के सामने लाने में टीम रंगभूमि अपनी प्रभावी भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में वर्ष 2024 की बारहवीं और वर्ष की अंतिम प्रस्तुति होगी - 'किन्नर व्यथा'। किन्नरों की सामाजिक समरसता के प्रयास में भरत वेद लिखित नाटक शिखंडी के वाचन मंचन के साथ विद्या राजपूत और निशा देशमुख की कविता की प्रस्तुति मंगलवार, 24 दिसंबर को वृंदावन हॉल, सिविल लाइंस, रायपुर में शाम 7.30 बजे महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि के साथी देंगे।
लेखक भरत वेद ने अपने नाटक शिखंडी में थर्ड जेन्डरों के जीवन संघर्षों को, उनकी मनः स्थिति को प्रभावशाली ढंग से उकेरा है तो वहीं विद्या राजपूत और निशा देशमुख ने अपनी कविता में थर्ड जेंडर की व्यथा को जीवंत किया है। महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि रायपुर द्वारा प्रस्तुत किन्नर व्यथा की परिकल्पना आचार्य रंजन मोड़क ने की है। मंच पर लगभग बीस कलाकारों की इस प्रस्तुति के निर्देशक लोकेश साहू ने किया है।
बतादें कि किन्नरों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक निर्णय के तहत 'थर्ड जेन्डर' का दर्जा अप्रैल 2014 में दिया है। थर्ड जेन्डरों की विषम सामाजिक स्थिति, अधिकार, जीवन संघर्ष और मानवीय गरिमा से जुड़े प्रश्नों के उत्तर धीरे-धीरे ही सही साहित्यिक, सांस्कृतिक विमर्शों से ही मिलेंगे और तभी समाज के अन्य लोगों की तरह उन्हें भी सम्मानपूर्वक मुख्य धारा में शामिल किया जा सकेगा। थर्ड जेन्डरों के मन में भी अब बदलाव की इच्छा प्रबल है। वे भी अपने मानवाधिकारों के प्रति संघर्षरत और सजग दिखाई देते हैं। कहते हैं बच्चा जब रोता है माँ तभी दूध पिलाती है ठीक उसी तरह थर्ड जेंडर भी चेतना, जागरूकता, शिक्षा के महत्त्व एवं मूल्यों को समझते हुए, उसे आत्मसात् कर अब अपने अधिकारों के लिए सजग हो रहे हैं। आवश्यकता है कदम मिलकर चलने, हमारे स्नेह,साथ और विश्वास की ।।
संत ज्ञानेश्वर स्कूल के वार्षिक उत्सव 'धरोहर: एक विरासत' में बच्चों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के वार्षिकोत्सव 'धरोहर: एक विरासत' में बच्चों ने शानदार प्रस्तति देकर सभी का मन मोह लिया। बच्चे छोटे हो या बड़े उन्हें डांस की प्रैक्टिस कराने में शिक्षकों का बड़ा योगदान होगा। बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए अलग-अलग शिक्षक अलग-अलग डांस ग्रुप के लिए कोरियोग्राफऱ बन गए थे। सभी शिक्षकों ने बच्चों को खूब अभ्यास कराया। उनकी मेहनत रंग लाई और बच्चों ने सभी प्रस्तुतियों ने दर्शकदीर्घा में बैठे सभी लोगों का मन मोह लिया।

संत ज्ञानेश्वर स्कूल के उपप्राचार्य राहुल वोडितेलवार ने बताया कि प्राचार्य मनीष गोवर्धन, स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर और सह प्रभारी नवीन देशमुख के मार्गदर्शन में बच्चों के साथ शिक्षकों ने भी वार्षिकोत्सव को लेकर खूब मेहनत की। कार्यक्रम के शुभारंभ में शिक्षक अक्षत कोसले और वंदना बिसेन के निर्देशन में बच्चों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन अराधना लाल, अपर्णा आठले, विनीता सुंदरानी ने किया। मुख्य अतिथि का परिचय सुनिधि रोकड़े ने दिया। आभार प्रदर्शन तृप्ति अग्निहोत्री ने किया।

प्री पाइमरी ने कराई चांद की सैर
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के क्रम का सिलसिला प्री प्राइमरी के बच्चों से शुरू हुआ। हार्दिका बोबडे और भारती सहगल के मार्गदर्शन में नर्सरी के बच्चों ने ‘आओ तुम्हें चांद पर ले जाए’ की शानदार प्रस्तुत देते हुए सभी को चांद की सैर कराई। हार्दिका बोबडे और शिखा गुप्ता के निर्देशन में पीपी 1 के बच्चों ने अपनी छोटी सी आशा को मंच पर व्यक्त किया। वहीं पीपी 2 के बच्चों ने ‘शा ला ला ला’ की शानदार प्रस्तुति दी। जिसमें कोरियोग्राफर की भूमिका अस्मिता कुसरे और सुरेखा नायक ने निभाई।

प्राइमरीः भक्ति और देशप्रेम साथ आए नजर
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के क्रम जैसे जैसे आगे बढ़ता गया, कार्यक्रम का रोमांच और बढ़ता गया। प्राइमरी के बच्चों ने यहां राधा कृष्ण लीला की प्रस्तुति देकर भक्ति का भाव जगाया। वहीं सैनिक की प्रस्तुति ने देश प्रेम का भाव जागृत किया। क्लास वन के बच्चों ने सेनोरिटा की प्रस्तुति श्वेता चौधरी और विनीता सुंदरानी के मार्गदर्शन में दी। वहीं क्लास 2 के बच्चों ने ‘स्कूल नहीं जाना’ की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। इस गाने का निर्देशन रेणुका शुक्ला, स्तुति राबिन्सन और अंजलि महाजन गुप्ता ने किया। क्लास 3 के बच्चों ने ‘नमो नमो शंकरा’ की प्रस्तुति प्रीति तिवारी और ज्योति साहू के निर्देशन में दी। क्लास 4 के बच्चों ने ‘भारत की बेटी’ प्रस्तुत किया। जिसका निर्देशन किरण सुतार और अंजलि महाजन गुप्ता ने किया। वहीं क्लास 4 के बच्चों ने ‘सैनिक’ मंचित किया। जिसका मार्गदर्शन किरण सुतार और अपर्णा आठले नेकिया। वहीं प्राइमरी की प्रस्तुति की अंतिम कड़ी में क्लास 5 के बच्चों ने राधा-कृष्ण लीला की प्रस्तुति किरण सुतार और अंजलि महाजन गुप्ता के निर्देशन में दी।

मीडिल के बच्चों ने मचाई धूम
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की कड़ी में मीडिल और हाई स्कूल के बच्चों ने खूब धमाल मचाया। क्लास 6 ने मल्हार डांस वंदना बिसेन और प्रतीक्षा महादेवकर के निर्देशन में प्रस्तुत किया। वहीं सरिता पांडेय और स्नेहा महाजन के निर्देशन में सातवीं के बच्चों ने छत्तीसगढ़ी नृत्य प्रस्तुत कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। वर्षा गिरिभट ,सुनिधि रोकड़े और गीतांजलि साहू के निर्देश में 8वीं के बच्चों ने देश भक्ति व चंद्रयान पर शानदार प्रस्तुति दी।

हायर सेकंडरी की नृत्य नाटिका में दिखा मराठी गौरव
जैसे-जैसे शाम ढलती गई, कार्यक्रम का मजा और बढ़ता चला गया। महाराष्ट्र मंडल का सभागृह उस वक्त पूरी तरह सांस्कृतिक विरासत और देश प्रेम में डूब गया जब बच्चों ने रानी अहिल्या बाई होल्कर की विजय गाथा को मंचित किया। रानी बाल्यावस्था से उनकी विरासत तक के सफर को बच्चों ने बखूबी मंचित किया। जिसकी प्रस्तुति चित्रा जावळेकर व अस्मिता कुसरे के निर्देशन में की गई। वहीं 9वीं के बच्चों ने श्रद्धा मते और दीपान्विता सेन के निर्देशन में दीप डांस, मेघा जैन और शेफाली ठाकुर के निर्देशन में 9वीं के ही बच्चों ने कृष्ण की चेतावनी पर अपनी प्रस्तुति दी। शिखा सूद और रीता शम्भरकर के निर्देशन में 10वीं के बच्चों ने शानदार भांगड़ा प्रस्तुत कर सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया। रचना तिवारी और नवीन चंद्राकर के निर्देशन में 11वीं के बच्चों ने कलयुग डांस और किरण सुतार , गीत भोजवानी और रोशन सिंह राजपूत के निर्देशन में 11वीं के ही बच्चों ने राजस्थानी डांस प्रस्तुत किया। वहीं 12 के बच्चों ने रेट्रो डांस की प्रस्तुति चित्रा जावळेकर और आराधना लाल के मार्गदर्शन में दी।
बच्चों ने उत्साह से की शिवाजी महाराज की महाआरती
वार्षिक उत्सव 'धरोहर: एक विरासत' में बेहतरीन प्रस्तुतियों के साथ बच्चों ने कराई चांद की सैर
- संत ज्ञानेश्वर स्कूल के वार्षिक उत्सव 'धरोहर: एक विरासत' का आयोजन
- 300 से अधिक बच्चों ने दी छत्तीसगढ़ी, हिंदी और धार्मिक प्रस्तुतियां
- जायकेदार आनंद मेले की रही धूम... बच्चों ने खूब उठाया आनंद

रायपुर। छोटे-छोटे कदमों के साथ महराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभा गृह के मंच पर चढ़े बच्चों ने जब ‘आओ तुम्हें चांद पे ले जाए’ गीत पर शानदार प्रस्तुति दी तो पूरा हाल तालियों के गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं प्री प्राइमरी के बच्चों ने ‘दिल है छोटा सा’ का शानदार प्रस्तुति दी। इससे पहले वार्षिकोत्सव 'धरोहर: एक विरासत' के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध समाजसेवी व उद्योगपति रोहित काले ने बच्चों को एक बेहतर संवेदनशील इंसान बनने की सीख दी।

पहली बार महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आयोजित वार्षिकोत्सव में मुख्य आतिथ्य की आसंदी से रोहित काले ने कहा कि इतनी अच्छी संस्था और उसके संचालन में इतने बढ़िया स्कूल में आपको पढ़ने का अवसर मिला है। इसका लाभ लेते हुए आप लोग मानवता से परिपूर्ण एक अच्छे इंसान बनिए। इसके लिए अनुशासन, ईमानदारी, सकारात्मक विचार, सौम्य व्यवहार अहम रोल अदा करते है। इससे आपको, आपके परिवार को, समाज को और देश को फायदा होगा। पैसा तो आते-जाते रहता है। इसके पीछे भागने की जरूरत नहीं है।

मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने अध्यक्षीय संबोधन में संत ज्ञानेश्वर स्कूल के साथ महाराष्ट्र मंडल की उपलब्धियों पर चर्चा की। विशेष अतिथि के रुप में मंच पर सचिव चेतन दंडवते, उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, शाला के पूर्व प्रभारी निरंजन पंडित, सुवोध टोले, महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले व रेणुका पुराणिक ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने स्वागत भाषण दिया।

गणपति वंदना से शुरू हुए रंगारंग धरोहर में एक तरफ प्री-प्राइमरी के नन्हें मुन्हें बच्चे छा गए। तो वहीं मीडिल और हायर सेकंडरी के बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से धमाल मचाया। सांस्कृतिक कार्यक्रम इसलिए भी रोचक और मजेदार रहा क्योंकि इसमें फिल्मी गानों के साथ छत्तीसगढ़ी, मराठी गानों का बेहतर संगम था। छत्तीसगढ़ के सभी तीज-त्योहार को एक ही गीत में पिरोकर बच्चों ने प्रस्तुत किया। वहीं रानी अहिल्या बाई होल्कर की वीर गाथा बच्चों ने मंचित किया। कक्षा 8वीं के बच्चों ने ‘नमो-नमो शंकराय...’ गीत पर योगा की प्रयोगात्मक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन तृप्ति अग्निहोत्री और सुनिधि रोकड़े ने किया। आयोजन में शाला प्रभारी परितोष डोनगांवकर और सह प्रभारी नवीन देशमुख का विशेष योगदान रहा।

जायकेदार आनंद मेले में बच्चों ने अभिभावकों के साथ झालमुड़ी, दाबेली, चाउमीन, म्च्यूरियन, कटलेट, भेल, नड्डा रोल जैसे अनेक आइटमों के स्टाल में जमकर लुफ्त उठाया। कार्यक्रम के अंत तक स्टालों में भीड़ लगी रही। स्टाल की तरह ही सेल्फी जोन में लगातार तस्वीर खींचाने के लिए होड़ लगी रही।

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महाराष्ट्र मंडल ने अंबेडकर अस्पताल के कैंसर भवन में बांटे कंबल

महाराष्ट्र मंडल में संत ज्ञानेश्वर स्कूल का वार्षिकोत्सव आज
रेलवे स्टेशन में दो वाटर कूलर लगाएगा महाराष्ट्र मंडल
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल नए साल में रायपुर रेलवे स्टेशन में निधि सिंघानिया की ओर से स्व. नारायण सिंघानिया की स्मृति में दो वाटर कूलर लगाएगा। अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने बताया कि रायपुर रेलवे स्टेशन में दो वाटर कूलर लगाने की प्रारंभिक प्रक्रिया के अंतर्गत संभागीय रेलवे प्रबंधक (डीआरएम) संजीव कुमार से मुलाकात कर उन्हें इस संदर्भ में आवेदन दिया जा चुका है। उनकी ओर से भी सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। वाटर कूलर लगाने की तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद रेलवे की ओर से महाराष्ट्र मंडल को सूचित किया जाना है और उसके तत्काल बाद दो वाटर कूलर लगा दिए जाएंगे। ज्यादा संभावना इस बात की जताई गई है कि दोनों वाटर कूलर नए प्लेटफार्म नंबर सात पर लगाने की अनुमति मिल जाएगी।
महाराष्ट्र मंडल ने अंबेडकर अस्पताल के कैंसर भवन में बांटे कंबल
0- मंडल की युवा समिति हर आयुवर्ग के जरूरतमंदों को गर्म कपड़े वितरित करेगी जल्दी ही
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल मंगलवार देर रात डाॅ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के कैंसर भवन में ठंड से ठिठुरते मरीजों और उनके परिजनों को कंबल ओढ़ाया। कंबल वितरण का यह पहला दौर है। जल्दी ही अगले चरण में महाराष्ट्र मंडल की ओर से जरूरतमंद लोगों को कंबल और गर्म कपड़े वितरित किए जाएंगे।

डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के पिछले हिस्से में कैंसर के इलाज का भवन है। यहां पर महाराष्ट्र मंडल ने गत वर्ष भी बड़े पैमाने पर कंबल वितरीत किया था। मंगलवार की देर रात अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिन चेतन गोविंद दंडवते, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर और सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी ने यहीं पर प्रत्येक वार्डों, गलियारों, सीढ़ियों पर सो रहे लोगों और मरीजों को कंबल बांटे। साथ ही कैंसर भवन परिसर में और भी जरूरतमंदों को लाइन लगवाकर कंबल दिए गए।
सचिव चेतन दंडवते ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल में कंबल वितरण का दूसरा दौर दो- तीन दिनों में चलाया जाएगा। इसमें फुटपाथ, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, कमर्शियल कांप्लेक्स जैसे सार्वजनिक स्थलों पर ठंड से जूझ रहे लोगों को गर्म कपड़े और कंबल दिए जाएंगे। युवा समिति के अध्यक्ष विनोद राखुंडे के मुताबिक कुछ ही दिनों में महाराष्ट्र मंडल की युवा सदस्यों की टीम हर आयु वर्ग के लोगों को गर्म कपड़ों का वितरण करेगी। इसके लिए मंडल की गाड़ी शहर की विभिन्न स्थलों का भ्रमण करेगी। गर्म कपड़े एकत्रितकरण का कार्य मंडल में तेजी से जारी है।
महाराष्ट्र मंडल के फिजियोथैरेपी सेंटर में हाट पैक, टेंस, आईएफटी और स्ट्रीम्यूलेशन जैसी मशीनों का लाभ ले रहे लोग
रायपुर। आज की भागमभाग जिंदगी में लोग कम उम्र में कमर दर्द, जोडों में दर्द, पीठ में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्या से ग्रसित हो रहे है। इन परेशानियों की सीधा संबंध हमारी जीवन शैली से होता है। ऐसी समस्या आने पर ज्यादातर लोग सामान्य पेन किलर लेकर तत्कालिक आराम की तलाश करते है। ऐसा बिल्कुल सही नहीं है। फिजियोथैरेपी उपचार की एक ऐसी पद्धति है, जिसमें आप बिना दवा के काफी हद तक आराम पा सकते है। महाराष्ट्र मंडल रायपुर ने स्वास्थ्य सेवा की ओर अपना कदम आगे बढ़ाते हुए बीते वर्ष जनवरी में भारतीय जीवन बीमा निगम के सहयोग के महराष्ट्र मंडल परिसर में फिजियोथैरेपी सेंटर शुरू किया। आप यहां आकर न्यूनतम फीस पर फिजियोथैरेपी का लाभ ले सकते है। यह फिजियोथैरेपी सेंटर रविवार को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चौबे कालोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल भवन ग्राउंड फ्लोर में संचालित हो रहा है।
महाराष्ट्र मंडल के फिजियोथैरेपी सेंटर में सेवाएं दे रही डा. संगीता और डा. अंकिता काळे ने बताया कि पीठ के निचले हिस्से में दर्द के कई कारण हो सकते हैं। इसमें तनावग्रस्त मांसपेशियों व नसों तक कई कारण हो सकते हैं। पीठ के निचले हिस्से में दर्द किसी गंभीर चोट के कारण भी हो सकता हैं, जैसे कोई बड़ा भार उठाना या मोड़ना। उम्र बढ़ने से अपक्षयी रीढ़ की हड्डी में असामान्यताएं भी होती हैं, जो 30 वर्ष या उससे भी पहले शुरू हो सकती हैं।
फिजियोथैरिपी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ट्रांसक्यूटेनियस इलेक्ट्रिकल न्यूरोमस्कुलर स्टिमुलेशन (टेंस) पीठ के दर्द से राहत देने की अच्छी तकनीक है। इस उपकरण की मदद से पीड़ित व्यक्ति बिना किसी दवा के पीठ दर्द को सफलतापूर्वक खत्म कर सकते हैं। तंत्रिका उत्तेजना के माध्यम से मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने में मदद ली जा सकती है, जो शरीर के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। यह दर्द या सूजन वाली मांसपेशियों में रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
मंडल के फिजियोथेरेपी सेंटर में हाट पैक, टेंस, आईएफटी, अल्ट्रासाउंड और स्ट्रीम्यूलेशन जैसे उपकरण उपलब्ध हैं। ये अलग-अलग परेशानियों और तकलीफों के लिए उपयोग किए जाते हैं जैसे हाट पैक मरीजों के लिए काफी लाभकारी होता है। इससे तंग मांसपेशियों को आराम मिलता है। मांसपेशियों में होने वाला ऐंठन और दर्द भी कम होता है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र मंडल का फिजियोथैरेपी सेंटर न्यूनतम फीस पर अधिकाधिक मरीजों को लाभान्वित करने के लिए संचालित किया जाता है।